गली बनारस की -34

गली बनारस की by aparna

तू बन जा गली बनारस की  -34

” यह आधी रात के वक्त तुम्हारे फोन पर कौन फोन कर रहा है जान? अपना फोन दिखाना हमें  ?”

    सुयश की बात सुनते ही धानी के चेहरे पर चिंता की लकीरें खिंच गयी… उसकी धड़कन डर के मारे इतनी तेज हो गयीं की उसे खुद सुनाई पड़ने लगी…
जब तक में सुयश आंखें खोलता उतनी देर में तेजी से धानी के दिमाग ने काम करना शुरू किया और उसने फटाफट बिक्रम के दोनों कॉल डिलीट कर उसका नंबर तुरंत ब्लॉक कर दिया……
    वह जब तक मैं सुयश को फोन देती सुयश उसके ऊपर से होते हुए उसके हाथ से उसका फोन छीन बैठा…
   धानी कि सांसे इतनी तेज चल रही थी, कि उन सांसो को सुयश भी महसूस कर पा रहा था…

” क्या हुआ तुम अब तक घबराई हुई हो या तुम्हारा फ़िर से मूड.. ?

” आप परेशान मत होइए… अब सो जाइए!  आराम कीजिए, हमें भी नींद आ रही है |”

    एक भरपूर निगाह धानी  के फोन पर कॉल लिस्ट में डालने के बाद सुयश ने उसे अपनी बाहों में लिया और वापस सो गया……

इधर गेट पर उसका इंतजार करते बैठे बिक्रम को समझ में आ गया कि धानी उसका फोन काट रही है इसका मतलब सुयश आस-पास ही है और जागा हुआ है….
लाचार होकर बिक्रम ने अपना फोन वापस जेब में डाल लिया… अपने दोनों हाथों से अपना माथा पकड़े वो  जमीन पर देखते हुए अपने भविष्य को सोच रहा था कि तभी उसके कंधे पर किसी ने हाथ रखा उसने मुड़ कर देखा सामने पन्ना खड़ी मुस्कुरा रही थी..
.

” हो गया ? अब भी आपको समझ में नहीं आया इंजीनियर साहब  कि आप हमारे इस महल से अपनी मर्जी से नहीं भाग सकते…. हां अगर हम चाहे तो आप को आजाद जरूर कर सकते हैं….
अब चलिए हमारे कमरे में.. बहुत रात हो गई हैं और  हमें भी नींद आ रही है!”

अपने आप से बुरी तरह से थके हुए टूटे हुए बिक्रम ने सर उठाकर पन्ना को देखा और चुपचाप उसके पीछे कमरे की तरफ बढ़ गया….

  पन्ना का कमरा सुयश के कमरे के ठीक सामने था….  कमरे के दरवाजे पर रुक कर पन्ना ने बिक्रम को इशारा किया…

” सुयश भैया तो अपनी सुहागरात मना भी चुके होंगे और एक आप है अभी भी बाहर बैठकर तारे गिन रहे थे…”!

” तुम्हें कभी मुझ से डर नहीं लगता पन्ना!”

कमरे में अंदर घुस कर बिक्रम ने दरवाजे को बंद किया और पलंग पर बैठी पन्ना को देख कर उससे सवाल कर दिया…

” आप खुद हमसे इतना ज्यादा डरते हैं इंजीनियर साहब !!  हमें आप से क्या डर लगेगा..?”

” तुम मुझे अपनी उंगलियों पर नचा रही हो… तुम्हारे खानदान ने  बंदूक की नोक पर मेरी तुमसे शादी करवा दी है… इस सबके बावजूद तुम्हारे मन में एक बार भी यह डर नहीं आया कि कहीं मैंने तुम्हारा खून  कर दिया तो क्या होगा?”

” आप तो पहले ही हमें कत्ल कर चुके हैं इंजीनियर साहब!  अब हममें  हमारा बचा ही क्या है, जो सब है आपका ही है.. आप जैसे चाहे हमसे वसूल कर लीजिए हम तो हर बात के लिए तैयार है….

” तुम्हारी यही सज़ा हैं पन्ना कि मैं तुम्हें क़भी छुऊँगा  ही नहीं, कभी नहीं ! जिंदगी भर ऐसे ही तड़पती  रहो… बस एक तमगा लगा कर घूमती रहो कि तुम मेरी बीवी हो ! हस्बैंड वाइफ वाला कोई रिश्ता हमारे बीच कभी नहीं रहेगा.. मुझे पाना चाहती थी ना तुम मुझे छूने ही क्या देखने तक के लिए तरस जाओगी… “

” औरत और उसकी खूबसूरती की ताकत का अंदाजा नहीं हैं आपको अभी इंजिनियर साहब…  जब मेनका ने विश्वामित्र को पिघला दिया तो आप किस खेत की मूली है..?”

”  बहुत घमंड है ना तुम्हे अपनी खूबसूरती का… एक दिन इसी खूबसूरती को लिए रोती फिरोगी…  रखी रहना अपने पास अपनी खूबसूरती, अपनी नीली आंखें अपनी, यह गोरी मुलायम त्वचा… लेकिन इसे देखने सराहने  और प्यार करने वाला पति तुम्हें नहीं मिलेगा… तुमने ज़िद  में आकर मुझसे शादी तो कर ली लेकिन यह रिश्ता सिर्फ दुनिया के सामने रहेगा आई बात समझ में….?”

गुस्से में अपना तकिया और चादर लिए बिक्रम वहाँ से  जाने को था कि पन्ना दरवाजे को छेक कर खड़ी हो गई…

,”आप यहाँ  से बाहर नहीं जा सकते… आपको जो करना है, जैसे रहना हैं..  इस कमरे के अंदर ही रहिये !  कमरे के बाहर हमारे रिश्ते के बारे में किसी को कुछ मालूम नहीं होना चाहिए..”

” मेरी मर्जी मुझे जैसे रहना होगा मैं वैसे रहूंगा..! तुम्हें जो करना है तुम करो..!

इसी सब लड़ाई झगड़े में रात कब बीत गई दोनों को पता ही नहीं चला…पन्ना ने बिक्रम  को मनाने रोकने की बहुत कोशिश की लेकिन पन्ना का हाथ हटाकर बिक्रम ने उसे धक्का दिया, और दरवाजा खोलकर बाहर निकल गया उसी वक्त सुयश भी कमरे का दरवाजा खोलकर बाहर निकला और बिक्रम की ना चाहते हुए भी  कमरे के अंदर नजर पड़ गयीं…दरवाजे के सामने ही बेड था जहाँ पलंग से टेक लगाए बैठी धानी सुनी सुनी आँखों से जाने कहाँ देख रहीं थी.. उसके माथे का फैला सिंदूर, उसके बिखरे बाल और बेतरतीब कपड़े उसका हाल बयां कर रहे थे… धानी का ये हाल देख बिक्रम की आँखों में खून उतर आया…. उसकी मुट्ठियाँ भिंच गयीं.. वो पलटकर सुयश का जबड़ा तोड़ने को था की उसका ध्यान धानी पर चला गया, वो धीमे से चेहरा हिला कर उसे  रुकने को कह रहीं थी…..
   धानी को एक बार देख कर वो वापस बाहर निकल गया….

*****

  अगली सुबह सारे चौधरी खानदान की वहाँ से वापसी थी.. खा पीकर वो लोग वापसी के सफर पर निकल पड़े… बिक्रम के लिए अब सब कुछ और मुश्किल हो गया था,  धानी उसके सामने थी लेकिन किसी और की होकर.. वो खुद किसी और का हो चुका था..
  पर वो ये बात भी जानता था की वो एक मर्द हैं और उस पर किसी औरत की जबरदस्ती तब तक नहीं चल सकती जब तक वो खुद इजाज़त नहीं दें देता.. लेकिन धानी एक औरत हैं और उस पर काबू कर लेना सुयश के लिए बहुत आसान था.. बिक्रम को अब खुद से ज्यादा धानी पर तरस आ रहा था….
   वो बेचारी एक ही रात में कुम्हला गयीं थी…  सब कुछ समझते हुए भी वो धानी को बचाने कुछ नहीं कर पा रहा था…..

   सभी लोग बनारस वापस पहुँच गए… सुयश की माँ पहले ही लौट कर यहाँ की तैयारियों में लगी थी.. लेकिन सुयश का अब किसी रस्म को निभाने का मन नहीं था.. उसका मन था की अब सीधे वो धानी को लेकर कानपूर निकल जाये, यूँ लग रहा था उसे अपने मन बहलाव के लिए एक सुन्दर  खिलौना मिल गया था…  लेकिन अपनी अम्मा का कहा मानना था इसलिए वो रुक गया…..
   शाम को बनारस उतरने के बाद अड़ोस पड़ोस के लोगों के लिए बहु की मुहँ दिखाई होनी थी…
  जिसके  लिए धानी को तैयार होना था… उसे उसकी सास सुयश के कमरे में ले गयीं.. एक नौकर आकर धानी का सामान भी वहीँ छोड़ गया….  और उसी के पीछे पार्लर वाली चली आई…
   उसे तैयार होता छोड़ कर धानी की माँ उसके लिए चाय नाश्ता लेने चली गयीं और उसी वक़्त सुयश आ धमका…
   फ्लाइट में भी धानी गुल्ली के साथ बैठी थी और यहाँ जब से घर पहुंची थी सुयश के हाथ नहीं लगी थी..
   सुयश की तड़प और बेचैनी बढ़ती जा रहीं थी…
  उसने आते ही पार्लर वाली को देखा और उसके माथे पर लकीरे खिंच गयीं…

” आपका काम हो गया क्या मैडम.. ?”

“बस यही तो आप लोगों का हमें अच्छा नहीं लगता.. अरे अभी मेकअप का एक ही परत चढ़ाये हैं अभी बाकी का तीन लेयर बचा हैं.. !”

“अरे हमारी बीवी तो हैं ही बहुत सुन्दर… उसे इतने सारे मेकअप की जरूरत ही नहीं.. चलिए हो गया तो निकलिए यहाँ से.. “

मेकअप वाली ने घूर कर सुयश को देखा,  और वापस अपने काम में लग गयीं…

” समझ नहीं आ रहा क्या, बहरा गयीं हो क्या.. ?”

  इतने कड़े कठोर शब्द सुन पार्लर वाली ने वापस कुछ कहना चाहा लेकिन उसी समय धानी बोल पड़ी..

” अप प्लीज़ दो मिनट बाहर निकल जाएँ.. शायद इन्हें कुछ काम होगा.. “

धानी ने हाथ जोड़कर विनती के भाव में कहा था,  इसलिए वो लड़की गुस्से में सुयश को घूरती बाहर चली गयीं…  और उसके निकलते ही दरवाजा बंद कर वो धानी को पलंग पर खींच उस पर टूट पड़ा….
   धानी को इस बात की उम्मीद बिलकुल नहीं थी… लेकिन उसके पास फ़िलहाल कोई चारा नहीं बचा था.. बाहर दरवाजे पर  गुल्ली दस्तक देने लगी…

“सुयश भाई, क्या कर रहे,  जल्दी कीजिये मेहमान आने लगे हैं.. “

“तैयार हो रहे हैं गुल्ली, दस मिनट और लगेगा.. तुम जाओ.. !”

अपना काम निपटा कर वो बाहर निकल गया… और उसके जाते ही अपने लुटे पिटे रूप को देख धानी रो पड़ी…
 
*******
वर्तमान…

    साजन के कमरे में बैठी उसे अपनी आपबीती सुनाती धानी अब भी रो रहीं थी.. और साजन की समझ से बाहर था की वो उसे कैसे दिलासा दें.. !
  धानी ने आगे कहना जारी रखा…

” सुयश को जरा सा भी सब्र नहीं था.. उस शाम भी उसके जाने के बाद हमने मुहँ धोया और तैयार होने लगे……
… असल में गलती उससे ज्यादा हमारी थी..  पहली बार में ही उससे डरने की जगह हमें उसका विरोध करना चाहिए था…

      पहली गलती तो उसी रात हो गयीं थी जब बिक्रम के  फ़ोन को काट कर हमने उसका नंबर ब्लॉक किया.. यहाँ से शुरुवात हुई थी सुयश के शक और हमारे झूठ की….
      कोई औरत क़भी अपने  पति से झूठ नहीं बोलना चाहती लेकिन ये पति का स्वभाव होता हैं की कलह से बचने एक औरत को अक्सर उससे ही झूठ बोलना पड़ता हैं जिसके साथ शादी के बंधन में बंधी होती हैं… ! सुयश भी ऐसा ही पति था ज़िद्दी सनकी और महा शक्की.. !
 
  वो अजीब सा सनकी था.. उसे अपने खुद के शरीर से बेहद प्यार था.. रात में वो कितनी भी  देर से सोये, लेकिन सुबह उठ कर उसका जिम करना उसके लिए साँस लेने जैसा जरुरी था… जिम में डेढ़ से दो घण्टे पसीना बहा कर आने के बाद वो नाश्ता भी वैसा ही तगड़ा खाता था….. उसका रूटीन कुछ यूँ उसने बना रखा था की किसी की दखलंदाजी उसे पसंद नहीं आती थी…
   अपनी दिनचर्या से हट कर उसने एक ही नया काम शादी के बाद शुरू किया था और वो था हमें टॉर्चर करना.. !
  अपने काम के लिए भी वो जुनूनीयत से भरा था… किसी किसी केस में कई बार ऐसे इन्वॉल्व हो जाता की सबूत तक जुटाने किसी भी खतरनाक जगह में पहुँच जाया करता…दिन भर की इतनी ढ़ेर सारी मेहनत के बाद भी रोज रात हमें रौंदने से बाज नहीं आता था…
    शादी के बाद से अब उसके लिए जीवन में तीन ही चीज़े रह गयीं थी,  एक उसका खुद का शरीर, दूसरा उसका काम और तीसरा हमारा शरीर..
इन तीनों से अलग वो कुछ नहीं सोचना चाहता था और बस इसलिए चौधरी साहब ने तीनों जोड़ो के लिए जो हनीमून प्लान किया था उससे सुयश ने पहले ही अपना पल्ला झाड़ लिया.. उसने काम का बहाना कर वहाँ जाने से मना कर दिया.. और अपनी अम्मा के बार बार रोकने के बावजूद हमें साथ लिए अगले ही दिन कानपुर निकल गया….
  कानपुर निकलने के एक दिन पहले रात में घर परिवार के सदस्यों के लिए पार्टी रखी गयीं थी…   बाहर वाले बगीचे में ही सारी व्यवस्था थी… हम भी तैयार होकर नीचे चले आये थे.. हमने गुलाबी सितारों वाली साड़ी पहन रखी थी, हमारे लम्बे बालों का हमारी सास ने ऊपर कर जूड़ा बांध दिया था…..  लेकिन हमें नहीं पता था की सुयश को हमारा जूड़ा बांधना इतना खल जायेगा….

*****

फ्लैशबैक

    पार्टी चल रहीं थी, एक तरफ धीमी आवाज़ में कोई गायक बैठा गुलाम अली साहब की ग़ज़ल गा रहा था..

  इस शहर में किस से मिलें हम से तो छूटी महफिलें
  हर शख्स तेरा नाम ले, हर शख्स दीवाना तेरा
  कल चौदहवीं की रात थी,शब भर रहा चर्चा तेरा
  कुछ ने कहा ये चाँद है, कुछ ने कहा, चेहरा तेरा
  कल चौदहवीं की रात थी……

    बिक्रम उस गजल गायक के पास खड़ा सुन रहा था कि तभी धानी भी ऊपर से नीचे चली आयी.. गुलाबी साड़ी में वो बहुत सुन्दर लग रहीं थी…..
   बिक्रम कुछ देर को ग़ज़ल सुनते हुए धानी की खूबसूरती में खो कर रह गया लेकिन तभी धानी को
आते देख सुयश उसकी तरफ बढ़ गया… और उसका हाथ पकड़ कर उसे अपने साथ आगे ले चला… कैटरिंग वाले लड़के इधर से उधर घूम कर स्टार्टर सर्व कर रहे थे….
  उनमे से एक लड़का बार बार धानी के आगे पीछे से गुजर रहा था और सुयश का ध्यान इस बात पर चला गया…
     सुयश ने उसे एक नज़र घूर कर देखा और वापस रत्न से किसी केस की बात में लग गया… उसी वक़्त वो एक बार फ़िर धानी के पीछे से निकल कर उसके सामने चला आया,  धानी ने कुछ भी लेने से मना कर दिया…

” कुछ तो लीजिये मैम, ये अचारी पनीर टिक्का हमारी स्पेशिलिटी हैं.. !”

“नहीं थैंक यु, हमें भूख नहीं हैं.. !”

“अच्छा फ़िर आप ये मलाई कबाब ट्राई कर लीजिये..  !”

“नहीं प्लीज़ !” धानी के मना करने के बावजूद वो उसके सामने खड़ा उसे कुछ न कुछ लेने की ज़िद कर रहा था की उसके चेहरे पर एक झन्नाटेदार तमाचा पड़ा और वो घूम कर नीचे गिर गया…

” काहे अक्ल पे पत्थर पड़े हैं क्या बे.. साले जब वो मना कर रहीं तो काहे इतना लड़िया रहे हो ? एक बार जब कह दिया नहीं खाना तो काहे पीछे पड़े हो *****

सुयश की गन्दी सी गाली सुन वो लड़का भी तिलमिला गया…

वो लड़का भी नयी उम्र का था, उसे भी जोश आ गया.. ट्रे को एक तरफ फेंक वो सुयश से लड़ने खड़ा हो गया…

” एक्सक्यूज़ मी !आप इस तरह मुझे मार नहीं सकते,  मैं आपको कोर्ट लेकर जा…. बाकी की बात उसके गले में रह गयीं और सुयश की गोली की आवाज़ सारे परिसर में गूंज गयीं….

क्रमशः

aparna…..



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