
कश्मीर डायरी…
स्वागत है दोस्तोँ मेरे छोटे से ट्रेवल ब्लॉग में..
हमारी यात्रा की शुरुआत हुई रायपुर से, जहाँ से हम दिल्ली पहुंचे और दिल्ली से हमने श्रीनगर की उड़ान भरी…
फ्लाइट में सवार होते ही हमें कुछ कुछ कश्मीर वाली फीलिंग आने लगी थी, फ्लाइट में मौजूद अटेंडेंट्स को देख कर..
दिल्ली से उड़ने के बाद जब हम कश्मीर की वादियों में दाखिल हुए तब ऊपर से दिखने वाला नजारा ही अलग था..
ऊँची ऊँची बर्फ से ढकी पहाड़ियों पर उड़ते सफ़ेद रुई से बादल और बीच में नजर आता आसमानी आसमान..
ऐसा लग रहा था प्रकृति इन सुन्दर रंगो से खेल रही है..
बादलो के ऊपर से उड़ते हुए दिमाग में गाने के बोल बजने लगे (आप सब मेरी आदत तो जानते ही हैं, हर वक्त फ़िल्मी गाने )
तो उस वक्त दिमाग में चल रहा था डिम्पल कपाड़िया पर फिल्माए गाने का आन्तरा..
“बादलो पे चलने को आओ पिया, आओ मेरा झूलना झुलाओ पिया
बन बन पपीहा पीहू बोले… झूठी मुठी मितवा आवन बोले..।”
इतने सुंदर अनुभवों के बाद हम श्रीनगर में लैंड कर गए और यहाँ उतरते ही पहले चमत्कार से सामना हुआ..
आदत से मजबूर फ्लाइट के लैंड करते ही हम सबने फ़ोन को फ्लाइट मोड से बाहर निकाल लिया, लेकिन हम सब का फोन तो परमानेंटली फ्लाइट मोड पर चला गया था..।
हमारे फ़ोन श्रीनगर में बंद हो चुके थे..।
हालाँकि ये बात पहले ही पता थी, इसलिए साहब ने अपना फ़ोन खुद ही पोस्टपेड कर लिया था, लेकिन यहाँ आकर पता चला की वो भी काम नहीं करेगा..
फिर सबसे पहले तलाश शुरू हुई एक पोस्टपेड सिम या कश्मीर के लोकल नंबर की…..
तो दोस्तों अगर आप पहली बार कश्मीर जा रहे हैं, तो फ़ोन के लिए एक पोस्टपेड सिम की तैयारी से जाएँ…
हमारा ड्राइवर हमें मिल चुका था और अपना सामान गाड़ी में लाद कर हम निकल गए गुलमर्ग के लिए..
गुलमर्ग के रास्ते पर हमारे ड्राइवर जिनका नाम है एजाज, ने हमसे कहा की ड्रंग वैली हमें देख लेनी चाहिए, ये एक बहुत ज़बरदस्त अनुभव होगा..
हम सब ने भी सोचा जब यहाँ आये ही है तो ये अनुभव भी ले लिया जाए..।
वहाँ एटीवी स्टेण्ड था, जहाँ खूब सारे कश्मीरी लड़के राइड पर ले जाने को खड़े थे.. लेकिन एटीवी राइड के प्राइस बहुत ज्यादा बताये जा रहे थे..
खैर एजाज भाई ने बीच बचाव किया और हमारे और उन ड्राइवर्स के बीच सुलह करावा कर एक सही कीमत तय करवा दी . वैसे इस मामले में साहब बेहद समझदार है..।
उन्हेँ मालूम है की पर्यटन स्थल पर बार्गनिंग बहुत होती है..।
लेकिन मैं इन मामलो में हासिल आयी ज़ीरो हूँ।
मुझे हर किसी का रेट वाजिब ही लगता है… और हर एक आदमी मुझे सच्चा और भोला ही लगता है… वैसे यहाँ के लोग बहुत अच्छे हैं.. सच्चे और भोले !!
सब कुछ तय होने के बाद एक एक ड्राइवर ने अपनी अपनी एटीवी पर हम लोगो को बैठाया और राइड शुरू कर दी और….
क्या ही कहूं.. मतलब वाकई ऐसा ज़बरदस्त अनुभव रहा की मजा ही आ गया..
उस बाइक पर सवार हम पहुंचे नीचे उतर कर फ्रोजेन वाटर फाल पर पहुँच गए, लेकिन मई का महीना और हमारा प्यारा हिन्दुस्तान, गर्मी के आतंक में फ्रोजेन वॉटरफॉल फिलहाल बर्फ में जमा नहीं था बल्कि कलकल बह रहा था…
बेहद सुंदर नजारा था… चारों तरफ ऊँचे ऊँचे दरख्त और उनके पीछे ऊँचे बर्फ के पहाड़..
धूप होने के बावजूद हवा में ठंडक थी..
फ्रोजेन वॉटरफॉल को पार कर और आगे बढ़ कर हम पहुँच गए महाभारत काल के पांडवो के बनवाये मंदिर में..
बड़े बड़े पत्थरो को रख कर बनवाया गया ये मंदिर नाम का मंदिर था, उसके सामने पत्थरो का एक और कमरा सा था, हमारे ड्राइवर के अनुसार वहाँ द्रौपदी खाना बनाया करती थी…
जगह बडी छोटी सी थी, मुझे वो देख कर यही लग रहा था की भाई साहब काल कोई भी हो औरत चाहे राजकुमारी हो, रानी हो या डॉक्टर, रोटी तो बनानी ही पड़ती है…
उस जगह को आँखों में भरने के बाद हम उससे ऊपर चल पड़े… ऊपर से देखने पर नीचे ड्रंग गाँव दिखाई दे रहा था, एक नदी भी दिख रही थी, जिसका नाम मेरे ड्राइवर को मालूम नहीं था..!
लेकिन ड्राइवर गज़ब का बातूनी था..
इतनी राइड में उसने कश्मीर में कौन कौन सी जगह देखने लायक है और किस किस जगह को छोड़ा जा सकता है सब बता दिया..!
सबसे ऊँचे स्पॉट पर पहुँच कर उसने हमें उतार दिया.. वहाँ पर एक भाई साहब पहले से मौजूद थे चाय कहवा और मैगी लेकर, जो ऑर्डर लेकर बना रहे थे..
पर्यटक नहीं के बराबर थे वहाँ.. उस वक्त तो सिर्फ हमारा परिवार ही मौजूद था..
वहाँ इतनी ऊंचाई पर पहाड़ो के बीच हमने चाय पी…
चाय बहुत बेकार थी..।
साहब ने कहवा लिया… कहवा भी बहुत मीठा था, लेकिन कुछ अलग है सोच कर पिया।
साहब को पसंद भी आया, लेकिन मुझे उस वक्त कहवा कुछ खास नहीं लगा..।
लेकिन इस कश्मीरी कहवे की एक खासियत है, ये पहली बार में आपको मीठा और “कुछ खास नहीं ” वाला फीलिंग देता है लेकिन एक घूंट के बाद आप इसका कप छोड़ नहीं सकते, लगेगा एक और सिप ले लूँ… और इसी तररह आप पूरा कप पी सकते हैं..।
वैसे इसके बाद गुलमर्ग में भी कहवा पिया, लेकिन मुझे अब तक के पिए कहवे में बेस्ट कहवा पहलगाम में पीने मिला, वो भी हमारे होटल रेडिसन्स गोल्फ में..
बहुत सूथिंग, और पीने पर हर एक घूंट में फ्लेवर मुहं में घुलता हुआ..।
ड्रंग वैली में अपनी चाय ख़त्म कर हम एटीवी पर सवार होकर वापसी के लिए मुड़ गए..।
कुछ दूर मैंने भी बाइक चला ली..।
मेरे ड्राइवर का नाम सज्जाद भाई था, उसकी ढेर सारी कश्मीरी मिली हुई हिंदी में गपशप सुनते हुए वापस स्टेण्ड पर पहुँच गए हम सब..
एजाज भाई ने पहले ही कहा था आप सब मुस्कुराते हुए लौटेंगे, और ये वाकई सच था..।
हम सब मुस्कुराते हुए लौटे..।
वहाँ से जैसे ही हम लोग गाडी पर सवार हुए एक आदमी छोटे छोटे नारियल के टुकड़े लिए आ गया..
बाहर से देखने पर बिलकुल छोटी छोटी नारियल की गरी सी दिख रही थी.. पचास रूपये की दो छोटी गरी उसने हमें दे दी..।
खाने में बेहद स्वादिष्ट लेकिन हद से ज्यादा मीठी थी..
बाद में गुलमर्ग में यही गरी दस रूपये में मिल रही थी, और वहीँ पता चला कि ड्राई फ्रूट्स और नारियल चीनी से बनने वाली इस मिठाई का वही कहीं लोकल कारखाना है, और एक दुकान पर पूरा डिब्बा ही मिल रहा था, जिसमे से पांच रुपये की दो गरी लाकर साहब ने मुझे दी और उन्हेँ एक बार फिर मुझे चिढ़ाने का मौका मिल गया..
“थोड़ा तो बार्गेन कर लिया करो ! हर बन्दे पर आँख मूँद कर भरोसा कर लेती हो !”
और फिर ड्रंग से हम निकल पड़े गुलमर्ग के लिए…..
गुलमर्ग के अनुभव बांटूंगी अगले भाग में..
तब तक में कुछ पुरानी कहानियों का आनंद ले लीजिये…
aparna…

आपका स्वागत है हमारे शहर जम्मू कश्मीर मे 🙏🏻😊, सिम बंद होने का भी एक कारण है डॉक्टर साहिबा…. आप धरती के स्वर्ग मे आए हो और फोन चलाते रहोगे तो इन खूबसूरत नज़ारो को जी भर के कैसे देखोगे हैना … देखो,महसूस करो और जी लो वो खूबसूरत पल 😊।
😄😄नारियल गरी 50 रूपये की 🤦🏻♀️ये तो हर जगह होता टूरिस्ट को लूटने की फिराक मे रहते लोग और श्रीनगर मे तो वैसे ही बहुत महंगाई है फिर भी ये भी एक यादगिरी बन गई,।
कैसा अनुभव रहा आपके अगले पड़ाव का, पढ़ने के लिए.. इंतजार रहेगा अगले भाग का 😊🙏🏻।
Kashmir journey ki pics hoti toh aur bhi Mazza aata
Maine kashmir diary khoj li aparnaji. Mujhe pata nhi tha dr.sahiba aap kashmir gaye ho,isliye us din maine meeraji ko lekar pratilipi par comments kiya tha. Apne us par mujhe itna sara likh diya,koi baat nhi. Is banane aapne meri baat ka reply kiya,thanks.
Mam ab nahin kahaniyan kab aaenge ab to kafi samay Ho Gaya🙏🙏🙏🙏✍️✍️✍️✍️✍️
Lg rha h hm bhi sath sath hi ghum rhe h Dr sahiba. Chaliye hm to khud pta nhi kbhi wha ja payenge ki nhi pr tumhare sath tumhari aankho se hm bhi dekh hi rhe h. Vakai mja aa gya
🤗👍Very good.thank you aapaki Kashmir journey mae humae shamil karane ke liye.
Hamara bhi yahi hal he..hame sab log sacche or bhole lagate he or sare price bhi sahi lagte he ..or hamare husband ko bargaining karn bahot ache tarike se aata he
Aapki lekhni ke to hum fan hai..aaj ka experience to kmaal tha
Jannat me hi to रह रहे फिर भी jannat के लिए fat रहे ,Khair अभी valley me इनको ही munaafa होता है लोकल wha का अभी वापस नहीं आ पाया. Susheel pandit जी के कहे anusaar in logo को funding मिलती है हिन्दू paryatko के जाने से…..Khair enjoy kariye
👌👌👌👌🙏🙏🙏🙏👍👍👍👍