
बेसब्रियां दिल की… -28
वो पलटी और पीछे खड़े अक्षत को देख चौंक गयी..
अक्षत की आँखों में तैरते गुलाबी डोरे उसे एक बार फिर उसमें डूबने को तैयार करने लगे…….
“आप यहाँ अकेले क्या कर रहीं हैं ?”
” ये सवाल तो मैं भी आपसे पूछ सकती हूं !”
” बेशक पूछ लीजिए, वैसे मैंने आपको इधर अकेले आते हुए देख लिया था इसलिए चला आया!”
” मेरा इतना ध्यान क्यों रख रहे हैं आप ? ओह्ह हाँ समझ में आया, असल में देखा जाए तो आप भी तो इस पार्टी के होस्ट ही हैं..!”
सिम्मी का व्यंग अक्षत को समझ में नहीं आया..
उसे लगा सिम्मी शायद इस बात को जानती होगी कि, अक्षत की मां और मिसेस सूद बहुत खास दोस्त हैं ! और इसीलिए वह ऐसा बोल रही है, और उसकी बात पर अक्षत ने धीरे से हामी भर दी…
” नॉट एक्जेक्टली ! होस्ट तो नहीं कह सकती लेकिन हाँ ख़ास मेहमान जरूर बोल सकती हो !”
” हां वही.. इसलिए शायद घूम घूम कर आप सारे मेहमानों का कुछ ज्यादा ही ख्याल रख रहे हैं..!”
” बाकी किसका ख्याल रखते देख लिया मुझे..?”
अक्षत अपनी तरफ से बहुत विनम्रता से पेश आ रहा था और उसकी यही विनम्रता सिम्मी को सुलगाती जा रही थी..
उसे लग रहा था सब कुछ जानते बूझते हुए भी शायद जानबूझकर उसे परेशान करने के लिए ही अक्षत यहां आया था ! बावजूद सिम्मी उसके चेहरे पर से अपनी नजरें हटा नहीं पा रही थी !
बड़ी अजीब सी मुसीबत में फंस कर रह गई थी सिम्मी | एक तरफ उसका दिल था जो अक्षत पर बुरी तरह से फ़िदा हुआ जा रहा था, और दूसरी तरफ उसका दिमाग था जो बार-बार उसे अक्षत से दूर रहने को उकसा रहा था, जो बार-बार उसे यह याद दिला रहा था कि यही वह लड़का है जिसने उसकी बहन की होने जा रही शादी को तुड़वा दिया….|
” आप मेरे कारण यहां परेशान क्यों हो रहे हैं ? आप जाइये और अपनी पार्टी इंजॉय कीजिए..!”
” मुझे लगता है आपको यह पार्टी बिल्कुल पसंद नहीं आ रही..!”
” नहीं ऐसा कुछ नहीं है..! बस थोड़ी थकान है, घर आने का मन कर रहा है!”
” मैं छोड़ देता हूं..!”
” अरे नहीं आप क्यों छोड़ेंगे ? आप यहां रुके, मैं निकल जाऊंगी..!”
” ऐसे कैसे अकेले निकल जाएंगी.. वैसे मुझे भी कुछ खास मजा नहीं आ रहा यहाँ ! आइए मैं आपको आपके घर छोड़ देता हूं, आपको भी तो शायद अपनी मौसी के घर जाना होगा ना..!”
” हां जाना तो वही है, लेकिन आप बिलावजह परेशान हो रहें है ! प्लीज…. मुझे बुरा लगेगा अगर आप मेरी वजह से पार्टी से बाहर निकल गए !”
” विश्वास कीजिए, यहां कोई इतना नहीं सोचता, इवन पार्टी के होस्ट को भी नहीं पता चलेगा कि कौन है और कौन निकल गया ?”
सिम्मी को एक गहरी नजर से देख कर अक्षत पार्किंग की तरफ बढ़ने लगा..
सिम्मी ने उसे 1 मिनट रुकने का इशारा किया और भागकर रीत के पास बताने चली गई कि वह घर जा रही है | रीत भी दूसरे लोगों के साथ बातों में उलझी हुई थी, इसलिए उसने भी सिम्मी से ज्यादा पूछताछ नहीं की और उसे अक्षत के साथ जाते देखकर उसे जाने की इजाजत दे दी …..
लेकिन अक्षत के पीछे पीछे जाती सिमरन पर मिसेस सूद की नजर पड़ गई….
अक्षत की लंबी सी मर्सिडीज़ में वो पिछला दरवाजा खोल कर बैठने जा रही थी कि अक्षत ने उसे टोक दिया..
” मैं आपका ड्राइवर तो नहीं हूं, इसलिए कायदे से सामने मेरी बाजू वाली सीट में बैठ जाइए…!”
अक्षत की बात सुनकर सिम्मी अपनी बेवकूफी पर झेंप गयी और उस से माफी मांगते हुए सामने उसके बगल वाली सीट पर बैठ गई….
अक्षत ने अपनी सीट बेल्ट लगाई और उसे भी लगाने का इशारा कर दिया लेकिन उससे सीट बेल्ट लगाई नहीं जा रही थी..!
और इस बात पर उसे बेइंतेहा शर्म आ रही थी !
पता नहीं क्या सोचेगा? इसे लगेगा कि यह लड़की आज तक एक सादी सी कार में तो बैठी नहीं इतनी महंगी सी कार का सीट बेल्ट कहां से लगा पाएगी ?और यही सोच सोच कर बार-बार उसकी सीट बेल्ट अटकती जा रही थी…
और वह उसे अपने सामने से खींच कर लगा नहीं पा रही थी ! अक्षत ने जब उसकी इस परेशानी को देखा तो धीरे से अपना हाथ बढ़ा कर सीट बेल्ट को लूज़ किया और उसे खींचकर टक कर दिया..
अक्षत को अचानक अपने इतने करीब महसूस कर सिम्मी की सांस रुकते रुकते बची……
अक्षत ने गाड़ी तेज़ी से रोड पर दौड़ा दी….
मुंबई की सड़कों पर अक्षत की गाड़ी भागने लगी…
कुछ आगे जाने पर उसने दूसरी तरफ को गाड़ी मोड़ ली..
“ये हम किस तरफ जा रहें हैं ?”
“घबराइए नहीं.. आपको भगा कर नही ले जा रहा हूँ !”
उसकी बात पर वापस सिम्मी झेंप गयी…
एक सुदूर सी बीच के पास ले जाकर अक्षत ने गाड़ी बीच की तरफ घूमा ली…
वो जगह अपेक्षाकृत शांत लग रहीं थी.. खाने पीने के स्टॉल लगे हुए थे… कुछ इक्का दुक्का लोग भी नजर आ रहे थे ! वहां जाकर अक्षत ने गाड़ी एक तरफ पार्क कर दी और गाड़ी से उतर गया | सिम्मी कुछ देर तक गाड़ी के अंदर ही बैठी सोचती रही कि तभी अक्षत ने उसकी तरफ आकर उसकी तरफ का दरवाजा खोल दिया…
” बहुत भूख लग रही थी, तो मैंने सोचा कुछ खा लेते हैं उसके बाद तुम्हें घर छोड़ दूंगा!”
सब कुछ खुद ही सोच लिया करो, खुद ही तय कर लिया करो, किसी और से पूछने की जरूरत ही क्या है..
मन ही मन सोचती सिम्मी अक्षत के पीछे-पीछे चलने लगी | अक्षत एक पाव भाजी के ठेले के पास जाकर बैठ गया..
” दादा दो पाव भाजी देना..! खा तो लेंगी ना..? पसंद है आपको ?”
” मैं वेज में सब कुछ खा लेती हूं, मेरा किसी तरह का कोई नखरा नहीं है..!”
” मेरा भी!”
पाव भाजी वाले के बनाते तक में अक्षत अपनी जगह से खड़ा हो गया ! इधर से उधर टहलते हुए यूं लग रहा था जैसे मन ही मन वह कोई मंथन कर रहा है | जैसे कोई ऐसी बात है जो उसके गले तक आकर बार-बार अटक रही है और वह सिम्मी से कह नहीं पा रहा है | आखिर अपनी बहुत हिम्मत जुटाकर वो सिम्मी के पास वापस चला आया..
उसके सामने बैठकर वो कुछ बोलने को था तभी पाव भाजी वाले भैया पाव भाजी लेकर चले आए और उसने सिम्मी के सामने प्लेट बढ़ा दी | दोनों एक बार फिर चुपचाप पाव भाजी खाने में लग गए… |
लेकिन सिम्मी ने इस बात पर गौर किया कि अक्षत ने जैसा बोला था कि उसे तेज भूख लगी है उस हिसाब से वो खा नहीं पा रहा था | ऐसा लग रहा था उसके अंतर्मन में कोई जंग छिड़ी हुई है और वह अपने आप को बड़ी मुश्किल से संभाले हुए है!
” क्या आप कुछ परेशान है अक्षत जी..?”
“हम्म.. आह… नहीं…
अच्छा सुनो……… सिम्मी तुमसे कुछ कहना चाहता हूं..!”
“कहिये ! आपको इजाज़त लेने की क्या ज़रूरत ?”
” जरूरत है क्योंकि यह बात तुम से जुड़ी हुई है..!”
” ऐसी कौन सी बात कहना चाहते हैं आप..?”
” पता नहीं तुम इस बात को कैसे लोगी ? पता नहीं तुम मेरी बात को, मेरी भावनाओं को समझोगी भी या नहीं ? लेकिन आज मैं तुमसे कह देना चाहता हूं कि मैं तुम्हें पसंद करने लगा हूं | मुझे तुम अच्छी लगती हो ! कहीं ना कहीं तुम्हारे चेहरे, तुम्हारे हाव-भाव, तुम्हारी बातचीत करने के तरीके में मुझे मेरी मां नजर आती है..
और शायद इसीलिए मैं तुमसे पहली बार मिलने पर ही बहुत प्रभावित हो गया था | हालाँकि अपनी ईगो के कारण मैं खुद को इस बात के लिए मनाता रहा कि मुझे तुम पर ध्यान नहीं देना है लेकिन अपनी सारी कोशिशों के बावजूद मेरा दिल बार बार तुम्हारी तरफ झुकता चला गया और फाइनली मैंने अपने दिल के सामने हार मान ली !
मैंने आखिर मान लिया कि मैं तुमसे प्यार करने लगा हूं सिम्मी….
और तुमसे शादी करना चाहता हूं ! मैं चाहता हूं कि तुम एक बार मेरे पैरंट्स मिल लो…!
मैं तुम्हें मेरी दुनिया का हिस्सा बनाना चाहता हूँ सिम्मी ! मैं तुम्हें मेरा हिस्सा बनाना चाहता हूँ सिम्मी ! बोलो क्या तुम्हें मंजूर है ?”
अक्षत ने बड़ी मुश्किल से अपने दिल की बात सिम्मी के सामने कबूल कर ली और सिम्मी के चेहरे का रंग बदल गया…
क्रमशः
aparna
