अपराजिता -110

“चलो बाबूराव अब हमें बनारस निकलना हैं… जरा इन्हे भी उठा कर यही ले आते हैं.. पता तो चले की इतने सालों से ये कहाँ छिपा बैठा था.. और क्या कर रहा था ?”
बाबूराव ने हाँ में सर हिला दिया..
“हुज़ूर आपकी चाय…
बाबूराव ने टेबल पर उंघती पड़ी चाय की तरफ इशारा कर दिया..
“बाबूराव ये चाय नहीं चाहती थी कि अनिर्वान उसे पिए.. कोई बात नहीं.. चलो अब यहां से निकलते हैं..।
लेकिन पहले अंदर जो अतिथि मौजूद हैं, उसकी कुछ खातिर तो करनी पड़ेगी ना.. !”
बात करते करते अनिर्वान अंदर दाखिल हो गया..
दीपक का वो पकड़ा गया साथी अब तक कुछ खास जानकारी नहीं दे पाया था..।
अनिर्वान उसके सामने जाकर बैठ गया..
“बाबूराव चाय को गर्म करवा कर मंगवा लो.. !”
.बाबूराव हाँ में सर हिला कर बाहर चला गया.. कुछ देर में वो खौलती हुई चाय लिए वापस लौटा..
तब तक में अनिर्वान उस लड़के से पूछताछ में मगन था लेकिन वो ज्यादा कुछ भी बताने में असमर्थ था..
अनिर्वान ने उसके सामने चाय का प्याला रखा दिया और उससे सवाल कर दिया..
“चाय ?”
वो आश्चर्य से सामने बैठे अनिर्वान को देखने लगा, अनिर्वान को देखकर उसे यह नहीं लगा था कि वह उसे चाय ऑफर कर सकता है..
उसने पसोपेश में पङते हुए धीरे से हां में गर्दन हिला दी। और अनिर्वान ने चाय का प्याला उठाकर उसके टेबल पर रखे हाथ पर पलट दिया।
वह जलन से कलबला उठा..
“ये क्या कर दिया, हाथ जला दिया हमारा ?”
“शुक्र मनाओ तुम्हारा चेहरा नहीं जलाया.. ! अब शांति से जो सब पता हैं, सब उगलो वरना वो हाल करूँगा, ना जीते बनेगा ना मरते !”..
अनिर्वान हाथ में चाकू घुमाते हुए उसके सामने बोलने लगा और अनिर्वान के प्रभाव से बुरी तरह प्रभावित वो एक बार में सब कुछ बोल गया..
उसके अनुसार दीपक ने यज्ञ पर गोली चलाने के लिए इसी लड़के के एक दोस्त को सुपारी दी थी….
उसकी इन बातों से अनिर्वान को स्पष्ट हो चुका था कि दीपक अखंड से किसी तरह का बदला लेने के लिए ही शायद यज्ञ पर गोली चलवा रहा था, या फिर इसका और कोई कारण भी हो सकता था।
कारण जो भी हो, लेकिन अब अनिर्वान के पास पुख्ता सबूत था कि यज्ञ के ऊपर गोली चलवाने वाला दीपक ही था।
अभी कुछ दिन पहले भी, दीपक एक केस में थाने तक पहुंचा था लेकिन भावना ने रिपोर्ट लिखवाने से मना कर दिया जिसके कारण अनिर्वान को मजबूरन दीपक को छोड़ना पड़ गया था…।
लेकिन अब उसके पास एक मजबूत गवाह मौजूद था, जिसकी गवाही के आधार पर वो दीपक को पकड़ सकता था। उसने तुरंत अपने कुछ लोगों को एक तरफ दीपक के घर की तरफ रवाना किया, और दूसरी तरफ उस सुपारी किलर को पकड़ने के लिए भी अपनी टीम भेज दी।
इन दोनों तरफ से आश्वस्त होने के बाद वह बाबूराव और भाटी साहब के साथ बनारस के लिए निकल गया…
****
अगली सुबह एकदम भोर के वक्त यज्ञ को होश आ गया था, उसने धीरे-धीरे आंखें खोली और अपने आसपास चारों तरफ नजर दौड़ाने लगा, वह अस्पताल के कमरे में एक बेड पर लेटा हुआ था, और उसके ठीक बगल में रखी स्टूल पर उसकी धर्मपत्नी कुसुम बैठी थी…!
स्टूल के पीछे रखी दीवार पर कुसुम ने अपना सिर टिकाया हुआ था, और उसकी आंखें बंद थी।
यज्ञ कुछ देर तक कुसुम के चेहरे को देखता रह गया। उसके चेहरे को देखकर ही यज्ञ को समझ में आ गया था कि वह रात भर से जाग रही थी, और शायद उसके होश में आने का इंतजार करती हुई ही नींद में चली गई थी। यज्ञ को वह एक-एक मंजर याद आ गया, जब उसके सीने में गोली लगी और कुसुम घबराकर रोने धोने की जगह उसे संभालती हुई सीधा अस्पताल ले आई थी। यही तो खासियत थी उसकी पत्नी की, फालतू के लटके झटके उसे नहीं आते थे..।
वो भी नाजुक थी, लेकिन वक्त की नजाकत को समझना भी उसे आता था..।
कितनी फुर्ती से कुसुम ने यज्ञ को गाड़ी में बिठाया और खुद ड्राइविंग सीट पर बैठकर बिना एक पल व्यर्थ गंवाए गाड़ी को शहर की तरफ निकाल लिया था उसने।
यज्ञ ने पहली बार कुसुम को गाड़ी चलाते देखा था, बल्कि इसके पहले उसे यह मालूम ही नहीं था कि कुसुम गाड़ी चला भी सकती है।
अस्पताल पहुंचने तक में कुसुम ने यज्ञ को सोने नहीं दिया था। शायद उसने कहीं सुन रखा था कि अगर शरीर में गोली लग जाए तो इंसान के सो जाने से जहर तेजी से फैल जाता है, और इसीलिए वह लड़की लगातार उसे जगाए रखने का प्रयास कर रही थी।
अस्पताल पहुंचने के बाद भी व्यर्थ का रोना पीटना करने की बजाय वह सीधे डॉक्टर के पास पहुंचकर यज्ञ के इलाज के लिए भिड़ गई थी।
आज वाकई उसकी शेरनी ने अपना असली रूप दिखा दिया था,खाली नाम की ठकुराइन थोड़े ना थी वो…
यज्ञ के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान चली आई और तभी कुसुम की आंखें खुल गई.।
“अरे आप जाग गए.. मतलब कब जगे.. हमारा मतलब कब होश आया.. ?”
अपनी ख़ुशी में वो एक के बाद एक सवाल करती चली गई…
“अरे अभी होश आया कहाँ हैं.. हम तो अब भी बेहोश ही हैं.. !”
“आप रुकिए, हम डॉक्टर को बुला कर ले आते हैं !”
यज्ञ जब तक उसे रोकता वो खड़ी हो चुकी थी…वो पलटी की उसका बाजु यज्ञ ने पकड़ लिया..
“घबराइए मत, हम ठीक हैं !”
“हाँ लेकिन डॉक्टर को तो बुला लेने दीजिये !”
यज्ञ ने उसे धीमे से अपने पास बैठने का इशारा कर दिया..
उसकी आँखों की भाषा समझ कर कुसुम वहीँ बैठ गयी.. यज्ञ उसे ही देख रहा था, लेकिन आज कुसुम उसे लगातार नहीं देख पायी…
वो नीचे देखने लगी..
“सुनो.. !” यज्ञ की पुकार पर कुसुम ने उसे देखा.. कुसुम की आँखों में उमड़ आये आंसू यज्ञ से छिपे नहीं रह पाए..
“अरे.. क्या हुआ ? रोने की क्या ज़रूरत ?”
कुसुम ने उमड़ती घुमड़ती आँखों से उसे देखा, आज कितना कुछ कहना चाहती थी वो, लेकिन शब्द गले में आकर अटकते जा रहे थे.. लग रहा था मुहं खोलेगी तो ऑंखें बरस पड़ेंगी..
उसे खुद पर शर्म आ रही थी..वो यज्ञ के सामने बिलकुल मजबूत बन कर खड़ी रहना चाहती थी, लेकिन आज उसकी सारी मजबूती ढह गयी थी.. उसका मन कर रहा था उसके सीने पर सर रख कर जी भर कर रो ले….
एक तरफ वो खुद को रोने से रोकना चाह रही थी, दूसरी तरफ यज्ञ ऐसी बात बोल गया की उसकी रुलाई और बढ़ने को थी..
“अरे अब रोने की क्या ज़रूरत.. हम मरे क्यों नहीं, यही सोच कर रो रही क्या ?”
यज्ञ की कही ये बात सुनते ही कुसुम ने तड़प कर उसे देखा और उसके होंठो पर अपना हाथ रख दिया…
“ऐसा क्यों बोल रहे ? क्या हम आपको इतनी लड़ाकू लगती हैं ?”
“नहीं.. आप तो बहुत प्यारी लगती हैं.. !”, यज्ञ हल्के से बोल उठा, लेकिन उसका बोला वो सुन नहीं पायी और अपनी ही धुन में बोलती चली गयी..
“आपने जान निकाल दी थी हमारी.. सच कह रहे हैं, अगर आपको कुछ हो जाता ना हम इसी अस्पताल की बिल्डिंग से कूद कर अपनी जान दे देते !”
“अरे.. अब कहाँ जान लेने देने की बात कर रही हो.. ! “
“तो क्या बोले ? आपने कितना परेशान किया हैं हमें, ये हम ही जानते हैं !”
“और उसके पहले आपने कितना परेशान किया हैं हमें ?” यज्ञ के ऐसा बोलते ही कुसुम ने उसकी तरफ देखा..
“हमे माफ़ कर दीजिये ठाकुर साहब, हम वाकई बहुत बेवकूफ हैं.. हमने आपको बहुत सताया हैं.. हम तो वैसे माफ़ी के भी लायक नहीं हैं, लेकिन इतना जानते हैं कि आप हमे माफ़ कर देंगे.. !”
“अरे.. आज हमारी शेरनी गुर्राने की जगह अचानक ऐसे शहद कैसे टपकाने लगी ? “
“मजाक उड़ा रहे हैं ना हमारा ?”
यज्ञ ने ना में गर्दन हिला दी, लेकिन तभी उसे गर्दन के आसपास दर्द महसूस हुआ और हल्की सी उसकी चीख निकल गयी..
“अरे.. आप शांति से लेटे रहिये ना, होश आया नहीं कि खुरापात शुरू.. ये नहीं की चुपचाप लेटे रहे.. रुकिए, हम डॉक्टर साहब को लेकर आते हैं.. !”
और इस बार यज्ञ की बात सुने बिना ही वो बाहर निकल गयी… कुछ सेकण्ड्स में ही वो एक नर्स और डॉक्टर के साथ वापस चली आयी…
डॉक्टर आते ही जाँच में लग गए.. नर्स भी यज्ञ की तीमारदारी में लगी थी.. एक तरफ खड़ी कुसुम यज्ञ को ही देख रही थी.. यज्ञ ने धीरे से उसकी तरफ देखा और इशारे से उसे पास बुला लिया..
वो उसे देखते हुए उसके पास पहुँच गयी..
यज्ञ ने उसे अपने पास बुलाया, कुसुम को लगा कोई ज़रूरी बात कहना चाहता हैं.. ये सोच कर वो उसके चेहरे के पास चली आयी और उसके होंठो के सामने अपने कान कर दिए..
ऐसे ना मुझे तुम देखो, सीने से लगा लूंगा
तुमको मैं चुरा लूंगा तुमसे दिल में छुपा लूंगा..
धीरे से यज्ञ ने अपनी फुलझड़ी छोड़ दी और कुसुम डॉक्टर और नर्स के सामने झेंप कर रह गयी… आँखों से अपने निराले पति को लताड़ लगाती हुई वो वापस खड़ी हो गयी..
“अब आप कैसा महसूस कर रहे हैं ?” डॉक्टर के सवाल पर यज्ञ ने “ठीक हैं” कह दिया..
डॉक्टर के पीछे ही अखंड और बाक़ी लोग भी भीतर चले आये थे..
डॉक्टर ने सारी जाँच कर यज्ञ के ठीक होने की तस्दीक कर दी.. जिसे सुन कर वहाँ मौजूद सभी के चेहरे पर राहत के भाव चले आये..
अखंड भी यज्ञ के पास पहुँच गया… उसकी भी आंखे भरी हुई थी..अपने बड़े भाई का लुटा पिटा सा अवतार देख कर यज्ञ की आँख में भी आंसू आ गए..
अखंड ने बड़े लाड़ से अपने छोटे भाई के बालों पर हाथ फेर दिया.. उसकी मूक सांत्वना के शब्द समझ कर यज्ञ का भी अंतस पसीज गया…
दोनों भाइयों का आपसी स्नेह कुसुम की आँखों में भी झिलमिलाने लगा…
उसने आंचल से अपनी ऑंखें पोंछ ली…
अखंड ने फ़ोन निकाला और घर पर यज्ञ की कुशलता की खबर सुनाने फ़ोन मिला लिया..
आज सुबह का उगता सूरज परिहार परिवार की खुशियाँ वापस लौटा गया था…
****
अनिर्वान बनारस पहुँच चुका था..
उसने पहले ही वहाँ की पुलिस को उस लड़के को घेरने का फरमान सुना दिया था, इसलिए अनिर्वान के वहाँ पहुंचने तक में पूरी घेराबंदी कर उस लड़के को पकड़ लिया गया था….
अनिर्वान ने वहाँ के थाना प्रभारी से बातचीत की और उस लड़के से मिलने और उसे अपनी गिरफ्त में लेने वहाँ पहुँच गया…
उस लड़के को फिलहाल सलाखों के पीछे रखा गया था.. अनिर्वान के बुलावे पर उसे लेकर वो लोग चले आये..
अनिर्वान ने उसे ऊपर से नीचे तक घूर कर देखा और अपने मोबाइल पर रखी तस्वीर को ध्यान से देखने लगा..
“हम्म शक्ल तो मिल रही हैं… हाँ तो भाई क्या नाम हैं तुम्हारा ?”
अनिर्वान के सवाल पर अब तक चुप बैठा वो लड़का धीमे से बोल पड़ा.. -“शिवेन !”
“शिवेन भाई कहाँ के रहने वाले हो ? तुम्हारे अम्मा अब्बा कहाँ रहते हैं ? कितने भाई बहन हो ? क्या पढाई की हैं ? कौन सी गाली मोहल्ले में तुम्हारा निवास हैं फ़िलहाल ?”
उस लड़के ने ऑंखें उठा कर अनिर्वान की तरफ देखा..
“सर हमसे क्या गलती हुआ है, जो आपके लोग हमे उठा कर ले आये हैं?”
“वो भी बताएँगे, पर पहले अपना परिचय तो दीजियेगा ?”
“सर हमारा नाम शिवेन है, और अस्सी घाट पर हमारी चाय की गुमटी हैं !”
“कबसे है ?”
“कई सालों से !”
“कितने सालो से ? सही सही याद कर के बताओ ?”
“ठीक से याद नहीं सर !”
“और माता पिता ? वो याद हैं ?”
“जी हमारा कोई नहीं है.. माता पिता हमारे बचपन में ही गुज़ार गए थे, हम अपनी नानी के पास रहा करते थे, उन्ही की चाय की गुमटी चला रहे हैं.. अब तो नानी भी नहीं रही !”
“नानी जी कब गुज़री ?”
“कई साल हो गए !”
“पढाई कहाँ से किये हो, बीएचयू से बीए एमए तो नहीं किये बैठे हो बबुआ ?”
“नहीं सर.. अनपढ़ हैं.. एकदम अंगूठा टेक.. !”
ये सुन कर अनिर्वान ने हाँ में गर्दन हिला दी..
“बिलकुल ही अनपढ़ हो ?” अनिर्वान ने वापस पूछ लिया..
“हाँ सर… काला अक्षर भैंस बराबर है हमारे लिए !”
“पर बबुआ भैंस तो बहुत मोटा होता है.. और काले अक्षर तो छोटे होते हैं… एकदम छोटे छोटे मोतियों जैसे अक्षरों में कहीं कहीं किसी कॉलेज में जब सालाना इम्तिहान पास किया जाता है ना, तब कॉलेज वाले हर साल के बाद अपने विद्यार्थियों का सामूहिक फोटो खींचते हैं, और उसके नीचे मोती जैसे काले अक्षरों में विद्यार्थियों का नाम लिखा होता है..।”
“हमे नहीं पता सर, हम कभी कालेज गए जो नहीं.. !”
अनिर्वान ने हाँ में गर्दन हिला दी, वो पीछे पलटा और पीछे खड़े बाबूराव की तरफ हाथ बढ़ा दिया.. बाबूराव ने अपने हाथ में पकड़ रखे बैग से एक बड़ी सी तस्वीर निकाल कर अनिर्वान के हाथ में रख दी..
अनिर्वान ने वो तस्वीर उस लड़के के सामने बढ़ा दी…
तस्वीर में लगभग पन्द्रह बीस लड़के नजर आ रहे थे.. सबके चेहरे प्रफुल्लित थे… सारे के सारे बड़े खुश नजर आ रहे थे..
सबसे बीच में कॉलेज के प्रिंसिपल बैठे थे, उनके बगल में विश्विद्यालय कुलपति थे, दूसरी तरफ वाइस चांसलर थे, कुछ प्रोफेसर और लेक्चरर भी थे…
उनके पीछे लड़के खड़े थे..
सबसे बीच में अखंड सिंह परिहार खड़ा था, उसके गले में फूलों के हार थे..
उसके अगल बगल उसके चेले खड़े थे..
सबने अपनी उँगलियाँ सामने विक्ट्री दिखाते हुए कर रखी थी..
अखंड के चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान थी.. वो बहुत खुश नजर आ रहा था, ये उसके दूसरी बार अध्यक्ष पद पर चयनित होने के समय की तस्वीर थी..
और उसके ठीक बगल में खड़ा गोलू उससे भी ज्यादा खुश दिखाई दे रहा था..
गोलू और लल्लन के बीच अखंड मुस्कुरा रहा था..
अनिर्वान ने तस्वीर उस लड़के के सामने करने के बाद इसके चेहरे पर नजर जमा रखी थी..
उस लड़के ने एक उचटती सी निगाह उस तस्वीर पर डाली लेकिन उसके चेहरे का रंग बदलने लगा..
अनिर्वान उसे ही देख रहा था..
“हाँ तो बबुआ इसमें से किस को पहचान पा रहे हो और किसे नहीं ?”
अनिर्वान की बात का सामने खड़े लड़के ने कोई जवाब नहीं दिया..
“ये दाढ़ी मूंछ और जटाजूट रख कर तुम सोचे कि तुम्हे कोई पहचानेगा नहीं… बाबू कानून के घर देर है अंधेर नहीं.. और फिर अगर उस घर में अनिर्वान भारद्वाज रहने आ गया हो तब तो समझ लो अंधेर में भी उजियार ही उजियार है..
तो बेटा अब बताओ तुमको शिवेन बोले या गोलू…?”
अनिर्वान ने उसकी तरफ देखा और सामने खड़ा गोलू अपने आंसू पोंछता वहीँ जमीन पर बैठ गया…
क्रमशः…
Dear दोस्तों बस थोड़ा सा इंतज़ार कीजिये, एक ज़बरदस्त बोनस पार्ट के साथ जीवनसाथी भी अब यही शुरू होने वाली है…

Ab golu sab kahega.. akhand ki begunahi sabit hogi… awesome part 💓 superb story 😍 bahut hi badhiya story 😍
Matlab golu bhi mila hua tha akhand ke khilaaf 😮😮😮😮😡😡
kitni mushkil se padhne ko mili Aprajita..ab saans me saans aai
Super
🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻🥰🥰🥰👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻
Aakhir kusum Ko Prem ho hi gaya
यज्ञ का कुसुम को छेड़ना….haye! बहुत मिस क़िया। कुसुम कुमारी की खुशी….. फूले नही समा रही थी। यज्ञ और अखंड का प्यार जो आंखें नम कर गया। एक दूसरे का प्यार और विश्वास….. कुसुम को भी रूला गया।
अब गोलू पकड़ा गया अब अखंड की बेगुनाही की कहानी और धीरेन प्रजापति के षड्यंत्र का पर्दाफाश होगा।👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👌🏻👌🏻👌🏻
amazing n superb part 🤩👏
लग नहीं था कि कुसुम इतनी जल्दी से अपने मन की बात अपने सैया जी से कह देगी और यज्ञ का कुसुम को छेड़ना इतनी मुसीबत में भी जारी है गाने गा गा कर वह अपनी कुसुम कुमारी को परेशान करता रहता है 😍😍😍😍😍😍 और अभी भी उसने वही किया अपनी कुसुम कुमारी को रोता नहीं देख सकता है इसलिए हंसाने के लिए उसने सबके सामने उसे छे ड़ना ही सही समझा😁😁😁
भारद्वाज जी बाल की खाल निकालने के लिए बहुत प्रसिद्ध है और वह अभी भी वही कर रहे हैं लगता है कि वह सारा मामला बड़ी जल्दी ही सुलटा लेंगे पर यह क्या अखंड के बगल में खड़ा गोलू ही यह लड़का निकला🤔🤔🤔🤔
मेरी की गयी टिप्पणी कहीं दिखाई नहीं दे रही है
पता नहीं क्यों।
एक बार फिर से लिखती हूँ
आपका हार्दिक आभार
हम आपसे हमेशा जुड़े रहेंगे