
अपराजिता -138
अनिर्वान ने मुस्कुरा कर उसके कंधे थपथपा दिए..
वीर जो अब तक ये सोचे बैठा था कि अनिर्वान उसके भाइयो के पैरो में गिर पड़ेगा के पैर उसका बड़ा भाई छू गया था..
वीर भौचक्का सा अनंत की तरफ भागा और अखंड और यज्ञ को भी आवाज़ लगाने लगा..
अपने भाइयो को देख उसे राहत महसूस हो रही थी, उसने तुरंत अपनी कटी छिली ऊँगली अखंड के सामने कर दी..
“देखिये भैया इस पागल आदमी ने क्या किया हमारे साथ ! हमें हमारी गलती तक नहीं बता रहा और बस बेतरतीब कूटे जा रहा है… भैया जल्दी से हमें छुडवाइये और ले चलिए यहाँ से.. वरना ये जंगली हम दोनों को मार डालेगा !”
यज्ञ ने एक नजर अनंत पर डाली और अनिर्वान की तरफ घूम गया..
“सर क्या किया है इन दोनों ने.. क्या आप बता सकते है ?”
“क्यों नहीं ज़रूर बता सकता हूँ, बल्कि आइये आप लोगो को आँखों देखा किस्सा दिखाता हूँ.. आइये मेरे साथ !”
अनंत और वीर एक दूसरे को देखने लगे..
अखंड और यज्ञ भी एक दूसरे को देखते हुए आगे बढ़ने लगे कि वीर चीख पड़ा..
“अरे वो आदमी पागल है.. आँखों देखा दिखाने के लिए कहीं हमें ही जीप से बान्ध कर ना खींचने लगे, जैसे उस लड़की को इस अनंत ने खींचा था..
अनंत ने गुस्से में वीर को घूरा..
“तुम थोड़ा चुप नहीं रह सकते.. और सब कुछ बक दो.. ।”
“अरे बेवकूफ इंसान तुम्हे अब तक समझ नहीं आया कि वो सब जान चुका है..।”
अखंड ने वीर को देखा और यज्ञ की तरफ देखने लगा, यज्ञ ने कंधे उचका दिए..
“जिसने जो किया है उसे वो भरना पड़ेगा !” यज्ञ धीरे से ये बोल कर बाहर निकल गया, उसी के साथ अखंड भी निकल गया..
वीर और अनंत एक दूसरे पर ठीकरा फोड़ते चले जा रहे थे.. अगर कॉन्स्टेबल ने पकड़ा ना होता तो दोनों ज़रूर भागने की कोशिश करते..
बाहर निकलते ही अनिर्वान अपनी जीप लेकर आया और अनंत की तरफ देख इशारा कर दिया..
अनंत उसका इशारा तो समझ गया था, लेकिन भाग नहीं रहा था।
उसे लगा भागने से उसे ज्यादा चोट लगेगी, इसलिए वो चुप, बुत बना एक जगह खड़ा था कि तभी अनिर्वान ने अपनी गाड़ी स्टार्ट की और उसकी तरफ बढ़ने लगा..।
अनंत घबराया सा खड़ा था कि अनिर्वान ने पीछे से उसकी कॉलर पकड़ी और गाड़ी चलाते हुए उसे खींचने लगा…
ना चाह्ते हुए भी अनंत को गाड़ी के साथ भागना पड़ा.. अनिर्वान वही बाहरी परिसर में गाडी को एक लम्बा चक्कर घुमाते हुए गोल गोल घुमा रहा था, गाडी की स्पीड बढ़ती जा रही थी..
भागते हुए अनंत के पैर की चप्पलें भी फिंक गयी.. उसके पैर कंकरीली ज़मीन पर पड़ कर घिसने लगे.. पैरो से खून की धार बह निकली, उसके मुहं से पहले तो छोड़ दो माफ़ कर दो जैसे शब्द निकल रहे थे लेकिन पीड़ा के अतिरेक में अब उसके मुहं से गालियाँ निकलने लगी..।
वो एक के बाद एक भद्दी गालियाँ अनिर्वान को बोलने लगा।
एक तरफ खड़े अखंड और यज्ञ उसे देख रहे थे.. अखंड को सही मायनो में अनंत पर इतना अत्याचार अच्छा नहीं लग रहा था, लेकिन यज्ञ के चेहरे पर कोई भाव नहीं थे.. वो चुपचाप खड़ा ये सारा तमाशा देख रहा था..
उसने बाजु में खड़े वीर की तरफ देखा..
“उस लड़की के साथ यह सब किया है,तुम दोनों ने ?”
वीर घबरा कर यज्ञ की तरफ देखने लगा।
” हमने कुछ नहीं किया है भैया, यह सब अनंत की करतूत है। हम तो चुपचाप अपने दोस्तों के साथ घर लौटने वाले थे। हमें दूर्वागंज में रास्ते में यह दिख गया। हमें लगा रिश्तेदार है, गाड़ी में बैठा लेना चाहिए।
बस गाड़ी में बैठ कर आगे बढ़ रहे थे।
आगे एक लड़की जा रही थी। पता नहीं इसके दिमाग में कौन सा शैतान सवार हुआ, कि इसने हमसे उस लड़की का पीछा करने को कहा और हम इसकी बात मानकर उसके पीछे लग गए।
एक सुनसान जगह में पहुंचने के बाद इसने उस लड़की को बालों से ऐसे ही पकड़ कर जीप के साथ खींच दिया।
सच कह रहे भैया हमने बहुत कहा कि उसे गाड़ी में अंदर खींच लो, लेकिन ऐसे मत घसीटो।
लेकिन इस शैतान ने हमारी नहीं मानी, और उसके बाद उसने थोड़ा आगे बढ़ाने के बाद जब वह लड़की खुद को छुड़ाने का प्रयास करने लगी तो उसके सर को किनारे वाले कांच पर दे मारा..।”
उसी समय एक जोरदार आवाज हुई।
यज्ञ और अखंड दोनों का ध्यान वीर की बात से हटकर अनिर्वान की गाड़ी पर गया। अनंत का सर अनिर्वान ने भी कांच पर उसी तरह दे मारा था।
लेकिन इस बार कांच टूट कर अनंत के माथे पर जोर से लग गया था। अनंत दर्द से तिलमिला उठा और एक बार फिर वह अनिर्वान से अपने किए की माफी मांगने लगा।
यज्ञ ने घूर कर वीर की तरफ देखा और उसे खींचकर एक तमाचा लगा दिया।
” आप हमें क्यों मार रहे हैं? हमने बताया तो कि हम निर्दोष हैं। हम तो अनंत को बोल रहे थे कि लड़की को ऐसे मत खींचे।”
” बेवकूफ! तुम अनंत से यह बोल रहे थे की गाड़ी में अंदर खींच लो।
लड़की है वह, कोई सामान नहीं है कि चलते-फिरते जो पसंद आ गया उठाकर अपनी गाड़ी में डाल लिया। तुम्हें तो बेटा अगर पुलिस वाले ने छोड़ भी दिया ना, तो हम तुम्हारे खिलाफ खुद से केस लगा देंगे।”
यज्ञ के ऐसा बोलते ही वीर ने अखंड की तरफ देखा और उसके पैरों पर गिर गया।
” अखंड भैया हमें बचा लीजिए,ये पुलिस वाला सामान्य आदमी नहीं है। इसका दिमाग खिसका हुआ है। यह अभी कुछ देर पहले अनंत की आंखें निकाल लेने वाला था।
हमारी उंगली देखिए आधि उंगली कटते बची है। हमें जिंदा बचा लीजिए। अगर इसके थाने में छोड़कर गए तो आप हमें एक सिंगल पीस में वापस नहीं ले जा पाएंगे।”
अखंड ने उसे देखा और उसे उठाकर खड़ा कर दिया।
” देखो वीर गलती तो तुमसे हुई है, हमें तो लगा था तुम बिल्कुल ही निर्दोष हो। लेकिन तुम इतने भी निर्दोष नहीं। पहली बात तो तुम्हें अनंत को अपनी गाड़ी में बैठाना ही नहीं था। अगर बैठा भी लिया तो सीधे उसे लेकर घर आते। उसका कहा मान कर तुमने लड़की का पीछा किया और फिर उसे परेशान किया।
यह सारी बातें तुम्हारे पक्ष में नहीं जाती…।
हम तुम्हारा बस इतना ही साथ दे सकते हैं कि वकील बाबू से बात करके तुम्हें छुड़ाने के लिए कागज तैयार करवाते हैं। इससे ज्यादा की हमसे उम्मीद मत करना..।”
“बस भैया यही तो कह रहे हैं, आप अभी अपने वकील बाबू को फोन घुमा लीजिए। अभी के अभी कागज तैयार हो जाएंगे। तो हम छूट जाएंगे। वरना अगर आज की रात भी हमें यहां रुकना पड़ गया ना, तो हम कल सुबह का सुरज नहीं देख पाएंगे। ये हम जानते हैं..।”
अबकी बार वीर की बात सुनकर यज्ञ जोर से चीख पड़ा “जब जानते थे कि यह सब गलत है, तो यह सब करने की जरूरत क्या थी? हमारा नाम खराब कर दिया तुमने।
लोग क्या सोचेंगे कि तुम्हारे घर की परवरिश ही ऐसी है, तुम्हारा खून ही गंदा है, जो तुमने इतनी खराब हरकत की।
हम तो कहते हैं कि महीना भर तुम जेल में सड़ो, तुमको ऐसी सजा मिलनी चाहिए कि आइंदा ऐसा करने से पहले तुम्हारी रूह कांप जाए..।”
वीर के चेहरे पर नाराज़गी नजर आने लगी.. उसने घूर कर वीर को देखने के बाद अखंड की तरफ देखा..
वीर अब भी उसे ही देख रहा था, अखंड ने यज्ञ के गुस्से को शांत करने उसके कंधे पर हाथ रख दिया..
“यज्ञ, पुलिस वाले भी उस पर नाराज़ हैं, ऐसे में तुम तो शांत रहो।
हमें हमारे भाई का साथ देना चाहिए ना ?”
“नहीं भैया! माफ कीजिएगा लेकिन इस बात पर हम आपका समर्थन नहीं कर पाएंगे। अगर वीर ने कोई गलती नहीं की होती तो हम उस पुलिस वाले के सामने सीना तान कर खड़े हो जाते और इसे अपनी ओट में ले लेते। लेकिन वीर ने गलती की है और ऐसे में सिर्फ हमारा भाई है इसलिए हम इसके किए पाप को नजरअंदाज करके इसे बचाने की कोशिश नहीं करेंगे।
अब भी देख लीजिए इसके चेहरे पर पछतावे की एक रेखा तक नहीं है। फिर भी आप इसे बचाना चाहते हैं? वह भी सिर्फ इसलिए की ये हमारा छोटा भाई है..?”
“यज्ञ यह भी तो हो सकता है कि वीर को गलत फंसाने की कोशिश की जा रही हो। हर समय हम सामने वाले का गुनाह देखकर यह तय नहीं कर सकते कि उसने वाकई गुनाह किया है या नहीं?”
“अखंड भैया आप अपना वक्त भूल जाइए.. आप में और वीर में बहुत फर्क है। सबसे पहली बात तो यह जितनी बेदर्दी से शराब पीता है इसकी किसी बात पर हम विश्वास नहीं कर पाते।
दूसरी बात इसके दोस्तों ने खुद कबूल किया है, यहां तक कि अनंत ने भी कहा और उन तीनों तक आप क्यों जाते हैं, आपके सामने वीर ने खुद कबूल किया है कि जब अनंत उस लड़की को जीप में पकड़ कर खींच रहा था तब वीर ने उससे कहा था कि उसे लड़की को जीप के अंदर ले लेना चाहिए।
जबकि इसकी जगह वीर को चलती जीप को रोकना था। अनंत को कायदे से थप्पड़ मारना था और उस लड़की को वहां से चले जाने देना था।
उसकी बजाय आपका यह भाई चलती जीप में उस लड़की को अंदर खींचने की बात क्यों कह रहा था? बस इसी क्यों को सोचकर हमारा खून खौल रहा है..।”
“यज्ञ हमें वीर को मौका तो देना चाहिए..।”
“किस चीज का मौका? अखंड भाई आप अपने केस से वीर के केस को एकजुट मत करिए। भैया हम कहना तो नहीं चाहते लेकिन आज तक आप अपने केस के मेंटल ट्रॉमा में जी रहे हैं। आपके दिल दिमाग से वह केस, वह लड़की, कुछ भी निकला नहीं है ।
आज भी आपको लगता है की पूरी दुनिया सिर्फ निर्दोषों को गुनहगार ठहरा देती है। जबकि ऐसा नहीं है। ज्यादातर केस में लोग गुनाह करते हैं और इसलिए उन्हें दोषी ठहराया जाता है। आपका केस बिल्कुल अलग था भैया, और अपने दिमाग से उन बातों को जाने दीजिए। आप आज भी सामान्य नहीं हो पाए हैं..।”
अनिर्वान की गाडी लगातार चल रही थी और बस कुछ ही देर में अनंत की साँस उखड़ने लगी थी…
वो हाथ जोड़ कर गाड़ी रोकने की प्रार्थना करने लगा उसकी हालत देख कर वीर चीख पड़ा..
“अरे मर जायेगा वो, गाडी रोको !”
अनिर्वान के कानो में जैसे ही वीर की आवाज़ पड़ी उसने गाड़ी रोक दी…
वीर का दिल धक से रह गया, उसने वहीँ खड़े बाबूराव की तरफ देखा..
बाबूराव ने अपने माथे पर हाथ मारा और उसके मुहं से निकला.. -“सत्यानाश !”
वीर एकदम से घबरा गया कि उससे ऐसी क्या गलती हो गयी और तभी अगले ही पल अनिर्वान वीर के सामने पहुँच गया.. उसने अखंड और यज्ञ की तरफ देखा..
“आप दोनों अंदर केबिन में बैठ कर प्रतीक्षा कीजिये.. मैं आता हूँ.. ।
और बाबूराव उस डॉक्टर को बुला लीजिये जिसने बच्ची की जाँच पड़ताल की थी.. !”
बाबूराव हामी भर कर चला गया.. और अनंत को छोड़ कर अनिर्वान का ध्यान अब वीर पर केंद्रित हो गया..
अनंत अलग लुटा पिटा सा धूल फांक रहा था…
अनिर्वान ने इधर उधर देखा और एक दूसरे पुलिस कर्मी को बुला लिया..
“भाटी साहब, ज़रा इधर आइये.. !”
“जी हुज़ूर !”
“सिगरेट पीते हैं आप ?”
थाने में हर कोई जानता था की अनिर्वान को किसी भी तरह के नशे से कितनी नफरत थी, इसलिए थाना परिसर में कभी कोई भी किसी तरह का नशा नहीं करता था..
भाटी साहब भी चुप खड़े रह गए..
“जानता हूँ, आप कभी कभी सिगरेट फूंक लेते हैं.. कोई नहीं.. ज़रा एक जलाइए ना !”
बड़े आश्चर्य से भाटी ने अनिर्वान को देखा और धीरे से अपनी जेब से सिगरेट का पैकेट निकाल लिया…
“देखना नहीं है, जलाना भी है भाटी साहब !”
भाटी ने सिगरेट जला ली.. और अनिर्वान की तरफ बढ़ा दी.. वहाँ मौजूद हर एक आदमी स्तब्ध खड़ा था कि अब ये सनकी क्या करने वाला है। लेकिन शायद वीर को अंदेशा हो गया था…
वो घबरा कर पीछे हटने लगा और अनिर्वान ने एक हाथ से उसकी गर्दन पकड़ी और अपने दूसरे हाथ में पकड़ रखी जलती सिगरेट को उसके माथे पर छुआ दिया।
और वह जोर से चिल्ला उठा।
तभी अनिर्वान ने वहां जमीन पर पड़े कपड़े को उठाकर वीर के मुंह में ठूंस दिया।
उसके दोनों हाथों को पीछे से भाटी साहब ने पकड़ रखा था। वह कुछ भी करने में असमर्थ था। अनिर्वान ने सिगरेट के जलते टुकड़े को वीर की गर्दन में दो जगह लगा दिया और उसके बाद उसी के हथेली को पलट कर उसमें उसने उस सिगरेट को बुझा दिया।
वीर कलप कर रह गया..
अंदर अखंड और यज्ञ तक एक बार वीर की आवाज जरूर पहुंची, लेकिन उसके बाद उसकी आवाज आनी बंद हो गई थी। बाबूराम ने रेशम को फोन करके थाने बुला लिया था।
अंदर बैठे अखंड और यज्ञ आपस में भी कुछ बात नहीं कर रहे थे। अखंड अब तक इसी बात को सोचता बैठा था कि वह वीर को कैसे छुड़वा सकता है।
और उसके बगल में बैठा यज्ञ यह सोच रहा था कि अगर वीर ने गलती की है, तो वह उसे किसी कीमत पर यहां से बिना सजा मिले घर वापस नहीं लेकर जाएगा।
इसके साथ ही उसके दिमाग में अनंत वाली बात भी चलने लगी थी…।
वीर को भी एक हाथ से पड़कर अनिर्वान ने अनंत के पास जमीन में फेंक दिया।
” इन दोनों को घसीट कर अंदर लाना और जिस कमरे में इनके भाई बैठे हैं, उसके बगल वाले कमरे में सलाखों के पीछे डाल देना।”
इतना कहकर अनिर्वान अपने केबिन में चला आया।
” हां तो कहिए, आप लोगों का आना कैसे हुआ?”
अखंड ने अनिर्वान की तरफ देखा और एक गहरी सांस लेकर उसने बोलना शुरू कर दिया।
” सर वीर हमारा छोटा भाई है, और अनंत भी रिश्ते में हमारा भाई लगता है। हम बस यही जानना चाहते थे कि यह दोनों यहां कैसे ?”
“अखंड बाबू आपके इन दोनों भाइयों ने अपने दो दोस्तों के साथ कल रात में एक लड़की की बहुत दुर्दशा की है। इन लोगों ने उसकी बेइज्जती करने की कोशिश जरूर की, लेकिन कर नहीं पाए। बावजूद उसे बहुत ज्यादा फिजिकल और मेंटली टॉर्चर किया गया है।
तो इसीलिए इन दोनों को बल्कि उनके साथ उनके दोस्तों को भी मैंने पकड़ लिया है। और फिलहाल इन लोगों के खिलाफ चार्ज शीट तैयार करके मामला कोर्ट में पेश करने वाला हूं।”
अखंड यह सुनकर परेशान हो गया
“सर आप तो जानते हैं, एक बार मामला कोर्ट तक पहुंच जाता है। उसके बाद यह बहुत लंबी और उबाऊ प्रक्रिया हो जाता है। और उसके बाद हमारे हाथ में कोई चीज नहीं रह जाती।
तो इसलिए अगर कोर्ट तक ये मामला नहीं जा पाता तो…”
” माफ कीजिए अखंड बाबू लेकिन इन लड़कों ने उस लड़की के साथ ज्यादती तो की है, और उसकी इन दोनों को सजा भी मिलनी ही चाहिए। “
“अभी आपने जितनी सजा दी है, क्या यह पर्याप्त नहीं थी?”
अनिर्वान बहुत ध्यान से अखंड को देखने लगा। इसके साथ ही यज्ञ भी बड़े आश्चर्य से अखंड को देख रहा था। उसने अखंड की बात के बीच में अपनी बात कहनी शुरू कर दी।
” अखंड भैया ठीक कह रहे हैं सर ,इन दोनों को आपने जितनी सजा दी है बहुत है..।
अनंत और वीर कोई पेशेवर गुनहगार तो है नहीं। यह लोग भी हमारे जैसे आम लड़के ही हैं।
हुजूर बस इनमें और हममें इतना ही अंतर है कि इन लोगों को गुस्सा बहुत आता है। और जब इन दोनों को गुस्सा आ जाता है तब इनके होश ठिकाने नहीं रहते..।
बाकी लड़के दोनों सही है।
थोड़ा बहुत पीने पिलाने की बेकार सी आदत के अलावा और कोई घटिया आदत नहीं है। बस एक गुस्सा ही है जो कंट्रोल नहीं होता…।
अनंत तो गुस्से में इतना पागल हो जाता है कि कुछ भी कर लेता है।
हम पर उसकी नाराजगी इतनी ज्यादा थी कि उसने हमारी गाड़ी के ब्रेक फेल कर दिए थे। यह तक नहीं सोचा कि हमारी जान भी जा सकती है।
है तो हमारा रिश्तेदार, हमसे प्यार भी करता है। लेकिन हमने कहा ना गुस्से में बस पागल हो जाता है।
उस समय यह भूल जाता है कि यह किसके साथ गलत करने जा रहा है।
यही हाल वीर का भी है। गुस्से में वह भी अपना आपा खो बैठता है। और हम पूरी तरीके से श्योर है कि वीर को भी कल किसी बात पर जरूर गुस्सा आया होगा, और इसीलिए उसने इतना बड़ा गलत कदम उठा लिया।
हालांकि उसका काम माफी के लायक तो है नहीं, लेकिन क्या करें है तो सीधा-साधा आदमी ही। बस गुस्से में गलत कदम उठा लेता है।
आप समझ सकते हैं हम क्या कह रहे हैं ?”
अनिर्वान ने अखंड के बाद यज्ञ को मुस्कुरा कर देखा और धीरे-धीरे गर्दन हिलाने लगा।
” मैं बिल्कुल अच्छी तरह समझ रहा हूं कि आप क्या कहना चाहते हैं? मैं खुद भी आप लोगों की तरफ बहुत शरीफ सच्चा और ईमानदार आदमी हूं। गांधी जी का परम भक्त हूं। एकदम शांतिप्रिय, अहिंसा और मारधाड़ तो मुझे पसंद ही नहीं आता।
जितना हो सकता है लोगों को माफ करने में यकीन रखता हूं।
ईंट का जवाब पत्थर से देने में मेरा कोई यकीन नहीं। बल्कि मेरी सोच यह है कि अगर कोई आपकी तरफ ईट फेंकता है, तो उसे तब तक इंट फेंकने दीजिए जब तक आपके पास एक बड़ी इमारत बनाने के लिए पर्याप्त जमा न हो जाए और फिर उस सामने वाले की फेंकी ईंटों से इमारत बनाकर सबसे ऊपर की मंजिल पर खड़े होकर वहां से उस नीचे खड़े नीच और जलील इंसान को देखिए और फिर उससे पूछिए की कैसा लग रहा है?
ऐसे बदला लेने में जो मजा है ना और किसी चीज में नहीं।
हालांकि इन दोनों लड़कों ने मुझ पर ईंट नहीं फेंकी, क्योंकि इनकी इतना करने की औकात भी नहीं है।
मेरे साथ भी बस यही दिक्कत है कि अगर देखता हूं किसी मजलूम के ऊपर अत्याचार हुआ है, तो मेरा भी गुस्सा भड़कने लगता है। लेकिन मेरे साथ यह समस्या है कि मैं गुस्से में पागल होकर कोई गलत कदम नहीं उठाता..।
खैर फिलहाल आपके रिश्तेदारों को छोड़ना मेरे लिए पॉसिबल नहीं है। हां आप लोग अपने वकील से मिलकर कागज तैयार करके कल परसों तक आईये। तब तक मुझे सेवा का मौका दीजिए।”
यज्ञ मुस्कुरा कर खड़ा हो गया
“जी सर हम पूरी कोशिश करेंगे कि वकील साहब से परसो मिलकर कागज तैयार करवा ले। और इन दोनों की जमानत करवा ले।”
अनिर्वान ने यज्ञ को देखा और अपने माथे पर उंगली से स्क्रैच करने लगा।
“परसो तो मुश्किल होगा यज्ञ बाबू, क्योंकि परसो शनिवार है और शनिवार जमानत के कागजात तैयार करवाने में आप लोगों को दिक्कत आ सकती है।”
क्रमशः

सुपर्ब पार्ट ,पता है अपर्णा जितना याद आपको राजा अजातशत्रु को लिखने के लिए किया जाता है उससे कत्तई कम नहीं किया जाएगा अनिर्वान को लिखने के लिए
एक इंसान जिसमें अन्याय का जबाब उन्हीं की भाषा में देने का दमखम है ।यज्ञ का किरदार भी दिल पर दस्तक दे रहा है मेरा भी यही मानना है कि वो इंसान ही क्या जो सही को सही और गलत को गलत न कह सके और यज्ञ को सही गलत को कहना आता है
लाजवाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻♥️♥️♥️💐💐⭐⭐⭐⭐⭐वीर और अनंत को अब पता चेगा दर्द क्या होता है किसी मासूम का मजाक उड़ाना उसे टॉर्चर करना… अब खुद पर बीत रही तो चिल्लाना क्यों…।
यज्ञ भी चाहता है इनको अपने किए की सज़ा मिले तभी तो अनिर्वान को घुमा फिरा के गाडी वाला कांड भी बता दिया कि ये कांड भी अनंत ने ही किया है।
देखते है आगे क्या होता है..।
Very interesting part 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻
👏👏👏👏👏👏👏👌👌👌👌👌👌❤❤❤❤❤Dr Sahib aapney yeh et waali baat billkul sahi h 🧡🧡💛💛💛💛💛💛💛💛
Very nice part
कसम से मज़ा आ गया जो हालत अनिर्वान ने इन दोनों की।
ये इसी लायक है,,, सजा तो मिलनी ही चाहिए,,, पर हाए हमारे भोले से अखंड बाबू,,,, उफ्फ तोबा इतना शरीफ कोन होता है,,,, और उनके उलट यज्ञ बाबू,,, वाह वाह ,, क्या सही समझाया बातो में उनको गुनाह को 😂😂😂😂
Superb part tit for tat
Awesome…very smart and intelligent answer by anirwan…nehle par dehla
🤗👍 kyon Anant aur Veer babu kaisa laga ye sab torchar jo aap dono ne masum Genda ke sath kiya tha.khud par huaa yoh bolbila rahe ho.bahut badiya Aparna ji Anirwan ka nirman kar ke kahani mae char chand laga diye.Akhand abhi bhi khud ke sath huye case ko bhula nahi hai.wo nirdosh tha par Anant aur Veer ne jaan bujh kar galat kiya hai.Yagya nahi chahata ki wo dono bina saja ke riha ho jaye.wo galat ja sath nahi dega chahe wo usake bhai he kyon naa ho.Dr.Resham ko bhi bula liya hai.yaha Akhand se samana hoga ??????
अत्याचारी को जब स्वयं अत्याचार सहना पड़ता है तब भी उसे ये समझ नहीं आता कि उसने क्या गलत किया।
उसे अपने साथ हो रहा अत्याचार गलत लगता।
दरिंदगी की विभस्तता दिल को हिला गई।