जीवन साथी–3 भाग -2

तीनों सखियों की बातों के बीच मीठी का फ़ोन आ गया..
निरमा ने मीठी से फ़ोन पर बात की और रखने के बाद एक गहरी सी साँस भर ली..
“क्या हुआ मीठी का फ़ोन था ?”
रेखा ने पूछा और निरमा ने हाँ में गर्दन हिला दी..
” क्या हुआ.. कुछ टेंशन है क्या ?”
“नहीं.. टेंशन कुछ नहीं.. मैडम को अभी से अपने पैरों पर खड़ा होना है.. एमबीए क्या कर लिया खुद को मैनेजमेंट गुरु मान बैठी है.. नौकरी करने की रट लगा रखी है !”
“नौकरी.. अभी से उसे नौकरी की क्या ज़रूरत ? अभी तो पढ़ने का समय है.. !”
“वहीं तो.. लेकिन हफ्ते भर से वो और उसके पापा मेरे पीछे लगे थे.. फाइनली मैंने हाँ बोल दिया, अब आज जाकर वो इंटरव्यू भी दे आई और मैडम को नौकरी मिल भी गयी.. !”
“अरे वाह.. ! कहाँ ?”
“हर्ष की कंपनी में.. !”
“हर्ष.. मतलब.. अपना हर्ष ? रूपा भाभी सा का बेटा !”
“हम्म…. उसी की फर्म ज्वाइन की है हमारी मैडम ने ! वो तो बाहर जाना चाहती थी, लेकिन उसके पापा उसे बहला फुसला रहे थे.. पक्का उन्होंने ही उसे समझा बुझा कर वहाँ भेजा होगा…!”
“अच्छा है ना हर्ष के साथ काम करेगी तो तुम भी टेंशन फ्री रहोगी.. !”..
“अरे वो टेंशन फ्री रहने दे तब ना.. इन लोगों की चंडाल चौकड़ी की उधम के किस्से पूरे शहर में मशहूर है…। एकमात्र हर्ष ही है जो थोड़ा समझदार है,वरना तो बाकी सारी राक्षसों की सेना है.. !”
निरमा की इस बात पर बाँसुरी भी मुस्कुरा उठी..
“सबसे बड़ा गुंडा तो मेरा शौर्य ही है.. पता नहीं इस लड़के का क्या होगा… ? “
“हाँ वो तो है… मीठी खुद ताड़का है लेकिन रोज़ रात में आकर ऐसे शौर्य की बुराई सुनाती है की क्या कहूं.. वैसे बाँसुरी हाथ बहुत खुला है शौर्य का.. !”
“जानती हूँ नीरू ! मैं तो उसे कार्ड्स देने के पक्ष में भी नहीं थी, लेकिन साहब का कहना है एकदम से रोक देंगे तो बच्चा हमारे ही खिलाफ चला जायेगा.. उसे समझने और समझाने के चक्कर में कुछ ज्यादा ही छूट दे दी है !”
“हाँ सही कह रहीं है तू… पेरेंटिंग कोई आसान काम नहीं है.. लोग तो बस तोहमत लगा कर चले जाते हैं पर सच्चाई ये है की एक बच्चा सिर्फ अपने माँ पिता के साथ ही तो नहीं रहता ना.. ढेरों लोग उसके आसपास होते है क्या मालूम उस के बालमन पर किसकी छाप पड़ रहीं है..
खैर हमारी लाड़ो रानी तो फ़ोन पर बता गयी की आज देर से लौटेंगी इन सब राक्षस सेना की पार्टी है… !”
“मतलब मेरे यश का भी फ़ोन आता ही होगा.. !”
और उसी वक्त रेखा का फोन बजने लगा… रेखा ने मुस्कुराकर फोन उठाया !
फोन यश का ही था और वह भी देर से आने की बात कह रहा था! रेखा को मुस्कुराते देखकर निरमा और बांसुरी दोनों समझ गए ! बांसुरी ने एक बार उदासी से टेबल पर पड़े अपने फोन को देखा और फिर निरमा की तरफ देखने लगी…
” कोई बात नहीं अगर उसने तुझे फोन नहीं किया तो तू कर ले!
तू पूछ ले कि कहां है इस वक्त वो..?”
“जैसे वो सच बता देगा.. ?कोई बात नहीं.. मैं जानती हूँ आज भले ही वो अपने रास्ते से हट गया है, लेकिन ख़ून तो साहब का ही है ना, एक दिन उन्हीं की प्रतिमूर्ति बन कर निकलेगा… !”
तीनों सखियाँ मुस्कुरा उठी…
कुछ देर में जया और रूपा भी वहाँ चले आये…
उन सबकी बातों में शाम ढलने लगी..
*****
कोरल रीफ के भव्य लाउंज में एक तरफ मीठी यश परी और हर्ष अपने बाकी सारे दोस्तों के साथ बैठे थे.. इन सब में हर्ष ही सबसे बड़ा था… वो मीठी से लगभग डेढ़ साल बड़ा था…
उसने अपनी पढाई विदेश से पूरी करने के बाद अपने पारिवारिक बिज़नेस में ही अपना कैरियर चुन लिया था.. वैसे भी उसके काका साहब तीन बार निर्विवाद रूप से उस प्रदेश के मुख्य मंत्री बन चुके थे.. ये उनका चौथा कार्यकाल था..
उसके पिता को राजनीती से कोई लगाव नहीं था.. रियासत भी नाम की थी उससे कोई कमाई तो थी नहीं, इसलिए वो भी पूरी तरह से बिज़नेस में आ चुके थे..। उनका व्यापार देश विदेश तक फ़ैला हुआ था.. इसलिए अक्सर उन्हें विदेशों के दौरे करने पड़ते थे..
लेकिन जब से उनके बेटे हर्ष ने उनकी कंपनी ज्वाइन की थी उनके कंधों से काम का बोझ थोड़ा कम हो गया था…
यश विराज का बेटा था और हर्ष से लगभग 3 साल छोटा था, बावजूद वह भी अपने हर्ष भैया को बहुत ज्यादा मानता था, और इसलिए उसने भी हर्ष भैया की देखा देखी उनके साथ ही कंपनी में काम करना शुरू कर दिया था…!
जया की बेटी परिधि जिसे सब प्यार से परी कहते थे, वह भी लगभग यश की उम्र की थी और इस वक्त पढाई कर रहीं थी….
आज ही मीठी ने भी हर्ष के ऑफिस को ज्वाइन किया था और इसीलिए यह सारे लोग यहां अपनी दोस्तों के साथ पार्टी मनाने के लिए इकट्ठा हुए थे। हालांकि मीठी का ऑफिस ज्वाइन करना सिर्फ एक बहाना था, इन लोगों की हफ्ते में एक पार्टी करने की आदत ही थी…।
सारे लोग बैठे हंसी ठिठोली कर रहे थे, तभी दूर से गोरा चिट्टा अंग्रेजों की शक्ल वाला हिंदुस्तानी संस्कारों वाला शर्मीला सा लड़का आता दिखाई दिया…
” लो आ गया हमारा पर्सनल नील नितिन मुकेश!”
परी उसे देखकर हंसते हुए बोल पड़ी और हर्ष ने परी को आंख दिखा दी..
परी यश और शौर्य तीनों ही हर्ष को बहुत मानते थे! हर्ष ने जो बात कह दी वह इन तीनों के लिए पत्थर की लकीर थी! शौर्य वैसे तो मनमौजी था, बेपरवाह बेलॉस बिंदास था लेकिन अगर हर्ष भैया ने कोई बात कही है तो वह उस बात को टाल नहीं सकता था…!
शोवन के चेहरे पर एक अलग सी झेंपती हुई मुस्कान रहती थी.. पता नहीं वो अपने हद से ज्यादा गोरे रंग की वजह से शरमाया सा फिरता था या अपनी हरी बिल्लौरी आँखों की वजह से, लेकिन जो भी था वो हद से ज्यादा शर्मीला था..
अपने इसी स्वभाव के कारण वह किसी से भी बहुत ज्यादा घुलता मिलता भी नहीं था !
पूरी दुनिया में अगर कोई था जिसके सामने शोवन पूरी
तरह से खुला हुआ था तो वह थी शोवन की मॉमी डॉक्टर पिया..!
इन दोनों मां-बेटे की केमिस्ट्री ही अलग थी..
ये लोग घर पर हो या महल या बाहर कहीं किसी पार्टी में जायें जब तक शोवन अपनी मॉमी के हाथ से पहला निवाला नहीं खा लेता था उसे चैन नहीं पड़ता था..!
उसकी मॉमी सुबह उसी के हाथ की कॉफ़ी पीकर उठती थी..
इन दोनों की निराली जोड़ी पर समर दोनों को चिढ़ाने का कोई मौका नहीं छोड़ता था..!
और वैसे ही महल के बच्चे शोवन को चिढ़ाने का कोई मौका नहीं छोड़ते थे…
और इन सब में सबसे आगे रहती थी परी !
आज भी जैसे ही शोवन वहां आकर बैठा परी तुरंत टेबल को बजा बजाकर गाने लगी…
” गोरे-गोरे मुखड़े पर काला-काला चश्मा तौबा खुदा खैर करें खूब है करिश्मा !”
मीठी और यश हंसने लगे और हर्ष परी को घूर कर देखने लगा..
“अरे मैं तो अपने हिस्से का गाना गा रही थी.. ये यश ने कहा ना मुझ पर ग से आया है… अंताक्षरी खेल रहे थे हम लोग.. !”
हर्ष को सफाई देते हुए परी ने कहा और शोवन की तरफ घूम गयी.. शोवन हलके से मुस्कुरा कर रह गया..
शोवन को लिखने पढ़ने ना अजब सा शौक था..
उसका ख़ून भले ब्रिटिशर्स का था लेकिन उसके संस्कार पूरी तरह से हिंदुस्तानी थे और अपनी मम्मी पिया से उसे लिखने पढ़ने का शौक बचपन से ही लग गया था..
वह हमेशा टूटी फूटी शेरो शायरी करने की कोशिश किया करता था। और उसकी इस कोशिश पर परी और बाकी लोग मजाक उड़ाते थे ।
लेकिन हर्ष हमेशा शोवन का उत्साह बढ़ाया करता था। आज भी शोवन के आकर बैठने के बाद जैसे ही परी ने उसके लिए गाना सुनाया, हर्ष ने और मीठी ने तुरंत समझ लिया कि गाना शोवन को चिढ़ाने के लिए है। लेकिन शोवन ने उस गाने पर एक टूटा फूटा सा शेर सुना दिया..
“हर्ष भाई.. मैं कुछ सुनाऊँ.. !”
“ऑफ़ कोर्स शोवन ! यह भी कोई पूछने वाली बात है?”
“अर्ज़ किया है.. !”
“मत करो… सीधा सीधा बोल ही दो हरियाले बन्ने !”
परी ने फिर शोवन की टांग खींची और शोवन ने उसे अनदेखा कर दिया..
वो अक्सर ऐसे मौकों पर हर्ष की तरफ ही देखा करता था..
“अर्ज़ किया है, अर्ज़ करूँगा..
तुम पे जिया है, तुम पे मरूंगा
कह लो चाहे, तुम्हें जो है कहना
तुम्हें सुना है, और तुम्हें सुनूंगा…
शोवन की शायरी सुनते ही हर्ष और यश ताली बजाने लगे, मीठी ने एक भौंह ऊपर कर वाह वाह का इशारा कर दिया लेकिन परी जो उस वक्त जूस का गिलास पकडे पी रही थी के गले में जूस की घूंट अटक सी गयी और उसे खाँसी आने लगी…
“बोल.. बोल परी… अब क्या जवाब है तुम्हारे पास !”
यश ने उसे छेड़ते हुए कहा और परी ने यश की तरफ नाराज़गी से देखा…
“हाँ तो क्या हुआ, मेरे पास और एक गाना है, ऐसे फेंक कर मरूंगी ना कि तुम्हारा सारा रॉयल ब्लू ब्लड खौल जायेगा… !”
यश ने अपने मुहँ पर हाथ रख अपनी हंसी रोकने की कोशिश की और हर्ष हल्का सा मुस्कुरा कर रह गया…
“अच्छा सुनो… गोरे रंग पे ना इतना गुमान कर, गोरा रंग दो दिन में ढल जायेगा.. मैं शमा हूं तू है परवाना मुझसे पहले तू जल जाएगा…!”
परी ने एक बार फिर शोवन के गोरे रंग पर अपनी तरफ से एक गाना सुना दिया, लेकिन इस बार भी शोवन उसका गाना सुनकर नहीं चिढ़ा, बल्कि मुस्कुरा कर अपनी टेबल पर रखी प्लेट में से उठाकर स्नैक्स खाने लगा। उसी वक्त दो चार लड़के लड़कियों का झुंड उन लोगों की टेबल पर चला आया, उनमें से एक ने हर्ष को देखा और उसके सामने चहकने लगी..
“एक्सक्यूज़ मी.. आप मिस्टर हर्षवर्धन सिंह बुंदेला है ना, द रॉयल सन… इस स्टेट के चीफ मिनिस्टर द ग्रेट राजा अजातशत्रु के भतीजे.. !”
हर्ष ने हामी भर दी…
और वो सारे लड़के लड़कियां उन सारे रॉयल मेंबर्स के साथ सेल्फी लेने को ज़िद करने लगे..
हर्ष ने बड़े प्यार से सेल्फी के लिए मना कर दिया लेकिन उतनी देर में दो चार लड़कों ने इधर उधर हर एंगल से उन लोगों के साथ सेल्फी ले ली..
लेकिन तब तक में हर्ष से एक निश्चित दूरी पर खड़े उन लोगों के गार्ड्स वहाँ तक चले आये और उन लड़कों और लड़कियों को वहाँ से हटा दिया..
लेकिन इस सारी भगदड़ में एक लड़की ने जाते जाते हर्ष के हाथ को खींच कर चूम लिया और उसके साथी लड़के ने उसकी तस्वीर ले ली…
इस सारी आपाधापी में हर्ष के साथ ही बाकी लोगों का भी मूड ऑफ़ हो गया… इसीलिए वो लोग ज्यादातर ऐसी जगहों पर नहीं आ पाते थे..
ये रेस्टोरेंट वैसे तो सुरक्षित था,और जब भी ये लोग आते थे तो रेस्टोरेंट के एक बड़े हिस्से को बुक कर लिया जाता था । जिससे आम जनता उस तरफ ना आ पाए..
वैसे हर्ष या यश, परी को इन सारी बातों से कोई ख़ास परेशानी नहीं थी, लेकिन सुरक्षा कारणों से युवराज सा इन बच्चों को पब्लिक प्लेस पर होने से मना ही किया करते थे..।
कुछ भी हो वो सारे लोग रॉयल ब्लड थे, उनका नाम कहीं पर भी किसी भी तरीके से कोई यूज़ कर सकता था.. ।
दूसरे अजातशत्रु का नाम भी उनके साथ जुड़ा था.. ।
इसलिए युवराज और राजा यही चाहते थे कि उनके बच्चे हमेशा एक सुरक्षित माहौल में रहें..
वैसे आज के पहले ऐसा कभी हुआ नहीं था.. इसलिए आज भी कुछ देर में वो लोग सामान्य हो गए और हर्ष ने गार्ड्स को वापस भेज दिया..
सबका मन थोड़ा भरी हो गया था इसलिए बात बदलने के अंदाज़ में हर्ष शौर्य को ढूंढने लगा..
“ये शौर्य कहाँ रह गया..? इसकी ना लेटलतीफी की आदत कब सुधरेगी पता नहीं.. ! काका सा के चेहरे मोहरे के अलावा उनका कोई गुण नहीं है इस लड़के में.. !”
.
“होगा कहीं किसी के साथ बिज़ी.. ? जानते तो हो उसकी आदत.. !”
मीठी की बात सुन कर हर्ष ने मीठी को देखा और अपना मोबाइल निकाल कर शौर्य को फ़ोन लगाने चला गया…
शौर्य अपनी रॉल्स रॉयस में ड्राइविंग सीट पर बैठा ड्राइव कर रहा था, उसकी बगल की सीट में बैठी लड़की लगातार उससे बात कर रहीं थी..
लेकिन शौर्य का ध्यान उसकी किसी बात पर नहीं था, वो पूरी तरह से अपने पसंदीदा गीत को सुनने में खोया हुआ था,….
हालाँकि उस लड़की की बातों पर शौर्य बस हाँ ना में गर्दन हिला रहा था…..
उसकी गाड़ी में उसका मनपसंद गीत बज रहा था..
चेहरा इक फूल की तरह शादाब है
चेहरा उसका है या कोई महताब है
चेहरा जैसे ग़ज़ल, चेहरा जाने ग़ज़ल
चेहरा जैसे कली, चेहरा जैसे कँवल
चेहरा जैसे तसव्वुर भी, तस्वीर भी
चेहरा इक ख्वाब भी, चेहरा ताबीर भी
चेहरा कोई अलिफ़ लैल की दास्ताँ
चेहरा इक पल यकीं, चेहरा इक पल गुमां
चेहरा जैसा के चेहरा कहीं भी नहीं
माहरू-माहरू, महजबीं-महजबीं
हुस्न-ए-जाना.. की तारीफ़ मुमकिन नहीं
आफरीं-आफरीं…
तू भी देखे अगर, तो कहे हमनशीं
आफरीं-आफरीं…
हुस्न-ए-जाना…
वो लड़की बहुत देर से नुसरत फतह अली की ग़ज़लें सुन सुन कर पक गयी थी और इस ग़ज़ल पर तो शौर्य ऐसे कुर्बान जाता था जैसे ये ग़ज़ल नहीं कोई इबादत हो..
उस लड़की ने चिढ के मारे गाना बंद कर दिया..
शौर्य ने पलट कर उसे देखा और हमेशा के शांत सजीले शौर्य की आँखों में वो ताब थी कि उस लड़की ने पल भर में गाना वापस चला दिया..
उसी वक्त शौर्य के मोबाइल पर हर्ष का फ़ोन आने लगा..
अपने गाने में मगन शौर्य मोबाइल की रिंग नहीं सुन पाया और इस बात का फ़ायदा उठा कर अपने हाथ में पकड़ रखें शौर्य के मोबाइल को उसने सायलेंट कर दिया..
कुछ देर बाद ही वो लोग आगे एक जगह पहुंचे जहाँ शौर्य को कोई काम था, वो गाड़ी एक तरफ खड़ी कर उतर कर चला गया और उसी वक्त वापस शौर्य के मोबाइल पर हर्ष का फ़ोन आने लगा…
क्रमशः…
aparna..

सबके बच्चो से मुलाकात हो गई हमारी
सब का व्यवहार आ गया नजरों में हमारी
कोई शांत झील सा है कोई हवा के मीठे झौंके सा है
कोई चुलबुल सा है तो कोई शरारती भरपूर सा है
किसी की समझदारी में उनके पिता साहेब दिखे तो
किसी की ग़ज़ल सुनने की आदत में राजा साहब नज़र आए
आज इस पार्ट में हमें एक रॉयल खानदान के
सारे बच्चों के किरदार समझ आए,,,।।।
बेहद खूबसूरती से मुलाकात करवाई है मिश्री दी ने हम की,,,।🥰
आज का भाग बहुत अच्छा लगा बांसुरी और राजा तो हमारी उम्र के हैं,अब नयी पीढ़ी से मिलेंगे उनके सपने, उनका व्यवहार सब उनके हिसाब से।
hyyy शोवन कितना cute है शर्मिला सा 😘😘और परी बहुत शरारती बिलकुल अपर्णा की तरह हैना अपर्णा 🤔🫣।
हर्ष बहुत समझदार पर ये शौर्य… 😟।पर इतना तो हमे पता है बांसुरी और राजा का बेटा कुछ समय के लिए भटक जरूर गया है पर जरूर लौटकर आएगा 😊।
बहुत खूबसूरत शुरुआत 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻🙏🏼।
वंडरफुल नाइस पार्ट दीदी, नई पीढ़ी की कहानी है इसमें, अच्छा लगा पढ़के…. शौर्य अपना हीरो है 💐🙏
बहुत बहुत अच्छी कहानी