अपराजिता -60
हर किसी को अब शाम का इंतज़ार था…
आईने के सामने अपनी सलीक़े से ट्रिम करी दाढ़ी पर कंघी फिराते हुए खुद को देख देख कर मुस्कुराते यज्ञ को…!!
अपने कमरे में औरतो से घिरी बैठी तैयार होती कुसम को… !!
अपनी बालकनी में खड़े विचारो में खोये राजेंद्र को और
अपने घऱ के आंगन की सीढ़ियों में चाय का प्याला पीती निनाद की यादों में खोयी भावना को…
यज्ञ आईने के सामने खड़ा खड़ा खुद को निहार रहा था कि अखंड उसके कमरे में चला आया…
अखंड ने गहरे मेरून रंग का कुरता पहना था जो उस पर बहुत फब रहा था..।
उसके लिए यह कुर्ता यज्ञ ही पसंद करके लाया था, और यज्ञ ने जो पहना था वह कुर्ता उसके लिए उसके बड़े भाई अखंड ने पसंद किया था। और आज सही मायने में यज्ञ बहुत सुंदर दिख रहा था।
दोनों भाइयों के चेहरे में गजब का साम्य था। दोनों की एक सी कद काठी थी और रंग रूप भी लगभग एक सा था!
लेकिन जहां अखंड की बड़ी-बड़ी आंखों में एक सौम्य सी शांति नजर आती थी, वहीं यज्ञ की आंखों में एक अलग सा चुलबुलापन था!
बस यही अंतर दोनों भाइयों के चेहरे में थोड़ा सा 19- 20 का फर्क ले आता था..
पर दिखने में दोनों ही एक से बढ़ कर एक सजीले बन्ने थे..
अखंड ने यज्ञ को देखा और हल्का सा मुस्कुरा उठा..
” बहुत प्यारा लग रहा है हमारा भाई, किसी की नजर ना लगे..।”
अपलक यज्ञ को देखते अखंड ने अचानक अपनी आंखें दूसरी तरफ घूमा ली।
” नहीं देखते तुम्हें यूँ, कहीं हमारी नजर ना लग जाए।”
” पागल है क्या भैया? आपकी मुझे क्या नजर लगेगी? आप तो मुझे लगने वाली हर नजर को मुझसे दूर काटकर फेंक देते हैं।”
” जिसे खुद अपनी नजर लग गई हो, वह क्या किसी की नजर काटेगा भाई?”
” ऐसी बातें मत कीजिए भैया, आप खुद जानते हैं कि सच्चाई क्या है? आपकी जगह कोई और लड़का होता तो उस लड़की को मसल कर फेंक कर अब तक आगे बढ़ चुका होता। और अब भी उन्हीं अंधियारी गलियों में भटक रहे हैं..।”
” कैसे कहें कि, अब उस से कोई लेना-देना नहीं रह गया है यज्ञ।
वैसे अब हम उसे भूलने की कोशिश में कामयाब होने लगे हैं!”
” किस से झूठ बोल रहे हैं भाई आप? आपकी आंखों में आज भी उस लड़की का अक्स नजर आता है।
हमारा बस चलता तो हम उसे दुनिया के किसी भी कोने से खोज कर ले आते, और आपके चरणों में डाल देते।
लेकिन हमारा बस चलने के लिए आपने कोई कसर ही नहीं छोड़ी। अपनी कसम जो दे दी थी।
खैर छोडिए! हम जानते हैं, आपको हमसे या किसी और से यह सारी बातें करना पसंद नहीं है। इसीलिए हम इस बारे में आपसे कुछ नहीं कहेंगे, क्योंकि यह आपका बहुत ज्यादा व्यक्तिगत मामला हो जाता है।
आपने बहुत विश्वास करके हमसे उस लड़की के बारे में बताया था, इसलिए हमने घर पर भी आज तक कभी किसी से रेशम की चर्चा नहीं की, और ना ही करेंगे। लेकिन बस आपसे हाथ जोड़कर प्रार्थना करते हैं कि अब उस लड़की को भूलकर अपनी जिंदगी में आगे बढ़ जाइये।
इस इलेक्शन के बाद आप भी शादी कर लीजिए भैया!”
अखंड ने मुस्कुरा कर यज्ञ के कंधे पर हाथ रखा और उसे धीरे से दबा दिया।
” भाई अब इस जन्म में तो हमारी शादी होने से रही। तुम्हारी शादी का लड्डू ही खाकर हम खुश हो जाएंगे। दिल से आशीर्वाद देते हैं कि तुम और तुम्हारी दुल्हन बहुत खुश रहो, और इस दुनिया की सारी खुशियां तुम दोनों के आंगन में उतर आएं।
चलो कुआं पूजाई के लिए अम्मा तुम्हें नीचे बुला रही है..।”
“चलिए..!”
दोनों छैल छबीले बांके नौजवान सीढ़ियां उतर कर नीचे चले आए।
उन दोनों की सुंदर सजीली जोड़ी को देखती वहाँ कई जोड़ी कुंवारी आंखे आह भर कर रह गयी…
अम्मा ने अपने लाड़ले को देखा और अपनी हथेली में रखी डिबिया से काजल निकाल कर यज्ञ के माथे पर गिरे बालों को एक तरफ हटा कर काजल की बिंदिया लगा दी।
वह इस बात पर नाराज हो गया, लेकिन उसकी अम्मा ने उसके बालों को वापस छोड़ दिया, तो वह काजल का निशान बालों के भीतर कहीं छुप कर रह गया।
” क्या करती हो अम्मा?”
” अरे इतना सुंदर दिख रहा है हमारा लड़का, कहीं किसी की नजर ना लग जाए।”
” अच्छा!! तुम तो हमें अब भी बच्चा ही समझ रही हो।”
यज्ञ ने प्यार से उलाहना दिया और वहीं बैठी दादी ने मुस्कुरा कर यज्ञ को छेड़ दिया।
” अरे नहीं समझ रहे हैं तुम्हें बच्चा! हम सबको भी पता है कि अब तुम बच्चा पैदा करने लायक खुद हो गए हो, जभी ना तुम्हारा ब्याह किए दे रहे हैं।
साल भर के अंदर इस आंगन में तुम्हारा लाला रोने लगेगा।”
यज्ञ ने शरारत से अपनी दादी को देखा और अपनी उंगलियों से गन का निशाना बनाकर दादी की तरफ निशाना साध गोली मारने का इशारा कर दिया..
दादी भी उतनी ही मजाकिया थी। उन्होंने भी धीरे से मरने का इशारा किया और दादी पोते की इस नौटंकी को देखकर वहां बैठी हर औरत खिलखिला कर हंस पड़ी।
अम्मा ने धीरे से डिबिया से उंगली में काजल निकाला और अखंड के कान के पीछे लगा दिया…
वो जानती थी अखंड इन बातों से चिढ जाता है, लेकिन लड़का कितना भी चिढ जाये अपनी माँ पर उसने कभी गुस्सा नहीं निकाला था, आज भी आशा के विपरीत वो मुस्कुरा कर रह गया..
घऱ पर सभी औरतें यज्ञ को साथ लिए कुंआ पूजने चल दी..।
वैसे वहाँ आदमियों का खास काम नहीं था, लेकिन फोटोग्राफर के साथ ही यज्ञ ने अखंड की बांह भी पकड़ रखी थी, जैसे आज ये छोटा अपने बड़के भैया को पल भर के लिए खुद से दूर करने को तैयार नहीं था…
कुंआ पुजाई चल रही थी कि उस घऱ का सबसे छोटा राजकुंवर भी सज धज के वहाँ चला आया..।
एक दिन पहले ही अखंड उसे गयी रात नशे की हालत में उसके किसी दोस्त के यहाँ से उठा कर अपनी जीप में डाल कर घऱ ले आया था…
और सुबह सुबह उसके कमरे में जाकर उसे समझा भी चुका था कि आज के दिन उसे पी पीला कर कोई तमाशा नहीं खड़ा करना है..।
बिना पिए वीर बहुत सलीक़े से रहता था, बाकी घऱ के सदस्यों की तरह वो भी अखंड को खूब मानता था.. लेकिन पीने के बाद उसकी मति मारी जाती थी..। पीने के बाद वह छुट्टा सांड हो जाता था। और सिर्फ शराब की लत होती तो बात और थी, उसे दुनिया भर के तमाम नशों की बुरी लत लग चुकी थी।
ठाकुरों के घऱ में पीने पिलाने का चलन ना हो ये मुश्किल था, इसीलिए वीर के लिए भी कोई मनाही नहीं थी..।
पूरे घर.में एक अखंड ही था जिसने कभी दारू सिगरेट को हाथ तक नहीं लगाया था..।
यज्ञ भी अपने दोस्तों और बड़ी कॉर्पोरेट मीटिंग्स में, ज़रूरत भर का ले लिया करता था..
लेकिन आज अखंड ने उसे और उसके दोस्तों को भी मना कर रखा था..
वीर भी सज संवर कर राजा बेटा बना, अखंड के बगल में खड़ा हो गया। और फोटोग्राफर ने तीनो भाइयों को एक साथ खड़ा कर उनकी तस्वीर उतार ली…
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भावना ने हाथ मुँह धोने से पहले अपनी मां की जिद पर चेहरे पर थोड़ा सा बेसन हल्दी और मलाई मिलाकर लगा लिया था।
मुंह धोने के बाद उसका चेहरा ताजे फूलों सा खिल उठा था अपने लहंगे को पहन वह आईने के सामने गोल-गोल घूम कर खुद को ही देख कर मचली जा रही थी। आज पहली बार भावना को लग रहा था कि भगवान ने भले ही रुपया पैसा देने में उस पर कृपणता दिखाई थी, लेकिन ईश्वर ने मुक्तहस्त से उस पर सौंदर्य दान किया था..।
अपनी खिंची खिंची लंबी आंखों में काजल डालने के बाद वह कुछ देर तक अपनी भीगी भीगी सी दिखने वाली पलकों को देखती रह गई थी। उसकी पलकें नैसर्गिक रूप से ऐसी नजर आती थी, जैसे किसी मॉडल ने अपनी पलकों पर मस्कारा लगाया हुआ हो। चेहरे पर हल्का सा पाउडर लगाने के बाद उसने गुलाबी रंग की लिपस्टिक लगा ली..
बालों को कंघे से वह झाड़ रही थी कि उसकी मां चली आई। उसकी स्टूल के ठीक पीछे खड़ी होकर उसकी मां ने उसके हाथ से कंघी ले ली और उसके बालों पर फेरने लगी।
सामने से बालों को जरा पीछे की ओर ऊंचा उठाते हुए उन्होंने हेयर पिन लगायी और बालों को बड़े कलात्मक तरीके से मोड़कर एक खूबसूरत सा जूड़ा बना दिया..
भावना के बाल भी काफी लंबे थे। इसलिए जूड़ा भी बहुत खूबसूरत बना था…
उस जूड़े पर एक तरफ से मोती की छोटी-छोटी पिन्स लगाकर एक मां ने अपनी बेटी को बिल्कुल सिंड्रेला बना दिया था..।
भावना खुद को देख कर ही झेंप गयी…।
उसने अब तक अपनी माँ से कुछ नहीं बताया था।
कब कैसे बताये यही सोच रही थी.. कि उसकी माँ ने ही चुप्पी तोड़ी..
“हम सोच रहे, ये नीली साड़ी पहन लेत हैं.. !”
“ये क्यों ! ये बड़ी फीकी सी है अम्मा.. कुछ अच्छा रंग पहनो ना, वहाँ तो सब रेशमी साड़ियों में होंगे !”
“नहीं लाड़ो, यही ठीक है हमारे लिए.. ! तुम तैयार हो गयी हो, अब हम भी कपड़े बदल लेते हैं.. ठीक है ना ?”
भावना ने हाँ में गर्दन हिला दी…
“अच्छा सुनो माँ, आज कोई आने वाला है…
भावना ने जितनी बुलंद आवाज़ में अपनी माँ को पुकारा था, उसके कहे वाक्य की समाप्ति तक में वो बुलंदी कहीं खो कर रह गयी और उसकी अम्मा सुनो माँ के अलावा और कुछ नहीं सुन पायी..
एक नजर उस पर डाल कर वो तैयार होने चली गयी…
माँ के जाते ही उसने कमरे का दरवाज़ा बंद किया और निनाद को कॉल लगा दिया…
निनाद ने भी तुरंत भावना का वीडियो कॉल उठा लिया..
भावना उसे स्क्रीन पर देखते ही शरमा गयी..
और निनाद…
वो भावना को देखता रह गया…
आज भावना का रंग ही बदला बदला सा था..
निनाद की जैसे पलकें झपकना भूल गयी थी।
उसके होंठ हल्के से खुले रह गए थे… माथे पर बिखर आये बालों को एक हाथ से समेट कर ऊपर किये वो आश्चर्य से भावना को देख रहा था..
उसका यूँ देखना देख कर भावना बुरी तरह से झेंप गयी..
“क्या हुआ ?”
“यू आर रियली गॉर्जियस बावना, लाइक क्वीन !”
भावना हल्का सा मुस्कुरा उठी… ” अब फ़ोन रखते हैं, जल्दी आइये !”
“सिर्फ आधा घंटा… आधे घंटे में मैं तुम्हारे गांव के बस स्टैण्ड पर होंगा… तुमने मना किया, वरना मैं मेरा टैक्सी तुम्हारे घर ही लेकर आता था.. !”
“नहीं… आप बस स्टैण्ड ही आइये.. वही ठीक है !”
और भावना ने फ़ोन काट दिया…
उसके फ़ोन पर अब तक कुसुम की दो मिस्ड कॉल हो चुकी थी…
उसने तुरंत कुसुम को फ़ोन लगा लिया..
“कहाँ हो भावी ? अब तक नहीं आयी ?”
“आ रहे हैं कुसुम… हमे भी तो तैयार होने दो..!”
“अरे, लेकिन… अच्छा सुनो एक गड़बड़ हो गयी है.. मतलब गड़बड नहीं, समझो अच्छा ही हुआ है.. !”
“हुआ क्या है ?”
“कल और परसो दोनों दिन कोई सरकारी छुट्टी पड़ रही, और उसके बाद शायद किसी मंत्री का आगमन होने से सरकारी कामकाज प्रभावित होंगे.. !”
“तो.. ?
“तो ये कि, हमारी कल सुबह जो रजिस्टर्ड मैरिज होनी थी, वो अब आज ही हो जाएगी.. !”
“लेकिन शाम में दफ्तर बंद हो जाता है ना !”
“हाँ लेकिन आगामी छुट्टियों के कारण आज आठ बजे तक खुला रखने का आदेश है, और जिनके अगले दो दिनों के ज़रूरी काम थे, सारे आज निपटाए जायेंगे… अभी डाक्टर साहब का फ़ोन आया था..
तो अब हमें जरा जल्दी निकलना पड़ेगा.. समझी.. इसलिए जल्दी आओ तुम !”
कुसुम का रात 9 बजे के आसपास घर से भागने का प्लान था, जो अब दो घंटे आगे खिसक गया था..
भावना ने सोचा था, सात बजे निनाद के पहुंचने के वक्त पर निनाद से मिल कर उसे अपने घर ले जाएगी, वहाँ उसे अपनी माँ से मिलवा कर सब समझा कर खुद कुसुम के पास चली जाएगी।
और जब कुसुम घऱ से निकलेगी, उसी वक्त उसके साथ ही निकल कर अपने घर पहुँच कर तुरंत निनाद और माँ के साथ पास के शहर तक चली जाएगी..।
जहाँ से निनाद ने उन तीनो की फ्लाइट टिकट बुक कर रखी थी..
लेकिन अब कुसुम को भी जल्दी ही निकलना था, ऐसे में भावना को समझ नहीं आ रहा था कि क्या किया जाये..
“ठीक है हम आ रहे हैं !” कह कर भावना ने फ़ोन रख दिया, लेकिन उसकी समझ से परे था कि अब क्या करे.. उसने राजेंद्र को फोन लगा दिया..
“हाँ बोलो भावना !”
“डॉक्टर साहब, अब क्या कुसुम को घऱ से जल्दी निकलना पड़ेगा ?”
“हाँ उसे सात बजे के आसपास निकलना पड़ेगा, तब तो यहाँ हम आठ बजे पहुँच पाएंगे ! वैसे तुम भी तो उनके साथ रहोगी ना ?”
“डॉक्टर साहब एक बात बतानी थी.. !”
“हाँ बोलो ना !”
“हमारे एक दोस्त आ रहे हैं। वो भी सात बजे तक ही पहुँच पाएंगे, और हमे उन्हें लेने के लिए बस स्टैंड भी जाना है।
अब उसी वक्त कुसुम को भी निकलना है.. मतलब आप समझ रहे ना.. हम समझ नहीं पा रहे कि क्या कैसे करे ?”
“इतना सोचने की क्या बात है भावना.. ?
तुम्हारी शेरनी को वैसे भी किसी की ज़रूरत नहीं होती..।
तुम हम दोनों की चिंता मत करो.. आराम से अपने दोस्त को अटेंड कर के फिर पहुँच जाना..।
वैसे दूर्वागंज से लगभग बीस मिनट ही लगेंगे तुम्हे ऑफिस पहुंचने में…।
गवाह में तुम्हें ही साइन करना है..
तुम नहीं रहोगी तो शादी होगी कैसे ?”
“जी… !” भावना क्या बताती कि वो तो कभी भी उनकी शादी में गवाह नहीं बन पायेगी…
पहले के प्लान के अनुसार अगर सब होता, तब कुसुम और राजेंद्र ने ये तय किया था कि आज रात भाग कर वो लोग कहीं छिप जायेंगे और फिर अगली सुबह कार्यालय में जाकर रजिस्टर्ड मैरिज करने के बाद हफ्ते भर के लिए
कश्मीर निकल जायेंगे…।
तब तक ठाकुर परिवार भी रो धो कर, नाराज़ होकर फुरसत पा लेगा। तब वो लोग वापस लौट कर सबसे माफ़ी मांग लेंगे…।
लेकिन अब प्लान में थोड़ा बदलाव आ गया था..
भावना को मालूम था राजेंद्र खुद कुसुम को लेने आने वाला है.. भावना ने उससे पूछ लिया….
“आप कहाँ है डॉक्टर साहब ?”
“मैं तो दूर्वागंज पहुँच चुका हूँ… अपनी शादी की शेरवानी पहन कर.. !”
अपनी बात बोल कर वो हँस दिया और उसकी हंसी भावना के चेहरे पर भी मुस्कान ले आयी…।
राजेंद्र हँसता बहुत कम था,लेकिन जब हँसता उसकी हंसी देख आसपास वाले भी खुश हो जाते थे..।
आज तो वो खुश था, बहुत खुश…।
उसकी सपनो की राजकुमारी से आज शाम शादी करने जा रहा था वो..
उसकी उम्मीदें, आशाएँ आज नवांकुरों में पल्ल्वित होने जा रही थी…
राजेंद्र सरना की छत पर खड़ा बेसब्री से घडी की सुइयों पर नजर गड़ाए बैठा था…
एक एक पल के साथ उसके दिल की धड़कने बढती जा रही थी..
सरना उसके लिए चाय लेकर आ गया..
छत पर खड़े राजेंद्र को दूर से हवेली की चमक दमक दिखाई दे रही थी.. ..
दुल्हन सी जगमगाती हवेली को देख पल भर के लिए उसका आत्मविश्वास डगमगा गया..।
क्या वो सही करने जा रहा है ?
क्या ये कुसुम के माँ पिता के साथ धोखेबाजी नहीं है..? कल को वो उसके रिश्तेदार बन जायेंगे, सगे संबंधी, तब कैसे उन्हें अपना मुहं दिखायेगा ?
इतना पढ़ा लिखा डॉक्टर और काम ऐसा गँवारो वाला..। दुल्हन को भगा कर ले गया..।
कुसुम के भागने पर बदनामी भी तो बहुत होगी !
लेकिन करे तो करे क्या ? या तो अपनी जात बिरादरी का सोच कर कदम पीछे हटा ले या फिर कुसुम का हाथ थाम ले।
क्यूंकि उसके चंद्रा भैया कभी उसके हाथ में कुसुम का हाथ नहीं देंगे.. !
मन ही मन चलते विचारों के कोलाहल को विश्राम देने उसने चाय का प्याला उठा कर मुहं से लगा लिया..
चाय मीठी थी.. भयानक मीठी..।
चाय पीते ही वो समझ गया कि चाय गेंदा ने बनायी है…
गेंदा को बारबार समझाने पर भी वो हर बार भूल कर चाय मीठी कर देती थी, और राजेंद्र को कम चीनी की चाय पसंद थी..
बहुत बार वो चाय पूरी पी नहीं पाता था और थोड़ी सी कप में छोड़ देता था..
लेकिन आज उसने घूंट घूंट कर के सारी चाय ख़त्म कर दी..।
आज उसके दिल की बेचैनी, उसके अलावा और कोई नहीं समझ सकता था.. !
जो सब उन लोगों ने प्लान कर रखा है, क्या वो सफलता पूर्वक हो पायेगा.. कहीं उनका प्लान फेल हो गया तो ?
फिर क्या होगा ? इस बारे में तो उसने सोचा ही नहीं था ? लेकिन उसे अपनी कुसुम पर पूरा भरोसा था, वो शेरनी अपने आगे बढ़ने के लिए कोई ना कोई रास्ता निकाल ही लेगी….।
कुसुम का ख्याल आते ही वो मुस्कुरा उठा…
पता नहीं क्या कर रही होगी वो खुरापाती लड़की…।
*****
कुसुम के कमरे में उसकी ब्यूटीशियन उसे सजा कर चली गयी थी…
कुसुम की दो सहेलियां उसके पास बैठी थी, बाकी की लड़कियां आकर उससे मिल कर नीचे चली जा रही थी….
उसकी दोनों सहेलियां उसके साथ कॉलेज में थी..
डिंकी और गुड़ी…
दोनों कुसुम और भावना की दोस्ती से परिचित थी..
“भावना अब तक नहीं आयी !” गुड़ी ने कुसुम से पूछा
कुसुम आईने में खुद को निहारती बैठी थी…
उसका मैरून और हरा लहंगा उस पर बहुत सुंदर लग रहा था..
कुसुम हलके से मुस्कुरा उठी..
“आ रही है.. सुबह से यही थी ना, अभी कुछ देर पहले ही तो गयी है.. नहा कर तैयार होकर आ जाएगी… !”
कुछ देर में कुसुम ने अपनी एक सहेली की तरफ देखा और उसे अपने पास बुला लिया..
“ऐ डिंकी सुनो.. हमारे लिए कुछ खाने का तो ले आओ.. बहुत भूख लग रहीं है.. !”
“हाँ हम तुम्हारी अम्मा से पूछ कर कुछ फल या जूस लें आते हैं। क्यूंकि कुसुम हमें लगता है आज तुम्हें उपवास रखना होगा.. !”
“अरे यार.. हम पहले ही अम्मा से बोले थे कि ये उपवास वुपवास हमसे नहीं होता। पर अम्मा हमारी सुने तब ना ! रहने दो फिर, हमसे कंदमूल भी नहीं खाएं जाते.. !”
“कुसुम.. ये तुम लहंगा के नीचे स्पोर्ट्स शूज़ काहे पहनी हो.. ?”
“आजकल फैशन है… देखी नहीं हो क्या… पिस्ताग्राम में हर एक दुल्हन ऐसे ही लहंगा के नीचे बूट्स पहन कर स्टेज पर आ रहीं है.. !”
“तुम और तुम्हारा फेसन ! आग लगे इस फेसन को।”
उसी समय बारात आ गयी का शोरगुल मचा और कुसुम की सखियाँ दूल्हा बाबू को देखने बेकरार हो उठी..
“कुसुम.. हम लोग दूल्हा बाबू को देख आये?”
“देखने भर से क्या होगा, तुम चूम के आ जाओ !”
“छी बेसरम ! कुछ भी बोल देती हो ! सच्ची बताओ, जाएँ ?”
कुसुम ने पलकें झपक कर हाँ में गर्दन हिला दी…
क्रमशः
aparna…
