मायानगरी -2 भाग -7

मायानगरी सीजन -2 भाग -7

  अब तक आपने पढ़ा अपने बेटे की वजह से थापर झूठा और बेबुनियाद इल्जाम लगाकर डॉक्टर मृत्युंजय को अस्पताल से सस्पेंड कर देता है, जिसकी वजह से गुस्से में छवि भी छुट्टियां लेकर घर बैठ जाती है। दूसरी तरफ डॉक्टर अधिराज कार्डियोलॉजी में पढाई कर रहा है!
एक ऑपरेशन के दौरान सीनियर डॉक्टर सुमित की लापरवाही के कारण मरीज़ की जान पर बन आती है, और उसे अधिराज जी जान से जुट कर बचा लेता है, लेकिन सुमित अधिराज पर ही झूठा इल्जाम लगा कर सीनियर फेकल्टी के सामने अधिराज पर आरोप लगा देता है..

डीन और प्रेजिडेंट सर जब अधिराज पर डिसिप्लिनरी एक्शन लेने की सोचते है, तब अधिराज अपने मोबाइल पर रिकॉर्ड किये ऑपरेशन का विडिओ उन्हें दिखा देता है, जिसमे साफ नजर आता है की गलती सुमित की थी ना की अधिराज की..।

उसके बाद अधिराज को बाहर भेज दिया जाता है..
इसी दौरान एक इमरजेंसी न्यूरो का केस हॉस्पिटल में आता है, जहाँ मरीज़ के साथ वाले लोग मृत्युन्जय से ही सर्जरी करवाना चाह्ते है, और उनके दबाव बनाने पर थापर को जय को बुलाना पड़ता है..

अब आगे…

  जय हॉस्पिटल पहुंचा और उसे देखते ही उसकी टीम के चेहरे पर रौनक आ गयी…।

जय को सामने देखते ही थापर के चेहरे के भाव बदलने लगे, लेकिन उसके पास कोई चारा भी नहीं था..
जय ने भी ज्यादा सवाल जवाब किये बिना मरीज़ की फाइल मंगवा ली..
  गुम्बर का पीए फाइल लेकर जय के सामने खड़ा था.. और जय के सवालों के जवाब देता जा रहा था..
जय को केस हिस्ट्री देख कर समझ आ गया था कि सर्जरी ही इस मरीज़ को बचने का एकमात्र उपाय है..
उसने तुरंत ओआर तैयार करने का आदेश दिया और खुद अपने कमरे की तरफ निकल गया..

उसके कमरे में फ़िलहाल डॉक्टर कुलदीपक बैठे थे..
जय अपने कमरे में दाखिल हुआ और अपनी कुर्सी पर बैठे कुलदीपक को देख चौंक गया..
कुलदीपक भी इसी अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग में प्रोफेसर थे, लेकिन सर्जरी के मामले में वो फ़िलहाल जय से काफी पीछे थे…

“ओह्ह हेलो डॉक्टर जय… स्वागत है आपका !”

कुलदीपक अपनी जगह पर खड़ा हो गया और जय मुस्कुरा कर अंदर दाखिल हो गया..

“हेलो.. कैसे है आप ?”

“बस ठीक है, आपके बिना अस्पताल सूना सा हो गया था !”

कुलदीपक की बात पर हंस कर जय ने इशारे से पूछा कि क्या वो अपनी कुर्सी पर जा सकता है, कुलदीपक ने हड़बड़ा कर वो जगह छोड़ी और दूसरी आराम कुर्सी पर पसर गया..

कुलदीपक अब तक अस्पताल में हुई बातचीत को बताता रहा लेकिन जय का पूरा ध्यान इस केस पर था… उसने अपनी टीम को ओआर तैयार करने भेज दिया था, और अब वो उस केस से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं को देखना चाहता था..
उसने एक विडिओ लगाया और बड़े ध्यान से उसे देखने लगा..

“क्या देख रहे हो ?” कुलदीपक के सवाल पर हलके से जय ने जवाब दे दिया..

“सर्जरी का विडिओ।”

“ओह्ह… !” कुलदीपक हंसने लगा

“यू ट्यूब से विडिओ देख कर सर्जरी करते हो क्या ?”

“नहीं… ये बेस्ट न्यूरो सर्जन्स के विडिओ है। इन्हे देख कर काफी कुछ सीखने मिलता है। हालाँकि अपने अनुभव से एक बात समझ में आयी है कि हम कितने भी एनॉट शार्प हों, लेकिन ह्यूमन बॉडी कभी अचानक ही अनप्रेडिक्टेबल हो जाती है..
मैं हर बार सर्जरी के पहले डॉक्टर जोस के विडिओ देखता हूँ लेकिन जब खुद स्कल खोलता हूँ, तब कुछ नया ही अनुभव मिलता है.. ।”

कुलदीपक डॉक्टर जोस का नाम पहली बार सुन रहा था .

“ये जोस कौन है ?”

“दुनिया के सबसे बड़े न्यूरो सर्जन है फ़िलहाल.. इनकी आज तक कोई सर्जरी विफल नहीं हुई.. हंड्रेड परसेंट सस्सेस रेट है इनका..।
एक बार इनसे मिलने का बहुत मन है, कभी तो ज़रूर इनसे मिलने जाऊंगा !”

कुलदीपक ने हाँ में गर्दन हिलायी और अपनी कॉफ़ी उठा कर सुड़कने लगा…

जय ने विडिओ दो बार देखा उतने में ओआर तैयार हो चुका है का संदेश उस तक आ गया… वो उठ कर बाहर निकल गया..।
उसके जाते ही कुलदीपक ने  लैपटॉप अपनी तरफ घुमाया और जय के देखे विडिओ देखने लगा…
लेकिन उसे ऐसा कुछ खास समझ में नहीं आ रहा था..
वो भी उठ कर बाहर निकल गया..

जय जैसे ही अपने ऑपरेशन रूम में दाखिल हुआ उसके ऊपर वहां मौजूद स्टाफ ने फ़ूल बरसाने शुरू कर दिए।ताली बजा कर सब उसका स्वागत करने लगे..
जय के चेहरे पर मुस्कान आ गयी !
उसकी हमेशा की तयशुदा टीम थी..।

एक एनस्थीसिया स्पेशलिस्ट डॉक्टर, एक सीनियर नर्स, दो जूनियर नर्स, दो वार्ड बॉय, एक स्क्रब नर्स.. और एक मृत्युंजय का असिस्टेंट..
वो सभी लोग उसे देख कर खिल उठे थे..

एनस्थीसिया वाले डॉक्टर ने आगे बढ़ कर जय के कंधे थपथपा दिए..

“वेलकम जय ! वैसे तो मुझे वीआईपी मरीज़ ज़रा भी पसंद नहीं है, लेकिन इस मरीज़ ने आज अस्पताल का सालो से चल रहा प्रोटोकॉल तुड़वा दिया..
मजा आ गया, तुम्हे वापस देख कर !”

“नहीं प्रोफेसर, मुझे थापर सर ने बस इस सर्जरी के लिये बुलवाया है, इस सर्जरी के बाद मेरा सस्पेंशन कंटीन्यू रहेगा !”

जय की बात सुन प्रोफेसर ज़ोर से हँस पड़े..

“किस दुनिया में है आप डॉक्टर जय ?”

“क्यों ?”

“थापर ने जब आपसे बात की, तब आपने उनकी बात मान ली, लेकिन आपके हॉस्पिटल निकलते ही छवि ने थापर को फ़ोन किया था.. ।”

“व्हाट ?”

“हाँ और उसने कहा की इस सर्जरी के बाद सस्पेंशन का ऑर्डर तत्काल प्रभाव से निरस्त करना होगा, वरना वो हायर अथॉरिटी में इस बात की शिकायत कर देगी कि इस तरीके से डॉक्टर्स को प्रताड़ित किया जा रहा है.. !”

जय की आंखे फटी रह गयी..

“क्या सच में ?”

“हम्म.. !” मुस्कुरा कर प्रोफेसर गुप्ता ने जय के कंधे थपथपा दिए..

“छवि इज़ एक्सेलेंट !”

जय हल्का सा मुस्कुरा कर रह गया..
ऑपरेशन रूम के उस गलियारे को पार कर अब वो लोग ऑपरेशन थियेटर में पहुँच गए थे….

ऑपरेशन रूम की एक तरफ की ऊपरी दीवार पारदर्शी कांच की थी, जिसके पीछे एक कमरा था, जहाँ सीढ़ी नुमा कुर्सियां लगी थी…
यहाँ जब भी कोई सर्जरी होती थी, तब फाइनल ईयर के विद्यार्थियों को देखने के लिए  बुलाया जाता था.. इसके अलावा जब कोई विशिष्ट सर्जरी हो, तब कभी कभार अस्पताल के सीनियर्स भी वहां मौजूद होकर सर्जरी देखा करते थे..
आज भी प्रेजिडेंट सर ने थापर को साथ लिया और वहां  चले आये..

थापर का मन नही था लेकिन वो यही सोच कर बैठ गया की देखूं आखिर ये ऐसा क्या करता है, जो इसकी चमत्कारी उंगलियों का इतना नाम हो गया है..।

मढ़रिया और थापर के वहां आकर बैठने पर नीचे से स्टाफ ने उन लोगो को नमस्ते किया और अपना काम शुरू कर दिया..

जय ने सारी रिपोर्ट्स एक बार और पढ़ने के बाद अपना काम शुरू कर दिया..

****

लंच के लिए अभिमन्यु रंगोली और झनक रेस्टोरेंट पहुँच चुके थे… उनके कॉलेज के बाहर ही ये एक छोटा सा रेस्टोरेंट था, जहाँ अक्सर विद्यर्थियों की भीड़ लगी रहती थी..

“हाँ तो बताओ उस दिन क्या हुआ था ?” झनक ने पूछा..

अभिमन्यु के चेहरे पर मुस्कान आ गयी..

“तुम दोनों प्रॉमिस करो मुझे चप्पल से नहीं मारोगी !”

“अरे बाबा प्रॉमिस.. बताओ न ?” झनक ने ही बोला, रंगोली का पूरा ध्यान तो बस खाने पर था, जो अभी तक नहीं आया था, इसलिए वो पापड़ और सलाद खा खा कर पेट भर रही थी..

“तुम दोनों को तो पता है न कि मेरे ऑफिस में सब को यही पता है की मैं कुंवारा हूँ… उस दिन जब मैं और रंगोली घर से वापस लौट रहे थे, तब मेरी बॉस की गाड़ी वहीँ से गुजारी और रास्ते में उन्होने हमे देख लिया..
मुझे तो लगा कि बस अब आज मेरी छुट्टी पक्का !!
मैंने भी तय कर लिया था कि अब कोई झूठ नहीं बोलूंगा, कह दूंगा की मैडम मैं मैरिड हूँ, और मेरी बाइक पर मेरे  साथ बैठी लड़की मेरी बीवी थी !

“तो फिर… तुमने बताया उन्हें ?”

“न… मौका ही नहीं मिला.. !”

“क्यों ?”

“उस दिन जब मैं ऑफिस पहुंचा , तुरंत मीटिंग के लिए जाना पड़ गया..।
मीटिंग में बॉस मौजूद थी, लेकिन उनके चेहरे पर ऐसी कोई नाराज़गी नजर नहीं आ रही थी…।
मीटिंग लम्बी चली.. उसके बाद जब हम सब फ्री हुए, तब मैं कमरे से निकलने लगा, और उन्होंने मुझे आवाज़ देकर बुला लिया..
और कहने लगी.. “आज जो तुम्हारे साथ थी तुम्हारी कजन थी क्या ? शक्ल बहुत मिलती है तुमसे ! वैसे तुम तो दो भाई बस हो न, बहन तो कोई है नहीं !”

“ओह्ह तो उसने रंग को तुम्हारी कजन बना दिया !”

अभिमन्यु हंसने लगा..

“हाँ यार, अब उसके बाद मैं क्या बोलता..?
एक पल को लगा कि उनकी ग़लतफ़हमी दूर कर दूँ, लेकिन उतने में उनका कोई कॉल आ गया और वह बाहर चली गयी..।
मैं भी वापस आ गया…
और इस तरह उस दिन बिना कुछ किये ही मैं बॉस के कोप से बच गया..।”

रंगोली ने खाना परोसा और एक निवाला अपने हाथ से अभिमन्यु की तरफ बढ़ा दिया..
दोनों को वैसे भी बहुत कम मौका मिलता था, साथ रहने का, साथ खाने पीने का..
इसलिए वो ऐसे मिले किसी मौके को छोड़ना नहीं चाहती थी..
अभिमन्यु को खिलाने के बाद वो भी खाने लगी।
बातो बातो में समय बीतता चला गया..।

खाना खा कर वो तीनो वहां से निकल गए..
लेकिन रंगोली को पता भी नहीं चल पाया कि उसके हॉस्टल में रहने वाली कुछ सीनियर लड़कियाँ वहां मौजूद थी, और उन लोगों ने रंगोली और अभिमन्यु की कुछ तस्वीरें मोबाइल पर ले ली…

शाम क्लास ख़त्म कर जब रंगोली और झनक हॉस्टल पहुंचे, तब कमरे में प्राची अपना सामान पैक कर रही थी..

“क्या हुआ ? आप कहीं जा रही है ?” झनक ने पूछा

“हम्म… कॉलेज हॉस्टल सिर्फ पढाई तक के लिए है, उसके बाद तो छोड़ना ही पड़ता है न.. !”

“ओह्ह.. थोड़ा एक्सटेंड नहीं कर सकते ? “

“जितना करना था कर चुकी, अब हॉस्टल वार्डन का नोटिस आ गया है.. वैसे अधिराज ने रूम देख लिया है.. बस वहीँ शिफ्ट हो रही !”

“हम दोनों आपको बहुत मिस करेंगे !”

“पास ही है मेरा रूम.. जब मन करे चले आना !” प्राची ने अपनी बाहें फैला दी, और झनक और रंगोली उसकी बाँहों में सिमट आये..
तीनो की आंखे झिलमिला गयी…

क्रमशः

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Trupti
Trupti
1 year ago

Apki kahani shayad 2 yrs se pad rahi hu,owsome all stories are, jab apne pratilipi pe likhna choda ,tab hamne bhi pratilipi padna almost band kar diya ,kuki interest hi nahi aaya,phir koi ek story fb se padi then again again apki story search ki ,then Ek article tha jisme bahut Kuch likha tha. Apne about experience of pratilipi writers,then I got to know ,u are here in ankahee kisse ,and started Reading mayanagri,pls mayanagri ke parts bhi dale,

Archana Singh
Archana Singh
1 year ago

Very nice part 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻

seema Kawatra
seema Kawatra
1 year ago

कई रंगो से भरी है मायानगरी
कहीं प्यार कहीं जुदाई
कहीं सफलता और कहीं उस सफलता से जलने वाले लोग

Manu Verma
Manu Verma
1 year ago

लाजवाब भाग 👌👌👌👌👌👌👏👏👏👏👏👏💐💐💐💐❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️⭐⭐⭐⭐⭐❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️⭐⭐⭐⭐⭐❤️❤️❤️❤️❤️❤️🥰🙌🙌🙌

Jagruti
Jagruti
1 year ago

Bahut badhiya part

rameshwar dhiwar
rameshwar dhiwar
1 year ago

Very nice mam

Geeta sidpara
Geeta sidpara
1 year ago

Very very nice part 👌👌

Nisha
Nisha
1 year ago

Aaj thapar ko bhi pata chal jayega ki jay ke hathon me jadu hai.chhavi ne sahi Kiya jo thapar ko jay ka suspension cancel karne ko kaha.supar part mam 👌👌👌👌👌

Arun Kumar
Arun Kumar
1 year ago

🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰

Ashok Garg
Ashok Garg
1 year ago

Very nice part of the story and very interesting too waiting for the next part hope its coming soon
very nice