
अतिथि -34
करुणा पलटी और दरवाज़े की तरफ देख कर आवाज़ लगा दी..
“अंदर आ जाइये !”
लम्बे लम्बे कदम रखते हुए माधव अंदर चला आया.. डिंकी जहाँ माधव को देख स्तब्ध खड़ी थी वहीँ भूषण के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी थी..
उसे सब समझ में आ गया था, तो सबूत के साथ करुणा को मेल्स भेजना वाला माधव था..
पर इसे क्या पड़ी थी ? आखिर ऐसा क्या कारण था, जो माधव ने इतना बड़ा घाव किया उस पर….
भूषण से रहा नहीं गया..
और उसने माधव से पूछ ही लिया..।
“तो तुम हो, जिसने मेल किया ? अरे अगर मेरा टेंडर नहीं निकलना था, तो नहीं निकालते इस तरह से दुश्मनी निभाने का कारण क्या था ?
मैं तो तुम्हे जानता तक नहीं, फिर कौन सी दुश्मनी निभा रहे हो मुझसे.. ?
याद रखना मैं भी भूषण रॉय हूँ.. छोडूंगा नहीं तुझे !”
उसकी इस धमकी को सुन माधव के चेहरे पर हंसी खेल गयी..
” मुझे अच्छे से पता है कि तुम भूषण रॉय हो.. और इससे ज़्यादा मैं कुछ कहना नहीं चाहता !”
रूबी ने आगे बढ़ कर माधव के सामने हाथ फैला दिया….
माधव ने धीमे से अपना हाथ बढ़ा दिया और रूबी ने दोनों हाथों में उसका हाथ थाम लिया..
“थैंक यू सो मच मिस्टर माधव.. आपकी वजह से हम एक बहुत बड़े स्कैम से बच गए, वरना इस आदमी के कारण तो मेरा ब्रांड स्टोर बंद ही हो जाना था !”
“जी ये तो मेरा फ़र्ज़ था.. !”
“आइये आप यहाँ बैठिये !”
रूबी ने उसे बैठा कर उससे बातचीत करनी शुरू कर दी..
पुलिस भूषण को अपने साथ लिए उस केबिन से निकल गयी..।
योगिता पुलिस वालों को रोकना चाहती थी। भूषण से ढेर सारे शिकवे होने के बावजूद उसे बचा लेना चाहती थी, लेकिन वो कुछ नहीं कर पायी..
बहुत बार ज़िंदगी की रवायतें आपको दिल की सुनने नहीं देती, वैसा ही कुछ हाल योगिता का भी था..।
वो चाह कर भी भूषण का साथ नहीं दे पा रही थी, और इस बात की छटपटाहट उसके चेहरे को तनाव से भरे दे रही थी, लेकिन रूबी और करुणा इस बात से नावाकिफ थे..।
“योगिता, इनके लिए कॉफी लेकर आओ.. !”
आज तक जब भी ऐसा कोई काम योगिता के सर पर पड़ा था, उसने तुरंत उस काम को किसी तीसरे पर लाद दिया था.. आज भी उसने डिंकी को फरमान सुना दिया..
“अनुराधा… जाओ !”
डिंकी सर झुका कर बाहर निकल ही रही थी कि माधव अपनी जगह पर खड़ा हुआ और धीमे से डिंकी तक सरक आया..
“रूबी जी अगर आपको दिक्कत न हो तो आज मैं आपकी अनुराधा को अपने साथ ले जाना चाहता हूँ !”
रूबी इस बात को सुन कर मुस्कुरा उठी..
“श्योर.. वैसे भी अनुराधा पार्ट टाइमर है.. इसके बावजूद वो फुल टाइम काम कर जाती है.. आप बेशक उसे ले जाइये !”
डिंकी, रूबी और करुणा का अभिवादन कर माधव के साथ निकल गयी… योगिता के तन बदन में आग लग गयी।
माधव डिंकी को साथ लेकर तेज़ी से निकल गया..
तेज़ी से चलते हुए वो रूबी के ऑफिस से बाहर निकल आया..।
“डिंकी मेरी गाड़ी वहाँ खड़ी है, तुम चल कर बैठो.. मैं एक ज़रूरी काम निपटा कर आता हूँ !”
डिंकी के हाथ में गाड़ी की चाबी रख वो लगभग दौड़ते हुए भूषण जिस तरफ बढ़ा था, उधर बढ़ गया..
पुलिस वालो के साथ जाते हुए भूषण को आखिर उसने पकड़ ही लिया..
“जवाब चाहते थे न मिस्टर भूषण रॉय, तो सुनो.. जब तुम पहली बार अपना टेंडर डालने आये, तब तो मैं तुम्हे जानता तक नहीं था..
उस वक्त जितने टेंडर डाले गए थे, सब के साथ आपकी फाइल भी शामिल थी..
उसके बाद इत्तेफाक से आपके ऑफिस बिल्डिंग में मैं अपने दोस्त के साथ चाय पीने आया और वहाँ मैंने आपका बिहेवियर देखा, वो भी डिंकी के साथ।
उस वक्त सच कहूं तो खून खौल गया था मेरा…
जिस आदमी को औरतों की इज्जत करना नहीं आता मेरी नजर में उससे तुच्छ इंसान कोई नही, ऐसा आदमी किसी लायक नही, उसे कुछ करना नहीं आता।
और फिर वहाँ तो डिंकी थी, जिसके साथ तुमने बदतमीजी की थी..।
दुःख की बात ये है कि, ये सिलसिला रुकने की जगह बदस्तूर जारी रहा..
तुम अगर डिंकी को एक छोटा कर्मचारी मान कर उसका अपमान कर के चुप रह जाते तो भी मैं तुम्हे नहीं छोड़ता, लेकिन तुमने उसके अपमान के साथ साथ उसके बनाये डिज़ाइन्स को अपने और अपनी महिला मित्र के नाम से प्रस्तुत भी किया!
मतलब जिसे तुम सिर्फ चाय के कप उठाने के लायक समझते हो, उसी के डिज़ाइन्स चुरा कर अपने नाम से बेचते हुए भी तुम्हे शर्म नहीं आई और उसके बावजूद तुम चाहते थे मैं तुम्हारा टेंडर पास कर दूँ..?
बस डिंकी के साथ तुम्हारा जो व्यवहार था, उसके बाद मैं कभी तुम्हे माफ़ नहीं कर सकता..।
और इसीलिए मैंने तुमसे हुई सारी बातें रिकॉर्ड कर ली और इसके साथ ही तुम्हारे टेंडर फाइल की फोटो लेकर तुम्हारे ऑफिस मेल कर दी.. !
भूषण रॉय तुमने गलतियां कम तो नहीं की हैं.. और उस लिहाज से तुम्हारी सजा बहुत कम चुनी गयी है.. !”
माधव भूषण के कंधे थपथपा कर निकल गया.. लेकिन भूषण अपने दांत चबा कर रह गया, इस वक्त उसके हाथ में कुछ भी नहीं रह गया था..
माधव डिंकी के पास पहुंचा और उसने गाडी आगे बढ़ा दी..।
डिंकी माधव से ढेरों सवाल पूछना चाहती थी, लेकिन शुरुवात कहाँ से करे इसी में अटकी हुई थी..
माधव ने स्टीयरिंग पर हाथ घुमाया और सामने रास्ते पर नजर टिकाये हुए ही अपने मन की बात कहने लगा..
“जानता हूँ तुम्हारे मन में ढेरों सवाल हैं, एक एक कर के सारे जवाब दे दूंगा.. पूछो क्या जानना चाहती हो ?”
डिंकी पहले ही माधव के जादू से अछूती नहीं थी और अब आज की घटना के बाद वो उसके व्यक्तित्व के निराले रंगो में पूरी तरह डूब चुकी थी..
मन ही मन उसे ये भी समझ आ गया था कि उसके साथ किया बुरा व्यवहार ही कहीं न कहीं भूषण के पतन का कारण बना और माधव ने इसीलिए उसके खिलाफ जाकर इतना कुछ कर दिया..।
उसके मन में तरंगे उठ रही थी…
उन भोली तरंगो में डूबती उतरती डिंकी का मन पूरी तरह से माधव के रंग में रंगने लगा था..।
माधव ने हाथ आगे बढ़ा कर गाड़ी में लगे रेडिओ को चला दिया और डिंकी के मन से मेल खाता गाना बज उठा..
नमकीन सी बात है, हर नयी सी बात में
तेरी खुशबू चल रही, है जो मेरे साथ में
हलका हलका रंग बीते कल का
गहरा गहरा कल हो जायेगा, हो जायेगा
आधा इश्क, आधा है, आधा हो जायेगा
कदमो से मीलों का वादा हो जायेगा…
क्रमशः

माधव तो असली हीरो निकला मतलब dinki के साथ किए बर्ताव को भूलने की बजाय उसे उसकी सही जगह यानी हवालात दिखा दी।
पहले से ही माधव के रंग में रंगी dinki के प्रेम का रंग और गहरा हो गया।
जो बोयगा वही पाएगा.. तेरा किया आगे आएगा… आज वही हाल भूषण का है पर योगिता साली अंधी है क्या जो अब तक समझ नहीं आया उसे भूषण क्या है, नालायक 🙄। पर सच योगिता ने साबित कर दिया प्यार अंधा होता है और ये सच्ची पागल प्रेमी है 😂😂।
हाय माधव दिल गया हमारी कुड़ी का और ये है असली प्यार जो कहकर नहीं जताया पर परवाह, ख्याल बेहद।
बहुत खूबसूरत भाग 👌👌👌👌।
बहुत अच्छी कहानी है। आगे के पार्ट का इंतजार है।
Madhav dinki ko chahta hai aur uski itni care karta hai toh uski bewcoof bahan se shadi kyun?
इंसान जो बोता है वही काटता है अंत में भूषण के साथ भी वही हुआ ।
वह बहुत सयाना जरूर बनता था पर एक न एक दिन झूठ सबके सामने आ ही जाता है 😡😡😡😡😡
वह दूसरे का काम चुरा कर अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहा था और उसे उसका परिणाम भी मिला डेंकी के साथ बदतमीजी करके उसने खुद अपने ही हाथों अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली
माधव को सब पता चल गया था इसलिए माधव को जो ठीक लगा उसने किया माधव के इस कार्य से दो फायदे हुए एक तो भूषण जैसा बेईमान आदमी पकड़ में आ गया दूसरा डिंकी की डिजाइंस चुराने की जो गलती उसने की थी अब वह भी कोई नहीं करेगा😌😌😌😌
👌👌👌👌👌👌👏👏👏👏👏👏
Superb 👌
Superb pyari lekhika ji.
👌👌👌👌
Very interesting and lovely part लेकिन माधव की शादी किसी और से होने पर डिकी को पीड़ा नहीं होगी क्या जो न चाहते हुए भी माधव से जुड़ती जा रही है
दूसरे से क्यों होगी? अपना माधव है न😊