
जीवनसाथी -2 भाग -58
पिया समर को अनदेखा कर तेज़ी से बाहर निकल गयी…
समर ने एक नजर शोवन पर डाली और उसे उस मासूम से बच्चे पर ढेर सारा प्यार आने लगा उसने प्यार से उस बच्चे की हथेली को अपने मजबूत हाथों में थाम लिया….
जाने क्यों लेकिन उस छोटे से बच्चे की अस्वाभाविक शांति ने समर के दिल में एक कोलाहल मचा दिया! समर को उस बच्चे पर बहुत ज्यादा तरस आ रहा था और समर ने उसे बहुत प्यार से अपनी गोद में उठा लिया…
समर के इस तरह से शोवन को गोद में लेते ही शोवन के चेहरे पर पहली बार एक हल्की सी मुस्कान आते-आते रह गई ! वह अपनी बड़ी बड़ी आंखों से समर के चेहरे की तरफ देखने लगा..
” क्या हुआ..? ऐसे क्या देख रहे हो..?”
शोवन ने धीरे से ना में गर्दन हिला दी लेकिन समर चाहता था कि वह कुछ न कुछ बोले! समर जानता था कि अगर इस उम्र में उस बच्चे पर रिश्तो का इस तरह का दबाव बढ़ता रहा तो वह बच्चा अपना बचपन भुलाकर समय से पहले बड़ा हो जाएगा….
” नहीं… ! अगर आपने जवाब नहीं दिया तो मैं आपको अपनी गोद से नहीं उतारूंगा..!”
शोवन अब भी समर को अपनी बड़ी-बड़ी पलके झपकता हुआ देखता रहा उसने बहुत धीमे से अपने मन की बात कहनी शुरू की….
” अंकल..! क्या आप मेरी मम्मी को जानते थे..?”
भीगी हुई सी आवाज में शोवन का सवाल सुनकर समर कुछ पल को हतप्रभ रह गया…
अपनी अपनी परेशानियों में हैरान समर और पिया का ध्यान इस बात से कैसे हट गया था कि शोवन ने अभी-अभी अपनी मां को खोया था..
” हां, मैं तुम्हारी मां को जानता था..!”
” और मेरे डैड… !”
समर से शोवन की इस बात का कोई जवाब देते नहीं बना… उसने शोवन को बड़े प्यार से अपने गले से लगा लिया…
” ऐसा क्यों पूछ रहे हो बेटा..?”
” मेरे डैड आएंगे तो मैं उनके पास चला जाऊंगा ना..! मॉम हमेशा मुझसे कहती थी कि जब मेरे डैड आएंगे तो मैं उनके पास जाऊंगा..! और उनके साथ ही रहूंगा..! लेकिन डैड तो अब तक आए नहीं, मैं उनका वेट कर रहा हूं !”
समर के गले तक आकर कुछ अटकने लगा…. उस छोटे से मासूम से बच्चे की भोली बातों ने जैसे समर की आँखे पल भर में ही खोल कर रख दी थी…
अपनी दोस्ती का वचन निभाने के लिए समर भले ही रेवन के बच्चे को विदेश से अपने साथ ले तो आया था लेकिन यहां लाने के बाद उसने उस बच्चे को एक तरह से अपने परिवार के पास छोड़ दिया था…
उसने रेवन से जो वादा किया था उसके अनुसार उसे कायदे से तो एक बाप की तरह शोवन की देखभाल करनी चाहिए थी उसकी जगह समर उसे लाकर अपनी जिम्मेदारियों से खुद को मुक्त समझ बैठा था…
रेवन के कारण अपने और पिया के बीच पैदा हुई दरार को वह पाट नहीं पा रहा था, इसके अलावा उसकी अपनी खुद की इतनी व्यस्तताएं थी कि उसके लिए अभी अपनी व्यस्तताओं के अलावा सबसे पहली प्रायरिटी पिया ही थी…
उसका उद्देश्य पिया से बातचीत करके अपने रिश्ते को सुलझाना ही था और इन्हीं प्रयासों में वो शोवन की तरफ से एकदम ही उदासीन हो गया था…
आज शोवन की भोली बातें सुनकर उसका दिल पश्चाताप से भर उठा….
उसने शोवन को कस कर अपने सीने से भींच लिया और उसके गाल पर एक प्यार भरा चुंबन अंकित कर दिया…
दूर कार के पास हाथ बांधकर खड़ी पिया समर और शोवन को अपनी तरफ आते हुए देख रही थी, लेकिन खुद में मगन समर का ध्यान ही नहीं था कि पिया की नज़र उन दोनों पर ही थी…
समर ने जैसे ही शोवन के माथे को चूमा पिया ने नफरत से अपना चेहरा घुमा लिया….
समर ने गाड़ी के पास पहुंचते ही गाड़ी का लॉक खोल दिया और पिया दरवाजा खोल कर सामने ड्राइवर की बाजू वाली सीट पर बैठ गयी ! समर ने शोवन को पीछे की सीट पर बैठाया और खुद ड्राइविंग सीट पर चला आया…
कुछ देर में ही वो लोग महल पहुंच गए….
महल की पार्टी की बात ही अलग हुआ करती थी ! वैसे ही हर बार की तरह आज भी महल के इंतजामात अलग ही थे…..
समर और पिया के अंदर दाखिल होते ही रूपा खुद आगे बढ़कर उन दोनों के स्वागत के लिए चली आई… रूपा के ठीक पीछे ही युवराज सा भी उन लोगों तक चले आए….
युवराज ने झुक कर शोवन के सामने अपनी हथेली बढ़ा दी… शोवन ने धीमे से शर्माते हुए उनसे हाथ मिलाया और फिर चुपचाप नीचे देखते हुए खड़ा हो गया…
युवराज उन सब को लेकर अंदर चले गए…
ठंड की हल्की हल्की सी दस्तक शुरू हो चुकी थी और इसीलिए जगह-जगह अलाव जलाए गए थे…..
पिया रूपा के साथ आगे बढ़ते हुए जिस तरफ सभी लोग बैठे थे वहाँ तक पहुँच गयी..
अलाव के चारों तरफ गद्देदार कुर्सियां पड़ी थी जिन पर सभी लोग बैठे थे…
निरमा पिया को आते देख मुस्कुरा कर खड़ी होकर उसके पास चली आई….
सभी औरतें एक दूसरे को देख मुस्कुरा उठी…
शोवन जब से समर और पिया के साथ आया था तब से आज वो दूसरी बार महल आया था, इसके पहले वो बस कुछ देर के लिए ही आया था और तब राजा ने उसे पल भर को भी अपनी गोद से नहीं उतरने दिया था…
आज भी समर की ऊँगली थामे खड़ा शोवन अपनी बड़ी बड़ी आंखे खोले चारों तरफ देखता शायद उस दिन के अपने प्यारे अंकल को ही खोजने की कोशिश में था…
पिया ने सामने खड़े शोवन पर एक नज़र डाली और वापस सामने जलती आग को देखने लगी…
रेखा, जया रूपा के साथ बैठी निरमा भी अपनी रोज़मर्रा की बातों में लगी थी की पिया ने बाँसुरी के बारे में पूछ लिया..
” निरमा.. ! रानी सा कैसी हैं अब.. ?”
“पहले से काफ़ी ठीक है, लेकिन अब भी पूरी तरह से ठीक होने में वक्त तो लगेगा ही.. !”
“हाँ.. ! लेकिन हैं कहाँ वो… शायद शौर्य को तैयार कर रही होंगी.. !”
पिया ने अटकल लगायी और निरमा ने एक तरफ को खेलते हुए बच्चो की तरफ इशारा कर दिया… शौर्य भी वहाँ खेल रहा था…
उन्हीं बच्चो के पास खड़ा अपूर्व सिंग उन बच्चो का ध्यान भी रख रहा था..
समर धीरे से शोवन को भी उन बच्चो तक लें गया… वो एक एक कर हर एक बच्चे से उसका परिचय करवाने लगा… हर्ष, यश, मीठी, परी, शौर्य सभी से पारी पारी से हाथ मिलाता शोवन शरमा कर अब भी समर के पास दुबका खड़ा था….
समर ने उसे पकड़ कर अपने से दूर किया और हाथ पकड़ कर उसे बच्चो के बीच कर दिया… थोड़ी देर तक समर वहीँ खड़ा उसे देखता रहा…
हर्ष ने सबसे पहले शोवन ने बातचीत करनी शुरू की और फिर एक एक करके सारे बच्चे उसके साथ घुलमिल कर खेलने लगे…
इतने दिनों में शोवन को पहली बार अपने हमउम्र दोस्त मिले थे जो सारे उसी की ज़बान में उससे बात कर रहें थे… वर्ना घर पर सिर्फ पिया और समर ही उससे अंग्रेजी में बोलते थे बाकी लोग हिंदी में या फिर इशारों में ही उसकी ज़रूरत पूछ कर पूरा कर दिया करते थे….
उन बच्चो के साथ खेलते हुए उसे अपने नीदरलैंड्स के दोस्तों की भी याद आने लगी…..और वो थोड़ी देर खेलने के बाद एक तरफ चुपचाप खड़ा हो गया…
राजा साहब अपने ऑफ़िस का काम धाम देख कर उसी वक्त आये और पिया से मिलने के बाद समर और बाकी लोगों की तरफ बढ़ गए…
कुछ थोड़ी देर बाद ही अपनी असिस्टेंट सपना के साथ बाँसुरी चली आयी…
हमेशा की तरह सबसे बड़े उत्साह से मिलने वाली बाँसुरी आज बस हलकी मुस्कान देकर सबकी तरफ हाथ जोड़ कर एक कुर्सी पर बैठ गयी…
पिया ने देखा, बाँसुरी जरा कमज़ोर लग रही थी…. खैर हादसा भी इतना बड़ा हुआ था, उसमे जान बच गयी यहीं बहुत बड़ी बात थी…
बाँसुरी ने पिया की तरफ देखा.. -“क्या हुआ पिया.. ? कुछ सोच रही हो.. ?”
ना में गर्दन हिला कर पिया ने बाँसुरी की तरफ देखा..
“अब कैसी तबियत है आपकी रानी साहेब ?”
“मै ठीक हूँ… लेकिन तुम कुछ ठीक नहीं लग रही.. ?”
“नहीं ऐसा तो कुछ नहीं है… मै भी ठीक ही हूँ.. !”
बाँसुरी मुस्कुरा कर सामने खेलते बच्चो को देखने लगी…
उसी समय रूपा ने दूर चहलकदमी करते मर्दों को भी उस तरफ बुला लिया…
रूपा के कहने पर नौकरों ने स्टार्टर्स की प्लेट ला कर सबके सामने पेश करनी शुरू कर दी थी… वहीँ एक तरफ लगे तंदूर पर प्रेम कुछ टिक्के पलट रहा था…
प्रेम ने तंदूर से पाइनएपल के तीन चार सिंके टुकड़े प्लेट पर लिए और निरमा तक चला आया…
निरमा की प्लेट में परोसने के बाद वो जाने लगा कि रेखा ने उसे टोक दिया…
“ये बढ़िया है…! प्रेम भाई साहब को बस अपनी ही बीवी की प्लेट नज़र आती है… चुपचाप लाकर उनकी पसंद की चीज़े उनकी प्लेट में पलट गए.. !”
“ये तो अच्छी बात है ना कि उन्हें सिर्फ उनकी बीवी नज़र आती है… !”
पिया ने व्यंग से कहा और समर की तरफ देखने लगी… समर ने बिना कुछ कहे नज़र फेर ली..
प्रेम मुस्कुरा कर कुछ और टुकड़े उठा लाया और रेखा के सामने बढ़ा दिये….
“आप इनमे से क्या लेंगी रेखा बाई सा ?”
प्रेम वैसे ही कम बोलता था, इसलिए उसका पूछा छोटा सा सवाल भी लाख रूपये का हो जाता था… रेखा के साथ साथ वहाँ मौजूद सभी ने अपनी प्लेट उसके सामने बढ़ा दी…
और उसने मुस्कुरा कर हर एक की प्लेट में परोस दिया…
रेखा ने मुस्कुरा कर निरमा को छेड़ना जारी रखा…
“वैसे रिश्ता कैसे निभाया जाता है ये प्रेम भाई सा और निरमा से सीखना चाहिए…. शादी के इतने सालों बाद भी इन दोनों की तोता मैना की जोड़ी वैसी ही बनी हुई है… मजाल है जो दोनों में से कोई भी एक प्यार करने या जताने में पीछे रह जाये…
हमारी हिटलर मैडम अपना हुकुम चलाती रहती हैं और प्रेम भाई साहब इनका हुकुम बजाते रहते हैं !
वैसे रिश्ता निभाना तो राजा साहब से भी सीखा जा सकता है… निराली ही जोड़ी है हमारे राजा और रानी की…
प्यार में विश्वास कितना ज़रूरी है ये समझाती है इनकी जोड़ी… !
शादी के साथ ही रिश्ते में कितनी मजबूती आ जाती है ये बताती है इनकी जोड़ी.. !
” कहीं कहीं और कभी कभी शादी के बिना भी रिश्ते मजबूत बन जाते हैं.. !”
पिया ने समर की तरफ देख कर कहा और वापस अपनी प्लेट देखने लगी…
बच्चे साथ साथ खेल रहें थे… उसी वक्त एक दूसरे के पीछे भागते दौड़ते शौर्य लड़खड़ा कर गिरने को हुआ कि राजा अपनी जगह से झटके से खड़ा हो गया…
लेकिन गिरने से पहले ही शौर्य ने खुद को संभाल लिया…
और वो वापस आगे की तरफ दौड़ पड़ा… उसे इस कदर खुद को संभालते देख राजा के होंठो पर मुस्कान चली आई…
समर राजा के ही पास खड़ा था, उसने राजा को मुस्कुराते देखा तो देखता ही रह गया…
“क्या देख रहें हो समर.. ?”
“कुछ नहीं हुकुम ! छोटे कुंवर सा को देख कर आपके चेहरे पर जो नूर आ जाता है, उसका कोई मुकाबला नहीं !”
राजा मुस्कुरा उठा…
“अपने बेटे को रोज़ अपनी आँखों के सामने बढ़ते देखने का जो मजा है वो और कहीं नहीं… मै तो अभी से इस इंतज़ार में हूँ कि मेरा लाड़ला जवान कब होगा… उसे जवान होते देखना खुद कि जवानी जीने से भी कहीं बेहतर होगा.. !”
“छोटे कुंवर बड़े ज़रूर हो जायेंगे पर आप तब भी बूढ़े नहीं होंगे.. !”
राजा समर की बात सुन हॅंस पड़ा… -” वो तो ठीक है, लेकिन अब तुम और पिया भी परिवार बढ़ाने के बारे में सोचना शुरू करो.. ! अपनी औलाद अपनी ही होती है.. और ये जो इनकी भागने दौड़ने की उम्र है ना, इसी उम्र में हम भी इनके पीछे भाग सकतें हैं.. वर्ना बाद में बड़ी मुश्किल हो जाएगी.. !”
राजा और समर बात करते हुए पिया के पास से होकर गुज़र रहें थे कि पिया ने राजा की बात का जवाब दे दिया..
” अपने परिवार के बारे में तो तब सोच पाएंगे ना राजा साहब जब इस बच्चे की जिम्मेदारी से थोड़ा मुक्त हो पाएंगे..?”
” ऐसा क्यों बोल रही हो पिया.. ? बच्चे कभी जिम्मेदारी नहीं होते ! एक बार उसे जिम्मेदारी की नज़र से नहीं बल्कि प्यार भरी नज़र से देख कर आगे बढ़ो फिर देखना ये मीठी सी ज़िम्मेदारी और किसी काम में मन नहीं लगने देगी.. !”
पिया और समर ने एक दूसरे की तरफ देखा और दोनों ने ही झेंप कर दूसरी तरफ नजर फेर ली…
सब अपने खाने पीने में लगे थे…. बच्चो की माँए उन्हें खिला रहीं थी… हर्षवर्धन अब बड़ा हो चुका था.. उसके गले से नैपकिन लटका कर रूपा ने उसके सामने प्लेट और कटलरी रख दी थी और इसलिए हर्षवर्धन अपने ही हाथों से खाना खा रहा था ! बच्चों के लिए जिस गोल टेबल को तैयार किया गया था, उसमें सारे बच्चे एक साथ बैठे खाना खा रहे थे..
हर्षवर्धन की प्लेट उसके सामने रखकर रूपा शौर्य को अपने हाथों से खिला रही थी…
जब से बांसुरी की तबीयत बिगड़ी थी तब से शौर्य की जिम्मेदारी एक तरह से रूपा पर ही आ गई थी…
दिन भर बाकी बच्चों के साथ खेलता कूदता शौर्य अक्सर खाना भी हर्ष के साथ ही खाया करता था… इसीलिए रूपा ही उसे अपने हाथ से खिला दिया करती थी ! रात में सिर्फ सोने के वक्त ही वह अपनी मां के पास जाया करता था…!
निरमा मीठी को अपने हाथों से खिलाना तो चाहती थी लेकिन मीठी अपने आप को सुपर स्मार्ट दिखाने के लिए खुद ही गिराते पडाते अपने हाथों से खा रही थी..
यश को रेखा अपने हाथों से ही खिला रही थी और वो नखरे पर नखरे दिखा रहा था…
सबसे नाजुक और प्यारी सी परी को भी जया अपने हाथों से खिला रही थी..
इन्हीं सब के साथ बैठा शोवन भी अपने हाथों से खाने की कोशिश में लगा था..
आजू बाजू सब को देखते हुए वह भी समझ गया था कि प्लेट में रखी पूरी और कचौड़ी को उसे खाना है… अपने हाथ में कांटा छुरी लिए हुए वह पूरी को काटने की कोशिश में लगा था, लेकिन उसके हाथ से ना तो पूरी कट रही थी और ना ही कचौड़ी… !
बच्चों के लिए बच्चों के हिसाब का भी खाना वहां तैयार था लेकिन यह प्लेट सारे बच्चे अपने लिए खुद अपनी पसंद से सर्व करके लाए थे और शोवन ने हर्षवर्धन की देखा देखी अपनी प्लेट में वही चीजें रख ली थी जो हर्षवर्धन ने अपने खाने के लिए रखी थी और बस इसीलिए शोवन से खाया नहीं जा रहा था….
बहुत देर से दूर खड़ी पिया उसे देख रही थी और आखिर उससे नहीं रहा गया…
वो एक दूसरी प्लेट में वाइट पास्ता और स्टर फ्राई वेजिटेबल डालकर उसके पास चली आई…
उसके सामने से पूड़ियों वाली प्लेट हटाकर उसने पास्ता वाली प्लेट रख दी…
” तुम यह खाओ… वह नहीं खा पाओगे तुम..!”
शोवन ने धीरे से पिया को देखा और चुपचाप नीचे सर कर पिया की लायी प्लेट से धीरे-धीरे खाने लगा..
तभी रूपा ने पिया को टोक दिया…
” अरे पिया उसे हमारा हिंदुस्तानी खाना भी तो चखने दो, वरना उसे पता कैसे चलेगा कि हम क्या खाते हैं? अब देखो आखिर रहना तो उसे हिंदुस्तान में तुम लोगों के साथ ही है तो, क्यों ना उसे धीरे-धीरे यहां के खानपान और यहां की बोली की भी आदत पड़ जाए! अगर तुम उसे उसी के देश का खाना खिलाती रही तो वह हमारी संस्कृति और सभ्यता कैसे सीखेगा भला..? मेरी मानो तो उसे ब्रेड सैंडविच पास्ता की जगह धीरे-धीरे हमारा शुद्ध भारतीय खाना खिलाना शुरू कर दो और तुम और समर उससे सिर्फ इंग्लिश में बात करने की जगह उसे धीरे-धीरे हिंदी भी सिखाना शुरू करो..!”
पिया दिल से रूपा को बहुत सम्मान देती थी और रूपा की बात काटने की उसकी हिम्मत और मंशा दोनों ही नहीं थी ! उसने मुस्कुराकर हामी भर दी…
और धीरे से कचोरी का टुकड़ा अपने हाथ से तोड़कर उसने शोवन के मुंह के आगे रख दिया ! शोवन ने भरी-भरी पलकों से पिया को देखा और पिया ने धीरे से चेहरे पर कोमलता लाते हुए उसे खा लेने का इशारा किया! शोवन ने अपना मुंह खोलकर वह कौर ग्रहण कर लिया…
हालांकि वह छोटा सा टुकड़ा खाते ही शोवन को जोर से मिर्च का एहसास हुआ और वह तेजी से अपने मुंह के सामने हवा करते हुए पानी ढूंढने लगा…
” ये बहुत तीखा है.. !”
बहुत मुश्किल से शोवन के मुंह से यह बात निकल पाई और उसकी पानी के लिए बेचैनी देखकर पिया ने तुरंत टेबल के बीचो-बीच रखी पानी की छोटी सी बोतल को खोला और उसके मुंह से लगा दिया…
पानी की दो घूंट पीते ही शोवन को थोड़ा सा आराम लगा लेकिन उसकी आंखों से बहते आंसू देख कर पिया ने उसे खींच कर अपने सीने से लगा लिया….
उसके सिर और पीठ पर हाथ फेरते हुए पिया उसे समझाने लगी और उसी वक्त रूपा उसके लिए मिठाई का टुकड़ा लिए उस तक चली आई…
रेखा एक गिलास में जूस थामे आई तो निरमा कुछ और मीठा लेकर चली आई और इन सब के साथ ही बांसुरी अपने हाथ में ढेर सारी चॉकलेट्स लेकर उस बच्चे तक चली आई ! उन सब का प्यार देखकर पिया की भी आंखें छलक आई…
शोवन ने इतनी सारी चीजें अपने सामने देखकर पिया की तरफ देखा और इशारे से ही उससे पूछ लिया कि इनमें से क्या लूं..? पिया ने धीरे से तुम्हें जो लेने का मन है तो उठा लो कह दिया और शोवन ने बांसुरी की लायी चॉकलेट की तरफ हाथ बढ़ा दिया…
अपने मुंह में चॉकलेट का टुकड़ा डालते ही शोवन को राहत महसूस होने लगी लेकिन इसके साथ ही सारे बच्चे चॉकलेट लेने के लिए बांसुरी को घेर कर खड़े हो गए और बांसुरी ने सभी बच्चों को ढेर सारी चॉकलेट बांट दी…
सारे बच्चो के चॉकलेट लेने के बाद भी शौर्य ने अपनी जेब में ठूंसने के बाद अपने हाथ फिर बाँसुरी के सामने खोल दिये और मुस्कुरा कर बाँसुरी ने उसके हाथ में वापस चॉकलेट्स रख दी…
झुक कर उसके गालों को चूम कर बाँसुरी ने एक चॉकलेट अपने हाथ से खोल कर उसके मुहँ में डाल दी….
“ये तो गज़ब ही हो गया ! आज मम्मा अपने हाथों से चॉकलेट खिला रहीं है हमारे लड्डू को, वर्ना तो मम्मा से चॉकलेट खाने पर हमेशा डांट ही पड़ती थी शौर्य को.. !”
रेखा के ऐसा कहते ही रूपा के साथ साथ निरमा भी चौंक कर बाँसुरी को देखने लगी….
पिया ने देखा.. बाँसुरी मुस्कुरा कर वापस अपनी जगह पर जाकर बैठ गयी….
क्रमशः
aparna…..
