बेसब्रियां-23

बेसब्रियां दिल की… – 23


दिल ही दिल में ललित कुमार के ऊपर कुढ़ती हुई सिम्मी रसोई में उसके लिए पानी लेने चली गई… पानी के साथ-साथ उसने चाय भी चढ़ा दी थी..
वह रसोई में अदरक कूट रही थी कि निम्मी रसोई में चली आई और सिम्मी के पास जाकर खड़ी हो गई..

” तुझे रीत के बारे में पहले से पता था?”

” क्या?”

” यही की रीत ने ललित कुमार से शादी की है?

” क्या…?  यह तू क्या कह रही है निम्मी ?”

सिम्मी के आश्चर्य का ठिकाना नहीं था उसे अब भी इस बात पर विश्वास नहीं हो रहा था की रीत जैसी लड़की ललित कुमार जैसे लालची और स्वार्थी आदमी से शादी कर सकती है..

” हां सच कह रही हूं मैं !
   बाहर जाकर देख ले, रीत अपनी जिस शादी के बारे में बता रही थी,वो अपने जिस पति के साथ यहां आई है.. वह ललित कुमार ही है !
    और उसने यहां मुंबई में भी अपना काम जमाना शुरू कर दिया है.. !
वरसोवा में फ्लैट किराए से लेकर रह रहा है | रीत तो शुरु से ही धरा मासी को जानती थी, शादी के बाद जब वह मुंबई आई उसके बाद उसने मम्मी को फोन करके धरा मासी का एड्रेस लिया और हम लोगों से मिलने चली आई है.. !”

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” लेकिन इसने इतनी हड़बड़ी में शादी की क्यों ?
  इसके और ललित कुमार के बीच कुछ चक्कर था यह तो हमें पता भी नहीं चला.. !”

” मुझे लगता है प्रीत की मम्मी भी हमारी मम्मी जी के जैसे ललित कुमार की प्रॉपर्टी पर रीझ गई |
लेकिन उन्हें यह नजर नहीं आया कि रोजमर्रा की जिंदगी में दाल रोटी खाने के लिए कोई प्रॉपर्टी बेच बेचकर नहीं खाता, उसके लिए तो नौकरी करनी पड़ती है ……और ललित कुमार वही करने के लिए मुंबई आया हुआ है.. !”

आज बहुत दिन बाद निम्मी को साधारण तरीके से बातचीत करते देखकर सिमरन के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान चली आई और वह धीरे से निम्मी के गले से लग गई.. -“आज तू बहुत दिन बाद नॉर्मल तरीके से बात कर रही है निम्मी ! तुझे ऐसे देख कर मुझे बहुत अच्छा लग रहा है ! बस यही कहना चाहती हूं कि उस रईसज़ादे को  भूल जा!”

” मैं भी तो उसे भूल जाना चाहती हूं सिम्मी, लेकिन भूल ही तो नहीं पा रही हूं! 
    और दूसरी बात अगर वो मतलबी घमंडी ज़िद्दी सनकी और बिगड़ैल होता तो मेरे लिए उसे भूल जाना बहुत आसान होता..!
   लेकिन वह वैसा था ही नहीं ! बस यहीं एक बात  समझ में नहीं आई कि हम दोनों के बीच कब कौन सी बात बिगड़ गई ?
   वैसे सोच कर देखूं तो, उसने मुझसे कभी कोई वादा भी तो नहीं किया था ! कोई इकरार इनकार जैसी बात ही नहीं थी हमारे बीच ! अगर उसने मुझसे सच में प्यार किया होता तो, शायद इजहार भी कर देता…
   लेकिन उसने कभी कुछ कहा ही नहीं ! कोई वादा भी तो नहीं किया ! फिर मैं किस बात का इंतजार करती बैठी रहूँ  ?”

” जो भी था निम्मी, लेकिन अगर अब तू उसे भूल कर अपनी जिंदगी में आगे बढ़ रही है तो मैं बहुत खुश हूं तेरे लिए…
  और याद रखना कि तेरी यह बहन हर वक्त तेरे साथ खड़ी है!”

” क्या हुआ लड़कियों.. ?  तुम दोनों यहां खड़े खड़े क्या गप्पे मार रही हो ? सिम्मी जाओ बाहर रीत और उसके पति तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं ! निम्मी चल हम नाश्ता लगाते हैं और बाहर लेकर चलते हैं.. !”

धरा ने सिम्मी को बाहर भेज दिया और खुद नाश्ता और चाय की तैयारी देखने लगी…

रीत की खुशी उसके हर ओर छोर से बह रही थी..
वह बहुत खुश नजर आ रही थी ! सिम्मी ने जाने के बाद उसे एक बार फिर बधाई दी और ललित कुमार की तरफ भी देख कर हाथ जोड़ दिए…-” आप दोनों को बहुत-बहुत बधाई, लेकिन इतनी हड़बड़ी में शादी करने की क्या जरूरत थी ?
  ना कार्ड छपवाये,  ना हमें बुलाया, बस यूं ही शादी कर ली.. !”

” अब क्या बताएं मामला ही कुछ ऐसा हो गया था कि हमें तुरंत शादी करनी पड़ी ! वैसे हमने कोर्ट में शादी की है !”

” आइए ललित जी आपको अपना टेरेस गार्डन घुमा कर लाता हूं.. !”

धरा के पति महेश जी ने ललित को अपने साथ लिया और ऊपर टेरेस गार्डन घुमाने ले गए ! उन लोगों के वहां से जाते ही बैठक में सिर्फ सिम्मी निम्मी और रीत बैठी रह गई..
  उन सब को अकेला छोड़ कर धरा भी अपना कुछ काम निपटाने अपने कमरे में चली गई और तब सिम्मी और रीत को आपस में बात करने का मौका मिल गया..

सिम्मी रीत के एकदम करीब चली आई उसका हाथ पकड़कर मुस्कुराते हुए सिम्मी ने उससे सवाल कर लिया..
” अब अपनी प्रेम कहानी सच सच बता.. ?”

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” क्या बताऊं सिम्मी ? मेरे तो शुरू से ही बहुत ऊंचे ऊंचे ख्वाब कभी भी नहीं रहे |  बचपन से ही मम्मी को एक ही बात के लिए परेशान होते देखती थी और वह थी मेरी शादी !
  उन्हें लगता था पता नहीं मेरी शादी ठीक-ठाक होगी या नहीं ?  तू जानती तो है हमारे में कितना ज्यादा लेनदेन चलता है ! बस मम्मी जी को इसी बात की चिंता रहती थी.. |
पहली बार मम्मी तुम्हारे घर पर ही तो ललित जी से मिली थी | बस तभी से मम्मी को यह बहुत भा गए थे | इस बार जब यह आए थे, तब भी अक्सर मेरे घर के चक्कर लगाया करते थे | मम्मी से भी मिलने आ जाया करते थे | शाम की चाय तो अक्सर हमारे घर पर ही पिया करते थे |
   वो जो हफ्ते भर तुम्हारे यहाँ रुके उस समय घर आकर उन्होंने अपनी बातों और हाव-भाव से मम्मी को ऐसे मोहपाश में बांधा की मम्मी इनसे शादी के लिए बिल्कुल तैयार हो गई | मुझे एक पल को लगा कि उम्र में मुझसे काफी बड़े हैं, लेकिन मुझे यह लगा कि एक आसान और सरल जिंदगी के लिए जिन चीजों की जरूरत है वह चीजें मुझे ललित कुमार से शादी करने के बाद बड़ी आसानी से मिल जाएंगी !
    और फिर यह भी तो है सिम्मी कि हर एक लड़की को शाहरुख खान तो नहीं मिलता ना, अब तू सोच तेरा नाम सिमरन है तो क्या तेरे लिए कहीं से राज चला आएगा ?नहीं ना?  ख्वाब देखना अलग होता है लेकिन हकीकत उससे काफी अलग होती है…. “

” लेकिन रीत जिस आदमी की बातों पर भरोसा ना हो उसके साथ पूरी जिंदगी गुजार लेना क्या आसान होता है?”

” सिम्मी तेरी बात कहूं तो तुझे इस दुनिया में किसी लड़के पर भरोसा नहीं है !  लेकिन ललित जी वैसे नहीं है | मेरी जरूरतों के लायक उनके पास सब कुछ है |और मैं उन पर भरोसा भी करती हूं |और सच कहूं तो मुझसे वह बहुत प्यार भी करते हैं.. ! एक लड़की को इससे ज्यादा अपनी जिंदगी में क्या चाहिए ? अगर उसका पति उससे बेइंतेहा मोहब्बत करता है, और उसके लिए लॉयल है.. तो फिर उसकी सारी कमियां ढक जाती है, समझी..? जरूरी नहीं कि हमें कोई टॉल डार्क हैंडसम बिलेनियर मिल जाए ! इसलिए मैंने इन सब पचड़ों में पङे बिना ललित कुमार के लिए हां बोल दिया और आज मैं बहुत खुश हूं!”

” यह तो बहुत अच्छी बात है रीत !  सबसे जरूरी तो यही होता है कि शादी के बंधन में बंधने वाले दोनों एक दूसरे से खुश और संतुष्ट रहें ! एक दूसरे के प्रति वफादार रहें ! बाकी दुनिया से क्या लेना देना ? तुझे ललित के साथ खुश देखकर मैं भी बहुत खुश हूं! “

” मेरे लिए खुश है तो फिर तुझे मेरे फ्लैट पर हमारे साथ हमारी खुशी बांटने के लिए आना पड़ेगा!”

” आऊंगी यार.. ! क्यों नहीं आऊंगी, जरूर आऊंगी !”

चाय नाश्ते के साथ ही वह शाम ढल गई..
कुछ देर उन सब के साथ रहने के बाद रीत अपने नए नवेले पति के साथ उसके फ्लैट पर वापस लौट गई ! लेकिन जाते-जाते अगले दिन के लिए सिम्मी और निम्मी को खाने पर बुला लिया….

अगली सुबह निम्मी की शूटिंग थी, वह अपने किचन क्वीन कॉन्टेस्ट के लिए शूट करने फिल्मालय स्टूडियो चली गई… लेकिन वहां जाने के साथ ही उसे पता चला कि उनकी आगे की शूटिंग शिमला में होनी है.. !

निम्मी को मालूम था कि श्लोक और उसका परिवार शिमला में रहते हैं, इसलिए उसे वहां जाने का उतना मन नहीं था ! लेकिन उसने सोचा कि एक बार इस बारे में उसे सिमरन से बात कर लेनी चाहिए ! उस कॉन्टेस्ट में भाग लेने वाले प्रतियोगियों को लेकर दोपहर 3 बजे मुंबई से शिमला के लिए टीम की रवानगी थी, इसलिए उस समय के पहले पहले सारे प्रतिभागियों को अपना सामान लेकर वापस स्टूडियो पहुंचना था..

निम्मी घर पहुंची और मुंह लटका कर एक तरफ बैठ गई ! सिम्मी ने उससे पूछा तो निम्मी ने उसे बता दिया कि आगे के पार्ट्स शूट करने के लिए उन लोगों को शिमला ले जाया जा रहा है | सिमरन यह सुनकर बहुत खुश हो गई और उसने निम्मी के कंधे पकड़कर उसे हिला दिया..

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” कल ही तो तू इतनी बड़ी बड़ी बातें कर रही थी, और अब खुद सोचने बैठ गयी !
   जब तू ने इस बात को स्वीकार कर लिया है कि श्लोक ने तुझसे इजहार नहीं किया तो तू उसे भूल जाएगी…
  तो अब सिर्फ इस कारण की वो लोग शिमला में रहते  है, तू वहां जाने से बच रही है..
यह तो कोई बात नहीं हुई ! निम्मी तेरा सपना है मास्टर शेफ बनने का, और तुझे यह मौका मिल भी गया है.. |
तू अपनी मेहनत और लगन से इस कांटेस्ट में यहां तक पहुंच चुकी है, जहां तक पहुंचना कई लोगों का सपना रह जाता है…. |
यहां तक पहुंचने के बाद और इस सफलता को देखने के बाद अब अपने कदम पीछे क्यों कर रही हो..  |
वह भी उस इंसान के लिए जिसने कभी तुझसे कुछ कहा ही नहीं..!
नहीं निम्मी तुम खुद को पहचानो और अपने सपने को पूरा करने के लिए जुट जाओ |  किसी एक इंसान या उसके परिवार में इतनी ताकत नहीं होनी चाहिए कि वह तुम्हें तुम्हारे निर्णय से बदल दे !
  उसको अपने दिल दिमाग पर इतना हावी मत होने दो कि तुम अपनी जिंदगी उसके हिसाब से चलाने लगो | वह तुम्हारे आसपास भी नहीं है फिर भी तुम उसकी वजह से अपनी जिंदगी का एक सुनहरा मौका खो देना चाहती हो, गंवा देना चाहती हो,  जो सरासर बेवकूफी है ! तुम्हारी जगह मैं होती तो ऐसा कभी नहीं करती, और मैं जानती हूं तुम भी ऐसा नहीं करोगी..
. आओ चलो तुम्हारा सामान पैक करते हैं..!

सिमरन की बात सुनकर निम्मी के भी दिमाग की नसें खुल गई.. उसने आगे बढ़कर सिम्मी को गले से लगा लिया…

” मुझे मालूम था तुझसे बेहतर सलाह मुझे और कोई नहीं दे सकता था, थैंक यू सिम्मी !”

सिम्मी ने मुस्कुराकर निम्मी की पैकिंग करवानी शुरू कर दी ! अपने कपड़े और जरूरी सामान पैक कर के मासी और सिमरन से विदा लेकर निम्मी अपने अगले पड़ाव के लिए अपनी टीम के साथ निकल गई…!
शाम में सिमरन को अपनी दोस्त रीत के घर डिनर  पर जाना था वह उन्हीं तैयारियों में लग गई…

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क्रमशः

aparna…

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Manu verma
Manu verma
2 years ago

ललित कुमार…. 🙄रीत ने इसे पसंद किया 🤔,
चलो अच्छा है रीत खुश है लालटेन नहीं नहीं ललित कुमार के साथ 😊।
बहुत खूबसूरत भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻