
जीवनसाथी -2 भाग -89
मौसम कभी ठहर कर नहीं रहते…. वो आये हैं तो उन्हें जाना भी होता है !
इसी तरह वक्त भी आगे बढ़ता ज़रूर है.. खुशियों में हम चाहते है वक्त ठहर जाएं, और दुखों में लगता है ये पल चुटकियों में निकल जायें..
ख़ुशी हो या गम वक्त अपनी यादें हमारे ज़ेहन में छोड़ कर चला जाता है !!
नेहा के जाने के बाद वासुकी ज़रूर कुछ पलों के लिए अपने होश गँवा बैठा था, लेकिन जल्दी ही उसे ये बात समझ में आ गयी कि ये उसका जीवन है.. और अपने जीवन के उतार चढाव उसे खुद संभालने हैं…!
उसकी किस्मत में जो लिखा था, उसे कोई नहीं बदल सकता | लेकिन उसकी किस्मत का कसूर अपने सर लेकर रानी बाँसुरी उसके हिस्से के दुःख झेले, इस बात का कोई औचित्य नहीं है.. |
उसने ये सारी बातें दर्श से कहीं और दर्श ने उसकी बात पर हामी भर दी…
“तो अब क्या सोच रहा है अनिर ?”
“यहीं की मैडम से बात करनी पड़ेगी ! उन्हें समझाना पड़ेगा कि अब सोना भी बड़ी हो गयी है… जब तक एक बच्चे को माँ की ज़रूरत होती है तब तक मैडम ने संभाल लिया, लेकिन अब उन्हें वापस लौट जाना चाहिए !”
“समझा लो… तुम्हें किसने रोका है ? और तुमने आजतक किसकी सुनी है ? मैडम के अलावा ?”
वासुकी ने घूर कर दर्श को देखा…
ये पहली बार नहीं था जब वासुकी मैडम से बात करने की सोच रहा था…
अपने निराले अंदाज़ में उसने बाँसुरी से कई बार ये बात कहीं थी कि बाँसुरी को अब वापस लौट जाना चाहिए, लेकिन बाँसुरी ने उसकी सुनी अनसुनी कर दी थी..| इसलिए आज भी दर्श उसके मज़े लेने लगा…| उसे मालूम था वासुकी से बाँसुरी के सामने कुछ होना जाना है नहीं !
“अबे मुझे घूरने से क्या होगा ? सच ही तो बोल रहा हूँ !”
“वहीं देख रहा हूँ कि कुछ ज्यादा ही बोल रहें हो ! अच्छा सुनो दर्श, वो लम्बी गाड़ी…
“सुनील की है… मैंने उसके बारे में सब पता कर लिया है ! उसके ख़यालात सही नहीं है ! उसने हवेली में ही मैडम को देखा था, उसके पहले सिर्फ अपनी माँ से सुना था..
और मैडम को देखने के बाद उसका विचार बदल गया था..
वो मैडम को अपने साथ अमेरिका ले जाना चाहता है !”
“क्या… ?”
“हाँ ! वो उस वक्त भी इसलिए हवेली के चक्कर लगा रहा था जब राजा साहब ने उसे पकड़ लिया था.. !
अब उस समय सारा मुआमला कुछ ऐसा भावुक हो गया कि राजा साहब इसे माफ़ कर के छोड़ कर चले गए.. |
“पर उन्हें नहीं पता की कुछ लोग माफ़ी के लायक नहीं होते हैं…| उन्हें जितनी बार माफ़ करो उतना ही बेगैरत होते चले जाते हैं..|
इसकी माँ के बारे में कोई खबर ?”
“हाँ वो भी जल्दी ही हमारी पकड़ में आ जाएँगी.. !”
“उस औरत की शक्ल से भी नफरत है मुझे दर्श ! वही है जिसने नेहा को मरवाया है !”
“हम्म ! “
“बाहर कौन है इस वक्त !”
“ज़ोरावर है… सुनील की गाड़ी पर नज़र रखें खड़ा है !”
“बुला लो अंदर ! कहना सुनील साहब को भी लेते आये..| उनकी भी मेहमान नवाज़ी कर ली जाये !”
हवेली के गार्डन में बैठे वासुकी और दर्श बात कर रहें थे…
उसी समय बाहर सुनील अपनी गाड़ी में बैठा अंदर की बातों से बेखबर अपनी किसी बिज़नेस डील की बात कर रहा था…
उसी वक्त उसकी गाड़ी के बुलेट प्रूफ कांच पर बाहर से किसी ने दस्तक दी.. ! और सुनील चौंक गया.. !
क्योंकि उसकी गाड़ी हवेली के पिछली तरफ खड़ी हुआ करती थी, जिधर से बाँसुरी की छत नज़र आती थी…
सुनील को बिल्कुल आभास नहीं था कि उसका बीच बीच में यूँ आकर बाँसुरी को ताकना वासुकी की नज़र में आ चुका है… !
इस बार सुनील से बहुत बड़ी गलती हुई थी..|
उसने अजातशत्रु से मिली माफ़ी के बाद खुद को सुधारा नहीं था.. |
और वो ये बात जानता था की वासुकी अजातशत्रु जैसा नहीं है | बावजूद उसने शेर की मांद में घुसने की ज़ुर्रत की थी….
और उसे इसका हर्ज़ाना भुगतना ही था !!
कांच पर किसी के ठक ठक करने पर सुनील ने बाहर देखा… बाहर एक लम्बा चौड़ा सा वनमानुष उसे ही घूर रहा था… !
“ये अफ़्रीकी कौन है ?”
सुनील ने साथ बैठे अपने असिस्टेंट से पूछा…
उसने ना में गर्दन हिला दी… !
उन लोगों की जानकारी में वासुकी और दर्श सुबह ही अपने ऑफ़िस निकल जाया करते थे..
इसलिए इस वक्त हवेली में उन दोनों में से किसी का होना नामुमकिन था !
बाहर खड़े आदमी ने सुनील को बाहर आने का इशारा किया और सुनील ने ना में गर्दन हिला दी…
उस आदमी ने एक बार अपनी गर्दन दाहिनी तरफ घुमाई, एक फूँक सी छोड़ कर अपने गुस्से को समेटा और वापस उसे बाहर आने की बात कही…
एक बार फिर सुनील ने मना कर दिया..
लेकिन इस बार उसके मना करते ही उस वनमानुष ने सुनील की तरफ से ही नीचे झुक कर कार को ज़रा ऊपर की तरफ उठा दिया..
” ओह्ह शिट ! ये तो वाकई अफ्रीका के जंगलो से भागा हुआ वनमानुष लग रहा है… !”
कार का संतुलन बिगड़ने से सुनील लड़खड़ाया और दूसरी तरफ का दरवाज़ा खोल बाहर निकल गया…
उसे डर था कहीं ये जानवर उसे गाड़ी के साथ इस पहाड़ी से नीचे ना लुढ़का दे…
उसके बाहर निकलते ही बाहर खड़े आदमी ने बड़े आराम से कार नीचे रखी और उसे अपनी गन के निशाने पर ले लिया…..
सुनील के साथ उसका असिस्टेंट और ड्राइवर भी गाड़ी से बाहर चले आये..
तीनों को एक साथ अपने साथ लिए वो अंदर चला गया…
सुनील ने गेट के अंदर दाखिल होते ही वासुकी को गार्डन में बैठे देख अपने माथे पर हाथ मार लिया…
वासुकी के सामने तक ले जाकर उसे छोड़ कर ज़ोरावर बाहर चला गया..
वासुकी ने एक नजर सुनील और उसके साथियों पर डाली..
“यहाँ क्या कर रहें थे ?”
“कुछ नहीं !”
वासुकी सुनील का जवाब सुन मुस्कुरा दिया..
“जब कोई काम ही नहीं बचा तो इस दुनिया में क्या कर रहे हो ?”
“वो मतलब नहीं था मेरा ?”
“मतलब ही तो पूछ रहा हूँ… किस मतलब से मेरी हवेली के बाहर खड़े रहते हो.. ?”.
“किसने कहा… ?”
“मैं सुनी सुनाई बातों पर यक़ीन नहीं करता, खुद देखा है इसलिए पूछ रहा हूँ… !”
सुनील अब भी गोलमोल जवाब में व्यस्त था… वासुकी ने अपनी कोल्ट वॉकर निकाल कर टेबल पर रख दी… !
उस शानदार गन को देख कर सुनील ने अपने गले की थूक निगली और बड़े ध्यान से उस गन को देखने लगा..
“गन का बहुत शौक है मुझे… ये भी टैक्सस से खरीदी है एक नीलामी में बोली लगा कर..
कोल्ट वॉकर •44 कैलिबर… !
इससे जिसे शूट किया जायें उसके परखच्चे उड़ जाते हैं.!
कहते हैं अंतिम संस्कार के लिए अवशेष भी नहीं बचते… !”
वासुकी सुनील से अपने मन की बात कह रहा था कि उसी वक्त उसकी लाड़ली कली वहां भागती हुई चली आई…
लड़खड़ाती हुई वह आगे बढ़ रही थी और वह गिर ना जाए इसलिए उसे पकड़ने के लिए बांसुरी भी उसके पीछे भागती हुई वहां तक चली आई !
वासुकी के ठीक पास पहुंचकर कली ने उसके हाथों को पकड़ लिया और उसी वक्त बांसुरी वहां पहुंच गई |
उसने वासुकी के ठीक सामने टेबल पर रखी गन देखी और उसके बाद वासुकी को घूर कर देखने लगी…!
उसने कली को गोद में उठाया और दर्श और वासुकी के बाद सुनील को देखने लगी…
बांसुरी को अचानक वहां आया देख वासुकी हड़बड़ा गया और उसने गन उठाकर अपने हाथ में ले ली..
” यह लिमिटेड एडिशन गन है, इन्हें काफ़ी शौक है तो बस वही दिखा रहा था!” वासुकी हड़बड़ा गया…
“छोटी बच्ची का घर है… ये ध्यान रखना चाहिए ना !”
वासुकी को एक बार फिर घूर कर बांसुरी ने कली को अपनी गोद में लिया और वापस मुड़कर अंदर चली गई…
लेकिन बांसुरी का आना और वासुकी का उसे देखकर घबरा जाना सुनील ने जरूर नोटिस कर लिया और उसके चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान रेंग गई…
“तुम्हारे ही मजे हैं वासुकी…. बीवी मर गयी तो क्या हुआ बच्चा पालने के लिए रानी साहब खुद चली आयी.. !
लेकिन सोचने वाली बात है कि अपने पति बच्चे को छोड़ कर कोई औरत किसी गैर मर्द के साथ सिर्फ उसका बच्चा पालने तो नहीं ही रहेगी..?
ज़ाहिर है रात के अंधियारे में बच्चे को सुला कर उसके बाप का अकेलापन भी दूर कर दिया जाता होगा.. !”
सुनील ने बोलते हुए गन अपने हाथ में ले ली…
वासुकी ने आगे बढ़ कर उसकी गर्दन पकड़ ली..
” मुझे मार देने से सच छुप नहीं जाएगा वासुकी ! पूरी दुनिया जानती है कि, रानी साहब का ट्रांसफर होने के बाद तूने पल भर के लिए भी उन्हें अकेला नहीं छोड़ा | राजा साहब ने अपनी अमानत तुझे सुरक्षा करने के लिए सौंपी थी और तूने उसी अमानत में खयानत कर दी | वासुकी तुझे क्या लगता है तेरे और रानी साहब के बीच जो चल रहा है वह तू दुनिया से छुपा सकता है ?
राजा अजातशत्रु इतना बेवकूफ होगा कि, अपनी रानी के कहने पर उसे एक गैर मर्द के घर पर छोड़ कर चला गया, लेकिन दुनिया इस बात को इतनी आसानी से नहीं देखेगी !
तुझे क्या लगता है बाहर सब लोग शांत बैठे हैं… !
एक बार इस शहर में चक्कर लगाकर देख, तुझे अच्छे से पता चल जाएगा कि तेरे और रानी बांसुरी के बारे में लोग क्या चर्चाएं कर रहे हैं! मानता हूं कि यहां रानी साहब को कोई नहीं पहचानता, लेकिन यह सब जानते हैं कि एक औरत बिना शादी के तेरे घर में तेरे साथ रह रही है |
बल्कि बाहर तो लोगों ने तेरी इस हवेली को भी बुरी तरह से बदनाम कर रखा है…|
तुम दोनों दोस्तों ने तो बेशर्मी की हद पार कर दी है | अरे अगर साथ रहना ही था तो रानी साहब का राजा जी से तलाक करवा कर अपने साथ रख लेता..|
अपनी रखेल बनाकर क्यों रखा है ?
अपने साथ-साथ अपने इस दोस्त के लिए भी तुमने पक्का इंतजाम कर रखा है |
अरे कम से कम इन दोनों की तो शादी करवा दो, जिससे इसकी और उस लड़की की बदनामी ना हो..|
वैसे रानी साहब भी मानने लायक है…|
सुनने में तो आया था राजा साहब से इन्होने लव मैरिज की थी,लेकिन इतनी जल्दी राजा अजातशत्रु से मन भर गया या फिर यह वासुकी का तिलिस्म था कि तेरे लिए अपने पति और बच्चे को छोड़कर यहां रुक गई !
और बहाना भी बहुत बढ़िया लगाया |
मैं तो बस इसीलिए बाहर खड़ा रहता था कि, जब तुझ से मन भर जाए तो मेरी तरफ भी नजरें इनायत कर लें रानी साहेब .. !”
वासुकी ने सुनील के माथे पर एक जोर का घूंसा मारा और सुनील पीछे की तरफ गिर पड़ा, उसके हाथ से गन छीन कर वासुकी ने उसे कमीज पकड़कर उठाया और अपने सामने खड़ा कर दिया…
” दिल तो कर रहा है कि अभी के अभी तुझे गोली मार दूं, लेकिन तूने जो ज़हर उगला है, उसका जवाब दिए बिना अगर तुझे मार दूंगा ना तो तेरी आत्मा मेरे आस-पास भटकती रहेगी..!
तुझ जैसा जलील और गिरा इंसान कभी भी रानी बांसुरी और राजा अजातशत्रु के प्यार और उनकी मर्यादा को समझ ही नहीं सकता !
और तेरे जैसे गिरे हुए लोग उन दोनों को और उनके जज्बातों को बिना समझे रानी बांसुरी के निर्णय को गलत नज़र से ही देखेंगे !
तुम लोगों ने तो भगवान को नहीं छोड़ा फिर वह तो एक इंसान है…
लेकिन साधारण नहीं है ! उनका निर्णय, उनका प्रेम, उनकी भक्ति निराली है !
और रानी बांसुरी को सिर्फ राजा साहब ही डिज़र्व करते हैं..!
हां नेहा के मरने का दोष अपने आपको देकर प्रायश्चित करने के लिए वह यहां इस हवेली में रह रही हैं, लेकिन जिस दिन से उन्होंने यह निर्णय लिया उस दिन से यह हवेली मेरी नहीं उन्हीं की हो गई !
उनके पवित्र चरणों के पड़ने से इस हवेली में मेरे से जो भी पाप कर्म हुए थे वह भी धुल गए और तू और तुझ जैसा नीच पापी इंसान इस बात को कभी नहीं समझ पाएगा कि उनकी संगत में रहते हुए मेरा मन भी कितना निर्मल हो गया है ! मैं इन बातों को तुझे समझाना भी नहीं चाहता..!”
” तू समझाना इसलिए नहीं चाहता है वासुकी क्योंकि तू समझा नहीं पाएगा !
तू कितना भी राजा और रानी की महानता की बातें कर ले, लेकिन है तो दोनों साधारण इंसान ही ! तेरी इस हवेली के अंदर, तेरे उस बेडरूम के अंदर तू और तेरी रानी क्या करते हो, यह पूरी दुनिया में किसी को नहीं पता ? तुम लोगों से हजारों किलोमीटर दूर बैठे उस राजा को भी नहीं पता ! वह तो खैर राजा है, उसके लिए तो औरतों की कमी नहीं है लेकिन उसकी रानी ने भी गजब का खेल खेला है…!
अपने ही प्रेमी के साथ मिलकर पहले उसकी पत्नी को रास्ते से हटाया और उसके बाद महानता का चोला ओढ़कर राजा को भी खुद से दूर कर दिया…!
वाह वाह तेरा और तेरी इस रानी का नाम तो इतिहास में अमर हो गया धोखेबाजी के नाम पर…!
जिस ढंग से तुम दोनों ने अपने अवैध प्रेम को वैध दिखाने के लिए और खुद को महान बताने के लिए इतना सब कुछ रचा है इसका कोई मुकाबला नहीं…!
वासुकी ने दर्श की तरफ देखा…
पलट कर हवेली की तरफ देखा…
छत पर बाँसुरी गोद में कली को लिए कुछ सुना रहीं थी.. !
सारिका भी साथ ही खड़ी थी..!
लेकिन सारिका की नज़र नीचे गार्डन पर ही थी | सारिका और रानी बांसुरी को गार्डन में चलती बातचीत जरूर नहीं सुनाई दे रही थी, लेकिन जो झुमा झटकी हो रही थी, वह साफ साफ नजर आ रही थी |वासुकी ने गहरी सी सांस छोड़ी और सुनील को कॉलर से पकड़कर खींचते हुए हवेली में दूसरी तरफ बने अपने ऑफिस की तरफ ले गया | उसका एक ऑफिस हवेली में भी था…|
वासुकी के पीछे जोरावर और दर्श ने सुनील के साथ आए लोगों को भी अपने साथ ले लिया…|.
अपने ऑफिस में ले जाने के बाद वासुकी ने एक बार फिर सुनील के चेहरे पर एक जोर का घूंसा मारा, सुनील के होंठ कट गए और वहां से खून निकलने लगा…
सुनील के ड्राइवर और असिस्टेंट को यह बात समझ में नहीं आ रही थी कि सुनील क्यों वासुकी को इस तरह भड़का रहा था…|
शेर के पास पहुँच कर उसके मुहँ में ऊँगली डाल कर दाँत गिनने का साहस कर ले, सुनील इतना दुस्साहसी तो नहीं था, फिर आखिर बात क्या थी.. ?
” मार लो वासुकी मार लो, आज तुम्हारी ज़मीन है, तुम्हारे लोगों के बीच घिरा हूँ इसलिए मुझे मार कर कोई बहुत बड़ा इतिहास नहीं रच लोगे | लेकिन एक बात तय है की मेरी ज़बान मुझे मार कर भले बंद कर लो, दुनिया की उठती उँगलियों से बचाकर अपनी मेहबूबा को कहाँ लें जाओगे !”
“चुप हो जा हरामखोर ! तेरे जैसे लीचड़ इंसान से बात करना ही बेवकूफी है.. अनिर तू इसे गोली क्यों नहीं मार देता.. ! किस बात का इंतज़ार है तुझे ?”
” वो सोच में पड़ गया है, क्योंकि मैं जो कह रहा हूँ वो सच्चाई है.. और उस सच्चाई से भाग कर मुझे गोली मार देना इतना आसान भी नहीं..|
आज तक इसके डर के कारण शायद किसी ने इसके मुंह पर कहा नहीं, लेकिन बाहर इसके और इसकी मैडम जी के चर्चे हो रहे हैं ! और जल्दी ही यह चर्चे राजा साहब तक भी पहुंच जाएंगे | राजा साहब के कैरियर के लिए उनके नाम के लिए उनकी धर्मपत्नी ने जो त्याग किए और महानता की एक नई मिसाल कायम की उस महानता का यह फल मिलेगा कि राजा साहब की चरित्रहीन पत्नी के नाम पर लगने वाला लांछन राजा साहब के कैरियर को भी ध्वस्त कर जाएगा |
और यह बेचारा वासुकी कुछ नहीं कर पाएगा और वैसे सच्चाई यह है कि, ये कुछ करना भी नहीं चाहता…
वासुकी ने पहले ही सुनील से अपनी गन छीन ली थी और इस बार उसने उसके माथे पर अपनी गन तान दी…
” बस एक सवाल का जवाब दे दे सुनील कि तू इतना जहर क्यों उगल रहा है ? मेरे सामने आकर इतना सब बोलने का कारण क्या है ?जबकि तू जानता है कि यह सब सुनकर मैं तुझे छोड़ूंगा नहीं और आज तेरी जिंदगी का आखरी दिन है !
भले ही कितनी भी देर से आए लेकिन वह पल आज तेरी जिंदगी में आएगा जब तू अपनी आखिरी सांस लेगा, क्योंकि मैं राजा अजातशत्रु नहीं हूं, जो अपने दुश्मन को भी माफ कर देता है | मैं अनिरुद्ध वासुकी हूं, और मुझे वही रहना है, जो मैं हूँ !”
सुनील को जैसे ही वासुकी के आदमी ने पकड़ा और उसे अंदर ले गया वैसे ही उसे समझ आ गया था कि, अब उसका जिंदा रहना मुश्किल है| उसे भी मालूम था कि राजा अजातशत्रु और अनिरुद्ध वासुकी में जमीन आसमान का अंतर है ! और एक बार उसे पकड़ लेने के बाद अनिरुद्ध वासुकी को अगर यह आभास हो गया कि वह बांसुरी के लिए क्या सोच रहा है तो उसका मरना निश्चित है ! और उसी समय सुनील ने मन ही मन यह विचार कर लिया कि जब उसकी मौत निश्चित ही है तो, क्यों ना वासुकी के दिल में भी एक आग लगा कर चला जाए जिससे जिंदगी भर वह भी जलता रहे.. !
कुछ लोग स्वभाव से ही इतने नीच होते हैं कि, मालूम होते हुए भी कि उन का अंत समय निश्चित है, जानबूझकर झूठ का एक ऐसा स्वांग धरते हैं कि सामने वाला उसमें उलझ कर रह जाए !
बस वैसा ही कुछ सुनील ने किया था, उसके बातों के पीछे ना कोई तथ्य था ना सत्य |
लेकिन वासुकी के दिल दिमाग में हाहाकार मच गया था | क्योंकि अगर ध्यान से देखा जाए तो वाकई बांसुरी उसके और उसकी बच्ची के कारण अपने पति और बच्चे को छोड़कर एक पराए मर्द के घर पर रह रही थी | और आज नहीं तो कल जब भी वह वापस लौटेगी उसके महल के लोगों के बीच उसे लेकर एक संशय तो पैदा होगा ही…|
कल को उसका बेटा खुद उस पर लांछन लगाएगा कि जिस वक्त पर उसके बेटे को सबसे ज्यादा अपनी मां की जरूरत थी, उस वक्त उसकी मां उसे छोड़कर अपने कर्तव्यों के पालन में लगी हुई थी | वासुकी के दिमाग में कोलाहल मचा हुआ था | भले ही ऊपर से वह शांत नजर आ रहा था |
उस ने सुनील की तरफ देखा, सुनील उसकी तरफ देखकर वापस कुटिलता से मुस्कुरा उठा और वासुकी ने उसके माथे पर रखी गन चला दी…
वासुकी के ठीक सामने खड़े दुश्मन के परखच्चे उड़ गए.. सुनील का ड्राइवर और उसका असिस्टेंट कांप कर रह गए | वासुकी ने उनकी तरफ देखा और उन्हें वहां से बाहर जाने का इशारा कर दिया…
” सिर्फ एक इंसान के साथ रहने की सजा तुम दोनों को नहीं दूंगा, इस लिए चुपचाप यहां से दूर चले जाओ और भूल जाना इस हवेली और यहां रहने वाले लोगों के बारे में..!”
वो दोनों सर पर पैर रख कर वहाँ से भाग खड़े हुए..
“क्या ज़रूरत थी इन दोनों को ज़िंदा छोड़ने की, ?”
“जरूरत थी दर्श | जरूरत यह थी कि, वह दोनों भी जानते थे कि उनका मालिक गलत है ! और दूसरी बात मैं कभी किसी बेगुनाह को नहीं मारता | सुनील ने भी अपने पापों का घड़ा खुद भर लिया था, वरना शायद वह भी नहीं मरता | लेकिन अब यह सब छोड़ो उससे कहीं ज्यादा जरूरी काम आज शाम को करना है..! अब मेरे पास वक्त बहुत कम बचा है !”
” क्यों ? वो क्या काम है ?”
” पहले तो यह बता कि क्या तूने कोई लड़की पसंद कर रखी है शादी के लिए..?”
” यह कैसा अजीब सवाल हुआ? मैंने तो आज तक शादी के बारे में सोचा भी नहीं !”
” तो अब सोच लें !
एक बार सोच कर देख कि क्या सारिका से तू शादी करने को तैयार है ? तुझसे पहले पूछ रहा हूं, क्योंकि सारिका के पास्ट के बारे में तू भी अच्छे से जानता है | दूसरी बात तेरे और उसके बीच उम्र का भी फासला थोड़ा ज्यादा है | मुझे ऐसा लगता है कि जैसा हमारा समाज है, इतने दिन तक हम दोनों के साथ रहकर उसने जिस ढंग से मैडम की सेवा की और साथ दिया इसके बाद अब उसे वापस उस एनजीओ में वापस लौटने पर हो सकता है, उसके साथ की लड़कियां भी उस पर तरह-तरह के आक्षेप लगाए, उस पर शक करें कि वह इतने दिन तक अनजान लड़कों के साथ रह रही थी…!
लेकिन मेरी इस बात का यह मतलब नहीं है कि तू जबरदस्ती में उससे शादी कर ले | अगर तुझे वह पसंद नहीं है तो, कोई बात नहीं हम उसके लिए एक अच्छा और काबिल लड़का ढूंढ लेंगे और उसकी शादी कर देंगे..!
और यह काम मुझे आज से ही शुरु करना है मेरे पास ज्यादा वक्त नहीं है..!
अगर तेरे मन में उसके लिए कुछ नहीं है तो, आज से बल्कि अभी से उसके लिए एक अच्छा लड़का देखना शुरू कर दे..!”
उसी वक्त वहां पहुंचे काका ने भी वासुकी की बात पर मुहर लगा दी…
“वैसे हमारी नज़र में एक और अच्छा लड़का है, दर्श तो सारिका से बहुत बड़े हो जायेंगे उम्र में !”
“ऐसे कैसे बड़े हो जायेंगे.. पांच छै साल का अंतर भी कोई अंतर होता है भला ?”
“सात आठ साल का !”
काका ने दर्श की बात काट दी..
“हाँ तो ठीक है पतियों को इतना बड़ा होना चाहिए..! ठीक है अनिर तुम और काका इतना ज़ोर दे ही रहें हो तो क्या करूँ तैयार होना ही पड़ेगा, वरना ये शादी वादी का झमेला मेरे लिए नहीं बना था !”
वासुकी ने मुस्कुरा कर दर्श की बात पर हामी भर दी…
बात करत
