Bestseller-30

The Bestseller -30

                           “कुबूलनामा”

     सुबह का समय था कहीं दूर किसी मंदिर में सुब्बलक्ष्मी की आवाज में “सुप्रभातम” चल रहा था जो खुली हुई खिड़की से होते हुए सुहास के कानों में भी पड़ रहा था।
        सुप्रभातम सुनकर सुहास ने मुस्कुराते हुए एक अंगड़ाई ली और आंखें खोलकर अपने बिस्तर पर बैठ कर उसने अपने चारों नजर घुमाई वह अपने कमरे में मौजूद था। पलंग से उतरकर धीमे कदमों से चलते हुए वो खिड़की पर जाकर खड़ा हो गया। दूर वेंकटेश मंदिर के ऊपर फिर सजे कलश पर नजर पड़ते ही उसने वहीं से हाथ जोड़ दिए । और मुस्कुरा कर अपने बाथरूम की तरफ बढ़ने लगा, कि तभी उसे अचानक से ध्यान आया कि वह तो कल रात अपने कमरे में आया ही नहीं था।
    वह तो डॉक्टर सुधाकर बिंदल के साथ रेनबो के ऑफिस में था जहां सुधाकर बिंदल को अंदर भेजने के बाद वही बाहर बैठे उसका इंतजार करते हुए शायद सो गया था। अचानक से वह बहुत हड़बड़ा गया कि इतना सब होने के बाद वह यहां कब और कैसे पहुंच गया।

   घर पर बैठे उसे कुछ भी पता नहीं चल सकता था इसलिए वह फटाफट तैयार होकर अपने ऑफिस के लिए निकल गया।

  ऑफिस के लिए कैब में बैठा ही था, कि उसके दोस्त का उसके पास फोन चला आया ।
   सुहास के हेलो बोलते ही दूसरी तरफ से उसका दोस्त  तुरंत बोल पड़ा…

” और सुहास अपने घर से कब आया ? घर पर सब ठीक है ना? “

सुहास को अपने दोस्त का यह सवाल बड़ा अटपटा सा लगा…

” हां घर पर तो सब ठीक है। तुम बताओ कहां हो? “

” तेरे ऑफिस के सामने तेरा इंतजार कर रहा हूं ।आज तेरी जॉइनिंग है, भूल तो नहीं गया। “

आज जॉइनिंग है!!! तो वह पिछले एक हफ्ते से उस ऑफिस में क्या कर रहा था?  सुहास ने तुरंत चौक कर अपने मोबाइल पर तारीख देखी, और वह चकित रह गया। क्योंकि आज की तारीख ही उसकी जॉइनिंग की तारीख थी। तो जो पिछले हफ्ते उसने जॉइन किया था,  वो क्या था?

     उसने कैब वाले से कहकर थोड़ी सी और स्पीड बढ़ा दी और तुरंत फुरत अपने ऑफिस के सामने जा पहुंचा।

    ऑफिस के ठीक बाहर मत खड़ा उसका दोस्त उसका इंतजार कर रहा था… सुहास को कैब से उतरते देख वह सुहास की तरफ बढ़ता चला आया…

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    “सुहास यार इसी बिल्डिंग में तेरा ऑफिस है। 5th फ्लोर पर लिफ्ट लेकर तू उपर चला जा। वहां तुझे सारा मिलेगी । सारी बातें समझा देगी कि तुझे क्या कहा कैसे सेट करना है।”

“ओके! तो तू कब आएगा ऑफिस?”

“आज मार्केटिंग का थोड़ा काम है। तेरे लिए नया सेटअप तैयार करना है ना। उसके लिए केबल्स और बाकी समान लेने जाना है मुझे। तो मैं आधे घंटे में आता हूं! तब तक तू चल कर अपना केबिन देख, और सारी सेटिंग कर ले तू अपने हिसाब से जगह देख लेना।”

“ठीक है भाई जल्दी आ फिर।”

    सुहास को ऐसा लगा आज से ठीक एक हफ्ते पहले यह सब कुछ उसके साथ हो चुका है। वह इसी बिल्डिंग के नीचे खड़ा था जब उसके इसी दोस्त ने उसे सारा से मिलने के लिए कहा था।
    सुहास की समझ से परे था कि ये  क्या हो रहा है? उसने एक नजर लिफ्ट की तरफ मारी और वापस सीढ़ियों से चढ़कर पांचवी मंजिल पर पहुंच गया।
    लंबे चौड़े से ग्लास डोर को खोलने के बाद वह रिसेप्शन पर बैठी लड़की की तरफ बढ़ गया उसने अपना आई कार्ड और जॉइनिंग लेटर जैसे ही उसके सामने रखा उस लड़की ने एक नजर जॉइनिंग लेटर पर डालने के बाद उसे एक गलियारे की तरफ इशारा कर दिया…

” लेफ्ट पर तीसरे रूम में आप नॉक कर लीजिएगा, वहीं आपका इंटरव्यू होना है।”

  अजीब सी  उहापोह में सुहास उस गलियारे की तरफ बढ़ गया। उसे साफ मालूम था कि इस तीसरे नंबर के कमरे में नॉक करके जब अंदर जाएगा तो सारा ही उसका स्वागत करेगी।
      उसने दरवाजे पर नॉक किया और अंदर से एक औरत की आवाज आई “अंदर चले आइए”
   वह मुस्कुरा कर अंदर चला गया। लेकिन अंदर पहुंचते ही उसके ठीक सामने बैठी औरत पर नजर पड़ते ही वह बुरी तरह चौक गया।
इस औरत का नाम भी सारा था लेकिन यह वह सारा नहीं थी ।

एक लगभग  45 से 50 आयुवर्ग की औरत उसके सामने रिवाल्विंग चेयर पर बैठी थी। उसने मुस्कुराकर सुहास का स्वागत किया…

” हेलो मिस्टर पी सुहास श्री राम!! मैं सारा हूं! आपकी टीम लीड। आपको क्या काम करना है ,यह आइए मैं आपको समझाती हूं….”

  आश्चर्य में डूबा सुहास चुपचाप उस सारा के साथ उसकी केबिन से निकलकर बाहर हॉल में चला आया। यह हॉल बिल्कुल पिछली बार देखे हॉल जैसा ही था। अलग-अलग क्यूबिकल में लोग काम में लगे हुए थे। सारा सुहास को लेकर उसी क्यूबिकल के पास पहुंच गई… उसने उसे कांच की बड़ी सी खिड़की से बाहर रेनबो का ऑफिस सुहास को दिखा दिया। कुछ और जरूरी बातें बताने के बाद सारा पियोन को सुहास को कॉफी देने बोल कर वहां से निकल गई।
   और उसके जाते ही सुहास ने अपने चश्मे पर लैंस फिट करने के बाद उस खिड़की पर अपनी आंखें गड़ा दी।
    सुहास को एक और झटका मिला, क्योंकि अब उसे सामने कोई अस्पताल नजर नहीं आ रहा था। उसे सामने रेनबो का ऑफिस ही दिखाई दे रहा था। वह अभी इस गुत्थी को सुलझाने की सोच ही रहा था, कि तभी अचानक उसके चश्मे के सामने वह पुरानी वाली सारा नजर आने लगी।
     सारा के मुस्कुराते चेहरे को देखकर सुहास कुछ समझने की कोशिश कर ही रहा था कि सारा ने धीरे से कहना शुरू कर दिया….

” थैंक्यू सुहास! थैंक यू फॉर एवरीथिंग! रघु मेरा दोस्त बल्कि बेहद करीबी दोस्त था। उसकी तबीयत बिगड़ने के बाद जब वह अस्पताल में भर्ती था तब मैंने अपने ऑफिस से कुछ लोन लिया था, कि मैं उसे किसी अच्छे अस्पताल में दिखाने लेकर जाऊंगी। लेकिन उसके पहले ही वह और उसकी मां उस अस्पताल में ही दफन होकर रह गए। और ये बात सुनते ही मैंने आत्महत्या कर ली थी क्योंकि उस वक्त मैं प्रेग्नेंट थी… मैं उस समय सही और गलत के फर्क को भूल चुकी थी। मुझे लगा मेरे जीने का जब मकसद ही चला गया तो मैं जी कर क्या करूंगी।
      और ये कोई आश्चर्य  की बात नही थी कि जिस तरह रघु की आत्मा को मुक्ति नहीं मिली थी उसी तरह मेरी आत्मा भी उसके साथ ही भटकने लगी।
       तुमसे पहले भी हम लोगों ने कोशिश की थी, कि कोई हमारी मदद कर दे लेकिन तुम्हारे अलावा किसी ने हम पर ध्यान ही नहीं दिया।

    तुम बहुत खास हो सुहास तुमसे एक बात और कहना चाहती हूं…
…. तुम्हें वो लिफ्ट मैन याद है जिसके बारे में तुमने यह सुना था कि उसने अपनी पत्नी को मारने के बाद खुद आत्महत्या कर ली थी।
    वह बात सरासर झूठ थी सुहास। यही बताने के लिए वह लिफ्टमैन अक्सर तुम्हें लिफ्ट में नजर आता था।  वह अपने तरीके से तुम्हें अपनी समस्या बताना चाहता था लेकिन वह बता नहीं पा रहा था।
    उसकी पत्नी तो उससे शादी ही नहीं करना चाहती थी। शादी से पहले ही उसने अपने घर वालों से किसी और से शादी करने की इच्छा जताई थी, लेकिन जात बिरादरी के चक्कर में पड़ कर उसके घर वालों ने उसकी शादी लिफ्टमैन से कर दी। वह शादी के बाद से ही कभी खुश नहीं थी और एक दिन मौका पाकर उसने लिफ्टमैन को अपने प्रेमी की सहायता से मार दिया और उसे फांसी के फंदे पर लटका दिया। उसके कत्ल को उन लोगों ने आत्महत्या का रूप दे दिया था । और साथ ही ऐसी बातें हर तरफ फैला दी कि जैसे लिफ्ट मैन ने अपनी पत्नी को मार कर गायब किया, और उसी गिल्ट में अपनी खुद की भी जान ले ली। ऐसा करने से अब उसकी पत्नी सुरक्षित हो गई थी क्योंकि अब घर वाले उसे भी कहीं नहीं ढूंढने जाते और इस तरह वह अपने प्रेमी के साथ वहां से कहीं दूर चली गई।
    तुमने उस लिफ्टमैन के डर के कारण लिफ्ट में आना जाना ही छोड़ दिया और इसलिए वह लिफ्ट मैन तुमसे कभी अपनी तकलीफ बता ही नहीं पाया।

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      हर एक इंसान तुम्हारे जैसा नहीं होता सुहास तुम बहुत साफ दिल हो और इसीलिए तुम हम जैसों को भी देख पाते हो।
    लोगों के मन में यह भ्रांति चलती रहती है, कि हम आत्माएं हमेशा लोगों का बिगाड़ करती हैं। लोगों को सजा देती हैं। लेकिन ऐसा नहीं है, अरे हम ही तो जब शरीर में होते हैं तब सामने वाला एक जिंदा इंसान कहलाता है। और सोचो हमारे निकलते हैं वह इंसान जो अलग-अलग रिश्तो में बंधा होता है सिर्फ एक बॉडी बन कर रह जाता है।
     कितनी अजीब बात है ना वही पत्नी जो अपने पति के बिना एक कदम नहीं चल सकती उसके मरने के बाद रात भर उसके निर्जीव शरीर के साथ भी अकेले बैठ नहीं पाती है। वह किसी ना किसी को अपने साथ रोक लेती है कि प्लीज साथ में रुक जाइए मुझे डर लगता है।
       कहने को तो बहुत सारी ऐसी कड़वी बातें हैं, जो हमारे समाज में मीठी मीठी बातों के नीचे छिपी रह जाती हैं… लेकिन उनका खुलासा करना यहां जरूरी नहीं है। बस यह कहना चाहती हूं सुहास कि अपनी इस शक्ति से डरकर घबराओ मत जितना हो सके ऐसे लोगों का साथ दो।
  तुम सोचोगे कि जब मैं भी आत्मा ही थी, तो मैं तुमसे साधारण लोगों की तरह क्यों मिली। इसका जवाब यह है कि मुझसे पहले तुमने जितनी भी आत्माओं को देखा वह सारी आत्माएं अपनी परेशानियों को अपने ऊपर लाद कर अपने दुख के साथ तुम्हें नजर आती थी। और इसीलिए उन आत्माओं ने जो भी तकलीफ झेली थी वह तुम उन आत्माओं के चेहरों पर देख लिया करते थे। अगर मेरी तरह तुम्हारे सामने बाकी की आत्माएं भी आती तो तुम आत्माओं में और असल लोगों में फर्क नहीं कर पाते। क्योंकि तुम्हारा मन इतना साफ है कि तुम वाकई इंसानों में फर्क नहीं करते तो तुम हम आत्माओं में फर्क कैसे कर जाते ?
   दूसरी बात मैंने खुद ने अपनी जान ली थी, इसलिए मेरी जो भी तड़पन थी, मेरी जो भी तकलीफ थी, वह मेरी खुद की पैदा की हुई थी। और उसके लिए मैं आखिर किस से बदला लेती? मेरी वह तकलीफ  मेरे चेहरे पर कैसे नजर आती? इसलिए मैं तुम्हें एक साधारण इंसान की तरह ही नजर आती थी। आशा करती हूं कि अब तुम्हारे सारे सवालों के जवाब मिल गए होंगे। अब तुम अपने ऑफिस का काम शुरू कर सकते हो ……ऑल द बेस्ट!!!”

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    सुहास को अब सारी बातें समझ में आ चुकी थी। उसने अपनी आंखों पर से चश्मा हटाया और अपनी कुर्सी पर बैठकर अपनी आंखें बंद कर ली। उसी समय पियोन ने आकर उसकी टेबल पर कॉफी रख दी। कॉफी के साथ ही उसने आज की तारीख का अखबार भी वहां रख छोड़ा था।

सुहास ने कॉफी के साथ ही उस अखबार को भी उठा लिया, और उसके पन्ने पलटने लगा कि तभी एक खबर पर उसकी आंखें गड़ कर रह गई। खबर थी भूतपूर्व मिशनरी अस्पताल के डॉक्टर, डॉक्टर सुधाकर बिंदल ने बीती रात अपने गले की नस काटकर आत्महत्या कर ली। आत्महत्या करने के पहले उन्होंने किडनी की तस्करी से संबंधित ढेर सारी जानकारियों के साथ ही अपने गुनाहों का कबूल नामा भी लिख छोड़ा था।

   खबर जरूर किसी की मौत की थी लेकिन बावजूद उस खबर को पढ़कर सुहास के चेहरे पर एक मुस्कान चली आई ।
     मुस्कुराते हुए सुहास ने कॉफी का कप अपने होठों से लगा लिया। उसने सामने देखा …सामने खड़ा पियोन भी सुहास को देख कर मुस्कुरा रहा था।

    लेकिन यह वह क्यों नहीं था जो हफ्ते भर से  सुहास को उसकी पसंदीदा डार्क सिंगल फिल्टर कॉफी पिला रहा था….

क्रमशः

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aparna……

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