
अपराजिता -118
जितनी जल्दबाज़ी में यज्ञ ने कुसुम को अपने सीने से लगाया था, उतने ही झटके से उसे छोड़ा और वापस मुड़ कर अखंड के पास तेज़ी से चला गया..!
और उसकी छोटी ठकुराइन उसके प्यार में सराबोर वहीँ खड़ी रह गयी..
कुसुम को जैसे कुछ होश ही नहीं रह गया था.. यज्ञ उसे आभार देकर अपने भाई के पास वापस लौट कर अपनी अम्मा के इलाज के बारे में बातचीत में लग गया था, और कुसुम सन्न सी वहीँ खड़ी रह गयी थी..!
ये क्या कर गया था वो अनजाने में… ।
यूँ लग रहा था आसपास कोई नहीं है..।
सारी धरती मानो थम सी गयी थी.. पंछी सूरज हवा बादल सब अपनी अपनी जगह खड़े रह गए थे, और इस प्रकार ये सब उसे मौका और वक्त दे रहे थे अपने पहले प्यार के पहले अहसास को समझने का..।
और वो भीतर तक इस प्यार के एहसास में डूबी खड़ी थी..।
उसी समय पास से होकर गुज़रते एक लड़के को किसी ने आवाज़ लगा दी…
“सूरज इंजेक्शन खरीद कर लेते हुए आना ।”
ये आवाज़ कानो में पड़ते ही जैसे कुसुम नींद से जाग कर बैठ गयी .
इंजेक्शन और पैसे !!
वो तेज़ी से यज्ञ की तरफ बढ़ गयी..
वो उस तक पहुँच तो गयी लेकिन कुछ देर पहले जो घटा था उसे सोच कर वो एकदम से कुछ कह नहीं पायी..
. लेकिन उसे अचानक आया देखा दोनों ही भाई उसकी तरफ देखने लगे..
“हाँ क्या हुआ ?” यज्ञ ने उससे पूछ लिया..
और वो उसके सवाल पर उलझ कर रह गयी..
“वो… वहाँ !”
“क्या हुआ कुसुम बोलो ना !”
हाय नाम लेकर तो उसने पूरा ही लूट लिया..।
कुसुम पूरी तरह से हार गयी..।
उसके चेहरे पर मुस्कान आने को थी लेकिन उसने रोक लिया..
अपनी हिम्मत समेट कर उसने बोल ही दिया..
“वहां फार्मेसी में कुछ पैसे देने हैं.. उस वक्त हमारे पास रूपये मौजूद नहीं थे इसलिए हम बिना रूपये दिए ही इंजेक्शन उठा लाये थे.. !”..
“अरे कितने रूपये बाकी हैं ?”
यज्ञ ने पूछते हुए अपने जेब में हाथ डाल दिया..
“सैंतीस हज़ार !”
“क्या ? इतना ?”
“हम्म… इंजेक्शन महंगा ही था.. !”
“नहीं हमारा वो मतलब नहीं था.. इतना महंगा तुम बिना पैसे दिए कैसे ले आयी ?”
यज्ञ ने बोला और झटपट मुड़ कर फार्मेसी की तरफ मुड़ गया….
कुसुम जवाब देने की सोच रही थी, लेकिन यज्ञ बिना सुने ही बढ़ गया था, वो भी उसके कदम से कदम मिलाती आगे बढ़ गयी….
कुछ देर में दोनों फार्मेसी में खड़े थे..
वहाँ मौजूद लड़के को यज्ञ ने रूपये पकड़ा दिए.. लड़के ने रूपये लिए और कुसम की तरफ देख कर मुस्कुरा उठा..
कुसुम भी हल्के से मुस्कुरा उठी..
“आपका मरीज़ ठीक है ?”
“हम्म अब ठीक है !” कुसुम ने ही जवाब दिया..
“तुम लोग एक दूसरे को जानते हो क्या ?” यज्ञ अब भी आश्चर्य में डूबा खड़ा था कि कैसे इतना महंगा इंजेक्शन बिना पैसों के कुसुम लेकर चली आयी..
“नहीं साहब.. परिचित नहीं हैं.. लेकिन जब इन्होने सैंतीस हज़ार के इंजेक्शन के बदले कई लाख का अपना कंगन यहां रख दिया, तब इन पर यक़ीन करने के अलावा कोई चारा नहीं बचा..
दूसरी बात, जो अपने रिश्तेदार के इलाज के लिए अपने जेवर की परवाह ना करे, वो कभी एक गरीब का पैसा नहीं मार सकता.. !”
लड़के ने पैसे वहीँ टेबल के नीच बने दराज़ में डाल कर रजिस्टर में भी चढ़ा दिए, और वापस अपने काम में लग गया….
यज्ञ ने मुड़ कर कुसुम को देखा और “कॉफी पियोगी ?” पूछ कर आगे बढ़ गया..
कुसुम ने तुरंत हामी भर दी..
दोनों वहाँ से निकल कर अस्पातल के गार्डन में बने काफी शॉप में चले आये..
दोनों कॉफी का कप हाथ में थामे गार्डन में चहलकदमी करते हुए कॉफी पीने लगे…।
ये पल कुसुम को यूँ लग रहे थे कि काश यही थम जाये और कभी खत्म ना हो…
****
दोपहर घर का सारा काम निपटाने के बाद भावना ने अपने लिए सुकून से भरी चाय बनाई और बाहर वाले कमरे में बैठी चाय पीने लगी कि, डॉक्टर साहब का फ़ोन आने लगा..
उसने लपक कर फ़ोन उठा लिया..
“आज रात एक दोस्त खाने पर आने वाला है !”
“जी ठीक है !”..
“कुछ तैयारी कर लेना.. उसकी वाइफ भी साथ होगी.. !”
“ठीक है !”
“सामान सब है ना? कुछ नहीं है तो बताओ, अस्पताल से किसी पियोन के हाथ सामान भिजवा दूंगा !”
“नहीं रहने दीजिये.. हम देख लेंगे !”..
“अच्छी बात !” कह कर राजेंद्र ने फ़ोन रख दिया..
भावना उठ कर रसोई में चली गयी.. राशन तो सारा घर पर मौजूद था, लेकिन कोई खाने पर आये उसके लायक सब्जी भाजी नहीं थी.. .
उसके पर्स में पैसे पड़े थे.. कुछ दिन पहले ही डॉक्टर साहब ने दिए थे..
वो तुरंत दुपट्टा ओढ़ कर एक झोला हाथ में थामे बाहर निकल गयी..
कुछ दूर पर ही साग तरकारी की बड़ी दुकान थी.. वहाँ से अपने मनपसंद सारा सामान लेकर वो घर चली आयी..
आते ही वो शाम की तैयारियों में जुट गयी..
खाना बनाते हुए उसे शाम हो गयी..
घर की सफाई कर वो नहाने चली गयी..
उसके नहा कर तैयार होते तक में राजेंद्र चला आया..
आज घर उसे बदला बदला सा लग रहा था, वैसे भावना घर को सजा संवार कर ही रखती थी, लेकिन आज घर और भी प्यारा लग रहा था..
राजेंद्र के तैयार होकर आते में भावना दोनों के लिए चाय बना कर ले आयी..
राजेंद्र बाहर आया और भावना ने उसके हाथ में चाय पकड़ा दी!
चाय का प्याला थामें राजेंद्र कुछ देर, कुछ सोचता रहा.. और फिर भावना की तरफ देखने लगा!
” मेरा ये जो दोस्त आ रहा हैं, इन दोनों की शादी को चार साल बीत गए और दोनों ने अब अलग होने का फैसला ले लिया है..!
नहीं, मतलब दोनों के बीच किसी तरह का झगड़ा या कोई विवाद नहीं है। बस दोनों को यूं लगता है कि दोनों के विचार एक दूसरे से नहीं मिलते और इसलिए दोनों ने आपसी सहमति से यह तय कर लिया है कि उनका अलग हो जाना ही बेहतर है।
हम तीनों ही कभी दोस्त हुआ करते थे, आज भी हैं।
तो बस आज हॉस्पिटल में बातचीत के दौरान मैंने उन दोनों को खाने पर बुला लिया।
सुनो, तुम्हे बुरा तो नहीं लगा ना, मैंने अचानक ऐसे मेहमान बुला लिए तो..?”
“ऐसा क्यों पूछ रहे हैं आप.. ये घर आपका ही है.. आप जब चाहे किसी को भी बुला सकते हैं.. !”
भावना ने एक साधारण सी बात कही, लेकिन राजेंद्र को यह बात खल गई।
इसका मतलब आज भी भावना इस घर को सिर्फ राजेंद्र का घर मानती है।
राजेंद्र एक ठंडी सांस भरकर रह गया।
वह धीरे-धीरे अपनी चाय का घूंट भरने लगा। उसी वक्त दरवाजे पर दस्तक हो गई।
भावना और राजेंद्र दोनों चौंक के दरवाजे की तरफ देखने लगे। राजेंद्र उठा और दरवाजे की तरफ बढ़ गया।
और भावना दोनों कप समेट कर रसोई में चली गई। राजेंद्र ने दरवाजा खोल दिया, सामने उसका दोस्त ऋषि और उसकी पत्नी ऋचा खड़े थे….।
राजेंद्र उन दोनों को अन्दर ले आया…।
भावना भी बाहर चली आयी..
उसके बाद तो हंसी मजाक और बातों के दौर में वक्त का पता ही नहीं चला..।
भावना के बनाये खाने की उन दोनों ने बहुत तारीफ की..
भावना को खुद को भी लगा कि उसने अच्छा खाना बनाया है..
वो भी खुश थी..।
आज का अनुभव उसके लिए बहुत नया था..।
इस तरह राजेंद्र के किसी दोस्त के साथ उसका मिलना बैठना नहीं हुआ था..।
उसे भी अच्छा लग रहा था..।
लेकिन भावना की समझ से बाहर था कि इतना सुंदर जोड़ा अलग क्यों होना चाहता है.. ?
आखिर ऐसी कोई कमी तो उनमे नजर नहीं आ रही जिसके कारण वो लोग अलग हो रहे हैं..।
बहुत सोचने पर भी वो सोच नहीं पायी..
खाना पीना निपट चुका था..
वो चारों बैठे थे… बाहर मौसम ख़राब होने लगा था.. तेज़ आंधी पानी की शुरुवात हो गयी थी..।
“बाहर तो मौसम ख़राब हो रहा है राजी… इतनी बारिश में जायेंगे कैसे हम दोनों ?”
“तो आज यही रुक जाओ !”राजेंद्र ने यूँ ही कह दिया..
ऋषि ने ऋचा की तरफ देखा..
“नहीं राजी, ऋचा को अपनी बहन के घर जाना है.. उसकी दीदी तैयार नहीं होंगी उसके यहां रुकने के लिए !”
ऋचा ने ऋषि की तरफ देखा..
“मैं एक बार बात कर लेती हूँ दी से, हो सकता है मान जाये !”
“देख लो तुम्हे परेशानी ना हो !”
“नहीं इसमें मुझे कैसी परेशानी… बल्कि अगर हम यहां रुके तो राजी और भावना परेशान हो जायेंगे !”
ऋचा ने भावना की तरफ देखा..
“नहीं नहीं.. हमें कोई परेशानी नहीं.. !” भावना ने धीमे से कह कर राजेंद्र की तरफ देखा..
“मेरे साथ कमरे में रुक जाओगी ?” ऋषि ने भरसक अपनी आवाज़ को धीमा कर ऋचा से पूछा और ऋचा ने हामी भर दी..
राजेंद्र ने भी उन दोनों की बात सुन ली थी..
उसी समय भावना उन सब के लिए कॉफी बना कर ले आयी थी…
राजेंद्र ने उन दोनों की तरफ कॉफी के कप बढ़ा दिए और खुद भावना को अंदर आने का इशारा कर अंदर चला गया..
भावना भी उसके पीछे अंदर चली गयी..
“भावना वो दोनों मेरे वाले बैडरूम में सो जायेंगे.. क्या मैं तुम्हारे वाले कमरे में..
उसकी बात आधे में ही काट कर भावना बोल पड़ी..
“हाँ इसमें पूछने की क्या बात है ? हम उनके लिए बिस्तर ठीक कर देते हैं.. !”
राजेंद्र भावना को गहरी सी आँखों से देख रहा था..
भावना ने उसकी तरफ देखा और उसकी नजरो को नजरअंदाज कर बाहर निकल गयी..
उसने राजेंद्र का कमरा ठीक किया, बिस्तर ठीक कर ओढ़ने की चादरे रख कर वो बाहर चली आयी..
” आप लोगो के सोने का इंतज़ाम कर दिया है !” भावना ने धीमे से कहा और ऋषि और ऋचा एक दूसरे को देखने लगे..
दोनों ने तलाक के लिए फैमिली कोर्ट में आवेदन दे रखा था, और इसीलिए न्यायालय के आदेशानुसार दोनों अभी अलग रह रहे थे..
इत्तेफाक से राजेंद्र की दोनों से एक साथ मुलाकात हो गयी थी, और उसने दोनों को खाने पर बुला लिया था….! और अब ख़राब मौसम के कारण दोनों को यहां रुकना पड़ गया था…
दोनों ही विचार कर रहे थे। आखिर ऋचा ही पहले उठी और भावना के दिखाए कमरे की तरफ बढ़ गयी..
“हम दोनों कुछ देर बैठेंगे भावना, तुम भी जाओ आराम कर लो !” ऋचा के जाने के बाद राजेंद्र ने भावना से कह दिया….
वो असल में दिल से नहीं चाहता था कि उसके इतने करीबी दोनों दोस्त यूँ अलग हो जाये.. और इसीलिए उन दोनों से एक साथ बात करने ही राजेंद्र ने उन दोनों को घर पर बुलाया था..
लेकिन उसे उन दोनों से ठीक से बात करने का मौका ही नहीं मिला था..
लेकिन इस ख़राब मौसम ने उन्हेँ साथ रुकने पर मजबूर कर दिया था..
भावना राजेंद्र की बात सुन कर कमरे में चली आयी…
वो खुद यही सोच रही थी कि जब दोनों इतने परफेक्ट हैं, तो आखिर ये लोग तलाक क्यों ले रहे हैं.. ?
क्रमशः

Very Imotional and Interesting and Shandaar n Jaberdast part.
खूबसूरत, लाजवाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻
Very nice part, haye humari kusum Kumari shrma rhi hai ki unke piya ne unko kaise gale se laga liya. Kya khoob ho tum bhi kusum aakhir kar tumhein pyar ho hi gya apne patidev se hona bhi chahiye jab yagya jaisa Pati ho toh pyaar toh hona hi tha.
Bahut badhiya dr sahiba 🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰
वाह अपराजिता जी
मजा आ गया ये पार्ट पढ़ने में
मेरे ph में आज खुला ये पार्ट और मुझे ये भी नहीं मालूम कि मैं जो 2 शब्द लिख रही हूँ सही जगह लिख पा रही हूँ या नहीं
आप तक पहुचेंगे या नहीं।
जो मेहनत आप कर रहे हो उसका फल तो मिलेगा ही मिलेगा।हम भी हमेशा आपके लिए प्रार्थना करते हैं।ये भी बता दीजियेगा कि इस प्लेटफॉर्म पर आपका सुपरफैन बनने के लिए क्या करना पड़ता है।
कहानी के लिए क्या लिखूँ।हमेशा की तरह बेहतरीन मनोरंजक ज्ञानवर्धक और सीख देने वाली ..समाज को सही दिशा दिखाने वाली है बिलकुल आपके व्यक्तित्व की भाँति।
गनेशी जी, आपके साथ और स्नेह के लिए आपका हार्दिक आभार… आपके मेसेज मुझे दिख रहे हैं.. ❤❤
हाय कुसुम का शर्माना 😘 दिल ले गई 😘।
दो जोड़ियाँ…. एक जोड़ी जो चार साल साथ रहकर भी, साथ नहीं रहना चाहती और दूसरी जोड़ी.. जिन्होंने कभी सोचा भी नहीं था, एक पल में जुडा रिश्ता और वो दोनों निभा रहे 😊।
बहुत अच्छा भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻
Ab jakar dil ko karat aya
👍👍
कहानी बहुत अच्छे मोड़ पर है कुसुम और भावना दोनों सखियां अपने दांपत्य जीवन को स्वीकार कर आगे बढ़ रही हैं 👌
Very nice part of the story and very interesting 👍 😀 👌 👏 😊 🙂 👍 😀 👌 👏 😊 🙂 👍 😀 👌 👏 😊 🙂 👍 😀 👌 👏 😊 🙂 👍 😀 👌 👏 😊 🙂 👍 😀 👌 👏 😊 🙂 very nice 👌 👍 👏 😀 ☺️ 😊 👌 👍 👏 😀 ☺️ 😊 👌 👍 👏 😀 ☺️ 😊 👌 👍 👏 😀 ☺️ 😊 👌 👍 👏