जीवनसाथी -3 भाग -63

रूपा जिस कुर्सी पर बैठी थी.. उसके ठीक पीछे की तरफ धनुष और यश बैठ गए….
उन तीनो ने दो दिन की मियाद को आगे खिसकाने का कोई प्लान सोच रखा था, बस उसी प्लान को पूरा करने वो तीनो वहाँ आकर जम कर बैठ गए थे..
तीनो आपस में बात करने लगे, वो भी इतनी तेज़ आवाज़ में की रूपा के कान तक बात जाये..
“धनुष तुम्हे एयरक्राफ्ट उड़ाने की ट्रेनिंग शुरू करनी थी ना.. कब से ट्रेनिंग शुरू करने जा रहे हो.. ?”
“तुम दोनों तो जानते हो, मैं आचार्य जी से पूछे बिना कुछ शुरू नहीं करता… बस उन्होंने कहा है अगले कुछ दिन भारी है !”
“अच्छा तुम पर ?”
“अरे नहीं .. अगले कुछ दिन हर राशिफल पर भारी है.. खास कर कुम्भ राशि पर..!
कुम्भ राशि वालो को अगले दस दिन तक कोई नया काम नहीं शुरू करना चाहिए.. बस इसीलिए सोच में डूब गया, की ट्रेनिंग शुरू करूँ या नहीं.. अब सिर्फ महीने भर की ट्रेनिंग है उसमे भी दस दिन चुप बैठ गया तो मेरी ट्रेनिंग तो बेकार हो जाएगी.. !”
“तो क्या सोचा है फाइनली.. !”
“देखो मैं तो इस महीने ट्रेनिंग नहीं करने वाला, लेकिन दूसरी तरफ जब देख रहा हूँ हर्ष को तो लगता है मैं भी इस अन्धविश्वास को परे हटा कर ट्रेनिंग कर ही लूँ.. !”
“क्यों हर्ष भाई का इस सबसे क्या लेना देना.. ?”
” अरे हर्ष भाई भी कुंभ राशि के हैं। और दो दिन बाद उनकी सगाई है। जबकि कायदे से उनकी राशि वालों को अभी कोई शुभ काम नहीं करना चाहिए। अब देखो मेरे आचार्य जी की गणना बहुत अलग है। खगोल, ग्रहगति इनके आधार पर वह यह सारी गणना करते हैं। बाकी आजकल के पंडित पुजारी और ज्योतिष नाम के ज्योतिष होते हैं। कहने को कुछ भी बता देते हैं, लेकिन मेरे आचार्य जी की गणना कभी विफल नहीं जाती। लेकिन जब देख रहा हूं कि महल के लोग ही इस बात को नहीं मान रहे तो मैं भी सच में पड़ जाता हूं कि क्या करूं क्या नहीं?”
“तुम कहना क्या चाहते हो… ?”
“मैं यह कहना चाहता हूं कि इन आचार्य जी का कहा कभी गलत साबित नहीं हुआ। एक बार एक लड़के की कुंडली के हिसाब से उन्होंने कहा था कि उसे अभी यात्रा पर नहीं निकलना चाहिए। उसे गाड़ियों से भय है।
उस लड़के ने नहीं माना और क्रूज पर बैठकर लक्ष्यद्वीप घूमने निकल गया।
विश्वास नहीं करोगे तुम, जब वह लक्षद्वीप पहुंचकर वहां बोटिंग कर रहा था, तब उसकी बोट आधे पानी में पहुँच कर डूब गई। वह तो अच्छा हुआ कि उसे बचा लिया गया। लेकिन समझो मरते मरते बचा है वह।
ऐसे ही एक बार की बात है, एक परिवार गृह प्रवेश करने वाला था। दूसरे पंडितों ने सारा मुहूर्त निकाल दिया था। पूजा पाठ की तैयारी हो गई ।अचानक उन्होने आचार्य जी से पूछा लिया, और उन्होंने साफ मना कर दिया। कह दिया दस दिन तक गृह प्रवेश करना सही नहीं रहेगा।
लेकिन उन लोगों ने सोचा कि बाकी के पंडित अगर हां बोल रहे हैं, और यह आचार्य जी ना बोल रहे हैं तो उनकी बात को नहीं सुनना ही बेहतर होगा। घर परिवार के लोगों ने भी यही समझाया और वह लोग गृह प्रवेश करने की तैयारी करने लगे।
लेकिन फिर अचानक उनके रिश्ते में एक दूर की सौ साल की बुजुर्ग दादी अम्मा गुजर गई, और उनके यहाँ सूतक लग गया।
13 दिन तक सारे शुभ काम रुक गए और इस तरह वो प्रवेश नहीं कर पाए… तो ये महिमा है आचार्य जी की… !”
“तो इसका मतलब अगले कुछ दिन शुभ नहीं है ?”
“अशुभ भी नहीं है.. क्यूंकि बाकी सब ने तो कुछ नहीं कहा। लेकिन हमारे आचार्य जी त्रिकालदर्शी हैं.. वो ऐसा सब भी देख लेते जो बाकियों को दिखाई नहीं देता..
इसलिए उनसे पूछ कर ही कदम उठता हूँ मैं !”
“फिर ठीक है.. दस दिन बाद ही जाना अपनी ट्रेनिंग में.. तब तक हर्ष भाई की सगाई भी निपट जाएगी.. ।”
रूपा इन सब बातों पर हद से ज्यादा विश्वास करती थी। वह खुद भी इस सगाई से पहले अपने पंडित से मुहूर्त निकलवाना चाहती थी। लेकिन उसकी दोस्त गीता ने उससे कह दिया कि उनके कुल गुरु ने दो दिन बाद का दिन सगाई के लिए कहा है।
गीता और उसके पति को पूरा विश्वास था कि हर्ष से मिलने के बाद उनकी बेटी ना नहीं कर पाएगी, और इसीलिए वह लोग इस सगाई को ज्यादा दिन टालना नहीं चाहते थे। उनको यही लग रहा था कि जितनी जल्दी प्रियदर्शनी और हर्षवर्धन की सगाई हो जाए, उतना अच्छा और इसलिए बिना कुलगुरु से तारीख निकलवाए गीता ने रूपा से तिथी के लिए झूठ बोल दिया था। रूपा ने गीता की बात को सच मान लिया और अपने कुलगुरु से कुछ भी नहीं पूछा था।
यह सारी बातें इन लड़कों को मालूम नहीं थी। यह लोग अपना अलग ही राग अलाप रहे थे। लेकिन शौर्य अच्छे से जानता था कि उसकी रानी मॉम बहुत ज्यादा अंधविश्वासी हैं..।
इतनी बातें होने के बाद शौर्य धनुष और यश की तरफ देखकर मुस्कुरा रहा था। अब भी धनुष कुछ ना कुछ बोल रहा था और शौर्य की उंगलियां एक दो तीन की काउंटिंग कर रही थी। जैसे ही उसकी तीसरी उंगली खुली रूपा उन लोगों की टेबल पर मौजूद थी…।
” शौर्य, धनुष तुम लोग अभी क्या बातें कर रहे थे?”
वह तीनों लड़के आंखें फाड़े रानी मां की तरफ देखने लगे।
” रानी मॉम आपके बारे में पूछ रही है?”
” अभी धनुष किसी आचार्य जी के बारे में बता रहा था जो कुंडली पर विचार करते हैं।”
” हां रानी मॉम है तो, लेकिन क्या हुआ?”
“कुछ नहीं, मैंने दो दिन बाद की हर्ष की सगाई की तारीख निकलवा दी है, लेकिन अब सोच रही हूं, एक बार कुंडली विचरवा लेती हूं। तुम्हारे आचार्य जी कुंडली देख लेंगे?”
” बिल्कुल देख लेंगे रानी मां। आप भाई की कुंडली दे दीजिए। हम विचरवा कर आ जाएंगे।”
” नहीं नहीं, हम खुद भी मिलना चाहते हैं उनसे।”
रूपा की यह बात सुनकर शौर्य और धनुष एक दूसरे को देखने लगे।
” ठीक है हम सब कल उन से मिलने चलेंगे।”
” ठीक है। वैसे वो रहते कहां है..?”
“गुलाबगढ़.. ।” धनुष ने कहा
“राजपुर।” शौर्य के मुहं से निकला..
दोनों के द्वारा अलग अलग जगह बोलने पर रूपा उन दोनों को देखने लगी..
“मतलब.. उनके दो घर है क्या ?”
“हाँ… रानी मॉम वो दोनो जगह रहते हैं.. हम सब चलेंगे वहाँ.. लेकिन अगर उन्होंने यह कह दिया कि अगले कुछ दिन हर्ष भैया की सगाई के लिए सही नहीं है तो आप क्या करेंगी?” शौर्य ने पूछा
“ऐसे में हर्ष की सगाई रोकनी पड़ेगी। कुछ दिन बाद कर लेंगे।”
” लेकिन तब तक यह मेहमान तो चले जाएंगे। इन सबको कैसे बताएंगी?”
” सबको फोन कर लेंगे शौर्य! ठीक है..?”
मुस्कुरा कर तीनों लड़के उठकर वहां से दूसरी तरफ चले गए…
हर्ष वहां मौजूद नहीं था.. वो लोग एक बार फिर मीठी की घेराबंदी कर के बैठ गए..।
और फिर वही सब शुरू कर दिया..
“मीठी, हर्ष भाई कहाँ हैं ?”
“अभी तक तो यही था.. पता नहीं कहाँ गया ?”
उसी समय उन सब से थोड़ा दूर हटकर खड़े हर्ष और प्रियदर्शनी पर सबकी नजर चली गई। और यश बोल पड़ा।
” यार यह प्रियदर्शनी ने तो थोड़ा ज्यादा ही सीरियसली ले लिया अपनी सगाई को।”
उसकी बात पर मीठी उसे देखने लगी
“इसमें सीरियसली लेने की क्या बात है यश.. सगाई तो होने ही वाली है..।”
“हां हां होने वाली है। लेकिन मेरा कहने का यह मतलब था कि जब तक हो ना जाए, तब तक इतना चिपकना अच्छा थोड़ी ना लगता है…!”
“ऐसा कुछ नहीं है.. आजकल तो यही हो रहा.. ।”
मीठी ने बहुत बेमन से कहा, उसी समय दूर खड़ी रियाल ने उसे अपनी तरफ बुलाया।
मीठी ने देखा रियाल के चेहरे पर उसे कुछ हल्के चोट के निशान नजर आ रहे थे। मीठी घबराकर तुरंत रियाल की तरफ बढ़ गई..
” मीठी अब मैं यहां थक गई हूं, मुझे अपने कमरे में वापस जाना है।”
” हां रियाल वह तो ठीक है। हम चलेंगे, लेकिन तुम्हें चोट कैसे लगी? किसी ने तुम्हें मारा?”
रियाल बहुत गहरी नजरों से मीठी की तरफ देख रही थी। रियाल की आंखों में आंसू आ गए थे।
” रियाल प्लीज बोलो ना, तुम्हें मैं अपने साथ यहां लेकर आई हूं। अगर तुम्हारे साथ कुछ भी गलत होता है, तो यह मेरी जिम्मेदारी होगी।”
” मीठी मैं यहां कुछ भी नहीं बता पाऊंगी। यह बहुत बड़े लोग हैं। महल है यह, और यह लोग महल के रहने वाले हैं। मेरी आवाज तो यहां इस भीड़ में पता नहीं कहां खो कर रह जाएगी।”
” मैं हूं तुम्हारे साथ रियाल, मुझे बताओ तो सही।”
” तो फिर चलो मेरे साथ।”
और रियाल मीठी का हाथ पकड़ कर वहां से अपने कमरे में ले गई। वैसे भी रात बहुत बीत चुकी थी। एक-एक कर लोग जाने लगे थे।
रानी मां का भी मन डोलने लगा था। उन्होंने अपने पति युवराज, बांसुरी, रेखा, राजा साहब सभी से बातचीत की, कि वह किसी पंडित जी से पूछ कर फिर सगाई की तिथि निकालेंगी और तब तक सगाई को वह रोक रही है। यह सुनते ही बांसुरी के मन का बोझ उतर गया…।
इधर मीरा इतना खा चुकी थी कि अब उसे नींद आने लगी थी। उसने कली को भी अपने साथ लिया और कमरे में सोने के लिए चले गई।
शौर्य धनुष और यश हर्ष और प्रियदर्शनी के पास चले गए।
हालांकि इतना व्यस्त होने के बावजूद शौर्य का ध्यान कली पर बना हुआ था। लेकिन इस वक्त वह जानता था कि उसके भाई हर्ष को उसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। इसलिए वह हर्ष का काम बन जाए इस जुगाड़ में लगा हुआ था। कली का मन वहां से जाने का तो नहीं कर रहा था लेकिन वह बार-बार मीरा को मना भी नहीं कर पाई और वह दोनों कमरे में चली गई।
इधर रियाल और मीठी जैसे ही कमरे में पहुंचे, रियाल ने तुरंत अपनी टॉप को कंधे से जरा नीचे सरका दिया उसकी गर्दन पर कुछ अजीब से निशान उभर आए थे। मीठी उन्हें ध्यान से देख रही थी।
” यह क्या है रियाल? मुझे घबराहट हो रही है। तुम सच-सच बताओ, क्या हुआ है?”
” यह सब तुम्हारे हर्ष की देन है।”
” मुझे भरोसा नहीं हो रहा तुम पर।”
” मत करो। मैं जानती थी कि तुम मुझ पर भरोसा नहीं करोगी। यह बड़े लोग और इनका पहनाया चश्मा ऐसा ही होता है। तुम्हें लगता है ना कि हर्ष एक बहुत क्यूट स्मार्ट और चॉकलेट बॉय है। वह हमेशा सच बोलता है। जबकि ऐसा नहीं है, तुम उसे सच में अच्छे से जान तक नहीं पाई हो।
तुमसे भी तो उसने कितनी मीठी सी दोस्ती कर रखी थी। लेकिन कभी तुम्हें बताया कि उसकी मॉम ने उसके लिए इतने बड़े घर परिवार की लड़की देख रखी है। उसकी सगाई डिक्लेयर होने से पहले तक क्या तुम्हें मालूम था?
नहीं ना?”
” नहीं, लेकिन यह भी तो हो सकता कि उसे भी ना मालूम रहा हो।”
” मीठी तुम अब भी कितनी भोली हो। क्या ऐसा पॉसिबल है कि एक बिलियनेयर राजकुमार की मां उसकी सगाई उससे बिना पूछे तय कर दे।
अरे यह कोई गांव कस्बा नहीं है। इन फैक्ट आजकल गांव में भी माता-पिता लड़के से बिना पूछे उसकी सगाई डिक्लेअर नहीं करते।
फिर यह तो महल है। उस राजकुमार को किस बात की कमी है, जो अपनी मां की बात को फॉलो करेगा।
उसे सब कुछ पहले से पता था, बल्कि वह और प्रियदर्शनी आपस में बहुत गहरे दोस्त भी थे। तुम्हारा हर्ष बहुत चालाक है।
उसे वक्त बिताने के लिए तो ढेर सारी लड़कियां चाहिए, लेकिन शादी करने के लिए उसने अपनी रुतबे और शान ओ शौकत के हिसाब से ही लड़की चुनी है। उसने शादी के लिए उस लड़की को चुना, जिसका खानदान और धन दौलत उसके परिवार और धन दौलत के बराबर हो।
एक बात कहूं, अगर तुम्हारे मन में हर्ष के लिए थोड़ी सी भी कोमल भावनाएं जगने लगी होगी, तो उन्हें प्लीज उठाकर डस्टबिन में फेंक दो। क्योंकि वह लड़का तुम्हारी मुहब्बत के काबिल नहीं है।
“रियाल मैंने कब कहा कि मैं उससे प्यार करती हूं।”
” तो फिर ये क्या है? उसकी सगाई का सुनते ही तुम्हारे चेहरे पर बारह क्यों बज गए, और इसीलिए मैं तुम्हें यह सब दिखाने आई हूं कि तुम्हारा हर्ष उतना सीधा और सच्चा नहीं है, जितना उसने तुम्हारे सामने अपनी इमेज बना रखी है। जानती हो क्यों, क्योंकि उसने बचपन से तुम्हें देखा है। उसे मालूम है कि तुम किस स्वभाव की हो। तुम जब बहुत कोशिशों के बाद भी बोतल में नहीं उतरी, तब उसने हथियार डाल दिए। और किसी दूसरी लड़की से शादी करने जा रहा है।”
“तो तुम्हारा मतलब है कि यह सब तुम्हारे साथ हर्ष ने किया है?”
” बिल्कुल! यह सब मेरे साथ हर्ष ने किया है और अगर तुम्हें विश्वास नहीं है तो तुम जाकर हर्ष से ही पूछ लो। लेकिन क्या किसी लड़की के साथ ज्यादाती करने वाला लड़का अपनी एक्स गर्लफ्रेंड के सामने इस बात को स्वीकार करेगा कि उसने उसी की गर्लफ्रेंड के साथ ज्यादती की है?”
मीठी रियाल की बात सुनकर तड़प कर रह गई। उसे नहीं लगा था कि हर्ष ऐसा भी कुछ कर सकता है। वह तुरंत कमरे से निकल कर बाहर जाने लगी कि रियाल ने उसे रोक लिया।
” रुको मीठी अगर मुझ पर विश्वास है तो तुम हर्ष से कुछ नहीं पूछोगी । यह हर्ष की एक काली सच्चाई है, और इस सच्चाई को जितना जल्दी मान कर उसे अपने दिल से निकाल कर बाहर कर दो, उतना अच्छा है।”
” तुम बार-बार ऐसा क्यों बोल रही हो कि मेरा मन उस पर लगा हुआ है।”
” तुम्हारी शक्ल से दिख दिख रहा है इडियट। तुम मुझे कितना भी छलावे में रखो कि तुम मुझसे प्यार करती हो, लेकिन मैं जानती हूं कि तुम मुझे वैसा प्यार नहीं करती। जैसा हर्ष से करती हो। और इसीलिए बार-बार समझा रही हूं कि तुम मेरे साथ सबसे ज्यादा सुरक्षित हो। उस घटिया और कमीने लड़के से दूर रहो।”
अब तक सब कुछ चुपचाप सुनती और सहती मीठी का पारा अचानक सांतवे आसमान पर चला गया। उसे हर्ष के लिए गालियां बिल्कुल सहन नहीं हुई। उसका हाथ रियाल के चेहरे पर पड़ गया।
थप्पड़ खाते ही रियाल ने तड़पकर मीठी की तरफ देखा और अपने गालों पर अपने हथेली रख ली।
“मैं जानती थी ऐसा ही होगा। सच्चे प्यार की कोई कदर नहीं होती। मीठी यकीन मानो मैं तुमसे बहुत सच्चा प्यार करती हूं, और इस दुनिया में मैं ही तुम्हें सबसे ज्यादा खुश रख सकती हूं।
भले हमारे बीच फिजिकल कुछ ना हो, फिर भी एक प्लाटॉनिक लव तो है ही। हम जिंदगी भर एक साथ बहुत खुश रहेंगे। तुम भूल जाओ प्लीज उसे हर्ष को।”
मीठी ने अपनी आंखें बंद की और कुछ देर के लिए जाकर अपने बेड पर बैठ गई। उसके दिल दिमाग में हाहाकार मचा हुआ था.. ।
रियाल ने आकर उसे अपनी बाँहों में भर लिया..
लेकिन मीठी का दिमाग सिर्फ इस बात में उलझा हुआ था कि जब रियाल को उसके मन की बात समझ में आ रही थी, तो क्या शौर्य धनुष और यश को समझ में नहीं आ रही होगी?
और इन सबको भी छोड़ दें तो क्या हर्ष को भी नहीं समझा आया होगा..?
ऐसा तो फिर सोचना ही व्यर्थ था..।
वह अपने आप को ठगा हुआ सा महसूस करने लगी थी।
हर्ष उससे कितना प्यार से बात किया करता था। उसकी हर बात का ख्याल रखा करता था।
नहीं ऐसा हो ही नहीं सकता जैसा रियाल हर्ष के बारे में कह रही है।
रियाल को जरूर कोई गलतफहमी हुई है, और या फिर रियाल अपने आप को सच साबित करने के लिए जबरदस्ती ऐसे निशान बनाकर चली आई है।
उसके सामने ही रियाल थप्पड़ खाने के बावजूद बैठी उसे बार-बार मनाने की कोशिश कर रही थी कि वह हर्ष को भूल जाए। लेकिन अब जाकर तो मीठी को समझ में आया था कि वह अपनी पूरी जिंदगी हर्ष को नहीं भूल सकती।
कभी नहीं।
कुछ सोच कर वह खड़ी हो गई। उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान चली आई। उसने रियाल का चेहरा अपने दोनों हाथों में लिया और उसके गालों को चूम लिया।
“आई एम सॉरी रियाल! तुम सच कह रही थी। मैं सच में तुमसे प्यार नहीं करती। मुझे माफ कर देना।
पता नहीं मैं अपने ही दिल के भाव क्यों नहीं समझ पाई? या शायद समझना चाह कर भी जानबूझकर महल की ऊंची ऊंची दीवारों के कारण खुद को और अपने मन को पीछे रोक लिया कि नहीं एक राजकुमार के बारे में सोचने का मुझे कोई अधिकार नहीं है।
लेकिन आज अनजाने में ही तुमने मेरे दिल का वह दरवाजा खोल दिया जिसके अंदर छुप कर बैठा हर्ष मुस्कुरा रहा है।
मुझे जाने दो, उसके पास।
भले ही वह प्रियदर्शनी से शादी कर ले, लेकिन आज मैं उसे बता देना चाहती हूं कि मैं उसके बारे में क्या सोचती हूं..।”
मीठी उठी और दरवाज़े की तरफ बढ़ रही थी कि पीछे से रियाल ने उसकी गर्दन पर एक हाथ मारा और उसे बेहोश कर दिया…
क्रमशः

भाग ६३ वाला कमेंट ६२ में हो गया, ओह सॉरी दी, मीठी जाकर बता ही दे तो अच्छा रहेगा पढ़ने के लिए उत्सुक हूं थोड़े से अंतराल पर मगर नाइस पार्ट दीदी…💐👍🙏
❤️❤️❤️❤️❤️🫂🫂🫂🫂🫂❤️❤️❤️❤️
मीठी …..वो पहला हवा का झोंका जो मेरी जिंदगी महका गया
मीठी …. वो नर्म मिठास जो जबान से होकर रूह तक उतर जाए
मीठी…. वो लिबास जिसे छूने भर से मैला हो जाए
मीठी… वो एहसास जो शब्दों की सीमा तोड़ क्षितिज तक ले जाए
हां ये है मेरी मीठी हर्ष की मीठी , जो मेरे जीवन में मीठे सपने लेकर आई है
बाकी हमारी jr team ko all the best 😘😘😘
राम जी की सेना लग पड़ी है काम पर और उसका कुछ तो असर दिख रहा मीठी ने एक कदम बढ़ाया है, हाय ये जलन पर प्यार कब समझेगी ये झल्ली 🤦♀️।
अब प्रियदर्शनी क़ो कैसे बताए हर्ष कि मीठी उसके लिए क्या है।
मीठी का हाथ पकड़ लो हर्ष और कह दो…
” ना जाने कब तू मेरे दिल के इतने करीब हो गई,
दोस्त कहते कहते तू मेरी जान हो गई।
तुझसे ही शुरू ये दिन और रात होने लगा,
तेरे बिना एक पल जीना मुश्किल हो गया,
तू मेरे जीने कि वजय हो गई,
ना जाने क्यों तेरा होना जरूरी सा हो गया।
( 🤦♀️गड़बड़ हो गई अपर्णा 😔
लिखना कुछ और था लिखा कुछ और गया। आप ही सही कर लेना अब, मैं तो चली अगला भाग पढ़ने 😊🙏🏻।)