व्रत

व्रत  by aparna


                              व्रत

       ” निक्की कल कौन सा दिन है?”

      डिंकी ने निक्की की तरफ देखकर पूछा और     

निक्की ने सामने वाले घर को देखते हुए ही बड़ी मीठी सी        आवाज में जवाब दिया

     “शुक्रवार है दी..।”

       “हम्म..!”

*****

       वह दोनों बहने थी..
डिंकी बड़े भाई कि बेटी थी और निक्की छोटे भाई की..!
दोनों भाइयों मैं अगाध प्रेम था, दोनों के घर भी एक ही डिजाइन के बने हुए थे। बड़े भाई के घर के ठीक अगली गली में छोटे भाई का घर था। दोनों का खाना पीना, उठना बैठना, तीज त्योहार मनाना सब कुछ साथ-साथ होता था।

कोई भी त्यौहार हो छोटे भाई का पूरा परिवार बड़े भाई के घर चला आता था। और फिर जेठानी और देवरानी मिलकर सारी तैयारी में जुट जाती थी।
और सारे भाई-बहन एक साथ हुड़दंग मचाने लगते थे। डिंकी निक्की से कल जमा तीन साल बड़ी थी। लेकिन निक्की की गुल्लक में सारे ज्ञान के सिक्के डिंकी के ही जमा किए हुए थे।

निक्की डिंकी को खूब मानती थी। डिंकी भी निक्की को अपनी छोटी बहन समझ कर प्यार किया करती थी लेकिन धीरे-धीरे एक उम्र ऐसी आई, जब दोनों में बहनापे से ज्यादा दोस्ती की भावना जागने लगी।

    डिंकी का एक छोटा भाई था गुल्लू और निक्की की छोटी बहन थी चिक्की।
गुल्लू और चिक्की को अपनी दोनों बड़ी बहनों से कोई खास लेना देना नहीं था।  उन दोनों की अपनी अलग दुनिया रहती थी। लेकिन जैसे-जैसे डिंकी और निक्की बड़ी होने लगी थी, दोनों के विचारों में जरा परिवर्तन आने लगा था।

डिंकी अब कॉलेज के पहले साल में पहुंच चुकी थी। और निक्की ग्यारहवी कक्षा का एग्जाम देने वाली थी। अक्सर शाम के समय निक्की अपनी ट्यूशन से लौटने के बाद अपनी बड़ी मां के घर चली आया करती थी। और उसके बाद दोनों बहने छत पर खड़ी बातों में लग जाया करती थी।

डिंकी अपने कॉलेज के किसे सुनाया करती थी, और निक्की बड़ा स्वाद ले लेकर वह सारे किस्से सुना करती थी। लेकिन असल में दोनों का ही ध्यान घर के ठीक सामने बने मैदान पर जमा रहता था….

वहां उस वक्त मोहल्ले के लड़के क्रिकेट खेला करते थे।
सुहास भी उन्हीं में से एक था!!

उसकी बैटिंग बहुत गजब की थी। लंबा सा सुहास जब दोनों हाथों में बैट को कस कर पकड़ के पैरों को आधा झुका कर अपने शरीर को एक तरफ तिरछा करके बैटिंग के लिए पोजीशन लेता था, तो दोनों बहने एकटक उसे देखा करती थी।
    बॉल जैसे ही सुहास की तरफ आता, वह बल्ले को गोल घुमा कर हवा में दूर तक उस बाल का शॉट लगा दिया करता था। और दोनों बहनों का दिल उस बॉल के साथ उछलता हुआ मैदान के दूसरे सिरे पर पहुंच जाया करता था।

दोनों ही सुहास को आंखों ही आंखों से अपने दिल में उतारती चली जा रही थी। लेकिन आश्चर्य की बात यह थी कि एक दूसरे से सब कुछ साझा करने वाली वह दोनों जुड़वा सी लगने वाली प्यारी बहने अब तक सुहास के प्रति अपने हृदय की दुर्बलता को एक दूसरे से साझा नहीं कर पाई थी।

सुहास डिंकी के घर के दो घर छोड़कर रहने आया था। लड़का बीए फाइनल ईयर में था, और यूपीएससी की तैयारी कर रहा था।
यूपीएससी की तैयारी ही अपने आप में उस लड़के की कमीज पर लगा एक बड़ा सा तमगा था। आस पड़ोस में जो सुनता वही आश्चर्य से अपने मुंह पर हाथ रख लेता।

  “अरे वाह शुक्ला जी का लड़का यूपीएससी की तैयारी कर रहा है। बहुत बढ़िया!”

” एक कलेक्टर तो हमारे मोहल्ले से भी बनना ही चाहिए  वरना आजकल डॉक्टर इंजीनियर की तो भीड़ हो गई है। जिस घर देखो एक इंजीनियर और हर दूसरे घर में एक डॉक्टर।”

मोहल्ले में जितने लोग, उतनी बातें होती थी।
लेकिन एक आम सी बात यह थी कि यूपीएससी की तैयारी का तसला उठाए हुए सुहास हर किसी की नजर में चढ़ गया था।

उस निरीह को खुद को भी नहीं मालूम था कि उसकी दो दबी छिपी सी प्रंशसिकाएँ सिर्फ उसे देखने के लिए रोज अपनी छत पर खड़ी तपस्या करती थी..।

शाम का अँधियारा छाते ही उन सुघड़ लड़कियों को मच्छरों का भोजन भी बनना पड़ता था, लेकिन किस कमबख्त को फर्क पड़ता था..?
जब तक लड़को की टोली वहाँ बैट बल्ला घुमाया करती, तब तक दोनों लड़कियाँ इधर उधर की बतकही में अपने समय का सदुपयोग करती..।

अँधेरा छा जाने पर ही सीढ़ियां उतरती..।
दोनों का ये नियम बन चुका था.. रोज़ शाम डिंकी शिद्द्त से निक्की का इंतज़ार करती और निक्की भी चाहे अगले दिन कितना भी ज़रूरी इम्तेहान हो या घर पर कितना भी करीबी रिश्तेदार हो, सबको धता बता कर अपनी डिंकी दी के पास पहुँच ही जाती…

दोनों की प्रेम लीला बेखटके चल रही थी..।
प्यासी नदिया समंदर से मिलने बह रही थी, लेकिन इतने पास पास खड़े होने पर भी दोनों एक दूजे के दिल में छिपी चाह को पढ़ नहीं पा रही थी। 

फिर एक दिन निक्की के घर उसकी पड़ोस में रहने वाली विभा चाची आयी..
विभा चाचा उसकी मां को अपने किसी व्रत उपवास के उद्यापन में बुलाने के लिए आई थी..
विभा निक्की की रिश्ते में चाची नहीं लगती थी, लेकिन गली पड़ोस मोहल्ले की रवायतों के कारण निक्की उन्हेँ चाची बुलाती थी..

उनके आने पर उन्हेँ बैठा कर वो अपनी माँ को बुला लायी.. निक्की वहीँ बैठ कर स्टारडस्ट के हिंदी संस्करण के पन्ने पलटने लगी..।

” भाभी जी कल शुक्रवार का उद्यापन कर रही हूं, आपको जरूर आना है..!”

” हां विभा जरूर आऊंगी, वैसे कितने शुक्रवार की मन्नत की थी तुमने?”

“भाभी जी इक्कीस शुक्रवार रखे थे मैंने। कल इक्कीसवा है, तो ग्यारह औरतों को भोजन करवा कर दान दक्षिणा कर व्रत उद्यापन कर लुंगी.. !”

“बहुत बढ़िया.. मैं खुद बहुत दिनों से सोच रही हूं कि यह व्रत कर लूं। सुना है बहुत चमत्कारी व्रत है। इसे करने से हर मन्नत पूरी हो जाती है।”

” हां भाभी, अब क्या बताऊं?
मैंने तो जब-जब यह व्रत किया है, मेरी तपस्या हर बार फलीभूत हुई है। एक बार मैं एक शादी में गई थी, वहां मेरे गहनों की पोटली खो गई। जब इन्हे बताया तो यह उल्टा मुझ पर ही उबल पड़े। ससुराल पक्ष की शादी थी, किसी से कुछ बोलते नहीं बना।
लेकिन वापस लौटते वक्त यह रास्ते भर मुझे ताने मारते रहे। इतनी महंगी पोटली गंवा कर आ गई।

   घर आकर मैंने मन ही मन संकल्प लिया और अगले दिन से व्रत शुरू कर दिया। आप यकीन नहीं मानोगे व्रत का पहला दिन ही हुआ था कि रात में जैसे ही मैंने प्रसाद ग्रहण किया, मेरी सास का फोन आ गया कि तुम्हारी गहनों की पोटली बुआ जी को मिल गयी है..।
मैं बता नहीं सकती भाभी इतना सुकून लगा ना।
     यह भी खुश हो गए। अगले दिन मेरी बुआ सास खुद ट्रेन पकड़ कर मेरे पास आई, और गहनों की पोटली लौटा गई। उन्होंने बताया कि जिस कमरे में हम औरतों को ठहराया गया था, वही अलमारी की पिछली तरफ जाने कैसे वह पोटली पड़ी थी।
         शादी ब्याह निपटने के बाद जब उन्होंने सफाई करवाई तब वहां से पोटली मिली। मुझे लगता है गलती से मैं ही सूटकेस खोलते समय इधर-उधर गुमा दी होगी।
इसके बाद दोबारा मेरी सोना का रिज़ल्ट ख़राब हुआ तब मैंने ये व्रत किया।
दसवीं बोर्ड के इम्तिहान में सोना पास नहीं हो पाई थी, मैंने मन्नत मान ली। पूरे इक्कीस शुक्रवार सिर्फ एक वक्त का भोजन करके मैंने व्रत किया, और चमत्कार देखो मेरी सोना दसवीं बोर्ड में पास हो गई।
मेरा तो यही मानना है कि यह व्रत चमत्कारों से भरा हुआ है। बस पूरी श्रद्धा और भक्ति से करना चाहिए। यह जरूरी नहीं है कि हर किसी की मन्नत पूरी हो, क्योंकि बहुत से लोग सिर्फ नाम के लिए भी तो व्रत करते हैं ना भाभी..।”

“सही बात है.. चाय पिओगी विभा ?”

उन्होंने विभा से सवाल पूछ लिया और विभा ने भी हामी भर दी।
     उन्होंने बड़ी गहरी नजरों से अपनी लाडली की तरफ देखा, लेकिन निक्की अपनी किताब में आंखें गड़ाए ऐसे बैठी थी जैसे उसे अपनी मां का इशारा समझ में ही नहीं आ रहा था कि उसे रसोई में जाकर चाय चढ़ाना है।
उसका ध्यान तो पूरी तरह से उस चमत्कारी व्रत पर केंद्रित हो गया था…

  दो दिन के बाद ही शुक्रवार पड़ा और उसने भी वह व्रत उठा लिया। उसकी मां खुश हुई कि चलो जो लड़की भगवान के सामने हाथ जोड़ने में कतराती थी, अचानक इतनी भक्ति भाव से परिपूर्ण हो गई की व्रत अनुष्ठान करने लगी।

उन्होंने उसका पूरा-पूरा साथ दिया।
सुबह नाश्ते में पोहे की जगह सिर्फ फल काट कर दे दिए। दोपहर स्कूल के टिफिन में उबले हुए आलू मूंगफली को घी में भूनकर सैंधव और कालीमिर्च बुरक कर दे दिया… साथ में पाइनएप्पल का मीठा रायता भी रखा|
शाम को निक्की घर आई और जैसा विभा चाची ने बताया था वैसे ही पूजा पाठ करती गई..
विभा चाची ने बताया था कि वह रात में एक वक्त भोजन किया करती थी! इसलिए निक्की भी रात में खाना खा लेना चाहती थी।

आज उसकी मां बहुत प्रसन्न थी, इसलिए उन्होंने आलू गोभी की सूखी सब्जी के साथ कटहल की तरी और पकौड़े वाली कढ़ी भी बना ली.. मेथी की पूड़ियों के साथ साथ सांवा की खीर बना ली..।

इतना सब देखकर भी निक्की की भूख गायब थी, क्योंकि फिलहाल यह वक्त उसका छत पर टहलने का था। इसलिए जल्दी-जल्दी पूजा पाठ निपटाकर वह अपनी डिंकी दी से मिलने उनके घर चली गई…।

निक्की ने यह व्रत सुहास के लिए किया था। मन ही मन उसने यही संकल्प लिया था कि किसी भी तरह से सुहास उसे मिल जाए। और इसीलिए उसने तय कर रखा था कि अपनी इच्छा वह किसी से भी नहीं कहेगी। यहां तक की डिंकी और उसकी अम्मा से तो वह व्रत के बारे में भी कुछ नहीं बताना चाहती थी।

जैसे ही वह डिंकी के घर पहुंची, वह छत की तरफ बढ़ रही थी कि उसकी बड़ी मां ने उसे आवाज लगा दी।

” अरे निक्की थम जा जरा, नीचे हमारे साथ भी तो बैठ।
     आते साथ हवा से बातें करते हुए उछल कूद मचाती सीधे छत पर जाती है। आज तेरी बड़ी बहन नीचे ही है।”

” नीचे कैसे?”

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निक्की  के लिए यह बहुत आश्चर्य की बात थी..

“आज उसका व्रत है ना, तो पूजा पाठ में लगी है।आज कॉलेज से लौटने में उसे जरा देर हो गई थी, बस इसीलिए अभी पूजा कर रही है। वरना तो पांच तक तो उसकी पूजा निपट जाती है..।”

“पूजा कर रही? वह भी शाम को? कौन सी पूजा है?”

निक्की के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी। उसे पता ही नहीं था कि उसकी बड़ी बहन डिंकी भी मनोकामना सिद्ध करने वाला व्रत किए बैठी है।
बड़ी अम्मा के चेहरे पर संतुष्टि के भाव चले आए। उन्हें अपनी बेटी डिंकी के पूजा पाठ और व्रत अनुष्ठान पर गर्व से होने लगा था, क्योंकि महीने भर पहले तक डिंकी कोई व्रत अनुष्ठान नहीं किया करती थी..

“क्यों तुझे नहीं बताया तेरी दीदी ने? ऐसे तो तुझे सब कुछ बताती है। उसने शुक्रवार का व्रत शुरू किया है। ना चार व्रत उसने कर भी लिए, आज उसका पांचवा व्रत है..।”

निक्की का दिल डूबने लगा।
उसे सुहास नाम की ट्रॉफी अपने हाथ से निकलकर चार शुक्रवार आगे खिसक कर डिंकी के हाथ में सजती नजर आने लगी।

   हे भगवान! यह क्या अनर्थ हो गया? काश विभा चाची एक महीने पहले मुझे बता देती, तो मैं पीछे नहीं रह जाती। मन ही मन बड़बड़ाती वह अपनी बड़ी मां की तरफ देखने लगी..

“बड़ा कट्टर व्रत कर रही है तेरी बहन! उसे समझाती क्यों नहीं, कि खा पीकर व्रत कर लिया करे। अभी बच्चे तो हो तुम लोग, फिर कॉलेज भी आना जाना रहता है उसे। फिर भी मेरी कुछ सुनती नहीं..।”

“कैसा व्रत कर रही है डिंकी दी..?”

“अब क्या बोलूं निर्जला समान ही व्रत कर रही है..।
सुबह एक बार जब माता रानी की पूजा करती है, तब उनका चरणामृत ही ग्रहण करती है। उसके बाद पूरा दिन पानी की बूंद तक नहीं लेती है लड़की।
फिर शाम को जो मैं पूजा के लिए प्रसाद बनाकर उसे देता हूं, उसे ही पूजा करने के बाद एक कटोरी में ग्रहण करती है। और उस समय बस एक गिलास पानी पीती है। उसके बाद फिर कुछ नहीं लेती। इतने कठिन व्रत को करने के पीछे उसकी क्या मंशा है, यह वही जाने। बल्कि मैं तो तुझे भी बोलती हूं, जरा पूछना उससे।
     वैसे पढ़ने लिखने में डिंकी ठीक ही है, मुझे लगता है इस साल पास हो जाऊं यही मन्नत मानकर उसने व्रत किया है..।”

इतनी सब गहरी बातें सुनकर निक्की का दिल अंधे कुएं में डूब कर मर गया।

उसे लगा अब उसके सामने कोई रास्ता नहीं बचा है। डिंकी दीदी इतनी कर्मठता से अगर व्रत कर रही हैं, तो उसके खाए पिए व्रत का तो भगवान कोई मोल ही नहीं देगा।

तो क्या उसे अगला व्रत करना चाहिए? या छोड़ देना चाहिए?
उसका दिल कलपने लगा।
मन मसोसने लगा। उसे लगा उठकर अपने घर चली जाए। लेकिन डिंकी से मिलने के लिए और सुहास की एक झलक पाने के लिए वह चुपचाप वहीं खड़ी रह गई। कुछ देर बाद ही डिंकी अंदर के पूजा कमरे से बाहर निकल आई। निक्की पर नजर पड़ते ही डिंकी के चेहरे का रंग सफेद पड़ गया।
जैसे उसकी चोरी पकड़ी गई हो।
इसका मतलब डिंकी ने भी अपनी मन्नत के विषय में घर में किसी से कुछ नहीं कहा था? उसने बस व्रत शुरू कर दिया था।
निक्की ने ही डिंकी की तरफ देखकर सवाल किया..

“आप कौन सा व्रत कर रही हैं दीदी..?”

“अरे ऐसा कुछ खास नहीं, आ चल छत पर चलते हैं।”

पता नहीं क्यों लेकिन निक्की को सारी बात एकदम से समझ में आ गई। रोज उसके साथ डिंकी का छत पर खड़े होना, उसी के जैसे क्रिकेट खेलते लड़कों को देखकर उनकी बातें करना, बातों के बीच में सुहास की तारीफ करना।
   तो क्या उसी की तरह डिंकी दीदी भी अपना दिल सुहास को दे बैठी थी?

हे राम कहां जाकर मरूं?
  सुहास मेरा पहला प्रेम है, मैं उसे डिंकी डी के हाथों में नहीं दे सकती। माता रानी मुझे माफ करना, आज मैंने फल और आलू खा लिए, यहां तक की मां ने इतना सारा खाना बनाया है कि उसे भी अब मुझे खाना ही पड़ेगा। इसलिए मैं इस शुक्रवार को अपने व्रत की गिनती में नहीं रखूंगी। अगले शुक्रवार से पानी की एक बूंद लिए बिना मैं आपका व्रत उठाऊंगी। और पूरे इक्कीस शुक्रवार आपकी मन्नत को इतनी ही कठिनाई से पूरा करूंगी।

फिर तो मुझे डिंकी दीदी से ज्यादा फल दोगी ना आप?
मन ही मन बङबङाती हुई वह सीढ़ियां चढ़कर अपनी डिंकी डी के साथ छत पर चली आई।
दोनों बहने एक बार फिर अपनी पसंदीदा जगह पर जाकर खड़ी हो गई। वह जगह जहां से सुहास उन्हें साफ-साफ नजर आता था। लेकिन यह क्या आज सुहास के साथ कोई लड़की खड़ी थी, जो बडी अदाओं के साथ लटके झटके दिखाते हुए उससे बातें कर रही थी..

दोनों बहनो की आंखे बडी हो गयी..

“ये कौन है निक्की ?”

“पता नहीं दी.. आज पहली बार दिखी है !”

“हम्म.. सुहास की कोई बहन तो है नहीं ?”

“हाँ, एक मौसी की लड़की आती है कभी कभी, पर ये वो नहीं है !”

“शक्ल सूरत से भी सुहास की रिश्तेदार नहीं लग रही !”

“हाँ कहीं से ‘उनके’ जैसी नहीं लग रही.. !” निक्की का उनके कहना डिंकी को विस्मय में डूबा गया, उसने तुरंत निक्की को पलट कर देखा और तभी डिंकी का ध्यान निक्की के माथे पर लगे कुमकुम के तिलक पर चला गया..

” यह कुमकुम माथे पर क्यों लगाया है निक्की..?”

कहना तो झूठ चाहती थी निक्की, लेकिन उस व्रत की पुस्तक में लिखा था की व्रत वाले दिन किसी से झूठ नहीं बोलना चाहिए।
बेचारी ने अपनी दी कम सौत के सामने सच कबूल लिया.. -“आज से शुक्रवार का व्रत शुरू किया था दी.. बस वही पूजा कर के आयी हूँ !”

“ओहो.. देख रही आजकल मेरी बहन मुझसे बातें छुपाने लगी है, मुझे तो नहीं बताया कि तूने व्रत किया है?”

” आपने कौन सा मुझे बताया? मैंने तो फिर भी आज ही व्रत शुरू किया और आज आपको बता दिया। लेकिन आपके तो पांच व्रत निपट गये, तब जाके बताया।
आपने मुझे पता तक चलने नहीं दिया, आखिर कौन सी मन्नत पर आप शुक्रवार का व्रत कर रही है,मुझे भी तो पता चले.. ।”

” हां हां बता दूंगी, छुपाने वाली कोई बात भी नहीं। लेकिन मैं भी तो जानू की तूने किस मन्नत में यह व्रत किया है? मैं बड़ी हूं मुझे जानने का हक पहले है !”

” जैसे आपको जानने का हक पहले है, वैसे ही बताने का हक भी आपका ही पहले है। आप बताइए फिर मैं बताऊंगी..।”

दोनों ही बहने अपनी अपनी बातों के जाल में बुरी तरह फंस गई। आज व्रत था, इसलिए झूठ बोलने वाले को माता रानी माफ नहीं करने वाली थी।
बस इसीलिए दोनों ही अपनी इस बात पर अङी रही कि पहले सामने वाली अपनी मन्नत बताएगी। आखिर अंधेरा ढल गया और दोनों में से किसी ने अपनी मन्नत का ढोल फटने नहीं दिया..।

दोनों भारी मन से नीचे उतर आयी, लेकिन आज इस पल के बाद दोनों की गहरी दोस्ती के बीच उन दोनों का गहरा प्रेम यानी सुहास बड़े आराम से हाथ बांधे  चला आया..

निक्की अपने घर लौट गयी!
अगली शाम वो नहीं आयी, डिंकी का भी मुहं फुला पड़ा था, वो भी नाराज़गी में अपनी चाची के घर नहीं गयी..
ऐसे ही चार दिन बीत गए.. दोनों पक्की सहेलियों समान बहनो में बोलचाल भी बंद हो गया!

और फिर एक अनर्थ घट गया..!!

शाम के वक्त निक्की स्कूल से लौटी ही थी, उसकी माँ उसे पानी का गिलास थमा कर रसोई में उसके खाने के लिए कुछ लेने जा रही थी कि विभा चाची चली आयी..

“हाय भाभी कुछ सुना आपने ?”

“नहीं विभा.. क्या हुआ ?”
.
“अरे वो शुक्ला जी का लड़का है ना सुहास.. !”

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विभा चाची की ये बात सुनते ही निक्की के कान खड़े हो गए..

“क्या हुआ उन्हेँ !” निक्की पूछ बैठी.. उसका सवाल सुन विभा के साथ उसकी माँ भी आंखे फाडे उसकी तरफ देखने लगी..
विभा ने उसे देखा और वापस उसकी माँ को देख कर निक्की को अंदर भेजने का इशारा किया..

“जा निक्की तू यूनिफार्म बदल ले !”

निक्की गर्दन झुकाये अंदर चली गयी लेकिन कमरे के अंदर घुसते ही वो दरवाज़े पर कान लगाए खड़ी हो गयी..

“वो चौरसिया जी है ना, उनकी लड़की सनी के साथ भाग गया !”

“हाय.. ये तो बड़ा अनर्थ हो गया.. पर वो लड़का तो यूपीएससी कर रहा था ना ?”

“तैयारी कर रहा था भाभी, अब उसके घर वाले तो यही बताते थे, हमको का पता कि किस चीज में मास्टरी कर रहा छोरा !
बताओ आजकल के लड़के लड़कियाँ जात धर्म तक नहीं देखते हैं..
अब शुक्लाइन क्या करेगी? कितना पूजा पाठ करती रही, बताओ छोरे ने कहीं मुहं दिखाने लायक ना छोड़ा.. “

“छोरा नहीं छिछोरा कहो उसे!”

वो दोनों औरते रस ले ले कर सुहास की बुराइयां गाती रही, लेकिन वो दोनों ही इस बात से अनजान थी कि दरवाज़े के पीछे खड़ी निक्की का प्रेम महल रेत के घरौंदे सा बिखर गया था..

कितने प्यार से उसने तिनका तिनका जोड़कर बया की तरह अपना घोंसला बनाया था, और आज हवा के एक झोके ने उस घोसले को छिन्न-भिन्न कर दिया था…

उसे इतनी जोर की रुलाई आने लगी कि वह तेजी से बाथरूम में घुस गई। दरवाजा बंद करके पानी का नल चला कर वह जोर जोर से रोने लगी।

जब मन भर कर रो ली, तब मुंह धोकर बाहर निकली और कपड़े बदलकर बाहर चली आई।
उसके बाहर आते तक में विभा चाची जा चुकी थी। उसकी मां ने उसके लिए गरमा गरम नाश्ता बना दिया था।
नाश्ता देखकर उसकी भूख जाग गई।

कहते हैं ना प्यार भूख प्यास सब भुला देता है, लेकिन बेवफाई वही भूख प्यास दुगनी रफ़्तार से जगा देती है।

   भरपेट नाश्ता करने के बाद निक्की को याद आया कि, उसे डिंकी के पास जाना चाहिए। पूरे पांच दिन बाद वह अपनी भूली बिसरी बहन के पास पहुंच गई। डिंकी भी शायद सुहास का सच सुन चुकी थी।

वह उदास सी अपनी छत पर खड़ी थी कि तभी निक्की पहुंच गई। निक्की को देखते ही डिंकी ने आगे बढ़कर उसे गले से लगा लिया।

दोनों बहने एक दूसरे की मौन संवेदना को समझ गई।

कुछ देर बाद डिंकी ने निक्की को छोड़ा और उसे उलाहना दे दिया।

” क्यों नहीं आ रही थी, इतने दिन से?”

” तबीयत ठीक नहीं थी दीदी, वरना मैं कभी यहां आए बिना रहती हूं ?”

“ऐसे गायब मत हुआ कर, अगर नहीं आना रहता तो खबर तो कर दिया कर..।”

“सॉरी दी, अब ऐसा नहीं करुँगी..।”

दोनों के सारे शिकवे शिकायतें पल भर में दूर हो गए। और दोनों अपनी पुरानी दोस्ती के रंग में वापस रंग गई। एक बार फिर डिंकी निक्की को अपने कॉलेज के किस्से सुनाने लगी और निक्की डिंकी को अपने स्कूल के

कुछ दिनों बाद फिर वही दिनचर्या शुरू हो गयी..

रोजाना निक्की फिर डिंकी की छत पर उसके साथ खड़ी होने लगी। अब भी सामने वाले मैदान में छोटे-छोटे लड़के क्रिकेट खेला करते थे।

    एक दिन डिंकी निक्की को अपने कॉलेज का कोई किस्सा सुना रही थी। तभी एक लंबी सी बुलेट क्रिकेट के मैदान में आकर रुकी। उस बुलेट से लंबी-लंबी टांगों वाला एक लड़का स्टाइल मारते हुए उतरा और अपनी कलाई में बंधी घड़ी में वक्त देखने के बाद वहाँ दौड़ रहे बच्चों को बुलाकर कुछ पूछताछ करने लगा।

निक्की और डिंकी दोनों की आंखें और सांस इस लड़के पर जा टिकी।
लड़का देखने में वाकई खूबसूरत था। कुछ देर बाद ही उन बच्चों से बात करने के बाद वह लड़का अपनी बुलेट से धूल उड़ाते हुए डिंकी के घर के ठीक सामने वाले घर पर आकर रुक गया..

गेट के ठीक सामने अपनी बाइक खड़ी करने के बाद उसने बड़ी अदा से अपनी जुल्फे हटाई और पलट कर डिंकी की छत पर देखने लगा..

“एक्सक्यूज मी, शर्मा जी का घर यही है..?”

डिंकी और निक्की दोनों ने एक साथ गर्दन हां में हिला दी। और वह मुस्कुरा कर अपनी उंगलियों से बाय करके गेट खोल कर उस घर में घुस गया।

जाने क्यों लेकिन उन दोनों ही बहनों के दिल में एक ठंडक सी पड़ गई। चेहरे पर बेवजह की हल्की सी मुस्कान तैर गई..।

“निक्की कल कौन सा दिन है?”

डिंकी ने निक्की की तरफ देखकर पूछा और निक्की ने सामने वाले घर को देखते हुए ही बड़ी मीठी सी आवाज में जवाब दिया

“शुक्रवार है दी..।”

“हम्म..!”

डिंकी का ‘हम्म’ निक्की के दिमाग में एक बार फिर दस्तक दे गया।

लेकिन इस बार दोनों बहने एक दूसरे से छिप कर व्रत नहीं शुरू करने वाली थी!!

इति…


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Shailja Joshi
Shailja Joshi
2 years ago

Vrat laghukatha padi ……. is kahani ko padkar purane school college ke din yaad aa gaye jab hamare saath ki girls bhi isi tarah ki baaten kiya karti thi yeh umra hi kuch aisi hoti hai sambhal gaye to sahi bigad gaye to life kharab…..

कांति
कांति
2 years ago

बाली उम्र का प्यार, निक्की और dinki को ले डूबा 🤣🤣
व्रत भी रखा और बहनों की दोस्ती में दरार भी आ गई
और कबूतर किसी और के साथ भाग गया 🤣🤣
बचपना, और अल्हड़ उम्र का प्यार 👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻 बेहद शानदार लिखा 👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻

Parul
Parul
2 years ago

Didi mayanagri bhi badhai do aage

Manu verma
Manu verma
2 years ago

लाजबाब कहानी 👌🏻👌🏻👌🏻मजा आ गया पढ़कर 😊,
छोटी छोटी कहानियो में समा बांधना तो कोई आपसे सीखे 😊,।
बाली उम्र कि मुहोब्बत 😄मजेदार किस्सा दोनों बहने एक दूसरे से छुपाकर व्रत कर रही और नज़र दोनों कि एक ही पर, ये तो एक एक व्रत में ही माँ ने कृपा बरसा दी कि वो UPSE वाला किसी और संग भाग गया 😄। बच गई दोनों बहनो की दोस्ती, 🙄अरे अब कौन आया 🤔चलो अच्छा व्रत करने का फिर मौका मिल गया दोनों को 😄😄।
बहुत खूबसूरत कहानी 👌🏻👌🏻👌🏻।

Ashok Garg
Ashok Garg
2 years ago

NICE STORY

Hetal shah
Hetal shah
2 years ago

🤗👍kya yaar Aparna kaha se le aati ho ye ideas. padate padate muskan jaa he nahi rahi thi.bahug pyari story likhi bahut maja aaya.ladakiya nadani mae kya kya kar jati hain😂😂

Nisha
Nisha
2 years ago

Uff ye mohabbat 😊.pyar me log andhe ho jate hain yahan toh bina jane hi pyar ke liye vart rakha ja raha tha haye.ye suhash iski kismat kharab thi jo jaan na paya ki koi use itna chahta hai aur dono bahne kismat wali thi ki mata ki kripa se ye pyar ka bharam tut gaya.badi hi mazedar kahani thi dono bahno ki masumiyat ne dil khush kar diya.👌👌👌👌👌👌😘😘😘🥰🥰🥰

archana saraogi
archana saraogi
2 years ago

superb superb superb story

Ritu Jain
Ritu Jain
2 years ago

Very nice story

Neeta
Neeta
2 years ago

❤❤❤❤❤❤🧡🧡🧡🧡💜💜💙💙💛💛💚💚💚💚💚💚