अतिथि-28

अतिथि -28

अब तक आपने पढ़ा,

   मंजरी और माधव की माओं ने मिल कर दोनों की सगाई तय कर दी, जिसके बाद वो सभी एक साथ सगाई के लिए खरीदारी करने जाते हैं जहाँ अचानक मंजरी का बॉयफ्रेंड भूषण चला आता है..
भूषण से मंजरी झूठ बोल जाती है कि, माधव और डिंकी की सगाई तय हुई है, और वह लोग शॉपिंग के लिए आए हुए हैं।
     मंजरी और माधव की मां जब डिंकी की मां के साथ एक साड़ियों की दुकान पर बैठी होती हैं, तभी ये चारों लोग एक दूसरी दुकान पर आपस में टकरा जाते हैं।
       माधव मंजरी और भूषण को देखकर सब कुछ समझ जाता है, लेकिन भोली डिंकी के दिमाग में यह बात नहीं आ पाती कि मंजरी भूषण से झूठ क्यों बोल रही है…
   अब आगे..

” माधव जी, कुछ ना कुछ इत्तेफाक तो जुड़ा हुआ है आपके साथ। वरना इस तरह आपसे बार-बार मुलाकात नहीं होती..!”

भूषण यथासंभव अपनी बात में मिठास घोलने की कोशिश कर रहा था, लेकिन माधव जानता था कि भूषण की असल में तबीयत कैसी है, उसने भूषण को डिंकी से बदतमीजी से बात करते हुए देख रखा था..

” बिल्कुल सही, या तो आपसे कोई रिश्ता पिछले जन्म का है, या आने वाले कुछ दिनों में जुड़ने वाला है। लेकिन जो भी है आपसे मिलकर अच्छा लगता है..!”

माधव भी मजे ले रहा था..

“कहीं चल कर बैठे ? कॉफी पीते हैं साथ में !”

भूषण ने अपनी तरफ से प्रस्ताव रखा। लेकिन मंजरी इस प्रस्ताव के लिए बिल्कुल भी सहमत नहीं थी। वह चाहती थी जितनी जल्दी भूषण यहाँ से चला जाये उतना अच्छा। लेकिन भूषण, माधव के साथ हुई इस सौजन्य भेंट को यूं ही गवाना नहीं चाहता था। उसने माधव का हाथ पकड़ लिया।

” आईये ना सर, हमें भी मौका दीजिए अपनी सेवा करने का।”

माधव ने बड़ी शालीनता से भूषण की हथेली से अपनी उंगलियां छुड़ा ली। उसने पीछे मुड़कर देखा और डिंकी की तरफ हाथ बढ़ा दिया।

   डिंकी जो अब तक यह सब देखती हुई सोच रही थी कि यह चल क्या रहा है, अचानक कुछ समझ नहीं पाई। लेकिन माधव का उसकी तरफ हाथ बढ़ाना उसका दिल छू गया..।
उसने धीमे से माधव के बढे हुए हाथों पर अपना हाथ रख दिया..

माधन ने उसकी हथेली थामी और आगे बढ़ गया..
उन दोनों को ऐसे आगे बढ़ते देख मंजरी भी सोच में पड़ गई। लेकिन उसके माथे पर खींची चिंता भरी रेखाओं को देखकर भूषण ने उससे सवाल पूछ लिया।

” क्या हुआ परेशान क्यों लग रही हो?”

” नहीं मैं तो बिल्कुल परेशान नहीं हूं।”

” तुम बोल कुछ रही हो, तुम्हारा चेहरा कुछ और बयां कर रहा है।”

” ऐसी कोई बात नहीं, बस यह सोच रही थी कि मम्मी क्या सोचेंगी। हम अचानक कहां चले गए।”

” फोन करके बता दो ना कि कॉफी पीने गए हैं।”

” नहीं तुम मम्मी को जानते नहीं हो।”

” तुम्हारी मम्मी को अच्छे से जानता हूं, और अब तुम्हें भी जानने लगा हूं। सच बताओ की माधव अनुराधा का क्या चक्कर चल रहा है?”

“अनुराधा! अनुराधा कौन ?”

“यह सच में तुम्हारी बहन है ? तुम्हें नहीं पता इसका नाम अनुराधा है?”

” हम सब तो डिंकी कहते हैं, इसलिए दिमाग से उतर गया कि डिंकी का नाम अनुराधा है।
   माधव अनुराधा!  माधव अनुराधा।”

मंजरी अपनी ही बात कहते हुए हंस पड़ी, लेकिन अंदर ही अंदर उसका रोने का मन कर रहा था। वह किसी भी तरीके से भूषण से पीछा छुड़ाना चाहती थी। लेकिन वह भूषण के स्वभाव को अच्छी तरह जानती थी। वह जानती थी कि अगर इस वक्त उसने भूषण के सामने सब कुछ सच-सच कह दिया तो उसकी जिन तस्वीरों को भूषण ने आज तक बड़े प्यार से अपने कलेजे से लगा कर रखा था, उन्हें पब्लिक करने में उसे क्षण भर का भी समय नहीं लगेगा।

  कभी इन्हीं तस्वीरों के लिए भूषण ने बड़ी मान मनुहार की थी और खुद पर इठलाते हुए बड़े नाज नखरों के साथ चिंदी भर के कपड़ों में मंजरी ने अपनी तस्वीरे भूषण को भेजी थी।

आज प्रेम की वही निशानियां उसके लिए बवाल बन सकती थी। और व्यवहारकुशल मंजरी यह समझती थी कि भूषण के फोन से उसे चुपके से ही उन तस्वीरों को बिना भूषण की जानकारी के ही डिलीट करना होगा, तभी भूषण से वह पूरी तरह पीछा छुड़ा पाएगी…

ऐसा नहीं था कि वह भूषण का छिछला स्वभाव नहीं जानती थी। उसे पता था भूषण की जिंदगी में आने वाली वह अकेली लड़की नहीं है। इसीलिए उससे ब्रेकअप करते वक्त मंजरी के दिल दिमाग में भी कोई डर मौजूद नहीं था। उसे लगा था ब्रेकअप के बाद बड़ी आसानी से भूषण भी किसी दूसरी लड़की के साथ व्यस्त हो जाएगा, और उस समय मौका पाकर अपनी दोस्ती की दुहाई देकर वह इन रंगीन तस्वीरों को भूषण के मोबाइल से ही नहीं उसके जीवन से भी हमेशा के लिए डिलीट कर देगी।
लेकिन इतना मौका मिल पाता उसके पहले ही भूषण शनि ग्रह बनकर उसके और माधव के जीवन की गृह गतियों को तोड़ने मरोड़ने इस तरह चला आया।

” क्या सोच रही हो?”

” कुछ नहीं।”

” तुम्हारे चेहरे पर चिंता वाली लकीरें दिख रही है।”

” अरे नहीं बाबा, डिंकी को देखकर सोच रही हूं कि कुछ दिनों में मेरी बहन पराई हो जाएगी..।”

“लग तो नहीं रहा तुम्हे उसकी इतनी चिंता है। वैसे करने की ज़रूरत भी नहीं, जिसके साथ है, वो उसका भरपूर ध्यान रख रहा है..।”

भूषण ने आगे जाते हुए माधव और डिंकी की तरफ देख कर कहा, और मंजरी का ध्यान भी उन दोनों पर चला गया..

उस जगह पर भीड़ भाड़ थी, लोग काफी पास से होकर गुज़र रहे थे.. मंजरी ने देखा माधव ने डिंकी के कंधो की तरफ से उसे बना स्पर्श किये ही बाहों के घेरे से घेर रखा था, जिससे अगल बगल से निकलने वाले लड़के डिंकी से छू न जाये..
मजे की बात ये थी कि इस बारे में डिंकी को कुछ भी मालूम न था..

मंजरी का मन कैसा तो हो गया..
कुछ दिनों बाद माधव उसके जीवन का एक अहम् हिस्सा होने वाला था, और ऐसे में उसका डिंकी को लेकर इतनी सतर्कता बरतना मंजरी का दिल दुखा गया ।

क्रमशः















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कांति
कांति
4 months ago

जैसी करनी वैसी भरनी बस मंजिरी के साथ यही हो रहा है। भूषण जैसे लड़के के चक्कर में पड़ कर जो तस्वीरें भेजी। अब उसके कारण मुसीबत झेलनी पड़ रही।
लेकिन dinki और माधव का साथ भी उसे खल रहा।

Manu Verma
Manu Verma
1 year ago

बहुत अच्छा भाग 👌👌👌👌

Rashmi Hasija
Rashmi Hasija
1 year ago

Oh oh madam.. to affair bhi soch samajh ker kerna tha na

Nisha
Nisha
1 year ago

Madhav manjari se apne riste ko majuri de chuka hai toh ab dinki ki care kyun aur manjari ke jhooth ko sach kyun kaha usne

Yashita Rawat
Yashita Rawat
1 year ago

Wah manjari madam mai karo toh raasleela dusra kare toh character dheela. Not fair manjari ji.

Shanu singla
Shanu singla
1 year ago

💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫

Aruna
Aruna
1 year ago

👌👌👌👌👌👌👌👌👏👏👏👏👏👏

Manu s
Manu s
1 year ago

Bhot khoob…..❤️❤️❤️❤️❤️👏👏👏👏👏👏

Arun Kumar
Arun Kumar
1 year ago

👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻

Arjun Singh chouhan
Arjun Singh chouhan
1 year ago

Superb 👌