
बेसब्रियां.. दिल की -6
चौकी अपनी बुलंदी पर थी.. एक से बढ़ कर एक माता के गीतों के साथ सजती रात आगे बढ़ती जा रही थी…
जय माता दी, जय माता दी,
सारे बोलो जय माता दी ।
तेरे सदके तू भेज दे बुलावा,
दोनों हाथ जोड़ के मैं आऊं शेरा वालिये ।
मांगू और क्या मैं इस के इलावा,
छोड़ के ना दर तेरा जाऊं शेरा वालिये ॥
बीच बीच में मुहल्ले के लड़के कभी शरबत की गिलास तो कभी कुछ और खाने का सामान सबके पास लाते जा रहें थे…
ढ़ेर सारे गानों के बाद डब्बा सिंह माइक लिए सामने कूद पड़ा…
“अब हम सब एक ब्रेक लेंगे और एक छोटा सा गेम खेलेंगे… !”
सारे लोग महा उत्साह से तालियाँ बजाने लगे…..
” इस गेम के लिए सबको पर्चियां बाँट दी जाएँगी… एक सामान को दो हिस्से में लिखा गया है, जिसका एक हिस्सा किसी एक के पास और दूसरा हिस्सा किसी और के पास आएगा.. ! आपको अपने पास की पर्ची का दूसरा हिस्सा ढूँढ के जोड़ी बनानी होगी और उसके बाद असल गेम्स शुरू होंगे.. रेडी.. ?”
उसके पूछते ही एक स्वर में वहाँ बैठे लोग चिल्ला उठे.. रेडी.. !
और उसके बाद डिब्बा सिंह सबके पास अपनी पर्चियां लिए पहुँच गया…..
हर एक ने एक एक पर्ची उठा ली.. श्लोक ने अपनी पर्ची उठाते ही खोल ली… उस पर लिखा था “रजनी “
उसे समझ नहीं आया कि अगला हिस्सा क्या हो सकता है.. वो अपने आसपास खड़ी अपनी बहनों से पूछ ही रहा था कि निम्मी ने भी अपनी पर्ची खोल ली.. उसके में लिखा था “गंधा “
उसने धीमे से अपनी पर्ची पर लिखा शब्द पढ़ा और उसकी कही बात सुन कर वहीँ खड़ा अक्षत राज बोल पड़ा… – रजनीगंधा! मतलब श्लोक और तुम्हारी जोड़ी बनी है!” बिल्कुल ही बेमन से अक्षत राज ने अपनी बात रख दी
उसने श्लोक और निम्मी की ओर इशारा कर दिया..
और श्लोक मुस्कुराकर निम्मी के पास पहुंच गया…
किसी की पर्ची पर “जय-वीरू” लिखा था तो किसी के में “अमर-प्रेम” किसी के में “धन-तेरस” था तो किसी के में “शुभ-आगमन”
सिम्मी के हाथ में जो पर्ची आई थी उसने खोल कर देखा उस पर ताला लिखा हुआ था…
वह अपनी पर्ची खोलकर सभी लोगों की तरफ इशारे से दिखाते हुए पूछने लगी…
” किसी के पास चाबी है? क्योंकि मेरे पास ताला आया हुआ है !”
डब्बा सिंह ने जबरदस्ती अक्षत के हाथ में भी एक पर्ची पकड़ा दी थी जिसे अक्षत ने बिना खोले ही यूं ही हाथ में पकड़ रखा था…
बाकी सब की जोड़ियां मिल चुकी थी… शर्मा आंटी तुरंत अक्षत के पास आई और उसके हाथ की पर्ची उससे छीन ली…
” यह लो सिम्मी के ताले की चाबी तो इनके पास है..! चलो चलो बेटा तुम दोनों की जोड़ी बनती है..!”
उन्होंने अक्षय की बाजू बड़े हल्के से पकड़ कर उसे अपने साथ खींचना चाहा, लेकिन अक्षत उसी तरह अकड़ कर खड़ा रहा..
उसने झटके से अपना बाजू शर्मा आंटी के हाथ से छुड़ा लिया…
” मुझे इस तरह के बचकाने गेम्स खेलने का कोई शौक नहीं है..! मुझे इस सब से दूर रखें प्लीज..!”
उसने अपने आपको शर्म आंटी की पकड़ से छुड़ाया और वहां से हटकर दूर चला गया सिम्मी उसे घूरती खड़ी रही…
श्लोक को अक्षत का इस तरह जाना अच्छा नहीं लगा लेकिन वह जानता था कि अक्षत को यह सारी चीजें पसंद नहीं आती..
उसने मोहिता की तरफ देखा और मोहित आने शर्मा आंटी के दोनों हाथ बड़े प्यार से थाम लिया..
” सॉरी आंटी वह कुछ देर पहले ही लैंड हुआ है अमेरिका से, तो जेटलेग के कारण भी थोड़ा सा परेशान है ! आप समझती है ना वहां का दिन हमारे यहां की रात, हमारा दिन वहां की रात.. ऐसा होता है ना.. तो वहां से आने के बाद दो-तीन दिन तो लग जाते हैं नॉर्मल होने में!”
” अरे बेटा जी मैं सब समझती हूं ! तुसी चिंता ना करो..!”
शर्मा आंटी ने एक नजर जाते हुए अक्षत पर डाली और अपनी झेंप मिटाते हुए वापस अपनी महिला मंडल की तरफ बढ़ गई…
जाते-जाते अक्षत ने अपनी पर्ची को फाड़कर उसके टुकड़े-टुकड़े हवा में उड़ा दिए….
” हद दर्जे का बदतमीज लड़का है..! इतनी अकड़.. इतना घमंड…छी… !”
सिम्मी बहुत धीमे से फुसफुसा कर कह रही थी लेकिन उसके ठीक पास खड़ी विम्मो ने उसकी सारी बातें सुन ली…
” खानदानी रईस भी तो है यार ! किसी किसी का पैसा उसके सर चढ़कर ऐसे ही बदतमीजी करवाता है!”
” खानदानी रईस है,पैसे वाला है तो यह सारा पैसा तो इसके बाप दादा लोगो का है… इसने थोड़े ना इतनी छोटी उम्र में इतना बड़ा एंपायर खड़ा कर लिया है जो हवा में उड़ रहा है…
यूं लग रहा है जैसे खुद को सिकंदर समझ रहा है..!”
” तू क्यों चिढ रही है यार सिम्मी ! उसे देख ना !
बंदा है भी तो घमंड करने लायक !
एक तो इतना रईस उस पर मर मिटने लायक हद दर्ज़े का हैंडसम.. गोरा कितना है देख ना.. बात करता है तब भी गाल पर डिम्पल पड़ते है यार.. हाउ क्यूट !
उसके पास है किस चीज की कमी !
लड़कियां तो इसके एक इशारे पर अपना दिल जान जिगर सब कुर्बान कर देती होंगी..!”
” तू चुप रहने का क्या लेगी विम्मी !”
विम्मी ने घूर कर सिम्मी को देखा….
” मैं तेरी उम्र की होती ना तो नहा धो कर उस लड़के के पीछे पड़ गई होती… सच्ची !!
यार तू इतनी रूखी सूखी क्यों है..? कुछ गड़बड़ तो नहीं है सिम्मी तेरे में !
कहीं ऐसा तो नहीं तुझे लड़कियां पसंद है..बाय गॉड.. ऐसा है तो सच सच बोल देना मम्मी जी से वरना बेचारी तेरे चक्कर में इधर उधर एड़िया रगडेंगी और पता चला तू “एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा” गुनगुनायेगी.. !”
” शट अप विम्मी कितना नॉनसेंस बोलती है यार तू..!”
अक्षत वहां से दूर कोल्ड ड्रिंक के स्टॉल पर खड़ा अपने पीने के लिए कुछ ड्रिंक तैयार करवा रहा था और इधर डिब्बा सिंह ने गेम्स खिलवाना शुरू कर दिया…
पहली बार में 4 जोड़ियों को बुलाया गया.. जिन्हें ढेर सारे बलून दे दिए गए | इन जोड़ियों को 1 मिनट में ढेर सारे बलून फुलाने थे | जिस जोड़ी ने सबसे ज्यादा बलून फुला लिए वह उस गेम की विनर होनी थी…
इन 4 जोड़ियों में श्लोक और निम्मी की जोड़ी भी शामिल थी…
जैसे ही गेम शुरू हुआ बाकी तीनों जोड़ियों के लोग बलून फुलाने और बांधने लगे जबकि श्लोक और निम्मी में श्लोक ने पहले ही निम्मी से कह दिया कि वह बलून फुलाकर निम्मी को देता जाएगा और निम्मी उन्हें टेप की सहायता से सील करती जाएगी…
1 मिनट के इस गेम में 1 मिनट के लिए गाना भी चलने लगा…
दौड़ा दौड़ा भागा भागा सा
दौड़ा दौड़ा भागा भागा सा
वक्त ये सख्त है थोड़ा-थोड़ा
दौड़ा दौड़ा भागा भागा सा… भागा भागा
1 मिनट पूरा होते चारों जोड़ियों ने अपना टास्क पूरा करने की बेइंतेहा कोशिश की और बलून गिनने पर श्लोक और निम्मी की जोड़ी जीत गई !
उन दोनों ने आपसी सामंजस दिखाते हुए सबसे ज्यादा 28 बलून फुलाकर बांध लिए थे जबकि बाकी जोड़ियों में दोनों ही लोग फुला भी रहे थे और खुद बांध रहे थे इसलिए बार-बार गलतियां हो रही थी और कई बलून तो फूलने के साथ ही फूटते भी जा रहें थे……
श्लोक को इस काम में बहुत मजा आया ! निम्मी और श्लोक ने बहुत अच्छे से इस काम को पूरा किया और जैसे ही इस गेम के विनर के तौर पर उन दोनों का नाम डिब्बा सिंह ने लिया वहां बैठी कई माताओं के सीने पर सांप लोट गए…
श्लोक जैसा मोस्ट एलिजिबल बैचलर निम्मी जैसी खूबसूरत नाजुक सी लड़की के साथ सामने खड़ा बहुतों के दिल पर छुरियां गिरा रहा था…
सामने बैठी लड़कियां उसे देखकर जहां ठंडी आहें भर रही थी, वहीं लड़कियों की माताएं यह सोच रही थी कि काश निम्मी की जगह यहां हमारी बेटी खड़ी होती !
वही सबसे किनारे खड़ी पम्मी जी और लीला आंटी के चेहरे पर एक लंबी सी मुस्कान छाई हुई थी…
” व्हाट नॉनसेंस!”
ड्रिंक्स के कॉर्नर पर खड़ा अक्षत अपने लिए मॉकटेल बनवा कर वहीं खड़े-खड़े इस गेम को देखते हुए झुंझला रहा था….
अपने हाथ में पकड़े ब्लू लगून मॉकटेल को पकड़े अक्षत धीरे-धीरे टहलते हुए पंडाल के दूसरी तरफ जा रहा था…
की उसी वक्त एक बड़ी सी तश्तरी में ढेर सारे दिए सजाए उधर से निकलती सिम्मी एकदम से उसके सामने आकर ठहर गई…
सिम्मी को अपने सामने देखकर अक्षत ने उसे सवालिया नजरों से देखा और अपने दोनों हाथ उठाकर उससे “ये क्या है “का इशारा कर दिया…
सिम्मी ने भी बदले में उससे अपनी भौंहे चढ़ाकर क्या है पूछ लिया..
” मेरा मतलब है, ये क्या स्टूपिडिटी है.. ? मैं जहां जा रहा हूं तुम बार-बार टकराने चली आ रही हो.. हैव यू एनी प्रॉब्लम.. ?”
” यही सवाल मैं भी आपसे पूछ सकती हूं, कि मैं जहां जाने वाली होती हूँ आप वहां पहले से क्यों मंडराने लगते हैं..?”
” एक्सक्यूज मी ! मैं तुम्हारी जैसी मिडिल क्लास लड़कियों की मेंटालिटी को अच्छे से जानता हूं…. 23- 24 साल की होते ही तुम हमारे जैसे एलिजिबल बैचलर्स को ढूंढने लगती हो और जानबूझकर उन पर डोरे डाल कर उन्हें फंसाती हो जिससे हम…!”
सिम्मी को अक्षत की बात सुनकर इतनी जोर से गुस्सा आ रहा था कि उसने अक्षत की बात बीच में ही काट दी…
” तुम्हारे जैसे सेल्फऑब्सेस्ड रईस ज़ादों की आंखों पर
तुम्हारे पैसे की चमक इतनी ज्यादा हावी हो जाती है ना कि तुम्हें अपने अलावा हर कोई गलत और बुरा ही नजर आता है! और तुम्हें एक बात बता दूं कि संस्कार और सभ्यता सिर्फ हम मिडिल क्लास में ही पाई जाती है! तुम अपर क्लास का एक्चुली कोई क्लास नहीं होता और लोअर क्लास का भी..
इसलिए मेरे हिसाब से तो लोवर और अपर क्लास एक ही बराबर होती है…
अपने संस्कार सभ्यता और सामाजिक जीवन में अपनाए जाने वाले नियमों का ठेका तो सिर्फ हम मिडिल क्लास ने ही अपने कंधों पर उठा रखा है…!
तुम हाई क्लास लोगो में शादी की वैल्यू क्या है..? तुम आज किसी से शादी करोगे, 4 महीने बाद तुम उससे बोर हो जाओगे, उसे तलाक दे दोगे ! चार- पांच करोड़ रुपए उसके मुंह पर मारोगे और दूसरी लड़की से शादी कर लोगे…
बल्कि बहुत बार तो तुम्हारे यहां शादी तोड़ने की भी ज़रूरत नहीं पड़ती ! शादी किसी से भी कर लेते हो और बाद में एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर कर लेते हो, वो भी बड़े आराम से जैसे कि वह कोई गलत काम है ही नहीं…
लेकिन हम मिडिल क्लास लड़कियां जिस किसी के साथ शादी के बंधन में बंध जाती है ना उसे जिंदगी भर नहीं छोड़ती..
चाहे उसका साथ निभाने के लिए हमें कितने भी समझौते करने पड़े !
लेकिन हम उन समझौतों को भी हंसते-हंसते करती हैं, क्योंकि हमें अपने मां-बाप की इज्जत का भी ख्याल होता है, और अपने सास-ससुर की इज्जत का भी!
हम मिडिल क्लास लड़कियां जो होती है ना वह अपने दोनों कंधों पर अपने दोनों परिवारों की इज्जत का बोझ लेकर भी सीधी और सतर खड़ी रहती हैं, हमें झुका सके इतनी मजाल तुम जैसे रईसजादो में नहीं है समझे…!”
” बहुत ज्यादा बकवास करती हो तुम! किसी ने तुम्हें बताया नहीं कि तुम्हारे जैसे मिडिल क्लास गंवार लड़कियों को इतना बोलना भी नहीं चाहिए..?”
” जब तुम खुद मिडिल क्लास नहीं हो तो हमारे लिए नियम बनाने वाले तुम होते कौन हो..? मैंने तो तुम्हें तुम्हारे तौर-तरीके नहीं बताए…?
यही अंतर होता है तुम्हारे जैसे घमंड के पुतलों में और मेरे जैसे सभ्य और समझदार लोगों में…
हां तुम्हारी नजर में जरूर मैं गवार हो सकती हूं क्योंकि मैंने सीए की पढ़ाई की हुई है..
और इस पढ़ाई को करने में दिमाग लगता है पैसा नहीं..!
और तुम्हारे जैसे बुद्धिमान रईसज़ादे हर एक चीज को पैसों से ही तोल कर देखते हैं..
मुझे तुम्हारे जैसे चांदी की थाली में परोस कर डिग्री नहीं मिली है! अपने बलबूते पर मैंने यह डिग्री कमाई है समझे मिस्टर घमंडी.. !”
अक्षत का पारा उबलने लगा था उसने जोर से सिम्मी के बाजू को कस कर पकड़ा और उसे अपनी तरफ खींच लिया…
” तुम्हारी जैसी लड़कियां ना मेरे कमरे में यूँ आती है और एक रात बिता कर यूं निकल जाती हैं.. मैं उन्हें दोबारा देखना तक पसंद नहीं करता..!”
अपनी बांह को जोर से अक्षत के बाजू से छुड़ाकर सिम्मी उसे घूर कर देखने लगी..
” तुम उन्हें दोबारा पलट कर नहीं देखते या एक बार तुम्हारे कमरे से वापस जाने के बाद वो लड़कियां तुम्हें दोबारा देखने लायक नहीं समझती मिस्टर राज.. !”
सिम्मी के चेहरे पर व्यंग भरी मुस्कान चली आई और उसका कटाक्ष अक्षत के मर्मस्थल को चोट कर गया…
किसी भी पुरुष के पौरुषत्व पर आघात करने वाली स्त्री को पुरुष कभी सहन नहीं कर पाता… …
गुस्से में उसके चेहरे को जोर से पकड़ने के लिए अक्षत राज ने अपना हाथ बढ़ाया था कि सिम्मी ने उसके हाथ के सामने अपना हाथ अड़ा दिया…
” एक बार मेरी मर्जी के बिना मेरी बांह पकड़ ली अब दोबारा अगर ऐसी कोशिश की ना तो सोच लेना .. मुझे तुम्हें तमाचा मारने में देर नहीं लगेगी..!”
अक्षत राज और सिम्मी की बहस के बीच उस तरफ चलते गेम्स में डिब्बा सिंह ने माइक श्लोक और निम्मी को पकड़ा दिया और श्लोक की आवाज उस महफिल में गूंज उठी……
तू इजाजत दे अगर तुझसे थोड़ा प्यार
मैं कर लूं… जाने जान…
बैठ मेरे सामने खाली दिल, खाली नजर
भर लूं… जाने जान…..
देखो देखो अब करो ना हम पर यूं सितम
जान मेरी जा रही सनम…
आके भर लो बाजुओं में तुमको है कसम
जान मेरी जा रही सनम….

बहुत अच्छा भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻💐💐💐💐