अतिथि -72

अतिथि -72

  
   सारे पूजा पाठ सम्पन्न होते जा रहे थे, वही साथ में नाच गाना भी होता जा रहा था..
मेहंदी की शाम महिला संगीत का आयोजन भी था।
दोनों ही पक्ष का संगीत एक साथ था, जिसके लिए स्टेज सज चुका था।
दो दिन से कोरियोग्राफर सभी को नृत्य अभ्यास करवाने में लगा हुआ था।
आजकल दिखावे का चलन कुछ ऐसा हुआ है कि जिन्हे नाचना नहीं भी आता उन्हें भी ठुमके लगाना होता है।

दोनों ही पक्ष के पुरुष महिलायें अपनी तरह के गीतों में नृत्य सीख रहे थे..।
कोरियोग्राफर का नाम बल्ली था.. हर तरफ बल्ली के नारे लगे हुए थे..।

“बल्ली देखो कमर सही हिल रही न?”
“बल्ली मुझे हाथ यहाँ तक उठाना या उसके ऊपर ले जाना?”
” बली मेरे एक्सप्रेशन तो सही है न.. ?”

बल्ली बेचारा एक जान सबको संभाल संभाल के थक रहा था..।
आज शाम उसकी गहन तपस्या का फल मिलना था।
आज सबसे ज्यादा खुश बल्ली था, क्यूंकि आज संगीत के बाद अपने पैसे बटोर कर उसे इस अजायबघर से निकल लेना था..।

एक तरफ जहाँ नवयुवक और युवतियां उसे परेशान किये थे दूसरी तरफ आंटियों ने उसकी जान दबोच रखी थी ..।
बल्ली की अपनी टीम भी थी, जिसमें उसके अलावा पांच और डांसर थे, जो सभी डाँस में पीछे वाले बन कर नाचने वाले थे। और देखा जाये तो वही लोग डाँस कि लाज रखने वाले भी थे..।

डिंकी की मासी यानि विमला ने अपने लिए सोलो नृत्य का चयन किया था.. गीत था – मेरे फोटो को सीने से यार चिपका ले सैंया फेविकोल से..।

अब तक विम्मो की बेटी मंजरी का गुस्सा भी उतर चुका था, और वो भी बढ़ चढ़ कर अपने डाँस की तैयारी में लग गयी थी..।

उसने दो तीन गानों का झोल बनवाया था..
इन आँखों की मस्ती के मस्ताने हजारों है, से शुरू कर हम पे ये किसने हरा रंग डाला तक तीन चार गानों की जुगलबंदी में मंजरी नाचने वाली थी..
अब मंजरी का मन सम्भल गया था, लेकिन वो नहीं जानती थी कि उसका मन और भी ज्यादा सम्भल जाने वाला था..

उसकी नजर खाना परोसाई वाले कार्यक्रम के समय ही पार्थ पर पड़ चुकी थी, और उसे ये बन्दा जानलेवा हद तक पसंद आ चुका था।

उसकी कायदे से इन करी हुई शर्ट के नीचे सधी हुई डेनिम, बाँहों तक मुड़ी कमीज में नजर आता उसकी कलाई में बंधा रुद्राक्ष, इन सब पर वो बुरी तरह फिदा हो चुकी थी..
यूँ लग रहा था जैसे पार्थ अपनी कमीज में लटका रखे गॉगल्स में मंजरी का दिल बांधे फिर रहा है..
मंजरी भले ही उस पर दिल जान से फ़िदा हो चुकी थी लेकिन पार्थ ने अब तक उसे ध्यान से देखा भी नहीं था…।

स्टेज पर एंकर ने मंजरी का नाम पुकारा और बिलकुल किसी नवोढ़ा सी लाज की गठरी सी सिमटती मंजरी स्टेज पर पहुँच गयी!
लेकिन ये लाज लज्जा का कार्यक्रम सिर्फ स्टेज पर पहुँचने तक का था, उसके बाद तो उसके अंदर शकीरा की आत्मा चली आई..।

हुआ कुछ यूँ कि उसने अपने उमराव जान नृत्य के लिए सधी हुई पोज़िशन ली और बैठ गयी, लेकिन गाना बजाने वाले भैया के पास से वो गाने ही छूमंतर हो गए..।

कुछ सेकंड्स तक चेहरे पर घूंघट डाले मंजरी बड़ी शिद्दत से अपने गानो का इंतज़ार करती रही, लेकिन जब डीजे वाले बाबू उसका गाना नहीं बजा पाए तो वो तमतमाते हुए उठ कर उनके पास चली आई..
गुस्से में वो बम की तरह फटने ही वाली थी कि पार्थ की गहरी सी आवाज़ उसके कान में मधुरस घोलती चली गयी..

“क्या हुआ यार शैली, गाने नहीं मिल रहे क्या मैडम के ?”

“हाँ यार पार्थ मैशअप बनाया था, पता नहीं कहाँ खिसक गया.. !”

पार्थ ने परेशानी भरी आंखे मंजरी पे टिका दी, मंजरी खिल कर गुलाब हो गयी..।

“कोई बात नहीं, जो मिल जाए हम तो उसी पर कर लेंगे !”

“अरे वाह.. सच में ?” पार्थ ने पूछा और आंखे आश्चर्य से बड़ी कर ली..

“हाँ फिर.. जन्मजात कला है हम में.. बचपन से ही खूब बढ़िया डांसर है, कभी सीखने की ज़रूरत ही नहीं पड़ी !”

“बढ़िया.. तब तो शैली कुछ अच्छा सा ढूंढ कर बजा दो यार !”

पार्थ को किसी ने पुकार लिया और वो वहाँ से निकल लिया उसी समय गाने की जाँच करते में बादशाह का गाना बजा “तेरा बज मुझे जीने न दे जीने न दे” और मंजरी ने शैली को वहीँ टोक दिया..

“इसे ही बजा लो.. हम इसी पर कर लेंगे!”

तुझसे मन नहीं है भरता
अब तू ही है कर्ता धरता
तुझसे मन नहीं है भरता
अब तू ही है कर्ता धरता
और तू पानी तक पीने ना दे, पीने ना दे

तेरा बज मुझे जीने ना दे, जीने ना दे….


इसके बाद तो पूरे गाने पर पार्थ को सोचते हुए मंजरी ने ठुमके लगाने में बॉलीवुड बालाओं को भी पीछे छोड़ दिया..

अपना डाँस पूरा करने के बाद वो बड़ी विनम्रता से तालियों की गड़गड़ाहट पर झुक कर सबको सादर अभिवादन कर सधे कदमो से सीढ़ियां उतर कर पार्थ के ठीक बगल में आ कर खड़ी हो गयी..
उसके भाव यूँ थे जैसे उसने देखा ही नहीं बाजू में कौन खड़ा है..
उसने टिश्यू से अपने चेहरे पर आया पसीना हल्के से पोंछा और बिना देखे ही बोल पड़ी..

“कुछ पीने को मिलेगा क्या ?”

“बेशक..!”

पार्थ के ऐसा कहते ही वो चौंक कर उसकी तरफ देखने लगी..

“ओह्ह आई एम सॉरी.. मुझे लगा मैं मेरी दोस्त के पास खड़ी हूँ !”

“कोई बात नहीं, डाँस के बाद थकान से आपका ध्यान नहीं गया होगा !”

“आह.. हाँ.. एक्चुली.. मैंने देखा ही नहीं आपकी तरफ !”  मंजरी साफ़ झूठ बोल गयी, पार्थ हल्के से मुस्कुरा कर रह गया।

“देखने लायक ऐसी चीज़ भी नहीं हूँ मैं ! मैं आपके लिए कुछ पीने का लेकर आता हूँ !”

पार्थ मुस्कुरा कर चला गया और उस पर बुरी तरह से फ़िदा मंजरी दोनों हाथो से अपना दिल थामे उसे जाते देखती रही..

पार्थ का एक दोस्त उसके पास चला आया..

“कौन है यार ये.. जबसे तुझे देखे जा रही है !”

“डिंकी की कज़न है !”

“अच्छा तू जानता है इसे ?”

“न, जानता तो नहीं हूँ, लेकिन समझ गया था कि चाची की बड़ी बहन की बेटी है !”

“उसके लिए पेप्सी क्यों ले जा रहा ? इतना भाव मत दे उसे ! पीछे पड़ जाएगी !”

“कोई फायदा नहीं.. अभी वो शायद जानती नहीं कि मैं डिंकी की ताई का बेटा हूँ, इसलिए बेचारी हाथ आज़मा रही !”

“तू भी कम शैतान नहीं है पार्थ ! उसका गाना क्यों गुम करवाया ?”

“हाँ तो.. इंसान हूँ, मस्ती करने का हक मुझे भी है.. अच्छा अब तुम लोग शांत रहना.. !”

पार्थ ने पेप्सी का गिलास लिया और मंजरी के पास  पहुँच गया।
  उसने गिलास मंजरी को थमा दिया।
गिलास से घूंट भर कर मंजरी के चेहरे पर राहत के भाव चले आये, जैसे जाने कितने जन्मों की प्यासी थी..

उसी समय पार्थ के नाम की पुकार हुई और अपनी गिटार थामे वो स्टेज पर एक छलांग में चढ़ गया..
उसने गाना शुरू किया

“आँखों में डूब जाने को
हम बेकरार बैठे हैं,
एक पल में सब लुटाने को
उस पे ही यार बैठे हैं, उस पे ही यार बैठे हैं!
बरसों से एक चेहरा दिल में रहता है जो यार
शायद कहीं उसको है हमारा इंतज़ार
हाय रे हाय क्या कहें जब देखे वो
भर के आँखों में प्यार।
दीवानी है देखो बेकरार वो
सँभालो सँभालो…
न प्यार हो।”

ढेर सारी तालियों के साथ अपना गीत ख़त्म कर वो वापस अपनी जगह चला आया..
अपना गिलास दिखा कर मंजरी ने उसे धन्यवाद बोल दिया..

“थैंक यु मिस्टर… ।”

“पार्थ.. पार्थ नाम है मेरा !”

“ओके मेरा नाम..”

“मंजरी, मंजरी है न ?”

“अरे आप कैसे जानते हैं?”

“बस जान लिया.. वैसे आप क्या करती है ?”

“ड्रेस डिज़ाइनर हूँ, इंटीरियर भी कर लेती हूँ। ब्यूटीशियन का कोर्स भी कर रखा है, बेकिंग और निटिंग भी करना जानती हूँ..।”

“वोहो… आप तो मल्टीटेलेंटेड हो।”

मंजरी मुस्कुरा उठी..

“वैसे आप क्या करते है पार्थ ?”

“मैंने ज्यादा कुछ नहीं किया।”

“फिर भी कुछ तो किया ही होगा।”

“जी कॉलेज के बाद यूपीएससी का सोचा और तैयारी में लग गया।”

“ओह्ह सो टफ.. जानती हूँ सोचना और करना दो अलग चीजे है..।
चलिए अच्छा है इतना अच्छा सोचा है, तो कुछ तो अच्छा कर ही लेंगे..।
वैसे तैयारी कहाँ से कर रहे.. कोई इंस्टीट्यूट ज्वाइन किया है या नहीं.. ?
दिशा का तो नाम बहुत है..?”

“जी दिशा ही ज्वाइन क़र रखा था..।”

“रखा था मतलब.. अब छोड़ दिया क्या?”

“हाँ जी छोड़ दिया।”

“अरे लेकिन क्यों.. वो लोग तो इंटरव्यू तक तैयारी करवा देते है।”

“हाँ तो करवाई न।”

“मतलब?”

“मतलब अभी फ़िलहाल सेलेक्शन के बाद के ट्रेनिंग पीरियड में हूँ.. इस पीरियड में छुट्टी नहीं मिलती।”

“ओह्ह.. ।”

मंजरी का मुहं खुला रह गया..

“आप सेलेक्ट हो चुके है?”

“जी, भगवान की कृपा से।”

“अरे वाह.. तो फिर छुट्टी कैसी मिली?”

“मैंने अर्ज़ी दी कि मेरी सगी छोटी बहन की शादी है, मुझे जाना ही होगा.. तब जाकर छुट्टी मिली।”

मंजरी मंत्रमुग्ध सी पार्थ को देख रही थी।
लड़का कुछ ज्यादा ही सुंदर था ! घने बालों से ढका प्रशस्त ललाट, बड़ी बड़ी गोल गोल आंखे, पतली सुतवा नाक के नीचे बिलकुल पेन्सिल से ड्रा कर के बनाये होंठ और तीखा चिबुक..
लम्बी सी गर्दन, जिसे वो सदा ऊँचा चढ़ाये रहता..।

“कौन बहन.. किसकी बहन ?”

“मेरी बहन.. डिंकी ।”

“डिंकी तुम्हारी बहन कैसे हुई?”

“क्यूंकि मैं उसका सगा बड़ा भाई हूँ..।”

“व्हाट, पर अगर तुम उसके भाई हो तो मैं कैसे तुम्हे नहीं जानती..?”

“क्यूंकि अक्सर गर्मियों की छुट्टियों में जब हम चाचाजी से मिलने जाते थे, तब चाची बच्चों को लेकर अपने मायके जा चुकी होती थी और फिर टेंथ के बाद मेरा घर से निकलना कम हो गया..।
ट्वेल्थ के बाद मैं डीयू में पढ़ने चला गया और एक बार दिल्ली गया तब से वापस ही कहाँ लौटा हूँ..?”

“सगे भाई ?”

“अरे मेरा कहने का मतलब है डिंकी के पापा और मेरे पापा सगे भाई है.. मैं डिंकी के ताऊजी का लड़का हूँ पार्थ ।”

“और मैं.. ।”

मंजरी हकला कर रह गयी

“जानता हूँ, डिंकी की मौसी की बेटी है आप, मंजरी.. है न ?”

“हुंह..।”

मंजरी का मुहं जरा सा हो गया था.. कल से वो जिस लड़के को ताड़ रही थी वो दूर का ही सही कजन निकल आया था।
अब तो उनके बीच किसी बात की संभावना नहीं रह गयी थी…।
उसका दिल चाक चाक होकर टूटा पड़ा था।
समझ नहीं आ रहा था वो क्या करे.. पता नहीं उसके साथ ही ऐसा क्यों होता है..?

इतने लड़को मे जो पसंद आया वो भी दूर दराज़ का भाई निकल गया। हालाँकि कुछ ज्यादा ही दूर का है।

वैसे देखा जाये तो सीधे तौर पर तो ऐसा कोई रिश्ता निकलता नहीं लेकिन फिर भी ये ब्राम्हण लोग तुरंत भाई बनाने वालो में से है।
घर वाले सरासर मना कर देंगे, कहेंगे भाई है..
मंजरी को लगा अपना सर धुन ले।
उसका अच्छा खासा हवा में उड़ता मूड खराब हो चुका था..

वो अपनी जगह से उठ गयी।

“क्या हुआ?”

“थक गयी हूँ, अपने कमरे में जा रही, आराम करने।”

“अरे लेकिन अभी तो बहुत से लोगो का परफॉर्मेंस बचा है..।”

“ह्म्म बचा रहने दो, मुझे क्या ?”

“मेरा भी डांस बचा है, आप देखेंगी नहीं..?”

मंजरी एकदम से कुछ बोल नहीं पाई और वापस थक हार कर अपनी जगह बैठ गयी।
मुस्कुरा कर पार्थ भाग कर अपने दोस्तों के पास पहुँच गया..

कुछ ही देर में एक सी जींस पर एक सी कमीज पहने कोई छह सात लड़के स्टेज पर चले आये।
उनके चेहरे पहचाने नहीं जा रहे थे, क्यूंकि सबने एक सा हेलमेट लगा रखा था..।

सबने डाँस शुरू कर दिया।
अलग अलग गानों की धुन बजती रही और वो लोग ताल से ताल मिला कर नाचते रहे..।

“नखरे क्यों करती है मैनु जंचदा नहीं
किन्ना सवाल करती है, न मैं सुनता नहीं।”

डांस वाकई बहुत शानदार था.. उनके परफॉर्मेंस के अंत में आखिरी गाना बजना शुरू हुआ..।

“हीरिये सेहरा बांध के मैं तो आया रे, 
डोली बारात भी साथ में मैं तो लाया रे..”

और इसी के साथ पहले से सीखी पढ़ी गरिमा और सुषमा डिंकी के पास पहुँच गयी और उसे अपने साथ स्टेज पर ले जाकर छोड़ दिया..।

स्टेज पर उतने लड़को में डिंकी को माधव को पहचानना था..।

इस परफॉर्मेंस के ठीक पहले डिंकी के कान में पार्थ हल्के से मंत्र फूंक गया था..
“माधव के शूज ध्यान से देख लेना।”

डिंकी को स्टेज पर एकदम से वो बात याद आ गयी। उसने सबके शूज देखे और वो एकदम से माधव के शूज पहचान गयी..।

वो धीमे से आगे बढ़ कर माधव तक पहुँच गयी, और उसने माधव का हेलमेट निकल दिया..।

अब गाने के बोलो का वो हिस्सा बजने लगा जहाँ नायिका गाती है और उन बोलो पर डिंकी भी उस ग्रुप के साथ थिरकने लगी..।

तेरे नाल मैं आवांगी ,
ससुराल मैं जावांगी..

क्रमशः

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Manu Verma
Manu Verma
7 months ago

बहुत खूबसूरत और मनोरंजन से भरा भाग 😊👌🏻,
आँखों से डूब जाने को…, ऋतिक रोशन 🤔 हैना… 😊।
मुझे पहले बहुत शौक था गाने सुनने का हर गाने का पता था किसने गाया किस पर फिल्माया 😂।आज भी कुछ कुछ याद आ गया।
पार्थ और मंजरी की जोड़ी बनाओगे 🤔जोड़ी बने ना बने पर पार्थ भी कम शरारती नहीं है डिंकी का गाना गायब करवा दिया।
बहुत अच्छा भाग 👌🏻👌🏻👌🏻🙏🏻🙏🏻।

Gouri sarwa
Gouri sarwa
7 months ago

👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻🤩🤩🤩🤩🤩🤩🤩🤩🤩🤩🤩🤩
🤩🤩🤩🤩🤩🤩🤩🤩🤩🤩🤩🤩🤩

Geeta Prasad
Geeta Prasad
7 months ago

Beautiful or mast part……gane sun k to hm bhi thirkane lge maza aa gya prh kar……bas Prabhu ye Manjari or parth ki jodi na bnwa dena…kahan parth or khan Manjri…

Samiksha
Samiksha
7 months ago

Awesome part…funny too

Jagriti
Jagriti
7 months ago

Superb fantastic

Meenakshi Sharma
Meenakshi Sharma
7 months ago

Lovely part 👍❤️👌

Rashmi
Rashmi
7 months ago

Manjari ka sapna fir se adhura rh gya, nice part ..

Aruna
Aruna
7 months ago

👌👌👌👌👌👌👌👌👏👏👏👏👏👏👏👏

Ritu Jain
Ritu Jain
7 months ago

Wonderful part.❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️

Hetal shah
Hetal shah
7 months ago

👌👍Fantastic part.Parth jaanbujh kar Manjari ko pareshan ka raha tha. …