जीवनसाथी -2/76

जीवनसाथी 2- भाग 76

  जीवनसाथी का दूसरा सीज़न शुरू होकर दिन बीत गए लेकिन अब तक वाकई सिर्फ राजा और बाँसुरी को नहीं लिखा इसलिए आप सभी कि भारी मांग पर आज का पार्ट सिर्फ राजा अजातशत्रु और उनकी हुकुम के नाम !

                  राजा बाँसुरी स्पेशल….

    ये उस समय की बात है जब बाँसुरी और राजा की शादी नहीं हुई थी….
और राजा अपनी कुछ उलझनों की वजह से बाँसुरी के साथ उसके फ़्लैट पर रुका हुआ था…

*****

    बाँसुरी सुबह सुबह अपनी कॉफ़ी लिए बालकनी में खड़ी निरमा से फ़ोन पर बातें कर रही थी… उसे नहीं मालूम था कि राजा भी सोकर उठ चुका था, और बालकनी के पिछली तरफ खड़ा उसकी सारी बातें सुन रहा था…
निरमा का जन्मदिन आने वाला था और उसी के बारे में दोनों बातचीत कर रहे थे !

“तू बोल ना नीरू.. इस बार तुझे मुझसे क्या गिफ्ट चाहिए ?”

” अरे बोला ना मुझे कुछ नहीं चाहिए..!”

” ठीक है तू नहीं बताएगी तो मैं ऐसा करती हूं तेरे लिए एक अच्छा सा बॉयफ्रेंड ढूंढ लेती हूं..! “

” उसके लिए आप को कष्ट उठाने की जरूरत नहीं है मैडम..!”

” इसका मतलब तूने खुद  ढूंढ लिया है..! मुझे शक तो बहुत पहले से हो रहा था, लेकिन कभी तुझसे पूछा नहीं लेकिन अब पता नहीं क्यों लगने लगा है कि कोई तो है..!”

” हां है ना, और जल्दी ही मैं तुझ से मिलवा भी दूंगी..! लेकिन अभी तू बता कि तेरा आज का क्या प्लान है..?”

” क्या प्लान होगा यार.. वही ऑफिस और ऑफिस से घर !
अब तो अकेले रहते रहते बोर होने लगी हूं | पिंकी को भी बहुत दिन हो गए दिल्ली गए हुए | वापस नहीं आई अब तक | माला तो परमानेंटली नीदरलैंड शिफ्ट हो गई है | ऑफिस में काम करते वक्त तो नहीं अखरता, लेकिन घर लौटने पर शाम का अकेलापन बहुत अखरता है…|”

” अभी कहां से अकेली है तू ? तेरे साथ तो पिंकी का भाई रह रहा है ना..? हैंडसम हंक !”

” अरे वो लड़का !!  वो तो मेहमान है यार और वो तो चार  दिन में चला भी जाएगा यहां से..! उसे कौन सा परमानेंटली यहां रहना है..!”

” हाय!! तू तो उसके जाने के नाम पर ऐसे उदास हो गई…!
  उसके जाने की सोच कर अगर इतनी उदास हो रही है तो उसे रख ले परमानेंट अपने साथ, अपने दिल में बसा कर ..!”

” पागल है क्या ? मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता उसके रहने ना रहने से | अभी मैं उसे जानती ही कितना हूं ? “

“वो तो धीरे धीरे जान ही लेगी… वैसे जिस हिसाब से तूने उसका डिस्क्रिप्शन दिया था लगता तो नहीं कि तू अब तक उसे जान नहीं पायी है… उसके डील डौल तो छोड़ तुझे तो उसकी भौंह पर लगा कट का निशान भी याद है… जब इतना ध्यान से देख रही है तो और क्या बचा है मैडम जानने के लिए ?”

“शटअप यार… ! मै क्या बोल रही हूँ और तू क्या बोल कर मेरी बात भटका रही है.. !”

“अच्छा चल बोल… तू आज अपना रोना रो ही लें !”

” मैं तो अपनी उदासी की बात कर रही थी कि शाम को घर लौटती हूं तो कोई नहीं होता जो मेरे लिए कुछ करें..!
मुझे ऐसा लगता है मैं ही सबके लिए सोचती रहती हूं | घर पर भी जब भी दीदी का बर्थडे होता था या मम्मी पापा का बर्थडे होता था तो मैं 1 महीने पहले से तैयारी शुरू कर देती थी !
   यहां तक कि ताई जी के बर्थडे पर भी मम्मी के साथ मार्केट जाकर उनके लिए शॉपिंग करनी हो या घर पर चॉकलेट केक बनाना हो सब मेरा ही काम होता था.. !
अभी भी देख ले भास्कर का बर्थडे था तो ना चाहते हुए भी मैंने कितना कुछ प्लान किया था उसके लिए..!
    मैंने अपने हाथों से कार्ड बना कर उसे दिया था | उसकी फेवरेट कलर की शर्ट उसके लिए खरीदी थी | उसके लिए ढेर सारे फूल चॉकलेट और टेडी बेयर भेजा था | यहां तक कि उसके लिए मैंने डिनर भी प्लान किया था लेकिन उसे इन सब बातों की कोई कदर ही नहीं है |”
” उसके बर्थडे पर किस किया था उसे ?”

“शटअप यार नीरू ! मै इस सब में विश्वास नहीं करती ?”

“जी नहीं मैडम.. बात विश्वास की नहीं है.. बात होती है मूड की ! तुझे भास्कर को चूमने का मन ही नहीं करता… इट्स सो सिम्पल इसीलिए तू अपने बॉयफ्रेंड को चॉकलेट और टेडी से बहलाती रहती है !”

“तू वो सब छोड़ ये पूछ कि  उसने मेरे बर्थडे पर क्या किया?”

“क्या किया ?”

“भूल गया… पहले तो भूल गया,  बाद में जब उसे बर्थडे याद आया तो मुझे डिनर पर ले कर गया वह भी अपने पसंद के रेस्टोरेंट में….!
  और यहां तक कि उसने खाना भी अपनी पसंद का आर्डर कर लिया !
खैर मुझे इन बातों से फर्क नहीं पड़ता |  प्यार मोहब्बत में इंसान एक दूसरे की पसंद में ही  अपनी पसंद ढूंढने लगता है… लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि यह कोशिश सिर्फ मेरी तरफ से हो रही है…  |
   भास्कर कभी मेरी खुशी के लिए कोई कोशिश करता ही नहीं, या शायद करना ही नहीं चाहता.. |

नीरू मुझे हमेशा से लगता था कि मैं जिस लड़के से प्यार करूं, वह लड़का मुझसे इतना टूट कर प्यार करें कि मेरी हर एक चीज उसके लिए स्पेशल हो जाए | उसकी दीवानगी मुझे पागल बनाने लगे | वो सिर्फ मेरा जन्मदिन ही ना बल्कि मेरे साल के तीन सौ पैंसठ दिन अपनी  छुवन से स्पेशल बना दे…

मै चाहती हूँ कोई मुझे भी कभी बिना किसी कारण के स्पेशल फील करवाए !

     मुझे किसी बहुत बड़ी खुशी का इंतजार नहीं है नीरू, और ना ही मैं कोई बहुत बड़े-बड़े सपने देखती हूं…
   पर बस इतना चाहती हूं कि मुझसे प्यार करने वाला इंसान मेरे लिए छोटी-छोटी खुशियों की माला ऐसे पिरो  दे कि मैं उन खुशियों से महक जाऊं |
    मैं ऑफिस से घर लौट कर आऊं और वह मेरे लिए मुस्कुराते हुए दरवाजा खोल दे | मैं थक कर अपने कमरे से बाहर आऊं तो वह एक गर्म कॉफी का कप मेरे हाथों में पकड़ा दे.. !

मैं अपने बालों को बांधते हुए रसोई में जाऊं तो वह पीछे से क्लचर मेरे बालों में फंसा दे |  मैं फ्रिज में से सब्जियां निकालूँ और वह मेरे हाथों से छीनकर उन्हें धोकर रख दे…
मैं डिनर टेबल पर खाने के डोंगे लेकर जाऊं, और वह प्लेट सजा दे और मेरे खाना परोसने तक में वह खुशबु वाले कैंडल्स जला दे…

मैं उसकी प्लेट पहले परोस दूँ तब भी वह मेरी प्लेट परोसने तक मेरा इंतजार करें…
खाने के बाद मैं प्लेट्स उठाना शुरू करूं और वह टेबल साफ कर दे..

   रात के वक्त मैं बालकनी के अपने पसंदीदा झूले पर बैठूं और वह मेरे सामने खड़ा होकर गिटार बजा दे…    कोई मीठी सी धुन मुझे सुनाते हुए मेरे दिल के तार झनझना दे… !

” बस बस बांसुरी यह सब सिर्फ फिल्मों में होता है असल जिंदगी में लड़के ऐसे नहीं होते.. !”

” जानती हूं कि असल जिंदगी में लड़के ऐसे नहीं होते, लेकिन फिर लड़कियां हमारी जैसी पागल क्यों होती है ?       नीरू मैं क्यों इतनी फिल्मी हूं मुझे समझ नहीं आता ?  मुझे पता है भास्कर इसमें से कुछ नहीं करेगा फिर भी मैं क्यों उम्मीद करती हूं.. ?

” एक बात सच बोलना बाँसुरी… !
  क्या तू सचमुच भास्कर से यह सब उम्मीद करती है?”

बाँसुरी कुछ देर सोच में गुम हो गई…

” नहीं..!  शायद मैं यह सब किसी अनदेखे अनजाने से उम्मीद लगाए बैठी हूँ… !
  पता नहीं नीरू अभी चार दिन नहीं बीते है सगाई होकर फिर भी मेरे सपनो में भास्कर क्यों नहीं आता ? मैं अब भी शायद अपने सपनों के राजकुमार का इंतजार कर रही हूं जानती हूं कि बहुत बड़ी बेवकूफी कर रही हूं..|  क्योंकि अब मुझे अपने आपको भास्कर के लिए तैयार कर लेना चाहिए | बावजूद मैं उसे छोड़कर पता नहीं किस उम्मीद में खोई हूं कि, मेरे सपनों का राजा आएगा और मुझे सबसे चुरा कर अपनी दुनिया में ले जाएगा | और अंदर से एक आवाज आती है नीरु की हां वह आएगा और वह बिल्कुल वैसा ही होगा जैसा मैं उसे महसूस करती हूं…
वाकई वो ऐसा होगा जिससे सारी दुनिया प्यार करने लगेगी और वह जब मेरे सामने आएगा तो मैं समझ जाऊंगी कि यही है वो जो मेरे लिए बना है.. !”

” मुझे यह तो यकीन था बांसुरी कि तू थोड़ी सी पागल है लेकिन आज तो पूरी तरह से साबित हो गया कि तू थोड़ी नहीं पूरी पागल है.. !
तेरी सगाई हो चुकी है और कुछ महीनों बाद तेरी शादी हो जाएगी और तू अब भी किसी अनदेखे अनजाने लड़के के ख्वाबों में गुम है ! तू एक ऐसे किरदार के ख्वाबों में गुम है जिसके अस्तित्व का भी तुझे पता नहीं है !और तू कहती है जब वह तेरे सामने आएगा तो तुझे पता चल जायेगा कि ये वही है ! पर एक बात बता,  अगर तेरे सामने वो उस वक्त आया जब भास्कर और तू  एक साथ हुए  तब.. ?
और अगर तेरे उस सो कॉल्ड मिस्टर राइट को देख कर तुझे ये आभास हो गया कि यही तेरा जीवनसाथी है तब तू भास्कर से कैसे अलग होगी.. ?

प्रैक्टिकल लाइफ में यह सब पॉसिबल नहीं होता मैडम..!
   इसलिए अपने ख्यालों की दुनिया से बाहर निकलो | तुम्हारा बर्थडे हो या और कोई दिन, भास्कर के अलावा कोई नहीं आने वाला तुम्हारे दिन को स्पेशल बनाने के लिए |
    चल सुबह सुबह बहुत गप्पे हो गई, अब हम दोनों को ऑफिस निकलना है !”

निरमा की बात सुनकर बांसुरी को भी सच्चाई का आभास हो गया और वह फीकी सी मुस्कान के साथ चुप रह गई…

” हां तू सच कह रही है नीरु ! अब मेरे सपनों का राजा कभी नहीं आएगा और मुझे भास्कर के साथ ही अपनी जिंदगी बितानी होगी, इसलिए शायद मुझे सपने देखना छोड़ देना चाहिए | चल मैं भी तैयार होने जा रही हूँ ! मुझे भी ऑफिस निकलना है.. !”

” तू तो उदास हो गई बांसुरी.. !”

” अरे नहीं… इसमें उदास होने वाली कौन सी बात है.. ? मैं ठीक हूं..! चल ऑफिस में मिलते हैं.. !”

बांसुरी के पीछे पलटने तक में राजा वहां से हट गया था…

राजा के लिए खाना तैयार करके बांसुरी ने रखा और अपना टिफिन पैक करके नहाने घुस गयी…

आज उसने गहरी नीली जींस पैंट्स और मेरून टॉप पहनी थी…
    बाल धुले गीले होने से उसने खुले ही छोड़ दिये थे…

वो कमरे से बाहर आई और राजा को उसने हमेशा की तरह चुपचाप बैठे देखा…

“मै ऑफ़िस जा रही हूँ… तुम्हारे लिए खाना बना कर टेबल पर रखा है.. खा लेना…… !
नीचे सोसाइटी के जिम के बारे में तो तुम्हें बता दिया था, और किसी चीज़ की ज़रूरत हुई तो मुझे कॉल कर लेना  !”

राजा ने बस धीमे से हाँ में गर्दन हिला दी…

हालाँकि अब राजा और बाँसुरी की काफ़ी दोस्ती हो चुकी थी लेकिन अब भी बिना ज़रूरत के दोनों ही एक दूसरे से बात करने में कतराते थे…

बाँसुरी चली गयी और राजा को आज के लिए काम मिल गया…

उसने पूरे घर को ध्यान से देखा और फिर मोबाइल से नंबर निकाल कर किसी डेकोरेशन वाले से बात करने लगा !

बाँसुरी का दिन भर किसी ड्राफ्ट को तैयार करने में निकल गया…

शाम में घर निकलते समय वो ऑफ़िस के सामने की बेकरी से गुज़रते हुए कुछ सोच कर बेकरी में घुस गयी…
उसने अगले दिन के नाश्ते के लिए ब्रेड खरीदी और घर के लिए निकलते हुए उसकी नज़र डार्क चॉकलेट ब्राउनी पर थम गयी…
  लेकिन फिर कुछ सोच कर उसने वो ब्राउनी नहीं खरीदी और बस ब्रेड और कुकीज़ लेकर घर निकल गयी…

उसके पर्स में चाबी पड़ी थी बावजूद उसने बेल बजा दी…
लेकिन दो तीन बार बेल बजाने के बावजूद दरवाज़ा नहीं खुला…

“अरे यार.. ये लड़का !! लगता है फिर बालकनी में बंद हो गया है !”

पहले भी एक बार ऐसा हो चुका था, कि वो ऑफ़िस से आ कर बेल बजा बजा कर परेशान हो गयी थी और राजा बालकनी में बैठा अपनी गिटार में व्यस्त था…
वहीं बात याद कर बाँसुरी ने दरवाज़ा खोला और अंदर दाखिल हो गयी…  घर में अँधेरा देख वो चौंक गयी… !

अपार्टमेंट में जनरेटर था इसलिए बत्ती गुल होने का सवाल ही नहीं उठता था… |
उसने दीवार टटोल कर लाइट जला दी और एक बार फिर उसकी आंखें आश्चर्य से फ़ैल गयी….

पूरे घर में सफेद और पर्पल बलून्स सजे थे…
   सफेद और पर्पल आर्किड के फूल जगह जगह स्टिक किये गए थे और दरवाज़े से लेकर बाँसुरी के बैडरूम तक गुलाब की पंखुडियाँ बिछी हुई थी…..

कमरे में बहुत भीनी सी खुशबु आ रही थी… उसे समझ में आ गया कि ये सब राजा ने किया है…

वो थोड़ा आगे बढ़ी कि उसके ऊपर लगा पंखा घूमने लगा और उससे फूलों कि पत्तियां बिखर कर बाँसुरी पर झरने लगी…

मुस्कुरा कर उसने सर उठा कर ऊपर देखा और एक बार फिर उसकी ऑंख खुली रह गयी… पंखे के ऊपर की दीवार पर एक आइना लगा था जिसमे वो खुद को देख पा रही थी…

उस आईने में उसने देखा उसे खुद के पैरों के पास कुछ सुनहरे रंग का दिखाई दिया और उसने झुक कर फूलों के बीच से उस कार्ड को उठा लिया…

तनिष्क का शॉपिंग वाउचर था ! एक बार फिर वो आश्चर्य में डूब गयी… वो धीमे से थोड़ा और आगे बढ़ी और उसने राजा को आवाज लगा दी…

“राजा… ! कहाँ हो ?”

और राजा एक छोटी सी प्लेट में चॉकलेट ब्राउनी लेकर उसके सामने चला आया…
ब्राउनी देख बाँसुरी चौंक गयी…

“जादूगर हो क्या तुम ? आज बेकरी से गुज़रते हुए ब्राउनी लेने का बहुत मन था, पर फिर पता नहीं क्यों नहीं लिया मैंने ?और देखो तुम लें आये !”

राजा ने मुस्कुरा का छुरी आगे कर दी… और बाँसुरी ने ब्राउनी पर हल्का सा कट लगा दिया…
दोनों ने एक एक टुकड़ा उठा लिया…
राजा ने अपना टुकड़ा ख़त्म किया और रसोई में चला गया…
ब्राउनी खा कर वो भी रसोई तक चली आयी और रसोई में राजा को कॉफ़ी से जूझते देख उसके चेहरे पर मुस्कान चली आयी…
वो मुस्कुरा कर रसोई में भीतर चली आयी…

“ये सब क्या है… ?”

“कुछ भी तो नहीं… !”

“अच्छा.. ! ये डेकोरेशन ये फ्लावर्स, ये तनिष्क का गिफ्ट कार्ड… ये सब क्या है ? तुम तो मुझे ढंग से जानते तक नहीं और इतना कुछ कर दिया… !”

“इसके पीछे एक कहानी है… इजाज़त हो तो सुना दूँ !”

राजा को एक किनारे कर वो कॉफ़ी बनाने लगी और उसकी झुकी पलकें देख राजा ने आगे बोलना जारी रखा…

“मेरी दादी अक्सर मुझे दादाजी के किस्से सुनाया करती थी…
उन्होंने एक बार की बात बताई थी.. दादाजी शिकार पर गए थे… और जंगल में वो अपने दस्ते से काफी आगे निकल गए |  जंगल का रास्ता कटींला और पत्थरों वाला था, हालांकि उनके घोड़े को ऐसे रास्तों पर दौड़ने का अभ्यास था लेकिन उसकी तबीयत उस वक्त जरा नासाज़ थी और जंगल में बहुत अंदर तक जाने के बाद घोड़ा थकने लगा था …
उसकी थकान महसूस करने के बाद दादाजी घोड़े से उतर गए और उस एक जगह पेड़ से बांध दिया…
शाम ढल चुकी थी और रात गहराने लगी थी |  दादाजी अपने साथ के लोगों से बिछड़ गए थे और इस वक्त उनके पास आग जलाने की भी कोई व्यवस्था नहीं थी !

दिन के वक्त जो जंगल बहुत खूबसूरत लगता है वही रात होते ही बहुत भयानक हो जाता है !
उस वक्त भी ऐसा ही हुआ और उसी वक्त दादाजी को जंगल में सूखे पत्तों पर पैरों की आहट सुनाई दी | दादाजी बहुत उम्दा शिकारी थे और उन्होंने पैरों की आहट से समझ लिया कि शेर आसपास है…..
दादाजी ने अपनी राइफल निकाल ली,  और सतर्क होकर अपने आसपास देखने लगे…
उन्हें जिस तरफ से आहट सुनाई दे रही थी उस तरफ उन्होंने निशाना लगा लिया लेकिन इतने परिपक्व शिकारी होने के बावजूद जंगल में अकेले दादाजी धोखा खा गए..
जिस तरफ से आहट आ रही थी उधर कोई और जानवर था और शेर बहुत चुपके से उनके पीछे की तरफ से उनकी तरफ बढ़ रहा था..
एक निश्चित दूरी पर पहुंचने के बाद शेर ने उनके ऊपर छलांग लगा दी, लेकिन शेर दादा जी तक पहुंच पाता उसके पहले एक जहरीली नोंक वाला भाला आया और शेर के गर्दन के पास से होते हुए उसे चोटिल कर गया | उस भाले के लगते ही शेर दूसरी तरफ गिर पड़ा और दादाजी सुरक्षित बच गए… |
शेर के दूसरी तरफ गिरते ही एक तीर आकर शेर के सीने में चुभ गया और कुछ देर तड़पने के बाद शेर ने वहीँ  प्राण त्याग दिए ! अगर उस दिन वह शेर नहीं मरा होता तो शायद दादाजी नहीं बच पाते…
दादाजी की जान बचाने वाला वहीं जंगल का रहने वाला कबीले का आदमी था…
दादाजी के पास पहुंचने के बाद उसने उन्हें नमस्कार किया और शेर को भी वही छोड़कर उनसे विदा लेकर चला गया | दादाजी ने उसे रोकने की बहुत कोशिश की, वो चाहते थे कि वह उसे अपने साथ जंगल से निकालकर ले जाए और उसे ठीक से रहने लायक आदमी बना दें लेकिन उसने दादाजी की किसी मदद   को लेने से इनकार कर दिया..
यहां तक कि वह उस शेर को भी अपने साथ नहीं ले गया |  कुछ देर बाद ही दादाजी के दस्ते के बाकी लोग दादाजी को ढूंढते हुए वहां तक पहुंच गए और उस शेर को देखकर उन लोगों को यह लगा कि दादाजी ने इसे मारा है…..

इस घटना के बाद दादाजी की सोच एकाएक बदल गई |  पहले भी वह दंभी और अहंकारी तो नहीं थे, लेकिन अपने सामने किसी और को महत्व देना उन्हें पसंद नहीं था | लेकिन उस दिन उन्हें समझ में आया कि जिंदगी और मौत के बीच एक बहुत छोटा सा फासला है… जो कभी भी और कहीं भी भर सकता है | अगर उस आदमी ने बिना किसी स्वार्थ के तीर चला कर उस शेर को ना मारा होता तो दादाजी जिंदा नहीं होते, लेकिन उनकी जान बचाने के बाद भी उस आदमी ने दादाजी से बदले में कुछ नहीं लिया और चुपचाप चला गया..|

बस इसके बाद दादाजी ने एक नियम बना लिया कि वह हर रोज किसी भी एक व्यक्ति की खुशी के लिए कोई काम जरूर करेंगे..!
उन्होंने यह बात दादी को बताई थी और दादी अक्सर मुझे बताया करती थी | आज जाने क्यों सुबह से मुझे अपने दादाजी की बहुत याद आ रही थी…
जबकि सच्चाई यह है कि मैंने कभी अपने दादाजी को नहीं देखा | मेरे जन्म से पहले ही उनकी मृत्यु हो चुकी थी | बावजूद दादी ने उनके इतने किस्से सुनाए हैं कि, मुझे ऐसा लगता है मैं साक्षात दादाजी से ही मिल चुका हूं |  आज सुबह से उनकी याद आ रही थी इसलिए मुझे लगा आज मुझे भी किसी की खुशी के लिए कुछ करना चाहिए |
   अब यहां पर मेरे आस-पास तो तुम्हारे अलावा और कोई नहीं था तो सोचा तुम्हारी खुशी के लिए कुछ कर लेता हूं | उसके बाद यह सोचा कि तुम्हारी खुशी के लिए मैं क्या कर सकता हूं या फिर किस बात के करने से तुम खुश होगी ?
    तब लगा कि तुम सुबह से ऑफिस जाती हो, शाम में घर लौटोगी तो अगर घर सजा संवरा दिखेगा तो तुम्हें अच्छा लगेगा !
    तो बस इसीलिए यह छोटी सी कोशिश की है.. !
  अगर तुम्हें पसंद आई तो इसके लिए तुम्हारा धन्यवाद..!

” राजा बाबू आप तो बड़े अलग मिजाज के हैं ! मेरी खुशी के लिए इतना कुछ तामझाम किया और उसके बाद थैंक्यू भी मुझे ही बोल रहे हैं जबकि इतने सबके लिए तो मुझे आपको थैंक्यू बोलना चाहिए |
    वैसे आपको बता दूँ कि आज तक मेरे लिए स्पेशली ऐसा कुछ किसी ने भी नहीं किया, इसलिए दिल से बड़ा वाला थैंक्यू..!”

  राजा और बांसुरी की बातों के बीच कॉफी खत्म हो चुकी थी और बांसुरी उठकर कॉफी के कप अंदर रखने  चली गई..

” आज तो आपने वाकई मुझे बहुत खुशी दी है अब आपकी खुशी के लिए मुझे यह बताइए कि आप खाने में क्या खाना चाहते हैं ? मैं वही बना लूंगी..!”

” जो भी फटाफट बन जाए..!”

” तहरी बना लूँ.. !”

राजा को असल में मालूम नहीं था कि तहरी क्या होती है ? लेकिन बांसुरी बनाना चाहती थी इसलिए उसने हाँ में गर्दन हिला दी…

कुकर चढ़ाकर बांसुरी ने फटाफट ढेर सारी सब्जियां और चावल डालकर कुकर में सीटी लगा दी और खुद  फ्रेश होने अपने कमरे में चली गई..

उसके कपड़े बदल कर बाहर आने तक में राजा ने डाइनिंग टेबल पर क्रॉकरी सजा दी थी और साथ ही खुशबू भरी कैंडल्स भी चला दी थी | उन कैंडल्स को देखते ही एक बार फिर बांसुरी के चेहरे पर लंबी सी मुस्कान छा गई….

उसने फटाफट दो प्लेट में खाना निकाला और राजा को पकड़ा कर खुद भी प्लेट लेकर बैठ गई…

” तुम्हें टीवी पर कुछ स्पेशल तो नहीं देखना राजा..?” मैं अपनी पसंद का सीरियल लगा लूं..?”

राजा ने धीरे से हां में सिर हिला दिया…
और बांसुरी ने टीवी पर एक पारिवारिक सीरियल लगा लिया…
सीरियल के एक सीन में सास ननंद और ननंद का पति मिलकर नायिका को प्रताड़ित कर रहे थे…
और प्रताड़ित भी ऐसे कर रहे थे जिससे नायक को पता ना चल सके |  नायक के सामने नायिका की ही गलत इमेज बनवाई थी और नायक के पीछे नायिका को बुरी तरह से प्रताड़ित किया जा रहा था…
बांसुरी उस निहायत ही बकवास सीन को देखते हुए बहुत ही ज्यादा भावुक हुई जा रही थी !
  यहां तक कि उसकी आंखों में आंसू झिलमिलाने लगे थे..!
    और टीवी पर चलते उस सीरियल को देखते हुए राजा को जोर से हंसी आ रही थी, लेकिन बांसुरी  की भावुकता का ख्याल कर उसने अपने आप को काबू में रखा और खुद को हंसने से रोक लिया.!

बाँसुरी का खाना खत्म हो जाने पर भी जब तक सीरियल चलता रहा बाँसुरी टकटकी लगाए टीवी देखती रही और राजा ने सारा टेबल साफ कर दिया.. !

सीरियल ख़त्म होते ही बाँसुरी का ध्यान टूटा और उसने देखा राजा एक तरफ बैठा अपने गिटार की तारे कस रहा था…

“अरे तुम्हारा खाना कब खत्म हुआ ?”

बाँसुरी के सवाल पर राजा मुस्कुरा कर रह गया…

“आज कुछ अच्छा सा बजाने का मन कर रहा है !”

“तो बजाओ ना.. मेरा भी सुनने का मन कर रहा है !”

राजा ने हाँ में गर्दन हिलायी और गिटार लेकर बालकनी में चलने का इशारा किया…
बाँसुरी फटाफट रसोई साफ़ कर बालकनी में चली आयी और अपनी पसंदीदा जगह पर बैठ गयी.. उसके झूले पर सवार होते ही राजा ने गिटार ट्यून की और बजाने लगा…

महरूम थे….
सूने सवालों के जायज़ जवाब मिले ना..
कुछ गुम से थे…..
साये जो सड़कों में ढूंढे,
मीलों तक मिले ना….

राहें फिर मुड़ी और साथी एक साथी मिल गया…

*****

हमसफ़र मिला मेरा हमसफर
माना अनजाना है..
लगे पहचाना पर….

राहें फिर मुड़ी… और साथी एक साथी मिल गया

रेडियो पर ये गाना चल रहा था और सारिका कमरे में सफाई कर रही थी कि चौंक कर बाँसुरी बिस्तर पर उठ बैठी….

आज ना जाने कैसे उसे असमय नींद सी लग गयी थी… और नींद में चलता एक मीठा सा ख्वाब उसे अपने राजा साहब के पास ले गया था…

नींद में दिखा ख्वाब कुछ अफ़साना तो कुछ हकीकत था लेकिन ये गीत उसकी ज़िंदगी का एक बहुत हसीन हिस्सा था…
रेडियो पर आज बहुत दिनों बाद इस गीत को सुन अपने राजा को याद कर बाँसुरी की आंखें छलक आयी..

उसे ऐसे दुःखी देख आखिर सारिका से नहीं रहा गया और वो बाँसुरी के पास चली आई…

“रानी हुकुम आप परेशान ना हो… हम आपको ऐसे रोते नहीं देख पाते हैं… आप चुप हो जाइये प्लीज़ !
हम नीचे वाले ऑफ़िस रूम से मोबाइल निकाल कर लाते है… पता नहीं यहाँ के सारे मोबाइल बंद क्यों रखें जाते हैं…
हम मोबाइल लाते हैं आप अपने साहब से बात कर लीजियेगा… !”

बाँसुरी की ऑंख में उम्मीद का दिया जला कर सारिका तेज़ी से नीचे चली गयी.. उसे मालूम था इस वक्त नीचे कोई नहीं रहता है, और उसी बात का फ़ायदा उठा कर वो दक्ष के ऑफ़िस में घुस गयी….

लेकिन उसे नहीं मालूम था कि ऐसा कर के वो बाँसुरी कि मदद करने कि जगह उसकी जान जोखिम में डालने जा रही है…..

क्रमशः

aparna….
..

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