जीवनसाथी- 2/33

जीवनसाथी -2 भाग -33

वो गुस्से में गा रहीं थीं की हँसते हुए पिया ने उसे हल्का सा झुकाया और पंखुड़ी की नजर समर के पैरो पर चली गयीं…
  और दूसरे ही पल वो चौंक कर सामने बैठे शेखर को देखने लगी… वो अब भी चुपचाप बैठा खाना खा रहा था….

  पंखुड़ी को अपने आप पर गुस्सा आने लगा, कैसे वो बिना सोचे समझे शेखर को गलत समझ बैठी, जबकि बेचारा पूरी ईमानदारी से खाना खा रहा था , और वो भी  कितने सलीके से खा रहा.. !
       उसे टेबल मैनर्स भी पूरी तरह से पता है, किस चम्मच से डेज़र्ट खाना है किससे चांवल खाने है.. ? वो बड़े ध्यान से शेखर को देख रहीं थीं की फिर उसके पैरो पर समर का जूता महसूस हुआ और वो गुस्से में अपनी आँखे बंद कर समर की तरफ मुड़ गयीं…

” समर आप और पिया ऊपर अपने कमरे में ही क्यों नहीं चलें जाते… !”
  बिल्कुल परेशान होकर उसके मुहं से ये निकला और पिया ज़ोर से हंसने लगी… समर को अचानक पंखुड़ी की बात समझ में नहीं आई…  उसने पिया की तरफ देखकर इशारों से सवाल किया और पिया ने उसे टेबल के नीचे झांकने का इशारा कर दिया..!
    समर बहाने से नीचे झुका और अपने पैरों को पंखुड़ी के पैरों के पास देखकर उसने अपने माथे पर अपना हाथ मार लिया..

” आई एम सो सॉरी पंखुड़ी..!”

” व्हाट सॉरी..!  जाइए ना आप दोनों यहां से.. हम लोगों के साथ बैठकर हम पर एहसान क्यों कर रहे हैं..!”

पिया ने प्यार से पंखुड़ी के गले में अपनी बाहें डाल दी और उसके सर पर अपना सर टकराकर प्यार से उसे मनाते हुए कहने लगी…

” करना पड़ता है एहसान मेरी जान, क्योंकि सबकी जिंदगी में यह वक्त जरूर आता है ! कल जब तेरा वक्त आएगा ना तब मैं भी तुमसे इस तरह का एहसान करवा कर रहूँगी…!”

” मुझे से उम्मीद मत करना कि मैं अपने लवी डबी  हस्बैंड को छोड़कर तुम्हारे साथ बैठकर लंच खाऊंगी..!”

पंखुड़ी ने भी बहुत धीमे से पिया के कान में उसकी   बात का जवाब दे दिया और पिया ने तुरंत सामने खुद में मगन बैठे शेखर को देख कर उस से सवाल कर दिया…

” अच्छा सच में शेखर जी.. ऐसा है क्या..?”

शेखर पिया और पंखुड़ी की बातें सुन नहीं रहा था और इसलिए वह अचानक समझ नहीं पाया..
    वह सर उठाकर पिया की तरफ देख रहा था कि तभी वहां रिदान चला आया…

उसे आते देख शेखर मुस्कुरा उठा…

” यही बात तो मैं इतनी देर से सोच रहा था कि तू इतनी दूर बैठकर खा कैसे पा रहा है…?”

रिदान ने शेखर के पास वाली कुर्सी खींची और वहां बैठ गया.. बैठते हुए उसने अपना मोबाइल सामने रखी टेबल पर रखा और अपने हाथ में पकड़ी प्लेट को भी टेबल पर रख दिया…

पिया मुस्कुराकर रिदान और शेखर को देखने लगी…

” अब आप लोगों की बारी है.. इंडिया के मोस्ट डिजायरेबल  यंग एंड हैंडसम बैचलर ने तो शादी कर ली.. अब आप लोग भी कर लो..!”

शेखर ने पिया की बात सुनकर मुस्कुराते हुए समर की तरफ देखा और पिया को छेड़ने लगा…

” यह कुछ-कुछ अपने मुंह मियां मिट्ठू वाली बात नहीं हो गई… ?”

” क्यों गलत क्या है इसमें.. ? अपने पति की तारीफ करना जुर्म है क्या..?”

शेखर की बात का जवाब दिया पंखुड़ी ने..  और उसी वक्त रिदान ने वापस अपना मोबाइल उठाया और किसी को मैसेज भेजने लगा…

शेखर भी रिदान को देख कर मुस्कुरा उठा…-”  इसकी शादी तो वैसे भी मोबाइल से हो चुकी है इसे अब बीवी की कोई जरूरत नहीं है..!”

” अच्छा बेटा यह मोबाइल से जो चिपका हूँ, ये  सिर्फ तुम्हारे लिए.. क्योंकि अब अगर मैं और लीना भी शादी करके चले गए तो तुम अकेले बैचलर बैठे रहोगे.. इसलिए मैं चाह रहा था मेरी और लीना की शादी से पहले तुम्हें भी ठिकाने लगा दूँ..

शेखर ने आश्चर्य से लीना की तरफ मुड़ कर देखा…

“ये क्या बकवास कर रहा है लीना… ?”

लीना ने कंधे उचका दिये… -“तू इसकी बकवास को इतना सीरियस क्यों लेता है… ?”

“पक्का न.. ! इसकी  बकवास को सीरियसली ना लूँ.. ?”

शेखर ने लीना की तरफ देखकर सवाल किया और लीना ने जोर से गर्दन ना में हिला दी…

” अबे यार मैं भी आईएएस सेलेक्ट होकर आया हूं, तुम मुझे बस ऐसे ही बना देते हो…
    वैसे सीरियसली मैं कुछ बहुत सीरियस काम कर रहा हूं मोबाइल पर..!”

” कौन सा ऐसा सीरियस काम कर रहे हैं आप रिदान..?”

पिया के सवाल पर रिदान मुस्कुरा उठा..  पिया ने उसी समय पानी पीकर रखा था और रिदान से पूछ लिया, उस वक्त उसका हाथ टेबल पर रखा था, जिसे धीमे से खिसका कर समर ने नीचे कर पकड़ लिया… पिया ने झटके से समर कि तरफ देख इशारा किया कि अब वो खायेगी कैसे तो समर ने भी इशारा कर दिया कि वो अपने बाएं हाथ से खाना खा लें… पिया ने बनावटी गुस्से से समर को देखा और तभी रिदान अपनी बात कहने लगा…

” थैंक्यू पिया जी, आपने तो मुझे सीरियस लिया… असल में एक मैट्रिमोनियल ऐप है उस पर मैंने हमारे शेखर बाबू के लिए एक क्लासी सा प्रोफाइल बनाया है…
उसमें बंदे की सारी खूबियां वही लिखी जो इन में है… लेकिन एक्टिव मैं हूं.. यानी कि फिलहाल प्रोफाइल को हैंडल मैं कर रहा हूं..!”

” हां वह तो हम सब समझ गए अब यह बताओ कोई लड़की मिली कि नहीं..?” अब कि बार समर ने सवाल कर लिया….

” मिल गई है… इसी शहर की है..!”

” अरे वाह !! नाम क्या है.. ? और करती क्या है वह..?”

” यह सब कुछ नहीं पता..!”

” क्यों..?”  उलटे हाथ से स्पून पकड़ कर पिया को खाने में मुश्किल आ रहीं थीं, लेकिन किसी को कुछ पता न चलें इसलिए बेचारी वैसे ही खाते हुए बातों में लगी रहीं..

“एक्चुली उस साइट पर उसने भी अपना नाम नहीं डाला और मैंने भी.. तो हम दोनों का मैट्रिमोनियल आईडी ही हमारा नाम है..  लेकिन गाइस नाम वाम छोड़ो बात यह है कि उस लड़की से मिलने का दिन और समय तय हो गया है और यह सब मैं इस ग्रुप के सामने इसलिए बता रहा हूं, क्योंकि अगर मैं यह सब कुछ अकेले में शेखर को बताता तो यह मुझे गोली मार देता… पक्का कसम से…
  
रिदान अब समर के पास जाकर खड़ा हो गया…

” अब आप सब बुजुर्गों से यही निवेदन है कि प्लीज प्लीज इस नकचढ़े सनकी को समझा-बुझाकर उस लड़की से मिलने के लिए प्लीज तैयार कर लीजिए और भेज दीजिए.. शायद इसका भी कुछ भला हो जाए..!

शेखर ने घूर कर रिदान की तरफ देखा और रिदान ने धीरे से अपने कान पकड़ लिये.. लेकिन उसी वक्त समर और पिया भी उसे घूरने लगे…

” शादी क्या हुई हम दोनों बुजुर्ग हो गए आपके लिए..?”

” सॉरी सॉरी..! ऐसा कहना पड़ता है..! इस वक्त ये  छोटी-छोटी बात करके असली मुद्दे से मत भटकिये और प्लीज इसे समझाइये …

” जाना कब है डेट पर..?”

अबकी बार सवाल लीना की तरफ से था…

शेखर लीना को भी घूर कर देखने लगा..-”  क्या यार लीना, तू भी इस बेवकूफ की बातों में इतना सीरियसली लेती है..!”

” जिस दिन से तूने मेरा नाम सही लेना शुरू कर दिया ना उसी दिन से मैंने तुझे सीरियसली लेना शुरू कर दिया था शेखर !  रिदान सच कह रहा है…  किसी के नाम पर पूरी जिंदगी नहीं काटी जा सकती… तुम्हारे सामने तुम्हारा पूरा भविष्य तुम्हारी पूरी जिंदगी पड़ी है और फिर अपने पेरेंट्स की भी तो सोचो, उनकी भी तो ख्वाहिश होगी कि एक प्यारी सी संस्कारी उनकी भी अपनी बहू हो.. !”

हालाँकि लीना ने ये बात बहुत धीमे से कहीं थीं पर पंखुड़ी ने सुन ली.. उसी वक्त उसके मोबाइल पर मेसेज बीप बजी…
   और उसने तुरंत मोबाइल खोल कर चेक कर लिया…
  उसी लड़के का मेसेज था… -” कल मिल सकतें हैं क्या… ? असल में मुझे अगले हफ्ते अपने घर जाना हैं.. मम्मी ने बहुत ज़िद करके बुलाया हैं…!

पंखुड़ी यहाँ सामने बैठे रिदान और शेखर कि बातों में उलझी थीं… उसने तुरंत ओके लिख कर मेसेज भेजा और मोबाइल बंद कर उन लोगो कि बातें सुनने लगी…

  शेखर लीना कि बात का कोई जवाब नहीं दें पाया…..

” सही तो कह रहें हैं आपके दोस्त… ! अगर कोई अच्छी लड़की मिल ही रहीं हैं तो सही उम्र में शादी कर लेनी चाहिए, वरना फिर मिलेंगी एक से बढ़ कर एक बिद्या वासन टाइप लड़कियां !”

शेखर पंखुड़ी कि बात पर मुस्कुरा उठा…

“आपने क्यों नहीं कि आज तक शादी… !”

उसकी बात पर पंखुड़ी भी मुस्कुरा उठी…. -” क्योंकि इण्डिया के मोस्ट एलिजिबल यंग एंड हैंडसम बैचलर ने तो शादी कर ली, वो भी मेरी ही सहेली से! और बेचारा जब से यहाँ बैठा बैठा हम सब के बीच अच्छा खासा बोर भी हो गया हैं,  क्योंकि इन्हे इनकी वाइफ के साथ क्वालिटी टाइम जो नहीं मिल रहा..……!  बेचारे बस इतनी देर से अपनी बीवी का हाथ ही पकड़ पाए हैं… उससे ज्यादा रोमांस इनकी किस्मत में नहीं हैं… !”

और अपना मुहं छुपा कर पंखुड़ी हंसने लगी और ये बात सुन कर समर ने तुरंत पिया का इतनी देर से थाम रखा हाथ अचकचा कर छोड़ दिया…

“क्यों, क्या हुआ.. ?  शरमा गए मंत्री जी… ?”

“शरमाये हमारे दुश्मन.. हमनें तो बेशर्मी में पी एच डी कर रखी हैं.. ! “

समर अभी हंसी मजाक में लगा था कि महल के ऑफ़िस से उसके असिस्टेंट का फ़ोन आने लगा… फ़ोन पर बात होते ही समर ने कुछ देर में ऑफ़िस पहुँचने कि बात कह कर फ़ोन रख दिया…

   बातों बातों में आखिर सबने शेखर को उस लड़की से मिलने जाने के लिए मना ही लिया…
   खाना पीना निपटने के बाद सभी लोग वहाँ से निकलने के लिए उठ खड़े हुए…
  समर और पिया को एक बार फिर बधाइयाँ देने के बाद वो लोग वहाँ से निकल गए…..
  लीना और रिदान बात करते हुए आगे निकल गए और शेखर पंखुड़ी पीछे रह गए… दोनों के मिलने पर अक्सर जैसा होता था वही हुआ… पंखुड़ी लगातार बोलती रहीं और शेखर चुपचाप उसकी सारी बातें सुनता रहा..

“तूने ये झूठ क्यों बोला कि मैं तुझसे शादी करने वाली हूँ… ?”

लीना ने अकेले में रिदान को डपट दिया…

“मैंने ये कहाँ बोला कि तू मुझसे शादी करने वाली हैं.. मैंने तो बोला मैं तुझसे शादी करने वाला हूँ… !”

“तेरी चटनी बना कर न खा जाऊं मैं.. !”

“खा लें न…मुझे कोई दिक्कत नहीं.. ! एक तो मैं तुझ पर एहसान कर रहा शादी कर के, उस पर तू और रोल मार रहीं.. !”

“चल अवे… बकवास बंद कर अपनी… !”

लीना पीछे मुड़ कर पंखुड़ी के लिए रुक गयीं…

“पंखुड़ी तुम कैसे जाओगी घर.. ?”

“कैब लें लूंगी.. !”

“मेरे साथ ही चलो फिर… मेरी गाड़ी हैं न.. !”

“मैं भी चलूँ तेरे साथ.. ?”

रिदान के सवाल पर उसे एक बार घूरने के बाद लीना ने गाड़ी कि चाबी उसकी तरफ बढ़ा दी और पंखुड़ी को साथ लिए पीछे बैठने चली गयीं…

“हाँ.. बना दो मुझे ड्राइवर !”

“कौन बना रहा तुझे ड्राइवर… ?” ये पूछते हुए शेखर सामने का दरवाज़ा खोल कर रिदान के बाजू वाली सीट पर बैठ गया और अपने ड्राइवर को गाड़ी बंगले पर छोड़ने का बोल कर वो चारों लोग एक साथ वहाँ से निकल पड़े….

******

   वासुकी ने बाँसुरी के गार्ड को बुरी तरह से डांटने के बाद उसे और सपना को भी बाँसुरी को ढूंढने के काम में लगाया और खुद भी उसे ढूंढने लगा…

   चरण कि बदतमीज़ी से भरी बात सुन कर वासुकी का पारा उबलने लगा और एक तमाचा मार कर उसने उसे वहीँ ढ़ेर कर दिया…
   नशे से बेसुध चरण का कॉलर पकड़ वासुकी उसे बाहर खींच कर लें गया…

नशे  में बेसुध चरण को अपने  साथ वासुकी अपनी गाड़ी तक लें आया, और गाड़ी के पास उसे खड़ा कर उसने होटल के अंदर से लायी महँगी शराब की बोतल खोल कर चरण के मुहं, चेहरे सब पर उडेलनी शुरू कर दी…
 
“ये क्या कर रहा है अनिर.. ! रुक जा,  वो मर जायेगा… !”

“,अगर ये सच नहीं बोलेगा तो इसका मर जाना ही अच्छा… !”

वासुकी ने चरण की जेब से उसकी म्यूज़िकल लाइटर निकाली और एक बार में सट से जला ली…

चरण घबरा कर वासुकी के हाथ पैर जोड़ने लगा…

“वासुकी भाई मैं सच में कुछ नहीं जानता… तुम मुझे क्यों मार रहें हो.. ? क्या जानना चाहते हो, जब मुझे यहीं नहीं पता तो मैं बताऊंगा क्या.. ?”

“जब तुझे कुछ मालूम ही नहीं तो कलेक्टर साहिबा  का नाम लेकर तूने इतनी गन्दी बात कहीं क्यों.. ?”

“मैंने तो ऐसे ही कह दी थीं… बिना कुछ सोचे समझे.. !”

उसकी बात सुन दर्श ने अपने माथे ओर हाथ मार लिया…

“बिना सोचे समझे कहने के किये भी तुझे यही एक नाम मिला…? अभी वासुकी ने तुझे आगा लगा देना था… फिर निकल जाता सारा मज़ाक.. ! अब ये बता कि कलेक्टर साहिब को कहीं देखा हैं.. ?”

चरण ने न में गर्दन हिला दी और वासुकी ने घुमा कर एक चांटा उसे वापस रसीद कर दिया…
   चरण के चेहरे पर तमाचा इतनी तेज़ पड़ा था कि उसके कान में कुछ देर तक एक सायरन कि आवाज़ आती रहीं… वो आँखे फाड़े अपने कान को अपनी हथेली से हिलता उसे सही करने कि कोशिश करने लगा…

वासुकी ने उसका चेहरा अपनी तरफ घुमाया और उसके चेहरे के करीब जा कर उस पर बरस  पड़ा…

“शेखावत कहाँ हैं… ?”

“हैं.. क्या… ?” एक तमाचे से ही चरण कि सुनने कि शक्ति चली गयीं थीं…

“अबे बहरे… तेरा बाप कहाँ हैं… ?”

शेखावत ने फिर हैं किया और इस बार वासुकी ने झुंझला कर उसके दूसरे गाल पर तमाचा जड़ दिया…

“इस बार क्यों मारा… ?”  रोनी सी  सूरत बना कर उसने वासुकी को देखा…

“तेरा हैं हैं बर्दाश्त नहीं हो रहा… आधे अधूरे लोग मुझे पसंद नहीं, इसलिए सोचा तू पूरा ही बहरा हो जा.. !”

“वासुकी.. मैंने शेखावत को ऊपर उसके पर्स्नल सुइट कि तरफ जाते देखा था…..
   मुझे सुनाई तो नहीं दिया कि तुमने क्या पूछा पर मुझे लगा…

चरण अभी अपनी बात पूरी करता उसके पहले ही वासुकी तेज़ कदमों से अंदर कि तरफ भाग गया.. दर्श ने चरण के गाल थपक कर उसे बची हुई बोतल पकड़ाई और आगे बढ़ गया…
  चरण भी उनके पीछे अंदर कि तरफ बढ़ने लगा तभी एक वेटर हाथ में ट्रे लिए उसके सामने से गुज़रा जिसे रोक कर चरण पूछने लगा… -” डिज़र्ट किस तरफ लगा हैं… ?”

“सर लेफ्ट साइड पर.. !”

“नहीं मैं ये पूछ रहा हूँ कि मीठा किस तरफ लगा रखा हैं.. !”

“यस सर.. आपके लेफ्ट तरफ के काउंटर पर स्वीट्स अवेलेबल हैं.. !”

“अरे बिरयानी और चिकन तो मैं खा चुका हूँ.. मैं मीठे कि बात कर रहा हूँ मीठे की… !”

वेटर समझ गया की उसका पाला वज्र बहरे से पड़ गया था.. उसने धीमे से चरण को पकड़ कर लेफ्ट साइड को घूमाया और निकल गया…

वासुकी भागता हुआ होटल के अंदर गया और मैनेजर के पास पहुँच गया… -” शेखावत का पर्स्नल सुइट किस फ्लोर पर हैं.. और रूम नंबर क्या हैं… !”

“सॉरी सर !लेकिन सर अपने सुइट के बारे में किसी को भी बताने से मना कर रखें हैं… !”

      परेशान हो कर वासुकी ने नीचे देखा और एक गहरी सी साँस छोड़ने के बाद अपनी जेब से अपनी कोल्ट वाकर रिवॉल्वर निकाली और मैनेजर के सामने ही उसका सेफ्टी लॉक खोलने लगा…

“ब्लैक पाउडर रिवॉल्वर हैं,  ये 44 कैलिबर राउंडबॉल को शूट करने के काम आती हैं… ऑक्शन में खरीदी हैं.. और…

“सर 1010 रूम हैं उनका… दंसवे माले पर..!”

वासुकी ने तुरंत लिफ्ट की तरफ कदम बढ़ाये और लिफ्ट का दरवाज़ा बंद होते में दर्श भी लिफ्ट में दाखिल हो गया…

दसवे माले पर लिफ्ट के रुकते ही उसने निकल कर रूम नंबर दस की तरफ दौड़ लगा दी…
   तेज़ी से भागते हुए वो कमरा नंबर दस पर पहुंचा ही था की शेखावत के बॉडीगार्ड्स उससे उलझ पड़े…

” सर आप यहां इस वक्त किस काम से आए हैं..?”

” मुझे शेखावत से मिलना है..!”

” नहीं मिल सकते  सर आप… वह इस वक्त बिजी हैं..!”

“बिज़ी माय फुट… !”

कमरे के दरवाज़े के बाहर डू नॉट डिस्टर्ब का साइन मुँह चिढ़ा रहा था….

  बॉडीगार्ड्स को एक तरफ धकेल कर वासुकी ने कमरे पर ज़ोर से दस्तक देनी शुरू कर दी…
की तभी गार्ड्स ने आगे बढ़ कर वासुकी को पकड़ लिया…
वासुकी ने पलट कर दोनों ही गार्ड्स के सर आपस में ज़ोर से भिड़ाये कि उसी वक्त शेखावत के दो और गार्ड्स वहाँ चलें आये.. उनमें से एक को पलट कर नीचे गिराने के बाद दूसरे के चेहरे पर वासुकी का ज़ोर का घूंसा पड़ा और वो घूम कर नीचे फर्श पर गिर पड़ा…

  दर्श सिर्फ दिमाग दौड़ाना जानता था, मार पीट से उसका दूर दूर तक कोई नाता नहीं था.. इसी से वो एक तरफ खड़ा ये सारा तमाशा देख रहा था.. वो भी जानता था कि शेखावत के चार गार्ड्स आये या चालीस एक अकेला वासुकी उन सब पर भारी था… उसका तो सबसे प्रिय शौक ही कुश्ती करना था…
उन चारों को पल भर में धूल चटाने के बाद वासुकी ने एक ज़ोर कि लात दरवाज़े पर ज़माने को पैर उठाया ही था कि किसी अनहोनी कि आशंका से उसके पीछे भागते आये मैनेजर ने अपने पास कि कीज़ से दरवाज़ा खोल दिया…
  दस्तक सुन कर शेखावत खुद दरवाज़े तक पहुँच चुका था…
  इस तरह बाहर से दरवाज़ा खुलने से नाराज़ शेखावत सामने खड़े वासुकी को देख अचानक कुछ समझ नहीं पाया… गुस्से में वो उस पर और मैनेजर पर उबलने वाला था कि वासुकी ने उसे अपने एक हाथ से किनारे किया और तेज़ी से अंदर दाखिल हो गया…

    लेकिन वासुकी ने अंदर जो देखा कि उसका  दिमाग सांतवे आसमान पर पहुँच गया…..
   गुस्से से मुट्ठियाँ भींचता वो पलटा और शेखावत कि तरफ बढ़ गया…

क्रमशः
..

aparna…

   पिया आईने के सामने खड़ी अपने बाल संवार रहीं थीं कि समर ने आकर पीछे से उसे अपनी बाँहों में भर लिया…

“अब तक नाराज़ हो.. ?”

समर के सवाल पर पिया ने न में सर हिला दिया..

“पर शक्ल पर तो अब भी बारह बजे हैं ?”

“हाँ तो क्या  करूँ.. ? जिसका पति लंच के बाद ये कह कर काम पे जाएं कि बस दो घंटे में वापस आ जाऊंगा और रात दो बजे वापस आये उसकी बीवी को तो ख़ुशी से गाने गाते रहना चाहिए.. हैं न.. !”

“यार काम ही ऐसा फंस गया था… क्या करूँ.. ?”

“तो जाओ न काम ही करो… !”

“अच्छा सुनो न… शाम को एक सरप्राइज़ हैं तुम्हारे लिए… तुम्हारे कबर्ड में कुछ रखा हैं तुम्हारे लिए…  लेकिन अभी मत देखना.. शाम को अस्पताल से आने के बाद उसे खोलना.. !”

चौंक कर पिया समर कि तरफ मुड़ गयीं…

“क्या हैं… ?”

“अरे कहा तो सरप्राइज़ हैं… ! शाम से पहले तुम कुछ मत देखना… !”

पिया के माथे को चूम कर समर बाहर निकल गया… -” जल्दी आ जाओ.. तुम्हें अस्पताल छोड़ते हुए मैं निकलूंगा.. !!

अलमारी कि तरफ बढ़ती पिया मन मसोस कर कमरे से बाहर निकल गयीं…

अगले भाग कि झलक..



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