अपराजिता -39

अपराजिता -39

रेशम की नजर अखंड को ढूँढ रहीं थी, इसलिए उससे कुछ दूर चल रहें धीरेन्द्र पर उसने ध्यान ही नहीं दिया…

रेशम ने पूर्वा को वापस भेजा और सधे हुए कदम रखती लाइब्रेरी के पीछे मुड़ गयी..

जाते जाते उसे रास्ते पर पड़ा एक ब्लेड नज़र आया और उसने उसे उठा कर अपने हाथ में रख लिया….

पूर्वा वहीँ घबराई हुई सी खड़ी थी.. उसे कुछ नहीं सूझा तो रेशम का इंतज़ार करने वहीं लाइब्रेरी की सीढियों पर बैठ गयी..

रेशम धीरे धीरे कदम बढाती उस पीछे वाले स्टोर रूम में पहुँच गयी..
उसने देखा दरवाज़ा बंद था, उसने धीरे से दरवाज़े को अंदर की तरफ धकेला और दरवाज़ा आवाज़ करता हुआ अंदर की तरफ खुल गया..।

वो धीरे से अंदर दाखिल हो गयी..
मेडिकल कॉलेज का स्टोर रूम था, ढ़ेर सारा कबाड़ यहाँ जमा था..
बीच बीच में रास्ता छोड़ कर ऊँची ऊँची अलमारियां सजी थी.. जिनमे अस्पताल का पुराना काम ना आने वाला कबाड़ रखा था..
सबसे ज्यादा तो सालों पुराने मरीज़ो के कागज़ पत्तर थे जो लाल कपड़ों में बांधे रखें थे..।

वो धीरे से आगे बढ़ी और उसने आवाज़ लगा दी..

“कोई है.. ?”

सामने से कोई आवाज़ नहीं सुनाई दी..

“कोई है… प्लीज़ जवाब दो, वरना मैं वापस लौट रहीं हूँ.. !”

फिर भी कोई जवाब नहीं आया… कुछ आगे बढ़ कर वो रुक गयी.. उसे लगा उसे यहाँ बुला कर बुलाने वाला खुद नहीं आया…
वो जैसे ही वापस मुड़ कर जाने को हुई, उसके ठीक पीछे खड़े किसी ने उसके हाथों को झटके से पीछे की तरफ खींच कर बांध दिया..
उसका फ़ोन, उसके हाथ में रखी ब्लेड, सब इस अचानक हुए प्रहार से नीचे गिर गयी..।

ये क्या हो गया ? डर के मारे रेशम का गला सूखने लगा..
उसे लगा था उसे यहाँ बुला कर ज्यादा से ज्यादा अखंड  परिहार उसे प्रोपोज़ करेगा…
यहीं तो आजकल का चलन था..

लेकिन उसने यूँ हाथ क्यूँ बांध दिये..?
वो पीछे पलटने को हुई और उसके पीछे खड़ा लड़का लपक कर उसके पीछे चला गया..

एक झटके से उसी वक्त बत्ती बुझ गयी…

लड़की कितनी भी हिम्मती हो, लेकिन जब बात अपनी इज्जत पर आये तो हर किसी का दिमाग घूम जाता है..।
बस यहीं लगता है कि इज्जत किसी तरह बचा ली जायें..
हर एक औरत के अंदर अगर माता गौरी का रूप है तो काली का रूप भी ढंका छिपा होता है ।
पर फिर भी मानव स्वभाव ही ऐसा है कि विपत्ति पड़ने पर हम हमेशा आसान मार्ग को पहले चुनते है, और जब उस आसान मार्ग से काम ना निकल पाए तब कठिन मार्ग को अपनाया जाता है….

रेशम भी गिड़गिड़ाने लगी.. “तुम चाहते क्या हो ?”

उसके पीछे खड़े लड़के ने रेशम के कंधे पर अपना चेहरा रख लिया और अपनी एक बाँह से उसे कस कर खींच कर खुद से सटा लिया.. रेशम की पीठ उसके सीने से लग गयी और वो रेशम के कानों के बिल्कुल पास अपने होंठ लें आया..

“तुम्हें चाहता हूँ.. ! तुम्हें आज तक समझ कैसे नहीं आया .. कि अखंड परिहार तुम्हारे प्यार में बावला हुआ पड़ा है.. !”

उसने एक गहरी सी साँस छोड़ी और उस गर्म हवा को अपने गाल पर महसूस होते ही रेशम घृणा से कातर हो उठी..

“सुनो, मुझे अभी जाने दो.. हम दोनों कल कहीं बैठ कर बात कर लेंगे.. !”

उस लड़के की ऊँगली रेशम के माथे से चलती हुई, उसके कानो को छूती हुई गर्दन तक चली आई…
और रेशम का सर्वांग सिहर उठा..
छी…. कितनी नफरत, कितनी घृणा उसके अंदर पनपने लगी, वो स्वयं इस बात से अनभिज्ञ थी..

अपने पसंदीदा पुरुष का स्पर्श जहाँ स्त्री की स्त्री सुलभ चपलता को सुंदरता को सौ गुना महका जाता है, वहीं अनिच्छा से मिला स्पर्श एक लिजलिजी सी घृणित भावना को जागा जाता है..।

“तुम तो अभी से पत्ते की तरह कांपने लगी, अभी तो अखंड परिहार ने तुम्हें ठीक से छुआ भी नहीं डॉक्टर !”

किसी तेज़ भड़कीले परफ्यूम और गुटखे की मिली जुली गंध रेशम के नथुनों से उसके अन्तस् तक में व्याप्त हो गयी.. वो सिहर कर रह गयी..

उसे अखंड का ये लिजलिजा स्पर्श सिर्फ उसके प्रति घिन से भरता जा रहा था..

“तुम मुझसे दूर रहो, वरना मैं हल्ला मचा कर भीड़ इकट्ठी कर लूंगी.. !”

“हल्ला मचाने से फ़ायदा होता तो अब तक मचा चुकी होती ना… तुम भी जानती हो ये साउंड प्रूफ कमरा है.. यहाँ की आवाज़ बाहर नहीं जा सकती.. !” और उस लड़के का कहकहा वहाँ गूंज उठा..

रेशम ने अपनी पूरी ताकत लगा कर चिल्लाना शुरू कर दिया, इसके साथ ही वो वहाँ से भागने के लिए एक तरफ को निकलने का प्रयास करने लगी और तभी उस लड़के ने रेशम की बंधी हुई बाँहों को पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींच कर अपनी बाँहों में भर लिया..

रेशम ने अपने पैर से उस लड़के के पैर पर एक ज़ोर का प्रहार किया और घुटने को हल्का सा मोड़ कर उसके पेट में ज़ोर से मार कर पलट कर दरवाज़े की तरफ भाग निकली..
लड़का पेट पकडे नीचे गिर गया..।
और वो भाग निकली….

अँधेरा था, राह सूझ नहीं रहीं थी, रास्ते में ढेरों सामान पड़ा था, कभी किसी में उलझती, कभी किसी से टकराती वो जैसे तैसे दरवाज़े तक पहुंची कि दो मज़बूत बाँहों ने उसे ज़ोर से पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और उसके चेहरें को अपनी हथेली से कस कर पकड़ लिया..

“तुझे क्या लगता है मुझे मार कर तू बच जायेगी..
साली आज तेरा वो हाल करूँगा ना कि ज़िन्दगी भर मेरे नाम से कांपेगी तू !”

रेशम के हाथ पीछे बंधे हुए थे, वो अवश हो रहीं थी,  लेकिन लगातार पैरों को पटकते हुए और चेहरें को इधर उधर घुमाते हुए वो उस लड़के के हाथों को पास नहीं आने दे रहीं थी..

उस लड़के ने अपने बांये हाथ से रेशम के सर के पीछे हाथ लें जाकर उसके बालों को कस कर पकड़ लिया..
वो लड़का अब भी पूरी तरह से रेशम के सामने नहीं आया था..

बीच बीच में उसके गले में डला रेशमी रुमाल ज़रूर उड़ कर रेशम के चेहरें पर चला आ रहा था और उस से भी वहीं गंध उठ रहीं थी जो उस लड़के के पास से आ रहीं थी…
पीछे से बाल पकड़ लिए जाने के बावजूद रेशम छटपटा
रहीं थी..।
आखिर रेशम कुछ पल को एक दम शांत हो गयी..
उसे इस तरह चुप देख उस लड़के ने भी उसके बाल छोड़ दिये..
गहरी गहरी साँस भरती रेशम अपने आप को संयत करने की कोशिश कर रहीं थी कि उस लड़के का हाथ रेशम की तरफ बढ़ा और उसने उसका दुपट्टा खींच कर उसके गले से अलग कर दिया..।
रेशम चीख उठी..
और वो लड़का ज़ोर से कहकहा लगाने लगा..।

“मैंने कहा था ना, अखंड परिहार जिस को चाहने लगता है, उसे पाकर रहता है ! अब तुम मेरी हो बस मेरी… !”

“अच्छा सुनो अखंड…

रेशम ने मिन्नत सी करनी शुरू कर दी..

“तुम प्यार करते हो ना मुझसे… !”

“हाँ.. !”

“तो अपने  प्यार के साथ ज़बरदस्ती कौन करता है भला.. तुमने एक बार कहा तो होता की तुम प्यार करते हो.. हम लोग इस बारे में बैठ कर भी तो बात कर सकते है ना.. ज़रूरी है क्या ऐसे ज़बरदस्ती का खेल खेलना..।”

“एक बार अखंड बाबू को जो चीज़ पसंद आ गयी फिर वो किसी और की नहीं हो सकती… अगर तुमसे बात करने आता ना तो तुम मुझसे बात तक करना पसंद नहीं करती… !”

“मुझे जाने दो अखंड.. ये सब कर के तुम्हें कुछ नहीं मिलने वाला.. मैं तुम्हारी शिकायत कर दूंगी !”

“कर दो ना.. मैंने कब मना किया.. यूनिवर्सिटी डीन से कर दो शिकायत… अखंड का बुरा कर सके इतनी हिम्मत किसी में नहीं.. !”

“दूर हो जाओ.. तुम जानते नहीं मैं तुम्हारा कितना कुछ बिगाड़ सकती हूँ !”

“मेरी सोना, तुम नहीं जानती मैं तुम्हारा कितना कुछ संवार सकता हूँ… बस आज की ही तो बात है.. मेरी बात मान लो ना.।
मेरे साथ प्यार करने के बदले तुम्हें सब कुछ मिलेगा ज़िंदगी में..। कॉलेज के हर सेमेस्टर में बिना पढ़े अच्छे नंबर लेकर पास हो जाओगी। इंटर्नशिप में बिना ड्यूटी किए तुम्हें कंपलीशन मिल जाएगा, और हाउस जॉब में टॉप रैंक में पहुंचकर 1 साल मोटी तनख्वाह पाओगी। इसके बाद अपनी जान पहचान के बलबूते पर तुमको पीजी भी सेलेक्ट करवा दूंगा और नौकरी भी दिलवा दूंगा..!”

” इन सब के लिए मुझे तुम्हारी मदद की जरूरत नहीं है। मैं अपने बलबूते पर भी पढ़ाई कर के पास हो सकती हूं। तुमसे इतना कहना चाहती हूँ मुझसे दूर रहो.. प्लीज़.. तुम्हारे घर में भी तो कोई लड़की होगी ना तुम्हारी बहन..
या माँ… अगर उनके साथ कोई ऐसा करें तो..।”

रेशम की बात पूरी नहीं हो पाई कि उसके चेहरे पर एक जोर का तमाचा पड़ा और रेशम अपनी जगह से नीचे गिर पड़ी।
   जैसे ही वो नीचे गिरी, उसके पीछे खड़ा लड़का उस पर झुक गया और उसे सीधा कर दिया। अपनी उंगली उस की गर्दन पर फिराता हुआ उसकी पीठ पर ले आया, और उसकी ब्लॉउस की पीछे लगी ज़िप को पकड़ कर नीचे खींच दिया, रेशम सिहर कर रह गयी…!

रेशम ज़ोर से चीख पड़ी और तभी उस लड़के ने पीछे से रुमाल का ढ़ेर रेशम के मुहँ में ठूंस दिया..
एक दूसरा रुमाल उसके ऊपर से बांध दिया..!

बांधे हाथों के बावजूद रेशम अपने हाथ तेज़ी से चला रहीं थी, और ऐसे ही हाथ चलाने में उसका हाथ उस लड़के के पेट में ज़ोर से लगा और वो लड़का कलबला कर रह गया..
गुस्से में उस लड़के ने अपने जूते से रेशम के पैर को ज़ोर से रौंद दिया..।
रेशम की चीख उसके गले में घुट कर रह गयी..
वो चेहरें को इधर से उधर घुमाती उस लड़के के स्पर्श से दूर भागना चाह रहीं थी,  लेकिन उस लड़के पर इस वक्त हैवानियत हावी हो गयी थी..
अँधेरा इतना गहरा था कि हाथ को हाथ नहीं सूझ रहा था..
उस लड़के ने रेशम को खींच कर अपनी तरफ खींचा और उसकी कमर पर हाथ डाल लिया..
घृणा से सिहर कर रेशम ने अपने सर से ही सामने वाले लड़के के चेहरें पर प्रहार कर दिया…।

वो लड़का अपना जबड़ा पकडे ज़मीन पर गिर पड़ा..
ज़मीन पर पहले से एक कील पड़ी थी, उस कील से उस लड़के के गाल पर खरच पड़ी और ख़ून बलबला कर निकल पड़ा..
दर्द से लड़का भी चीख उठा और गुस्से में खौलता वो उठा और रेशम के चेहरें पर तमाचे पर तमाचे लगाने लगा… रेशम का चेहरा पीड़ा से लाल पड़ गया..

उस लड़के ने बालों से पकड़ कर रेशम का नीचे झुका चेहरा ऊपर उठाया और अपने होंठ उसकी गर्दन पर रख दिये..

“अगर सीधे से मेरी बात मान लेती तो इतना मारना पीटना नहीं पड़ता ना.. !
अखंड परिहार दोस्तों के लिए दोस्त है तो दुश्मनो के लिए दुश्मन..
तुझे अपने चेहरें का बहुत घमंड है ना साली, ऐसा हाल करूँगा की बाहर किसी को दिखाने लायक नहीं रह जायेगा अपना ये रेशमी मुलायम चेहरा.. ।”

उसने रेशम को धक्का दिया और वो ज़मीन पर गिर गयी..

कहीं से रौशनी की एक किरण भी नजर नहीं आ रहीं थी.. इतने घुप्प अँधेरेे में खुद को टटोलते हुए वो पीछे की तरफ सरकने लगी..।
उसके पीछे बंधे हुए हाथ इधर उधर कुछ खोजते भी जा रहें थे, कि जो हाथ लगे इसके सर पर फेंक कर मारे लेकिन उस हवशी पर जैसे भूत सवार हो गया था, उस ने नीचे बैठ कर अंदाज़े से टटोल कर रेशम का पैर पकड़ा और पूरा दम लगा कर उसे अपनी तरफ खींच लिया….

रेशम का लहंगा किसी लकड़ी में फंस कर चिर गया  और वो ज़ोर से चीख पड़ी….
डांस परफॉर्मेंस सही हो जायें इसलिए उसने सुबह से कुछ खाया पिया नहीं था.. उस पर डांस के बाद एक के बाद एक उस पर जो वज्रपात हुआ था उसने उसे हिला कर रख दिया था..।
तन मन से टूटी पड़ी थी वो !

अपनी अवशता पर उसे गुस्सा आ रहा था…
उसे अपने घर की, अपनी माँ की बेहद याद आ रहीं थी..।
और कैसी अजीब सी बात थी कि इतनी सारी उलझनों में फंसने के बाद उसे ज़ोर से भूख भी लगने लगी थी..।
रेशम परेशान थी, बेहद परेशान ।
एक लड़का उसकी इज्जत से खेलने की कोशिश कर रहा था और अपनी इज्जत बचाने में लगी होने के बावजूद अचानक उसे पेट की भूख का आभास कैसे होने लगा था?

क्या वह बाकी लड़कियों से कुछ अलग थी? या पेट की भूख और गले की प्यास कभी वक्त नहीं देखा करती? उसके शरीर का शुगर लेवल कम होने लगा था। आंखों के आगे अंधेरा सा छाने लगा था। लेकिन वह बेहोश नहीं होना चाहती थी। क्योंकि उसे लग रहा था अगर वह बेहोश हो गई तो यह लड़का उसे कहीं का नहीं छोड़ेगा।

लेकिन दूसरी तरफ उसके मन में एक सवाल और उठ रहा था कि उसे इस कमरे में दाखिल हुए लगभग 15 मिनट बीत चुके थे, बावजूद यह अखंड परिहार उसके साथ खिलवाड़ पर खिलवाड़ क्यों किए जा रहा है..?

अखंड परिहार उसके साथ बिल्कुल चूहे बिल्ली का खेल खेल रहा था। जैसे उसे इस सब को करने में एक अलग ही मजा आ रहा हो। वह बेचारी अपनी इज्जत बचाने के लिए परेशान हुई जा रही थी कि तभी एक बार फिर उसने अपने दोनों बाहों से उसकी कमर को कस कर पकड़ लिया।

इस बार वो उसके सामने था। उसके ठीक सामने, लेकिन अपनी आंखें पूरी तरह खोलने के बावजूद वो उसके चेहरे को बिल्कुल भी नहीं देख पा रही थी।
ऐसा लग रहा था जैसे उसने अपनी देखने की क्षमता पूरी तरह से खो दी हो।
    गुटके और डिओडरेंट की मिली-जुली गंध उसकी नाक से समाते हुए उसके जिस्म में फैलती जा रही थी। और उसे इस गंध से ही नफरत हो गई थी।

सामने खड़े अखंड ने खींचकर उसे अपने सीने से लगा लिया और उसकी पीठ पर अपने हाथ चलाने लगा। रेशम का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच रहा था।

        उसके दोनों बाँहे पीछे की तरफ बांध दी गई थी.. और अब उसे अपने दोनों कंधों पर इतना दर्द महसूस हो रहा था कि उसकी आंखें बहने लगी थी!
अपना पूरा जोर लगाकर रेशम ने अपना मुंह खोला और बड़ी ज़ोर लगाकर अपने मुहँ में ठूंसा रुमाल किसी तरह बाहर निकाल फेंका और सामने खड़े उस लड़के के गले पर अपने दांत गड़ा दिए!

वह लड़का जोर से चिल्ला पड़ा !  गुस्से में बिलबिला कर
  उसने रेशम के चेहरे को पकड़कर उसके माथे पर अपने माथे से ज़ोर से टक्कर मार दी …
लेकिन टक्कर माथे पर नहीं रेशम की नाक पर लगी और उनकी नाक से खून बहने लगा। वो गुस्से में इतना पागल हो गया था, उसने रेशम का चेहरा अपने दोनों हथेलियों में पकड़ा और अपने माथे से लगातार उसके माथे को पीटने लगा।
रेशम चीखती रही और लड़का कुछ देर के लिए अपने आपे को खो बैठा।
   उस लड़के ने रेशम के चेहरे को वापस अपने हाथों में लिया और उसके करीब पहुंच गया…

” अब तक सिर्फ मेरा जुनून देखा ना तूने, अब तू मेरा प्यार भी देखेगी। तेरे इन रसीले होठों को चूमने के लिए जाने कब से तड़प रहा था आज मेरे साध पूरी हो जाएगी…!”

रेशम के पूरे शरीर में चीटियां रेंगने लगी। उसे उस लड़के का गंदा लिजालिजा स्पर्श बार-बार खुद से ही नफरत करने को मजबूर कर दे रहा था।
रेशम को ऐसा महसूस हो रहा था जैसे वह किसी गंदे से दलदल में गर्दन तक धन्सी हुई है,और उसके दोनों पैरों को पकड़कर कोई लगातार नीचे खींचता जा रहा है।

    और यह दलदल अब उसकी नाक तक पहुंच गया है। उसे सांस लेने में भी कठिनाई हो रही है। वह लड़का धीरे-धीरे उसके चेहरे पर झुकने लगा, उसके होठों के पास वह पहुंचा ही था कि उस कमरे के दरवाजे पर जोर जोर से किसी ने दस्तक देनी शुरू कर दी….

रेशम ने खुद को उस लड़के से छुडाने की ज़द्दोज़हद तेज़ कर दी, वो तेज़ी से अपने चेहरें को इधर उधर घुमाने लगी… लड़का भी दरवाजे पर दस्तक सुनकर चौंक गया।

दस्तक देने वाला जोर जोर से दरवाजे को पीटकर चिल्ला रहा था कि दरवाजे को खोल दो।

अंधेरा बहुत था रेशम ने अपने सामने बैठे उस लड़के के चेहरे पर आई कुटिल मुस्कान को नहीं देखा और वह किसी तरह अपने कंधों से उस लड़के को धक्का देकर एक तरफ से आगे बढ़ने को हुई कि उस लड़के ने बड़ी आसानी से रेशम को पीछे से उसके दोनों बाहों को पकड़कर जोर से खींचा। उसकी बांह मरोड़ जाने से रेशम चिल्ला पड़ी और तभी उस लड़के ने रेशम की गर्दन पर कान के ठीक निचले हिस्से के ऊपर एक जोर का तमाचा मारा।
      उसका हाथ बिल्कुल सही नस पर लगा और पल भर में रेशम बेहोश होकर वहां गिर पड़ी..
उस लड़के को जो करना था उसने कर दिया था। वो बड़े आराम से खड़ा हुआ और एक तरफ से निकलकर उस स्टोर रूम के पिछली तरफ बने बाथरूम में गया। बाथरूम में लगे आईने में अपने चेहरे को देखकर उसने अपने सारे घाव साफ किये,तब तक दरवाज़े पर की दस्तक और तेज़ हो गयी थी, कोई दरवाज़े को ऐसे पीट रहा था जैसे तोड़ कर ही दम लेगा..

“अरे ज़रा सबर करो अखंड बाबू ! आपके अंदर घुसने में अभी वक्त है !” खुद में बड़बड़ाते हुए उसने उस स्टोर  रूम में पड़े सामान में से छोटी सी पट्टी लाकर अपने गर्दन के दांत वाले निशान पर और गाल पर लगे कट पर चिपका ली..
उसके साथ ही उसने अपने गमछे को इस तरीके से अपनी गर्दन और चेहरे पर लपेटा की उसमें बड़ी आसानी से उसके ताज़ा ताज़ा घाव छिप गये।

बाथरूम पर पिछली दीवार पर खिड़की थी जिसमे तिर्यक कोण बनाते कांच लगे थे.. उसने दोनों कांच को बड़ी सलीके से निकाला और खिड़की पर चढ़ गया। खिड़की पर चढ़ने के बाद उसने उन दोनों कांच के टुकड़ों को उठा लिया और बाहर की तरफ कूद गया।
बाहर कूदने के बाद उसने उन खांचो में इन कांच के टुकड़ों को वापस लगाया और हाथ झाड़ते हुए वहां से निकल गया….

कुछ दूर पहुँचने पर एक लड़का भागा सा उसके पास चला आया..

“धीरू भाई कहाँ चले गए थे आप ?”

“कहीं नहीं.. अभी सीधा लाइब्रेरी की तरफ चलो.. उधर कुछ तो गड़बड़ चल रहीं है.. !”

“क्या हुआ.. ?”

“चलो तो सही.. !”

वो मुश्किल से स्टोर रूम से दस कदम दूर ही पहुंचा था, की अपने पंटर को साथ ले वापस मुड़ कर तेज़ी से स्टोर रूम की तरफ बढ़ गया..

क्रमशः

aparna….

.

5 1 vote
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Newest
Oldest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments