अतिथि -12

अतिथि -12

   केक काटने के बाद चिंटू और डिंकी माधव को साथ लिए घर ले गए..
  माधव को बाहर वाले कमरे में बिठा कर डिंकी अंदर रसोई में चली गयी..

“अम्मी जान, कुछ अच्छा सा खाना बना दो.. आज माधव जी का बर्थडे है !”

“हैँ ? तुझे कैसे पता ?”

“बस पता चल गया ! मैं और चिंटू केक लेकर गए थे, कटवा कर आ गए हैँ… “

आंखे फाडे सुलोचना डिंकी को देखने लगी..
लेकिन उसे डिंकी की निर्दोष चावनी में शक की कोई गुंजाईश नजर नहीं आयी..
कभी कभी उसकी झल्ली भी कुछ अच्छा काम कर जाती है..

“अम्मी जान, अब अपने चमत्कारी हाथो से फटाफट कुछ अच्छा सा पका लो… मैं उन्हें साथ ले आयी कि डिनर हमारे साथ खाना !”

“हे भगवान, एक बार बता तो देती, अब अचानक में क्या खिलाऊँ ?”

“क्यों कुछ बनाया नहीं क्या ?”

“आज तो बस ऐसे ही कुछ भी बना लिया, रुक अभी कुछ इंतज़ाम करती हूँ !”

वैसे तो इतना लम्बा चौड़ा फ़ोन लिए घूमती है, एक बार फ़ोन नहीं किया गया इससे !” खुद में बड़बड़ाती सुलोचना ने चिंटू को आवाज़ लगा दी, चिंटू भाग कर अंदर चला आया..

“ये ले पैसे, जा एक पाव पनीर खरीद ला !”

“बस एक पाव ?” डिंकी ने आश्चर्य से अपनी माँ की तरफ देखा..

“फ्रिज में मटर पड़ी है गुलबानो जी, उसे मिला कर मटर पनीर बना लूंगी.. !”

डिंकी के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान चली आयी, और वो वहां से निकल कर बाहर चली आयी..

“मैं अपने लिए चिप्स भी लूंगा !” चिंटू ने मनुहार से कहा और सुलोचना ने थके से भावो से हाँ कह दिया..

“मना करुँगी तो कौन सा मान जायेगा, जा ले लेना, लेकिन सुन, जल्दी आना और सिर्फ दस के चिप्स लेना !”
चिंटू को भेज कर सुलोचना खाने की तैयारियों में लग गयी..

बाहर विनोद माधव से बातें करता बैठा था..
माधव के स्कूल कॉलेज की पढाई के बारे में बातें चल रही थी..

“वाह ये तो बड़ी अच्छी बात है !”

“कौन सी बात पापा ?” डिंकी भी आकर सोफे पर बैठ गयी..

“माधव की पढाई गोरखपुर से नहीं बल्कि बनारस से हुई है !”..

डिंकी ने सवालिया नजरो से माधव की तरफ देखा, और माधव ने भी पलके झपक कर हामी भर दी..

“बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी से पढ़े हैँ आप ?”

माधव ने धीरे से गर्दन हिला दी..

“मुझे बीएचयू बहुत पसंद है.. कभी मैंने भी सोचा था की वहां से पढूंगी, लेकिन फिर घर से दूर रहना मुश्किल होगा सोच कर वो आईडिया ड्राप कर दिया !”

“कभी यूँ ही घूम आना !” माधव ने कहा और डिंकी ने हामी भर दी..

इधर उधर की बातों में समय निकल गया और सुलोचना खाना परोस लायी..
माधव अपने जन्मदिन पर घर से दूर था, लेकिन इस  स्नेहिल परिवार ने उसे ये एहसास नहीं होने दिया कि वो अकेला है..।

इस स्नेह के आभार से लदा फदा वो घर लौटने निकल रहा था कि बहुत ज़िद कर के सुलोचना ने उसे ग्यारह सौ रूपये ज़बरदस्ती पकड़ा दिए..

“रख लो बेटा, कुछ खरीद लेना ! आज तुम्हारा जन्मदिन है..। मेरी अम्मा हमेशा कहा करती थी, जन्मदिन हर बार मनाना ज़रूर चाहिए।
भले ही छोटा सा आयोजन हो पर, जरूर होना चाहिए..।
और छोटा ही सही बच्चो को तोहफा ज़रूर देना चाहिए !”

माधव ने झुक कर सुलोचना के पैर छू लिए..

डिंकी भी दरवाज़े पर खड़ी थी.. माधव ने हाथ हिलाया और सीढ़ियाँ उतरने लगा कि डिंकी ने उसे आवाज़ लगा दी..

“सुनिए !”

डिंकी की लरजती आवाज़ में सुनिए सुन उसके कदम ठिठक गए..
उसने पलट के देखा, डिंकी एक दो सीढ़ियां उतर कर उस तक चली आयी थी..।

नीली चुस्त जींस पर उसने लंबी सी सफ़ेद लखनवी कुर्ती पहन रखी थी..
इस कुर्ती में उसका दूधिया रंग कुछ और खिल उठा था ..।
बाल बेतरतीबी से यहाँ वहां उड़ रहे थे, उसने पीछे जो क्लचर लगाया था, वो घर में घुसते ही निकाल कर अपनी कुर्ती की बांह पर लगा चुकी थी..
चेहरे पर दिन भर की थकान ने एक अलग सी लुनाई ला दी थी..
थकान से आंखे और उभर आयी थी..

“हम्म.. बोलो !”

“कल मेरे ऑफिस में कल्चरल ईव है, सिर्फ एक डेढ़ घंटे का प्रोग्राम है… आप आएंगे ?”

“बाहर के लोग आ सकते हैँ ?” माधव ने पूछा

“हाँ, अगर उनके पास इवेंट के ‘पास’ हो तो ?”

“वो तो मेरे पास नहीं है !”

“वो कल आपको मिल जायेंगे !”

माधव ने डिंकी के पीछे दरवाजे की तरफ देख कर डिंकी से सवाल कर लिया..

“घर पर पता है ?”

डिंकी ने ना में गर्दन हिला दी….

“अगर घर पर पता होता तो घर पर ही आपको इन्वाइट कर चुकी होती.. !”

“हम्म !”

“और सुनिए.. अपने दोस्त को भी साथ ले आइयेगा !”

“किसे.. ? प्रणय को ?”

“हाँ वही, जो आपके साथ टी स्टॉल पर आते हैँ !”

पता नहीं क्यों ये बात माधव को पसंद नहीं आयी.. अब तक उसके ह्रदय में उत्साह की जो बेल लहरा रही थी दप्प से मुरझा गयी..
आखिर प्रणय को क्यों बुलाया, लेकिन अब बुलाया है तो उसे ले जाना ही होगा..

सोचा कर भारी कदमो से माधव घर के लिए निकल गया…

अगली सुबह ऑफिस में काम में व्यस्त माधव के दिमाग से डिंकी के ऑफिस वाली बात निकल चुकी थी..
चाय बाँटने वाला लड़का घूम घूम कर सबकी टेबल पर चाय रख रहा था.. माधव की टेबल से आगे बढ़ने के बाद वो वापस लौट आया..

“माधव भैया, आपके लिए किसी ने कुछ दिया है !”

“किसने ?”

“पता नहीं.. ये एक दीदी देकर गयी है.. आपको देने बोला था !”

माधव ने हाथ बढ़ा दिया.. उसके हाथ में दो पास रखे थे…  
उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ गयी..

“क्या हुआ गुरु, गजब मुस्कुरा रहे हो ? लगता है पहले प्यार की पहली चिट्ठी साजन को मिल गयी ?”

“अबे यार, तुम्हारा रेडियो भी बस एक ही चैनल पर अटका रहता है.. ये लो पास रखो, और जाओ फैशन शो देख आओ.. !”

“क्या बात है ? तुम्हारी सुमन के फैशन डिज़ायनिंग में आने का फायदा..?
हमें भी मॉडल्स करीब से देखने को मिलेंगी… ! कितने बजे चलना है ?”

“शाम पांच के बाद.. अभी काम निपटा लेते हैँ !”..

प्रणय ने पास अपनी जेब के हवाले किये और अपनी टेबल की तरफ निकल गया..

शाम तक में अपना काम निपटा कर दोनों लड़के सामने वाली बिल्डिंग में मौजूद फैशन डिज़ायनिंग ऑफिस की तरफ बढ़ गए..
वहां आज कुछ नए कपड़ो की लांच थी। जिसके लिए दस ग्यारह मॉडल्स की रैम्प वाक आयोजित की गयी थी.।
इस कार्यक्रम में ऑफिस के एम्पलॉईस का भी परफॉर्मेंस था..।

ये परफॉर्मेंस डिंकी के द्वारा ही किया जाना था..।
मॉडल्स के पहले राउंड के रैंप वाक के बाद, डिंकी का नाम पुकारा गया और वो स्टेज पर चली आयी..

“अब आपके सामने आ रही है अनुराधा, अपने बनारसी बाबू को याद करते हुए ” नाम पुकारे जाने   के साथ ही तालियां बजने लगी..

“अच्छा तो नाम ‘अनुराधा’ है ?” प्रणय चहका

माधव ने उसकी तरफ सर घुमा कर देखा.. और उसने हंसी ठिठोली में कंधे उचका दिए…

“बढ़िया है गुरु.. “माधव अनुराधा” या “राधा माधव” तुम्हारी तो जोड़ी स्वयं भगवान ने बना कर भेजी है !”
प्रणय मजाक में बोल गया..

“भगवान स्वयं इस बंधन में कहाँ बंध पाए थे, पत्नी तो उनकी सत्यभामा ही थी… राधा से तो सिर्फ प्रेम किया था !” माधव ज़रा तल्ख हो गया और प्रणय उसकी ये बात सुन चुप लगा गया..

    उसी वक्त बेहद खूबसूरत हलके पीले रंग की स्कर्ट के साथ डिंकी गाजरी रंग का टॉप पहने वहां बने छोटे से स्टेज पर चली आयी… ..

खुले बालों की बीच से मांग निकाल कर उसने पीछे पिन कर रखा था, और कानों में ब्लैक मेटल के बड़े से झुमके पहन रखें थे…
डिंकी बहुत खूबसूरत लग रही थी..

गाना बजना शुरू हुआ और उस गाने के बोल पर डिंकी ने थिरकना शुरू किया..

बनारसिया हाए बनारसिया
रंग मे भंग या भंग मे रंग बनारसिया हाए बनारसिया
संग मे जंग या जंग मे संग
बनारसिया हाय बनारसिया
हा आ हाए बनारसिया हाए बनारसिया

डिंकी को कथक करते देख माधव की आंखे खुली रह गयी..
वो उसे देखते हुए खो सा गया था!
सच है कला प्रेम और सौंदर्य का ही तो मिश्रण है.. जब जिस व्यक्ति के हृदय में प्रेम हो वही कला को पहचान सकता है..
सौंदर्य की अपरूप देवी सी लगती डिंकी, आज रोज़ से कितनी अलग लग रही थी..
एक एक शब्द पर अपने हाथों, आँखों, पैरो, भवों से भाव भरती वो किसी अन्य लोक की अप्सरा सी लग रही थी…!

उसे थिरकते देख माधव जैसे सब कुछ भूल बैठा था..
अपने कंधो पर की ज़िम्मेदारियाँ, अपने पिता की खुद से उम्मीदे, अपनी माता की इच्छाएं, छोटे भाई के प्रति खुद के दायित्व.. सब कुछ जैसे निराकार हो गया था..
साकार थी तो बस डिंकी !
अनुराधा… राधा !!

उसे देखते हुए वो खुद को भूल बैठा था, तभी पास खड़े प्रणय ने उसे कुहनी मारी..

“ये सुमन तो असली वाली से भी कहीं ज्यादा खूबसूरत है… सुपर गॉर्जियस.. है न ?”

माधव की तन्द्रा टूटी और वो भी सब के साथ ताली बजाने लगा..

क्रमशः

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Nisha
Nisha
1 year ago

Wow dinki toh bahut telented ladki hai

Seema kawatra
Seema kawatra
1 year ago

राधा माधव..वो सतयुग के कन्हैया थे और ये कलयुग का माधव राधा
अपना प्यार और अधिकार लेना आता है इन्हे

उमिता कुशवाहा
उमिता कुशवाहा
1 year ago

आज सच्चे मायने में माधव के मन मंदिर में अप्सरा रूपी डिंकी ने कब्जा कर लिया है ऐसा लगता है माधव को पिंकी से प्रेम हो गया है यह बात सही है कि अचानक ही ऐसी कोई पल होते हैं जब कोई आपको बहुत अच्छा लगने लगता है और फिर वह इंसान आपके जीवन का एक अभिन्न अंग बन जाता है🥰🥰🥰🥰🥰❤️❤️❤️❤️❤️😍😍😍😍😍😍😍
रचना बेहद मनोरंजक होती जा रही है और अब बेसब्री से इंतजार है कि आगे क्या होगा

Neeta
Neeta
1 year ago

💕💕💕💕💕❤❤❤❤❤❤❤bahut aacha part dinki aur madhav ka sath bna rhey

🙏🙏

Geeta sidpara
Geeta sidpara
1 year ago

Very very nice part 👌👌

जागृति
जागृति
1 year ago

Wonderful story

Arun Kumar
Arun Kumar
1 year ago

🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰

Upasna
Upasna
1 year ago

कहानी की तारीफ़ बाद में पहले ये बताइए कि नूरजहां ,गुलबानो ,अम्मी जान …मतलब क्या चल क्या रहा दिमाग में ।
बढ़िया लगते हैं न ऐसे सम्बोधन …. किसी अपरिचित शहर में अनजानों के बीच मे अपनत्व की छाँव कितना सुकून दे गई होगी माधब को ये तो वही समझ सकता है ।dinki ने अपने परिवार के साथ मिलकर माधव के जन्मदिन को रँगभरकर फीका रह जाने से बचा लिया ,सही तो कहती थी सुलोचना की माँ की जन्मदिन छोटा सही पर मनाना जरूर चाहिए क्योंकि हमारा अस्तित्व उसी एक दिन से तो है धरा पर ।
Dinki ने माधव को इनवाइट देकर जितनी हलचल उसके मन मे नहीं मचाई होगी उससे ज्यादा प्रवीण को बुलाकर मचा दी ।
खैर प्रवीण तो समझ रहा है माधव के मन का भाव ।
माधव पर राधा का रंग चढ़ने लगा है अब देखना ये है कि राधा की चुनर की माधव के प्रीत में कब सरबस होगी।
जल्दी चहिये जी next part

Rajendra Shakya
Rajendra Shakya
1 year ago

बहुत सुंदर ……..
💐💐💐

Rekhapradeepsrivastava
Rekhapradeepsrivastava
1 year ago

डिकी ने माधव का जन्मदिन तो अच्छे से मना दिया और सुलोचना जी ने मटर पनीर भी बना लिया और गिफ्ट में पैसे भी दे दिए माधव को, माधव को आज अपने परिवार की कमी नहीं खली
आज तो माधव जी का दिल अपने वश में नहीं है डिकी को देखते ही अपने होश खो बैठे है, आगे आगे देखते है होता है क्या
बहुत ही खूबसूरत पार्ट👌👌👌👌👌❤️❤️❤️❤️❤️