
पोंचो…
पोंचो अपने पिछले मालिकों से इन दोनों की तुलना करता तो पाता था कि ये दोनों किसी दूसरी ही दुनिया से आये नमूने से लगते थे..।
इंसान तो ये थे ही नहीं…!!
उसे जानवर समझने की जगह जाने ये लोग क्या मान बैठे थे, कहीं इन दोनों की आँखों में कोई दिक़्क़त तो नहीं थी..?
उसके साथ बिलकुल ऐसा व्यवहार किया जाता, जैसे वो कोई पशु नहीं बल्कि आदमी का बच्चा हो।
खुद जब खाने बैठते, उसी वक्त उसका खाना भी परोस कर उसे अपने साथ बैठा लेते।
आदमी तो पूरा पागल था, खुद खाते हुए उसे भी अपने हाथ से खिलाने लगता था..
इन दोनों ने उसका बाहर जाना फ़िलहाल बंद कर दिया था। उसके लिए घर की बालकनी को एक छोटे गार्डन में तब्दील कर दिया था..।
छोटे छोटे इंडोर प्लांट्स के बीच रेत भर कर उसके फारिग होने का इंतजाम कर दिया था।
वैसे पिछली बार तबियत बिगड़ने के बाद से अब उसे ज्यादा चलने में थकान भी ज्यादा होने लगी थी।
इसलिए उसे इनका ये गार्डन वाला आइडिया बड़ा अच्छा लगा था।
वो अक्सर वहीँ फ्रेश हो लेता था और अपनी आदत के मुताबिक उसे रेत से ढक दिया करता था, लेकिन ये मैडम जी आकर किसी लम्बे से स्टिक की सहायता से उसके किये धरे को एक पॉलीथिन में लपेट कर बाहर ले जाती थी.. हो सकता है बाहर फेंक आती हो !
और वापस रेत को पलट कर उसमे कुछ फ्रेशनर सा मिला जाती थी।
एक बात तो मानने लायक थी, दोनों बड़े सफाई पसंद थे..।
उसे लगभग रोज ही गीले गर्म टॉवेल से पोंछ पांछ कर टंच रखते थे। दो दिन में एक बार बढ़िया से टब में बैठा कर झाग से भर कर नहलाया करते, उसके बाद हेयर ड्रायर की सहायता से उसे सुखा कर, कुछ लिवॉन जैसा उसके रूखे बालों में लगा कर उसे सजा धजा कर रखते थे..।
पिछले मालिकों के यहाँ खुद को साफ़ रखना उसकी खुद की ज़िम्मेदारी थी।
ये दोनों तो कुछ कुछ पागल से भी थे, बीच बीच में उसके दांतों नाखूनों कान सबकी सफाई करने लगते थे..।
पहली पहली बार जब इन लोगो ने उसे खाना दिया, तब पता नहीं क्यों लेकिन उसे खाने की तरफ देखने का भी मन नहीं हुआ, इन दोनों ने अगले दिन उसका खाना बदल दिया और नया ताज़ा खाना उसके लिए ले आये।
उसका मन करता इनसे चीख चीख कर कहे, मुझे चार पांच दिन पुराना सड़ा गला सब खाने की आदत है, लेकिन ये दोनों मनमौजी थे.. और थोड़े से पागल भी।
इन्हे लगता था वो इंसान का बच्चा है। इसलिए उसके लिए भी रोज ताज़ा खाना, दूध, पानी सब परोसते..
उसके बर्तनो को दिन में दो बार गरम पानी से साफ कर के रखते..
उफ़ इतना कौन करता है, वो भी घर के पशु के लिए ?
लेकिन दो चार दिन बीतते बीतते उसे अब वो दोनों बड़े अच्छे लगने लगे थे. .. बड़े प्यारे से थे वो दोनो.. !
एक दिन मैडम ऑफिस से आई और उसे गोद में उठा कर प्यार करने के बाद उसे अपने सामने बैठा कर अपने बैग से कुछ निकालने लगी…
अरे ये तो टीशर्ट थी, जिसमे उसी की तस्वीर लगी थी..
उफ़ ये दोनों उसे शर्मिंदा करने में कोई कसर नहीं छोड़ते..। वो झेंप गया था।
लेकिन फिर नजर बचा कर बार बार उस टीशर्ट में छपी अपनी तस्वीर को देखने लगा… कितना प्यारा लग रहा था वो..।
उसके साथ कुछ देर खेलने के बाद मैडम फ्रेश होने चली गयी और जाते जाते उसे अपने पतिदेव की गोद में डाल गयी..
वो जब वापस आई तब उन्होंने उसी टीशर्ट को पहना हुआ था…!!
आज की रात कुछ और भी खास हुआ। शायद आज शुक्रवार की रात थी..
इस रात ये दोनों बड़े खुश रहते हैँ, अगले दो दिन की छुट्टी होती है न..।
आज दोनों ने उसी टीशर्ट को पहना, और उसे अपने साथ काउच में अपने बीच में बैठा कर टीवी पर बिल्लियों वाली कोई मूवी लगा दी।
पोंचो के लिए ये एक और नया अनुभव था..
अपने ही जैसे लोगो को टीवी पर देख पाना ! वो बहुत मगन होकर टीवी देखने लगा, बीच बीच में उन दोनों में से कोई एक उसके मुहं में भी कुछ डाल देता.. उसे बड़ा मजा आने लगा था वहाँ..।
उन दोनों ने ऑफिस जाने की पारी बांध ली थी..।
हफ्ते में दो दिन आदमी ऑफिस जाता, और दो दिन औरत.. बाक़ी के दिन दोनों घर से काम किया करते थे..
दोनों ने उसे अकेले न छोड़ने की मानो कसम खा ली हो..।
लेकिन एक दिन मैडम के ऑफिस जाने के बाद उसे भी ऑफिस से फ़ोन आने लगा.. कोई बेहद ज़रूरी मीटिंग बुलवाई गयी थी..।
वो पोंचो को सब समझा कर मीटिंग पर चला गया… जब से वह दोनो पोंचो को घर लेकर आये थे, ये पहला मौका था जब उन दोनों को उसे अकेला छोड़ना पड़ा था।
और वो दिन पोंचो के लिए बहुत बहुत कठिन गुजरा! !
वो उसके लिए उसकी पसंदीदा डिश उसके बर्तन में डाल कर गया था, उसका पसंदीदा खिलौना भी था, लेकिन पोंचो का मन किसी में नहीं लग रहा था..
आज पहली बार वो इस घर में अकेला था।
पोंचो बार बार जाकर उस जगह पर बैठ रहा था, जहाँ बैठ कर “वह” अपने ऑफिस का काम किया करता था।
पोंचो बार बार रसोई में जाकर झांक रहा था, शायद वो लौट आई हो और उसके लिए कुछ बना रही हो.. पर आज दोनों ही नहीं थे।
उदास पोंचो वापस आकर उसी जगह बैठ गया जहाँ वो बैठता था अपना काम करते हुए..
आज उससे कुछ खाया नहीं गया.. उसने पानी की एक बून्द तक नहीं पी..
उसके मन में डर बैठने लगा, कहीं ये दोनों उसे छोड़ कर तो नहीं चले गए ?
अब तो उसकी तबियत पहले से काफी सुधर गयी थी, उसे एक बार भी डॉक्टर की ज़रूरत नहीं पड़ी थी..।
कहीं ऐसा तो नहीं कि उसकी तबियत सुधर गयी इसलिए उसके पिछले मालिकों ने उसे मांग लिया हो.. ?
ये सोच कर ही उसके बदन में झुरझुरी सी दौड़ गयी। नहीं अब चाहे जो हो जाये, वो अपने पिछले घर कभी वापस नहीं जायेगा..
भले ही रोड पर रह लेगा लेकिन उनके पास तो नहीं जायेगा..।
लेकिन उसे इतना प्यार देने के बाद ये पागल लोग उसे छोड़ क्यों रहे हैँ ? वो दुःख में डूबा सोच रहा था कि दरवाज़ा खुलने की आहट हुई, उसके कान तुरंत खड़े हो गए..।
दरवाज़ा खुला, एक पहचानी सी खुशबू उसे अपनेपन का एहसास करा गयी..।
वो आया और उसे अपनी बाँहों में भर लिया।
उसकी छाती से लग कर उसकी खुशबु को महसूस करता पोंचो सुकून में डूबने लगा..।
आह ! वापस आ गए थे दोनों..!!
मैडम की चिकचिक उसे सुनाई देने लगी थी.. मैडम लगातार बोलती थी और अपने ऑफिस और आसपास की सारी बातें उन दोनों को ही सुनाया करती थी..
कभी कभी तो पोंचो का चेहरा अपनी तरफ घुमा कर पूछती थी.. “सुन रहा है न पोंचो, तेरे पप्पा तो मेरी बात सुनते ही नहीं !” और पोंचो तटस्थ भाव से मुहं फेर लेता था और वो “बिलकुल बाप पर गया है” बोल कर काम पे लग जाती थी..
आज उनकी वही बातें कितनी मीठी लग रही थी।
आदमी की खुशबू जी भर कर सूंघने के बाद वो मैडम के पीछे पीछे दुम हिलाता पहुँच गया और उसने उसे तुरंत गोद में लेकर चूमना शुरू कर दिया..
मैडम के रेशमी बाल, कोमल हथेलियां, प्यारे से गाल सब उसे बहुत पसंद थे.. वो उसे गोद में लिए घंटो घंटो सहलाती रहती थी..
आज वो पहली बार खुद उनके पास गया था…।
आज उसे समझ में आया था कि, ये दोनों वाकई इंसान नहीं थे।
भगवान थे उसके लिए..!!
अगला हिस्सा कल…

Nyc part 👌
Kash esa pyaar insan ek dusre se bhi karne lag jaye ..❤️❤️❤️
पोंचो की किस्मत से रश्क हो रहा है , बस रश्क ही ।
ये बिल्कुल न समझना कि मैं उससे कुछ एक्सचेंज करने का सोच रही ।
दुनिया में प्यार हो ये हर कोई चाहता है , जानवरों से भी । निसंतान दम्पति का पोंचो के प्रति रुझान ने मन मोह लिया।
देखते हैं हमारी लेखिका की कलम कौन से मोती बिखेरेगी अगले भाग में ।
🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰
Poncho ne to Mann bandh liya hai Mera, ab bas vo theek hi rahe, agar usko kuchh ho gya to ye dono to Payal ho jayenge