जीवनसाथी -3 भाग -46

बनारस का वह सुपर स्पेशलिटी साधारण सा हॉस्पिटल आज अपने नाम “शाइनिंग स्टार मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल” को चरितार्थ कर रहा था। आज के पहले भले ही वहाँ सारी सुविधाएं मौजूद ना रही हों, जिन्हें वह अपने विज्ञापन में बाहर लगे होर्डिग पर दिख रहा था। लेकिन आज उन सारी सुविधाओं को पल भर में अंदर समेट लेने की जद्दोजहद में पूरा अस्पताल टूटा पड़ा था। अस्पताल के एडमिन विभाग के लोग आश्चर्यजनक रूप से कर्मठ नजर आ रहे थे। पूरे अस्पताल की काया पलट करने में वह लोग जी जान से लग गए थे।
अस्पताल के बाहर का वह गार्डन जो मुख्य रूप से वयोवृद्ध मरीजों के भ्रमण के लिए तैयार किया गया था, लेकिन जो अस्पताल परिसर की अपेक्षा के कारण सूखी घास और तिनकों से सुसज्जित था, आज चार-चार माली एक साथ लगे रेडीमेड हरी घास के कारपेट बिछाते नजर आ रहे थे…।
यही हाल पूरे अस्पताल का था। सारे विभाग इधर-उधर दौड़ भाग कर अतिरिक्त साफ सफाई और साज सज्जा में लगे थे।
आखिर मुख्यमंत्री का बेटा उस अस्पताल में भर्ती था।।
और यह बात अस्पताल के मालिक के लिए गर्व से भरी हुई थी। गर्व के साथ-साथ एक थोड़ा सा डर भी था कि अब बेटे को देखने के लिए स्वयं मुख्यमंत्री जी पधारेंगे और उनके पधारने पर उन्हें इस अस्पताल में कहीं कोई कमी नजर नहीं आनी चाहिए..।
क्योंकि अस्पताल का मालिक भी जानता था कि मंत्रियों से तो भगवान भी हारे हैं।
कहीं मुख्यमंत्री साहब को कोई कमी नजर आ गई तो उनके अस्पताल का लाइसेंस रद्द हो जाएगा। और फिर जीवन पर्यंत लड़ने के बावजूद वह लाइसेंस रिन्यू नहीं हो पाएगा। इसीलिए अस्पताल के सीईओ ने एडी चोटी का जोर लगा दिया था कि घंटे भर के भीतर अस्पताल वाकई शाइनिंग स्टार अस्पताल में तब्दील हो जाए..।
अस्पताल का स्टाफ जहां इस सब कामों में व्यस्त हो गया था। वहीं अपूर्व ठाकुर को शौर्य के गार्ड्स को फटकारने से फुर्सत नहीं थी। वह इतनी ढेर सारी सिक्योरिटी के बावजूद नहीं चाहता था कि बाहर का एक परिंदा भी शौर्य के आसपास फटके।
शौर्य को जिस कमरे में रखा गया था उसे पूरी तरह से उसने सील बंद करवा दिया था..।
तुरंत अपूर्व ठाकुर के आदेश पर कमरे में सीसीटीवी कैमरा लग गए थे। जिससे शौर्य के पास जाने वाले हर एक इंसान को अपूर्व अपने मोबाइल पर देख सके। शौर्य के सिक्योरिटी गार्ड्स पर मन भर कर अपना गुस्सा निकालने के बाद अपूर्व ठाकुर ने उन्हें नौकरी से निकाल देने तक का फरमान सुना दिया था।
वह सब बार-बार अपूर्व से माफी मांगते उसके आगे पीछे हो रहे थे, और अपूर्व अपनी जिद पर अड़ा बात-बात पर उन्हें फटकार रहा था। अपूर्व उस कमरे के बाहर सौ मीटर तक की दूरी पर भी किसी और इंसानी शक्ल को नहीं देखना चाहता था। और उसके ऊपर अपनी अच्छी छवि बनाए रखने के लिए गार्ड्स जी जान से लगे हुए थे।
उन लोगों ने जो बैरिकेट्स निर्धारित किए थे, उसके भीतर आने के लिए डॉक्टर और नर्स को भी हर बार अपना आई कार्ड उन लोगों को दिखाना पड़ रहा था। लेकिन इस सब ताम झाम से परेशान कली दूर बैठे शौर्य के कमरे के दरवाजे को तक रही थी।
वह लड़का जो पिछले चार दिन से उसके साथ था…
वह लड़का जो लंदन में उसे मिला था..
वह लड़का जिसने बड़े प्यार से इस बात को स्वीकार कर लिया था कि वह एक सामान्य सा ड्राइवर है।
वह लड़का जिसने कली के फ्लैट पर कली के लिए कॉफी बनाई थी।
वह लड़का जिसने कली को नाश्ता बनाना सिखाया था। वह लड़का जो चीजों को कितना सलीके से करता था। जो अपनी कमीज ही नहीं कली की स्कर्ट भी बड़े प्यार से तह कर देता था..।
वो और कोई नहीं खुद एक राजकुमार था..।
हाँ वो राजकुमार था..!!
खालिस, असली राजकुमार…
उसका प्रिंस चार्मिंग !!
कहां तो वह उसे अपनी अमीरी के किस्से सुनाया करती थी। अपने डैडा की शेखी बघारा करती थी, और वह कितने आराम से उसकी बातों को सुनकर हामी भर दिया करता था…
कली तू ही निरी बेवकूफ थी। तुझे समझ क्यों नहीं आया…?
उसके बोलने में, उसकी पसंद नापसंद में, उसके कपड़े पहनने के तरीके में, उसकी चाल-ढाल में, यहां तक की उसके बैठने उठने में भी तो उसकी रईसी झलकती थी।
बावजूद मैं ही नहीं समझ पाई।
उसकी लंबी-लंबी गोरी गोरी उंगलियां जिन्हें देखकर लगता ही नहीं कि कभी इन उंगलियां ने स्टीयरिंग थामी भी होगी।
उसके साफ सुथरे गुलाबी पैर देखकर लगता ही नहीं था कि वह ब्रेक और क्लच की जद्दोजहद में कभी उलझे भी होंगे।
उसके सलीके से संवारे बाल देखकर साफ समझ में आ जाना चाहिए था कि यह बाल किसी महंगे सेलोन से हर पांच दिन में सेट करवा दिए जाते हैं।
इन बालों पर अपने हाथों से शैंपू भी नहीं किया होगा शायद इस राजकुमार ने।
इस का एक हेयर स्टाइलिश अलग होगा, जो इसके बालों की सेवा जतन किया करता होगा। तभी तो एक-एक बाल ऐसे करीने से संवरा रहता था, जैसे वह कोई फिल्म का अभिनेता हो।
चेहरे पर हल्की दाढ़ी थी, जो बता रही थी कि उसने पिछले चार दिन से शेव नहीं की थी। एक राजकुमार खुद तो अपनी शेव करता नहीं होगा।
लेकिन उसे बाकी के घर के काम कैसे आते थे?
शौर्य नाश्ता बना लेता था, कॉफी बना लेता था। कैसे? उसके सामने तो वह खुद कितनी झल्ली साबित हुई थी हर बार।
और हर बार उसका मजाक उड़ाने की जगह वह उसकी कमियों को अपनी पूर्णता से भर दिया करता था। क्या इतना सलोना राजकुमार मेरे नसीब में है ही नहीं..
कभी नहीं..।
अब तक जो कली यह सोचकर परेशान हो रही थी कि उसके डैडा एक साधारण ड्राइवर से उसके प्रेम प्रसंग के लिए कभी तैयार नहीं होंगे। अब इस बात का ठीक उल्टा सोच कर परेशान थी।
जाहिर सी बात थी कि एक राजकुमार के सामने वह एक आम सी लड़की थी।
एक राजपूत परिवार ठाकुरों की शान राजाधिराज अजातशत्रु सिंह बुंदेला कभी एक सामान्य सी लड़की को अपनी बहू क्यों बनाएंगे?
कभी नहीं बनाएंगे। और फिर शौर्य का भी दिल का हाल क्या था ,यह वह कहां जानती थी?
वह तो शौर्य की गर्लफ्रेंड से भी मिल चुकी थी। कितनी खूबसूरत थी शौर्य की गर्लफ्रेंड।
लंबाई में उससे दो-तीन इंच ऊपर ही होगी। रंग भी उसका चमचमाता सफेद था। उसके सामने देखा जाये तो मैं कली नहीं मुरझाई हुई कली लगती हूं, मुझे क्यों पसंद करेगा वो।
जाहिर है नहीं ही करेगा।
तो मैं यहां रुक कर क्या करूं? मेरा चले जाना हीं ठीक है। लेकिन जाने से पहले एक बार अपने प्रिंस को देखना चाहती हूं..।
आंखें भर के…।
कली अपनी जग़ह से उठी और उस कॉरिडोर की तरफ बढ़ने लगी लेकिन दूर से ही शौर्य के सिक्योरिटी गार्ड से उसे रोककर वापस जाने का इशारा कर दिया। कली ने भी ना में गर्दन हिलाई और वापस आगे बढ़ने लगी। उन वर्दी धारी गार्ड्स में से एक अपनी गन की झलक दिखाते हुए सामने बढ़कर कली की तरफ आने लगा।
कली उससे कुछ कहने जाने ही वाली थी कि विक्रम ने कली को रोक दिया।
” नहीं कली इन लोगों से उलझने में कोई फायदा नहीं है। यह लोग तुम्हें प्रिंस के पास अब नहीं जाने देंगे।”
” जानती हूं विक्रम जी, लेकिन मुझे एक बार उसे देखना है।
बस आखरी बार। फिर मैं यहां से चली जाऊंगी ।”
“हम जानते हैं कि आप यहां से जाने की सोच रही हैं। लेकिन इस तरह छुप कर उसे एक बार देखकर चले जाने से क्या होगा?
आप रुकिए और उसे अपने मन की बात कह दीजिए। उसके बाद अगर वह आपको नहीं रोकता है, तब चले जाइएगा।”
” जब यह लोग मुझे उससे मिलने नहीं दे रहे, तो मुझसे बात करने कैसे देंगे..?”
“थोड़ा इंतजार कीजिए। हो सकता है, कोई रास्ता निकल आए..!”
“मुझे नहीं लगता, अब कोई चमत्कार होगा.. !”
बुझे मन और थके कदमो से कली बाहर की तरफ मुड़ गयी… वो अभी एक कदम आगे बढ़ी थी की डॉक्टर की आवाज़ उसके कानो में पड़ी..
“आपके मरीज़ सॉरी आपके प्रिंस को होश आ गया है !”
बाहर खड़े अपूर्व से डॉक्टर ने कहा और चोर नजरो से दूर खड़ी कली की तरफ देखने लगा.. ।
उस डॉक्टर और बाकी स्टाफ को इतना तो समझ आ गया था कि शौर्य के रिश्तेदार और गार्ड्स के आने के बाद कली और बाकी लोगो को इन लोगो ने शौर्य से दूर कर दिया था..।
कली की शौर्य के लिए तड़प भी उस डॉक्टर ने देखी थी। इसलिए शायद उसने कुछ ज्यादा ही तेज़ आवाज़ में ये बात बोली, जिससे दूर खड़े कली विक्रम और लल्लन भी सुन लें ..
शौर्य होश में आ गया ये सुनते ही अपूर्व और तेज़ी से कमरे की तरफ बढ़ गया..।
जैसे उसे बस इसी बात का इंतज़ार था..।
कमरे का दरवाजा खोल अपूर्व ठाकुर अंदर दाखिल हुआ, और शौर्य ने जैसे ही उसे देखा, वह आश्चर्यचकित रह गया।
शौर्य को उम्मीद थी कली के अंदर आने की। लेकिन उसकी जगह अपने मामा को देख शौर्य समझ नहीं पाया कि माजरा क्या है? लेकिन हमेशा की तरह उसने अपने मामा को देखकर हल्की सी मुस्कान दी और धीरे से उठने की कोशिश करने लगा। अपूर्व ने आगे बढ़कर उसे रोक दिया..
“आराम करो.. लिटिल मास्टर !! अब कैसा लग रहा ?”
शौर्य की आंखे इधर उधर कुछ ढूंढ़ रही थी..
” हम जानते हैं, आप अपने पिता साहब को ढूंढ़ रहे हैं, और इस वक्त कायदे से उन्हेँ आपके पास होना भी चाहिए…
अब देखिए ना, हमने राजमहल में फ़ोन तो कर ही दिया था। साथ ही राजा साहब को अलग से फोन किया था..। कायदे से अब तक उन्हेँ पहुँच जाना चाहिए था, लेकिन आप तो जानते ही हैं.. आपके पिता साहब के पास आपसे कहीं अधिक महत्वपूर्ण काम होते हैं…।
हाश….
पता नहीं आपके जैसा हीरा मोती सा लड़का भी उनसे सम्भल नहीं रहा..।
मानते है कि उनके पास व्यस्तता बहुत है, लेकिन अपने परिवार, अपनी पत्नी और अपने ही बच्चे से अधिक ?
यहाँ बेटा जीवन मृत्यु के बीच उलझा पड़ा है और उन्हेँ अपनी राजनीती से फुरसत नहीं..।
ये राजनीती बहुत गन्दा दलदल है प्रिंस..
भले ही लोग बोले की कीचड़ में ही फूल खिलता है लेकिन ये भी सत्य है की वो फूल महकता नहीं है..
राजा साहब चाहे तो परिवार और अपने काम के बीच सामंजस्य बिठा सकते हैं, लेकिन हम कौन होते हैं ये अब बोलने वाले..
आखिर है तो हम महल के बाहर के ही ना.. हम कुछ बोलेंगे तो पराये ही कहलायेंगे… !”
इस वक्त अपने मामा की कोई बात शौर्य को पसंद नहीं आ रही थी, लेकिन वो उनका लिहाज करता था… बहुत लिहाज करता था और उनके सामने कभी उनकी कोई बात नहीं टालता था.. बस इसीलिए चुप रह जाता था..
पर अभी उसके मन में अलग ही उलझन चल रही थी..
लंदन में बीते शौर्य के कठिनतम समय में अपूर्व ही उसके साथ था और अपूर्व के किशोर मन पर अपूर्व के उस समय के साथ का ऐसा असर था कि वो अपूर्व के एहसान तले दब चुका था.. उसके मन में बैठ गया था कि अपूर्व ने उसके कठिन समय में उसे सहारा दिया था जिस वक्त उसके पिता को उसके साथ होना चाहिए था..
और इसलिए शौर्य अपूर्व की हर जायज़ नाजायज़ बात मानता था…
पर इस वक्त वो खुद में खोया था..
“मामा सा, आपने मेरे दोस्तोँ को देखा ? कहाँ है वो सब ?”
“कौन दोस्त.. ? वो दो टके के लोग, जो तुम्हे यहाँ लेकर आये थे..!
लिटिल मास्टर….!!
तुम्हे कितनी बार कहा है ऐसे साधारण आम लोगो से दूर रहा करो !
“वो मेरे दोस्त है मामा सा…. . मैं एक बार मिलना चाहता हूँ उन सब से.. उन्हेँ थैंक्स बोलना है.. !”
“वो लोग तुम्हे यहाँ पटक कर चले गए थे, लिटिल मास्टर ! यही तो होता है ना.. वो कोई ब्लू ब्लड तो है नहीं,जो उनमें हिम्मत हो…!
तुम्हे गोली लगने के बाद उन लोगों ने तुम्हें अस्पताल जरूर छोड़ दिया, लेकिन पुलिस कचहरी का मामला और झंझट हो जाएगा, यह सोचकर घबरा गए और तुम्हें यहां छोड़कर यहां से चले गए..!”
अपूर्व ठाकुर ने अपनी आदत के अनुसार झूठ बोल दिया…
” फिर आप यहां कैसे हैं? आपको किसने बुलाया..?”
शौर्य का दिमाग तो तेज़ ही था.. आखिर था तो राजा साहब और रानी बांसुरी का बेटा !
“लिटिल मास्टर अभी अपने दिमाग पर इतना जोर मत डालिये, वैसे पुलिस और अस्पताल के लोगों ने हमें इन्फॉर्म कर दिया था..!”
शौर्य अपूर्व का स्वभाव जानता था ! इसलिए उसने कोई बहस नहीं की। लेकिन जाने क्यों उसका मन अपूर्व की इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं था कि कली और बाकियों ने उसे वहां यूं ही छोड़ दिया, और अकेले छोड़ कर चले गए।
उसे अब भी कली के हाथ का स्पर्श अपनी हथेलियां पर महसूस हो रहा था। वह उस वक्त हल्की बेहोशी में था। लेकिन कली के स्पर्श को उसने अपने गाल पर महसूस किया था, और उस सिहरन से उसने आंख भी खोली।
लेकिन उस वक्त नींद से बोझिल पलकों ने उठने में इतना वक्त ले लिया कि उसके आंख धीरे से खोलने तक में कली वापस लौट गयी..
उसे वापस लौटती कली की पीठ ही बस नजर आई, लेकिन इतने दिन साथ रहकर वह उसे पहचान ना पाए इतना भी बेहोश नहीं था वह।
कली उसके कान में जो कह कर गई थी, शायद इस बात में उसमें भी जज्बा भर दिया था कि वह ठीक होकर उठे और अपनी कली को अपनी बाहों में हमेशा के लिए समेट ले..। उसे कभी खुद से दूर ना जाने दे..
उस वक्त भी उसका मन किया था पीछे से कली को पुकारने का लेकिन दवाओं का असर कुछ ऐसा था कि उसके होंठ कली का नाम बुदबुदा कर रह गए थे..
उसने बिना कुछ कहे दूसरी तरफ मुंह फेरा और आंखें मूँद ली ।
अपूर्व के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान चली आई। यह तो शुरुआत थी उस तहलके की जिससे अपूर्व ठाकुर महल को हिला कर रखने वाला था….।
बाहर इधर से उधर टहलती कली अपने जज्बात रोकने के प्रयास में और ज्यादा जज्बाती हुई जा रही थी। अब उसे अपने आंसुओं के बहाने पर शर्म सी महसूस होने लगी थी।
अस्पताल में हर कोई इधर-उधर आता जाता उसे ही देख रहा था। लेकिन वह अपने आंसू रोक ही नहीं पा रही थी।
उसे पता भी नहीं चला था कि सिर्फ चार दिनों के साथ में वह उस लड़के से इस कदर मोहब्बत करने लगेगी कि उसकी एक झलक के लिए बावली हो जाएगी। वह किसी भी तरह बस एक बार उसे देखना चाहती थी। कितना प्यारा था वह, और जब उसके साथ था तब उसने उसकी कोई कदर नहीं की थी।
उसे वह शाम याद आने लगी, जब दोनों साथ बैठकर टीवी देख रहे थे। वह पहला और आखिरी ऐसा समय था जब दोनों ने साथ बैठकर टीवी देखा था..।
टीवी पर कुछ ऐसा कार्यक्रम आने वाला था जो शौर्य देखना चाहता था।
अब उसे समझ में आ रहा था, उस दिन सदन में राजा साहब क़ी पार्टी कोई नया प्रस्ताव लेकर आयी थी.. उस पर सदन की मुहर लगी या नहीं यानी कि राज साहब की जीत हुई या नहीं..
यही उनके राजकुमार को देखना था..! लेकिन उसने साफ़ तौर पर कहाँ कुछ बताया था..!
उसने तो कली से बस यही कहा कि उसे टीवी देखना है..!
और इसीलिए उसने टीवी चलाई थी! शौर्य की सिखाई कॉफी बनाकर कली ले आई थी, और शौर्य के सामने टेबल पर रखकर उसके बगल की जगह पर बैठ गई थी।
अपनी कॉफी का सिप लेते हुए वह भी टीवी देख रही थी।
टीवी पर सदन की कार्यवाही का कुछ नमूना चल रहा था कि तभी राजा अजातशत्रु सिंह बुंदेला अपनी जगह पर खड़े हुए।
उनका ऑरा ऐसा था कि उनके खड़े होते ही सदन में हर कोई उनके बिना कुछ कह भी ताली बजाने लगा।
यहां तक की सभापति ने भी राजा साहब को देख कर धीरे से अपनी पलकों झुका कर उनका अभिवादन कर दिया।
प्रोटोकॉल के कारण वह सामने से हाथ जोड़कर अभिवादन नहीं कर सके। लेकिन उनके अभिवादन का प्रति उत्तर भी राजा साहब ने बड़ी विनम्रता से अपने दोनों हाथ जोड़ कर दे दिया, और उन्हें टीवी स्क्रीन पर देखते ही कली उछल पड़ी…।
“तुम्हे पता है प्रिंस, ये कौन है.. ? अरे तुम तो शायद ही इन बड़े लोगो को जानते होंगे?”
“तुम्हे पता है ?” शौर्य ने पलट कर पूछ लिया..
” यह मेरा चाइल्डहुड क्रश है। राजा अजातशत्रु सिंह बुंदेला!!
मुझे तो उनके नाम से मुहब्बत है..।
पता नहीं ये कितनी लड़कियों के सपनो के शहज़ादे होंगे ! उफ़ कोई इतना भी सर्वगुण सम्पन्न कैसे हो सकता है..?
मतलब दिमाग देख लो, ऐसी ब्रिलिएंसी, उस पर इनकी विनम्रता और इनके हॉट किलर लुक्स..।
ऐसा लगता है, भगवान ने खूब फुरसत में इन्हे बनाया और बस इन्हे बनाने के बाद भगवान ने फिर अपने हाथ से कुछ भी नहीं बनाया..।”
” तो हम सबको किसने बनाया..?” शौर्य ने घूर कर कली को देखा..
” अरे नाराज़ क्यों हो रहे हो, भगवान के असिस्टेंट भी होते हैं बुद्धू! हम सब असिस्टेंट से बने हैं..
भगवान जी ने तो सिर्फ और सिर्फ राजा साहब को बनाया है… सोचती हूं शादी कर लूं..!”
“किससे ? राजा साहब से ? वो ऑलरेडी शादीशुदा है !”
“जानती हूँ बुद्धू.. और मुझसे थोड़े से ज्यादा बड़े भी है..!”
“फिर शादी ?”
“उनके बेटे से! उनसे शादी नहीं करुँगी समझे.. मैं बहुत इंटेलिजेंट हूँ.. राजा साहब का बेटा भी कोई कम तो होगा नहीं.. तो मैं उसी से शादी कर लूँगी.. !”
कली अपनी ही धुन में बोल गई और शौर्य के गले में काफी अटक गई..
उसे हल्की खांसी का दौरा सा पड़ गया। कली ने उसके हाथ से काफी ले कर नीचे रखी और धीरे-धीरे उसकी पीठ पर थपथपाने लगी।
शौर्य ने हाथ दिखाकर उसे दूर रहने कहा और अपनी कॉफी उठाकर वहां से उठकर खिड़की पर चला गया। कली अपनी धुन में मगन अपनी काफी सुड़कती हुई राजा साहब को देखती मुस्कुराती बैठी रही…।
आज शौर्य के साथ बिता हुआ हर पल याद कर करके कली के चेहरे पर मुस्कान और चौड़ी होती जा रही थी। लेकिन शौर्य से अब हमेशा के लिए उसे दूर जाना था और यह सोचकर उसकी आंखें डबडबाती जा रही थी…।
उस वक्त अस्पताल में एक बार फिर कोहराम मचा और एक के पीछे एक लंबी-लंबी गाड़ियों का काफिला सा जाकर अस्पताल में रुक गया….
क्रमशः
aparna…

एक बार फिर गाड़ियों का काफ़िला अबकी बार कौन आया है, उसके गार्ड्स, प्रेम, मां, भाई लोग या…. पढ़के पता चलेगा लेकिन कली के लिए थोड़ा बुरा लग रहा पर शकुनी मामा है ये तो गांधार का बदला हस्तिनापुर डुबाकर लेना चाहता है, इसके लिए भी आकाशवाणी करवाइए दीदी, नाईस पार्ट दीदी 💐👍🙏
मैं सच में पिछले भाग की समीक्षा करना चाहती थी वो भी बड़े मन से पर बहुत पीछे होने की वजय से दौड़कर आपके पास आ रही हूँ अपर्णा 😊।
ओह्ह तो सबसे पहले अपूर्व को खबर मिली शौर्य को गोली लगने की 🤦♀️उसे तो शौर्य के सामने महान बनने का एक और मौका मिल जाएगा पर एक बात समझ नहीं आयी अगर अपूर्व फ़ोन ट्रैक करवा सकता है तो क्या समर, प्रेम या महल के किसी भी सदस्य को शौर्य कहाँ है नहीं पता 🤔।
कली ने हैरान तो होना ही था कि एक ड्राइवर के लिए इतनी हाई सिक्योरिटी,कहाँ वो प्रिंस को एक साधारण ड्राइवर समझ रही है और कहाँ वो सच का प्रिंस निकला🙄। बेहोश तो होना ही था सुनकर 😄।
बहुत खूबसूरत भाग 👌👌👌👌👌।