
अतिथि -26
रेस्टोरेंट में खाने के दौरान भी माधव का दिमाग अपने मोबाइल पर ही अटका हुआ था, ये बात भले ही उसकी माँ और सुलोचना की नजर से बच गयी थी, लेकिन मंजरी और डिंकी दोनों का ध्यान इस बात पर अटका पड़ा था..
“क्या हुआ कुछ परेशान लग रहे हैं.. ?” मंजरी ने पूछ लिया..
“परेशान.. नहीं तो !” वो चिहुंक कर ऊपर देखने लगा और उसकी लड़कियों जैसी लम्बी बरौनियां पल भर को कम्प कर रह गयी…!
मंजरी उसकी आँखों में खो जाती उसके पहले उसका मोबाइल बजने लगा…
मंजरी ने नंबर देखा और तुरंत कॉल काट दिया..
एक बार फिर वो चोर नजर से चारों ओर देखने लगी कि किसी ने उसे देखा तो नहीं।
ठीक उसी वक्त दुबारा फ़ोन बजने लगा, मंजरी ने कॉल काटना चाहा लेकिन माधव बोल पड़ा..
“कॉल अटेंड कर लीजिये, हो सकता है कोई महत्वपूर्ण कॉल हो !”
मंजरी मुस्कुराना चाह के भी मुस्कुरा नहीं पायी, और फ़ोन लेकर बाहर निकल गयी।
इसी बीच डिंकी ने मंजरी के मोबाइल पर झांक लगा ली थी.. ” बेबी कालिंग ” लिखा देख कर वो भी सोच में पड़ गयी कि आखिर कौन है जो मंजरी को फ़ोन कर रहा है..
कहीं उसका पुराना बॉयफ्रेंड तो नहीं..?
“क्या हुआ.. खाना पसंद नहीं आया क्या आपको ?”
माधव ने पूछा और डिंकी उसकी तरफ देखने लगी.. माधव ने ये सवाल सुलोचना से किया था..
सुलोचना से कोई जवाब देते नहीं बना.. !
मंजरी बात करते हुए बाहर निकल गयी…
दूसरी तरफ से आवाज़ आई..
“कहाँ हो मंजू ?”
“मैं… मैं बस यही.. !”
“यहीं मतलब कहाँ ? “
“ऐसे क्यों पूछ रहे हो भूषण ?”
“क्यूंकि मुझे ऐसा लगा जैसे मैंने तुम्हे लखनऊ में देखा है !”
“तुम्हारी ग़लतफ़हमी है, तुम कहाँ हो अभी ?”
“ऑफिस की तरफ जा रहा था, कि मुझे लगा तुम्हारी गाड़ी सामने से क्रॉस हुई ! सच बताओ क्या तुम यहाँ नहीं आई हो ?”
“भूषण मैं तुमसे बाद में बात करती हूँ !”
‘कुछ छुपा रही हो न.. सच बताओ ?”
“नहीं बाबा, नहीं छुपा रही.. तुमसे क्यों छुपाउंगी !”
“तुम आजकल बदल गयी हो.. मेरे कॉल्स नहीं लेती, मुझसे मिलने की बात अक्सर ठुकरा जाती हो.. पहले तुम हर दूसरे इतवार लखनऊ आ जाती थी या मुझे बुला लेती थी, अब तो महीनो बीत जाते हैं तुम्हारे दर्शन नहीं मिलते !”
“बकवास मत करो.. थोड़ा बिज़ी हो गयी हूँ यार.. बताया तो था एमबीए के लिए सोच रही हूँ !”
“सोच ही तो रही हो, अभी करना तो शुरू नहीं किया ना ।
उसके बावजूद बिजी हो गई। समझ में नहीं आता सोचने में तुम इतना बिजी कैसे हो जाती हो..?”
“अच्छा सुनो अभी फैमिली के साथ बाहर आई हूं, बाद में बात करती हूं..”
“कहाँ बाहर हो.. बताओ ?”
“ऐसे क्यों पूछ रहे हो?”
“क्यूंकि तुम्हारे शहर में हूँ।”
“झूठ.. ! अभी तो कहा था कि ऑफिस की तरफ जा रहे थे.. और एक बात बताओ, आज संडे तुम्हारा कौन सा ऑफिस..?”
“ड्रेस डिज़ाइनर हूँ मैं बेबी.. भूल जाती हो क्या ? आज रूबी ने हम चार पांच लोगो को मीटिंग के लिए बुलाया था… किसी फ़िल्मी तारिका की शादी है, और ऐसे अवसरों पर जानती तो हो ये हीरोइने अपने ब्राइडल लहंगे पर लाखों लुटाने के लिए तैयार रहती हैं।।
उनके लिए तो ‘मेरा लहंगा सबसे महंगा’ यह दिखाना भी बेहद जरूरी है। अब अभी पिछले महीने जिस हीरोइन की शादी हुई थी, उसके लहंगे में सुनहरी जरी का काम था और हीरे मोती जड़े थे, तो अब यह नई वाली मैडम की डिमांड है कि उनके में प्लेटिनम के तार गूंथे जाएं और रूबी माणिक सारे ही रत्नों से उनके लहंगे को संवार दिया जाए।
हालांकि डिजाइन इन्हें हूबहू पिछली हीरोइन वाला ही चाहिए..।
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समझ में नहीं आता कि यह हम डिजाइनर के पास आते क्यों हैं? जबकि इन्हें किसी न किसी का लहंगा कॉपी करना होता है। बस थोड़ा सा फेर बदल करके इसे सिल देंगे हम,और ये पहन लेंगे और उसका प्राइस टैग पिछले प्राइस टैग से ज्यादा बड़ा करवा लेंगे..।”
“तुम्हारे लिए तो अच्छा ही है, बिना मेहनत के तुम्हें फल मिल जाता है…।”
“चलो ऑफिस मीटिंग के बाद कॉल करता हूं..
हो सकता है मटीरियल पर्चेसिंग के लिए जाना पड़ जाये..।”
“ठीक है.. आराम से काम निपटा लो.. फिर बात करेंगे..।”
वो बात कर के अंदर पहुंची तब तक सबका खाना निपट चुका था… उसने भी फटाफट उलटे सीधे दो चार कौर निगले और शॉपिंग जाने के लिए खड़ी हो गयी…।
सभी एक साथ शॉपिंग के लिए निकल पड़े…
मंजरी फ़ोन आने के बाद से जरा परेशान सी हो गयी थी…।
असल में पिछले दो साल से उसका और भूषण का अफेयर चल रहा था…।
भूषण पढ़ा लिखा स्मार्ट बंदा था, एक बड़ी प्राइवेट फर्म में अच्छे पद पर काम कर रहा था..।
लखनऊ ही नहीं आसपास के शहरो में रूबी वासनिक का बड़ा नाम था ! कपड़ो की डिज़ायनिंग की दुनिया में रूबी का नाम इतना चर्चित था कि टेलीविज़न के साथ साथ अब तो बड़े परदे की तारिकाएं भी रूबी के डिज़ाइन किये लहंगे पहनना अपना फैशन स्टेटमेंट समझने लगी थी..।
भूषण रूबी का दांया हाथ बन चुका था..।
हालाँकि उसके बारे में दबी छुपी ज़बान में लोग यहाँ तक भी कहते थे की वो छोटे डिज़ाइनर्स के स्टाइल किये कपड़ों को अपने नाम से लेवल कर रूबी के सामने प्रस्तुत कर देता था।
लेकिन जब तक रूबी के सामने कोई ये कहने की हिम्मत नहीं करता तब तक भूषण सर्वेसर्वा था..।
रूबी उस पर हद तक विश्वास करती थी..।
अपने ज्यादातर बड़े पायलट प्रोजेक्ट्स उसने भूषण को बता रखे थे, लेकिन वो खुद नहीं जानती थी कि भूषण दीमक की तरह उसे ही निगलने की तैयारी किये बैठा है..।
अंदर ही अंदर घुन की तरह भूषण ने रूबी को खाना शुरू कर दिया था..।
रूबी के ज्यादातर बड़े कॉन्ट्रेक्ट्स से वो ही निपटने लगा था..।
रूबी ने पूरे भरोसे के साथ उसे ये जिम्मेदारी सौंपी थी और इस बात का फायदा उठा कर भूषण अब अपने स्तर पर इन लोगो से संबंध बनाने और बढ़ाने लगा था..।
दूसरी तरफ अपनी बुटीक के लिए उसने शहर के मुख्य बाजार में स्थित सरकारी दुकानों मे से दो दुकानों का टेंडर डाला हुआ था..
टेंडर निकलते ही दुकानों का आबंटन होना था, जिसके बाद सिर्फ छह महीने में दुकाने खड़ी होकर मालिकों को मिल जाने वाली थी…।
भूषण ने सब सोच रखा था…।
अपनी व्यवसायिक बुद्धि में कुटिलता का रस मिला कर उसने खुद के भविष्य को पूर्ण रूप से सुरक्षित देखना शुरू कर दिया था..।
और इसी सब के साथ मंजरी उस पर विवाह के लिए दबाव बनाने लगी थी..।
अपनी कलुषता में आगे बढ़ता भूषण इस समय विवाह जैसी निहायत ही गैरज़रूरी वस्तु पर न अपना समय बर्बाद करना चाहता था न शक्ति..।
ऑफिस में उसने विवाहित योगिता को भी अपने झांसे में उलझा रखा था..जिसके बारे में मंजरी कुछ भी नहीं जानती थी..।
मंजरी एक साधारण सी सपनो में खोयी हुई लड़की थी जिसके सपने भी उसी की तरह छोटे और साधारण थे.. ।
उसके लिए विवाह मतलब एक फेयरी टेल के सच होने जैसा था..।
ज्यादा नहीं महीने का डेढ़ दो लाख कमाने वाला लड़का हो, जो उसे शादी के पहले जगह जगह घुमा कर प्रीब्राइडल शूट करवाए, उसके मन मुताबिक कपड़े गहने दिलवाये और भारी तामझाम वाली शादी के बाद मधुयामिनी के लिए वर्ल्ड टूर नहीं तो कम से कम यूरोप तक तो ले ही जाये..।
इन छोटे छोटे सपनो को अपनी बड़ी बड़ी आँखों में समेटे मंजरी भूषण में अपना भावी पति ढूँढना चाह रही थी, लेकिन वो लगातार उसे और उसको सपनो को झटकता जा रहा था..।
ठीक उसी समय डेढ़ लाख के पैकेज वाले सरकारी इंजिनियर का जगमगाता रिश्ता थाली में परोस कर उसके सामने आया..।
भूषण के साथ तो जातीय विवाद भी सम्भव था, यहाँ तो लड़का उसी की जात बिरादरी का भी था। इसी से मंजरी ने बिना माधव को देखे ही फट से उसे हाँ बोली और भूषण से पल्ला झाड़ लिया..।
लेकिन भूषण भी इतनी आसानी से मान जाने वालों में से नहीं था..
क्रमशः

मंजिरी का भूतकाल कही उसके भविष्य पर भारी ना पड़ जाएं। वैसे भी भूषण छटा हुआ बदमाश ही लग रहा है।
मंजिरी की शॉपिंग और dinki का साथ माधव जाने किसका होगा।
Ye toh gajab ho gaya
ओ तेरी इतना बड़ा झोल ना भूषण ठीक है ना मंजरी पर यह दोनों एक दूसरे के लिए बिल्कुल उचित लग रहे हैं मुझे बेचारे सीधे-साधे माधव और डिकी को कोई क्यों अकेला नहीं छोड़ देता क्यों बेचारे दोनों प्राणियों के पीछे सब हाथ धोकर पड़े हैं मंजरी तुम्हें तो कोई अपने जैसा ही ढूंढना पड़ेगा जो तुम जैसे सोच रखता हूं क्योंकि तुम्हारा खुद का तो चरित्र साफ नहीं है उसे बेचारे लड़के को तो बख्श दो मुझे माधव और डिकी दोनों एक दूसरे के लिए बेहद योग्य लगते हैं अब तो जबकि रिकी को तो यह पता भी है कि मंजरी का पहले से एक बॉयफ्रेंड है और मंजरी किसी एक जगह पर टिकने वाली लड़की भी नहीं है तो फिर माधव के साथ वह कैसे निभा पाएगी।
तब तो मंजरी की पोल खोलना बहुत जरूरी हो गया है और यह पोल पट्टी कोई और नहीं शायद माधव के ही हाथ में लग गई है तभी वह मुस्कुरा रहा था
ओह तो ये भूषण वो वाला भूषण है जिसने डिंकी के बनाए डिज़ाइन्स पर धोखे अपनी मोहर लगा ली थी और ये मजरी का बॉयफ्रेंड 🤔।
मजरी भी बड़ी चालाक है एक तरफ तो माधव से सगाई की शॉपिंग कर रही और दूसरी तरह भूषण से…🤷♀️।भूषण भी कौन सा कम है मुआ चोर कहीं का।दोनों ही झूठे है।
अब देखते है आगे क्या होता है इन दोनों का झूठ कबतक चलता है..।
बहुत बेहतरीन भाग 👌👌👌👌🙏।
Nyc part 👌
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लो बोलो दुनिया गोल है आखिर सच हो गया ना।माधव का चरित्र चित्रण इतना अच्छा किया आपने कि मैं उसको पढ़ कर भी देख पा रही हूं कि वो कैसा दिखता है।👍🏻👏🏻👏🏻 Super part
Bahut badhiya
Nice part ye manjari to lalachi nikali
Very nice part of the story very interesting and waiting for the next part hope it’s coming soon as possible