अपराजिता -34

अपराजिता -34

   रेशम को साथ लिए मानव घर आ गया… मानव को रेशम के आँसू कभी सहन नहीं होते थे.. वो अपनी बहन के लिए इतना ज्यादा स्नेही था कि अगर उसकी किसी गलती पर रेशम के पिता कभी उसे झिड़क भी दे तब भी रूठ जाया करता था..।
बचपन से उसका यही हाल था और बड़ा होने के बाद तो उसके सामने किसी की रेशम को कुछ कहने की हिम्मत ही ना होती थी..।
वो हर किसी के सामने लड़ने को तैयार हो जाता था..।

आज भी पूरे रास्ते वो चुप रहा, उसकी बाइक पर पीछे बैठी रेशम हलके हल्के से सिसकती रहीं और वो किसी तरह से खुद को ज़ज़्ब किये बाइक चलाता रहा..

घर पहुँचने के बाद उसने रेशम को सामने बैठाया और उसे खुद की कसम दे डाली..
रेशम के पास सारी सच्चाई बताने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा… वो पंकज की बेहूदा सी हरकत मानव को बता गयी..
सुन कर मानव के माथे पर बल पड़ गए..

“रेशु… उस नीच लड़के ने जो हरकत की वो तो नाकाबिले बर्दाश्त है ही, लेकिन तूने क्या किया.. ? तू भाग कर घर चली आई.. ? तुझसे ये उम्मीद तो नहीं थी मुझे.. !

“तो क्या करती भाई ? मुझे उस लड़के की शक्ल से नफरत हो गयी है.. !”

“नफरत अपनी जगह है लेकिन उसे उसके किये की सज़ा तो देनी थी ना !”

रेशम आश्चर्य से मानव को देखने लगी..

“मतलब ?”

“मतलब ये मेरी पगलो, कि अगर मैं तेरी जगह होता तो ये तस्वीरें नज़र आते ही सबसे पहले उसके पास जाता और सबके सामने उसके चेहरे  पर तमाचा रसीद करता…
आखिर बिना मर्ज़ी के तस्वीर लेने की उसे इजाज़त दी किसने उस पर उसने फोटो को पब्लिक भी कर दिया..
बेहूदा फूहड़ लड़का..
रेशु यूँ सिसकने से क्या होना है..
अकेले आँसू बहा कर अपना दर्द भुलाने से बेहतर है, उसे सबके सामने तमाचा लगाना..
उसने तेरी इंसल्ट की है, बदले में तू उसकी इंसल्ट कर.. तू क्यूँ सोच रहीं उसके बारे में..
ऐसे लोग भारी डरपोक किस्म के होते हैं.. ये बस अपने दायरे में ही उछलकूद मचा सकते हैं और अपने दायरे के बाहर इनका कुछ नहीं हो सकता..।
वो भी सिर्फ अपने दोस्तों के सामने ही फुदक रहा होगा..
और वैसे भी बाहर उसे जानता कौन है ?”

रेशम के आँसू गिरने बंद हो चुके थे.. उसकी माँ इतनी डर में उसके लिए चाय बना कर ले आयी थी..
उन्होंने उसके हाथ में कप पकड़ा दी..
मानव ने भी अपना कप उठा लिया….

रेशम की माँ उसके पास बैठ गयी..

“रेशु.. बेटा हमने कभी तुम दोनों में कोई फर्क नहीं किया.. हमारे लिए जैसा मानव है वैसी ही तू भी.. जब उसे बचपन से अपने हक के लिए लड़ना सिखाया है तो तुझे कैसे चुप रहना सिखाऊंगी..?
कभी गलत के सामने सर मत झुकाना, हार मत मानना लेकिन एक बात और याद रखना बेटा की लड़ाई हमेशा बराबर वालों से ही लड़ी जाती है..
गली के कुत्ते आते जाते भौकते है तो हम उनके मुहँ लग कर उनसे लड़ते नहीं बल्कि उन पर ध्यान दिये बिना किनारे से निकल जाते हैं..।

ज़िन्दगी कठिन है बेटा, हमें खुद ये निर्णय लेना होता है की हमारे लिए क्या सही हैं क्या गलत.. ?
उस लड़के ने तेरे साथ गलत किया है, तू उसे मुहतोड़ जवाब देना..
आखिर वो भी मेडिकल पढ़ रहा है कुछ तो दिमाग रखता होगा। बावजूद इतना घटिया काम किया है उसने.. लानत है ऐसे लड़कों पर.. जाने क्या सोच कर ये लोग पढ़ने चले आते हैं..।
दिमाग तो सारा कबाड़ी के यहाँ बेच आया है..
तू परेशान मत हो लाड़ो.. कल तेरा भाई खुद जायेगा तुझे छोड़ने.. लेकिन.. “

रेशम की माँ मानव की तरफ देख कर आगे बोलने लगी..

“लेकिन मानव तू रेशम की लड़ाई में फ़िलहाल नहीं पड़ेगा.. ये उसकी लड़ाई है और उसे ही लड़नी है..।
इतनी छोटी छोटी बातों में हार मन जायेगी बेटा तो आगे कैसे बढ़ेगी…
तुझे अभी बहुत आगे जाना है.. !”

बोलते बोलते वो ज़रा थम गयी, उन्होंने मानव की तरफ देखा, मानव उनका इशारा समझ कर उठ कर बाहर चला गया और रेशम की माँ ने बोलना जारी रखा..

“रेशु… बेटा तुझे हिम्मत दिखानी होगी..
लाड़ो लड़कियॉं की सुंदरता बहुत बार उनकी ताकत भी बनती है लेकिन उससे कहीं ज्यादा बार यही सुंदरता उनके लिए घातक भी साबित होती है…।
सुंदर लड़कियों को अक्सर अपनी सुंदरता का मोल चुकाना पड़ता है..
तू अपने गुणों से भी आगे बढ़ेगी ना बेटा तब भी लोग ताना मारेंगे की तूने कहीं ना कहीं अपनी सुंदरता का लाभ उठा लिया..।
तेरे साथ के लोग जो तेरे सामने तुझे मान सम्मान देंगे तेरे दोस्त होने का दम भरेंगे और पीठ पीछे जलन के मारे तेरे बारे में गलत गलत अफवाहे फैलाएंगे..।
मैं जानती हूँ ये सब बातें अभी समझने के लिए तू बहुत छोटी है लाड़ो, लेकिन मैं इन सब की भुक्तभोगी हूँ इसलिए कह रहीं..।
बस इसलिए इतना ही समझाउंगी की बाहरी किसी भी व्यक्ति पर ऑंख मूँद कर भरोसा मत करना..।
और जब जहाँ मौका मिले सामने वाले को धूल चटा देना..
उस फोटो वाले लड़के की तो हड्डी पसली तोड़ कर उसके हाथ में दे देना.. पता नहीं समझता क्या है खुद को.. !”

रेशम के दिल में ठंडक पहुँच गयी थी….
वो अपनी माँ के सीने से लग गयी..
उस दिन रेशम की मां ने उसकी पसंद के भरवा करेले ही खाने में बनाए। मानव भी उसकी पसंद की कुल्लड़ वाली कुल्फी घर ले आया था।
रेशम अपने घर परिवार के साथ अपने दुख को वाकई भूल गई। एक बार फिर चहते महकते अगली सुबह वह कॉलेज के लिए वापस लौट गई।
मानव खुद छुट्टी लेकर उसे उसके कॉलेज तक छोड़ने गया…

अपने कॉलेज गेट पर पहुंचकर रेशम ने मानव को जिद करके वहीं से विदा कर दिया। रेशम नहीं चाहती थी कि मानव उसके लिए और भी ज्यादा परेशान हो। हालांकि मानव यह चाहता था कि रेशम अपनी क्लासेस अटेंड करने के लिए अंदर चली जाए और शाम को जब लौट कर आए तब उससे मिलने के बाद ही लौटे। लेकिन रेशम किसी हाल में इस बात के लिए तैयार नहीं हुई और उसने अपनी कसम खिलाकर भाई को वापस भेज दिया। अपने अंदर एक अलग सा आत्म सम्मान भरकर रेशम लंबे-लंबे डग भरती हुई कैंटीन की तरफ बढ़ गई। उसे मालूम था कि इस वक्त पंकज अपने दोस्तों के साथ कैंटीन में ही मिलेगा…
रेशम कैंटीन में पहुंची लेकिन पंकज वहां मौजूद नहीं था। पर सामने से आती हुई पूर्वा उसे नजर आ गई। पूर्वा ने आते ही रेशम का हाथ पकड़ लिया।

“रेशु तुझे पता है पंकज के साथ क्या हुआ?”

रेशम ने अनभिज्ञता दिखा दी ।

“यूनिवर्सिटी का एक नेता है ना, उसने भरकर पिटाई की है पंकज की।”

रेशम को लगा अखंड की बात हो रही है और उसका दिमाग वापस खराब हो गया। उसने पूर्वा से पलट कर पूछ लिया …..

” यह पंकज है कहां अभी?”

” अस्पताल में भर्ती है। इतनी धुनाई हुई थी कि अस्पताल के लायक ही छोड़ा था उसे। अच्छा हुआ, सच में कसम से, मजा आ गया।”

चुपचाप रेशम मुड़कर अस्पताल की तरफ हो ली।
   पूर्वा उसके पीछे उसे आवाज देते हुए रोकने की कोशिश करने लगी, लेकिन रेशम का दिमाग इस वक्त बहुत खराब था। अब उसे पंकज के साथ-साथ अखंड पर भी गुस्सा आ रहा था। उसे लग रहा था अखंड की पिटाई के बाद लोगों को एक और मसाला मिल जाएगा कि आखिर यूनिवर्सिटी का नेता मेडिकल के स्टूडेंट के मामलों में क्यों बोल रहा है?

आखिर रेशम हॉस्पिटल के मेल मेडिकल वार्ड में पहुंच गई। उसे दूर पलंग पर लेटा मसखरी करता हुआ पंकज नजर आ गया। अब भी पंकज अपने दोस्तों के साथ हंसी ठिठोली में मगन था। दो-दो बार छात्र नेताओं से पिटाई खाने के बाद उसका अपने दोस्तों के बीच रुतबा और बढ़ गया था। बाकी लोगों को लग रहा था कि अब पंकज सेलिब्रिटी हो गया है। बड़े-बड़े लोग आकर उसे धुन कर चले जाते हैं। पंकज ने अपनी पिटाई को भी वसूल लिया था। उसने इस बात को ऐसे ढंग से फैलाया की रेशम जैसी खूबसूरत लड़की जिसके पीछे यूनिवर्सिटी के छात्र नेता भी पागल हुए जा रहे हैं, वह पंकज के साथ तस्वीरें खिंचवा रही है। एक नेता ने जहां  उसकी पिटाई की दूसरे ने आकर उससे फोटो डिलीट करवा दी..।
अब इससे बढ़कर सबूत और क्या होगा कि लोग उसके दुश्मन क्यों बने बैठे हैं..?
पंकज ने सारी ही बातों को अपने पक्ष में भुना लिया था..।

वह अपने दोस्तों के साथ बातों में लगा था कि रेशम उसके पास पहुंच गई। रेशम को देखते ही एकबारगी वह चौंक गया। उसने मुस्कुराकर रेशम की तरफ हाथ बढ़ाया था कि रेशम आकर उसके चेहरे पर एक तेज तमाचा रसीद कर दिया…

” आज के बाद अगर मुझे अपनी शक्ल भी दिखाई ना तो तुम्हारा क्या होगा यह तुम भी नहीं जानते..!”

रेशम ने अपनी समझ से उसे सबसे खतरनाक धमकी दी थी। वह वहां से मुड़ गई और वापस कॉलेज के लिए आगे बढ़ गई।
पूर्वा भी उसके साथ हो ली।
पंकज के दोस्त सकपका कर खड़े रह गए थे। अब तक छात्र नेताओं से पंकज की जो पिटाई हुई थी, उसे भले ही पंकज अपने दोस्तों के सामने अपनी प्रशंसा में भुना रहा था। लेकिन आज उन्हीं दोस्तों के सामने रेशम का थप्पड़ उसकी कलई खोल गया। आखिर झूठ कितने दिन तक छुपता, रेशम उसे मारकर वहां से चली गई लेकिन धीरेंद्र की गैंग का एक लड़का ये सब देख रहा था..
उसे अपने धीरु भैया को बताने के लिए एक नया चटपटा मसाला मिल गया। वह तुरंत भागकर धीरेंद्र के पास पहुंच गया।
पंकज की बोलती बंद हो गई थी। अब वो रेशम के बारे में कुछ भी नहीं बोल पा रहा था। उसके दोस्त भी एक-एक कर वहां से उठकर चले गए।
अस्पताल में पंकज अकेला पड़ा रह गया था…

रेशम के दिल को राहत लग रहीं थी.. उसे बहुत हल्का महसूस हो रहा था.. वो मुस्कुरा रहीं थी..
और उसे मुस्कुराते देख दूर खड़ा अखंड भी मुस्कुरा रहा था..

रेशम का आज क्लास में जाने का मन नहीं कर रहा था..
उसने पूर्वा की तरफ देखा..

“मूवी चले पूर्वा ?”

“अभी..?  और क्लास ?”

“आज मन नहीं है.. चल ना चलते हैं.. !”

“ठीक है चल.. !”

पूर्वा ने अपनी स्कूटी निकाली और रेशम उसके पीछे बैठ गयी.. दोनों कॉलेज कैम्पस से निकल कर मॉल की तरफ बढ़ गए..।
दूर से उन दोनों को देखता अखंड भी पीछे हो लिया..

धूप बढ़ चुकी थी.. रेशम ने अपनी आँखों पर अपने  सनग्लास चढ़ा लिए..

अखंड ने भी उसे देख कर अपना रेबैन का चश्मा पहन लिया.. वो पीछे अपनी थार में चल रहा था..
उसके दोस्तों के साथ उसकी हंसी ठिठोली चल रहीं थी… उसी वक्त सिग्नल पर उसे गाड़ी रोकनी पड़ गयी..
एक बच्चा उसके सामने हाथ फ़ैला कर खड़ा हो गया..
अखंड के ठीक बगल में बैठे लल्लन ने लड़के को डाँट  लगा दी..

“अबे फुटो यहाँ से.. चिल्लर नहीं है.. !”

अखंड ने भी उस बच्चे को अनदेखा किया और सामने देखने लगा.. उसकी नज़र तो अभी सिर्फ रेशम पर थी…
उसे रेशम का हर रंग, हर रूप मोहता चला जा रहा था..

कुछ देर में वो बच्चा रेशम के सामने हाथ फैलाये खड़ा हो गया..
रेशम ने उस बच्चे को देखा और अपने पर्स को खोल लिया….

अखंड के साथ साथ उसके चेलो की नज़र भी रेशम पर थी..

“अरे भैया जी, भौजी तो ऊ बच्चा को रुपैय्या देने जा रहीं.. आपका तो इमेजे बिगड़ जायेगा ऐसे में.. वैसे भैया जी हम सूने हैं ई बच्चा लोगन अतना छोटी उम्र में भीख मांग कर नसा पत्ती करना सीख जाते हैं, इसीलिए इन लोगन को भीख नहीं देना चाहिए.. !”

“हम्म !”

अखंड का गुरुगम्भीर स्वर हवा में तैर गया..

रेशम ने पर्स से कुछ छोटे बिस्किट के पैकेट्स निकाले और उस और उस जैसे बाकी बच्चों को पकड़ा दिये..

वो उस बच्चे को कुछ समझाइश देने लगी..

“लगा लगा लल्लन जरा पास लगा गाड़ी.. !”

अखंड चीखा और लल्लन ने गाड़ी आगे बढ़ा कर रेशम के करीब लगा दी..

“सुनो बच्चों.. भीख मांगना अच्छी बात नहीं है.. भगवान जी ने हमें दो हाथ काम करने के लिए दिये हैं भीख मांगने के लिए नहीं.. ! पढाई क्यूँ नहीं करते हो.. ? अभी पढाई लिखाई बोरिंग काम लगता होगा… लेकिन अगर अभी पढाई कर ली ना तो सारा जीवन आसान हो जायेगा..
ज्यादातर बच्चे पढ़ने लिखने की उम्र में पढ़ाई नहीं करते और बाद में अपनी किस्मत को कोसने का काम करते हैं। बेटा मेरी यह बात शायद आप लोगों को ठीक से समझ में नहीं आएगी, लेकिन यही सोच कर आगे बढ़ो कि यह हाथ कभी मांगने के लिए नहीं देने के लिए आगे बढ़े…!”

“जी दीदी !”

वो बच्चे बिस्किट लेकर वहाँ से चले गए.. और सिग्नल हरा होते ही रेशम और पूर्वा भी आगे बढ़ गए..

“देखा तुम्हारी भौजाई का दिमाग बहुत तेज़ है… !”

अखंड की गाड़ी भी रेशम के पीछे बढ़ गयी..

मॉल में पहुँच कर पार्किंग में गाड़ी डाल रेशम और पूर्वा अंदर बढ़ गयी..
आज रेशम का मूवी देखने का बहुत मन था, और इसलिए जो मूवी लगी थी, उसी का टिकट लेकर वो दोनों अंदर घुस गयी…
अखंड भी टिकट लेकर उनके पीछे ही अंदर हो गया..
उसके साथ लल्लन और गोलू भी थे..
अखंड ने टिकट ऐसी ही ली थी जिससे उसे रेशम नज़र आती रहें..

मूवी शुरू हुई… मूवी का नाम था बदलापुर..

मूवी चल रहीं थी, लेकिन उसमें कई ऐसे सीन भी आ जाते की अखंड खुद झेंप जाता और अपने साथ बैठे लल्लन और गोलू की आंखें बंद करवा देता..

जैसे तैसे फिल्म खतम हुई और रेशम बाहर निकल गयी..
आज उसने अपनी सीमाओं को लाँघ कर पहली बार कुछ किया था..
वो स्वभाव से खुशमिज़ाज, बातूनी चंचल थी लेकिन लड़ाई झगडे से सदा दूर ही रहती आई थी, लेकिन आज अपनी माँ और मानव की समझाइश के बाद उसने पंकज को थप्पड़ लगाया था, शायद अपने जीवन में उसने पहली बार किसी को थप्पड़ लगाया था..।


और इसी सुकून में आज उसे सब कुछ अच्छा लग रहा था..
पूर्वा के साथ वो अपने हॉस्टल चली गयी और दिन भर की ढ़ेर सारी मधुर स्मृतियों का खजाना साथ लिए अखंड अपने कमरे में चला आया..

उसके कमरे में ढेरों लड़के पंचायत ज़माने बैठे थे। लेकिन आज वो कुछ भी बोल कर, बातें कर के अपने स्वर्णिम पलों का एहसास खोना नहीं चाहता था..।
अभी वो सुबह से बीते एक एक पल को वापस याद करता हुआ रेशम ही में खोये रहना चाहता था..।
उसने सारे लड़कों को कमरे से बाहर किया और मूवी में सुने गाने को वापस बजा कर अपने पलंग पर पसर गया…

दहलीज़ पे मेरे दिल की जो रखें हैं तूने कदम
तेरे नाम से मेरी ज़िंदगी लिख दी मेरे हमदम
हाँ सीखा मैंने जीना जीना, कैसे जीना
हाँ सीखा मैंने जीना मेरे हमदम…

अखंड बार बार उस गाने को रिवाइंड कर कर के सुन रहा था..
उसे याद आ रहें थे एक एक पल जब वो रेशम को मन भर कर देख पा रहा था..

मॉल के ठीक बाहर पहुँचने पर एक बड़ा सा निजात का पोस्टर एक तरफ लगा था.. जिसमे लिखें बड़े बड़े अक्षरों में सिगरेट छुड़वाने की दवा का प्रचार था..
ठीक उस पोस्टर के सामने खड़ा एक आदमी सिगरेट फूंकते हुए उस पोस्टर पर लिखी बातें बड़े ध्यान से पढ़ रहा था..
दूर पान की टपरी पर अखंड भी सिगरेट के कश लगाता रेशम को देख रहा था..।
रेशम उस आदमी के पास पहुंची और उससे कुछ बातें करने लगी.. ज़ाहिर था वो उसे सिगरेट ना पीने की गुज़ारिश कर रहीं थी.. ।

जाने किन शब्दों में और कैसे रेशम ने उसे समझाया लेकिन रेशम की बात सुनने के बाद उस लड़के ने अपनी सिगरेट फेंक दी..
दूर खड़े अखंड ने ये सब देखा और उसकी नज़र अपनी उँगलियों पर पड गयी..
उसने झट अपनी सिगरेट फेंक दी..।

“ये क्या अखंड भैया.. अभी तो पूरी जली भी नहीं थी और आपने फेंक दी.. ?”..

गोलू ने सवाल दागा..

“जब दिल में फ़ूल खिलने लगते हैं ना, तब उन्हें प्रेम के पानी से सींचना चाहिए ना की सिगरेट के धुंए से उसे कुम्हलाने देना चाहिए.. !”

अखंड की बात ना गोलू को समझ आई और ना लल्लन को, लेकिन दोनों ने हाँ में गर्दन पूरी मुस्तैदी से हिला दी..

वो बात याद आते ही अखंड के चेहरे पर मुस्कान चली आई.. उसने वहीं एक किनारे पड़े सिगरेट के पैकेट को उठा कर खिड़की से बाहर फेंक दिया..

गाने की पंक्तियाँ कानों में मिसरी घोलने लगी..

आसमान मिला ज़मीन को मेरी, आधे आधे पूरे हैं हम..

क्रमशः

aparna..

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