
जीवनसाथी-3 भाग -84
दिल्ली के अपने होटल रूम में परेशान सी बैठी सरु चाय पी रही थी कि उसका फ़ोन रिंग करने लगा… उसने घबरा कर फ़ोन उठाया और नंबर देखते ही उसके होश उड़ गए..
वासुकी के नंबर से उसे फ़ोन आ रहा था..
वो सोच ही रही थी कि फ़ोन उठाऊं या नहीं कि तभी फ़ोन कट गया… उसने राहत की साँस भरी कि वापस फ़ोन आने लगा..
अबकी बार अपनी सारी हिम्मत जोड़ कर उसने फ़ोन उठा लिया..
अगली तरफ से वासुकी की धीर गंभीर आवाज़ गूंज गयी..
“सारिका !”
“जी अनिर भैया !”
“कहाँ हो इस वक्त ?”..
“दिल्ली में हैं !”
“गुड़िया कहाँ हैं ?”
सारिका का गला सूखने लगा, वासुकी का व्यक्तित्व कुछ ऐसा था कि उसके सामने अच्छे अच्छों की बोलती बंद हो जाती थी!
हमेशा का झूठा निकम्मा इंसान भी वासुकी की आंखे देख ले या आवाज़ सुन ले तो सच बोल जाता था, फिर ये तो सरु थी.. जिस पर वासुकी के जाने कितने एहसान थे..
सारिका की आँखों में आंसू चले आये..
उसने वासुकी को शुरू से लेकर अंत तक की सारी बातें एक साँस में बता दी….
वासुकी वैसे भी कम बोलता था, लेकिन उसकी हाँ हूँ भी एकदम से शांत हो गयी और सारिका समझ गयी कि वासुकी का गुस्सा सांतवे आसमान पे पहुँच चुका है..!
वो जानती थी इस सब में वासुकी की कोई गलती नहीं थी.. उसके साथ उसके अतीत में जो बीत चुका था, उसके बाद उसकी जगह और कोई भी होता तो शायद यही करता!
“हमें माफ़ कर दीजिये अनिर भाई, कली को छोड़ कर जाना हमारी मज़बूरी हो गयी थी.. !”
“ऐसी कैसी मज़बूरी, उसे साथ लेकर भी तो काका के पास जाया जा सकता था ना ?”
“लेकिन फिर उसका प्रोजेक्ट कैसे हो पाता ? वह तो अपने किसी प्रोजेक्ट के लिए यहाँ आयी है ना ?”
” सारिका तुम्हें अब तक समझ में नहीं आया कि कली ने मुझसे झूठ बोलकर इंडिया जाने का प्लान बनाया। मैं जानता हूं कि उसके साथ उसकी कोई दोस्त यहां से नहीं गए, सिर्फ तुम गई हो उसके साथ !”
“हाँ दोस्त तो साथ नहीं आ पाए, वो लोग बाद में पहुँचने वाले थे अनिर भाई !”
“कोई नहीं पहुंचा वहाँ सारिका.. कली तुम्हे बेवकूफ बनाती रही और तुम बनती रही.. गलती मेरी ही थी, सब कुछ जानते हुए भी मैंने उसे क्यों जाने दिया? मुझे लगा कि मैं मेरी बेटी पर कुछ ज्यादा ही बंदिशें डाल रहा हूं, बस इसीलिए यह सोचकर कि अगली फ्लाइट से मैं वहां पहुंच जाऊंगा और दूर रहकर उस पर नजर रखे रहूंगा, उसे जाने दे दिया। लेकिन किस्मत ऐसी खराब थी कि मेरी अगली फ्लाइट ही डिले हो गई और इतना डिले हुई कि कैंसिल हो गई। खैर अब मैं पहुंच चुका हूं और अब तुम्हें और कली को वापस लेकर ही जाऊंगा..।”
“आप अभी कहाँ हैं अनिर भैया ?”
“दिल्ली एयरपोर्ट में हूँ.. तुम कहाँ हो ?”
“हम रेलवे स्टेशन के पास हैं, कली यही पहुँचने वाली है, उसे लेकर हम एयरपोर्ट आते हैं !”
“नहीं.. तुम वहीँ रुको, मैं खुद स्टेशन आ रहा हूँ !”
“जी.. !”
.वासुकी ने ज़रूरत भर की बात करने के बाद फ़ोन रख दिया..
लेकिन सारिका की रूह कांप गयी.. उसे आज तक वासुकी ने कभी डांटा नहीं था। यहां तक की उससे उँची आवाज में बात तक नहीं की थी। लेकिन वह वासुकी का स्वभाव जानती थी, वह कभी किसी गलत बात के लिए रोकता टोकता नहीं था, और उसने जिस बात के लिए कली को टोका था वही गलती कली से हो गई थी।
और कहीं ना कहीं कली के महल पहुंचने के पीछे सारिका का गैर जिम्मेदाराना बर्ताव भी जिम्मेदार था।
अगर उसने कली की जिद मानकर उसे अकेला ना छोड़ा होता तो आज कली उसके साथ होती और उसे इस तरह वासुकी के सामने शर्मिंदा न होना पड़ता।
सारिका को पहली बार कली पर भी बेहद गुस्सा आ रहा था, उसे वासुकी से ज्यादा डर दर्श का था।
वासुकी तो फिर भी उस पर सर्द निगाह डाल कर रह जायेगा, लेकिन उसकी इस गलती पर दर्श उसे कभी माफ़ नहीं करेगा..।
उसने अपना पर्स और सामान उठाया और होटल के कमरे से बाहर निकल गयी..
उसने सीधे रेलवे स्टेशन की कैब ली और स्टेशन की तरफ निकल गयी..
कैब में बैठ कर उसने अपना फ़ोन निकाला और कली को फ़ोन लगा दिया.. उसने सोचा कली को भी वासुकी के आने के बारे में बता देना चाहिए, लेकिन ट्रेन में होने के कारण कली का फ़ोन नहीं लगा..
दो एक बार प्रयास करने के बाद सरु ने फ़ोन पर्स में डाल लिया..
***
शौर्य कली के साथ हर्ष के कूपे में आ गया था..
हर्ष मीठी के साथ धनुष यश और मीरा भी वहाँ थे.. कली को आते देख सबसे पहले मीठी अपनी जगह पर खड़ी हुई और आगे बढ़कर उसने कली को गले से लगा लिया।
“कली तुम इस ट्रेन में कैसे ?”
कली मीठी की बात का कोई जवाब देती, उसके पहले ही हर्ष ने भी वही सवाल पूछ लिया।
” हां क्या तुम्हारा भी आज ही दिल्ली जाने का प्रोग्राम था? पर तुमने कुछ बताया नहीं।”
हर्ष आश्चर्य से शौर्य की तरफ देखने लगा, शौर्य ने कंधे उचका दिए।
” मुझे भी नहीं पता था हर्ष भाई, कि कली आज दिल्ली जा रही है।”
हर्ष को शौर्य की बात समझ में नहीं आई। उसने सवालिया नजरों से शौर्य और फिर कली को देखा और फिर मीठी की तरफ देखने लगा..
मीठी ने हर्ष की निगाहों के जवाब में पलके झपका दी और इशारों में उसे जता दिया कि वह खुद भी कली के जाने के बारे में कुछ नहीं जानती थी।
कली को केबिन के अंदर बुलाकर मीठी अपनी जगह पर बैठ गई। सारे लड़के सामने की सीट पर बैठे हुए थे। हर्ष के बगल से यश धनुष और अब शौर्य बैठ गया था। उनके सामने वाली सीट पर मीठी और मीरा बैठे हुए थे। कली को आते देख, मीरा भी अपनी जगह पर खड़ी हो गई।
लेकिन अपने एटीट्यूड को बनाए रखने के लिए वह आगे बढ़कर कली को गले से नहीं लगा पाई, लेकिन उसने कली के हाथ थाम लिये।
कली को अपने साथ लाकर उसने अपनी बगल की सीट पर बैठा लिया और धीरे से उसके कान में अपना सवाल पूछ लिया।
” तुम ठीक तो होना?”
कली ने धीरे से हां में गर्दन हिला दी, लेकिन वह खुद भी कहां जानती थी कि वह ठीक है या नहीं? अब तक सरू और अपूर्व की बातों से वह परेशान थी और अब शौर्य के मन का हाल जानकार उसकी परेशानी और ज्यादा बढ़ गयी थी..
वह पल भर के लिए इस सोच में गुम हो गई थी कि क्या शौर्य के मन में चल रही बातें उसके साथ रहने वाले लोगों को नहीं मालूम?
क्या रानी बांसुरी इस बात से अनभिज्ञ है कि शौर्य के मन में राजा साहब के लिए कितनी कटुता आ गई है ?
क्या हर्ष धनुष और यश उसके तीनों पक्के दोस्त, उसके भाई उसके मन में चल रहे कोलाहल को नहीं जानते?
क्या शौर्य इन सबसे अपने मन की बातों को साझा नहीं करता?
लेकिन इतना हंसने मुस्कुराने वाला लड़का अपने अंदर इतना गहरा समंदर लिए बैठा है ये कौन सोच सकता है? तो क्या इस पूरी दुनिया में वह अकेली है, जिससे शौर्य ने अपने मन की बातें साझा की है?
वह कुछ ऑस्ट्रेलिया में घटी बातें भी बता रहा था,अगर उस वक्त विक्रम नहीं आ गया होता तो अपने बचपन में घटी वह घटना शौर्य उसे बता चुका होता, और हो सकता है उस घटना को जानने के बाद कली उसकी कुछ मदद कर पाती।
वैसे शौर्य को वाकई मदद की जरूरत थी, और कली ने इस बात को ठान लिया था कि वह उसकी मदद करके रहेगी।
विक्रम भी उस कुपे में पहुंच चुका था, उसने शौर्य के ऊपर वाली सीट पर चढ़कर अपना कब्जा जमा लिया। यश भी अपनी जगह से उठकर ऊपर ही चला गया। अब सारे लोग इस कूपे में मौजूद थे। सब की बातों के दौर चल रहे थे। बातों ही बातों में हर कोई घूम फिर कर हर्ष को छेड़ जाता था, आखिर शौर्य ने हर्ष से कह ही दिया..
” तो हर्ष भाई हम सबको खुशखबरी कब सुना रहे हैं आप?”
हर्ष ने हल्के से मुस्कुरा कर सामने बैठी मीठी की तरफ देखा।
मीठी झेंप कर खिड़की से बाहर देखने लगी। कांच में उसका चेहरा नजर आ रहा था, और उसके चेहरे पर खिलते गुलाब देखकर हर्ष मुस्कुरा रहा था।
उन दोनों को देखकर वहां मौजूद हर किसी के चेहरे पर रौनक चली आई थी। बस एक कली ही थी जो जरा गुमसुम सी बैठी शौर्य को देख रही थी। उसका मन किसी भी बात पर नहीं लग रहा था..
“मीठी तुम कुछ बताओ ।” हर्ष ने शौर्य की बात का जवाब देने के लिए मीठी से ही कह दिया। मीठी ने बाहर देखते हुए ही ना में गर्दन हिला दी। ऊपर बैठा यश उसे छेड़ने लगा..
“अच्छा मीठी मुझे एक बात बताओ।”
मीठी ने यश की तरफ देखा..
‘क्या जानना चाह्ते हो ?”
” यही कि तुम्हारी शादी के बाद मैं तुम्हें ऐसे ही मीठी बोलूंगा या भाभी साहब बोलूंगा..।”
मीठी यश की इस बात पर भी झेंप गई, लेकिन हर्ष नहीं शरमाया। उसने मीठी के बदले यश की बात का जवाब दे दिया।
” बिल्कुल भाई, भाभी साहब ही बोलोगे..।
और शादी के बाद क्या, अभी से बोलने की प्रैक्टिस कर लो। क्योंकि ऐसा ना कि हमारे फेरे चल रहे हो और तुम दूर से मीठी-मीठी करके पुकार मचा दो।
अच्छा नहीं लगेगा न इसीलिए, तुम सबसे कह रहा हूं अभी से भाभी बोलने की प्रैक्टिस कर लो..।”
“मुश्किल तो है, बचपन से जिसका नाम लेते आए हैं जिसकी चोटी खींचकर उसे चिढ़ाते आए हैं, उसे अचानक भाभी साहब बुलाना कठिन लगेगा..।”
” कठिनाइयों से लड़ने की आदत डालिये प्रिंस !”
विक्रम ने मुस्कुरा कर यश को टोक दिया..
शौर्य अपनी जगह से उठ कर मीठी के सामने चला आया..
“मीठी.. मेरा मतलब भाभी साहेब आपका यह अदना सा देवर आपके लिए एक तोहफा लेकर आया है..।”
मीठी आश्चर्य से शौर्य को देखने लगी। शौर्य मीठी के ठीक सामने घुटनों को मोड नीचे ही बैठ गया था।
उसे नीचे बैठते देख मीठी ने हीं उसके हाथ थाम लिए।
“प्लीज शौर्य नीचे मत बैठो।”
मीठी ने शौर्य के हाथ थाम कर उसे अपनी बगल में बैठा लिया। मीठी के ठीक बाजू में बैठी कली जरा सरक गई, और शौर्य उन दोनों के बीच की जगह पर थोड़ी सी जगह बस लेकर बैठ गया।
उसने मीठी की हथेली सीधी की और अपनी जेब से निकलकर एक लॉकेट मीठी के हाथ में रख दिया…
प्लेटिनम कि पतली सी चेन में एक खूबसूरत सा लॉकेट शौर्य ने मीठी की हथेली पर रख दिया..
मीठी ने उस लॉकेट को देखा और शौर्य कि तरफ देखने लगी..
“खोल कर देखिये !”
मीठी ने लॉकेट खोल दिया, उसके अंदर से एक हल्का सा म्यूजिक सुनाई देने लगा और साथ ही लॉकेट के अंदर लगी हर्ष और मीठी की तस्वीर नजर आने लगी। मीठी की खुशी का ठिकाना नहीं था।
उसने खुशी से शौर्य की तरह देखा और धीरे से “थैंक यू” बोल दिया।
शौर्य ने सर झुका कर अपनी होने वाली भाभी का आभार ग्रहण कर लिया। हर्ष ने मीठी का वह लॉकेट देखने के लिए अपना हाथ बढ़ा दिया, और मीठी ने बड़े प्यार से वह लॉकेट हर्ष के हाथ में रख दिया।
” देखने से कुछ नहीं होने वाला है, अपने हाथ से पहना भी दीजिए।”
धनुष की इस बात पर हर्ष ने लॉकेट को चारों तरफ से देखा और शौर्य की तरफ देखकर मुस्कुरा दिया।
” बड़ी अच्छी पसंद है तुम्हारी, वैसे मुझे डाउट है कि यह तुमने खुद पसंद किया है या किसी की मदद ली है।हर्ष ने बोलते बोलते कली की तरफ देखा। लेकिन कली खुद आश्चर्य से उस लॉकेट और चेन को देख रही थी। क्योंकि उसे खुद मालूम नहीं था कि शौर्य यह कब लेकर आया।
शौर्य हंसते हुए अपनी जगह पर जा बैठा ।
“आपको गिफ्ट पसंद आया ना। अब वह पसंद किसने किया है,ये आप मुझ पर छोड़ दीजिए। आप हमारी भाभी साहब के गले में पहना दीजिए, बस।'”
हर्ष ने मुस्कुरा कर मीठी की गर्दन में वह प्यारी सी चेन पहना दी।
मीठी ने खुश होकर सभी को थैंक्स बोला और अपनी जगह पर बैठ गई।
” इस बात पर तो कुछ मीठा होना चाहिए, क्यों?”
मीरा खुशी से बोल पड़ी।
” तुमसे बस इसी बात की उम्मीद थी।”
धनुष ने मीरा को टोका और मीरा ने अपना मुंह बना लिया।
” मुंह बनाने से बेहतर होगा कि तुम्हारी सीट के नीचे रखे बैग को बाहर निकालो, उसकी जिप खोलो, उसमें मिठाई का एक बड़ा सा डिब्बा है।”
मीरा ने जैसे ही यह सुना, उसने तुरंत अपनी सीट के नीचे रखे बैग को बाहर निकाला और उसमें से मिठाई के बड़े से डिब्बे को बाहर निकाल लिया। उसमें छोटे-छोटे मेवा बाइट्स के ढेर सारे टुकड़े रैप किए हुए रखे थे। उसने तुरंत एक टुकड़ा उठा लिया। धनुष ने उसे फिर से टोक दिया
” अरे भुक्कड़, पहले दूसरों को भी दे दो। फिर तुम पूरा डिब्बा फिनिश कर लेना ।”
“सच्ची यह पूरा बॉक्स मेरा है ?”
मीरा ने एक बार फिर अपनी बेवकूफी दिखा दी।
” तुम ये दो किलो का बॉक्स खा लोगी?”
धनुष ने पूछा और मीरा ने आश्चर्य से उस बॉक्स को देखा
” यह दो किलो तो नहीं लग रहा।”
” मिठाइयों का अपना भी वजन होता है मैडम। डिब्बे के साइज से उसके वजन का कोई खास लेना देना नहीं है।”
वहीं से हाथ बढ़ाकर धनुष ने मीठे का एक टुकड़ा उठा लिया..
हर्ष और मीठी ने अपने हाथ में उठा रखे मिठाई के टुकड़े को एक दूसरे को खिला दिया। उनके ऐसा करते ही वहां मौजूद हर किसी ने तालियां बजाकर उन दोनों का स्वागत किया।
एक तरह से देखा जाए तो शाही परिवार के बच्चों के बीच ही बुंदेला परिवार के होने वाले राजा, राजकुमार हर्षवर्धन सिंह बुंदेला ने अपनी भाभी पत्नी का चयन कर लिया था।
बातों ही बातों में सफर कब बीत गया, उन लोगों को पता भी नहीं चला। इस बीच कली अपने फोन को पर्स में डालकर भूल गई थी। उसने फोन को चार्ज भी नहीं किया था और इसीलिए उसका फोन बंद हो गया था। सरू ने स्टेशन पहुंचने के बाद भी कली को फोन लगाना चाहा, लेकिन कली का फोन अब बंद आने लगा था। सरू को इस बात का आज बेहद अफसोस हो रहा था, कि वह कली के साथ रहने वालों के नंबर भी ले चुकी होती, तो आज किसी तरह ही सही संपर्क तो साध पाती, लेकिन आज उसके पास कोई चारा नहीं बचा था। दिल्ली आने में सिर्फ 10 -15 मिनट का समय शेष था।
महल के शाही बच्चों के साथ उनके हेल्पर भी आए हुए थे, जो दूसरे कूपे में मौजूद थे। दिल्ली आने के कुछ पहले एक-एक कर सारे हेल्पर वहां आने लगे, और उन लोगों ने सारा सामान इकट्ठा करना शुरू कर दिया। हर्ष यश और शौर्य के साथ उनकी सिक्योरिटी भी सादे कपड़ों में मौजूद थी। राजा को खुद भी पसंद नहीं था कि वह सिक्योरिटी के साथ चले। बस वही हाल उनके बच्चों का भी था। दिल्ली आने के ठीक पहले सिक्योरिटी और हेल्पर ने मिलकर सारा सामान एक साथ दरवाजे के बाहर रखकर सारे सदस्यों को घेर लिया..
कुछ देर में ही दिल्ली स्टेशन आ गया दिल्ली स्टेशन पर गाड़ी जैसे ही रुकी एक-एक करके हेल्पर सामान उतारने लगे। हर्ष की सिक्योरिटी के लोग नीचे उतर गए उनके उतरने के बाद धनुष यश और मीरा उतरे..
ट्रेन प्लेटफॉर्म पर रुक चुकी थी , और ट्रेन के एसी फर्स्ट क्लास कम्पार्टमेंट का दरवाज़ा खुला हुआ था..
हर्ष और मीठी एक साथ एक के पीछे एक उतरे और
हर्ष और मीठी के पीछे ही मुस्कुराती हुई कली दरवाज़े पर चली आयी..
लेकिन दरवाज़े के ठीक सामने प्लेटफॉर्म पर वासुकी खड़ा था…
कली कि नजर वासुकी पर पड़ी और वो वहीँ ठिठक कर खड़ी रह गयी..
वो सर्द नज़रों से अपनी लाड़ली को महल के लोगों के बीच हँसते खिलखिलाते देख कर स्तब्ध खड़ा था..
क्रमशः

Bahut hi Khubsurat and Shandaar n Jaberdast n Bahtareen n Lajabab part.
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बेहद खुशी हो रही है हर्ष और मीठी को साथ देखकर थोड़ी बहुत ना नौकर और परेशानियों के बाद आखिरकार मीठी हर्ष की महारानी साहब बन ही जाएगी।
इस मीरा का कुछ नहीं हो सकता एक नंबर की भुक्कड़ लड़की है यह बेचारा धनुष जीवन भर इसे खिला खिला के ही परेशान होता रहेगा।
कली के दिमाग में गहरी उथल-पुथल मची हुई है उसे तो बस अपने शौर्य के दिमाग में उसके पिता के खिलाफ भरे हुए जहर को ही निकालना है अब वह चाहे कैसे भी निकले।
अरे यह क्या वासुकी तो सामने ही खड़े हैं अपनी बेटी के अब पता नहीं वसुवि का गुस्सा किस तरीके से निकलेगा शुरू और कली पर।
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बेहद खूबसूरत भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻♥️♥️♥️♥️💐💐💐
बहुत लाजबाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻♥️♥️♥️♥️♥️♥️💐💐💐💐💐💐⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐
Wow aakhir sare bachhon ne harsh aur mithi ke riste ko swikriti de di.upar se shaurya ka wo gift bahut hi khubsurat laga.kali khud me itna uljh gayi hai ki samjh nahi pa rahi ki wo kya kare.use shaurya ki chinta hai par asli dhamaka toh station par pahunch chuka hai.siper part mam 😘😘😘😘
Bht hi mazedaar part ab vasuki kya krega next part m dekha h lakin ab Kali shorya ko apurv k jal se nikal kr hi rhegi
Kali ke sath ab kya hota hai ,anir ab sab ke samne kya karega.. nice part.
Very nice.