
अतिथि -42
अगली सुबह तीनो के जीवन में क्या नया रंग बिखेरनी वाली थी, इस बात से अनजान तीनो खुद के ख़यालो में खोये से सो गए..
डिंकी की रात बड़ी बेचैनी भरी गुजरी थी.. उसे बहुत देर से नींद आयी थी, इसलिए सुबह भी उसकी आँख नहीं खुल रही थी..
दो बार उसकी माँ उसे बाहर से आवाज़ लगा चुकी थी..
अबकी बार वो सीधे उसके कमरे में ही चली आयी..
“उठ जा डिंकी.. आज इतनी देर सोने से काम नहीं चलेगा, आज तेरी दीदी की सगाई है !”
ये सुनते ही डिंकी के कान खड़े हो गए…
वो झटपट बिस्तर पर उठ बैठी.. नींद में तो वो कोई बहुत प्यारा सा सपना देख रही थी, जिसमे वो माधव के साथ थी..
और नींद खुलते ही सपने के साथ साथ सारी खुशियाँ भी गायब हो गयी..
उसका दिमाग उसका दिल उसके आपे में नहीं था.. क्या करे कैसे करे कि माधव की सगाई रुक जाये..।
क्या वो अपने खुद के लिए स्वार्थी हुई जा रही है ?
नहीं बिलकुल भी नहीं..।
वो सिर्फ और सिर्फ माधव के लिए सोच रही है…।
ऐसा नहीं है कि मंजरी अच्छा लड़की नहीं है, लेकिन इतने सारे अफेयर्स के बाद उस कैसे इतना अच्छा लड़का मिल सकता है ?
एक वो है जिसने आज तक किसी लड़के की तरफ आँख उठा कर नहीं देखा और माधव, उसके हाथ से फिसल कर मंजरी तक पहुँच गया..।
“चल न उठ कर तैयार हो जा.. जल्दी घुस बाथरूम में.. तुझे नहाने में भी तो घंटा भर लगता है !”
मन मार कर वो बाथरूम में घुस गयी..
उसके निकलने तक में उसकी माँ ने उसके तैयार होने का सारा इंतज़ाम कर रखा था..।
उसके पलंग पर एक सुंदर सी हल्दी के रंग की साडी रखी थी, और उसी पर एक हल्का सा सोने का फूलो वाला हार रखा था..
डिंकी को ये सब देख कर रोना सा आने लगा..
वो क्यों इतना सजे धजे, वो क्यों खुशियाँ मनाये जब उसके मन का कुछ हो ही नहीं रहा..।
लेकिन अपनी माँ को इतना खुश देख वो भी मन मार कर तैयार हो गयी..
सुलोचना ने डिंकी को साड़ी पहनाने के बाद उसकी नजर उतार ली..
“हाय देखो तो.. कितनी सादी सी साड़ी में भी कैसी खिल रही हमारी राधा !”
बहुत लाड़ में वो अक्सर उसे राधा ही बुलाती थी..
उसके गले में वो हार डालने लगी लेकिन उसने मना कर दिया
“ये कुछ ज़्यादा ही लगेगा मम्मी.. मैं बस कान में झुमके डाल लेती हूँ !”
“चल ठीक है.. तूने साड़ी पहन ली यही बहुत है मेरे लिए !”
उसके माथे पर एक छोटी सी लाल बिंदी लगा कर वो बाहर निकल गयी..
“सुनिए ऑटो वाले को फ़ोन कर दिया न ?”
सुलोचना के सवाल पर विनोद ने हाथ का पेपर फेंका और सोफे पर अपना मोबाइल ढूंढने लगा।
.”तुम हर बात भूल जाते हो ? समझ में नहीं आता तुम पर नाराज हो जाऊं या तुम्हारी बेवकूफी पर अपना सर धुन लूँ..।
एक तो इतनी बड़ी पार्टी में जाना है..
अब क्या वहाँ भी बाइक पर बैठा कर ले जायेंगे ?”
सुलोचना के चेहरे की नाराज़गी भांपते हुए विनोद ने ऑटो की जगह टैक्सी बुक कर दी..
“बिलकुल नहीं.. ऑटो में भी नहीं हम सब टैक्सी में जायेंगे !”
“टैक्सी में ? बड़े पैसे लग जायेंगे, जाने दीजिये न.. ऑटो ही ठीक है !”
“अरे सौ दो सौ से कितना ही फर्क पड़ जायेगा.. आज तो आपको टैक्सी में ही लेकर जायेंगे ! पर ये बताइये मुहतरमा कार्यक्रम है कितने बजे से ?”
“दोपहर का है.. मंजी की ओली पड़ेगी और माधव की वरीक्षा के बाद दोनों की सगाई हो जाएगी.. इस सब में शाम हो ही जाएगी.. !”
“हम्म.. ठीक है तो पन्द्रह मिनट बाद का टाइम डाल देता हूँ टैक्सी में !”
“हम्म ठीक है !” चिंटू चिंटू की पुकार लगाती सुलोचना आईने में खुद को निहार कर आखरी टचअप करने भीतर चली गयी..
वो सभी लोग नियत समय पर घर से निकल गए..
मैरिज हॉल में अभी मेहमानों का आना जाना शुरू नहीं हुआ था..
बाहर दरवाज़े पर ही विनोद की केदार से भेंट हो गयी..केदार ने विनोद का हाथ पकड़ अपने साथ मेहमानों की आवभगत के लिए खड़ा कर लिया..
“मैं अंदर जिज्जी के पास जाती हूँ.. !” सुलोचना तेज़ी से अपनी बहन विम्मो की तरफ बढ़ गयी..
इधर उधर खोयी खोयी सी देखती डिंकी चुपचाप एक कुर्सी पर जा बैठी..
उसका न तो मंजरी के पास जाने का मन कर रहा था न माधव के पास…
उसका बस फ़ूट फ़ूट के रोने का मन कर रहा था, उसी वक्त उसके कंधे पर किसी ने हाथ रख दिया..
वो चौंक कर पलटी, उसके सामने माधव की माँ खड़ी थी..
डिंकी ने दोनों हाथ जोड़ दिए..
“यहाँ क्या कर रही हो डिंकी ? तुम्हारी बहन तो अंदर तैयार हो रही है, जाओ उसके पास जाओ, उसे आज तुम्हारी जरूरत है !”
“हम्म !” छोटा सा हम्म बोल कर डिंकी चुप रह गयी..
“क्या हुआ, कुछ परेशान हो क्या ?”
“नहीं आंटी.. ऐसी कोई बात नहीं !”
“अच्छी बात है, अभी तुम्हारी उम्र परेशान होने वाली है भी नहीं ! अभी तो तुम्हे खुश रहना चाहिए, खूब खुश !आज मैं भी बहुत खुश हूँ.. मुझे नहीं लगा था मेरे इस बावरे से लड़के की कभी शादी हो भी पायेगी… बताओ भला कौन इस से शादी के लिए मंजूरी देता?
रात दिन अपनी अनोखी दुनिया में खोया रहने वाला लड़का भला किसी लड़की को कभी पसंद आएगा भी.. ?
इसकी अपनी अनोखी दुनिया है, जहाँ इसके मरे हुए दादा जी है, उनकी बड़ी सी कोठी है, इसकी बचपन की शरारते हैं और भी न जाने क्या क्या ?
अब तो फिर भी जरा कम कहानियां गढ़ता है, पहले तो उफ़ क्या कहूं !”
डिंकी अपने उड़ते बालों को कान के पीछे समेटती ज़मीन की तरफ देखती बैठी थी..
माधव की माँ बड़े ध्यान से उसके चेहरे को देख रही थी..
“बड़ी मुश्किल से उसे दवाये देना पड़ता है.. अगर जान जाता है तो दवाये लेता नहीं है न !”
डिंकी एकदम से सुलक्षणा का चेहरा देखने लगी..
“क्या माधव कुछ दवायें भी लेता है ?”
“हाँ, वरना इतना नार्मल कैसे हो पाता ? दवायें तो हर मानसिक रोगी को देनी ही पड़ती है डिंकी !”
“क्या ये सारी बातें मंजू दी और मासी को पता है ?”
“तुम्हे क्या लगता है अपनी बचपन की सहेली को बिना बताये मैं ये शादी करवा दूंगी ? उन्हें सब पता है !”
“और उसके बावजूद मंजू दी शादी के लिए तैयार हो गयी ?” डिंकी की आँख से एक आंसू उसके गाल पर ढुलक आया..
माधव की माँ ने हाथ बढ़ा कर डिंकी का आंसू पोंछ दिया..
“तुम रो क्यों रही हो ? क्या तुम्हे माधव अच्छा लगने लगा है ?”
डिंकी ने एकदम से नजरे झुका ली..
“बेटा तुम्हे अपना समझ कर समझा रही हूँ.. ये प्यार मुहब्बत का बुखार बस दो दिन का होता है.. जब शादी हो जाती है न साल दो साल में ये गुब्बारे की तरह फट जाता है..।”
“लेकिन आंटी… !” रोते रोते डिंकी अपनी बात पूरी नहीं कर पायी और माधव की माँ ने आगे बढ़ कर उसे अपने गले से लगा लिया..
“यहाँ रोना मत बेटा.. इस उम्र में ऐसा हो जाता है, लेकिन देखो तुन कितनी छोटी हो अभी !
अभी से अगर इन सब चक्करो में फंस गयी तो तुम्हारे कैरियर का क्या होगा ? तुम एक साधारण परिवार से हो, न तुम्हारे पास पुश्तैनी रुपया है न तुम्हारे पापा किसी बड़ी पोस्ट पर है..
तुम्हे अपने लिए रास्ता खुद बनाना है.. है न..?
अभी से इन सब में फंस गयी तो पैसे कब कमाओगी..
डिंकी एक बात याद रखना, लड़कियों के लिए अपने पैरो पर खड़ा होना बहुत ज़रूरी बात है..
एक बार खुद के पैरों पर खड़ी हो गयी, तो फिर तो कितने माधव जैसे लड़के मिल जायेंगे तुम्हे !”
“लेकिन फिर माधव तो नहीं मिलेगा न ?”
डिंकी ने माधव की माँ की तरफ देखा..
“तो क्या तुम्हे उसका पागलपन मंजूर है ?”
माधव की माँ आश्चर्य से आंखे फाड़े डिंकी की तरफ देखने लगी..
.रोते रोते डिंकी ने हाँ में गर्दन हिला दी..
“पागल लड़की, ये सब फितूर दिल से निकाल फेंको..
और सबसे बड़ी बात माधव भी तो मंजरी से शादी करके खुश है.. फिर तुम क्यों अपना जी जला रही हो ?”
“वही तो समझ में नहीं आ रहा !” डिंकी धीमे से बोल उठी..
“डिंकी एकतरफा प्यार आंसू और दुःख दर्द के अलावा और कुछ नहीं देता ।
अगर माधव भी तुमसे प्यार करता होता तो मैं खुद तुम दोनों की शादी करवा देती, लेकिन ऐसा नहीं है ! तुम समझ रही हो न.. !”
माधव की माँ ने डिंकी का हाथ पकड़ कर हल्के से दबा दिया..
“आपको कैसे पता ?” पता नहीं कैसे डिंकी पूछ बैठी.. उसे खुद अपने दुस्साहस पर यक़ीन नहीं हो रहा था..
“माँ हूँ उसकी.. इतना तो जानती ही हूँ उसे ! बल्कि उसके पिता से कहीं ज़्यादा मैं जानती हूँ !”
“हम्म, जी !”
“माधव जरा अलग मिजाज का लड़का है… उसे ज़्यादा किसी से लेना देना नहीं होता, अपनी ज़िंदगी और खुद में ही मगन रहने वाला लड़का है माधव !”
अभी माधव की माँ और कुछ कहती कि उनके पति केदार वहाँ चले आये..
“तुम यहाँ बैठी हो सुलक्षणा, वहाँ मेहमान आने लगे हैं.. चलो, उन्हें सम्भालो !”
“जी अभी आयी !”
डिंकी के सर पर हाथ फेर कर वो “अपना ध्यान रखना” कह कर वहाँ से निकल गयी..
डिंकी अपने आंसू पोंछ कर वहाँ से अपनी माँ के पास जाने की सोच रही थी कि उसे पीछे से किसी ने आवाज़ लगा दी… वो पीछे पलटी उसके सामने पुलिस की वर्दी में एक लेडी इंस्पेक्टर खड़ी थी..
उसी वक्त सीढ़ियों पर आकर रुके माधव की नजर डिंकी पर पड़ी और अपने दोस्त की बात अनसुनी करता माधव तेज़ी से डिंकी की तरफ बढ़ गया..
क्रमशः
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पता नहीं क्यों पर मुझे माधव की मां का किरदार थोड़ा रहस्य में लगता है जैसे बहुत कुछ छुपा हुआ है उनके अंदर उनकी बातों में मुझे कुछ सच और कुछ झूठ की बू आती है। 😒😒😒
ऐसे कैसे वह समझ गई की डिकी उनके बेटे से प्यार करती है और फिर उन्होंने अपने बेटे को मानसिक रोगी दवाएं खाने वाला और पागल तक करार दे दिया खुद से ही अगर कोई मां अपने बेटे से प्यार करती है तो फिर वह खुले तौर पर खुद अपने मुंह से इस तरह की बातें अपने बच्चों के लिए नहीं बोलती।😦😦😦
क्यों ऐसा लग रहा था कि जैसे माधव की मां खुद नहीं चाहती कि डिकी और माधव का रिश्ता हो उन्होंने साफ तौर पर कह दिया कि माधव रिकी को पसंद नहीं करता वह मंजरी को पसंद करता है जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है अपने ही बेटे को कहानी गढ़ने वाला लड़का बोलकर वह दुनिया के सामने पागल साबित करके क्या करना चाहती है।
अब यह तो भगवान जाने या हमारी लेखिका जी, की डॉक्टर साहिबा के दिमाग में क्या चल रहा है वह तो आगे पढ़कर ही पता चल सकता है🙂🙂🙂🙂😊😊😊😊
हमारी डिंकी तो है ही इतनी सुन्दर 👌🏻उसे किसी भी तड़क फड़क कपड़ों या मेकअप की जरूरत नहीं तभी तो सादी सी पीले रंग की साड़ी में भी कितनी खूबसूरत लग रही जैसे खेतों में सरसों के फूल लहराते हुए खूबसूरत लगते पर डिंकी के मन में चल रही उथल पुथल का भी कोई हल निकले तो ना, ये लो बेचारी पहले से ही दुखी परेशान थी 🤦🏻♀️रही सही कसर माधव की माँ ने पूरी कर दी पर हिम्मत बहुत है लड़की में माधव की माँ के सामने मान गई कि माधव जैसा भी है उसे स्वीकार है 😊।
पुलिस…. 🤔अरे.. हो गया सत्यानाश 🤦🏻♀️मंजरी ने भूषण को वो id दे ही दी।
देखते है माधव कैसे अपनी राधा को बचाता इन सबसे।
लाजवाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻🙏🏻
Again suspense
ये माधव की ही मां हैं जो अपने बेटे के अवगुण गिना रही हैं डिंकी को। लगता है वो पहले ही समझ गई थी माधव और डिंकी का झुकाव एक दूसरे के लिए और डिंकी की फैमिली उसे अपने स्टेटस की नहीं लगी होगी तभी उसने माधव की बीमारी की कहानी बनाई है।
अब शायद पुलिस डिंकी को अरेस्ट करने आई हैं।मंजरी की दी डिंकी की आई डी उसके खिलाफ यूज कर ली गई है।
अब देखते हैं माधव क्या करता हैं।
बेहतरीन पार्ट 👌,❤️😍
😞😞😞😞😞😞😞😞😞😞😞😞😞
ओह ओह क्या भाग था मतलब मज़ा आ गया डिंकी की बहादुरी देखकर ।अपनी होने वाली सासूमां के सामने इतनी सारी बाते कह गई जो अपनी खुद की मां से भी नहीं कह सकी।और माधव की मां भी वो सब समझ गई जो उसकी अपनी मां से भी खुलकर नहीं कहा। देखें आगे क्या होता है।
Itna kuch ho raha hai aur janab ko Kuch pata hi nahi hai.aisa laga jaise madhav ki ma uski khushi chahti hi nahi hai aur jhooth bol rahi hai dinki se
Very nyc part 👌
Waiting for next part
👌👌👌👌👌👌👏👏👏👏👏👏👌
बहुत इंटरेस्टिंग कहानी रोज पढ़ने को मिल जाए तो मजा आ जाए👌👌👌👌🙏🙏🙏🙏🙏