
जीवनसाथी -3 भाग -99
” अकेले-अकेले कॉफी पी लोगी, जिसे बनाना सिखाया उसे पूछोगी तक नहीं..?
” नहीं पूछूंगी। अगर पीना है तो यही काफी पी लो, क्योंकि मैं जानती हूं मैं अगर तुम्हारे लिए काफी लेने गई तो तुम यहां से गायब हो जाओगे। पिछले कई दिनों से तुम ऐसे ही तो परेशान कर रहे हो मुझे, अब क्या पागल करके छोड़ोगे.?”.
शौर्य के माथे पर बल पड़ गए, उसे कली की अजीबोगरीब बातें समझ में नहीं आई..
” तुम क्या बोल रही हो कली, मुझे वाकई समझ में नहीं आ रहा!”
” क्या समझ में नहीं आ रहा ? यह समझ में नहीं आ रहा कि तुम रात दिन मुझे नजर आने लगे हो?
कभी इस लैम्प पोस्ट के नीचे यहां बैठे हुए, कभी मेरे कॉलेज की कैंटीन में सैंडविच बनाते हुए, कभी टेबल साफ करते हुए, कभी कोई टैक्सी ड्राइव करते हुए, कभी झील पर बोटिंग करते हुए, कभी-कभी तो तुम लाइब्रेरी में वह बुड्ढे वाले लाइब्रेरियन अंकल की जगह भी नजर आने लगते हो!
बस ऐसा ना हो किसी दिन, कि तुम मुझे मेरे घर के अंदर नजर आने लगो..
वरना मैं ऐसी पागल हूं, तुमसे बात करने लगूंगी और सरु और डैडा मुझे पागल घोषित कर देंगे..!”
शौर्य ने हंसकर कली के हाथ से उसका कॉफी का कप लिया और गहरा सा घूंट भर लिया।
कॉफी पीने के बाद उसने कप अपने और कली के बीच रख दिया।
” अब तुम भी एक सिप ले लो। वैसे काफी अच्छी बनाने लगी हो। बस थोड़ी कड़वी ज्यादा कर देती हो।”
अब कली के चेहरे के भाव बदलने लगे। उसने आंखें फाड़ कर शौर्य की तरफ देखा और वापस अपने कप की तरफ देखने लगी।
अचानक उसने चेहरा शौर्य की तरफ से दूसरी तरफ फेर लिया।
“हे भगवान! पहले तो सिर्फ यह लड़का नजर आता था अब तो चमत्कार भी होने लगे हैं। काफी का कप अपने आप आधा कैसे हो गया?
नहीं मैं पागल नहीं हुई हूं।”
कली ने काॅफी का कप बिना शौर्य की तरफ देखे उठाया और दूसरी तरफ मुंह करके सिप लेने लगी। दो-तीन सिप लेने के बाद उसने बिना शौर्य की तरफ देखे कॉफी के कप को देखा और उसे वापस रख दिया।
कुछ देर के लिए उसने आंखें बंद की और इस समय शौर्य ने कप उठाकर बची कॉफी पीकर खाली कप रख दिया।
कली ने धीरे से बिना शौर्य की तरफ देखें हाथ बढ़ाया, और कप उठा लिया। लेकिन कप में काफी नहीं थी। वह घबरा गई, उसने घबराकर वापस शौर्य की तरफ देखा,
” पहले तो तुम सिर्फ नजर आते थे, बाद में धीरे-धीरे तुम बोलने भी लगे। फिर कुछ समय पहले ऐसा हुआ कि तुम मेरे साथ चलने भी लगे थे, और अब तो तुम मेरी चीजे खाने पीने लगे हो। यह क्या हो रहा है मेरे साथ?
शौर्य तुम जाओ यहां से, मैं सच में पागल होने लगी हूं।”
कली अपनी जगह से खड़ी हुई और आगे बढ़ने को थी कि शौर्य ने उसका हाथ पकड़ लिया।
शौर्य एकदम से उसके सामने आ गया..
” मैं तुम्हारे सामने खड़ा हूं कली, और अब मैं कहीं नहीं जाने वाला और अगर कहीं गया तो तुम्हें लेकर ही जाऊंगा।”
कली के आश्चर्य का ठिकाना नहीं था। उसने अपना हाथ धीरे से शौर्य के चेहरे की तरफ बढ़ाया और उसके गालों पर अपनी उंगलियां रख दी। वो धीरे से उसे छूकर यह जानना चाहती थी कि यह शौर्य अब तक उसके देखे सपनों का शौर्य तो नहीं है।
कि तभी गाड़ी की तेज फ्लैशलाइट उन दोनों के चेहरों पर पड़ी और गाड़ी का हॉर्न तेजी से बचने लगा..।
वो दोनों उस तरफ मुड़ कर देखने लगे..
गाड़ी की लाइट्स बंद हुई और दरवाज़ा खोल कर सरु बाहर निकल आयी.
सरु धीमे धीमे कदम बढ़ाती उनकी तरफ चली आयी..
कली सरु को देख कर चौंक गयी..
“सरु.. आप यहाँ.. ?”
“हाँ कली, मैं भी तो यही रहती हूँ ना.. फिर मैं और कहीं कैसे जाउंगी.. !” सरु ने बनावटी नाराज़गी से कहा..
कली ने शौर्य की तरफ डरते हुए देखा..
उसे अब भी लग रहा था कहीं अब तक में शौर्य गायब न हो गया हो लेकिन शौर्य उसके ठीक बगल में खड़ा था..
उसे देख कर कली के चेहरे पर मुस्कान आ गयी….
“सरु ये, ये शौर्य है !! ज़रा अटक अटक कर कली ने कहा और शौर्य की तरफ देखने लगी..
“ये सरु हैं मेरी मासी !”
शौर्य ने आगे बढ़ कर सरु के पैर छू लिए..
“अरे ये क्या कर रहे हैं आप शौर्य ! मैं इतनी भी बुज़ुर्ग नहीं हूँ !”
“जानता हूँ, लेकिन मुझसे बड़ी तो हैं ही ना, इस नाते आपका आशीर्वाद पाने का हक रखता हूँ ना !”
सरु मुस्कुरा कर रह गयी…
सरु के दिमाग में खलबली मच गयी थी…
वो शौर्य को पहचानती थी, वो जानती थी शौर्य किसका बेटा है..
वो जानती थी शौर्य से कली की दोस्ती का मतलब है, एक न एक दिन कली को बांसुरी की सच्चाई भी पता चल जाएगा और इसके साथ ही अपनी माँ की मौत का कारण भी..
और शायद तब वो खुद को ठगा हुआ सा महसूस करने लगेगी कि उसकी माँ के हत्यारे परिवार के बेटे से उसने रिश्ता क्यों जोड़ लिया..
सबसे ज्यादा तो सरु को वासुकी का डर सता रहा था, कहीं वो आ गया तो शौर्य को देख पता नहीं कैसी प्रतिक्रिया देगा.. !
इसी उहापोह में वो शौर्य को अंदर भी नहीं बुला पा रही थी..
कली तो बस मुग्ध दृष्टी से शौर्य को देख रही थी..
शौर्य ने कली की तरफ देखने के बाद सरु की तरफ देखा..
“क्या मुझे अंदर नहीं आने को कहेंगी ?”..
शौर्य ने सरु से पूछा..
“हाँ हाँ.. अंदर आइये ना.. !”
शौर्य मुस्कुरा कर सरु के पीछे आगे बढ़ गया..
कली भी ख़ुशी से लहकती उसके पीछे चल पड़ी..
वासुकी का घर शानदार था..
घर के कोने कोने में अभिजात्य की छाप थी…
कली उससे सही ही कहती थी कि उसका घर महल है और उसके पिता ने उसे किसी राजकुमारी की तरह पाला है…
सामने ही आदमकद तस्वीर में बाप बेटी नजर आ रहे थे..
कमरे में कली की काफी सारी तस्वीरें थी, लेकिन बहुत ढूंढने पर भी शौर्य को कली की माँ की एक भी तस्वीर नजर नहीं आयी..
वो चारों तरफ देखता खड़ा था कि सरु ने उसे टोक दिया..
“आप बैठिये ना !”
“हम्म.. आप इतना औपचारिक क्यों हो रही है ? मुझसे इतना मान देकर बात करने की ज़रूरत नहीं है !” मुस्कुरा कर शौर्य बैठ गया और सरु उसे बैठा कर रसोई में चली गयी..
जाते जाते उसने कली को भी अंदर आने का इशारा कर दिया, लेकिन कली बिना सरु की बात समझे वही शौर्य के सामने खड़ी रही..
सरु वापस आयी और कली का हाथ पकड़ कर ले गयी..
“कली.. कुछ सोचा भी है ?”
“क्या सरु ?”
“अपने डैडा से क्या बोल कर मिलवाओगी इन्हे ?”
“डैडा तो इण्डिया में मिल चुके है !”..
“हाँ और उसी के बाद तुम्हे लेकर सीधा लंदन आ गए थे ! तुम्हे क्या लगता है, डैडा खुश होंगे ?”
कली का चेहरा उतर गया..
“लेकिन सरु शौर्य मेरा फ्रेंड है… बस फ्रेंड !”
सरु ने ध्यान से कली की तरफ देखा..
“तुम्हारा जस्ट फ्रेंड तुमसे मिलने इण्डिया से लंदन तक आ गया ?”
कली इस बात का कोई जवाब नहीं दे पायी..
“कली अपने डैडा के आने के पहले इसे भेजो यहाँ से.. अगर उन्होने देख लिया तो बवाल ही होना है ! तुम अपने डैडा का गुस्सा जानती तो हो !”..
“हम्म… ” सरु की इस बात का कली कोई जवाब नहीं दे पायी..
एक गहरी साँस भर कर वो वापस मुड़ गयी..
उसी वक्त घर के मेन गेट के खुलने की आवाज़ हुई..
लोहे का वो गेट काफी भरी भरकम था और गार्ड डिजिटली रिमोट से खोला करते थे..
वासुकी की गाड़ी के अंदर बाहर जाते समय ही वो खुलता था..
पैदल अंदर घुसने के लिए साथ लग कर एक अलग गेट बना था जिसे मेन्युअली भी खोला जा सकता था..
उस बड़े गेट की आवाज़ आते ही सरु घबरा गयी और उसने कली का हाथ पकड़ लिया..
सरू के इस प्रकार घबरा जाने से कली भी घबरा गई। दोनों ने एक दूसरे की तरफ देखा और रसोई की उस दिशा की खिड़की पर पहुंच गई जहां पर से गेट को देखा जा सकता था.. उन्हें वासुकी की गाड़ी अंदर आती हुई नजर आ गयी…
उस मुख्य दरवाजे से घर की दूरी काफी ज्यादा थी!
गाड़ी को मुख्य दरवाजे से घर तक लाकर वासुकी ड्राइवर को पार्किंग में गाड़ी ले जाने के लिए देकर खुद ऊपर चला आता था!
लेकिन इसमें भी उसे दस मिनट लग ही जाते थे, सरु ने कली की तरफ देखा
“हमारे पास सिर्फ दस मिनट है, बस इतने समय में जाकर कहीं भी शौर्य को छुपा दो!”
“कहाँ और कैसे सरु… ?”
“वो मुझे नहीं पता !”
“घर पर जो सर्वेंट है उनके सामने में शौर्य को उठाकर कहां ले जाऊं छुपाने के लिए? क्या ऐसा इन लोगों के सामने करना ठीक रहेगा?”
” नहीं उनके सामने ऐसा करना ठीक तो नहीं रहेगा, लेकिन हमारे पास और कोई ऑप्शन भी तो नहीं है कली।”
कली भी सरू की परेशानी समझ रही थी। वह दोनों एक दूसरे का हाथ थामें जल्दी जल्दी चलती हुई बाहर हाल की तरफ बढ़ने लगी..।
किचन में उनकी मदद करने के लिए जो बटलर मौजूद था, वह अपना काम कर रहा था। वह वैसे भी हिंदी भाषी नहीं था.. इसलिए उसे सरू और कली की बातचीत समझ में नहीं आ रही थी।
जिस वक्त वासुकी घर पर घुसने वाला था उसी के आसपास शौर्य को हर्ष का फ़ोन आने लगा..
शौर्य ने फ़ोन उठा लिया लेकिन वहाँ नेटवर्क नहीं मिल रहा था इसलिए बात करते हुए शौर्य बाहर निकल गया..
बाहर बरामदे में टहलते हुए भी जब उसे नेटवर्क नहीं मिला तब वो दरवाज़े से बाहर निकल आया..
बाहर के बगीचे में टहलते हुए वो एक तरफ बने झरने के पास पहुँच गया..
झरने का पानी मधुर संगीत सा बजा रहा था…
उसमे कुछ सफ़ेद पंछी तैर रहे थे… जो माहौल को और भी ज्यादा खूबसूरत बना रहे थे.. !
कही एक तरफ बैठ कर शौर्य हर्ष से बात करने लगा..
सुबह की मीटिंग की सारी खबर हर्ष को लगा गयी थी और उसी बारे में बात करने हर्ष ने शौर्य को फ़ोन लगा लिया था..
मुख्य गेट से बहुत दूसरी तरफ वो झरना पड़ता था, इसलिए जब वासुकी अंदर आया उस वक्त उसकी नजर शौर्य पर नहीं पड़ी..
शौर्य को हर्ष ने तुरंत लोम्बार्ड स्ट्रीट में मौजूद कैफे ऑलिव में पहुँचने को कहा, वहां हर्ष का कोई दोस्त शौर्य की प्रतीक्षा कर रहा था..
हर्ष की कही बात शौर्य के लिए पत्थर की लकीर समान थी, वो कभी उसकी कही कोई बात नहीं टालता था.. इसलिए अभी भी वो तुरंत वहाँ से बाहर निकलने को तैयार हो गया..
मुख्य गेट की तरफ बढ़ते हुए शौर्य ने एक नजर कली को ढूंढने के लिए घर की तरफ डाली और फिर किनारे वाले छोटे गेट को खोल कर बाहर निकल गया..
उसके वहाँ से निकलने के ठीक पहले ही वासुकी अपनी गाड़ी के साथ अंदर दाखिल हुआ था ! इसलिए वासुकी भी शौर्य को नहीं देख पाया..
कली और सरु के बाहर निकलते तक में शौर्य वहाँ से बाहर जा चुका था.. !
वासुकी को हॉल में देख सरु और कली चौंक कर इधर उधर कुछ ढूंढने लगे..
सरु तो इस कदर सदमे में थी कि सोफे के नीचे परदे के पीछे वो हर जगह ऐसे झांक लगा रही थी जैसे एक छै फुटिया लड़के को नहीं एक दो साल के बच्चे को लुका छिपी में खोज रही हो..
“क्या हुआ सारिका कुछ ढूंढ़ रही हो क्या ?”
“हाँ भैया, मेरा फ़ोन नहीं मिल रहा.. !”
सारिका ने घबरा कर कहा..
और उसकी बात सुन वासुकी हंसने लगा..
“हाथ में देखो… पकड़ा तो है !”
“उफ़ अरे हाँ.. पता नहीं दिमाग कहा घूम रहा.. क्यों है ना कली ?”
“हम्म… अहम.. हाँ… !”
कली ने जैसे तैसे उस कमरे को गौर से देखा और फिर खुद को संभालती किचन में चली आयी..
किचन में आकर उसने खुद को ज़ोर से चींटी काटी…
“क्या पता अब मेरा वाला सपना कहीं सरु भी तो नहीं देखने लगी.. पहले मुझे बस दिखने वाला शौर्य अब सरु को भी दिखने लगा… हे भगवान अब आप ही रक्षा करो मेरी..
.क्रमशः

मज़ा आ गया सरू और कली की हालत देखकर😂👌🏻👌🏻👌🏻
Bahut hi majaydar mahol Saru or Kali to kya karaya kya na karaya Wali isthime hai,ki Souraya ko kaha chupaya, seeing in the next part, Very Interesting and Fantastic n Fabulous part.
Kali ye koi sapna nahi balki hakiqat thi.shauray sach me London me tumse milne aaya hai.bholi kali phir bhi samjh nahi payi.saru ka darr galat nahi hai wo bhi kya kare.ab toh sab Bhagya par hi chhod dete hain.sab thik hi hoga
Mast likhte ho aap. love stories mai to master ho.
Very interesting part 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻
अरे बाल बाल बचे आज तो नही तो कही वासुकी , देख लेता तो क्या ही हो जाता शौरी को!!
अब क्या होगा आगे , ये शौरी तो बैंड , बाजा , बारात ले कर घर तक आ गया है , और सरू से भी आशीर्वाद ले लिया , दर्श और वासुकी ही बचे अब तो , 👌👌👌
Superb part
Ha..ha…haa…sapna kitna haseen tha …jo sach ho gya …. bechari saru toh jyada ghabra gyi …..hota h ghabrahat me aise hi harkate hoti h ….mast part tha ….aaj toh samna nhi hua ….lekin jaldi hi hoga
sapno se nikal kr haqiqat mein aa jana or dil mein ghr kr jana awwwwwwwwwww lovely feeling
Wah Kali ab tak sapna maan rahi thi lekin shaurya ne ahsaas karwa diya aur keh bhi diya ki saath hi leke jayega
Shandaar