
बेसब्रियां दिल की… – 34
मोहिना ने श्लोक के साथ खड़ी निम्मी को देखा और उसके चेहरें का रंग बदल गया..
जाने क्यों मोहिना निम्मी से इतना चिढ़ती थी.. आज तक निम्मी ने कभी उसका कुछ बुरा नहीं किया था और ना ही उसे कुछ कहा था, लेकिन शायद कुछ लोगों के अंदर ये चिढ़न का कीड़ा ही होता है..!
या तो वो इस कदर हीन भावना से त्रस्त होते हैं की अपने से ज्यादा काबिल इंसान को देख उसके खिलाफ तलवार लेकर खड़े हो जाते हैं.. बस वैसा ही कुछ मोहिना के साथ था.. !
वो शुरू से ही अपने घमंड में इस कदर चूर रहा करती थी की उसे लगता था वो किसी दूसरी ही दुनिया की राजकुमारी है और हर कोई उसके सामने अपनी पलकें बिछा देगा.. लेकिन जब निम्मी और सिमरन जैसी सामान्य लड़कियों पर उसके भाई और अक्षत का दिल आते देखा तो वो ये बात सहन नहीं कर पायी… !
मोहिना जब श्लोक अक्षत के साथ दिल्ली से वापस लौट रहीं थी तभी उसने चुपके से निम्मी के नंबर को श्लोक के फ़ोन से डिलीट कर के उसके नंबर को ब्लॉक भी कर दिया..
इस वजह से निम्मी ने जब भी फ़ोन लगाया निम्मी को लगा फ़ोन बिज़ी आ रहा, या कभी कभार फाल्स रिंग भी सुनाई पड़ गयी लेकिन श्लोक को मालूम ही नहीं चला..
श्लोक वैसे भी दो नंबर रखा करता था, उसने अपना व्यक्तिगत नंबर निम्मी को दिया था…
उसका बिज़नेस कार्ड नंबर निम्मी के पास था नहीं… !
लेकिन बस इतना ही कर के मानने वालों में से मोहिना होती तो क्या बात थी..
उसके दिमाग में लड़ाई का सड़ा हुआ कीड़ा हर वक्त कुलबुलाता रहता था.. !
उसकी निम्मी से नफरत के बारे में और किसी को मालूम नहीं था, हालाँकि निम्मी और सिमरन इस बात को समझती थी लेकिन वो दोनों समझदार बहने ये भी जानती थी कि, मोहिना जैसी दिमाग की पैदल घमंडी और बदमिजाज लड़की को कुछ भी समझाना व्यर्थ है..!
मोहिना ने उस दिन किचन क्वीन प्रतियोगिता के समय हुई निम्मी से बातचीत का छिप कर वीडियो बना लिया था, जिसमे निम्मी ने मजाक में ये कहा था की वो किसी रईस आदमी को फंसा कर उससे शादी कर लेगी..
मोहिना ने इस बात का फ़ायदा उठाते हुए उसके आगे और पीछे की सारी बातों को हटा कर वो वीडियो अक्षत को दिखा दिया था..
.हालाँकि अक्षत को सिमरन बेहद पसंद थी और इसीलिए उसे निम्मी से भी कोई दिक्कत नहीं थी, लेकिन जिस ढंग से मोहिना ने वो वीडियो दिखाया अक्षत अचानक कुछ समझ नहीं पाया…
उस शाम अक्षत और श्लोक की अपने बिजनेस क्लाइंट के साथ मीटिंग थी | उस मीटिंग के बाद की डिनर पार्टी में अक्षत में भी थोड़ा सा ड्रिंक कर लिया था और जिस वक्त अक्षत श्लोक और राहुल एक साथ बैठे थे, उस वक्त जब श्लोक निम्मी की बातें बता कर उसे याद कर रहा था….
उसी समय अक्षत ने मोहिना के द्वारा भरा हुआ सारा जहर उगल दिया | हालांकि उस वक्त भी अक्षत ने यह नहीं कहा कि श्लोक को निम्मी से रिश्ता तोड़ लेना चाहिए बावजूद उस वीडियो की क्लिप दिखाकर उसे सतर्क रहने को जरूर कह दिया | अक्षत के ऐसा कहने पर राहुल ने भी अक्षत की तरफदारी की और श्लोक को उस लड़की को भूल जाने की सलाह दे दी, हालांकि राहुल उस वक्त तक ना निम्मी को जानता था और ना सिमरन को…
बावजूद उसे अपनी भाई अक्षत पर इतना भरोसा था कि उसने भी अक्षत का ही साथ दिया…
बहुत बार समय कुछ इस तरह खराब चलता है कि जहां बातें सीधी चलनी चाहिए वहां भी बातें एकदम से बिगड़ जाती हैं ! और अगर दोनों पक्ष संभालने की कोशिश ना करें, तो वह बातें इस कदर बिगड़ जाती हैं कि फिर कभी संवर नहीं पाती ! ऐसे में बहुत से लोग हताश होकर उन रिश्तो को संवारने की मंशा ही खत्म कर देते हैं !
उस दिन भी अक्षत दिल से यह नहीं चाहता था कि श्लोक निम्मी से अलग हो जाए लेकिन कुछ शराब का नशा कुछ मोहिना की बातों का असर ऐसा था कि वह जो बोलना नहीं चाहता था वह भी बोल गया और श्लोक एक ऐसा दोस्त था, जिसके लिए अक्षत की बात यानी पत्थर की लकीर थी | वह अपने सारे बिजनेस डिसीजन चाहे एक बार अपने पिता से बिना पूछे ले ले लेकिन बिना अक्षत से बात किए कभी कोई निर्णय नहीं लेता था | बस इसीलिए श्लोक थोड़ा शांत पड़ गया..
इन बातों का असर यह हुआ कि चाह कर भी श्लोक ने निम्मी को फोन नहीं किया…..
और इस तरह एक बात बनने से पहले ही सिर्फ गलतफहमियों के कारण बिगड़ गई..
लेकिन कहा भी जाता है कि अगर दो लोगों के बीच सच्चा प्यार हो तो उनकी राहे कभी ना कभी एक हो ही जाती है। श्लोक और निम्मी दोनों ही एक दूसरे के जैसे थे। साफ दिल और साफ मन के लोग। इन दोनों के ही मन में किसी तरह की कोई कलुषता नहीं थी, इसलिए जब दोनों ने पहली नजर में एक दूजे को देखा तो अपने सारे गिले-शिकवे पल भर में भूलकर एक दूसरे की तरफ बढ़ गए ।ना ही श्लोक ने निम्मी पर कोई नाराजगी दिखाई और ना ही निम्मी बिना मतलब के नखरे दिखाती हुई तुनकमिजाजी करने लगी..
श्लोक के मन में यह बात भी बहुत समय से थी कि, आखिर उसके जाने के बाद निम्मी ने उसे फोन क्यों नहीं किया ? और तब मोहिना ने उसे यही जवाब दिया था कि अब निम्मी को श्लोक में इसलिए भी रुचि नहीं होगी क्योंकि वो लोग वहां से चले गये है, और अब निम्मी जरूर किसी और रईसज़ादे को फंसाने में लगी होगी…
लेकिन आज निम्मी को सामने देखकर श्लोक के मन से सारा वैमनस्य पल भर में निकलकर बाहर चला गया। उसने अपना सवाल एक बार फिर निम्मी से पूछ लिया..
” निम्मी बताओ ना, मैं जानना चाहता हूं कि तुमने मुझे एक बार भी फोन क्यों नहीं किया..?”
” यह सवाल तो मैं भी आपसे पूछ सकती हूं ? आपने भी तो मुझे कॉल नहीं किया?”
” उसका एक कारण था, मैंने जाने से पहले तुमसे इस बात की इजाजत नहीं ली थी, और मुझे लगा पता नहीं तुम कैसे रिएक्ट करोगी..?”
” आप इतनी बार मुझसे मिलने के बाद भी मेरे लिए ऐसा सोच सकते हैं?”
” नहीं सोच सकता इसीलिए तो उस वीडियो पर भी इतना भरोसा नहीं हुआ मुझे । और इसीलिए जब आज तुम सामने दिखी तो मैं खुद को रोक नहीं पाया और तुम्हारे पास खुद ब खुद चला आया..! निम्मी तुम्हारी बहने कैसी हैं सिमरन और विम्मी..!”
” वह दोनों तो ठीक है, लेकिन एक बात बताइए ,आप कौन सी वीडियो की बात कर रहे हैं..?”
” अरे छोड़ो ऐसी कोई खास बात नहीं है…! बाद में कभी फुर्सत में बता दूंगा ! वैसे एक बात बताओ, क्या तेजस अब भी तुम्हारे घर आता है? सिमरन से अब भी मिलता है वह ?”
” हां वह सिमरन का दोस्त है ,इसलिए आता रहता है कभी कभार। लेकिन क्यों..?”
” देखो सिमरन से कहना उससे दूर रहे वो अच्छा लड़का नहीं है..!”
“मतलब.. ? आप जो भी कहना चाहते हो प्लीज आप साफ साफ कहिए । ऐसी बातें मुझे समझ में नहीं आती..!”
हां में गर्दन हिलाकर श्लोक ने एक तरफ आगे बढ़ने का इशारा किया और उसकी बांह के इशारे को समझकर निम्मी भी आगे बढ़ गई । दोनों एक तरफ की कुर्सी पर बैठ गए।
वेटर ने आकर उन दोनों के सामने कॉफी के कप रख दिए । अपने प्याले में से एक घूंट भरने के बाद श्लोक ने धीरे से कहना शुरू किया..
” मुझे मालूम नहीं कि तुम लोगों से तेजस ने अपने बारे में क्या बताया है, लेकिन उसकी सच्चाई बेहद चौंकाने वाली है उसके पिता अक्षत के पिता के यहां काम किया करते थे….
उनका काम मुनीम गिरी का था ,अपने काम में वह पहले काफी ईमानदार थे और उन्होंने अक्षत के पिता का विश्वास भी जीत लिया था । उनके न रहने पर अक्षत के पिता ने तेजस को भी अपने बेटे की तरह पालना शुरू कर दिया, वह अक्षत और तेजस में किसी तरह का भेदभाव नहीं करते थे । लेकिन जैसे-जैसे तेजस बड़ा होता गया अक्षत को लेकर उसके मन में बैर की भावना घर करती गई, जबकि देखा जाए तो वह महल वह माता-पिता वह जमीन जायदाद वह सारा बिज़नस, सारा एंपायर सब कुछ अक्षत का था, और तेजस सिर्फ वहां काम करने वाले एक इमानदार एम्पलाई का बेटा भर था, लेकिन उसके पेरेंट्स नहीं रहे इसलिए उसकी जिम्मेदारी अक्षत के पिता ने उठाई थी और इस बात का पूरा फायदा तेजस ने उठाया… ।
तेजस शुरू से अक्षत की बराबरी करने लगा फिर भी अक्षत के घरवालों ने इस बात को इग्नोर किया, लेकिन वह धीरे-धीरे अक्षत की झूठी गलतियां उसके पिता के सामने परोसने लगा इस बात को अक्षत भी समझता था और उसके पिता भी, लेकिन दोनों ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया लेकिन एक दिन जब अक्षत के पिता अक्षत से बिजनेस को लेकर कुछ व्यक्तिगत बातें कर रहे थे तब तेजस ने छुपकर वह सारी बातें सुन ली और उसे मालूम चल गया कि अक्षत के पिता अक्षत से तेजस को किसी एक बिजनेस को पूरी तरह से दे देने की सिफारिश कर रहे थे। अक्षत भी इस बात पर लगभग राजी बैठा था। लेकिन तेजस का सिर्फ इतने से मन नहीं भरना था, उसकी आकांक्षाएं और ख्वाहिशें काफी बढ़ गई थी। और इसलिए उसे लगने लगा था कि इस पूरे एंपायर को दो भागों में बांट कर एक हिस्सा अक्षत को और दूसरा हिस्सा तेजस को दे दिया जाए, लेकिन स्वाभाविक रूप से भी यह संभव नहीं था ।तेजस अक्षय की पिता की उस बात को सुनकर बौखला गया, उसे लगा सिर्फ किसी बिजनेस का एक छोटा हिस्सा बनने से उसे कितना कुछ मिल जाएगा और इसलिए उसने अपनी एक गहरी चाल चली…
” क्या किया उसने?”
निम्मी के माथे पर बल पड़ गए और यह बात सुनाने जा रहे लोग का चेहरा गुस्से में लाल हो गया…
क्रमशः
