गली बनारस की -50

गली बनारस की by aparna

तू बन जा गली बनारस की… -50

साजन -”  कमल गुप्ता के बाद सबसे पहले सुयश का फोन आया यह कहकर कि सुयश  कुछ दिनों के लिए मलेशिया घूमने आ रहा है और उसे अपनी सुरक्षा के लिए गन की जरूरत है…
    कमल गुप्ता इस बात पर राजी हो गया और उसने कहा कि उसके पास जो गन मौजूद है वह उन्हें खुशी खुशी सौंप देगा | इसके  कुछ घंटों बाद ही वापस सुयश का फोन आया कि उसका फिलहाल मलेशिया आना कैंसिल हो चुका है लेकिन उसका कजन हीरक जरूर मलेशिया आ रहा है और कमल उसे गन दे दे |    कमल गुप्ता  इस बात पर भी राजी हो गया क्योंकि जाहिर है इन्हीं चौधरियों के बलबूते पर उसकी दाल रोटी चल रही थी …
   और सबसे जरूरी बात की इस गन को भी उसे चौधरियों ने ही दिया था | किसके नाम पर रजिस्टर्ड थी इसके बारे में कमल गुप्ता को कोई मालूमात फ़िलहाल  नहीं थी | बस वह उस गन को अपनी सुरक्षा के लिए हिफाजत के लिए रखा करता था..  हालाँकि  आज तक उस गन से कभी कोई गोली नहीं चली थी….
    हीरक और पन्ना के मलेशिया पहुंचने के बाद हीरक खुद गन लेने नहीं जा पा रहा था इसलिए, उसने  वेटर रॉकी को कमल गुप्ता के पास भेजा था…  इस बारे में भी सुयश ने ही  कमल गुप्ता से फोन पर बात की थी.. और उसे कहा था कि अपने एक आदमी को कमल गुप्ता के पास भेजेगा और कमल को उसी आदमी को गन देनी होगी…..
    अब इन सारी बातों की हकीकत जानने के लिए हम कमल से ही बात कर लेते हैं….

साजन -” हां तो कमल गुप्ता जी आप अदालत को यह बताइए कि इस गन  के बारे में आपकी किस से और क्या बात हुई थी और यह गन आपने किसके हवाले कब की.. ?

कमल -” हुज़ूर तीन साल पहले की बात है.. मार्च का महीना था तारीख याद तो नहीं है लेकिन होली के लगभग दस दिन पहले की बात रही होगी, जब हमारे पास चौधरी साहब की बहन के बेटे और उनके लीगल एडवाईज़र सुयश बाबू का फोन आया.. हम इनसे यहाँ पहले भी मिल चुके थे|  पर फ़ोन पर पहली ही बार बात हुई.. इन्होने कहा की ये मलेशिया घूमने आ रहे हैं और चूँकि इन्होने खूब लम्बे चौड़े केस में काफी सारे लोगों को निपटाया है तो इसी वजह से इन्हे अपनी जान की बड़ी चिंता लगी रहती है..
   बड़े लोग है ये,  इनके दुश्मन भी बड़े होतें हैं.. बस इसलिए इन्हे मलेशिया में रहते वक़्त अपनी सुरक्षा के लिए गन की जरूरत थी जो हमारे पास मौजूद थी | और हम उस गन को इन्हें दे भी रहे थे..
      हमें इस बात पर कोई एतराज नहीं था |  क्योंकि इन्हीं के द्वारा तो हमें वो गन दी गई थी, फिर हम कैसे मना करते ?
    पर कुछ थोड़ी देर बाद ही सुयश बाबू का वापस फोन आया कि उनका तो मलेशिया आना कैंसिल हो चुका है… लेकिन उनके भाई हीरक यानी चौधरी साहब के बड़े लड़के मलेशिया आ रहे हैं, और वह हमसे गन वहां पर ले लेंगे, हम ने इस बात पर भी कोई एतराज नहीं किया और हां कह दिया…
    अगले दिन शाम के समय सुयश बाबू का वापस फोन आया और उन्होंने कहा कि हीरक बाबू मलेशिया पहुंच चुके हैं लेकिन इस वक्त वो थके हुए हैं और वह अपने होटल के कमरे से बाहर नहीं निकलना चाहते… इसलिए वह अपने एक लड़के को हमारे पास गन लेने के लिए भेजेंगे…  हमने इस बात पर एक छोटी से आपत्ति दर्ज की, हमने कहा कि हम कैसे पहचानेंगे कि वह लड़का आपका ही भेजा हुआ है.. तब सुयश बाबू ने हमसे कहा कि वह लड़का हमें एक चिट देगा उस पर कुछ ऐसा लिखा होगा जो सिर्फ हम ही जानते हैं या फिर कोई हमारा करीबी…
जाहिर है हुजूर, की ऐसी कोई पर्ची हमें मिलती तो उससे हम यह समझ सकते थे कि हीरक बाबू और सुयश बाबू ने ही  उस लड़के को भेजा है |  क्योंकि वह ऐसा खानदान था जिसके लिए हम पूरी तरह से और बहुत समय से काम कर रहे थे | इसलिए हमारी नस नस से वह खानदान वाकिफ था.. |
    हमारे माता-पिता भाई-बहन पत्नी बच्चे सब के बारे में चौधरी खानदान को मालूम था | इसलिए हमें यह सोचकर राहत महसूस हुई कि यहाँ पर कोई अनजान लड़का तो हमारे बारे में जानेगा नहीं | बस इसीलिए हमने सुयश बाबू को हां बोल दी…
..  सुयश बाबू ने हमें उस होटल का अता पता बता दिया जहां पर वह लड़का हमसे मिलने आने वाला था हम अपनी गन लिए वहां पहुंच गए….
    हम होटल के लाउंज  में बैठे थे कि तभी हमारे पास एक वेटर आया और उसने पर्ची हमारे हाथ में दे दी |  हम जब तक उस पर्ची को पढ़ते वह वेटर वहां से गायब हो चुका था उस पर्ची में साफ शब्दों में लिखा था कि… हम चरण दास गुप्ता के ममेरे भाई हैं और हमारा घर में बचपन में बोला जाने वाला नाम गोलू है|  इससे आगे लिखा था कि इतनी जानकारी आपके बारे में बता देने से अब आप जान गए होंगे कि हम कौन है ?  अब आप यह करना है कि आप दूसरे फ्लोर में बने बार के पास वाले बाथरूम में जाइए और वहां पांच नंबर के केबिन में जाकर फ्लश के पीछे तरफ बने छोटे से स्पेस में गन को छुपा कर निकल जाइए.. क्योंकि यह बहुत बड़ा होटल है,  7 स्टार होटल है |  इसलिए यहां जगह-जगह सीसीटीवी कैमरा लगे हुए हैं| हम आपसे हाथों हाथ ये  नहीं ले सकते वरना यहां की पुलिस बेवजह आपके और हमारे पीछे पड़ जाएगी… हमें तो बस अपनी सुरक्षा के लिए गन चाहिए जो 4 दिन बाद जब हम वापस लौटते रहेंगे इसी तरीके से आप को बुलाकर ठीक इसी तरह आपको गन वापस कर देंगे…
हमें सुयश बाबू की बात समझ में आ गई | हम चुपचाप उठे और दूसरे फ्लोर पर पहुंच गए | वहां पर बार तक जाने के बाद हमें समझ में आया कि एक तरफ वॉशरूम बना हुआ था  | हम वहां चले गए… वहां ठीक पांचवें नंबर के केबिन में जाने के बाद हमने फ्लश और दीवार के बीच में जो छोटा सा स्पेस बना हुआ था वहां पर गन को अच्छे से रखा और वहां से बाहर निकल गए…
पर्ची में आखिर में यह भी लिखा था कि गन को वहां छुपाने के बाद हमें पर्ची के छोटे-छोटे टुकड़े करके फ्लश कर देना है.. हमने वह काम भी कर दिया..!”

कमल गुप्ता की बात पूरी होने से पहले ही सुयश चीख उठा और चीख चीख कर जज के सामने अपनी बात रखने लगा….

    सुयश -” इन सब बातों से यह कैसे जाहिर होता है कि यह गन हमने या हीरक ने मंगवाई थी| यह भी तो हो सकता है कि यह सारा कुछ बिक्रम ने हमारे नाम से  किया हो.. ?

  साजन -” बिक्रम पर के ‘बेनिफिट ऑफ डाउट’  का ही तो लाभ उठाया है आप लोगों ने सुयश सिंह राणा !वरना आप एक बार दिल से सोच कर देखिये की अगर बिक्रम को खून ही करना होता तो वो मलेशिया आने का इंतज़ार ही क्यों करता.. ? क्योंकि उसने ऐसा कोई फुलप्रूफ प्लान तो बनाया नहीं की वो फंस न पाए.. और जब वाहियात प्लान बना कर ही मारना था तो वो इण्डिया में ही पन्ना को मारता और यक़ीन मानिये अगर वो ऐसा करता तब, पन्ना से पहले वो आपको गोली मारता….. इस बात की हम गारंटी देते हैं…
   दूसरी बात अगर एक बार को मान भी लिया जायें की बिक्रम ने ये सब किया, तो फिर पन्ना को मारने के बाद गन पकड़कर बेवकूफ़ों की तरह वहां बैठा क्यों रहा, जिससे आकर लोगों उसे रंगे हाथों पकड़ ले..?
   आप खुद वकील है, बल्कि हम से कहीं ज्यादा काबिल वकील है तो आप सोच कर देखिए कि अगर बिक्रम पन्ना को मारने का ऐसा कोई भी प्लान बनाता जिसमें वह गन को इस ढंग से प्राप्त करता तो  फिर वह मर्डर भी किसी  क्लीन तरीके से करता कि उसका नाम इस मर्डर  में नहीं फंसे …
    उसका मौका ए वारदात पर गन पकड़कर रंगे हाथों पकड़ा जाना ही उसकी बेगुनाही का सबसे बड़ा सबूत है !
    क्योंकि आज जब 14-15 साल के बच्चों को भी तरह-तरह के सीरियल और  फिल्में देखकर इतना मालूम हो चुका है कि अगर किसी का मर्डर किया जाए तो मर्डर विपन पर से अपनी उंगलियों के निशान हटाने बहुत जरूरी होते हैं | तब ऐसे में एक 26-27 साल के नौजवान से ऐसी बेवकूफी की उम्मीद करना ही बहुत हास्यास्पद है…
    खून करने वाला कातिल हमेशा इस बात के लिए चौकन्ना रहता है,  कि उसके उंगलियों के निशान या उसके खुद के मौका ए वारदात पर पाए जाने के किसी भी तरीके के कोई निशान वहां मौजूद ना रहे..| तब ऐसे में फुलप्रूफ प्लान बनाकर मर्डर करने वाला बिक्रम क्यों अपनी उंगलियों के निशान गन पर छोड़ेगा….
    पहला पॉइंट तो इससे यही साबित हो जाता है कि बिक्रम ने ऐसा कोई प्लान बनाया ही नहीं, क्योंकि अगर वह ऐसा प्लान बनाता तो वह हरगिज गन पकड़कर हीरक, उसकी पत्नी और होटल स्टाफ के सामने नजर नहीं आता….
   बल्कि चुपके से पन्ना को मार कर वापस कहीं जाकर छुप जाता या उस होटल से बाहर निकल जाता और यह साबित करने की कोशिश करता कि पन्ना के मर्डर के समय वह वहां मौजूद ही नहीं था, जबकि उसने ऐसा कुछ नहीं किया |
      क्योंकि उसने यह प्लान बनाया ही नहीं था उसे तो एक्चुअली पता ही नहीं था कि उस रात पन्ना का मर्डर  होने वाला है…

साजन ने बिक्रम की लिखी पहली डायरी जज की तरफ बढ़ा दी…

साजन -” जज साहब!!  ये बिक्रम की लिखी डायरी है,  इसमें बिक्रम ने अपने और पन्ना से जुड़ी एक एक बात लिख रखी है |  शुरुआती कुछ पन्ने उसके पुराने जीवन से जुड़े हैं अगर उन्हें आप पढ़ना चाहे तो पढ़ सकते हैं, लेकिन जहां से हमने आप को खोल कर दिया है वहां से पढ़ कर आप काफी सारी बातें जान पाएंगे…
    इस डायरी को पढ़कर आपको मालूम चलेगा कि, पन्ना को भी इस बात का एहसास हो चुका था कि उसके दोनों भाई उसे मार डालना चाहते हैं | और इसलिए अपने भाइयों से बदला लेने के लिए तड़पती पन्ना ने उस वेटर से बात करके हीरक  को ही अपने रास्ते से हटाने का निर्णय लिया था.. और यह बात उसने साफ तौर पर बिक्रम को बताई थी | यह सुनने के बाद बिक्रम को यह महसूस हुआ कि पन्ना ने अपना खून करने आए लड़के को दुगुना पैसा देकर खरीद लिया है और अब उसकी जान सुरक्षित हो चुकी है | बस इसी तसल्ली के कारण बिक्रम पन्ना को कमरे में अकेला छोड़कर ही रेस्टोरेंट की तरफ चला गया था…
    और एक आम आदमी के हिसाब से यह बहुत स्वाभाविक भी था | आप खुद सोचकर देखे न्यायाधीश महोदय, बिक्रम एक सामान्य मध्यम वर्गीय परिवार का बहुत सामान्य सा लड़का था, उसके लिए ऊँचे घर ऊंची हवेलियां रेस कोर्स के घोड़े, जमीन और कोयले की दलाली से रंगे गए पैसे, लंबी चौड़ी इमारतें और इतनी लंबी चौड़ी वसीयत,   यह सारी बातें बहुत मोटी मोटी थी… इस सारे वसीयत के खेल में चौधरी परिवार के बच्चे ही एक दूसरे के खून के प्यासे हो गए थे… |
   हीरक और रत्न पन्ना के सौतेले भाई थे, जो पन्ना को वसीयत का हिस्सेदार नहीं बनने देना चाहते थे | और इसलिए उसे अपने रास्ते से हटा देना चाहते थे…  और  इस बात में उनकी मदद कर रहा था सुयश सिंह राणा..|
जैसे ही पन्ना और बिक्रम की शादी हुई, हीरक और रत्न के दिमाग में चलने वाले षड्यंत्र को एक रास्ता मिल गया | हीरक और रत्न ने सुयश के साथ मिलकर पन्ना को मार डालने का प्लान बनाया, और इसके लिए उन्होंने जगह चुनी मलेशिया | क्योंकि इंडिया में रहते हुए यह करना बहुत मुश्किल था | उसका एक कारण चौधरी साहब थे | चौधरी साहब जितना अपने दोनों बेटों से प्यार करते थे, उतना ही अपनी बेटी पन्ना से भी प्यार किया करते थे | उनके लिए उनके तीनों बच्चे बराबर थे | और यह आप उनकी वसीयत को देखकर जान सकते हैं | उन्होंने अपनी सारी वसीयत इन तीनों बच्चों के नाम बराबर बराबर बांट दी थी…. “
  
  इसके बाद साजन ने अपनी लॉ फर्म से उस दिन चौधरी साहब के वसीयत के जिन कागज़ातों की तस्वीर खींची थी उसकी हार्ड कॉपी न्यायधीश महोदय के सामने पेश कर दी…. जिसमे चौधरी की वसीयत का बंटवारा साफ़ शब्दों में लिखा था !
 

  साजन -“बावजूद हीरक और रत्न वसीयत का कोई भी हिस्सा पन्ना को नहीं जाने देना चाहते थे और बस उसी लिए उन लोगों ने इतनी गहरी चाल चली..
इन लोगों ने इंडिया से ही प्लान कर लिया था कि मलेशिया जाने के बाद पन्ना का खून कर देंगे…
     अब क्योंकि इस सारे प्लान में सुयश भी शामिल था इसीलिए उसने अपना मलेशिया जाने का प्लान आखरी समय पर कैंसिल कर दिया क्योंकि फोन द्वारा उसे ही सारा सब कुछ हैंडल करना था…
    सुयश ने पन्ना को फोन करके यह सारी बातें बता दी की हीरक और रत्न उसे मार डालना चाहते हैं | यह बात पन्ना के लिए बहुत शॉकिंग थी, क्योंकि आज तक उसके भाई  उसे बहुत प्यार से रखते आए थे… लेकिन उसे भी अपने जन्म का इतिहास मालूम था और जैसा कि चौधरी खानदान का खूनी इतिहास था वह इस बात को आसानी से मान गई कि सुयश  ठीक कह रहा है…
    सुयश ने उसे उसकी राखी की लाज निभाने की  बात कह  कर इमोशनली वीक कर दिया और अपनी बातों पर सहज ही विश्वास करवा लिया….
   सुयश की बातों को सच मान कर बैठी पन्ना मन ही मन बदले की भावना में तड़पने लगी, उसे रह रहकर इस बात का अफसोस हो रहा था उसने अपने दोनों भाइयों पर भरोसा क्यों किया… ?
  इसीलिए उसने खुद  वेटर से बात करके उस से  सारा सच उगलवा लिया.. वेटर रॉकी ने भी वही सारी बातें पन्ना को बताइ जो सुयश बता चुका था | जिससे  पन्ना का रहा सहा शक भी पूरी तरह से यकीन में बदल गया कि उसके भाई उसे मार देना चाहते हैं.| और बस यही से अपने अपमान की और बदले की आग में जलती पन्ना ने उसी वेटर रॉकी को उसकी मुंह मांगी रकम देकर अपनी तरफ मिला लेना चाहा…
.. उसने रॉकी से कहा कि हीरक और रत्न ने उसे जितने पैसे देने का ऑफर किया है पन्ना उससे तीन गुनी ज्यादा रकम उसे देगी लेकिन बदले में रॉकी को  हीरक और रत्न को मारना होगा…

क्रमशः

aparna……

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