अतिथि-29

अतिथि -29

 
     माधव और डिंकी आगे चल रहे थे, उनके पीछे मंजरी और भूषण थे..
भूषण वाकई शातिर आदमी था…
होंठो ही होंठो में वो मुस्कुरा रहा था.. उसके शातिर दिमाग से न मंजरी की घबराहट छिपी थी और न डिंकी की मासूमियत.. और बस इसी बात का वो जायज़ा लेना चाहता था..!

माधव डिंकी रास्ते को पार कर आगे बढ़ रहे थे कि कुछ मनचलों की टोली उधर से गुजरी.. उनमे से एक ने डिंकी को देख कर छिछोरेपन से एक सस्ता सा फ़िल्मी गाना गुनगुना दिया.

आयी, आयी दूर से, देखो, देखो
दिलरुबा ऐसी, ऐसी
खायी खायी बेजुबां दिल ने दिल ने
चोट ये कैसी
अरे वो हाँ-हाँ, मिली नज़र
अरे ये हाँ-हाँ, हुआ असर
नज़र-नज़र मिली, समां बदल गया
चलाया तीर जो, मुझी पे चल गया
गज़ब हुआ, ये क्या हुआ, ये कब हुआ
न जानूँ मैं, न जाने वो, ओहो
जवान जानेमन…

डिंकी तो बिना ध्यान दिए आगे बढ़ गयी…
लेकिन माधव के माथे पर बल पड़ गए..
उसने आगे बढ़ते हुए उन लड़को पर एक नजर डाली और फिर आगे बढ़ गया..

आगे एक कैफे था, डिंकी एक टेबल पर बैठने लगी लेकिन वो जहाँ बैठ रही थी, वहाँ से बाहर खड़े वो उज्जड गंवार लड़के उसे देख पा रहे थे…
माधव उसके सामने बैठते बैठते रुक गया… उसने डिंकी को टोक दिया..

“डिंकी क्या यहाँ बैठ सकती हो ?”

“क्या हुआ ?”

“हम्म… ऐसा कुछ खास नहीं, लेकिन अगर यहाँ आ जाती तो तुम्हारे बाल सही रहते, उस तरफ से आने वाली हवा से बाल ख़राब हो रहे हैं !”

डिंकी को माधव की बात समझ में नहीं आई, लेकिन बिना ज्यादा कुछ बोले वो तैयार हो गयी और उठ कर दूसरी तरफ बैठ गयी..

लेकिन इसी बीच माधव की नजर बाहर खड़े उन छिछोरों पर पड़ गयी थी…. 
वो वहाँ खड़े खड़े अंदर ही देख रहे थे..
कुछ देर में वो लोग टहलते हुए उस कैफे की तरफ बढ़ने लगे..।
अब तक में भूषण और मंजरी भी अंदर चले आये थे…..
वो दोनों भी बैठ गए, लेकिन भूषण की शैतानी नजर माधव पर टिकी हुई थी..।

“आए लोग कॉफी ऑर्डर कीजिये, मैं अभी आया.. !”

“कहाँ जा रहे हैं सर ?” भूषण ने माधव को खड़े होते हुए टोक दिया..

“बस आ रहा हूँ… आप लोग ऑर्डर कर लीजिये !”

“लेकिन हमें कैसे पता चलेगा कि आप क्या लेना चाहते हैं ?” भूषण ने वापस रोड़ा लगाया..

माधन ने बड़ी गहरी आँखों से डिंकी की तरफ देखा..

“अपनी चॉइस से कुछ ऑर्डर कर लेना !”

और फिर बिना किसी के उत्तर की प्रतीक्षा किये वो सिरफिरा बाहर उन लड़को की टोह लेने निकल गया…

वो लड़के आपस में हंसी मजाक करते कैफे की तरफ बढ़ रहे थे कि उन लोगो के सामने जाकर वो खड़ा हो गया..

“क्या हुआ, हट सामने से ?”

उनमे से एक ने कहा और बिना उसकी बात का जवाब दिए माधव उस लड़के की तरफ घूम गया जो बेशर्मी से खींसे निपोरते हुए गाना गा रहा था !

“क्या करती है आप आशा जी ?”  माधव के इस सवाल पर उस लड़के के माथे बल पड़ गए..

“क्या बकवास कर रहे हो ?”वो लड़का तमक के बोला

“क्यों क्या तुम्हारा नाम आशा भोंसले नहीं है ?”

“अबे साले, पगला गया है क्या ?”

“अरे मुझे तो यही लगा !” माधव ने मुस्कुरा कर उसकी आँखों में आंखे डाल कर कहा और वो लड़का अपने अगल बगल वालों को देखते हुए नाराज सा होने लगा..

“कौन है बे ये.. भगाओ साले को !”

वो सब लड़के भी आंखे फाड़े माधव की अतरंगी बातें सुन रहे थे, सबकी समझ में माधव एक सरफिरा था जो आएं बाएं बक रहा था !

“क्या बक रहा है बे ?” उनमे से एक ने आगे बढ़ कर माधव का कॉलर पकड़ लिया..

जैसे ही उसने माधव का कॉलर पकड़ा, माधव का एक ज़बरदस्त घूंसा उसके चेहरे का भूगोल बिगाड़ गया..
वो अपना गाल संभालता उसे देख ही रहा था कि दूसरे लड़के ने माधव की तरफ मारने को हाथ बढ़ाया और माधव ने उसकी कलाई पकड़ कर उलटी मरोड़ दी..
वो कसमसा कर रह गया..
इतनी देर में वो गाने वाला लड़का बिना किसी प्रतिवाद के हाथ जोड़ कर पूछ बैठा..

“क्या बात है भाई, आखिर कसूर क्या हुआ है हमसे, वो तो बता दो मारने से पहले ?”

“यही तो विडंबना है कि हम लड़को को जहालत करने के बाद भी अपनी गलती समझ ही नहीं आती !” इतना कह कर माधव ने खींच कर एक थप्पड़ उसके चेहरे पर रसीद कर दिया..

“अबे बता भी दे !” उनमे से एक ने वापस उसे मारने के लिए हाथ उठाया और इस बार उसके हाथ को मरोड़ कर माधव ने अपने माथे से उसके माथे पर इतनी जोर की टक्कर मारी कि वो बौखला गया..।

उसके मुहं से एक भद्दी सी गाली निकली और बाकी के दोनों माधव को मारने आगे बढे, लेकिन माधव ने पहले ही इस बात की तैयारी कर रखी थी..
उसने एक के पेट में ज़ोर की लात मारी और उसके नीचे गिरते ही दूसरे को झुका कर उसकी पीठ पर ज़ोर का धौल जमा दिया..।
तीनो ही लड़के बुरी तरह कसमसा कर रह गए…

उनके चेहरों से लाचारगी टपक रही थी..।
वैसे भी तीनो का डील डौल जैसा था, लम्बे चौड़े माधव को उन पर भारी पड़ना ही था..

माधव ने उस गायक लड़के का कॉलर पकड़ कर उसको अपने सामने खड़ा किया और गुनगुनाने लगा..

“कुछ देर पहले तू आशा भोंसले बना था, उस वक्त जो तू गा रहा था उस गाने को मैं पूरा कर देता हूँ..
लेकिन तारीफ चाहूंगा…

जवान जानेमन हसीन दिलरुबा
मिले दो दिल जवाँ निसार हो गया,
शिकारी खुद यहाँ शिकार हो गया,
ये क्या सितम हुआ, ये क्या ज़ुलम हुआ
ये क्या गज़ब हुआ, ये कैसे कब हुआ
न जानूँ मैं, न जाने वो, आहा…

अब समझ आया.. !”
और इतना गाने के साथ ही माधव ने तीनो के एक एक तमाचा धर दिया…

“सॉरी भाई, मालूम नहीं था कि आपकी गर्लफ्रेंड है !”

“वो तो जो है सो है, लेकिन आगे भी कभी ऐसे किसी लड़की को छेड़ने के पहले सोच लेना.. अब जमाना बदल रहा है, अगर लड़कियां पलट कर लड़को को छेड़ने पे आ गयीं न तो कहीं के नहीं रहोगे.. !”

माधव वापस मुड़ कर अपने बालों और कमीज को सही करता हुआ कैफे में चला आया…

उसके आने के कुछ देर बाद ही वेटर कॉफ़ी लिए चला आया..
मंजरी और भूषण ने कैपेचीनो ऑर्डर किया था..
लेकिन डिंकी ने कैफे लाते मंगवाया था..
माधव ने कप अपनी तरफ खींचा और सुकून से एक घूंट भर ली..

“वाह… मज़ा आ गया !”

“मैं तो डर रही थी, पता नहीं आपको पसंद आएगा या नहीं !” डिंकी ने धीमे से कहा.. और माधव मुस्कुरा उठा..

उसी वक्त कैफे का दरवाज़ा खुला और लगातार मुहं चलते हुए योगिता अपनी बेटी के साथ अंदर दाखिल हो गयी..।
उसकी वैसे भी रात दिन बोलने की आदत थी, वो अभी भी कुछ बोल रही थी और उसकी बातों से बेखबर उसकी बेटी अपने मोबाइल पर अपने किसी मित्र से बातों में लगी थी..।

योगिता ने बैठने के लिए इधर उधर नजर दौड़ाई और उसकी नजर मंजरी और डिंकी के साथ बैठे भूषण पर पड़ गयी..
योगिता का रोम रोम जल गया..
वो खुद भले ही अपने पति को छल रही थी, लेकिन भूषण की ये छलना उसकी नजर में अक्षम्य थी..
आँखों ही आँखों में उसे कई हजार उलाहने देती हुई वो ऐसी टेबल पर जा बैठी जहाँ से भूषण उसे नजर आता रहे….।

बीच बीच में वो डिंकी पर भी नजर मार ले रही थी.. वहाँ चार लोग बैठे थे, लेकिन दूर से देखने वाले के लिए समझना मुश्किल था कि कौन किसके साथ था, लेकिन पास बैठी मंजरी और भूषण की निगाहों से माधव का डिंकी के प्रति अनुराग छिपा नहीं था…

क्रमशः
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कांति
कांति
2 months ago

मनचलों की अच्छी खातिरदारी की माधव ने अब भूलकर भी किसी लड़की के सामने नहीं गा पाएंगे।
मंजिरी भूषण को मिली नहीं की योगिता भी आ गई। मज़ेदार भाग 👌👌👌👏👏👏

Manu Verma
Manu Verma
1 year ago

आशा भोंसले 😂😂उन छपरियों को अच्छा सबक सिखाया माधव ने अब बच्चे सुधर जायेंगे, लड़कियों को दूर से ही देखकर भाग जायेंगे 😂😂।
कुल मिलाकर बेहद लाजवाब भाग 👌👌👌👌👌👌💐💐💐💐🧿

Last edited 1 year ago by Manu Verma
उमिता कुशवाहा
उमिता कुशवाहा
1 year ago

क्षमा चाहती हूं लेखिका जी लेकिन आज काफी दिनों बाद ही फिर से हमारे अतिथियों से मिलना हो पाया।🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
आज फिर से मिलकर बहुत खुशी हो रही है डिंकी और माधव से।❤️❤️❤️♥️♥️♥️
सही साथी वही होता है जो बिना कुछ पूछे बताएं ही सामने वाले की परेशानी का कारण भाप ले और यहां तो डिकी को खुद पता नहीं था कि आखिर माजरा क्या है और हमारे हीरो बाहर जाकर मामला भी सुलटा आए है।👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻
बढ़िया मालिश देती है उन सिर्फ रे लड़कों को माधव ने, जरूरत भी थी कैसे घटिया लोगों को सबक सिखाने की। 😡😡😡
पर अब्योग्यता के आने से देखते हैं की कहानी में क्या ट्विस्ट आता है 🤔🤔🤔🤔

Nisha
Nisha
1 year ago

Jab mahsoos ho raha hai to kabab me haddi kyun ban rahe hain

Aruna
Aruna
1 year ago

👌👌👌👌👌👌👏👏👏👏👏👏

Kamal
Kamal
1 year ago

Good

Siddharth Singh
Siddharth Singh
1 year ago

Very nice.. As always

Poonam upadhyay
Poonam upadhyay
1 year ago

Bahut sundar

Mukesh Duhan
Mukesh Duhan
1 year ago

Nice

Shanu singla
Shanu singla
1 year ago

😇😇😇😇😇😇😇😇😇😇😇😇😇