
अतिथि -27
भूषण को भी मंजरी से कोई बहुत शिद्द्त वाली मुहब्बत न थी। लेकिन लड़को का एक ईगो भी होता है, वो खुद भले किसी रिश्ते को अपनी मर्ज़ी से समाप्त कर ले लेकिन लड़की ये पहल कभी नहीं कर सकती..
ऐसा ही कुछ भूषण के साथ था..
मंजरी से उसकी पहली मुलाकात किसी कपड़ो की दूकान पर ही हुई थी।
मंजरी कानपुर से यहाँ खरीदारी करने आई थी, उसी दूकान पर भूषण अपने डिज़ाइन करने के लिए खरीदारी करने खड़ा था…
पहली मुलाकात एक ही कपड़े की पसंद पर आकर ठहरी थी, और उसके बाद फ़ोन नंबर की अदलाबदली से शुरू हुआ बातचीत का सफर देर रात की रसभरी बातो पर जा कर अटक गया था..।
हालाँकि उस समय योगिता भी भूषण के जीवन का एक अहम् हिस्सा थी..।
योगिता रूबी के साथ कॉलेज की सहपाठी रह चुकी थी.. दोनों में अच्छी दोस्ती थी!
योगिता की कॉलेज के बाद शादी हो गयी और रूबी अपना कैरियर बनाने में लग गयी…।
योगिता के पति की दुकान थी, जिसे संभालने वो कोल्हू के बैल सा जुता रहता था..।
योगिता का पति एक अति साधारण चेहरे मोहरे और व्यक्तित्व वाला व्यक्ति था। जिसके न रूप रंग में कोई खास बात थी, न बोलचाल में..।
लाख चाह कर भी योगिता अपने पति में ऐसा कोई बिंदु ढूंढ नहीं पाती थी, जिसके बदले वो उससे प्यार कर सके….।
इसीलिए उसे उसके पहनावे से लेकर चम्मच बजा बजा कर खाना खाने पर भी आपत्ति होती थी..!
कभी वो भोजन करते समय आवाज़ नहीं करने के लिए उसे टोक देती, कभी समय असमय नाक में ऊँगली डाल हड़प्पा की खुदाई में मिलने वाले सुख का अनुभव करने पर चिढ जाती!!
योगिता खुद कोई अपरूप सुंदरी नहीं थी, छोटी छोटी भिंची हुई आँखों के नीचे हद से ज्यादा लम्बी नाक और भींचे हुए होंठ उसके कृपण स्वभाव के परिचायक थे..।
रंग ज़रूर गोरा भभूका था, लेकिन उसके गोरे माथे के बीचोंबीच ऊपर से नीचे उभरी गुलाबी नस अक्सर फड़कने लगती थी..
एक बार उसकी ताई की बेटी ने विवाह पूर्व उससे मजाक में कहा भी था -“योगिता हमाई अजिया कहती थी, जिस स्त्री के ऐसी नस फड़कती है न उसका उसके पति के अलावा भी किसी से संबंध होता है !”
किशोरवय की रसीली उमंगो में गुम योगिता उस वक्त इस बात को हवा में उड़ा गयी थी..।
लेकिन अपनी मधुयामिनी में अपने पति की बजती नाक के खर्राटे सुन उसे रह रह कर अपनी बहन की कही बात का स्मरण हो आया था..।
उसका पति वाकई बैल था..
सुबह नौ बजे अपनी दुकान खोलने निकलता वो खच्चर सा दिन भर अपनी दुकान में बैठा बैठा हिसाब में लगा दिन ढले घर लौटता…।
नहा कर पूजा-पाठ कर, भर पेट खाने के बाद अपने खर्राटों से कमरा गूंजा देता था वो…।
योगिता का खुद का व्यक्तित्व ढीला और चरित्र उथला था।
इसलिए वो अपने पति के कुरूप चेहरे और व्यक्तित्व के पीछे दमकता उसका सोने सा हृदय नहीं देख पायी थी..।
वो बेचारा रात दिन जूझ कर अपनी बीवी के लिए कभी करधन तो कभी छल्ला बनवा लाता और ये चंडिका उसके तोहफों को उड़ा कर रख देती..
“चांदी में इतना रुपया उड़ा देते हैं, इससे तो रूपये जुड़े रहते तो अब तक एक सोने की सतलड़ बनवा लेती मैं !”
कभी कभी बेचारा रात आधी रात अपने प्रणय निवेदन में उसे खींच कर बाँहों में भरने की चेष्टा करता और वो उसे दुर्दुरे कुत्ते सा झिड़क कर दूर कर देती !
बात बात पर उससे लड़ना कुढ़ना योगिता की आदत बनती जा रही थी, और तभी एक दिन अपने बच्चे के पीटीएम से लौटते में उसकी टक्कर रूबी से हुई और रूबी ने उसे अपनी बुटीक में नौकरी का मनोहारी प्रस्ताव दे दिया ….
बारह हजार की तनख्वाह मिलेगी ये सुन कर योगिता के पति ने उसे मीठा सा उलाहना भी दिया कि इतना तो घर बैठे मुझसे ही ले लेना, लेकिन योगिता को असला में घर की चारदीवारी से बाहर निकलने का रास्ता चाहिए था, और इसलिए उसने रूबी का प्रस्ताव तुरंत लपक लिया..।
रूबी की दोस्त होने के कारण उसे अपनी नौकरी में ज्यादा जद्दोजहद नहीं करनी पड़ी, और वो जल्दी ही उसकी संगत में काम सीखती चली गयी..।
भूषण ने इस बात को शुरू से ताड़ लिया था कि अगर उसे रूबी के करीबी स्थान बनाना है तो उसे योगिता को फंसाना होगा…।
योगिता पहले ही भरी बैठी थी..!
जब देखने सुनने में स्मार्ट से भूषण ने उसकी तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया तो वो कब पीछे हटने वाली थी…।
वो पके फल सी भूषण की गोद में टपक पड़ी और इस तरह एक अमर्यादित रिश्ते की नींव अपनी अपनी ज़रूरतों के भवन बनाने के लिए गङ गयी…
***
भूषण से बात होने के बाद से ही मंजरी जरा अनमनी सी हो रही थी, लेकिन वो किसी से इस बारे में कुछ बात नहीं कर सकती थी..
वो सभी लोग कपूरथला की तरफ निकल गए…
कुछ एक दुकानों में घूम घाम कर तीनो औरतों को लगा वो लोग ज़रा बैठ कर सुकूं से कहीं अच्छी साड़ियां देख लें.. ।
उन्हें “वामा ” में बैठा कर अपने लिए सगाई का लहंगा देखने के लिए मंजरी डिंकी और माधव को साथ ले पास के “परिधान” में घुस गयी..
एक से बढ़ कर एक बढ़िया कारचोबी, सुनहरी जरी मोती घुंघरू के कामो से लगे कपड़ो के थान के थान खुले पड़े थे..
कहीं बरेली का भारी कामदारी लहंगा सज रहा था, तो कहीं मुल्तान का हलके मलमल में मोतियों के काम वाला लहंगा चमक रहा था..
कहीं कांचीपुरम का प्योर सिल्क था, तो कहीं कलकत्ता का विशुद्ध हथकरघा तांत डोरिया बनारसी और बांग्लादेशी ढ़ाकायी!
इतने कपड़ो के बीच मंजरी थोड़ी देर पहले की अपनी परेशानी भूल कर उन सुंदर रंगो और कपड़ो में खो गयी थी, पीछे से किसी ने उसके कंधे पर हाथ धर दिया..
“तुम यहाँ ?”
पहचानी सी आवाज़ कानो में पड़ते ही वो चौंक कर पीछे पलटी और अपने सामने खड़े भूषण को देख उसके चेहरे का रंग सफेद पड़ गया..
“तो तुम लखनऊ ही हो न..? फिर झूठ क्यों बोला ?”
“वो… हम्म… बात ये थी कि.. अरे.. वो मम्मी का अचानक ही प्लान बनता बिगड़ता रहता है, जानते तो हो न ?”
“नहीं.. तुम्हारी मम्मी को नहीं, लेकिन तुम्हे जानने लगा हूँ !”
भूषण के कठोर शब्दों के साथ उसके चेहरे पर भी कर्कशता चली आ रही थी..
मंजरी उसे लेकर बाहर की तरफ बढ़ना चाहती थी, लेकिन भूषण समझ चुका था कि इतनी महंगी और बड़ी दूकान से मंजरी अपने जन्मदिन की खरीदारी करने तो नहीं आ सकती..
उसी वक्त हाथ में एक सुनहरी दुपट्टा अपने गालो से मलती डिंकी मंजरी तक चली आई..
वो उसे उस कपड़े को दिखाना चाहती थी कि तभी उसकी नजर सामने खड़े भूषण पर पड़ गयी ….
उसने भूषण को नमस्ते कहा और डिंकी की तरफ सवालिया नजरो से देखने लगी..।
मंजरी मुस्कुराने की नाकाम कोशिश करती हुई बात संभालने की कोशिश करने लगी..।
“ये मेरी छोटी बहन है डिंकी.. मासी की लड़की है ! असल में इसी के लिए खरीदारी करने मैं और मम्मी यहाँ आये हैं..।
अब क्या बताऊँ भूषण, मेरी मासी जरा पुराने विचारो वाली है। जब तक सगाई न हो जाए बाहर कहीं कुछ कहना नहीं चाहती बस इसलिए तुमसे भी नहीं बता रही थी मैं…।
पर तुम सोचोगे कि मैं झूठ क्यों बोल रही थी, उसका यही कारण है..।
मेरी छोटी बहन डिंकी की सगाई होने वाली है, और उसी की शॉपिंग के लिए हम सब इकट्ठा हुए हैं..!”
“अच्छा, क्या मैं जान सकता हूँ, लड़का कौन है ?”
भूषण एक एक शब्द चबा कर बोल रहा था, जैसे वो समझ गया था कि मंजरी झूठ बोल रही है..
“हाँ जब सगाई के बारे में जान गए तो लड़के को क्यों छुपाउंगी..?
वो देखो, वही तो खड़े थे माधव.. अरे कहाँ चले गए ?”
मंजरी जिस तरफ माधव खड़ा था, उधर इशारा कर भूषण को टालने की कोशिश करने लगी, लेकिन भूषण के उधर मुड़ने पर उसे माधव कहीं नजर नहीं आया..।
भूषण को मंजरी की हर बात झूठ लग रही थी.. उसे समझ आ गया था कि मंजरी चाहती है वो जल्दी से जल्दी वहाँ से खिसक लें, लेकिन भूषण भी जैसे ज़िद पर अड़ा खड़ा था..।
“कहाँ कौन ? वहाँ तो बहुत से लोग खड़े हैं, किसकी बात कर रही हो तुम..?”
“मेरी बात कर रही है.. ! हैं न मंजरी ?”
माधव की गहरी सी आवाज़ उन तीनो के कानो में पड़ी और तीनो लोग एक साथ पलट गए..
मंजरी और डिंकी के ठीक बीच में पीछे की तरफ खड़ा माधव मुस्कुरा रहा था..
“आपके मेरे बीच कुछ तो कनेक्शन है भूषण साहब.. आजकल हर जगह आप टकरा जाते हैं !”
माधव को देखते ही भूषण के चेहरे ने तेज़ी से रंग बदल लिया… चेहरे पर सौजन्यता भरी मुस्कान रेंगने लगी..
उसने तुरंत माधव से हाथ मिलाने अपना हाथ आगे बढ़ा दिया..
माधव ने ऐसे हल्के से अपना हाथ आगे बढ़ाया जैसे भूषण से हाथ मिला कर उसका हाथ गन्दा हो जायेगा…।
लेकिन भूषण ने पूरी गर्मजोशी से माधव का हाथ अपने दोनों हाथो में लेकर ज़ोर से हिला दिया..
“आपसे मिल कर बहुत बहुत ख़ुशी हुई !”
“काश मैं भी ऐसा बोल सकता !”, माधव ने सर्र से एक फुलझड़ी छोड़ दी..
“क्या.. क्या कहा आपने ? मैं सुन नहीं पाया !” भूषण ने कहा
“आपका सुनना ज़रूरी भी नहीं !”
मंजरी भूषण के कड़वे स्वभाव से परिचित थी, उसे लगा वो सब के बीच कुछ नौटंकी न कर दे इसलिए टप से बोल पड़ी..
“ये माधव जी है.. मेरी डिंकी की सगाई इन्ही से होने वाली है !”
माधव को इतनी देर में मंजरी की हालत अच्छे से समझ आ गयी थी। लेकिन भोली डिंकी को ये सब खेल कुछ समझ नहीं आ रहा था। वो चौंक कर मंजरी की तरफ देखने लगी और माधव मुस्कुरा कर मंजरी की तरफ देखने लगा..
“और इनका परिचय ?” उसने भूषण को दिखा कर पूछा और मंजरी अपने माथे का पसीना पोछती बोल पड़ी..
“दोस्त हैं.. जस्ट फ्रेंड्स !”
माधव के गंभीर चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ गयी..
क्रमशः

मंजिरी की चोरी आखिर पकड़ी गई पर क्या भोली dinki और प्यारा माधव समझ सकेंगे मंजिरी की चालबाजी।
इतनी आसानी से ये रिश्ता शायद ना हो पाएगा।
Kitni jhoothi hai manjari
Agla part kitne saal baad ayega maam
सौ साल बाद
😂😂😂
मैम अतिथि का अगला पार्ट कब आएगा। लगता है आप कहीं बहुत बिजी चल रही है।
ये वाला माधव भी उस माधव सा मंद मंद मुस्कराते जाता है और…ऐसा लग रहा माधव..भूषण और मंजरी की सचाई जानता है अगर ऐसा नहीं भी है तो भी बहुत अच्छा ही होगा भूषण और मंजरी की सच माधव के सामने आ जाए फिर हमारे माधव और डिंकी 🥳🥳 और जो ये भूषण है बड़ा ही चंट बंदा है भई कैसे रूबी के साथ विश्वासघाट कर रहा है और वो योगीता…🤦दुनिया मे ऐसे नमूनों की कमी नहीं है साली को घर की मुर्गी दाल बराबर लग रही।
आज का भाग मजेदार था 😊👌👌👌👌
Manjari Bhution ke ultaya sidhaya savalo ka jabab bhi ultaya Siddaya hi de rahi thi Madav bhi sub samaj gya,Dinky ko kuch samaj nahi aa raha hai Seeing in the next part eagerly.
अच्छा तो यह मुस्कान का राज अब सामने आया है माधव की शायद माधव को पहले से ही सब कुछ पता था तभी वह फोन पर कुछ कर रहा था और शायद भूषण को भी उसने उसी जगह पर बुलाया होगा यह ऐसा मेरा मानना है जरूरी नहीं है ऐसा हो ।
पर मजा आ गया यह सीन देखकर की मंजरी की पोल इतनी जल्दी माधव के सामने खुल गई और माधव की सगाई उसने बातों ही बातों में डिंकी से भी कर दी।🥰🥰🥰🥰
अब मजा आएगा ना🤗🤗🤗😁😁😁😁 जब माधव के सामने मंजरी की पोल खुल ही गई है तो माधव तो मंजरी से शादी करने से रहा बस अब सुलोचना जी को ही समझना बाकी रह गया है 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻वरना तो माधव डिकी के बीच की यह मंजरी नाम की परेशानी तो हट ही चुकी है🤗🤗🤗🤗
बेहद खूबसूरत कहानी
Nice part
Very nyc part 👌