Gone girl-8

Gone girl

Gone girl

8-     मेरी ज़बान के मौसम बदलते रहते हैं 
         मैं आदमी हूँ मेरा ए’तिबार मत करना ….

      सलोनी के पास भी और कोई चारा ना होने से वो चुपचाप शेखर के साथ उसके घर चली जाती है……

शेखर का फ्लैट दूसरे माले पे होता है, वो दोनो ऊपर पहुंचते हैं।

शेखर- आप फ्रेश हो जाइये सलोनी जी , तब तक मैं आपके खाने पीने का इन्तेजाम करता हूं ।।

सलोनी- जी शुक्रिया!  मेरे कारण आप को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है, पहले तो कल रात से ही आपको मैंने परेशान कर रखा था, उसपे अब आपके घर भी आ धमकी, आप भी सोच रहे होंगे की कैसी लड़की है, पर सच कह रही हूँ इंस्पेक्टर साहब, मैंने जो सब आपको बताया सब कुछ सच है।

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     मुझे तो ये समझ नही आ रहा कि समर कैसे बदल गया, और किसी से तो उम्मीद भी नही थी, पर समर ने भी मुझे नही पहचाना,  समर ने मुझे धोखा दिया है सर,!!

शेखर- मैं समझ रहाँ हूँ सलोनी जी!!
   आप जाइये मुहँ हाथ धो लिजिये मैं आपके लिये चाय लेकर आता हूँ ।

सलोनी के फ्रेश होकर आते में शेखर उसके और अपने लिये दो कप में चाय और दो प्लेट में नाश्ता ले आता है।।

शेखर- सलोनी जी मेरा घर बस इतना ही बड़ा है, आप चाहे तो अन्दर के कमरे में आराम कर सकती हैं, आप भी कल रात से सोयी नही हैं, मैं भी रात भर से जाग जाग के थक गया हूं, आप अन्दर चले जाइये , मैं यहाँ सो रहूँगा।।

सलोनी– ठीक है इंस्पेक्टर साहब!
       मैं तो अपनी किस्मत से ही थक गई हूँ।

सलोनी उठ कर अन्दर कमरे में चली जाती है, और कमरे का दरवाजा बन्द कर बैड पर लेट जाती है, ऊपर छत पर टकटकी लगाये देखते हुए उसे अपना बचपन अपनी शादी सारी बातें याद आने लगती है, यही सब सोचते सोचते उसकी नींद पड़ जाती है।।

उसकी नींद खुलती है तब शाम के 5 बज रहे होते हैं, वो दरवाजा खोल कर बाहर आती है तो देखती है की शेखर अब भी सोफे पर सोया पड़ा होता है, वो रसोई में जाकर दो कप चाय बना कर लाती है, बरतनों की आवाज़ से शेखर की भी नींद खुल जाती है,।
  सलोनी अपनी और शेखर की चाय लेकर वहाँ आती है ,और शेखर को चाय देते हुए कहती है__

सलोनी- शेखर जी मै सोच रही थी, कि हमें रायचंद हाऊस एक बार फिर से जाना चाहिये, क्योंकि…..
उसकी बात बीच में ही काट कर शेखर कहने लगता है__

शेखर- आपके मुहँ से अपना नाम सुनना अच्छा लगा।

सलोनी–शुक्रिया,आपने बहुत मदद की है मेरी, पर मैं जानना चाहती हूं कि आखिर क्या बात है जो समर मुझे पहचान नही रहा, मुझे कुछ अच्छा नही लग रहा, ऐसा लग रहा बहुत बडा धोखा हुआ है मेरे साथ।
पहले तो मुझे सिर्फ अनन्या पे शक था, ,पर अब लग रहा समर और अनन्या के बीच कोई खिचड़ी पक रही है , नही बल्कि मुझे लगता है, उनके बीच पहले ही कोई खिचड़ी पक चुकी थी, मैं बिना वजह उनके बीच आ गई ।।

क्योंकि मैं जब यू एस से वापस आयी थी तब मुझे मॉम ने बताया था कि अनन्या और मेरे देवर की शादी पहले से तय थी, पर एक बात समझ नही आ रही कि अगर अनन्या और समर एक दूसरे के साथ हैं तो अनन्या ने अमर से शादी क्यों की और समर ने मुझसे।  वो दोनों तो आपस में भी शादी कर सकते थे।।
   शेखर जी इन सारे सवालों के जवाब एक इन्सान है जिसके पास मिल सकते हैं,और वो है मेरी पर्सनल हेल्पर मधुस्मिता । मैने मेरी हेल्पर के बारे में आपको बताया था ना जया नाम की मेरी एक हेल्पर थी, उसका पूरा नाम था मधुस्मिता जया। उसे हम सभी मधु ही कहते थे बस समर उसे शुरु से जया कहा करते थे।
  मुझे उस दिन उस घर में मधु नही दिखी,इसका मतलब है मेरे वहाँ से जाते ही उन लोगों ने मधु को काम से हटा दिया, वैसे उन लोगों ने तो सारे पुराने नौकरों को हटा दिया यहाँ तक की मफ़िन को भी बदल दिया, खैर!! मुझे मधु  का पुराना पता याद है,हम वहाँ चल सकते हैं ।।

शेखर तैयार होकर सलोनी के साथ क्राईस्ट चर्च के पीछे बनी कॉलोनी में मधु की तलाश में निकल पड़ा, वहाँ छै सात घर छोड़ कर ही मधु का घर तो मिला पर मधु नही मिली।।  वहाँ काम करने वाली महिला से शेखर मधु के बारे में पूछ ताछ करता है,तो वो उसे मधु का फ़ोन नम्बर दे देती है।।

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सलोनी मधु को फ़ोन कर खुद से मिलने के लिये मना लेती है,और उसे मिलने के लिये कॉफ़ी हाऊस में बुला लेती है।।
शेखर और सलोनी एक टेबल पर बैठे उसका इन्तज़ार कर रहे होतें हैं कि एक खूबसुरत स्मार्ट सी लड़की उनकी तरफ आती है, और सलोनी के गले से लग जाती है, उसे देख कर कहीं से नही लगता की ये सलोनी की हेल्पर रही होगी।
   सलोनी और मधु दोनों गले लग के रो पड़ते हैं, सलोनी अपनी सारी आपबीती मधु को सुनाती है, जिसे सुन कर मधु और भी ज्यादा परेशान हो जाती है…..

शेखर- मधु जी अब आपको जो भी बातें रायचंद हाऊस के बारे में पता है, सब हमें बताईये जिससे आपकी मैडम सलोनी जी के साथ इन्साफ हो सके।।

मधु- जी सर मैं सब कुछ सच बताती हूँ, क्योंकि अब मुझे किसी बात का डर नही रहा।।।मैंने जो कुछ भी झूठ कहा था, वो अपनी माँ के कारण कहा था, लेकिन अब वो कारण भी नही रहा।।
  मैं आप लोगो को सब कुछ एकदम शुरु से बताऊँगी जिससे आप सब समझ सकें।।
  सलोनी मैडम से समर सर का विदेश में मिलना कोई इत्तेफाक़ नही था,वो सब उनकी सोची समझी साजिश थी।।
  असल में समर सर जानतें थे कि सलोनी मैडम मशहूर हीरा व्यापारी की इकलौती बेटी और उनकी सारी जायदाद की अकेली मालकिन भी  ।।

सलोनी- ये क्या बक रही हो मधु, ऐसा नही हो सकता, समर ऐसा कभी नही कर सकते, तुम्हें ज़रूर कुछ गलतफहमी हुई है।।

मधु- नही सलोनी मैडम, मुझे कोई गलतफहमी नही हुई है, मैं उस घर में तब से हूँ ,जब आपकी शादी नही हुई थी, बल्कि उनके कहने पे मैनें आपको कई झूठी कहानियां सुनाई है,अभी जब मैं आपको सारी बातें बताऊँगी तो आपके पैरों के नीचे से ज़मीन हिल जायेगी।।ऐसे बड़े बड़े राज छुपे हैं उस घर में ।।

शेखर- सब कुछ बताईये,,मैं जानना चाहता हूँ ।

मधु- सर आपको मैं सारी बातें बताती हूँ ।।सर मैने सलोनी मैडम को बताया था की समर मिसेस रायचंद का सौतेला बेटा है और अमर उनका असली बेटा है,ये बात पूरी तरह से झूठ थी सर!! मुझसे उन लोगों ने सलोनी मैडम को ऐसा बोलने बोला था,जबकि मुझे सच्चाई पता थी।असल में मेरी माँ मिसेस रायचंद की पर्सनल हेल्पर थी।।
     मिसेस रायचंद का नाम तारा था,वो एक साधारण परिवार की बेटी थी,मेरी माँ उनकी उस समय सहेली हुआ करती थी,पर तारा मैडम को अमीरी का बहुत शौक था,वो रईसों वाला जीवन जीना चाहती थी,उनका एक बॉय फ्रेंड था जो उनसे शादी करना चहता था,पर तभी कहीं पर तारा जी की मुलाकात मिस्टर रायचंद से हुई और उन्हें अपनी बातों में उलझा कर अपनी खूबसूरती से रिझा कर तारा मैडम ने उनसे शादी कर ली,,शादी के समय ही वो माँ बनने वाली थी,ये बच्चा उनके बॉय फ्रेंड का था,यही बच्चा था समर!! जो उनकी शादी के 7 महीने बाद पैदा हुआ।।
    साहब को जल्दी ही ये बात समझ आ गई,और दोनो के झगडे भी होने लगे पर तभी पता चला कि वो एक बार फिर माँ बनने वाली हैं ।।अपने बच्चे की खुशी में साहब ने उन्हें माफ कर दिया और प्यार से वापस अपना लिया।।
  साहब जान बूझ कर कभी दोनो बच्चों में भेदभाव नही करते पर तारा मैडम,  साहब के सामने हमेशा अमर को ही प्यार जताती और समर के साथ सौतेला व्यवहार करती।।
   सब अच्छा चल रहा था कि तारा मैडम का पुराना आशिक जाने कहाँ से साहब से दोस्ती कर उनके महल में दाखिल हो गया,। तारा मैडम की शादी के बाद वो डॉक्टरी पढ़ने चला गया था,,डॉक्टर बन कर वो उनकी जिंदगी में वापस आ गया।।
   अब तारा मैडम और वो आदमी एक बार फिर से मिलने जुलने लगे,साहब को ये तो समझ आ गया कि मैडम का कुछ चक्कर चल रहा पर किससे चल रहा ये वो नही समझ पाये।।फिर झगडे शुरु होने लगे,अब तारा मैडम अपने दोस्त की मदद से साहब को कोई गलत दवा देने लगी जिससे धीरे धीरे साहब का स्वास्थ्य खराब रहने लगा, उसी बीच समर और अमर भी बिजनेस संभालने लायक हो गये थे।।पर साहब मैडम की चालाकी समझने लगे इसिलिए उन्होने अपनी वसीयत में लिखा कि अगर उनके बेटों की शादी से पहले उनकी मौत होती है तो पूरी जायदाद ट्रस्ट को चली जायेगी….
बस अमर को कुछ जेब खर्च मिलता रहेगा, अमर की जान बचाने एकदम से उन्होने सब कुछ अमर के नाम नही किया  वर्ना समर शायद उसे भी मार डालता।।

   साहब के एक दोस्त के दूर के रिश्तेदार थे सलोनी मैडम के पापा!! उन्होनें अमर के लिये सलोनी मैडम का रिश्ता बताया और साथ ही ये भी कि सलोनी मैडम बिजनेस में बडी होशियार हैं,इसिलिए साहब को लगा सलोनी मैडम से अमर की शादी होने के बाद आप दोनो के नाम जायदाद लिख कर वो सुकून से मर सकेंगे,पर ये सारी बातें तारा मैडम को पता चल गई, उन्होनें अपने लोगों से आपकी और आपके परिवार की सारी डिटेल्स निकलवा ली और आपके पीछे लग गये।।
   समर का विदेश में आपसे मिलना और आपसे प्यार का इजहार करना सब कुछ उन लोगों का नाटक ही था।
  जब साहब ने आपके घर रिश्ता भेजा तो आपके घर के लोगों को लगा कि रिश्ता बडे बेटे के लिये ही आया है और सब ने हाँ कर दी इस शर्त के साथ कि आपकी हाँ मे ही सबकी हाँ है।
  और बड़ा बेटा समर था।

” सर जब साहब ने अपने दोस्त सलोनी मैडम के पिता जी से अपने बेटे और सलोनी मैडम के रिश्ते की बात कही,तो सलोनी मैडम के पिता जी ने सोचा वो रिश्ता समर के लिये है,उन्होनें सलोनी मैडम के ऊपर सब छोड़ दिया,।।
    इधर सलोनी मैडम के घर पे इनकी बहन अनन्या और उसकी मां ने भी एक खेल खेला सर।।
   अनन्या और समर एक साथ कॉलेज में पढ़े थे, दोनो के बीच कुछ ज्यादा ही गहरी दोस्ती हो गई, दोनों शादी करना चाहते थे,पर जब समर ने देखा कि सलोनी मैडम के हिस्से उनके पापा की भी सारी जायदाद है और कहीं  उनकी अमर से शादी हो गई तो रायचंद साहब की भी सारी जायदाद उनके और अमर साहब के नाम हो जायेगी,तब उन्होने एक चाल चली।।
   अनन्या और समर के बारे मे समर की माँ के अलावा किसी को पता नही था,इस बात का फायदा उठाते हुए अनन्या ने अमर से दोस्ती बढ़ानी शुरु की, और उसे अपने प्यार के जाल में फंसा लिया,उसी समय रायचंद साहब ने आपके घर रिश्ते की बात भेजी, आपके घर सबको यही लगा मैडम की बड़े भाई का रिश्ता आपके लिये और छोटे का रिश्ता अनन्या के लिये आया है।।
    फिर जब आपसे मिलने रायचंद साहब ने अमर को भेजना चाहा तब समर भी साथ हो गया,आपने समर को देखते ही समर से शादी के लिये हां कर दी,।।रायचंद साहब को लगा कि आपको समर ज्यादा पसंद आ गया है,उन्होनें बिना किसी हील हुज्जत के आपकी समर से और अनन्या की अमर से शादी करा दी।।

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   शादी की शुरुआत में आपसे बहुत प्यार जता के समर ने आपका विश्वास जीत लिया, लेकिन अमर को धीरे धीरे अनन्या और समर पे शक होने लगा, उसने एक दो बार आपको ये बताने की कोशिश भी करी, पर आपकी आंखों में मैडम समर के प्यार का चश्मा चढ़ा था, आपको उल्टा ये लगा की अमर गलत आदमी है , उसी समय इन लोगों ने मुझसे भी अमर के बारे मे कई झूठी बातें आपसे बोलने कहीं, असल में मेरी एक बुआ जिनके साथ मैं बचपन से रहती थी, उन्हें सैकेण्ड स्टेज का कैन्सर था, उनकी दवाइयों और इलाज के लिये पैसा देने के बदले इन लोगों ने मुझसे ये सारा गलत काम करवाया।

    हालांकी आज से आठ महीने पहले बुआ नही रही तो अब मेरा भी झूठ बोलने का मकसद नही रहा,पर मैं उन लोगों में से नही हूं जो किसी को ब्लैकमेल करके पैसे कमाए इसिलिए मैनें उनके घर की नौकरी पुराना घर सब कुछ छोड़ दिया।

सलोनी– कोई बात नही मधु, मुझे तुमसे कोई शिकायत नही।।आगे बताओ क्या हुआ??

मधु– जी,  आप को लगने लगा था कि सब अच्छा चल रहा पर तभी आपके ससुर यानी साहब की तबीयत बिगड़ गई, उनकी तबीयत बिगड़ने में भी तारा मैडम का ही हाथ था, उन्होने ऐसी कोई दवा दी थी जिससे साहब को सांस लेने मे तकलीफ होनी शुरु हुई,और होते होते उनकी सांस रुक गई ।।
साहब इस बात को अच्छे से समझ गये थे इसिलिए उन्होनें अपनी वसीयत लिखनी चाही और पर्सि साहब को बुलवा लिया।।पर्सि साहब बहुत भरोसे के आदमी हैं, उन्होने ही ऐसी वसीयत तैय्यार करवाई कि ये लोग कुछ ना कर पाएँ, पर साहब और पर्सि साहब को ये नही पता था कि अनन्या और समर तो एक दूसरे को चाहते हैं ।
    जब सारी जायदाद का सबसे ज्यादा हिस्सा सलोनी मैडम के नाम और उसके बाद का सबसे बड़ा हिस्सा अमर के नाम हुआ तो ये सब लोग नाराज हो गये, हालांकी इन लोगों का शुरु से ही प्लान यही था कि वसीयत के कुछ समय बाद आपको और अमर को रास्ते से हटा दे।
        रायचंद साहब की मौत के बाद समर ने पूरी चालाकी से अपना जाल बिछाना शुरु किया, वो बिना बात आपसे नाराज रहने लगा, आखिर आपने परेशान हो कर अपना नॉमिनी समर को घोषित कर दिया, जबकि वसीयत के अनुसार अगर आप नॉमिनी घोषित नही करती तो आपका नॉमिनी आपका बच्चा या बच्चा ना होने की स्थिति में ट्रस्ट होता।
   खैर समर ने वो करवा लिया जो वो आपसे करवाना चाहता था, इधर अपने आप को प्रेगनेंट बता कर इमोशनली ब्लैकमेल कर के अनन्या ने भी खुद को अमर का नॉमीनी बनवा लिया।।
   पर इन लोगों का खेल यही खतम नही हुआ,इसके बाद इन लोगों ने  सही समय आने का इन्तजार किया और एक दिन अपने प्लान को आखिरी अंजाम तक पहुंचा दिया।।
   उस दिन जब तबीयत का बहाना करके समर निकला , तब सलोनी मैडम भी परेशान होकर पीछे पीछे निकली, घर पे सिक्योरिटी गार्ड और बाकी नौकरों की उन लोगों ने जान बूझ कर छुट्टी कर दी थी, चूंकि मुझे सब पता था इसलिये मुझे वही रहने दिया।।
    जब आप ऊपर पहुंची मैडम तब आपने देखा की समर साहब को अनन्या मैडम और तारा मैडम टॉर्चर कर रहे हैं, आपको अमर वहाँ नही दिखाई दिया, आपने अपने मन से सोच लिया की अमर तो वहां होगा ही।।

सलोनी– हाँ मुझे अच्छे से याद है, अमर मुझे नही दिखा था, मैने खुद ने सोच लिया कि जब अनन्या और सासु जी हैं तो अमर तो होगा ही।।

मधु– हाँ मैडम ये सब सिर्फ आपको डरा के वहाँ से भगाने के लिये ही था, बाहर आपको मारने की प्लानिंग थी ,आप भाग कर जिस कार से लिफ्ट लीं वो समर के भेजे गुंडे ही थे,वो आपको गोली मारते उसके पहले आप चलती कार से कूद कर भाग गई।।
ये लोग आपके पीछे नदी में भी गये, पर आप नही मिली, लेकिन जब आपने बस में लिफ्ट ली तब तक में इन लोगों ने आपको ढूँढ लिया और उस बस मे ब्लास्ट करवा दिया, पर कुदरत का करिश्मा देखिए की इतने लोग मर गये,पर आप जिंदा बच गई ।

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क्रमशः

aparna..

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Manu Verma
Manu Verma
1 year ago

लाजवाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻♥️♥️♥️