The bestseller -16

“जिया या सिया“
शेखऱ कुलदीप को घूरने लगा…
” क्यों अपनी आरती उतरवाने पर तुले हो भाई?अगर सच बता दोगे तो तुम्हें भी सुविधा रहेगी और हमें भी और जितना ज्यादा तुम गोल गोल घुमा कर झूठ की जलेबी बनाते रहोगे उतना ही उसे पचाने में तुम्हारे साथ साथ हमें भी असुविधा होगी।
और हमें जो असुविधा होगी उससे कहीं ज्यादा दिक्कत तुम्हें होगी।
तो बोलो सच बता रहे हो कि तुम्हें थाने ले जाकर तुम पर थर्ड डिग्री आजमाई जाए।”
” सर मैंने आपको जो-जो भी बताया था वह सब कुछ एकदम सच है आप चाहे तो किसी से भी पूछ सकते हैं मेरे दोनों बच्चे भी शहर से आ गए हैं आप चाहे तो मैं उन्हें भी बुला देता हूं।”
” किस दुनिया के बच्चे अपने बाप को कातिल बताएंगे बताओ जरा? और वह भी वह बच्चे जो उस वक्त यहां मौजूद ही नहीं थे, उन बच्चों को भी तो वही पता होगा जो तुमने उन्हें बताया होगा… और जाहिर है तुमने हमें और उन लोगों को एक सी कहानी बताई होगी । अब यह बताने का भी कष्ट कर दीजिए कि अगर आप वारदात के 2 दिन पहले यहां थे तो वारदात के समय आप कहां थे? “
” साब वारदात के दो दिन पहले मैं यहाँ जरूर था, लेकिन इस कामवाली बाई के निकलने के तुरंत बाद मैं भी गांव की बस पकड़ कर निकल गया था।”
“तो यह बात पहले क्यों नहीं बताई ?कोई विशेष मुहूर्त निकालना था इस बात को बताने के लिए?”
“साहब छुपाने का सोचकर नहीं छुपाया मैंने, बस ध्यान में नहीं रहा।”
“तुमने साफ-साफ कहा था कि वारदात के काफी दिन पहले से तुम्हारे घर पर किसी से बात नहीं हुई थी।”
“सर बात तो उस समय भी मेरी नहीं हो रही थी। मैं हमेशा की तरह घर के लिए अनाज दालें सब्जियां लेकर जरूर आया था लेकिन घर पर कोई भी मुझसे ठीक से बात नहीं कर रहा था।”
“आपकी बीवी भी नहीं?”
“वह क्यों नहीं करेगी साहब!! वह तो कर रही थी लेकिन मेरे दोनों भाई आपस में कुछ उलझन में थे और इसीलिए शायद….
कुलदीप अचानक कहते कहते रुक गया…
“क्या-क्या उलझन थी आपके दोनों भाइयों के बीच?”
“मुझे भी ठीक से मालूम नहीं साहब, मेरी बीवी उस रात मुझे कुछ बताना चाहती थी… लेकिन वह ठीक से बता नहीं पाई या शायद मैं ही समझ नहीं पाया।”
कुलदीप ने मुड़कर उन दो लोगों की तरफ देखा और वापस शेखर की तरफ देखने लग गया। शेखर समझ गया कि कुलदीप उन लोगों के सामने कुछ कहना नहीं चाहता है।
” ठीक है कुलदीप जी अभी तो हम लोग चलते हैं, कल सुबह आइए फिर आप हमारे थाने की चाय पीजिए। हम लोगों के साथ जरा गपशप भी हो जाएगी। “
“जी साहब!” कहकर कुलदीप ने खड़े होकर अपने दोनों हाथ जोड़ दिये।
शेखर इधर उधर देखता मैं ज़िन्दगी का साथ निभाता चला गया गुनगुनाता उस घर की सीढ़ियां उतरकर बाहर निकल गया।
गिरधारी जाकर जीप में बैठा और उसने गाड़ी स्टार्ट कर दी लेकिन शेखर गाड़ी की तरफ आने की जगह कुलदीप के घर के बाजू वाले घर में दरवाजे की कुंडी खटकाने लगा।
दरवाजा एक बुजुर्ग सी महिला ने खोला शेखर ने उन्हें नमस्ते किया और…” क्या मैं आप से 10 मिनट कुछ पूछताछ कर सकता हूं “कहकर उस महिला के साथ उसके घर में प्रवेश कर गया।
उसे अंदर घुसता देख गिरधारी भी जीप से कूदकर उसके पीछे चला आया।
“आंटी जी आप तो जानती होंगी कि अभी कुछ दिन पहले आपके बाजू वाले घर में बहुत बड़ी वारदात हो गई है इस बारे में आप कुछ भी बता सकती हैं।”
“बेटा सब कुछ अच्छा था उस घर में… हमारे बच्चे उनके घर जाया करते थे खेलने ।
सदर में दो बड़ी-बड़ी दुकानें थी दोनों भाइयों की। हमारा तो महीने का सारा सामान इनकी दुकान से आया करता था। अच्छे खाते पीते घर के लोग थे लेकिन कभी इन्होंने घमंड नहीं किया। मोहल्ले का रतजगा हो या किसी परिवार का कोई कार्यक्रम यह लोग अक्सर आया करते थे। पूजा-पाठ गणेश दुर्गा उत्सव का चंदा देने में भी यह लोग बहुत आगे रहते थे बहुत मिलनसार परिवार था साहब समझ नहीं आता कि अचानक क्या हो गया? “
” कुछ जादू टोने का चक्कर लगता है क्या आपको आंटी? “
” घर की साधारण पूजा पाठ तो यह लोग बहुत किया करते थे उसके अलावा कभी किसी तांत्रिक पुजारी बाबा को इनके घर आते नहीं देखा मैंने।”
” घर की औरतें किस तरह की बातें किया करती थी?”
” वही बड़ी पापड़ अचार बनाने की विधियां.. यह साड़ी कहां से लाई? वह साड़ी कब लाई? गहने कहां से कब खरीदे? सोने का भाव कितना चढ़ा उतरा? जैसी बातें औरतें करती हैं वैसे ही करती थी।”
” आपस में दोनों में कोई मनमुटाव तो नहीं था। सिंपल जैसा देवरानी जेठानी में होता है उस टाइप का कुछ।”
” नहीं साहब कोई मनमुटाव नहीं था वह दोनों तो रिश्ते में बहने थी। बड़ी वाली दूजे की फूफी की लड़की थी बस उसी रिश्ते से दोनों सगे भाइयों से इन दोनों बहनों की भी शादी हो गई।”
” इनका एक बड़ा भाई गांव में भी रहता है उसका क्या सीन है!”,
” साहब साधु है वह साधु । इतना संत लड़का हमने आज तक नहीं देखा। उम्र तो बढ़ गई है अब उसके बच्चों की शादियों की उम्र है । उसकी बेटी के लिए यह लोग लड़का ढूंढ रहे थे । बेटा तो अभी पढ़ाई कर रहा था बेटी भी कुछ पढ़ती है शहर में… पर वह दोनों पति-पत्नी भी बहुत सुथरे हैं साहब। बीवी तो बड़ी सुंदर थी उसकी। पैंतालीस की लगती नही थी साहब। तीनो बहुओं में सबसे सुंदर थी पर बोलती चलती ज़रा कम थी। उसे देख लगता छुने से मैली हो जायेगी। “
” मतलब सब अच्छा ही था बस। “
अपने हाथ में पकड़ी गन को घुमाते हुए शेखर उस घर से बाहर निकल गया गिरधारी भी उसके पीछे-पीछे जीप की तरफ बढ़ने लगा…
” अंसारी वह सुना है ना! ज्यादा मीठे फल में कीड़े लगते हैं… जहां पर भी मैं इतना परफेक्शन देखता हूं ना वही दिमाग में कुछ कुलबुलाहट मच जाती है। इन लोगों ने आत्महत्या की है? इनकी हत्या हुई है? या इन्हें आत्महत्या करने के लिए किसी ने प्रेरित किया है? पर माजरा जो भी है इतने साफ-सुथरे सफेद सुंदर परिवार के पीछे कुछ बहुत बड़ी और गहरी कालिख छुपी है। कोई ऐसी गंदगी है जिसे इस परिवार ने ढक रखा है वरना इतना बड़ा कांड नहीं हो जाता। “
” सहीं कह रहे हैं साहब अब तो हमें भी यही लग रहा कि इस कांड के पीछे कोई बहुत गहरा राज छिपा है। “
” कल पकड़ कर लाओ उस कुलदीप को….थाने के अंदर डाल दो थर्ड डिग्री देंगे तभी यह साला उल्टी करेगा!”
“जी साहब!!”
गिरधारी और शेखर अपनी बातों में लगे थाने पहुंच गए शेखर ने गिरधारी से एक चाय के लिए बोला और अपने केबिन में चला गया। अंदर जाते ही उसकी नजर सामने बैठी नंदिनी पर पड़ी…
” नंदू डार्लिंग तुम यहाँ कैसे? वह भी इस बेवक्त पर!”
” तुमसे कुछ जरूरी बातें डिस्कस करनी थी।”
” हां बिल्कुल बोलो ना।”
” मुझे यह कामिनी सही औरत नहीं लग रही। “
” क्यों खामखा उस बेचारी पर शक कर रही हो देख लेना नंदू इस इस केस के सॉल्व होने के बाद तुम बहुत पछताओगी।”
” ओ मिस्टर देवदास!! तुम प्लीज यह लड़कियों पर आंख बंद करके भरोसा करना बंद करो, प्लीज!!! पहले भी वह मधु अपने बॉयफ्रेंड के साथ तुम्हें चूना लगाकर जा चुकी है। उस केस का तो अभी तक कोई ओर छोर मिला नहीं… अब तुम इस कामिनी पर भी ऐसे ही आंख बंद करके विश्वास कर रहे हो। बेबी तुम देवदास बाद में पुलिस वाले पहले हो। पहचानो खुद को।”
इतनी देर में गिरधारी दोनों के लिए चाय लेकर आ गया चाय पियो नंदू सामने रखी चाय की ओर इशारा कर शेखर ने अपनी कप उठा ली नंदिनी ने अपनी कप उठाई और शेखर को कामिनी के घर पर हुई उसकी मुलाकात के बारे में बताने लगी….
शेखऱ ने अपनी चाय उठायी की नंदिनी ने उसके हाथ से चाय लेकर नीचे रख दी… “पहले मेरी बात सुनो! शेखर मैं तुम्हें शुरू से सारी बातें बताती हूं… सुरेखा और अनिल के घर से मुझे एक काली किताब मिली थी उस किताब पर वैसे तो कुछ भी ज्यादा काम का नजर नहीं आया मुझे लेकिन किताब के आखरी पेज पर एक नंबर लिखा था, वह नंबर कुछ अजीब ढंग से लिखा था और जिसका नंबर था उसका नाम भी कुछ धुंधले अक्षरों में लिखा था…
सुरेखा से बातों बातों में मुझे यह पता चला कि जिस दिन सुरेखा की बेटी सिया गायब हुई उस दिन कामिनी भी सुरेखा के घर पर उसके साथ ही थी। सुरेखा नीचे से कामिनी को सी ऑफ करके वापस आई तब तक में सिया भी गायब हो चुकी थी। इतना सब मालूम चलने पर मैं कामिनी के घर गई। “
” तुम अकेले क्यों उसके घर चली गई?”
” क्योंकि अगर तुम भी साथ जाते तो तुम काम करने की जगह सिर्फ उसे लाइन मारते….खैर मेरी बात सुनो।
वहां उसके गार्डन के बाहर से छुपकर मैंने उस पर नजर रखी और कुछ एक अजीब सी बातें उसके बारे में मालूम चली। एक तो उसके पास उसकी कोई डायरी है जिसे वह दिन भर अपने सीने से लगाई रहती है। मैंने जब उसे बाहर से छिपकर देखा वह गार्डन में एक चेयर पर बैठी रो रही थी…. और उसने अपने सीने से कुछ चिपकाया हुआ था। मुझे लगा ऋषिकेश का फोटो होगा लेकिन वह फोटो नहीं उसकी डायरी थी और वह डायरी पर बहुत प्यार से हाथ फेर रही थी। जैसे वह डायरी नहीं उसका बच्चा हो।
मैंने तुमसे कहा ना मुझे ये कामिनी थोड़ी अजीब लगती है। अजीब इस सेंस में कि मुझे वह थोड़ी साइको लगती है। देखो मेरी बात को समझने की कोशिश करना…….
एक औरत चाहे कितनी भी पढ़ी-लिखी हो नौकरी पेशा हो घरेलू हो या कुछ भी हो लेकिन उसके लिए उसका अपना बच्चा एक बहुत संवेदनशील मामला होता है। ऋषिकेश राय सागर के तो अपने खुद के दो बच्चे थे , उस पर उस ने एक लड़की को और भी गोद ले रखा था । तो इन 3 बच्चों के बाद उसे तो बच्चों की जरूरत नहीं थी, लेकिन कामिनी को थी। वह भले ही सामने से इस बात को दिखाएं या ना दिखाएं लेकिन अंदर ही अंदर वह बच्चों के लिए तड़पती थी। और बच्चे के प्रति उसका प्यार उसकी किताबों पर झलकता था। उसने अपनी किताबों अपनी डायरी और अपने एक पेट डॉग को ही अपना बच्चा मान लिया था।”
” डॉग !!! उसके पास डॉग भी है?”
“हां!! मैंने उस दिन गार्डन में देखा , जब वह गार्डन में बैठी हुई थी, तो कुछ देर में ही एक लंबा चौड़ा अल्सेशियन बाहर से शायद घूम कर आया और आते ही उसकी गोद में चढ़ गया और तुम यकीन नहीं मानोगे जैस ही वो उसकी गोद में चढ़ा उसके आंसू थम गए और वह अपने उस डॉग में इतनी मग्न हो गई कि वह रोना ही भूल गई।”
” ओके!!! तो तुम यह कहना चाहती हो कि बच्चे के मामले में उसकी और उसके पति की जमती नहीं थी, और इसलिए उसने अपने पति का खून कर दिया।
” नहीं यह तो मैंने कहा ही नहीं, कि उसने अपने पति का खून कर दिया । क्योंकि पता नहीं क्यों इतनी देर बाहर से उस पर नजर रखने के बाद मुझे खुद को यह गलत महसूस होने लगा कि मैं क्यों इस बेचारी पर यह शक कर रही थी कि यह अपने पति की खूनी है। उसके घर जाने के पहले जरूर मुझे उस पर शक हो रहा था कि हो ना हो ऋषिकेश के मर्डर में और सुरेखा की बेटी सिया के गायब होने में कामिनी का हाथ है। लेकिन जब मैंने छिपकर उस पर नजर रखी तो मेरा यह शक बेबुनियाद निकला। कामिनी असल में बेहद मासूम और डरी हुई सी लेखिका है ….उसके किरदार जरूर बहुत निडर होते हैं, लेकिन वह वैसी असल ज़िन्दगी में नही है। “
” चलो फाइनली तुम्हारा कामिनी के ऊपर से शक तो दूर हुआ।”
” पर बात तो अभी वहीं अटकी पड़ी है, कि आखिर ऋषिकेश राय सागर को मारा किसने?”
” वैसे मुझे तो सूरज का दिया पब्लिकेशन हाउस पर पूरा शक हो रहा है। ऊपर ऊपर से कितना भी दिखे लेकिन एक पब्लिशर्स और एक राइटर का रिश्ता हिंदी चीनी भाई-भाई वाला ही होता है… इन लोगों की आपस में कभी नहीं जम सकती। पब्लिशर को हमेशा यह लगता है कि लेखक की क्षमता से कहीं ज्यादा वह उसे पैसे दे रहा है, और लेखक हमेशा यही सोचता है कि उसकी बुद्धिमता उसके परिश्रम को कभी सही ढंग से आंका ही नहीं गया।”
” चलो अब मैं चलती हूं देर हो रही है मुझे ऑफिस भी निकलना है।”
“मैं चलूं? तुम्हें छोड़ दूँ।”
“चलो!! रास्ते में इंद्रपुरी केस पर भी प्रकाश डाल देना।”
शेखर नंदनी को साथ लिए उसे ऑफिस छोड़ने के लिए निकल पड़ा वह दोनों गाड़ी में जा रहे थे कि शेखर ने नंदिनी को गहरी नजरों से देखना शुरू कर दिया….
” नंदू तुम्हें ऐसा नहीं लगता कि आजकल हम दोनों सिर्फ काम की बातें करते हैं…. रोमांस तो हमारे बीच रह ही नहीं गया है।”
गहरी धीमी घुली घुली सी आवाज़ में शेखऱ ने कहा और नंदिनी की एक भौंह ऊपर चढ़ गई। उसे काम के वक्त ये मुलायम रेशमी बातें हज़म नही होती थीं।
” रोमांस है बेबी लेकिन केसेस भी तो अजीबोगरीब आ रहे हैं ना । अब देखो हम रोमांस करें भी तो करें कैसे? हम एक दूसरे के पास आने की कोशिश करेंगे कि तभी तुम्हारा गिरधारी तुम्हें फोन खटका देगा कि साहब एक घर से 6 लाशें पंखे में लटकती मिली हैं। अब ऐसे में रोमांस की चिता तो जल ही जाएगी ना।”
“आजकल बड़ी टेंशन होती है यार मुझे।”
“किसकी मेरी?”
“नहीं!!! मेरी जवानी की…. बर्बाद हुई जा रही है, उटपटांग केस के साथ। मैं तो यार ऐसे ही बूढ़ा जाऊंगा। मैंने तो सोचा था नौकरी में आते ही एक सुंदर सी लड़की से शादी करूंगा। दबंग के सलमान खान जैसे यूनिफार्म पहनकर शर्ट में पीछे गॉगल्स लगाकर चुलबुल पांडे बन कर थाने में मजे करूंगा । एक दो साल कमाई करने के बाद एक सुंदर सी लड़की से शादी कर लूंगा, बच्चे जमा लूंगा। लेकिन यहां तो उल्टा ही पड़ गया यार उमर निकलती जा रही है निकलती जा रही है….
” एक मिनट एक मिनट शेखर रुको रुको रुको!!”
शेखर की बात पूरे हुए बिना ही नंदिनी ने गाड़ी रुकवा ली।
रास्ते में इधर उधर देखते हुए शेखर ने एक किनारे करके गाड़ी रोक दी.. उसे आसपास देखकर समझ नहीं आया कि नंदिनी ने गाड़ी रुकवाई क्यों है?
तभी उसकी नजर रोड के किनारे खड़े एक पानीपुरी वाले पर पड़ गई…-
” अच्छा तो तुम्हें पानी पूरी खाने का मन कर रहा है। पहले बता देना था जान, मैं मिश्रा चाट भंडार ले जाता तुम्हें। “
” नहीं नहीं यही खाना है मुझे। चलो उतरो।”
दोनों साथ-साथ उस पानीपुरी वाले के पास चले गए। पानी पूरी वाला झील के ठीक एक तरफ अपना ठेला लगाए खड़ा था। असल में नंदिनी को उधर से गुजरते समय ऐसा लगा था जैसे पानीपुरी के ठेले के बाजू में जो बड़ा बरगद का पेड़ था उसके पीछे से जिया झांक रही हो… इसीलिए उसने अचानक से शेखर से गाड़ी रुकवा ली थी। गाड़ी से उतर के जब वह शेखर के साथ पानी पुरी वाले के पास पहुंची तब वहां कोई भी नहीं था।
उसके दिमाग में एकबारगी यह आया भी कि हो सकता है जिया सुरेखा और अनिल के साथ झील में घूमने आई हो और पानी पुरी वाले के पास खाने के बाद पेड़ के पीछे से झांक रही हो, लेकिन पता नहीं क्यों उसे इस बात में कुछ अजीब सा लगा.. क्योंकि वह जानती थी कि अंधेरा होने के बाद सुरेखा कभी भी जिया को लेकर घर से बाहर नहीं निकलती। और अनिल सुरेखा को तो एक साथ कहीं बाहर जाते उसने देखा ही नही था।
तो पेड़ के पीछे से झांकने वाली लड़की जो जिया जैसी नजर आ रही थी वह आखिर कौन थी? और उसने उसे साफ साफ देखा था , बिल्कुल जिया जैसी शक्ल वाली वो बच्ची थी कौन?
क्या वो सिया थी…..?
क्रमशः
aprana….
