
अतिथि -47
मंजरी ने डिंकी की लिखी वो चिट्ठी पुलिस वाले की तरफ बढ़ा दी..
पुलिस वाले ने सरसरी तौर पर उस पर नजर डाली और उसके माथे पर बल पड़ गए..
दरअसल मंजरी ने सोचा था इस चिट्ठी को दिखा कर वो पुलिस अधिकारी के सामने डिंकी को जालसाज साबित कर देगी, लेकिन उसने उस खत का दूसरा पहलु सोचा ही नहीं था..!
पुलिस अधिकारी ने पूरा खत दुबारा पढ़ा और मंजरी की तरफ देखने लगा..
“मंजरी आप है ?”
“जी सर !”
“इसका मतलब इस खत में जो लिखा है आपके बारे में है ?”
“जी सर !”
“और ये माधव हैं ?”
“हाँ जी !”
पुलिस अधिकारी ने वो खत माधव की तरफ बढ़ाते हुए एक बार मंजरी को देखा और इशारे से पूछ लिया..
“क्या ये खत इन्हे दिखा दूँ ?”
मंजरी अब न “हाँ” बोलने की स्थिति में थी न “ना” बोलने की.. उसने धीमे से गर्दन हिला दी…
” लेकिन इसमें लिखी सारी बातें झूठ है।”
पुलिस अधिकारी के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ गई। आखिर इतना अनुभव उसने भी यूं ही नहीं इकट्ठा किया था। उसने खत माधव की तरफ बढ़ा दिया और मंजरी की तरफ मुखातिब होकर बोल पड़ा।
” तो आप कहना चाहती हैं कि अनुराधा ने यह सारी जालसाजी आप दोनों की सगाई रोकने के लिए की है, और इसलिए उन्होंने इस खत को लिखा था। है ना?”
मंजरी ने हां में गर्दन हिला दी।
” तो इस खत को उसने माधव को दिया भी होगा?”
मंजरी सकपका गई, क्योंकि यह खत तो माधव तक पहुंचा ही नहीं था।
” नहीं सर डिंकी यह खत माधव को दे पाती उसके पहले यह खत मेरे हाथ आ गया।”
” तो फिर आपने इस खत को फाड़ कर फेंका क्यों नहीं? जबकि इस खत में तो सिर्फ और सिर्फ आपके बारे में लिखा है। अगर यह गलती से भी माधव के हाथ में पहुंच जाता, तो माधव कभी भी आपसे शादी करने के लिए तैयार नहीं होता। इसलिए आपको तो इस खत को संभाल कर रखना ही नहीं था। फिर आपने इसे संभाल कर रखा क्यों?”
” जी मुझे वक्त नहीं मिला कि मै इसे पढ़ सकूं।”
” अच्छा! आप इतनी व्यस्त थी कि आपको इस खत को फेंकने या पढ़ने का वक्त ही नहीं मिला, और डिंकी जो कि आप दोनों की सगाई रोकने के लिए जी जान से जुटी थी, वह भी इतनी व्यस्त थी कि उसे यह खत माधव को देने का वक्त नहीं मिला। और चलिए अगर यह खत आपके हाथ लग भी गया तो डिंकी ने कोई दूसरा खत लिखकर कोशिश क्यों नहीं की ?”
पुलिसवाला अब माधव की तरफ घूम गया। उस खत को पढ़ने के बाद माधव के चेहरे पर कोई भी रंग मौजूद नहीं था।
“माधव इस बारे में तुम पहले से कुछ जानते थे?”
माधव ने ना में गर्दन हिला दी।
“नहीं सर मैं कुछ भी नहीं जानता था।”
” क्या डिंकी ने इस बारे में तुमसे कभी कोई बात की थी?”
“नहीं सर डिंकी तो हमेशा अपनी मंजरी दीदी की कुछ ज्यादा ही तारीफ करती थी, और मुझे तो लगता था वह मंजरी से बहुत प्रभावित भी है..।”
“बिल्कुल सही कहा, वह मंजूरी से प्रभावित थी और शायद इसीलिए उसने आप दोनों की सगाई होने पर इस बात को स्वीकार कर लिया, लेकिन मानव मन के भीतर कहीं गहरे में क्या छुपा होता है, कई बार वह खुद नहीं समझ पाता।
इसीलिए जिस बात पर कभी हम बहुत खुश होते हैं, कभी वही बात हमें दुखी कर जाती है। शायद ऐसा ही कुछ डिंकी के साथ हुआ और उसी भावावेश में उसने यह खत लिख लिया।
उसने सोचा जरूर होगा कि माधव को देगी, लेकिन फिर वह खुद अपने आप को समझा कर रह गई और उसने यह खत माधव को नहीं दिया।
पता नहीं कैसे लेकिन यह चिट्ठी तुम्हारे हाथ लग गई, और तुमने डिंकी को गलत समझ लिया।
खैर ये आप लोगों का पारिवारिक मुद्दा है और इस पर मैं कुछ भी नहीं कह सकता। फिलहाल इतनी देर से वह लड़की पुलिस थाने में मौजूद है और मुझे अंदर से महसूस हो रहा है कि उस लड़की को जबरदस्ती झूठे केस में फंसाया गया है।
मैं भी सालों से इस पेशे में हूं और अपराधियों को देखकर पहचान जाता हूं। डिंकी बेकसूर है, यह तो मैं भी समझ चुका हूं..।
आप लोगों से यही कहना चाहूंगा कि अगर उसकी बेगुनाही का कोई सबूत आप यही प्रस्तुत कर दो तो मैं उसके खिलाफ केस बनाने की जगह बने हुए केस को रफा दफा करके उसे यहीं से छोड़ दूंगा..।”
मंजरी की भंवे तन गई, उसके माथे पर बल पड़ गए। उसने सोचा नहीं था कि उसका फेंका दाव इस कदर बिना काम के धराशाई हो जाएगा। उसने माधव की तरफ देखा। माधव ने हल्के से मुस्कुरा कर अपना मोबाइल जेब से निकाला और कुछ स्क्रोल करने लगा। मंजरी को दिल ही दिल में घबराहट होने लगी। माधव ने अपने फोन में रिकॉर्डिंग ऑन की और पुलिस अधिकारी के सामने उसे पेश कर दिया..
पुलिस अधिकारी के साथ-साथ मंजरी और माधव के पीछे खड़ी उन दोनों की मांओं ने भी सारी बातें साफ-साफ सुन ली थी।
मोबाइल की रिकॉर्डिंग के अनुसार मंजरी किसी सच्चाई के बारे में बात कर रही थी, जिसे वह पुलिस स्टेशन जाकर कबूल कर लेगी और डिंकी की बेगुनाही साबित हो जाएगी। पुलिस अधिकारी ने सब कुछ सुनने के बाद माधव की तरफ देखा और उससे सवाल करने लगा।
” यह किसकी आवाज़ है?”
” सर इसमें से एक आवाज मेरी और दूसरी मंजरी की है।”
“यह झूठ बोल रहा है सर। यह मेरी आवाज नहीं है।”
पुलिस अधिकारी ने मंजरी की तरफ देखा और हल्के से गर्दन हिला कर उसकी बात पर सहमति प्रकट करते हुए माधव की तरफ देखने लगा।
” कैसे साबित करोगे कि यह आवाज मंजरी की है।”
माधव ने अपनी कॉल हिस्ट्री पुलिस अधिकारी को दिखा दी। रिकॉर्डिंग उसकी कॉल हिस्ट्री से मेल खा रही थी। पुलिस अधिकारी ने वापस मंजरी की तरफ देखा। मंजरी घबराते हुए पुलिस अधिकारी को अपने पक्ष में करने की कोशिश करने लगी।
“नहीं सर! यह माधव ने जालसाजी से बनाया है। मैं सच कह रही हूं, यह मेरी आवाज नहीं है। आप मुझ पर यकीन कीजिए।”
” देखिए मैडम, आप अपना खत दिखा कर खुद अपने ऊपर का यकीन तोड़ चुकी है। अब उसके बाद कोई बेवकूफ ही होगा जो आप पर यकीन करेगा। मैं तो रिकॉर्डिंग में आपकी आवाज है यह सुनते ही समझ गया था। लेकिन हमें हर बात के सबूत चाहिए होते हैं। क्योंकि साक्ष्य के आधार पर ही हम कोई निर्णय ले सकते हैं।
आवाज तो पहचान चुका था, लेकिन माधव ने कॉल लॉग दिखाकर यह भी साबित कर दिया कि यह फोन पर आपसे ही हुई बातचीत के अंश हैं।
आपकी चिट्ठी पढ़कर यह तो समझ में आ गया है कि आप माधव से सगाई करने के लिए क्यों इतनी उत्सुक थी।
साफ जाहिर है, आपके अलग-अलग बॉयफ्रेंड्स उतने वेल सेटल्ड नहीं थे, जितना माधव। और इसलिए माधव के खानदान और उसकी कमाई को देखकर आपने अपने बॉयफ्रेंड की तुलना में माधव को ज्यादा सही जीवनसाथी पाया, और इसीलिए आप सगाई के लिए तैयार हो गई।
आपको लगा था कि आप इस खत को दिखाकर यह साबित करेंगी कि डिंकी माधव को आपके खिलाफ करना चाहती है, लेकिन अनजाने में आपने यह साबित कर दिया कि डिंकी असल में माधव से प्यार करती है। हालांकि आपने इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि डिंकी ने माधव के लिए यह चिट्ठी लिखी जरूर थी, पर उसने माधव को दी नही।
अनजाने में या भूल वश यह चिट्ठी आपके हाथ लग गई, वरना शायद डिंकी इस खत को फाड़ कर इसका अस्तित्व ही खत्म कर देती…
मुझे तो आपके छोटे दिल और छोटी अकल पर तरस आता है। डिंकी आपकी छोटी बहन है जो आपकी सारी सच्चाई जानते हुए भी अपने तक ही सीमित रखती रही। किसी दिन शायद फ्रस्ट्रेशन में उसने यह खत लिखा जरूर, लेकिन उसने माधव तक पहुंचने नहीं दिया। इत्तेफाक से आपके हाथ ही खत लग गया और आप दिल ही दिल में उससे जलने और चिढ़ने लगी। लेकिन आप दोनों से पहली बार मिलने के बावजूद मैं इतना तो समझ गया हूं कि आपकी तुलना में डिंकी माधव से ज्यादा प्यार करती है।
इसके बावजूद उसने जब यह देखा कि उसकी बड़ी बहन की शादी माधव से हो रही है, तब वह चुपचाप आप दोनों के रास्ते से हट भी गई। लेकिन फिर भी आप उसके पीछे पड़ी रहीं, और आपने उसे फंसाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। देखिए मंजरी अगर आप आज यहां सारी सच्चाई बयान नहीं करती, तो मुझे मजबूरन आपको सलाखों के पीछे डालना पड़ेगा और जब हमारे यहां की लेडी पुलिस कांस्टेबल आपके ऊपर डंडे बरसाएगी, तब आपकी यह कोमल सी जबान सारा सच खुद-ब-खुद उगल जाएगी। तो मेरे ख्याल से अब ज्यादा बचने और छुपने की कोशिश करने की जगह आपको सच कबूल कर लेना चाहिए..।”
“यह सब क्या है मंजी..?”
पीछे खड़ी विमला ने मंजरी के कंधे पर हाथ रख दिया। उसकी आंखों से आंसू गिरने लगे थे, उसे समझ में आ गया था कि मंजरी ने बहुत बड़ी धोखेबाजी की थी…।
मंजरी के पास अब कोई चारा नहीं बचा था, उसने अपनी पलकें झुका ली। वहां रखे पानी के गिलास से दो घूंट भरने के बाद उसने पुलिस अधिकारी को सब कुछ सच-सच बताना शुरू कर दिया..।
“आप सच कह रहे हैं सर, इस खत को पढ़ने के बाद मुझे डिंकी पर बहुत गुस्सा आने लगा था। मुझे कैसे भी उससे इस बात का बदला लेना था कि वह मेरे खिलाफ माधव को भड़काना चाहती थी। उसी समय भूषण ने मुझे डिंकी का ईमेल आईडी और पासवर्ड मांगा था। उसने मुझसे कहा था कि उसके ऑफिस में कोई एक जालसाज व्यक्ति है जो रूबी को धोखा दे रहा है, और उसी को जानने के लिए वह यह सब कर रहा है।
मैं इतनी भोली तो नहीं थी कि उसकी इस बात के पीछे छिपे राज को ना समझ पाऊं, लेकिन उस वक्त मैं बदले की आग में वाकई अंधी हो गई थी, और मैंने डिंकी से पूछ कर उसकी आईडी और पासवर्ड भूषण को दे दिया।
भूषण ने ही डिंकी के आईडी पासवर्ड को यूज़ करके यह सारा काम किया होगा। क्योंकि डिंकी के अलावा मेरे और भूषण के पास ही उसका आईडी पासवर्ड था। मैंने तो ऐसा कुछ किया नहीं, इसका मतलब भूषण ही असली गुनहगार है।
आप एक बार उसे बुलाकर पूछताई कीजिए, सारी बातें आपके सामने आ जाएंगी..।”
जिस वक्त मंजरी यह सब कबूल कर रही थी, उस वक्त रूबी अपनी बहन करूणा के साथ पुलिस थाने पहुंच चुकी थी।
पीछे खड़ी रूबी ने भी सारी सच्चाई जान ली।
वह धीमे कदमों से बढ़कर आगे चली आई और पुलिस अधिकारी के सामने पहुंचकर उसने भी अपने मन की बात रख दी..
“सर मैं ही रूबी हूं और मैं डिकी के ऊपर लगे इल्जाम वापस लेती हूं। डिंकी पिछले साल भर से मेरे साथ काम कर रही है, और आज तक उसने कभी मुझे कोई शिकायत का मौका नहीं दिया। मैं उस पर बहुत विश्वास करती हूं, आज भी इस घटना के बाद मुझे कहीं ना कहीं यह उम्मीद थी कि डिंकी को गलत फंसाया जा रहा है।
और यह बात सही साबित भी हो गई।
भूषण तो शुरू से ही धोखेबाजी कर रहा है। उसने एक और धोखेबाजी करी थी सर, मैं आपसे रिक्वेस्ट करती हूं कि डिंकी को छोड़ दीजिए। इसके लिए जो भी औपचारिकताएं लगेंगी, वह पूरी करने के लिए मैं तैयार हूं..।”
पुलिस अधिकारी ने अपने मातहत कर्मचारियों को बुलाकर भूषण को तुरंत थाने में हाजिर करने का आदेश दिया और डिंकी को छोड़ने के लिए जिन औपचारिकताओं की जरूरत थी, वह कागज तैयार करवाने लगा…।
क्रमशः

पुलिस वालों के आगे किसी की चली है भला हो तो बाल की खाल निकालना जानते हैं और बहुत अच्छे से समझते हैं कौन झूठ बोल रहा है कौन सच मंजरी अपने ही बिछाए जाल में कैसे फंस गई और आखिरकार उसे सब सच-सच बोलना पड़ा कैसे पुलिस वालों के डर से तोते की तरह पटर पटर सारा राज खोल दिया और अब जबकि सबको यह सच्चाई पता चल गई है तो शायद माधव की मां और माधव पर जोर नहीं डालेंगेउसकी सगाई एक ऐसी झूठी और मक्कार लड़की के साथ करने के लिए जो चरित्रहीन ही है और धोखेबाज भी।
इतनी बेहतरीन भाग के लिए आपका बहुत-बहुत शुक्रिया डॉक्टर साहिबा 🙏🏻🙏🏻🙏🏻
Manzari apne bnaye jaal mein khud hi fass gayi
Beautiful part
डिंकी के लिए गढ्ढा खोद रही थी मंजरी,,खुद उसमें गिर गई।।।। कर्मा।। बहन होके इतनी स्वार्थी कि डिकी पुलिस कि गिरफ्त में है, जान कर भी सगाई की लिए माधव को मजबूर कर रही थी।।।। ओर नतीजा खुद फंस गई।
माधव तो छ गया👌👌
Manjari ka jhuth samnaya aagya,saraya bhade khul gya,Bhushan ke bhi saraya.jal saji pakar me aa gyi Manjari bhi Sara sach ugal di,Dinky begunah sabit hyiAakhir sach ki jeep hyi,Very nice part.
Manjri ka jhuth pakada gaya ab Bhusan ko jail ho jani chiye
👌👌👌👌👌👌👏👏👏👏👏👏👏
Nonsense manjari and sweet Dinky.
Very nyc part 👌
Waiting for next part
Bahut hi achaa hua finally madhav babu manjari ka sach samne le hi aye aur chura liya apni dinky ko❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️ ab bs intzaar hai madhav aur dinki ke milne ka….😍😍😍😍😍😍
Waise abhi mujhe lagta hai aur bhi raaz khulenge…. Jaise madhav ki mummy ji ka😉😉😉😉 waiting for that….
Very nice part