
अपराजिता -131
अनंत वहाँ से निकल भागना चाहता था, लेकिन यज्ञ ने उसकी बांह पकड़ ली और उसे साथ ले अंदर की तरफ बने अपने ऑफिस रूम की तरफ बढ़ गया…
दोनों आमने सामने बैठ गए, यज्ञ ने कल्लू से कह कर नाश्ता वहीँ भेजने बोल दिया..
कुछ देर में ही दो प्लेट में नाश्ता उन दोनों के सामने लगा था.. यज्ञ बिलकुल सामान्य बैठा था, उसके चेहरे से उसके मन में चल रहे भाव समझ में नहीं आ रहे थे..
वो बड़े आराम से बैठ कर पराठे और भरवां करेले और आलू की भुजिया खा रहा था..
उसने दही की कटोरी सामने बैठे अनंत की तरफ बढ़ा दी..
“दही लोगे ? प्याज़ के पराठे हैं इनके साथ दही अच्छा लगता है ?”
अनंत ने ना में गर्दन हिला दी..
वो चुपचाप अपना नाश्ता निगल रहा था..
लेकिन यज्ञ उससे बड़ा दोस्ताना व्यवहार कर रहा था..
“उस दिन की बात अब तक मन में लिए बैठे हो क्या अनंत बाबू ? अरे भूल जाओ.. वैसे भी बचपन में हम दोनों आपस में कितना उलझते थे, याद है की नहीं.. ?
हर वक्त हम एक दूसरे को पीटने के बहाने ढूंढते थे, और अखंड भाई आकर हमें अलग करवाते थे..
अब तो खैर हम बड़े हो गए हैं, अब इतनी समझदारी तो आ गयी है.. वैसे अनंत बाबू आगे क्या करने का विचार है.. भविष्य में ?”
अब अनंत भी ज़रा सामान्य होने लगा था..
“क्या करेंगे यज्ञ, घर में खेती अकूत है, और फिर ब्याज का काम हमारा सदियों से चला आ रहा, उसका भी खूब रुपैया आ जाता है..।
कुछ रूपया ज़मीन वमीन बेच कर निकाल लेते हैं.. आराम की ज़िंदगी चल रही है… !”
“बहुत बढ़िया, बस ऐसे ही चलनी चाहिए.. हमारा तो काम अब शहर तक पहुँच गया है, इसलिए काम के सिलसिले में अक्सर शहर जाना पड़ जाता है.. अरे हाँ याद आया.. ऐ मंतोष, सुनो जरा !”
मंतोष यज्ञ के सामने चला आया..
“वो सीसीटीवी कैमेरा लगाने वाला लड़का जो आया था, उसका पूरा पैसा दिलवा गया है..?
तुम्ही से तो भेजे थे ? दे आये हो ना ?”
“जी भैया जी, वो तो पन्द्रह दिन पहले का बात है.. पूरा रूपया दे आये थे, रसीद भी लाये थे.. आप शहर गए रहे इसलिए बड़े भैया को दे दिए थे !”
“अच्छा.. सब जाँच परख लिए ना, बढ़िया चल रहा है कैमेरा ?”
“भैया जी बढ़िया चल रहा है.. यहाँ बाहर पार्किंग में चार कैमेरा लगवाया गया था, चारों अच्छा चलता है, लेकिन पीछे बगीचे के पास वाला थोड़ा पेड़ के कारण समस्या उत्पन्न कर रहा भैया जी !”
“हम्म.. उसको देख लेंगे.. !”
यज्ञ ने मंतोष पर से नजर हटा कर अनंत पर टिका दी..
उसे गहरी नजर से घूरते हुए वो कहने लगा…
“आजकल कैमेरा लगवाना तो अनिवार्य सा हो गया है अनंत बाबू, है की नहीं ? क्या है ना हमसे मिलने बीसियों तरीके के लोग आते हैं.. कौन कैसे ईमान का है हमें तो पता नहीं दूसरी बात बहुत बार हम रहते नहीं है यहाँ, ऐसे में कौन आ रहा कौन जा रहा, सबका ब्यौरा ये लोग दे नहीं पाते। बस इसीलिए सीसीटीवी लगवा लिए हैं..
अरे जिस रोज़ आप आये है ना, बस उसी के दो दिन पहले लगा है..
आप नाश्ता खाइये ना रुक काहे गए..?
हम तो तीन पराठे से ज्यादा खाते ही नहीं.. क्या है ब्याह के बाद से वजन ज़रा बढ़ने लगा है। इसलिए ध्यान से खाना पड़ता है, आप तो बढ़िया दुबले पतले रखें हैं, खाइये दबा के.. हम ज़रा पिछले सात आठ दिन का रिकॉर्डिंग देख लेते हैं !”
अनंत के माथे पर पसीना छलक आया..
पार्किंग एरिया में सीसीटीवी लगा है!! मतलब उसकी हरकत कैमेरा में कैद हो चुकी है..।
उसे कैसे भी कर के हटाना ही होगा..
यज्ञ उसकी हरकत देख पाए इसके पहले कुछ तो करना होगा..
“अरे थम जाओ छोटे ठाकुर.. इतना भी क्या जल्दी है… नाश्ता तो ख़तम कर लो !”
“हम तो खा लिए अनंत बाबू !”
“हाँ तो क्या हमारे खाने तक साथ नहीं बैठोगे ? इत्ते दिन बाद तो तुम हमारे साथ बैठे हो..।
हम मामी जी को देखने आये रहे, तुम सभी से भेंट मुलाकात हो गया। लेकिन ऐसे साथ बैठ कर एक दिन भी खाना नहीं खा पाए..। आज कितना अच्छा लग रहा है.. बिलकुल जैसे बचपन में आते थे तब लगता था।
याद है मामी हमारी पसंद का सब बनाती थी, तो तुम कैसे चिढ जाते थे ?”
यज्ञ हंसने लगा..
“और वो याद है जो एक बार पीछे आम के बगीचा में आम के पेड़ से तुम गिरे थे.. हम और तुम पेड़ पर चढ़े थे और पैर फिसल कर तुम गिर पड़े थे..।
लेकिन मामा जी ने कुटाई अखंड भैया की कर दी थी, कि बड़े होकर भी छोटे भाइयों का ध्यान नहीं रखा !”
“हाँ याद है.. अखंड भैया बचपन से ही सीधे थे, और हमारे बदले बहुत बार कुटाये हैं। तभी तो बड़े होते ही शहर निकल गए और पढ़ लिख गए.. हम रह गए यही के यही !”
“अरे तो तुम भी तो पढ़ लिख गए हो छोटे ठाकुर ! कितना ज्ञान है तुम्हे, ये कैमेरा वगैरह तो हमें उतना मालूम भी नहीं। कभी ज़रूरत भी नहीं लगी, लेकिन अब सोच रहे हम भी लगवा ही लेंगे।
वैसे कैमेरा तो ठीक है, जहाँ ज़रूरत हो वहाँ लगवा लो, पर उसे देखते कहाँ हो ?”
अनंत ने अपनी तरफ से तिकड़म लगायी..
“यही ऑफिस वाले कमरे में, अंदर एक और कमरा है ना। जहाँ हमारे ज़मीन वगैरह के,पटवारी वगैरह के ज़रूरी कागजात रहते हैं, वहीँ स्क्रीन लगवा लिए हैं..। वहीँ काम के साथ बैठ कर देख लेंगे, ये सोच कर.. अब जाते हैं देख लेंगे !”
“अच्छा.. बढ़िया है, पुरानी रिकॉर्डिंग देखने में तो बहुत वक्त लग जायेगा, इतना समय है तुम्हारे पास ?”
“हाँ इसलिए तो अभी जा रहे, अब नाश्ता भी कर लिया, आज कहीं बाहर भी नहीं जाना है.. तो बस बैठ कर देख लेंगे !”
“बढ़िया है..!” अनंत के माथे पर पसीना छलक रहा था, वो बस ये चाहता था कि किसी तरह यज्ञ कुछ देर के लिए वहाँ से चला जाए और तभी प्रकाश बाहर से भागता हुआ सा चला आया..
“छोटे ठाकुर, आपसे मिलने पटवारी मैडम आयी हैं.. कहीं किसी ज़मीन के मुआयने के लिए चलना है बोल रही.. क्या बोले उन्हेँ !”
“बोलना क्या है, उन्हेँ बैठाओ हम आ रहे !”
यज्ञ अनंत की तरफ घूम गया..
“अभी कह रहे थे कि आज कहीं नहीं निकलना है और आज ही मैडम पधार गयी.. हम तो सोचे थे आराम से घर पर रह कर खाना खाकर दोपहर में टीवी देखते हुए कुछ घडी के लिए सो भी लेंगे, लेकिन ये ज़मीन के मसले कमबख्त सोने नहीं देते..
अनंत बाबू आप आराम से नाश्ता कीजिये, हम जरा गांव का चक्कर लगा कर आते हैं !”
यज्ञ वहां से निकल गया और अनंत को मन मांगी मुराद मिल गयी..
अनंत जैसे लीचड़ लोगो के साथ ऐसा ही होता है, कुछ पलों के लिए अगर उनके मन का हो जाए तो उन्हेँ लगता है वो पुरे कायनात के मालिक बन बैठे हैं।
यज्ञ के वहाँ से जाते ही उसने वहाँ खड़े नौकर को किसी काम से कमरे से बाहर भेज दिया और दरवाज़े को लगा कर खुद अंदर वाले कमरे में घुस गया..
अंदर एक टीवी स्क्रीन जैसी बडी सी स्क्रीन लगी थी.. जिसके पास पहुँच कर वो उसे चालू करने की कोशिश करने लगा.. कुछ देर बड़ा वहीँ पड़े रिमोट से टीवी ऑन हो गयी.. लेकिन उस में उसे सीसीटीवी की कोई फुटेज कहीं नजर नहीं आ रही थी… वो हड़बड़ाया सा इधर उधर ढूंढ़ रहा था…
लेकिन उसे समझ में कुछ नहीं आ रहा था।
उसने काफी देर तक माथापच्ची करी, फिर अपने मोबाइल पर ऐसे विडिओ ढूंढने की कोशिश करने लगा जिससे टीवी पर कैमेरा की सेटिंग्स ढूंढ़ सके। लेकिन उसके हाथ कुछ नहीं लगा..
“क्या हुआ अनंत, नहीं मिली अपनी रिकॉर्डिंग ?”
यज्ञ की आवाज़ उसके कान में पड़ते ही वो चौंक कर पीछे घूम गया..
उसके ठीक सामने यज्ञ खड़ा मुस्कुरा रहा था…
“नहीं हम कुछ ढूंढ़ नहीं रहे थे, बस उत्सुक थे कि रिकॉर्डिंग कैसे दिखती है। वही देखना चाह्ते थे.. ।”
“तो हमारी गैरहाज़िरी में काहे ढूंढ़ रहे थे..?
अनंत बाबू जब यहाँ कोई रिकॉर्डिंग होती, तब ना मिलती..?
जब कहीं सीसीटीवी लगा ही नहीं, तो रिकॉर्डिंग कहाँ से पाएंगे आप ?”
“मतलब तुम झूठ बोले हमसे ?”
“हाँ बिलकुल झूठ बोले.. काहे झूठ बोलने पर आपका कॉपी राइट है क्या ? हम भी झूठ बोलते है भाई, और बहुत झूठ बोलते हैं, लेकिन कभी किसी के नुकसान के लिए झूठ नहीं बोला…।
और अनंत बाबू अब हमें सबूत मिल गया कि गाडी के साथ छेड़छाड़ आप ही किये थे !”
“ऐसा कैसे कह सकते हो, हमने गाड़ी के ब्रेक फेल किये ?”
“हमने तो ब्रेक फेल करने की बात ही नहीं कही ? आप खुद स्वीकार लिए !”
“तुम्हारी कही बात पर यकीन कौन करेगा? यज्ञ बाबू यहां मामा मामी से भी कहोगे ना, तो हम सबसे कह देंगे की बचपन से तुम हमसे जलते आए हो। और इसलिए हम पर झूठा लांछन लगा रहे हो। रही पुलिस की बात तो पुलिस को सबूत चाहिए। वहां पर भी हम कह देंगे कि तुम अपनी दुश्मनी निकाल रहे हो हमसे..।”
यज्ञ ने मुस्कुरा कर वही एक तरफ लगे पर्दे को धीरे से खींच दिया। अंदर से प्रकाश हाथ में मोबाइल लिए निकल आया।
मोबाइल में अनंत के उस कमरे में आने से लेकर अब तक की सारे रिकॉर्डिंग मौजूद थी..।
“यह देखिए अनंत बाबू, हमारे घर में सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा था। लेकिन बस सोचा कि अगर आपको सीसीटीवी कैमरा के बारे में झूठ बताएंगे, तो आप जरूर अपने ब्रेक फेल करने वाले रिकॉर्डिंग को हटाने के लिए यहां आकर खोज मचाएंगे। हम जानते थे कि यहां आपको कुछ नहीं मिलेगा। क्योंकि यह तो हमारे ऑफिस रूम का टीवी है। जिस पर हम न्यूज़ और क्रिकेट देख लिया करते हैं, काम करते वक्त।
आपकी खोज को हमें रिकॉर्ड करना था। इसलिए आपके अंदर घुसने के साथ ही प्रकाश उस बाहर वाले कमरे से बाहर निकला और इस कमरे के पिछले दरवाजे से अंदर जाकर पर्दे के पीछे खड़ा हो गया। बिल्कुल कैमरे की रिकॉर्डिंग ऐसे सेट कर दी कि आपकी सारी करतूत इस मोबाइल पर रिकॉर्ड हो जाए। अब बताइए आप खुद सारी बातें स्वीकार करेंगे या पुलिस के डंडे पड़ने तक का इंतजार कर ले !”
अनंत सर झुका कर खड़ा हो गया.. उसके पास अब कोई रास्ता नहीं बचा था.. कुछ पल वैसे ही खड़ा रहने के बाद वो यज्ञ के पैरों पर गिर पड़ा..
” हमें माफ कर दो यज्ञ, हमसे बहुत बड़ी गलती हो गई। उसे दिन पता नहीं क्यों तुमसे बहुत नाराजगी हो गई थी।। तुम्हारी बीवी भी हमसे सीधे मुँह बात नहीं करती, जबकि हमारी बहू लगती है। इस लिहाज से हमसे पर्दा करना चाहिए, तमीज से बात करनी चाहिए। लेकिन अपनी अलग ही अकड़ में रहती है। बस पता नहीं क्यों उस दिन तुमने जब हमारे सामने अपनी बीवी का साथ दिया तो हमारा खून खौलने लगा। हमें लगा हमारे बचपन की दोस्ती को तुम एक औरत के आने से भूल गए, और बस इसलिए हमने इतना गलत निर्णय ले लिया। हमें माफ कर देना। हम बिल्कुल नहीं चाहते थे कि तुम्हारा कोई बहुत ज्यादा नुकसान हो। हम बस तुम्हें परेशान करना चाहते थे, लेकिन हम जानते हैं कि हमसे बहुत बड़ी गलती हो गई है..।”
” हमसे बदला लेने के लिए तुम हमारी जान से खिलवाड़ करने लगे। एक बार भी नहीं सोचा कि अगर ब्रेक नहीं लगा और हमारी गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया तो, हमारी जान भी जा सकती है ।
और हुआ क्या, हमारे बड़े भैया ने हमारी बला अपने सर ले ली। बचपन से यही तो करते आए हैं वो।
अब सोचो उनकी गाड़ी का इतना भयानक एक्सीडेंट हुआ, कहीं अगर उनकी जान पर बन आती तो हम सच कह रहे हैं अनंत तुम्हारा खून कर देते।
अभी भी हम तुम्हें माफ नहीं करेंगे, तुम्हें पुलिस के हवाले करके रहेंगे..।”
“यज्ञ भाई इतना सम्मान रख लो। तुम्हारे रिश्तेदार हैं हम। पुलिस में हमें देकर तुम इस खानदान का भी नाम खराब कर दोगे। हम तुम्हारे पैर पड़कर तुमसे माफी मांग रहे है। तुम कहोगे तो बड़े भैया के भी पैर पकड़ लेंगे। हर एक के पैर छू लेंगे, लेकिन हमें माफ कर दो भाई ।
हमें पुलिस के हवाले मत करो।
तुम जानते नहीं हो, अगर पुलिस हमें पकड़ कर ले गई तो हमारा नाम, हमारी इज्जत, हमारे खानदान की नाक कट जाएगी।
हमसे गलती तो वाकई बहुत बड़ी हुई है, तुम चाहे जो सजा दे लो। हमें मार लो, लेकिन पुलिस के हवाले मत करो, भाई हमें माफ कर दो..।
यज्ञ उसे घूरता खड़ा था.. यज्ञ ने झटके से उसके हाथो से अपने पैरो को छुड़ाया और वहाँ से बाहर निकल गया..
” अभी के अभी दफा हो जाओ यहां से, इस कमरे की कोई बातचीत यहां से बाहर नहीं जाएगी। लेकिन शर्त यही है कि आज के बाद इस घर में तुम वापस कभी कदम नहीं रखोगे..!”
“नहीं कभी नहीं.. अम्मा की कसम खा कर कहते हैं कभी वापस नहीं आएंगे..।”
गिरते पड़ते अपने सर पर पैर रखकर अनंत वहां से निकल भागा। घर से बाहर निकल कर तेजी से चलते हुए वह आगे बढ़ता चला गया।
बहुत दूर जाने के बाद एक तालाब के किनारे एक ऊंचे से बरगद के पेड़ के नीचे फैली ढेर सारी जड़ों पर सहारा लेकर वह बैठ गया। उसके माथे से पसीना बह रहा था। और आंखें बदले की भावना से लाल हुई जा रही थी। उसके खून में अब भी यज्ञ और कुसुम से बदला लेने की भावना प्रबल होती चली जा रही थी।
उसका दिमाग आज की इस घटना के बाद और भी ज्यादा खराब हो गया था। वह पकड़ा गया था, और पकड़े जाने के बाद यज्ञ ने उसे लात मार कर दूर फेंक दिया था..।
इस अपमान से तिलमिला गया था वो..
वह पुलिस से बचना चाहता था, क्योंकि पुलिस में जाने पर उसके और भी राज़ का पर्दाफाश होने की आशंका थी…..
लेकिन यज्ञ ने जिस तरह उसे बिना मारे पीटे छोड़ दिया था, बिना किसी सजा के माफ कर दिया था… उस बात से अनंत तिलमिला गया था। उसके दिमाग में पागलपन सवार हो गया था। उसे लग रहा था कि यज्ञ ने उसे माफ करके उसकी और भी ज्यादा इज्जत उतार दी थी। और अपनी इज्जत को बचाए रखने के लिए झूठे अभिमान को अपने सिर पर सवार रखने के लिए, बदले की धुन में बेकरार अनंत ने अपने बैग में छुपा कर रखी शराब की बोतल निकाली और पीने लगा…
एक के ऊपर दूसरी बोतल गुटकने के बाद जब वह पूरी तरह नशे में धुत हो गया, तब लड़खड़ाते हुए उस पेड़ के पास से उठा और रास्ते पर चला आया।
इस वक्त वहां से कोई सवारी गाड़ी निकल रही थी। उसने हाथ देकर उस गाड़ी को रोका और उसमें सवार हो गया। गाड़ी किस दिशा में जा रही है, किस गांव जा रही है? उसे कुछ मालूम नहीं था। पीछे की सीट पर सर टिकाए उसने आंखें मूंद ली।
गाड़ी मानौर से निकलकर दूर्वागंज के बस स्टॉप पर जाकर खड़ी हो गई।
ड्राइवर के साथ बैठे दूसरे लड़के ने अनंत को थपथपाकर जगाया, और सहारा देकर उसे गाड़ी से नीचे उतार दिया। अनंत अपना बैग संभाले हुए गाड़ी से उतर गया। अपनी हुडी से उसने अपना चेहरा ढाका और धीरे-धीरे चलते हुए एक तरफ को बढ़ गया..
उसे नहीं मालूम था कि वो दूर्वागंज पहुँच चुका था..
गाड़ी से उतर कर लहरातें लड़खड़ाते वो आगे बढ़ रहा था कि दूसरी तरफ से तेज़ी से आती जीप से टकराते हुए बचा..
जीप में वीर और उसके कुछ दोस्त मौजूद थे..
वीर ने अनंत को पहचान कर गाडी रोक दी..
“अनंत भाई, आप यहाँ कैसे.. ?
अनंत ने बडी मुश्किल से आंखे खोल कर उसे देखा और फिर चेहरा झुका लिया..
“आइये हम आपको घर ले चलते हैं !” वीर ने उसे सहारा देकर गाड़ी में बैठा लिया..
‘हमें मानौर नहीं जाना, हमें वापस लौटना है ! यही उतार दो वीर !”
“अरे ऐसा क्या हो गया ? “
“तुम्हारे घर पर अतिथियों का आदर सत्कार नहीं किया जाता, उल्टा उन पर गलत इल्जाम लगा कर उन्हेँ बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है.. !”
” आप ऐसा क्यों बोल रहे हैं, सच-सच बताइए क्या हुआ है?”
अनंत शुरू से जानता था कि वीर का स्वभाव अखंड और यज्ञ से बहुत अलग है। वीर को जबरदस्त तरीके से नशा करने की आदत थी। घर-भर में एकमात्र वही ऐसा लड़का था जो कोई काम नहीं करता था। लेकिन रात दिन अपने दोस्तों के साथ मटरगश्ती करते हुए नशे में धुत रहा करता था। उसकी मां ने कई बार उसे टोकने रोकने की कोशिश की। लेकिन वह किसी की भी बातों पर कान नहीं दिया करता था। उसके दिमाग में यह बात भरी हुई थी कि गांव भर के सबसे रईस घर का वह लड़का है। और उसे बस पैसों को बेतरतीब ढंग से बहाने का लाइसेंस मिला हुआ है। वह जानता था कि बड़े ठाकुर का बहुत रुतबा था। लेकिन इसका मतलब यह नहीं था कि पुलिस और कानून को बड़े ठाकुर अपनी जेब में लिए घूमते हैं।
बावजूद वीर के दिमाग में यही बात बैठी हुई थी। उसे लगता था कि वह अपनी मनमानी कहीं पर भी कर सकता है। और अनंत इस बात से परिचित था कि वीर अखंड और यज्ञ के बिल्कुल उलट था..।
अनंत ने वीर को ध्यान से देखते हुए यज्ञ और उसकी दुल्हन की बुराई शुरू कर दी। उसकी झूठी बातें सुनते हुए वीर भी तपने लगा। वीर भी मन ही मन कुसुम से जरा बैर रखता था, कुसुम ने उसे दो-चार बार देर रात शराब पीकर आने पर टोका था, जिसके बाद वह कुसुम से मन ही मन बैर रखने लगा था..
उसने अनंत को अपने साथ ले लिया और दोनों उस जीप में अपने दो-तीन दोस्तों के साथ आगे बढ़ गए
दोनों एक जैसे शैतान साथ मिल गए थे।
क्रमशः

अंनत तो सच मे बहुत जलील इन्सान है।यज्ञ ने भी सही तरकीब लगाई अंनत की सच्चाई जानने की मगर आगे क्या होगा अंनत तो वीर को भी झूठी बातें कह कर अपने साथ कर लिया है। शानदार भाग 👌👌
सही कहा ये शैतान हो है , और यज्ञ ने इसे छोड़ अच्छा नही किया , अब वीर के साथ मिलकर क्या कांड करेगा ये अनाड़ी।
यज्ञ ने पोल खोल तो दिया अनंत का पर उसे माफ करके घर से निकलाना सही नही किया। सीधे पुलिस के हवाले करना चाहिए था उसे।
अनंत ने बदले की भावना में अंधे होकर वीर को भी भड़का दिया। अब कुसूम कुमारी से खुन्नस खाएं दोनों आगे क्या गुल खिलाएंगे।
आखिर अनंत फंस ही गया यज्ञ के फ़साए जाल में, कहते हैना चोर का दिल काला, वो चोर था और खुद का कांड छुपाने के लिए फिर गलती कर बैठा और यज्ञ ने उसे सबूत के साथ पकड़ लिया, अच्छा किया उसे घर से बाहर निकाल दिया पर कुत्ते दुम सीधी नहीं हो सकती कभी और अनंत भी कुत्ता ही है जिसे सही गलत समझ नहीं आ रहा बस बदला ही लेना है उसे और देखो चोर का भाई चोर, वीर भी उसी के जैसा है अब दोनों मिलकर कुसुम को कोई नुकसान ना पहुंचा दे…।बहुतअच्छा भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻⭐⭐⭐⭐⭐
Very nyc part👌
यज्ञ ने ये बहुत गलत किया।उसे अनंत को सजा देनी चाहिए थी।घायल सांप मौका पाते ही डसने से नही चूकता है। पता नही क्यों यज्ञ ने उसे माफ कर दिया,जबकि वो पुलिस के हवाले कर देता अनंत को तो वो सब उगलवा लेती।।
सुपर्ब पार्ट👍👍
nice part 👌
Bahut badhiya
Behtareen part👌🏻👌🏻
Yagy Babu ka dimag bhi jabardast chalta he….kese sab kuch uglva liya lekin dil ka itna accha bhi nahi hona chahiye in dono bhaiyo ko….