अपराजिता -114

अपराजिता -114

“क्या हुआ रेशु, किसका फ़ोन है ?”

“अहह.. वो किसी का नहीं ?”

“व्हाट.. तुम बात जार रही थी ना ?”

“मतलब मुझे नहीं पता, मैं बात कर के आती हूँ !”

रेशम वहाँ से उठी और बाहर गार्डन में निकल गयी..

“क्या मैं डॉक्टर रेशम अवस्थी से बात कर सकता हूं?”

” हां जी मैं बोल रही हूं!”

रेशम ने धीरे से बाहर निकल कर दरवाज़ा लगा दिया.. दरवाज़ा लगते वक्त इसकी नजर अथर्व पर ही थी.. लेकिन अथर्व खुद में मगन पेण्ट कर रहा था..
   असिस्टेंट कमिश्नर आफ पुलिस का फ़ोन उसके पास क्यों आ सकता है, वह इसी सोच में ग़ुम थी कि  अनिर्वान की आवाज ने उसकी तन्द्रा भंग कर दी..

“डॉक्टर रेशम आपसे कुछ जरूरी बात करनी थी, क्या आप मेरे बताएं पते पर पहुंच सकती हैं?”

” लेकिन किस बारे में?”

” मैं फोन पर ज्यादा तो नहीं बता पाऊंगा, लेकिन बस इतना कहना चाहता हूं कि आपके कॉलेज टाइम पर कोई एक दुर्घटना घटी थी..
इस केस के बारे में आपसे बात करनी थी!”

” सर वह केस बहुत समय पहले क्लोज हो चुका है, और अब मैं इस बारे में कोई बात नहीं करना चाहती!”

” देखिए रेशम जी आपको परेशान करने का मेरा कोई इरादा नहीं है, लेकिन अगर आप एक बार आकर मुझसे मिल लेंगी तो मुझे बहुत सारी बातें आपसे मालूम चल सकेंगी..
देखिये हो सकता है आप जिसे कसूरवार समझ रही हो असल में यह उसका किया धरा नहीं बल्कि किसी और का किया हुआ हो !”

” देखिए सर अब मैं इस बात को पूरी तरह से अपने दिल दिमाग से निकल चुकी हूं ! भूल चुकी हूं मैं वह सारी बातें! आपसे हाथ जोड़कर प्रार्थना करती हूं कि मुझे वापस उन अंधेरों में मत धकेलिए! बहुत मुश्किल से वहां से निकल कर आई हूं!”

” रेशम जी बस किसी तरह से दस मिनट निकाल लीजिए, मुझे पंकज के बारे में आपसे कुछ जरूरी बात करनी थी!”

” ठीक है मैं कोशिश करती हूं, लेकिन मैं कोई पक्का वादा नहीं कर सकती! क्योंकि इस वक्त मेरे हस्बैंड यहां आए हुए हैं, और….”

” जी मैं बिल्कुल समझ सकता हूं, आप कोशिश ही कर लीजिएगा! हो सके तो दोपहर एक बजे रॉयल गार्डन कैफे में मिलिए!”

” सर मैं दुर्गागंज में रहती हूं, यहां से मुझे रॉयल गार्डन कैसे पहुंचने में डेढ़ घंटे लग जाएंगे..!”

“तो ठीक है फिर ऐसा करता हूं कि अगर आपको दिक्कत ना हो तो मैं आपकी डिस्पेंसरी में आकर आपसे मिल लूंगा!”

” ठीक है सर आप एक काम कीजिएगा, दो दिन बाद आ जाइएगा, तब तक मेरे हस्बैंड है तो मैंने डिस्पेंसरी से छुट्टी ली हुई है!”

” ओके मैं आने से पहले आपको कॉल करूंगा!”

अनिर्वान ने फोन रख दिया! लेकिन रेशम का मन एकदम से भारी हो गया। वह बड़े मन से उन छोटे-छोटे गमलों को पेंट करने के लिए निकाल कर लाई थी। लेकिन अब उसका मन बहुत ही खराब सा हो गया था। ऐसा लग रहा था उसके हाथों में जान नहीं है।

लगभग पांच छैः साल पुराना वह केस जिसे उसने पूरी तरह से दफन कर दिया था, आज अचानक जमीन फाड़कर निकल आया था! पता नहीं इस पुलिस वाले को क्या पता चला था, और नहीं पता यह क्या पता करना चाहता था?
   जो इतना छानबीन कर रहा था?
उस केस में जो होना था, वह हो चुका!

अब ना तो दोबारा अखंड को पकड़ कर कोई जेल के अंदर करेगा, और ना ही वह खुद इन सब मामलों में अपना नाम घसीटे जाने की इच्छुक है!

कहीं ना कहीं उसने भी इन सब बातों से बिल्कुल ही पल्ला झाड़ लिया था…
बेचारे अथर्व के सामने एक बार फिर उस केस की बात उठ गई थी, और वह सोच में पड़ गई थी!
    अब अंदर जाकर अथर्व से क्या बोलेगी कि किस का फ़ोन था, वो सोच रही थी कि तभी पीछे से आकर अथर्व ने उसके गले में अपनी बाहें डाल दी..

” क्या हुआ किस बात हो रही थी, जो यहां बाहर चली आयी ?”

” वह कुछ नहीं, एक पेशेंट थी! बस वही अपना केस बता रही थी!”

” तो उसमें यहां बाहर आने की क्या बात थी? वह तो तुम मेरे सामने भी बात कर सकती थी!”

” आपको डिस्टर्ब होता ना बस इसीलिए!”

” चलो कोई बात नहीं, वैसे मैं भी अपने पेशेंट्स की  प्राइवेसी का पूरा ख्याल रखता हूं। आओ तुम्हारे गमले पेंट करते हैं।
वैसे मेरा तो तुम्हे ही पेंट करने का मन है!”

” आप फिर शुरू हो गये !”

” शुरू होने कहां देती हो तुम, और वैसे भी अपने प्यार के रंग में रंग ही चुका हूँ तुम्हे! चलो.. !”

  बड़े प्यार से रेशम की बाहों में अपनी बांहे डाले अथर्व  उसे अंदर ले आया..
दोनों एक बार फिर उन छोटे-छोटे गमले को अलग-अलग रंगों से रंगने में व्यस्त हो गए! लेकिन रह रहकर रेशम के दिमाग में अनिर्वान की बातें घूम रही थी।

कुछ देर बाद ही अनिर्वान रॉयल गार्डन कैफे पहुंच चुका था। गीता ने अनिर्वान को पहले ही टेबल नंबर ग्यारह  में बैठने को कहा था…
अनिर्वान और नेहा वहां पहुंचे और टेबल नंबर ग्यारह ढूंढ कर बैठ गए…

दोनों आमने-सामने बैठे इधर-उधर देख रहे थे…
  अनिर्वान का ध्यान इसी बात पर था कि गीता पता नहीं कब और कैसे वहां पहुंचेगी? नेहा भी यही जानना चाह रही थी?
वेटर ने आकर दोनों के सामने कॉफी के कप रख दिए… काफी का कप देखते ही नेहा ने वेटर से कहा भी..

” अरे सुनो हमने काफी नहीं मंगाई !”

नेहा कि बात पर वेटर ने मुड़कर नेहा को देखा और बिना कोई जवाब दिए वहां से चला गया..

“अरे बड़ा अजीब आदमी है, यह होटल भी बड़ा अजीब है!  हमसे बिना कुछ कहे कॉफी रखकर चला गया!”

अनिर्वान नेहा को देखकर फिर उस वेटर को देखने लगा, और कुछ सोचते हुए उसने अपनी कॉफी का कप धीरे से सरकाया..

उसकी काफी के कप के नीचे एक छोटी सी पर्ची थी, जिसमें कुछ लिखा हुआ था!
   नेहा उस पर्ची को देखकर कुछ बोल पाती, उसके पहले ही अनिर्वान ने उसे चुप रहने का इशारा कर दिया उसने धीरे से पर्ची को देखा उसमें लिखा था,फर्स्ट फ्लोर में केबिन नंबर दस..

अनिर्वान ने नेहा को देखा और धीमे से उसकी तरफ पर्ची बढ़ा दी..
नेहा ने झट से उसे पढ़ा और कॉफी का प्याला उठा कर मुहं से लगा लिया..
अनिर्वान अपनी जगह पर खड़ा हो गया और नेहा ने उसका हाथ पकड़ कर उसे बैठा दिया..
अनिर्वान ने चौंक कर उसकी और देखा..

नेहा ने मुस्कुरा कर उसकी तरफ प्यार भरी नजर से देखा और अनिर्वान ने सवालिया नजर उसकी तरफ उठा दी..

नेहा ने फ़ोन की तरफ इशारा कर दिया..
अनिर्वान ने अपना फ़ोन उठाया, उस पर नेहा का ही मेसेज था..

” सबको पता ना चल जाए इसलिए इतने चुपके से और शातिर तरीके से केबिन का नंबर भेजा गया, और आप बिना कॉफी खत्म किया खड़े हो गए इससे तो अगर कोई आप पर नजर रखे हुए हो तो उसे आपकी काफी की कप देखकर समझ में आ जाएगा कि आप कॉफी पीने नहीं बल्कि किसी और कम से यहां आये है..
तो मेरे ख्याल से पहले अपनी कॉफी फिनिश कीजिए, उसके बाद कैजुअल तरीके से मुझे लेकर अंदर चलिएगा, जिससे दूसरों को लगे कि आप अपनी गर्लफ्रेंड के साथ क्वालिटी टाइम स्पेंड कर रहे हैं..!”

अनिर्वान ने मेसेज पढ़ा और वापस बैठ गया..
उसने अपना कप उठाया और दो घूंट में कॉफी ख़त्म की और खाली कप नीचे रख कर वापस खड़ा हो गया..
नेहा की कॉफी अब भी बची थी.. वो धीरे धीरे नजाकत से घूंट भर रही थी..
लेकिन अनिर्वान को उठ कर अंदर की तरफ बढ़ते देख वो भी जैसे तैसे अपनी आधी अधूरी कॉफी का कप पटक कर उसके पीछे भाग खड़ी हुई..

अनिर्वान इधर उधर देखते हुए गार्डन रेस्ट्रा से अंदर की तरफ बढ़ गया…
दस नंबर के केबिन को ढूंढ़ कर उसने उसका दरवाज़ा खोला और अंदर दाखिल हो गया…
ये छोटे छोटे फैमिली केबिन सा था, जिसमे एक साथ आठ से दस लोग एक साथ बैठ कर खाना खा सकते थे..
अनिर्वान के पीछे ही नेहा भी दाखिल हो गई..
उन दोनों के वहां जाकर बैठते ही तुरंत दरवाजा खुला और एक औरत अंदर दाखिल हो गई…
उसने एक सिंपल सा कुर्ता पहना हुआ था, लेकिन अपने चेहरे को पूरी तरह से दुपट्टे से बांधकर रखा हुआ था वह वहां आकर बैठी और अनिर्वान की तरफ देखकर उसने अपने हाथ जोड़ दिये…

अनिर्वान ने भी उसे देखकर धीरे से गर्दन झुका दी  और उस लड़की ने धीरे-धीरे अपने चेहरे पर बांध रखा दुपट्टा खोल दिया..

अनिर्वान के सामने गीता बैठी थी!!

” नमस्ते सर मैं ही गीता हूं, धीरेंद्र प्रजापति की पत्नी !”

” हेलो गीता जी आपसे कुछ बहुत जरूरी काम था मुझे, और इसीलिए मैं मिलने आया हूं!”

” क्या पूछना चाहते हैं आप ?”

” गीता जी पूछने से पहले आपको कुछ दिखाना चाहता हूं!”

अनिर्वान ने गोलू कि तस्वीर गीता कि तरफ घुमा दी.. उस तस्वीर को देख गीता के चेहरे का रंग उड़ गया..

“आप इसे जानती है ?”

गीता संकोच में चुप रह गयी.. उसे नहीं मालूम था कि अनिर्वान क्या जानना चाहता है ? गीता जानती थी कि धीरेन्द्र बहुत शातिर है और उसकी पहुँच ऊपर तक है..
उसने अपने सारे दुश्मनो को एक एक कर मरवा दिया था, यहां तक कि उसी का साथ देने वालों को भी उसने इसलिए ज़िंदा नहीं छोड़ा था कि कहीं किसी रोज़ कोई इस बात का फायदा उठा कर उसे ही ब्लेकमेल ना कर बैठे..
पूरी दुनिया में एक अकेला गोलू और वो खुद ही थी जो उसका राज़ जान कर भी ज़िंदा थे..
गोलू ज़िंदा था ये बात धीरेन्द्र जानता था और बड़ी शिद्दत से वो उसे ढूंढ़ रहा था..
आज सामने बैठे पुलिस वाले के हाथ में गोलू कि तस्वीर देख कर उसका दिल धक से रह गया था.. कहीं ये पुलिस वाला भी धीरेन्द्र का मुहरा तो नहीं था..

“नहीं.. नहीं जानती !”

“गोलू इस वक्त मेरी हिरासत में है !”

यह सुनते ही गीता के चेहरे का रंग उड़ गया…
वह आश्चर्य से अनिर्वान की तरफ देखने लगी..

” सर क्या आप भी धीरेंद्र प्रजापति के लिए काम करते हैं?”

अनिर्वान ने गीता को देखा,

” आप जानना क्या चाहती हैं गीता जी..?”

” बस एक बात जाना चाहती हूं सर,क्या आप धीरेंद्र की तरफ है?”

” मैं सिर्फ कानून की तरफ हूं, जो कानून के खिलाफ होगा मैं उसके खिलाफ खड़ा हो जाऊंगा..
लेकिन जो कानून की तरफ होगा, कानून का मददगार होगा, उसके लिए मैं हमेशा दोस्त हूं !
     गीता जी, जो भी सच है आप मुझे बता सकती हैं! गोलू ने ही मुझे आपके बारे में बताया था और गोलू से ही आपका नंबर भी मिला है! मैं जानता हूं उसकी आपने उसकी बहुत मदद की है।
  वह कहां रह रहा था, क्या कर रहा था, यह सब आपके अलावा और कोई नहीं जानता था। यहां तक की हर दो साल में एक बार आपक विश्वनाथ मंदिर के दर्शन के लिए भी जाती है,अपने नेता पति के साथ..
और जब भी दर्शनों के लिए जाती हैं, आप सुबह चार बजे उठकर गंगा घाट पहुंच जाया करती है..
और उस वक्त गोलू से मिलकर आप उसकी जितनी भी कर सकती हैं, मदद भी कर दिया करती है। यह सारी बातें जानता हूं मैं।”

अनिर्वान के मुंह से यह सारी सच्चाई सुनकर गीता अचानक कुछ बोल नहीं पायी..

” सर आप गोलू को जानते हैं, तब तो लल्लन और अखंड को भी जानते होंगे?”

” जी हां बिल्कुल जानता हूं, और अखंड के इस केस पर मैं वापस काम कर रहा हूं! गीता जी मुझे नहीं पता कि आप अखंड को कसूरवार मानती हैं या बेकसूर, लेकिन जितना मेरा अनुभव था मेरे अनुसार अखंड बेकसूर था और इसीलिए मैंने उसे छुड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। लेकिन यह केस तब तक नहीं सुलझेगा जब तक असली गुनहगार कौन है, यह मालूम नहीं चलता।

पता नहीं क्यों ऐसा लग रहा है कि इस केस को सुलझाने में आप मेरी मदद कर सकती हैं।”

गीता ने एक बार गहरी नजर से नेहा की तरफ देखा और अनिर्वान को देखने लगी।

” नहीं नहीं इनसे घबराने की जरूरत नहीं है।यह मेरी दोस्त है नेहा।”

अनिर्वान में जैसे ही नेहा का परिचय करवाया नेहा के चेहरे पर मुस्कान खिल गई…
वह मुस्कुराने लगी, और उसी  वक्त उसके मोबाइल पर किसी का कॉल आने लगा..

नेहा की मोबाइल रिंगटोन बजने लगी, और इसके साथ ही वहां पर एक गाना सुनाई देने लगा..

आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर जुबान पर
सबको मालूम है और सबको खबर हो गई..

नेहा की रिंगटोन सुनते ही गीता और अनिर्वान दोनों चौक पर उसकी तरफ देखने लगे।

नेहा ने झेंप कर उन दोनों की तरफ देखा और माफी मांगते हुए तुरंत फोन उठा लिया।

नेहा की मां का फोन था और वह उसे बस वही आम सवाल जवाब कर रही थी जो एक मां अपनी बेटी से करती है। खाना खाया या नहीं? रोज रात में दूध पीती है या नहीं? वहां सब्जी भाजी ठीक-ठाक मिलती है कि नहीं? घर पर काम वाली मिल गई या नहीं या खुद ही काम करना पड़ता है? और रोज नहाती है या नहीं?

नेहा गीता और अनिर्वान के सामने इन सवालों के जवाब देने में असहज महसूस कर रही थी, लेकिन उसकी मां की आवाज फोन फाड़ कर बाहर तक चली आ रही थी।
और उनके सवालों को सुनकर अनिर्वान को हंसी आने लगी थी।

नेहा ने जैसे तैसे अपनी मां से बात करके फोन काटा और अनिर्वान और गीता की तरफ देखने लगी।

” चलिए अब आप लोग अपना शुरू कीजिए।”

उसके ऐसा बोलते ही अनिर्वान ने नेहा को देखा और हल्के से मुस्करा उठा।

” एक बात पूछ सकता हूं।”

नेहा ने उसकी तरफ देखकर कहा-” पूछ लीजिए “

“इतना अजीब सा गाना अपनी मां के नंबर पर असाइन कर रखा है?”

” नहीं यह मां के नंबर पर असाइन नहीं किया, यह मेरी जनरल रिंगटोन है। और सभी के कॉल आने पर यही रिंगटोन बजती है। बस मेरे बॉस को छोड़कर।”

“बॉस के में कौन सी रिंगटोन असाइन की है?”

” मैं तेरी दुश्मन, दुश्मन तू मेरा
मैं नागिन तू सपेरा, मैं नागिन तू सपेरा।”

नेहा के यह बताते हैं अनिर्वान को हंसी आ गई। उसने गर्दन को झटक कर नेहा की बातों को झटका दिया और गीता की तरफ मुंह घुमा लिया।

” हां तो गीता जी, मैं आपसे जानना चाहता था कि अखंड के केस के पीछे की सच्चाई क्या है? गोलू ने जितना हो सकता था, मेरी मदद की है और वह जितना सच जानता था उसने बता दिया। लेकिन अब भी इस केस में कई ऐसी सारी बातें हैं जो आप ही बता सकती हैं।
क्या आप सच बताने के लिए तैयार है?”

गीता ने अनिर्वान की तरफ देखा और धीरे से हां में गर्दन हिला दी।

“लेकिन गीता जी इस सब में कहीं आपके पति का कोई नुकसान तो नहीं होगा ना।”

अनिर्वान के सवाल पर गीता जमीन की तरफ देखने लगी।

” सर धीरेंद्र वह आदमी है जो अपने फायदे के लिए अपने बाप का भी गला काट सकता है। उससे बढ़कर स्वार्थी इंसान हमने अपनी जिंदगी में आज तक नहीं देखा। अखंड जैसे सच्चे और धर्मात्मा इंसान को उसने पूरी दुनिया की नजरों में हैवान बनाकर छोड़ दिया। अखंड तो ऐसा आदमी था कि उसने पलट कर धीरेंद्र से बदला तक नहीं लिया।
सर अगर अखंड एक बार जेल से बाहर आने के बाद कॉलेज में भीड़ इकट्ठा करके अपनी सारी सच्चाई सामने रख देता, तो सारे विद्यार्थी अखंड की तरफ चले जाते। इतनी ताकत थी अखंड में।
लेकिन उसने ऐसा नहीं किया ।क्योंकि वह वाकई दिल से बहुत सच्चा प्यारा और ईमानदार इंसान है।

जो उसका बुरा कर रहे हैं, वह उनका भी बुरा नहीं सोच सकता। सर ऐसे इंसान कभी-कभी ही जन्म लेते हैं। और ऐसे इंसानों का इस दुनिया में रहना बहुत जरूरी है। वरना धीरेंद्र जैसे लोगों के कारण ही तो पाप का बोझ बढ़ता जा रहा है। अगर अखंड जैसे इंसान नहीं होते ना तो यह धरती कब की खत्म हो चुकी होती।”

” आप अखंड को पसंद करती थी?”

” पसंद नहीं करती थी सर, प्यार करती थी। बहुत बहुत प्यार। उनकी हर एक बात से, उसकी हर एक अदा से, उसकी आत्मा से प्यार किया था सर।
   और अब भी करती हूं। सच कहूं तो धीरेंद्र से अपनी शादी भी सिर्फ अखंड के कारण निभा रही हूं। क्योंकि विश्वास था एक न एक दिन इस पापी के पाप का घड़ा फूटेगा और अब लग रहा है वह दिन करीब आ गया है। जिस दिन के इंतजार में अब तक जिंदा थी मैं।
बस अखंड को एक बार सारी सच्चाई बताना चाहती हूं।

” तो अब तक आप किस बात का इंतजार कर रही थी।”

“सर बहुत बार हम जो चाहते हैं वह करने की ताकत हममें नहीं होती..
अकेला चना भाड़ नहीं झोंक सकता, बस वैसा ही कुछ था।
   कुछ ऐसी मजबूरियां थी कि अब तक वह नहीं कर पाई जो करना चाहती थी। लेकिन अब उन मजबूरियों से बाहर आने का वक्त आ गया है। मैं क्यों मजबूर थी, मेरे साथ क्या परेशानी थी यह सारी बातें बता दूंगी।”

  अनिर्वान ने गीता की तरफ देखा और अपने कंधे पर टांग रखें बैग से छोटा सा टेप रिकॉर्डर निकालकर टेबल पर रख दिया।

” गीता जी अब आपकी और मेरी जो भी बातचीत होगी मैं इसमें रिकॉर्ड करता जाऊंगा। आपको कोई आपत्ति तो नहीं है।”

“नहीं सर बिल्कुल नहीं।”

” ओके तो हम शुरू करते हैं…।”

क्रमशः

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Sonia
Sonia
1 year ago

Kafi dino ke baad jakar apki story mili h…Best of luck👍

Siddharth Singh
Siddharth Singh
2 years ago

Very nice..as always……बहुत दिन की खोजबीन के बाद अब पता चला की अब आप यहां है।शुभकामना नई शुरुआत के लिए

Last edited 2 years ago by Siddharth Singh
Kirti Saxena
Kirti Saxena
2 years ago

अब धीरेन्द्र प्रज्ञापति के सारे राज खुलेंगे और अखंड भी सबके सामने बेकसूर साबित होगा। जिससे रेशम की भी गलतफ़हमी दूर होगी। नेहा जैसी खुद बिंदास है वैसी ही उसकी फोन की रिंगटोन मजेदार है 😆 बहुत ही बेहतरीन भाग 👌👌👌👌

Humajaved
Humajaved
2 years ago

Mam aapki iss story ko bahot mushkil se dhoonda hai yaha par,ab iska 115part nahi mil raha, please bataiye kaise milega wo hame, story bahoootttt behatreen chal rahi hai,curiousity bilkul top par bani hui hai 😊😊😊😊😊😊😊 please please please Mam 115part ka link hi send kar dijiyega

सपना श्रीवास्‍तव
सपना श्रीवास्‍तव
2 years ago

डॉ. साहिबा यहां पर मिली आप इतने दिनों बाद। बहुत मिस किया आपकों
फिर से कुसुम, भावना, अंखड, यज्ञ से मिलकर अच्‍छा लगा। ढेरों शुभकामनाएं आपकों

S Murmu
S Murmu
2 years ago

Ab aayega maza jab , Dhirendra Prajapati ka khulega kachha chittha.mazedaar part. Neha intelligent hai aur sath mein hazir jawab bhi .Anirwan aur Neha ki Jodi acchi hai.

Arun Kumar
Arun Kumar
2 years ago

🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻

Varsha
Varsha
2 years ago

Aparna G..mazedaar part as usual..

Manu verma
Manu verma
2 years ago

लाजबाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻💐💐💐⭐⭐⭐⭐⭐

कांति
कांति
2 years ago

बेहद शानदार भाग मतलब मज़ा ही आ गया गीता अब सारे राज़ खोलेगी और धीरेन प्रजापति का राज़ ख़त्म हो जायेगा।
फाइनली अखंड अब रेशम के सामने पाक साफ़ होगा।
अथर्व के सामने भी रेशम का सच आने वाला है।👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻

Savita Agarwal
Savita Agarwal
1 year ago

Very interesting and very good n Shandaar and Jaberdast part