जीवनसाथी -3 भाग -135

जीवनसाथी -3 भाग -135

   पिछले कुछ महीनो से पारिवारिक व्यस्तता इतनी ज्यादा बढ़ गई थी कि जीवनसाथी के भाग नहीं लिख पाई, जनवरी के पूरे महीने में सिर्फ अतिथि के पांच या छह भाग ही पोस्ट कर पाए..!

    लेकिन अब पूरी कोशिश है कि इस हर्जाने को भर दूं जीवनसाथी के पार्ट्स जल्दी देकर।
  मुझे भी इस कहानी को आगे बढ़ाना है। जीवनसाथी में हुई देरी के लिए क्षमा प्रार्थी हूं। अब तक जीवनसाथी में आपने पढ़ा…

             भदौरिया लंदन में कार्यरत एक बड़ा व्यापारी है, जो अपने कॉस्मेटिक उत्पादों को पूरे विश्व में लॉन्च करना चाहता है। लेकिन उसके उत्पाद अमानक होने के कारण भरी मीटिंग में शौर्य प्रताप सिंह बुंदेला खड़े होकर अकेले ही उसके उत्पादों का विरोध कर देता है।
     जिसके बाद भदौरिया उसके पास लाखों रुपए की रिश्वत का प्रपोजल भी भेजता है। जिसे शौर्य सिरे से ठुकरा देता है। भदौरिया को समझ में आ जाता है कि अगर राजा अजातशत्रु सिंह बुंदेला का बेटा उसके खिलाफ मार्केट में खड़ा हो गया, तो उसके सिर्फ कॉस्मेटिक ही नहीं बल्कि बाकी के व्यापार भी ठप्प पड़ जाएंगे, ऐसे में भदौरिया एक षड्यंत्र का जाल बुनता है।

     वह सोचता है कि किसी रोड एक्सीडेंट के बहाने वह शौर्य को मौत के घाट उतार दे, और इसलिए वह एक ट्रक ड्राइवर को कुछ पैसे देकर शौर्य को मारने का आदेश देता है। इस एक्सीडेंट में शौर्य की गाड़ी को ठोकर मारने के बावजूद ट्रक ड्राइवर शौर्य को मार पाता उसके पहले शौर्य का शरीर हवा में ऊंचाई पर उछलकर ब्रिज से नीचे नदी में गिरकर बह जाता है…।

हालांकि भदौरिया के आदमी शौर्य के शरीर को ढूंढ लेते हैं और उसे वापस मार पाए इसके पहले कुछ लोग शौर्य के शरीर को अस्पताल ले जाते हैं। भदौरिया हॉस्पिटल में ही शौर्य को मारने की तरकीब सोचता रहता है, तभी उसे दूर शौर्य का एक हमशक्ल लड़का नजर आ जाता है। भदौरिया उस लड़के के पास पहुंचता है और उसे पैसों का प्रलोभन देकर अपने लिए काम करने के लिए मना  लेता है..

वो लड़का अपना परिचय उसी अस्पताल में काम करने वाले कर्मी मुरली के रूप में देता है !

     भदौरिया की साजिश कामयाब होती है और वह लड़का मुरली, शौर्य की जगह हॉस्पिटल में उसके बेड पर लेटा दिया जाता है।
     इस काम को अंजाम देने में विक्रम भी सहयोग करता है। लेकिन अस्पताल से शौर्य को विक्रम कहां गायब करता है इसके बारे में ना ही मुरली जानता है और ना भदौरिया।

      लेकिन भदौरिया को विक्रम पर पूरा भरोसा है। इसके आगे भदौरिया अपने अगले प्लान को अंजाम देने के लिए अकरा नाम की छोटी सी जगह जहां के ज्यादातर रहवासी गरीब लोग हैं उनके बीच जाकर अपने प्रॉडक्ट्स लॉन्च करने की सोचता है। और इसके लिए वह सारी तैयारी कर लेता है। वह चाहता है उसके इस प्रोडक्ट लॉन्च से अनिरुद्ध वासुकी और दर्श को दूर रखें, इसलिए वह अकरा जाने के ठीक एक दिन पहले अपने लोगो को अपने प्लान के बारे में बताता है..।!
लेकिन उसका प्लान कामयाब हो पाए उसके पहले ही कुछ ऐसा हो जाता है जिसके कल्पना भी भदौरिया ने नहीं की होती..

****

दूसरी तरफ महल में राजकुमार हर्ष और मीठी की शादी तय हो चुकी है। लेकिन महारानी रूपा की बुआ जो उस वक्त महल में मौजूद है, वह मीठी को राजकुमार हर्ष की भावी दुल्हन के रूप में नहीं देखना चाहती..।

वो पहले रूपा को समझाती है, लेकिन जब देखती हैं कि उनके समझाने का कोई खास फर्क नहीं पड़ना, तब वो एक चाल चलती है…।

मीठी और हर्ष की कुंडली को अपने किसी परिचित कुंडली ज्ञाता से दिखा कर वो अपने हिसाब से उसमे परिवर्तन करवा लेती हैं। और फिर अपने गुरु महाराज के पास रूपा के साथ जाती हैं।

         और उनसे हर्ष और मीठी की कुंडली के विषय में पूछताछ करती है। जहाँ आचार्य जी स्पष्ट कह देते हैं कि कुंडली मेल नहीं खा रही..।
ये बात सुन कर रूपा परेशान हो जाती है, लेकिन उसकी सबसे बड़ी समस्या ये है कि उसके पति युवराज और बेटा हर्ष दोनों ही लोग कुंडली के परपंचो से दूर है, और ये सब नहीं मानते..।

इसलिए रूपा अपना सा मुहं लेकर रह जाती है..
लेकिन वो कुंडली से जुडी बातें मीठी को बता देती है, मीठी सब कुछ सुन कर यही कहती है को वो किसी भी सूरत में हर्ष से ब्याह को इंकार नहीं कर सकती.. अगर उसकी कुंडली में शादी के अगले दिन उसकी मृत्यु लिखी हो तब भी नहीं…।
मीठी के इस दृढ़निश्चय को सुन कर रूपा ढांढस रख लेती है…।

लेकिन बुआ जी अपना पाँसा पलटते देख बौखला जाती हैं..
इसके बाद महल के कुलगुरु के आश्रम से लौटते हुए युवराज रूपा और बांसुरी की गाडी दुर्घटना ग्रस्त हो जाती है जिसे एक बार फिर बुआ जी मीठी के अशुभ चरणों से जोड़ कर देखती हैं..।

मन में हर तरह के विचारों के साथ आखिर महल अपने सबसे बड़े राजकुमार के ब्याह की तैयारियों में जुट जाता है.  …..

अब आगे..

  भदौरिया ने जो सोचा था उसके साथ उससे बिलकुल अलग ही कुछ हुआ था..
किसी स्थानीय निवासी ने वहाँ की पुलिस को भी बुला लिया और वहाँ के लोगों की भीड़ के साथ आई पुलिस ने भदौरिया को तुरंत अपने नियंत्रण में ले लिया..।

अकरा एक गरीब बस्ती ज़रूर थी, लेकिन उसे वहाँ के जिले का संरक्षण प्राप्त था… अकरा ज़्यादा विकसित न होने के कारण ही भदौरिया ने वहाँ प्रोडक्ट्स लॉन्च के बारे में सोचा था, लेकिन वो नहीं जानता था कि वहाँ के गरीब लोग भी अपने हक़ और नियमों के प्रति पर्याप्त जागरूक है..
उसके सामने ही भागती दौड़ती डॉक्टर्स की टीम उस बच्ची और उस की माँ को लेकर तुरंत अस्पताल की तरफ निकल गए, और पुलिस ने भदौरिया के हाथों में हथकड़ियां डाल दी..

हमारे देश में अमीरो के लिए जेल कानून से निपटना जितना भी आसान हो, विदेश में एक छोटे से क़ानूनी मसले को निपटा पाना बहुत कठिन है..।

भदौरिया खुद को छोड़ देने की भीख मांगता हुआ पुलिस गाडी में जा बैठा… गाड़ी में बैठने के बाद उसने शौर्य की तरफ देखा, शौर्य के चेहरे पर उस वक्त कोई भाव नहीं थे !वो निर्लिप्त भाव से उसकी तरफ देख रहा था !

पुलिस की गाडी भदौरिया को साथ लिए निकल गयी… उसके जाते ही वहाँ मौजूद एक एक रईस भी उठ कर अपने अपने चार्टर्ड प्लेन की तरफ बढ़ गया, वहाँ रह गए तो सिर्फ वासुकी और शौर्य !

वासुकी ने शौर्य की तरफ नजर डाली और पलट कर वहाँ से निकल गया, दर्श भी उसके साथ चला गया..
कुछ दूर जाकर वो लोग रुक गए और वहीँ के किसी आदमी से कुछ पूछताछ करने लगे !

उन लोगों के जाते ही विक्रम शौर्य के पास चला आया..

“ये क्या था ?”

“क्या ?” शौर्य ने सवाल के बदले सवाल कर लिया

“ये इंजेक्शन ? इसके बारे में तुम कैसे जानते थे ?”

“ये कोई चमत्कारी इंजेक्शन नहीं है…सिंपल सा एलर्जिक रिएक्शन पर दिया जाने वाला इंजेक्शन ही है.. तुम तो जानते हो, मैं हॉस्पिटल में काम करता था…
    तो इस सब के बारे में जानकारी है मुझे..
   तुम्हारे भदौरिया ने भी तो मुझे मेरे वर्क प्लेस पर ही पहली बार देखा था न !

जब भदौरिया ने अपने कॉस्मेटिक्स के बारे में बताया तब मैंने उससे पूछा था कि वो दुबारा क्यों लॉन्च कर रहा तब उसने गोलमोल सा जवाब दे दिया..
लेकिन मुझे समझ आ गया था कि कुछ तो गड़बड है.. कॉस्मेटिक्स का मामला था इसलिए मुझे लगा कहीं कुछ सही न होने पर एलर्जी हो सकती है, बस इसलिए इंजेक्शन रख लिया था !”

विक्रम इस जवाब से संतुष्ट नहीं दिखा..

“लेकिन तुम्हे ये कैसे पता था कि कोई उस प्रोडक्ट को वहीँ इस्तेमाल भी कर लेगा !”

“अरे ये सब मुझे कैसे पता होगा, मैंने तो बस यूँ ही रख लिया था… अब चलो वापस, तुम कुछ ज़्यादा ही सोचते हो !”

“अब ये सोच रहा हूँ कि यहाँ इस जगह पर भदौरिया को छुड़ाया कैसे जायेगा !”

“हमे इस सब से क्या लेना देना, भदौरिया के वकील और बाकी लोग देखेंगे क्या करना है ?”

“लेकिन उसे ऐसे छोड़ कर नहीं जाया जा सकता, भले ही उसने जितना भी बुरा किया हो !”

“उधर देखो, वहाँ कोई खड़ा है जो उसे यहाँ अकेले नहीं छोड़ेगा.. !”

शौर्य के दिखाते ही विक्रम उस दिशा में देखने लगा जहाँ वासुकी दर्श से कुछ बात कर रहा था..!
    उन लोगो के देखते में ही वासुकी और दर्श अपनी गाड़ियों की तरफ बढ़ गए और देखते ही देखते उनकी गाड़ियां धूल उड़ाती निकल गयी वहाँ से..

विक्रम को कुछ ठीक से समझ में नहीं आया… लेकिन उसके साथ खड़े शौर्य के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान चली आई..

“अच्छे आदमी है अनिरुद्ध वासुकी जी.. दूसरे देश में अपने लोगो को फंसने नहीं दे रहे.. उन्हें बचाने निकल गए !” विक्रम की इस बात पर शौर्य हल्के से मुस्कुरा उठा

“भदौरिया के ऊपर तरस खाकर वो उसे बचाने नहीं गए हैं, बल्कि उसे यहाँ की पुलिस से बचा कर अपने साथ ले जाकर वो अपने हिसाब से उसे सजा देंगे.. शायद उनकी नजर में यहाँ की पुलिस उन्हें जो सजा देती, वो कम होगी !”

विक्रम आंखे फाडे शौर्य को देखने लगा..

“इतना सब कैसे जानते हो, इनके बारे में ?”

“जिस काम में उतरता हूँ पूरे परफेक्शन के साथ करता हूँ..!
   जिस दिन भदौरिया ने अपना प्रोपोजल पेश किया था उसी दिन प्रिंस के बारे में सब कुछ पता कर लिया था, प्रिंस की रॉयल फैमिली, उनके माता पिता….सबके बारे में !”

“लेकिन अनिरुद्ध वासुकी प्रिंस की फैमिली तो नहीं है !”

“क्यों ससुराल तो है…फादर इन लॉ है प्रिंस के !”

शौर्य के चेहरे पर तीखी सी मुस्कान चली आई..

“चलिए विक्रम बाबू हमारा काम हो गया !”

“वापस जाना है ?”

“हाँ.. वापस लंदन !”

और शौर्य तेज कदम रखते हुए अपने चार्टर्ड प्लेन की तरफ बढ़ गया.. विक्रम भी लगभग दौड़ते हुए उसके पीछे बढ़ गया..
वो लोग आगे बढ़ रहे थे की शौर्य का फ़ोन बजने लगा, इसने फ़ोन उठा लिया..
थोड़ी बहुत बात कर के उसने फ़ोन रखा और धीमे से पीछे मुड़ गया..
वहाँ खड़ी एम्बुलेंस के बाहर खड़े डॉक्टर ने शौर्य की तरफ देख धीरे से अपना अंगूठा दिखा दिया… हल्के से गर्दन हिला कर शौर्य आगे बढ़ गया..
विक्रम सब कुछ देख रहा था.. उसे थोड़ा बहुत समझ में आने लगा था,लेकिन अब भी बहुत कुछ था जो उसकी सोच समझ की परिधि से बाहर का था..

वो चुपचाप शौर्य के साथ अपनी सीट पर जा बैठा..
दोनों ही चुप थे, खामोश थे…
उन दोनों को ही नहीं पता था कि  लंदन में उनके लिए एक सरप्राइज इंतज़ार कर रहा था..

क्रमशः

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Arun Kumar
Arun Kumar
1 year ago

👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻

Archana Singh
Archana Singh
1 year ago

Very interesting part 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻

Nisha
Nisha
1 year ago

Kuch samjh nhi aaya aakhir asli rajkumar kahan hain.bhadauriya ke sath achha hi hua

Geeta sidpara
Geeta sidpara
1 year ago

Very very nice part 👌👌

Poonam upadhyay
Poonam upadhyay
1 year ago

Bahut badhiya

Rekha Dhanaliya
Rekha Dhanaliya
1 year ago

Dear aaye durust aaye intzaar to bhut kiya humney apni lekhika ji ka

Kalpana
Kalpana
1 year ago

Nice part .der se hi sahi kahani vapas continue kar ne ke liye thanks

Akanksha rathore
Akanksha rathore
1 year ago

Wah wah bde din bad
Waiting for next part ☺️👌

Jagruti
Jagruti
1 year ago

Bahut badhiya,kafi time bad padhke achha laga…

Meera
Meera
1 year ago

आप वापस लिख रही है जान कर सुकून आया ,
भदौरिया को शौरी या मुरली जिसने भी पुलिस के हवाले किया है , सब फुलबप्रूफ प्लान लग रहा है , हमे तो , ओर ये विक्कू मुझे तो अच्छा लगा था , किसका साथ दे रहा है पता भी नहीं चल रहा , बड़ा गोल माल है अभी सब , वासुकी father-in-law है ये भी पता है मुरली को , भाई वाह , मीठी ने तो फू साहब का गोलमाल अपने कानो से सुन लिया है , अब तो उसे हर्ष से दूर कोई कर ही नहीं सकता , देखते है आगे इन सब की किस्मत में क्या है 👌🏼👌🏼👌🏼