
अपराजिता -123
अथर्व ने रेशम की मदद से अखंड को खींच कर बाहर निकाला और उसे अपनी गाडी कि पिछली सीट में डाल कर वो लोग शहर के अस्पताल की तरफ निकल गए!
रेशम ने बेहोश से पड़े अखंड को नहीं पहचाना.. उसे गाड़ी में डाल कर वो लोग शहर की तरफ निकल गए..
“रेशु इसे इस वक्त तुम्हारे अस्पताल ले जाना सही नहीं होगा, वहाँ पर तो बहुत ज्यादा सुविधा भी नहीं हैं, ऐसा करते हैं सीधे मेरे हॉस्पिटल ले चलते हैं !”
“लेकिन ये दो घंटे तक सर्वाइव कर पायेगा ?”
“हम्म ये भी सोचने वाली बात हैं.. अब ?”
“पहले मेरे हॉस्पिटल ले चलिए, वहाँ से डैकडैन का इंजेक्शन देकर ऑक्सीजन चढ़ा देते हैं.. अगर कहीं ज्यादा ब्लीड करता हुआ दिखे तो वहां स्टिच भी मार देंगे और उसके बाद फटाफट इसे आपके हॉस्पिटल ले चलते हैं। एटलीस्ट ऑक्सीजन सपोर्ट और डैकडैन के साथ यह दो घंटे का सफर तो तय कर पाएगा..।”
“हम्म सही कह रही हो !”
अथर्व ने गाड़ी रेशम के अस्पताल की तरफ बढ़ा दी। कुछ देर में ही वह लोग रेशम के अस्पताल में थे। अथर्व और रेशम ने मिलकर अखंड को अस्पताल में उतारा, और अंदर लेकर रेशम तुरंत अखंड की तीमारदारी में जुट गई।
अथर्व ने धीरे-धीरे उसके घाव साफ करने शुरू कर दिए। अखंड को बहुत सारी चोटें आई थी। जगह-जगह से खून बह रहा था। लेकिन भगवान का शुक्र था कि चेहरे के अलावा कहीं से भी इतनी ज्यादा ब्लीडिंग नहीं थी कि उसकी जान पर बन आती। फिर भी अंदरूनी चोटे जरूर लगी थी..
उसके चेहरे पर, माथे वाली जगह पर गहरी चोट थी। उसका माथा स्टेरिंग से टकराकर फट गया था, और सबसे ज्यादा खून वही से बह रहा था। अथर्व ने उसे साफ सुथरा करने की कोशिश की, लेकिन खून इस कदर माथे पर बह रहा था कि चेहरा बार-बार खून से रंग जा रहा था ।
अथर्व उसे लिटाकर उसके वाटल्स चेक करने में लगा हुआ था। उतनी देर में रेशम ने ऑक्सीजन मास्क अखंड के चेहरे पर पहनाया और उसके माथे की चोट को सिलने की तैयारी करने लगी..
“तुम स्टिच कर लोगी?”
रेशम ने हां में गर्दन हिला दी। अथर्व भी जानता था कि गांव में इस तरह के केसेस कम आते हैं। इसीलिए उसने रेशम से पूछ लिया था। हालांकि उसके लिए तो यह रोजमर्रा का काम था। लेकिन रेशम के लिए ऐसे केसेस देखना कभी-कभार ही हुआ करता था। लेकिन रेशम का आत्मविश्वास देख अथर्व एक किनारे हो गया। रेशम पूरे धैर्य और एकाग्रता के साथ अखंड के माथे पर बने घाव में टांके लगाने लगी। एक पल के लिए भी उस नाजुक नवेली सी लड़की का ना हाथ काम्पा और ना चेहरे पर कोई शिकन ही आयी !
यहां तक की उसके माथे पर पसीने की एक बूंद तक नहीं आई! पूरे आत्मविश्वास के साथ उसने अखंड के उधड़े हुए माथे को नौ टांके लगाकर सिल दिया..
इतनी देर में अथर्व ने अखंड की नस ढूंढ कर उसे नॉरमल सलाइन की बोतल भी चढ़ा दी थी..
जरूरी जीवन रक्षक इंजेक्शन देने के बाद ऑक्सीजन मास्क लगा कर कर वह दोनों उसे वापस अपनी गाड़ी में ले आए! यह तो अच्छा था कि अथर्व की गाड़ी बड़ी थी, और पिछली सीट को उन लोगों ने एक साथ मिलकर आराम से लेटने लायक तैयार कर लिया था।
अस्पताल में मौजूद कुशन के सहारे रेशम ने अथर्व की मदद से अखंड को पीछे वाली सीट में आराम से लेटा दिया..
अखंड को आराम से वहां लेटाने के बाद वह दोनों सामने चले आए, और अथर्व ने गाड़ी शहर की तरफ भगा दी। गाड़ी चलाते हुए उसने रेशम को अपने अस्पताल में फोन करके सूचना दे देने को कहा। अथर्व जैसा बोलता जा रहा था, रेशम वैसे-वैसे निर्देश उसके हॉस्पिटल स्टाफ को देती जा रही थी। जिससे अस्पताल का स्टाफ पहले ही अखंड को एडमिट करने के लिए तैयार रहे। इसके साथ ही अथर्व ने अपने हॉस्पिटल स्टाफ को यह भी बता दिया कि यह एक एक्सीडेंट केस है। एक्सीडेंट केस होने के कारण यह एक पुलिस केस था और इसलिए स्टाफ में से एक लड़के ने किस जगह पर एक्सीडेंट हुआ, यह रेशम से पूछ कर उस एरिया के पुलिस स्टेशन को ऑनलाइन ढूंढा और वहां के पुलिस अधिकारी को फोन घुमा दिया…।
फ़ोन अनिर्वान के थाने पर लगा..
अनिर्वान उस वक्त ऑफिस में मौजूद नहीं था, इसलिए वहाँ मौजूद थानेदार एक कॉन्स्टेबल के साथ अस्पताल निकल गया..
अनिर्वान उस वक्त कैफे में बैठा था, जिसके सामने गीता बैठी अपनी आपबीती सुना रही थी..
” सर आप समझ सकते हैं एक लड़की का बॉयज हॉस्टल में पकड़ा जाना कितनी शर्मनाक बात होती है। धीरेंद्र के एक चमचे ने मेरी वहां अखंड के कमरे में तस्वीर भी खींच ली थी, जिसमें मैं और अखंड आसपास खड़े नजर आ रहे थे।
और इस तस्वीर की धमकी उस वक्त धीरेंद्र ने मुझे दी थी। मैं गोलू की मदद से पिछले दरवाजे से निकल कर अपने घर चली आई। लेकिन उस रात में सो नहीं पाई। मुझे बार-बार यही लगता रहा कि कहीं धीरेंद्र मेरे पापा से आकर यह सारी बातें कह ना दे।
पापा इस बात के लिए मुझे कभी माफ नहीं करते, लेकिन धीरेंद्र बहुत चालबाज था। उसे यह मालूम था कि कब कहां कैसे अपना उल्लू सीधा करना है। उसने उस वक्त मेरे पापा से कुछ भी नहीं कहा..।
मैं अखंड से अपने दिल की बात कहने गई थी, जो अधूरी रह गई थी। और इस बात को मुश्किल से दो-चार दिन बीते कि धीरेंद्र के कारनामे शुरू हो गए..
रेशम और अखंड की फोटो मॉर्फिंग वाली बात के बाद की बात थी, अचानक मेडिकल की एक लड़की का रोड एक्सीडेंट में निधन हो गया..
सारे लोग विस्मित थे की ये क्या हुआ लेकिन पता नहीं क्यों मुझे ऐसा लगा इसके पीछे भी धीरेन्द्र ही हैं….”
“क्यों ? तुम्हे ऐसा क्यों लगा ?” अनिर्वान ने पूछा
“सर वो लड़की रेशम की दोस्त थी.. अचानक उसी का एक्सीडेंट कैसे हुआ? मुझे लगा उसे ज़रूर कोई बात पता चल गयी थी…
इस केस पर पुलिस इन्वेस्टिगेशन शुरू हो गयी, लेकिन कुछ थोड़ी बहुत पूछताछ के बाद शायद ये केस डब्बे में डाल दिया गया !
इसके बाद धीरेन्द्र ने वो कर दिया जिसकी प्लानिंग वो जाने कब से कर रहा था..
उसने बहाने से रेशम को मेडिकल स्टोर रूम में बुलवाया और उसके दिमाग में अखंड के नाम से ढेर सारा डर भर दिया!
धीरेंद्र जैसा चाहता था, वैसा होता चला गया। धीरेंद्र के किसी दोस्त के कहने पर अखंड जब तक भाग कर स्टोर रूम में पहुंचा, तब तक बेहोश पड़ी रेशम को हल्का सा होश आने लगा था। और उसने अपने साथ हुई सारी ज्यादती का कसूरवार अखंड को ठहरा दिया।
पूरी दुनिया के सामने अखंड बेकसूर होते हुए भी गुनहगार हो गया। मैं भी वहां मौजूद थी, मैं सब कुछ जानती थी, और मैंने उस वक्त तय कर लिया कि मैं पुलिस थाने जाकर सब सच कह दूंगी।
जिस वक्त अखंड को पुलिस पकड़ कर लेकर गई, उस वक्त रेशम को कुछ लोग अस्पताल ले गए। मैं समझ नहीं पा रही थी कि पहले रेशम के पास जाऊं या अखंड के पास। लेकिन फिर मुझे लगा मुझे रेशम को जाकर सब कुछ सच बता देना चाहिए। अगर मैं उसे बता दूंगी तो वह खुद जाकर पुलिस के सामने सारी बातें क्लियर कर देगी और उसके कहने पर अखंड भी छूट जाएगा।
लेकिन मैंने जो सोचा था उस पर भारी धीरेंद्र की सोच थी।
मैं अस्पताल की तरफ बढ़ ही रही थी कि धीरेंद्र मेरे सामने चला आया..।
” मेरे सामने से हटो धीरेंद्र”
“क्यों? क्यों हटे ?”
“तुम नहीं भी हटोगे तो हमें फर्क नहीं पड़ता, हमे जो करना हैं वो हम कर के रहेंगे..।”
“ऐसे कैसे जो करना हैं वो कर के रहोगी.. और चलो मान लिया राजकुमारी हो, अपनी मर्ज़ी का कर सकती हो, लेकिन उसके पहले ये तो देख लो.. !”
और धीरेन्द्र ने मोबाइल में अखंड और मेरी तस्वीर मेरे सामने खोल कर दिखा दी..
मैं कलप कर रह गयी..
“धीरेन्द्र, क्या करोगे इस तस्वीर का ?”
“कुछ ज्यादा नहीं, बस इस तस्वीर को तुम्हारे पूजनीय पिता जी को दिखायेंगे..
उन्हेँ भी पता चले उनके संस्कार बॉयज हॉस्टल में क्या गुल खिला रहे हैं !”
उस धूर्त के चेहरे पर मुस्कान चली आयी..
“राजकुमारी जी आप को ये याद दिलाने की ज़रूरत तो नहीं हैं ना कि मंत्री जी का अभी चार महीने पहले ही बायपास सर्जरी हुआ हैं। और डॉक्टर ने उन्हेँ किसी भी तरह का क्लेश संताप लेने से मना किया हैं…।
अब अगर वो अपनी बेटी का ऐसा तस्वीर देखेंगे तो उनके मन पर कैसा असर होगा, ये तो जानती ही हैं आप..।
उनकी स्वच्छ सुंदर छवि तो मटियामेट होगी ही, उनके स्वास्थ्य का भी सत्यानाश होगा और अगर नेता जी को कुछ हो जाता है,भगवान ना करे अगर वो भगवान को प्यारे हो जाते हैं, तो इसकी ज़िम्मेदार पूरी तौर पर आप होंगी.. !”
मैं स्तब्ध खड़ी थी… मेरी समझ से बाहर था क्या करूँ ?
“तुमने ऐसा क्यों किया धीरेन्द्र.. और अगर तुम्हे अखंड को बदनाम ही करना था तो इस लड़की का जीवन क्यों ख़राब किया?
वो तो तुम हमारी तस्वीर को भी कॉलेज में वायरल कर के अखंड को बदनाम कर सकते थे.. !”
“ये तस्वीर एक्सक्लूसिवली सिर्फ आपके पिता जी के लिए खींची थी गीता जी, और हम आपके ऊपर हाथ रख के कसम खाते हैं, कि इस तस्वीर को हम कहीं बाहर दिखा कर तुम्हे बदनाम नहीं करना चाहता..।
अरे धीरेन्द्र प्रजापति इतना भी बेकार आदमी नहीं हैं, जितना आपने सोच लिया.. !”
मैं उसके सामने अशक्त हो गयी थी सर.. ऐसा लग रहा था किसी ने मेरे हाथ पैर बांध कर मुझे तालाब में फेंक दिया हैं..
इतनी घुटन सी महसूस होने लगी थी कि लगा अगर ये आदमी इसी वक्त सामने से नहीं हटा तो जाने मैं उसका क्या कर दूंगी..
मैं वापस लौट गयी..
अस्पताल में रेशम से मिलने का विचार मैंने त्याग दिया…
वहाँ से थाने जाने की हिम्मत भी चूक गयी..
मैं वहाँ जाकर भी पुलिस वालो से क्या कहती..
मैं सच्चाई जानती थी लेकिन मेरे पास कोई सबूत नहीं था, और फ़िलहाल उस वक्त धीरेन्द्र की धमकी से मेरे दिमाग ने काम करना बंद कर दिया था..
मैं चुपचाप वापस लौट गयी….
मैं घर पहुंची तो देखा दादी की तबियत बिगड़ी हुई थी.. पापा भी घर पर ही थे, दादी को अस्पताल ले जाने की तैयारी हो रही थी कि दादी हम सब को छोड़ कर चली गयी..
ऐसे अचानक वो चली जाएँगी ये हम सब ने नहीं सोचा था..
माँ के बाद दादी ही थी जिनसे मैं जुडी थी…. उनका जाना मुझे तोड़ गया..
और फिर तेरह दिन तक रोज़ लोगो की आवाजाही और नियम कायदे निपटाने में समय कब निकल गया, मालूम ही नहीं चला और इसी बीच अखंड का केस कोर्ट में लग गया।
इन तेरह दिनों मे मुझे उसकी या रेशम की खोजखबर लेने का वक्त ही नहीं मिला..।
और सब निपटने के पन्द्रह दिन बाद जब मैं कॉलेज पहुंची सब कुछ बदल चुका था..।
हर तरफ अखंड के खिलाफ धीरेन्द्र ने माहौल बना दिया था, हर एक विद्यार्थी अखंड के नाम से भी चिढ चुका था..
मैं किस किस को जाकर अखंड की सच्चाई बताती, मुझे दुःख तो बहुत था, लेकिन बातें मेरे हाथ से निकल चुकी थी।
अगर मैं अपनी किसी दोस्त से भी यह कहती कि अखंड बेगुनाह है, तो पूरी बात सुनने के पहले ही साथ बैठा इंसान उठ कर चला जाता था।
पर मैंने कोशिश जारी रखी….
मैंने लल्लन और गोलू से बात करने की कोशिश की लेकिन उन दोनों का कोई अता पता नहीं मिला.. हालाँकि कोर्ट केस के दैरान लल्लन नजर आ गया लेकिन गोलू ना जाने कहाँ चला गया था.. ?
मैंने लल्लन से मिल कर पूछ ताछ की, तब पता चला कि जिस दिन अखंड को थाने ले जाया गया, उसी रात से गोलू का कोई पता ठिकाना नहीं हैं…!
लल्लन ने शंका जताई कि शायद धीरेन्द्र ने गोलू को मरवा दिया हैं..!
ये सुन कर मुझ पर वाकई बिजली टूट कर गिरी!
धीरेन्द्र की एक पर एक शैतानी मेरे सामने खुल रही थी, लेकिन अभी उसका सबसे बड़ा कांड बाकी था..
मैं अखंड को बचाने के प्रयास कर रही थी, और धीरेन्द्र की नज़रों में मेरे प्रयास आने लगे थे, और तब उसने अपना तुरुप का इक्का फेंक दिया..
दादी के जाने के बाद घर में अलग सा सन्नाटा पसर गया था.. उसी वक्त धीरेन्द्र ने जाने पापा को बातों के जाल में कैसे फंसाया कि वो उसके साथ मेरी शादी की बात मुझसे कहने लगे..
“लेकिन पापा अभी दादी को गुज़ारे साल नहीं बीता, ऐसे कैसे शादी कर सकते हैं हम ?”
“पंडित जी ने कहा हैं अगर साल पुरने के पहले तुम्हारी शादी हो गयी तो, उस कन्यादान का सारा पुण्य माताजी को जायेगा.. ! और जब धीरेन्द्र भी सब जानते हुए तैयार हैं, तो तुम्हारे सवाल करने का प्रश्न ही नहीं उठता !”
“मतलब ? क्या जानता हैं धीरेन्द्र.. पापा सच कहिये हमसे.. धीरेन्द्र ने आपसे क्या कहा हैं..?
उस से बड़ा झूठा मक्कार आदमी दूसरा नहीं हैं.. आप प्लीज उस पर विश्वास ना करे.. !”
“तुम अपना मुहं बंद ही रखो तो अच्छा होगा… हम तो ये सब जानने के बाद तुम्हारा मुहं तक देखना नहीं चाह्ते थे, वो तो भला हो धीरेन्द्र का, जिसने अपने जीवन से समझौता कर के तुम्हे अपनाने की रज़ामंदी दे दी! वरना तुमने जो हरकत की हैं, उसके बाद तुम अपना चेहरा दिखाने लायक कहाँ बची हो ?”
मुझे समझ में नहीं आ रहा था पापा ऐसा क्यों कह रहे हैं.. अब दादी भी नहीं थी, जिनकी मदद से पापा से बात निकलवा सकूँ.. और फिर पापा की तबियत का सोच कर मैंने उनकी बात सुन ली..
लेकिन मैं किसी भी हाल में धीरेन्द्र से शादी नहीं करना चाहती थी..
उस शाम मेरे फ़ोन पर एक विडिओ आयी.. किसी फिल्म का विडिओ था, जिसमे नायक को पुलिस गाड़ी में बैठा कर कोर्ट रूम लेकर जाया जा रहा था, और रस्ते में गाडी रुकी, सारे पुलिस वाले नीचे उतर कर चाय पीने गए और गाड़ी में ब्लास्ट हो गया..
इसके बाद एक दूसरी क्लिप,किसी दूसरी मूवी की थी, जिसमे नायक को हथकड़ियां डाले कोर्ट रूम लेकर जाया जा रहा था, तभी दो अजनबी हेलमेट लगाए हुए बाइक पर आये और नायक पर अंधाधुंध गोलियां चला कर भाग गए..
उसके बाद की क्लिप में अखंड लुटा पिटा सा नजर आ रहा था, साफ़ दिख रहा था की धीरेन्द्र के इशारे पर उसे कितना टॉर्चर किया जा रहा था..
मैंने वो विडिओ देखा और तभी धीरेन्द्र का फ़ोन आ गया..
“देख लिया राजकुमारी जी ने विडिओ .. तो अब बताइये कैसी मौत चाहती हैं आप अपने प्रेमी की ?”..
“धीरेन्द्र तुम्हारी हर शर्त मानने को तैयार हैं हम, बस अखंड को छुड़वा दो.. उसे मारना मत !”
“गोलू को ढूंढ़ रही थी ना, उसे मरवा कर गंगा जी में फिंकवा चुके हैं हम… और अब अगला नंबर अखंड बाबू का हैं !”
“नहीं धीरेन्द्र, तुम जो कहोगे हम सब करने को तैयार हैं बस अखंड की जान बख्श दो.. प्लीज़ तुम्हारे हाथ जोड़ते हैं !”
और थक हार कर हमने धीरेन्द्र से शादी के लिए हाँ बोल दी..
धीरेन्द्र ने हॉस्टल वाली तस्वीर पापा को दिखाकर कोई मनगढ़ंत कहानी बना कर पहले ही सुना दी थी..
जिसके बाद वो मुझे सुनने को तैयार नहीं थे, और उसी बात का फायदा उठा कर धीरेन्द्र ने तुरंत शादी का प्रस्ताव रख दिया..।
वो शातिर इंसान जानता था, अगर मुझे उसने इन सब पचड़ो में नहीं उलझाया तो मैं वापस अखंड के केस की तरफ पलट जाउंगी..
वो जानता था कि मैं कभी भी रेशम और अखंड से मिलने जा सकती हूँ, और बस इसलिये उसने ये चाल चली..
पापा ने भी भावुक होकर अपनी तबीय का हवाला देकर मुझे शादी कर लेने के लिए मना ही लिया..
एक बहुत बड़े और दिखावटी आयोजन में मैं धीरेन्द्र के बंधन से बांध दी गयी..
और फिर मैं ढेर सारे दहेज़ और अगले चुनाव में धीरेन्द्र की टिकट का दहेज़ अपनी झोली में समेट कर ससुराल चली आयी…
धीरेन्द्र भी घर से समृद्ध ही था..।
उसके घर में कोई कमी ना थी, लेकिन एक लड़की को अपनी शादीशुदा ज़िन्दगी में सबसे महत्वपूर्ण और पसंदीदा जो चीज़ होती हैं अपना पति, वहीँ मनचाहा और पसंदीदा नहीं था..।
मैंने पहले ही सोचा था कि उससे तलाक ले लुंगी.. लेकिन मैंने जब जब जो सोचा वो किस्मत के साथ ना देने के कारण कभी पूरा नहीं हो पाया…।
ज़िन्दगी तो चल ही पड़ती हैं, मेरी भी चल पड़ी, लेकिन लाख कोशिशों के बावजूद वो लीचड़ आदमी कभी मेरे मन में जगह नहीं बना पाया..
मैंने तो सोच लिया था कि शादी वाले दिन फेरों के पहले ज़हर पी लुंगी लेकिन उसी समय मोबाइल पर एक विडिओ आया, जिसमे अखंड के जेल के कमरे में उसे मार डालने का पूरा इंतज़ाम किया गया था.. मैं वो देख कर घबरा गयी, लेकिन उसी के नीचे धीरेन्द्र ने लिख रखा था….
“अगर चाहती हो तुम्हारा अखंड सिंह परिहार ज़िंदा रहे तो जिस ज़हर की बोतल को मुहं से लगाने जा रही हो, उसे फेंक दो और ज़िंदगी भर ज़हर पीने के लिए हमसे शादी कर लो.. ।
सोच लेना, हमारा एक इशारा तुम्हारे अखंड को आसमान की सैर करवा सकता हैं.. चाहो तो एक और ट्रेलर भेज देते हैं।
मैं हर तरफ से हताश सी उसके कहे अनुसार चल पड़ी..
“तुमने ये नहीं बताया कि तुम्हारे उस सवाल पर कि उसने रेशम का जीवन क्यों खराब किया, उसकी जगह तो वो तुम्हारी फोटो भी उपयोग में ला सकता था, का क्या जवाब दिया.. ?”
नेहा ने पूछ लिया…
“इस बात का जवाब उस घटिया इंसान ने शादी के तुरंत बाद ही दे दिया,
उसका कहना था..
“उस दिन तुमने एक सवाल किया था गीता, आज उसका भी जवाब दे देते हैं..
तुमने पूछा था तुम्हारे साथ वाला फोटो क्यों वायरल नहीं किया, अब सुनो !! अगर तुम्हारे साथ का फोटो वायरल होता तब लोगों में अखंड का इमेज ख़राब नहीं होता..। लोगो को बस ये लगता कि अखंड और तुम्हारा अफेयर है, और वो लोग इस बात पर वाहवाही करते..
हो सकता है, भीड़ से ये बात तुम्हारे पिता के कान में भी पड़ जाती और तब कुछ शुभचिंतको के समझाने पर तुम्हारे पिता तुम्हारी और अखंड की शादी करवा देते। और अगर ऐसा हो जाता तो हमारी जगह वो मंत्री जी का दामाद बन बैठता और बैठे बिठाये मलाई खा लेता..।
जबकि पिछले कई साल से मंत्री जी का दामाद बनने का सपना हम देख रहे हैं, तो बताओ ऐसे में लाभ का ये पद हम कैसे उससे बाँट लेते..?
रेशम के साथ वो वाकई बदनाम हुआ और ऐसा बदनाम हुआ की अब उस पर कोई थूकना भी नहीं चाहता..”
सर धीरेन्द्र आपकी हमारी सोच से कहीं ज्यादा मक्कार हैं.. हम जहां तक सोच कर रुक जाते हैं वहाँ से वो सोचना शुरू करता हैं..
लेकिन एक बात हुई, हमारी शादी के बाद उसने अपने हाथ पीछे खींच लिए..
उसके बाद उसने अखंड को मारने का विचार भी त्याग दिया.. क्यूंकि अब वो पूरी तरह से अपने राजनैतिक कैरियर को बनाने में लग गया….
और अखंड के कोर्ट केस में मुझे पता चला कि कुछ समय बाद सबूतों के अभाव में अखंड को बरी कर दिया गया..
मुझे इसी बात से राहत हो गयी कि अखंड छूट गया हैं, और फिर मैंने सोचा….
क्रमशः

अखंड का इलाज़ शुरू हो गया ये बहुत अच्छा किया रेशम और अथर्व ने जो पहले अखंड का प्राथमिक चिकित्सा उपचार शुरू कर दिया फिर बड़े हॉस्पिटल लेकर गए,।
ऐसा लग रहा बस अब कड़ियाँ मिलने ही वाली है, अतीत के पन्नो के खुलते साथ दोनों के जीवन में उथल पुथल मच जाएगी,। धीरेन्द्र को भी अपने कर्मो की सज़ा तो मिलनी ही चाहिए, कितने लोगों की ज़िन्दगी से खिलवाड़ कर गया सिर्फ इसलिए कि अखंड को निचा दिखाना सबके सामने और राजनीति में अपनी जगह बनाना 🤦🏻♀️, घटिया इंसान की घटिया सोच।
राजनीति का कटु सच उजागर करता आज का भाग बेहद लाजबाब था 👌🏻👌🏻🙏🏻।
बह
बहुत गहरी चाल चली धीरेन ने गीता को चारा बना कर और राजनीति में अपना भविष्य सुनिश्चित कर लिया। अखंड को भी कॉलेज में बूरा बना दिया हर तरफ से उसे बदनाम कर दिया।
काफी दिन सुकून की जिंदगी और नाम सम्मान कमा लिया अब उसके मुंहकी खाने की बारी है जल्द ही अपने इंस्पेक्टर अनिर्वान जेल की सैर करवाएंगे धीरेन्द्र प्रजापति को।
शानदार भाग 👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻
🙏🙏🙏🙏🙏
राजनीति की कड़वी और भयावह सच्चाई 🙏🙏🙏
बेचारी गीता, बलि का बकरा बन गई😞😞 धीरेंद्र ने अखंड को अपने रास्ते से हटाने के लिए बहुत दिमाग लगाया।। किसी का सच में कत्ल कर दिया तो किसी के अरमानों का खून कर दिया।।धीरेंद्र को तो ऐसी सजा मिलने चाहिए की उसकी आने वाली साथ पुश्तें भी सोचें।
अखंड का समय रहते इलाज शुरू हो गया रेशम और अथर्व की वजह से।।।एक केस और मिल गया अनिर्वान जी को।
अब तेरा क्या होगा अनंत🤔🤔
OSM 👌👌👌👌👌👌👌👌❤️❣️❤️❣️❤️❣️❤️
ये लीचड़ धीरू को कितनी भी गाली दी तो भी काम होंगी 😤😤
और अखंड का सामना रेशम से करवा कर भी अभी तक वो अखंड को पहचान नहीं पाई और उसका इलाज भी किया , अथर्व तो देखता ही रहा की छुईमुई सी दिखने वाली उसकी नवेली दुल्हन टेक लेते समय बिलकुल भी नहीं गभरायी , जब की इन सब की उसको प्रेक्टिस भी नही गांव में , फिर भी निडर बनकर अथर्व का साथ दिया ऐसी कॉम्प्लिकेशन में।
आगे के इंतज़ार में..
Very nice part
Interesting eagerly waiting for next part
Kitna ghinauna insaan hai ye Dhirendra. Very nice part 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻
गीता ने सच मैं बहुत सहन किया धीरेंद्र की वजह से,nice part