जीवनसाथी-2/35


जीवनसाथी -2  भाग  -35

दोनों कार में बैठे घर की तरफ बढ़ रहें थे!  पिया ने सारे गिफ्ट्स पीछे की सीट पर डाल दिये थे.. लेकिन ठीक निकलते वक्त सीनियर सिस्टर ने उसके हाथ में एक बहुत प्यारा सा गुलाबी छोटा सा लिफाफा पकड़ाया था… उसे पिया ने पर्स में डाल लिया था…
बाक़ी गिफ्ट्स तो पीछे थे पर उस लिफाफे की भी पैकिंग इतनी खूबसूरत थी कि पिया उसे खोल कर देखने से खुद को रोक नहीं पाई और उसने धीरे से पर्स की चेन खोलकर वो लिफाफा निकाल लिया…

” क्या है इसमें.. ? जो आप इतनी बेकरार हुई जा रही है देखने के लिए..?”

” वहीं तो देखना है कि इतनी सुंदर पैकिंग के अंदर आखिर है क्या..?”

” हां और दिया भी तुम्हारी फेवरेट सिस्टर लूसी ने है..!”

” करेक्ट…! इसलिए तो मन और भी ज्यादा तड़प रहा है कि मेरी फेवरेट सिस्टर आखिर मुझे क्या गिफ्ट दे सकती है…?”

पिया ने बहुत नजाकत से लिफाफे को खोला और जैसे ही उसकी लिफाफे के अंदर रखे सामान पर नजर पड़ी उसने चौंक कर समर की तरफ देखा….

समर कुछ गुनगुनाते हुए गाड़ी चलाने में मगन  था…

राहत की सांस लेकर पिया ने वापस उस सामान को अपने पर्स में डाला और चेन खींच कर चुपचाप बैठ गई……

दोनों कुछ देर में घर पहुँच गए… बड़े अरमानो के साथ पिया सीढ़ियां चढ़ ऊपर अपने कमरे में जाने को थी कि उसकी सास ने उसे बुला लिया..

” पिया यहाँ आना ! आओ ये सभी लोग तुमसे मिलने आई है…!”

मन मसोस कर पिया अपनी सास कि तरफ बढ़ गयी…
उसने देखा पुरे हॉल के सोफों पर अलग अलग आकार प्रकार कि महिलाएं विराजमान थीं…  सिल्क और बनारसी साड़ियों कि लसर फसर के साथ उनके सोने चांदी कुंदन के गहने यूँ झिलमिला रहें थे जैसे किसी सुनार कि दुकान कि आलमारी…
   कोई उसे देख मुसकरा रहीं थी तो कोई घूर रहीं थी पर सभी में कॉमन बात एक ही थी कि सभी उसे ही देख रहीं थी ! ऊपर से नीचे तक,…
   जैसे नयी दुल्हन का स्कैन कर रहीं हों कि क्या क्या मिसिंग है इस नवेली में… ?
  बिछुवे पहने है या नहीं.?  पायल कितनी चौड़ी है..? सोने के कंगन का सोना कितना खालिस है?  कान के झुमके कहीं नकली तो नहीं..?  हालाँकि समर के परिवार के रुतबे के सामने दुल्हन नकली गहने तो क्या ही पहनेगी..?
    अगर मायके से गरीब भी हुई तो समर कि माँ ही लाद देगी गहनों से…
   सब उसे घूरती आपस में खुसुर फुसुर भी कर रहीं थी… वो चुपचाप अपनी साड़ी का आंचल समेटे एक तरफ बैठने को थी कि समर कि माँ ने टोक दिया…

“अरे बहु,  सब के पैर तो छू लो… मेरी किटी कि सहेलियाँ हैं भई, इस हिसाब से तुम्हारी मौसी सास हुई ये सब.. !”

पिया ने मुस्कुरा कर हाँ में गर्दन हिलायी और एक एक कर उन सत्रह औरतों के पैर छू कर बैठने को थी कि उनमें से एक ने टोक दिया…

” दीदी बहु के हाथ कि चाय न पिलवाएंगी आप.. ?”

उनमें से किसी एक ने समर कि माँ से चाय कि गुहार लगा दी… पिया ने  देखा पहले ही सामने रखे टेबल पर ढेर सारा सामान सजा था, उन औरतों के चाय का एक राउंड पहले ही निपट चुका था ! सब के नाश्ते की प्लेट टेबल पर खाली पड़ी रखी थी ! उसके अलावा नमकीन काजू पिस्ते, मिठाईया, विदेशी चॉकलेट्स से सारा ट्रे सजा पड़ा था उसके बावजूद इन सब को वापस चाय पीनी थी….

समर की मां ने तुरंत हामी भरते हुए पूरे आत्मविश्वास के साथ पिया की तरफ देखा और उसे रसोई में जाने का इशारा कर दिया, और वापस मुस्कुरा कर अपनी सखियों के साथ बातों में लग गई….

पिया अपने मन को कड़ा कर वहां से उठकर रसोई की तरफ बढ़ गई…  उसकी समझ से बाहर था कि कितने बड़े घर की औरतें भी क्यों ऐसी कुंदबुद्धि हुआ करती है.. ?
   उन लोगों को यह क्यों नहीं नजर आ रहा कि सुबह से सिर्फ नाश्ता करके निकली बहू शाम को अपना काम निपटा कर घर लौटी है, उसे भी तो दो घड़ी चैन ले लेने देना चाहिए…
    सुबह के पहने कपड़े उसने अब तक बदले नहीं थे.. उसे बाथरूम जाने की बहुत जरूरत थी , हाथ पैर धोना था चेहरे को धोना था..
जिससे वह फ्रेश महसूस कर सके, लेकिन इस सबके बावजूद उसे अपने कमरे में जाने देने से पहले ही उसकी सास ने अपनी सहेलियों से मिलवाने के लिए रोक लिया और सहेलियां भी कैसी उसे ही घूर घूर कर देख रही थी….?

उसके शरीर पर के गहनों और उसकी साड़ी की महंगाई से उसके व्यक्तित्व को आंक रही थी…

बुझे मन से पिया रसोई में चली आई…
  रसोई में काम करने वाली तुलसी रसोई में खड़ी रात के खाने की तैयारी कर रही थी…
उसे रसोई में घुसते देख तुलसी चौक गई…

” भाभी क्या चाहिए आपको..? मुझे बुला लिया होता, मैं बाहर ही ले आती, अगर कुछ चाहिए था तो..?”

“कुछ नहीं तुलसी,  मैं यहां चाय बनाने आई हूं..!”

” अरे चाय आप काहे बनाएंगी ?  मैं हूं ना बनाने के लिए..!”

” नहीं मम्मी जी ने कहा है मुझे बनाने के लिए… एक्चुली उनकी सहेलियां है ना, उनके लिए बनानी है चाय!”

” एक और चाय ?  इन सब को आते साथ हमने खूब सारा पका कर खिलाया है भाभी… पहले मूंग कचौड़ी और आलू की चाट, फिर दही भल्ले और पालक के पकौड़े, उसके बाद रसमलाई और समोसे तो अब तक चल ही रहें, इस सब के बीच चाय भी बना कर पिला चुके अब आपको देख कर फिर चहास जाग गयी.. !”

पिया अपने हाथ धोने के बाद वहीँ रखा एप्रन पहनते हुए गैस चूल्हे तक चली आई…

“कोई बात नहीं तुलसी ! चाय बनाने में मै कौन सा पिघल जाउंगी… अब तक फ़्लैट पर अकेली ही तो रहती थी.. तब वहाँ अपना सारा काम मै खुद करती थी.. !”

“हाय राम सच्ची.. ! “.

“और नहीं तो क्या..? बस बर्तन झाड़ू वाली आती थी.. बाक़ी खाना नाश्ता मै ही करती थी..!
    नौकरी करती हूँ इसका मतलब ये नहीं है मैडम की मुझे रसोई नहीं आती…!
   इंजेक्शन लगा सकती हूँ तो बेलन पकड़ कर रोटी भी बेल सकती हूँ….! हाँ शादी से पहले इतना सब नहीं आता था, असल में कभी ध्यान ही नहीं गया था की खाना भी इतना महत्वपूर्ण होता है..!. फिर जब मंत्री जी से सगाई हुई और सासु माँ से बातचीत, तब समझ में आया की लड़की का बैंक बेलेन्स कुछ भी हो रोटी गोल बेलनी आनी मेंडेटरी है वरना ससुराल में एडजस्ट करना मुश्किल है…!”

“ओहो तो ये सब भैया जी के लिए सीखा है आपने.. !”

पिया उसकी बात सुन मुस्कुराने लगी…

“और नहीं तो क्या.. ? ख़ूब पापड़ अरे नहीं ख़ूब रोटियां बिलवायी है आपके भैया जी ने.. !”

“लेकिन भाभी, एक बात नहीं समझ आई… आप पढ़ी लिखी हो, सुन्दर हो,  इसके बावजूद आपको इतना सब सीखना पड़ा, भैया जी ने तो कुछ भी ऐसा अलग से नहीं सीखा आपको पाने के लिये… ! वैसे अम्मा जी भी अपने सासपने पर उतर ही आई !”

बेख्याली में पूछा गया तुलसी का सवाल पिया को एकबारगी झकझोर गया……

“क्योंकि मंत्री जी हर बात में परफेक्ट है… और अगर उनका बस चलता तो… यहाँ भी कूद पड़ते.. !

पिया अभी अपनी बात कह भी नहीं पायी थी की रसोई का पिछले दरवाज़ा खोल कर समर अंदर हाज़िर हो गया…

  पिया स्लैब पर बर्नर की तरफ मुहं किये खड़ी थी.. उसने समर को नहीं देखा था, पर तुलसी ने देख लिया, और उसे हंसी आने लगी.. समर ने उसे चुप रहने का इशारा किया और चुपके से पिया के पीछे पहुँच कर खड़ा हो गया…
   गैस बर्नर के पास खड़ी पिया को गर्मी लग रहीं थी… उसने अपने बालों को पकड़ा और ऊपर उठा कर क्लिप करने के लिए कुछ ढूंढने लगी…

“तुलसी देख तो कुछ बाल में फंसाने के लिए है क्या.. ?”
  समर ने वहीँ रखीं पाउच पैकर को उठा कर धीमे से पिया के सामने बढ़ा दिया और मुड़ कर उसे देखे बिना ही पिया ने उसे लेकर अपने बालों को ऊपर क्लच कर लिया…
  समर के इशारे पर तुलसी चुपके से बाहर निकल गयी…

उसी वक्त पिया ने उसे आवाज़ लगा दी..

“तुलसी देख चाय पत्ती का अच्छा रंग आ गया है, मुझे ज़रा सी अदरक पकड़ाना तो.. !”

समर ने इधर उधर देखा फिर फ्रिज खोल दिया… खोलते ही सामने एक बॉक्स में रखी अदरख भी उसे दिख गयी और समर ने पीछे लगे सिंक से धोकर अदरक भी पिया के सामने बढ़ा दी…

पिया ने अदरक कूट कर डालने के बाद तुलसी से इलायची मांगी और समर ने एक डिब्बी उसके सामने कर दी… इलायची के बाद पिया ने चाय में दूध डालने के बाद चाय को चलाने के  लिए चम्मच निकाला और चलाते हुए तुलसी से बात भी करने लगी…

“तुलसी तू जो बोल रहीं थी न की मम्मी जी अपना सास वाला रंग दिखने लगी, मै तेरी इस बात से सहमत नहीं हूँ… अब देख, आज तक मेरे आने के पहले वो इस घर की बहु थी.. उनके ऊपर ढ़ेर सारी ज़िम्मेदारियों का बोझ था, और फिर आस पड़ोस सब उन्हें ही अकेले देखना निपटाना पड़ता था,  और उस पर ये लोग ठहरे महल के संबंधी, तो वहाँ से भी संबंध निभाने की ज़िम्मेदारी थी…
  इस सब के बाद एक इकलौते लड़के ने भी अपनी पसंद की शादी रचा ली… अब इन सब बातों के साथ वो भी तो एडजस्ट कर रहीं है…
   सास होना भी आसान कहाँ होता है तुलसी ! अपने ऊपर लेकर सोच कर देख तब समझ आएगा… अब आज अगर उनकी सखियों में से किसी ने कह दिया की मेरे हाथ की ही चाय पीनी है, तो मम्मी जी कैसे मना करती भला ..
अगर उन सबके सामने मुझे चाय बनाने से मना करती तो वो भी अच्छा नहीं लगता.. उनकी सखियाँ बुरा मान जाती…!
   तो वो भी क्या करें आखिर… ?
  और एक बात कहूं तुलसी !  अपने इकलौते बेटे को किसी और लड़की के हाथ में सौंप देने के लिए जिगर तो चाहिए ही होता है… इसलिए मुझे वो गलत नहीं लगती.. !
  बाक़ी मेरी पूरी कोशिश यही रहेगी कि मेरे कारण उनका रुतबा उनकी इज्जत कहीं भी कम न हो… मै उनका पूरा पूरा ख्याल रखने कि कोशिश करुँगी…

    गर्मी के कारण पिया कि पीठ पर हल्का सा पसीना छलक आया था.. समर ने आगे बढ़ कर उसकी पीठ पर फूँक मारनी शुरू कर दी…

   पिया को कुछ देर तक तो समझ नहीं आया कि क्या हो रहा, उसे लगा पीछे के दरवाज़े से ठंडी हवा का झोंका आ रहा, लेकिन फिर तभी उसे लगा उसकी पीठ पर कुछ रेंग रहा है…
   समर ने वहीँ रखी एक धनिये कि डंठल उठा ली थी जिसे पिया कि पीठ पर फेर रहा था….
 
“क्या कर रहीं है तुलसी ? हट परे.. मुझे गुदगुदी हो रहीं है… !”

   समर अपनी हंसी दबाये धीरे से अपनी उँगलियाँ उसकी पीठ से होते हुए उसकी गर्दन तक लें जाने लगा… कि तभी पिया पीछे मुड़ने को हुई और उसे मुड़ने न देते हुए पीछे से समर ने पकड़ लिया…
   वो चौंक कर ज़ोर से चिल्लाने को थी कि समर ने उसके मुहं पर हाथ रखा और उसे धकेलने के चक्कर में पिया से वही रखा एक बर्तन ज़ोर से नीचे गिर गया… पिया पीछे पलटी और समर को खड़ा देख आश्चर्य से उसकी ऑंखें चौड़ी हो गयी…

  उसी वक्त बाहर से उसकी सास कि आवाज भीतर चली आई…

“क्या हुआ बहु.. क्या गिरा दिया… ?”

“कुछ नहीं मम्मी जी, एक बिल्ली मेरा मतलब बिलौटा आ गया था… !”

तभी समर ने धीमें से भौंकने कि आवाज़ निकाली और पिया कि हंसी छूट गयी… -“इडियट..!  ये बार्किंग है, बिल्लियाँ ऐसे थोड़े बोलती हैं… !”

“तो कैसे बोलती है बिल्लियाँ !”

समर ने पिया को बाँहों में भरते हुए पूछा और पिया उस से पीछे हटते हुए उसे छेड़ने लगी… -” बिल्लियाँ तो मिआउं करती है.. !”

“अच्छा ! ज़रा एक बार और करना मेरी जंगली बिल्ली.. !”

समर पिया पर झुकता चला गया… और तभी तुलसी रसोई में चली आई…

उन दोनों को गले से लगे देख वो खांसने लगी…
उसकी आवाज़ सुनते ही दोनों छिटक कर एक दूसरे से दूर हो गए….

” सॉरी भैया जी.. वो बाहर सब पूछ रहें चाय है या बीरबल की  खिचड़ी… ?”

” बीरबल की खिचड़ी ही है.. बता दो जाकर !”  समर ने चिढ कर जवाब दिया और पिया को ऊपर आने का इशारा कर बाहर निकलने लगा… -” मेरी और अपनी चाय लेकर रूम पर ही आ जाना पिया ! मै वेट कर रहा हूँ !”

पिया ने चुपचाप हाँ में सर हिलाया और चाय छानने के लिए मुड़ी ही थी कि उसने देखा तुलसी सबकी चाय छान कर ट्रे में कप सजा चुकी थी… एक छोटी ट्रे पिया कि तरफ बढ़ा कर वो मुस्कुरा कर उसे छेड़ती हुई बाहर निकल गयी…

“जाइये जाइये भाभी, आप अपने सैंया जी को चाय पिलाइये वरना कहीं मुझ पर नाराज न हो जाएँ कि मैंने आप दोनों को डिस्टर्ब कर दिया… !”

“चुप पगली ! ऐसा कुछ नहीं है और सुन ये सब बाहर किसी से कहने कि बात नहीं है.. !”

“क्या सब भाभी.. ?”

“यही, जो अभी अभी देखा तूने.. !”

“क्या भाभी… ?”

“अरे समर जो मुझे किस…

उसके आगे पिया कुछ बोल नहीं पायी और उसे तुलसी कि शरारत समझ में आ गयी…
उसने मीठे से गुस्से से तुलसी को देखा और रसोई से बाहर निकल गयी…

वो दोनों एक साथ ही बाहर वाले हॉल तक चली आई…

“मम्मी जी, आप कहें तो मै समर को चाय ऊपर ही दे आऊं.. !”

“हाँ जाओ,  वो भी थका हारा आया है.. !”

पिया के चेहरे पर मुस्कान चली आयी… चलो बहु की  थकान भले न दिखी हो, पर बेटे की तो दिखी…

वो सीढ़ियां चढ़ ही रहीं थी कि वहाँ बैठी किसी औरत ने पूछ लिया…

“हाय तेरी बहु अपने पति का ऐसे नाम लेती है.. हाँ भई आज कल की छोरियां हैं, पढ़ी लिखी है, कमाती हैं, सब कुछ बराबरी का जो हो गया है, तो नाम ही लेंगी न.. !”

पिया ने ऊपर चढ़ते हुए हल्के से नीचे झांक कर देखा और उसी वक्त समर की माँ ने भी ऊपर उसे देखा और पिया अपने कमरे में चली गयी…

क्रमशः

aparna…

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