अपराजिता -85
रेशम और अथर्व एक दूसरे में खोए हुए थे! दोनों की सांसे एक दूसरे में उलझने लगी थी। प्यार का मीठा मीठा सा संगीत कमरे में गूंज रहा था। एक दूसरे की खुशबू में दोनों मदहोश हो रहे थे, हालांकि इस सब के साथ ही रेशम की सांसे तेज और धड़कनें बढ़ने लगी थी।
जैसे-जैसे अथर्व आगे बढ़ रहा था रेशम अपने अतीत में पीछे सरकने लगी थी।
अपने आप को लाख रोकने के बावजूद उसके माथे पर पसीने की बूंदे छलकने लगी थी। वह दोनों अभी और आगे बढ़ते कि तभी दरवाजे पर किसी ने दस्तक दी और एक झटके मे रेशम अपनी जगह से खड़ी हो गई..।
अपने कपड़े सही कर रेशम फुर्ती से दरवाजे की तरफ बढ़ गई। और अथर्व अपने बालों पर हाथों से कंघी फिराता खिड़की पर जाकर खड़ा हो गया।
खिड़की पर खड़ा अथर्व बाहर रास्ते की तरफ देखने लगा। उसे अचानक ही आभास हुआ कि कमरे की खिड़की रास्ते के समतल ही थी। यानी कि अगर दूर अंधेरे में खड़ा कोई इंसान कमरे के अंदर झांकना चाहे तो बड़े आराम से देख सकता है।
हालांकि इस वक्त अथर्व को वहां दूर-दूर तक कोई नजर नहीं आया। बावजूद उसने हाथ बढ़ाकर कमरे की खिड़कियां बंद कर ली।
रेशम ने दरवाजे के अंदर से झांक कर पूछा
“आप कौन?”
और बाहर से एक औरत की आवाज सुनाई दे दी
” मैडम मैं ग्रेसी बोल रही हूं। आपकी डिस्पेंसरी में एएनएम की पोस्ट के लिए आई हूं।”
रेशम ने तुरंत दरवाजा खोल दिया। सामने लगभग 50- 55 की उम्र की एक महिला खड़ी थी। उसने बड़ी शिष्टता से रेशम को देखकर अपने दोनों हाथ जोड़ दिये।
रेशम ने उसे अंदर बुला लिया। वो अंदर जाकर सोफे में एक तरफ बैठ गई ।
अपने कंधे पर टांग रखे बड़े से बैग से उसने कुछ पेपर्स निकाले और रेशम की तरफ बढ़ा दिये।
” मैडम मैं ग्रेसी सैमुअल, मुझे आपके यहां ज्वाइन करने का आदेश मिला है। मैं वैसे भी दो दिन लेट हो गई थी। क्योंकि मेरी बेटी की शादी थी। मैं इसीलिए इतनी रात मे भी आपसे मिलने आ गयी.. आपको डिस्टर्ब तो नहीं किया ना मैंने ? मैं कल सुबह से आकर अपना पदभार संभालना चाहती हूं!”
ग्रेसी को देखकर रेशम मुस्कुरा उठी! उसके स्टाफ में अब तक वह अकेली ही थी, और उसके साथ एक कंपाउंडर बिट्टू था। इसी कारण उसे गांव की महिलाओं की डिलीवरी वगैरह करवाने में अकेले दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। बावजूद वह अपनी तरफ से कोई कमी नहीं रखना चाहती थी। इसलिए उसने जिला चिकित्सालय में आवेदन दिया था कि उसे एक स्टाफ नर्स की जरूरत है। उसके आवेदन पर विचार करने के बाद जिला चिकित्सालय की तरफ से ग्रेसी सैमुअल को रेशम की डिस्पेंसरी में पदस्थापना दी गई थी। ग्रेसी का ट्रांसफर हुआ था। रेशम ने ग्रेसी की तरफ देखा और उसके पेपर देखने लगी।
” इसके पहले आप जिला चिकित्सालय में काम कर रही थी ?”
“जी मैडम! मैं जिला चिकित्सालय में थी।”
” तब तो आपने बहुत ज्यादा काम किया होगा? आपका तो अच्छा खासा अनुभव होगा?”
” जी मैडम, वहां पर भी लेबर ओटी में ही काम करते थे, इसके अलावा मेडिसिन वार्ड में भी काम किया है। इसलिए सभी जगह का अच्छा अनुभव है।”
” यहां गांव में काम करने में आपको दिक्कत तो नहीं आएगी?”
” मेरे आगे पीछे कोई नहीं है। एक बेटी थी उसकी भी शादी कर दी। शादी भी बहुत हड़बड़ी में हुई, क्योंकि उसके होने वाले हस्बैंड कैनेडा रहते हैं। आज सुबह ही वह निकल गई है कैनेडा के लिए।
मैं दो दिन इसीलिए लेट हो गई। क्योंकि उसकी तैयारी में लगी थी। और अब मैं शहर में रहूं या गांव में, कोई फर्क नहीं पड़ता।”
” ओके मतलब आपकी सिर्फ एक ही बेटी है, और हस्बैंड ?”
“जी वह नहीं है।”
” सो सॉरी!”
माफी मांगने के अंदाज में रेशम ने कहा
“अरे मैंने आपको अब तक चाय कॉफी पूछा ही नहीं। आप क्या लेंगी ग्रेसी।”
“मैडम में फिलहाल कुछ नहीं लूंगी। बस यह पेपर्स आपको दिखाने थे, और मैं कल कितने बजे आ जाऊं, यह बता दीजिए।”
” आप सुबह आठ तक आ जाइएगा।”
” जी मैं आ जाऊंगी।”
ग्रेसी अपने पेपर्स समेट कर खड़ी हो गई। रेशम ने भी मुस्कुरा तक कर उसे दरवाजे तक छोड़ दिया।
ग्रेसी एक बार फिर उसे नमस्ते करके वहां से निकल गई। वह जाने लगी कि तभी रेशम ने उसे आवाज दे दी
“ग्रेसी सिस्टर सुनिए ।”
ग्रेसी जाते-जाते थम कर खड़ी हो गई।
उसने मुड़कर रेशम की तरफ देखा,
” आप यहां रहेंगी कहां? मतलब क्या आपने अपने लिए देख लिया?”
” नहीं मैडम अभी तो नहीं देखा। लेकिन यहां आने के बाद फार्मासिस्ट से बात हुई थी। और उससे मैंने अपने लिए रूम देखने को कहा था। उसने मुझे अस्पताल के पास कहीं बुलवाया है। बस वही जा रही हूं। आसपास जो रूम मिलेगा ले लूंगी। मुझे तो बस एक कमरा चाहिए और एक रसोई। उतने में ही मेरा हो जाएगा।”
” ओके अगर आपको आज रात तक में रूम नहीं मिलता तो आप मेरे घर चले आइएगा। मेरे घर में दो कमरे हैं। आराम से आप यहां रख सकती हैं ।”
” थैंक यू सो मच मैम..।”
मुस्कुरा कर ग्रेसी चली गई। रेशम भी दरवाजा लगाकर अंदर जाने को थी कि उसकी पड़ोस में रहने वाली गीता भाभी ने उसे आवाज लगा दी।
” अरे रेशम रुको, आज मैंने कुछ खास बनाया था आपके लिए भेजने वाली थी, लेकिन आपकी काम करने वाली गुड्डी नजर नहीं आई ।”
रेशम मुस्कुरा कर वही थम कर खड़ी हो गई।
” जी वह काम करके निकल गई है।”
” अच्छा अभी आपका खाना तो हुआ नहीं होगा ना। रुके 2 मिनट बस, मैं अभी आई।”
पड़ोस में रहने वाली भाभी जी अंदर चली गई और हाथ में एक डोंगा लिए बाहर चली आई।
” यह हमारे गांव तरफ की खास चीज है, आप शहर से हैं आपको बड़ी पसंद आएगी।”
और उन्होंने उस डोंगे को रेशम की तरफ बढ़ा दिया। रेशम ने भी बड़े प्यार से उसे डोंगे को पकड़ लिया। पड़ोस में रहने वाली भाभी अक्सर रेशम के पास अपनी तकलीफों के लिए दवा लेने आया करती थी। और रेशम भी उन्हें मुफ्त में ही उनकी जरूरत भर की दवाइयां दे दिया करती थी।
इसलिए वह भाभी एहसान पूरा करते हुए कुछ ना कुछ पकड़ा जाती थी.. आज उन्होने बेसन की सब्जी पकड़ाई थी..
रेशम को उन्होने इधर उधर की बातों में लगा लिया.. उन्हें जैसे तैसे निपटाकर रेशम अंदर गई और अपने कमरे में झांकने की जगह सीधा रसोई में चली गई ।
उसे लगा खाना भी साथ-साथ गर्म कर लेना चाहिए। उसने वक्त देखा घड़ी का कांटा नौ बजा रहा था। अथर्व के खाने का भी वक्त हो चला था। उसने सब्जी गर्म करने रखी और कमरे में चली गई।
लेकिन उसके आते तक में अथर्व पलंग पर लेटे-लेटे गहरी नींद में खो चुका था। अथर्व का मासूमियत से भरा चेहरा देखकर रेशम मुस्कुरा उठी। उसे लगा ही की सुबह से थका हारा अथर्व अपनी थकान से ज्यादा लड़ाई नहीं कर पाया और इसीलिए बिना रेशम का इंतजार किये ही सो गया।
जाहिर है सुबह उठकर वह अस्पताल गया होगा, और वहां से लौटने के बाद रेशम को लेने लगभग डेढ़ 2 घंटे का सफर तय करके गांव चला आया था। ऐसे में उसका थकना और थककर सो जाना लाजिमी था।
रेशम ने दोहड़ निकालकर अथर्व को ओढा दिया। नरम मुलायम सी गर्माहट मिलते ही अथर्व और भी सुकून से सो गया। रेशम ने जाकर रसोई में फैला पड़ा सामान समेट खाने को फ्रिज में रखा और उस के बाद वह भी दरवाजे पर ताला डालकर सोने चली आई ।
अगले दिन उसे भी सुबह जल्दी अस्पताल के लिए निकलना था…
****
अखंड घर पहुंचा उस के कुछ देर पहले ही यज्ञ और कुसुम भी घर पहुंचे थे..
नीचे औरतों के विभाग की तरफ झांके बिना ही कुसुम कुमारी ऊपर अपने कमरे में चली गई थी। वह जानबूझकर घर में मौजूद औरतों को और यज्ञ को चिढ़ाने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहती थी।
वह चाहती थी कि घर की औरतें खास कर उसकी सास उसके कारनामों से चिढ़ जाए और उसे जलीकटी सुनाएं, जिससे उसे यज्ञ से लड़ने का मौका मिल जाए।
लेकिन उसकी बदकिस्मती थी कि उसकी सास उसे लड़ने का कोई मौका नहीं दे रही थी। अभी भी घर पर बिना किसी के पैर छुए वह सीधा ऊपर चली गई। लेकिन उसकी सास ने इस बात पर कोई ध्यान नहीं दिया।
यज्ञ को जरूर यह बात जरा सी चुभ गई, लेकिन फिलहाल कुसुम का जो हाल-चाल था उसके कारण यज्ञ ने भी इस बात पर उसे नहीं टोका, वह नीचे अपनी दादी के पास जाकर बैठ गया…।
घर पर गर्मागर्म खाना बना था, यज्ञ ससुराल से ज्यादा कुछ खाये पिए बिना ही निकला था और अब उसे ज़ोर से भूख लग रही थी..
“क्या बनवायी हो अम्मा खाने में ?”
“आज तुम्हारी पसंद का खाना बना है.. आ जाओ फटाफट कपडे बदल कर.. !”
“नहीं अम्मा पहले खाना ही खाएंगे.. गज़ब की भूख लग रही.. !”
“काहे ससुराल वालों ने ना खिलाया कुछ अपने जंवाई सा को ?”
यज्ञ की चाची ने उसे टोक दिया…
यज्ञ को ये बात बुरी लगी… वो सब खुले आंगन बैठे थे, और वहीँ ऊपर छत पर अपना टॉवेल डालने आयी कुसुम के कानो में भी ये बात पड़ गयी..
उसे पलट कर जवाब देने का मौका मिल गया.. ।
बड़ी मुश्किलों से उसके हाथ ये मौका लगा था..।
मन ही मन बमगोले सा जवाब तैयार करती कुसुम सीढ़ियां उतर कर नीचे जाने लगी..
जितना जहरीला सोच सकती थी, उतना ज़हरीला सोच कर इसने जवाब तैयार कर लिया। लेकिन उसकी उम्मीदों पर घड़ों पानी फेरता यज्ञ उसी समय अपने जवाब से चाची का मुहं बंद करवा गया..
“ससुराल का तो ऐसा है चाची कि उन लोगो ने ऐसी कोई चीज़ नहीं छोड़ी परोसने से जो हमारी पसंद की ना हो.. हमारा कहने का मतलब हमारी पसंद की वस्तुओ से खाने की मेज़ को पाट दिया था, लेकिन वो ससुराल है हमारा… हम खाना ना भी चाहे तब भी हमारी सासु माँ के स्नेह के आगे ज्यादा कुछ बोले बिना खाना ही था…। लेकिन सच कहे तो उसके कुछ देर पहले ही हम अपनी मीटिंग से निकल कर आये थे.. मीटिंग में भी तगड़ा खाने पीने का प्रोग्राम था, बस उतना सब देख कर ही खाने का मन नहीं हुआ था और उसी मन को साथ लिए ससुराल पहुंचे थे। फिर भी सासु माँ का मन रखने हमने मीठा खा ही लिया था…
लेकिन उस वक्त जाने क्यों ज्यादा कुछ खाया नहीं गया और हमारी सासु माँ को ये बात इतना खली की उन्होने इक्कीस किलो मिठाई आप लोगो के लिए भिजवाई है.. किसी को भेज कर गाड़ी से उतरवा लीजियेगा..
और सही कहे तो हमें अपनी अम्मा के हाथ की बनी रोटी ही खाने का मन था..।”
यज्ञ की माँ ने प्यार से अपने लड़के के माथे पर फैले बालो को सहलाया और खुद चूल्हे पर चली आयी..।
वहाँ रोती सेंकती महराजिन के हाथ से इन्होंने चिमटा बेलन लिए और खुद एक एक रोटी सेंक कर अपने बेटे को खिलाने लगी..
यज्ञ का जवाब सुन मुहं बना कर चाची बाकियों का खाना परोसने लगी.. उसी समय अखंड चला आया..
“अखंड आओ तुम्हारा भी खाना परोस दे !”
“नहीं अम्मा.. हमें भूख नहीं है !”
और अखंड धीर गंभीर कदमो से ऊपर चला गया.. इन्हीं सब बातों के बीच वहां पहुंची कुसुम को जवाब देने का कोई मौका ही नहीं मिला।
यज्ञ ने चाची के साथ-साथ उसका भी मुंह बंद करवा दिया था। वह ठगी से खड़ी रह गई।
कैसा था ये आदमी, कभी तो कोई ऐसी बात कर दे कि वह पलट कर उसका मुंह तोड़ जवाब दे सके।
कुसुम को खड़े देख उसकी सास ने उसे भी खाना खाने बुला लिया, और वह भी आकर कुर्सी खींच कर बैठ गई। उसे लगा शायद उसका ऐसा करना ही उसकी सास को चुभ जाए।
लेकिन उसकी सास भी कोई कम नमूना नहीं थी। आज तक तो उसने अपने घर पर अपनी मां के सास रूप को ही देखा था, जो उसकी भाभी को सबके खाने के बाद ही खाने की इजाजत देती थी। उसने कभी अपने घर में नहीं देखा था कि उसकी मां सुजाता भाभी को परोसकर थाली दे रही।
लेकिन इन ठाकुरों के घर की तो हर बात ही निराली थी। वह इस वक्त घर की सबसे छोटी बहू थी। बावजूद यह औरतें सबसे पहले परोस कर उसे ही थाली पकड़ा देती थी। अभी भी वही हुआ कुसुम के बैठने तक में यज्ञ ने फटाफट अपना खाना खत्म कर लिया था।
वो उठकर जाने को था कि उसकी मां ने एक गरम रोटी और परोस दी। लेकिन यज्ञ से अब नहीं खाया जाने वाला था ।
उसने थाली को प्रणाम करके एक तरफ सरकाया और उठकर हाथ धोने चला गया..
“ये रोटी तो ज्यादा हो गयी अम्मा.. हम नहीं खा पाएंगे.. !”
“कोई बात नहीं तुम्हारी बहु खा लेगी.. क्यों कुसुम.. अपने पति की थाली में खा तो लोगी ना ?”
अपनी सास के सवाल पर कुसुम ने यज्ञ की छोड़ी थाली पर नजर डाली, बन्दे ने बहुत सफाई से खाना खाया था.. अगर सामने वाले को बताया ना जाये कि इस थाली में खाना खाया गया है तो सिर्फ देख कर पता लगाना मश्किल था…
कटोरी में थोड़ी सब्जी भी बाकी थी, दूसरी कटोरी में सालन था…. वो थाली अपनी तरफ खींचने ही वाली थी की यज्ञ ने आकर थाली उठायी और वहीँ खड़े घर के नौकर कल्लू की तरफ बढ़ा दी..
“जा भाई कल्लू.. बाहर रोटी डाल आ.. कोई भी हमारा जूठा क्यों खाये भला, वो भी बेमन से.. !”
यज्ञ ने एक नजर कुसुम पर डाली और कुछ गुनगुनाता हुआ ऊपर चला गया…
कहीं करती होगी, वो मेरा, इंतज़ार
जिसकी तमन्ना में, फिरता हूँ बेक़रार
दूर ज़ुल्फ़ों कि छाओं से,
कहता हूँ मैं हवाओं से
उसी बुत कि अदाओं के, अफ़साने हज़ार
वो जो बाहों में मचल जाती,
हसरत ही निकल जाती,
मेरी दुनिया बदल जाती, मिल जाता क़रार
कहीं करती होगी …
कुसुम उसी की तरफ देख रही थी.. यज्ञ की आंखे यूँ लगा कुसुम का माखौल सा उड़ा रही थी…
कहाँ तो कुसुम ये सोच कर मायके गयी थी कि मन भर कर डाक साब से बात करेगी और कहाँ एक बार भी डाक साब से बात नहीं हुई.. उल्टा रह रह कर इस छछूंदर से ज़रूर मेसेज में टकराहट हो जाती थी…
डाक सब का ख्याल आते ही कुसुम कुमारी अनमनी सी हो गयी.. पता नहीं इस वक्त वो दोनों क्या कर रहे होंगे ? क्या भावना खाना बना कर डाक सब को खिलाती होगी ? हां खिलाती ही होगी। उसके हाथ में भी तो अपनी अम्मा जैसा ही स्वाद भरा हुआ था। जैसा खाना चाची बनाया करती थी, बिल्कुल वैसा ही खाना भावना भी बना लेती थी… वैसे देखा जाये तो सर्वगुण सम्पन्न थी भावना..
वो लोग क्या बातें करते होंगे ? क्या डाक सब को भावना का साथ भाने लगा होगा ? यही सब सोचती कुसुम खाने की टेबल से अचानक खड़ी हो गयी..
“क्या हुआ बहु, तुम्हारी थाली अभी परस कर ला रहे.. बैठो ना !”
“नहीं अम्मा जी.. हम भी आप लोगो के साथ ही खाएंगे.. !”
पता नहीं किस दैवीय चमत्कार से कुसुम कुमारी के मुहं से ये बोल फूट पड़े और वो अनजाने ही रसोई में बाकी औरतो की मदद करने चली गयी.. उसकी सास हल्का सा मुस्कुरा कर दादी की थाली परसने चली गयी…
क्रमशः
aparna

मुझे तो कुसुम की तकदीर देख कर बहोत हसी आती है , कहा आम साधारण जिंदगी में घंटे भर में 100 कारण मिलजाते होंगे ससुराल में लड़ने के लिए और कहा ये लड़ाकू विमान को कोई बहाना ही नहीं मिल रहा अपनी ससुराल में 🤣🤣🤣🤣😜 अभी तो यज्ञ बाबू का रूठ न जाना तुमसे कहू तो…. वोही गाना दिमाग में खलबली मचाए बैठा था , और एक नया आ गया, कही करती होगी 🥰🥰🥰😍
अखंड बाबू की भूख तो क्या प्यास भी मिट चुकी है रेशम , अथर्व को देख कर 😔😏
ये ग्रेसी कोई नई एंट्री है भाई , स्वागत है उनका भी , कहा दीपक छछुंदर का सोचा था और कहा ग्रेसी निकली 🤭🤭
बाकी dr sahiba क्या सोची हो आप इसको निपटाएंगे कैसे , धीरू और ये दीपक दोनो ही मेरे निशाने में है अभी तो, और अखंड बाबू के लिए भी कोई ला दोना, यज्ञ और कुसुम मिल कर टाका भिडवा भी देंगे , उसी बहने दोनो थोड़ा आम miya biwi की तरह बात तो करने लगेंगे । 🙈🤭🤭 बोहोत सोचती हूं नई , पर कभी घमंड नहीं करती 🤣🤣🤣👌👌👌👌 बेहतरीन , आगे के इंतज़ार में……