मायानगरी -19

       

  अकेले दुखी मन से गाजर का हलवा खाते रंगोली अपने कमरे में बैठी थी कि तभी उसका फोन घन घना उठा। उसने देखा फोन मेहंदी का था।

” हां बोल मिहू। अभी कैसे फोन किया।”

” अरे यार यह आलू बैंगन के पकोड़े की चक्कर में तेरी गुड न्यूज़ ठीक से सुन ही नहीं पाई । फोन काटना पड़ गया। तो मेरी रंगा ने अपनी पूरी क्लास में फर्स्ट पोजीशन पाई है ।कांग्रेचुलेशन मेरी प्यारी दिदु।”

“हाय तूने सुन लिया था।”

आश्चर्य से रंगोली के चेहरे पर लंबी सी मुस्कान खिल गयी।

“सिर्फ सुना ही नही बल्कि बाहर बैठे मेहमानों को भी सुना दिया। अब आएंगे बेटा तुझे बधाइयों के कॉल पर कॉल, बस तू वेट करियो।”

  रंगोली के चेहरे पर हंसी खिल गयी..

“चल अब जा तू भी काम देख। मम्मी से ज़रूर बोलना की फ्री होकर मुझे फ़ोन कर लें। “

  मुस्कुरातें हुए रंगोली ने फ़ोन रख दिया। और हवा खाने बालकनी में जा खड़ी हुई।
  अचानक उसकी नज़र रोड के दूसरी तरफ  सामने टपरी पर खड़े अभिमन्यु पर चली गयी।
   वो वहाँ अपनी बाइक से टेक लगाए खड़ा था। जैसे ही रंगोली ने उसकी तरफ देखा उसने तुरंत अपनी उंगली से एक तरफ ऊपर की ओर इशारा कर दिया।
   वहाँ उस इशारे की तरफ देखने पर रंगोली ने देखा काफी ऊंचाई पर एक होर्डिंग लगा हुआ था। अंधेरे के कारण होर्डिंग का बाकी भाग तो अंधेरे में था पर बीच का भाग चमकीला अलग से नज़र आ रहा था जिस पर बोल्ड अक्षरों में कांग्रेचुलेशन्स लिखा हुआ था।
   रंगोली ने उसे देखा और उसे हंसी आने लगी लेकिन उसने अपनी हंसी दबाते हुए मुहँ फेर लिया और बालकनी से अंदर चली गयी।
   अंदर जाकर उसने कमरे की बत्तियां भी बुझा दी।

” भाई , भाभी ना नही पटने वाली। देखा ना चुपचाप अंदर चली गयी, आपको घास तक नही डाली।”

  अधीर की बात सुन अभिमन्यु उसके कंधे पर हाथ रखे झूल गया…

” अबे घास काहे डालेगी हम गधे थोड़े न हैं। और दूसरी बात, अगर लड़की कमरे के अंदर जाकर बत्तियां बुझा दें वो भी सिर्फ आठ बजे तो ये मान लो कि वो पूरी तरह इश्क़ में है, लेकिन चाहती नही की अभी से मुझे ये पता चले।
  और साथ ही मुझे छिप छिप कर देखना भी चाहती है। बत्तियां जली रहेंगी तो वो मुझे देख कैसे पाएगी , समझा करो बंधु। तुम्हारी भाभी को प्यार होने लगा है बस उसे समझ नही आ रहा। पर ये तेरा भाई भी कम नही है, उससे कुबूल करवा ही लेगा।”

” हाँ मेरे शाहजहाँ !! अब चलें वापस। “

और दोनो बाइक पर सवार होकर दो चक्कर रंगोली के कमरे के सामने के रास्ते पर लगा कर फिर अपने हॉस्टल की ओर मुड़ गए।

वो दोनो अपने कमरे में पहुंचे तो ज्ञानी जी बड़े चिंतित से इधर से उधर घूमते सिगरेट फूंक रहे थे….

“क्या हुआ कक्का बड़े चिंतित लग रहे हों। “

  अभिमन्यु ने ज्ञानी जी से सवाल करते हुए कमरे की खिड़कियां भी खोल दी।

” अरे सॉरी यार अभिमन्यु मैंने कमरे में सिगरेट पी ली दरअसल बात ही कुछ ऐसी है कि क्या कहूँ?”

” जो बात है वही कहिए हुआ क्या है?”

” मेडिकल में कुछ पंगा चल रहा है यार। तुम लोगों को कुछ मालूम चला?”,

” नहीं तो!! आपको क्या मालूम चला है?”

अधीर सवाल पूछता हुआ ज्ञानी की ठीक बगल में जाकर बैठ गया। ज्ञानी ने अपने चश्मे को पोंछ कर वापस आंखों पर चढ़ा लिया।

” अबे यार बहुत गजब का झोल चल रहा है। और यह झोल पूरी यूनिवर्सिटी में चल रहा है। असल में यूनिवर्सिटी को बने अभी ज्यादा वक्त हुआ नहीं है। और यहां मैनेजमेंट कोटा भी बहुत ज्यादा संख्या में है। तो ऐसे में मैनेजमेंट कोटा में सिर्फ पासिंग मार्क्स ही जरूरी होते हैं। मैनेजमेंट कोटा में पढ़ने वाले बच्चे भी ज्यादातर रईसों के ही हैं।

” हां तो?”

” तो यह मैनेजमेंट सीट किसी गोलमाल के तहत भरी जा रही है और इस सारे गोलमाल का सेंटर मेडिकल कॉलेज है। “

” मतलब कहना क्या चाहते हो आप, की यह मेडिकल वाले बच्चे सारे के सारे मुन्ना भाई हैं।”

” सारे के सारे तो नहीं लेकिन मैनेजमेंट कोटा से आने वाले ज्यादातर मुन्ना भाई ही है। “

” तो क्या यह लोग मोबाइल से चीटिंग कर के परीक्षा देते हैं, लेकिन एग्जामिनेशन हॉल में मोबाइल तो अलाउड नहीं होता।”

” नहीं यह लोग मोबाइल से चीटिंग नहीं करते अब चीटिंग के तरीके काफी हाईटेक हो चुके हैं। “

” मतलब कैसे हाईटेक?”

” ज्यादा कुछ तो नहीं पता लेकिन इतना समझ में आने लगा है कि कोई बहुत बड़ी धांधली चल रही है यहां! मेडिकल में जो लड़की मरी है उसका भी कोई ना कोई पेंच तो इससे जुड़ा हुआ है। “

” आपको कैसे पता ?  क्या आप उसकी रूममेट को जानते हैं क्या उससे आपकी कोई बात हुई? “

” उस लड़की की रूममेट एक नंबर की ड्रग एडिक्ट है,  अधिराज की दोस्त है वो और अक्सर अधिराज ही उसके लिए जुगाड़ करता रहता है।”

      अधिराज सिंह और हर्षवर्धन गेरा यानी कि ज्ञानी जी दोनों एक ही शहर के रहने वाले थे और इसीलिए दोनों में अच्छी खासी दोस्ती थी । अधिराज अक्सर ज्ञानी के कमरे में आकर उसके साथ ही सिगरेट फूंका करता था।
    आज भी ज्ञानी के साथ बैठा अधिराज उसे अदिति के बारे में कुछ बता रहा था कि तभी प्राची का फोन आ गया और अधिराज उठकर अपनी बाइक लिए प्राची के कमरे की तरफ बढ़ गया।

*****

   रंगोली के टोकने के बावजूद प्राची अपने अजीबोगरीब कपड़ों में ही अधिराज से मिलने नीचे चली गई….

” तुम फिर बाइक लेकर आए हो? तुम्हारी कार कहां पड़ी रहती है यार?”

” सर्विसिंग में दे रखा है प्राची। चलो ना तुम्हें राइड करने का मन था ना। बाइक पर एक लॉन्ग ड्राइव लेकर चलता हूं। “

  प्राची ने अपने पैंट की पॉकेट से एक पर्ची निकाली और अधिराज की तरफ बढ़ा दी

” यह क्या है?”

” मुझे यह चाहिए अधिराज अभी के अभी!”

” पागल हो गई हो क्या अभी के अभी मैं डोप कहां से लेकर आऊंगा?”

” मुझे नहीं पता पर प्लीज।  वरना मैं पागल हो जाऊंगी अगर मुझे नहीं मिला तो। “

” तुम समझती क्यों नहीं हो प्राची? तुम एक डॉक्टर बनने वाली हो यार… तुम्हें यह कैसी गंदी लत लग गई है ! यह सब छोड़ो, कोशिश करो कि ड्रग्स के चक्रव्यू से बाहर निकल आओ।”

” तुम जानते हो अधिराज, मैं पूरी कोशिश कर रही ।हूं बस यह आखरी बार ले आओ। उसके बाद आई प्रॉमिस मैं कभी नहीं लूंगी। धीरे-धीरे करके अपना सुट्टा भी छोड़ दूंगी सब कुछ छोड़ दूंगी।”

” हर बार झूठे प्रॉमिस प्राची। कब सुधरोगी यार? कहां से तुम्हें ये बकवास लत लग गई। मुझे समझ में नहीं आता। आज तुम्हें बताना ही पड़ेगा । सच बोलो कि तुम्हारी रूममेट अदिति ने तुम्हें यह आदत लगाई है ना?”

” नहीं!! वह तो बेचारी बहुत सीधी सी थी। यह लत मुझे कॉलेज में एडमिशन लेने के पहले ही लग चुकी थी। “

” व्हाट लेकिन कैसे? आई मीन इतनी छोटी उम्र में यह कैसे संभव है?”

” जहां मुश्किलें होती हैं, राह में जिनके रोड़े होते हैं, वहां उन रोड़ों को हटाने की अगर हिम्मत ना हो तो इंसान ज़हर में ही अपने दर्द को भुलाने का तरीका ढूंढ लेता है। किसी दिन तफसील से अपनी सारी कहानी सुना दूंगी, बस आज ये ले कर आ जाओ प्लीज।”

” नहीं हो पाएगा प्राची पिछली बार तुम्हारे कहने पर जिस लड़के से लेकर आया था वह उस दिन के बाद से फरार है जिस दिन अदिति हॉस्टल में मरी हुई पाई गई!”

“व्हाट? और तुमने ये बात मुझे अब तक नहीं बताई। पूरा एक महीना बीत गया अदिति को मरे हुए और तुम मुझे आज बता रहे हो? लेकिन रेहान गया कहां?”

” मुझे भी नहीं पता। पिछले हफ्ते जब तुमने मुझे मैसेज किया था कि तुम्हें डोप चाहिए और बहुत रोने धोने लगी थी तब तुम्हारी बातों पर तरस खाकर मैंने उस लड़के को कांटेक्ट करने की कोशिश की थी। उसका फोन नंबर लगातार बंद बता रहा था। तुमने जो उसका ठिकाना बताया था मैंने वहां पर भी जाकर देखा था लेकिन वह नहीं मिला।
   मैं उसी समय तुम्हें सब कुछ बता देना चाहता था, लेकिन पता नहीं तुम्हें शायद कहीं और से कुछ मिल गया होगा जो तुमने दोबारा मुझसे उस चीज की मांग नहीं की। उसके बाद सीधे आज तुम वापस ज़िद कर बैठी हो । अब  बताओ उसके अलावा तो और कोई ठिकाना मैं जानता नहीं,  मैं कहां से लेकर आऊं?  “

प्राची ने दोनों हाथों से अपना माथा पकड़ लिया। उसे ड्रग्स की इतनी लत लग चुकी थी, कि आज बिना अपना डोज़ लिए उसके लिए एक एक पल बहुत भारी हो रहा था। उसने अपनी जीन्स की जेब से एक खाली पेज निकाला और अधिराज की शर्ट की जेब में लगी हुई पेन निकालकर उसमें कुछ लिखने लगी। कुछ दवाओं के नाम लिखने के बाद उसने नीचे अपने साइन किये और वह पन्ना अधिराज की तरफ बढ़ा दिया।

” यह क्या है प्राची?”

” बैन ड्रग्स हैं जो सिर्फ डॉक्टर की ऑफिशियल प्रिसक्रिप्शन पर ही मिलते हैं। इसीलिए प्रिसक्रिप्शन पर लिख कर दे रही हूं। प्लीज कुछ नहीं मिले तो यही ले आओ इसी से काम चला लूंगी। “,

” ओके तुम इतना फोर्स कर रही हो तो, मैं ले आता हूं। लेकिन प्लीज डोज़ का ध्यान रखना। थोड़ा भी तुमने ऊपर नीचे किया तो अपनी जान से हाथ धो बैठोगी। जानती हो ना। और एक बात बताओ प्रिसक्रिप्शन लेटर हेड तुम्हें मिला कहां से? और वह भी बकायादा सील लगा हुआ? कहां से चुराया है यह तुमने? “

” लैब में पड़ा हुआ मिल गया था शायद किसी मैडम का छूट गया होगा?”

” कोई भी डॉक्टर इतना गैर जिम्मेदार नहीं होता कि अपना लेटर हेड ऐसे ही कहीं भी छोड़ दे वह भी सील लगाकर। और मैं आज पहली और आखरी गलती समझ कर तुम्हें माफ कर रहा हूं और तुम्हें यह दवाई लाकर दे रहा हूं क्योंकि मैं जानता हूं की यह दवाई न्यूरोलॉजिकल होती हैं और अगर इन्हें एकाएक छोड़ने की कोशिश की जाए तो तबीयत बहुत ज्यादा बिगड़ सकती है लेकिन तुमसे यही उम्मीद करूंगा कि आइंदा तुम ऐसा कोई काम नही करोगी। “

  अपने चेहरे पर आई घबराहट को छिपाती प्राची दूसरी ओर देखने लगी। और कुछ सोचते हुए अधिराज एक मेडिकल शॉप की ओर बढ़ गया।

    कुछ समय पहले अदिति की बुक्स से पढ़ाई के दौरान ये प्रिस्क्रिप्शन प्राची के हाथ लगी थी और तब उसने इस पर्चे को छिपा कर रख लिया था। उसने तो असल में अधिराज के सामने उसमें लिखने का नाटक ही भर किया था, असल में तो पहले ही उस पर्चे पर बैन दवाओं के नाम लिखे रखे थे और नीचे सील भी लगी हुई थी।
    उसने बस एक फर्जी सा साइन ही नीचे किया था। अब ज्यादा सोच विचार करने का प्राची का मन नही था। वो मन ही मन ये सोच कर ही खुश थी कि कम से कम पंद्रह दिन का जुगाड़ तो हो ही गया था। लेकिन वो इस बात से अनजान थी कि चुराये हुए उस पर्चे पर लगी सील के नीचे किसी ने डेट भी डाल रखी थी और इसी कारण अब वो पर्चा उसके किसी काम का नही था।

  वो अपने में मगन कानों पर  हेडफोन लगाए कोई अंग्रेज़ी रॉक बीट्स सुन रही थी कि अधिराज ने आकर गुस्से में उसके सामने उस पर्चे के चिथड़े उड़ा दिए…

“क्या बकवास है ये प्राची?”

“क्यों क्या हुआ?”

“क्या हुआ? ये पर्चा दो महीने पहले का है। सील सिक्के के नीचे किसी ने डेट डाल रखी थी और तुमने ऊपर जो फर्जी साइन मारा है उस स्टोरकीपर ने तुरंत भांप लिया। एक तो ये दवाएं एक साथ इतनी मात्रा में मिलती नही तुमने अपने लालच में हर एक दवा को इस पर्चे का हिस्सा बना दिया।
   बेवकूफ लड़कीं!! आज तुम्हारे चक्कर में मैं फंस जाता। वो स्टोर कीपर मुझे ऐसे शक की नज़रों से घूर रहा था जैसे बस खा ही जायेगा। वो चुपके से अंदर की तरफ रखे फ़ोन की ओर बढ़ने लगा तो मैं जान बचाकर भाग आया। वो पक्का पुलिस को बुलाने वाला होगा। अब जल्दी से बैठो,भागना पड़ेगा यहाँ से।”

  खुद पर झुंझलाती प्राची ने उन फटे हुए कागज़ के टुकड़ों को भी समेट कर अपनी पॉकेट के हवाले किया और पीछे बैठ गयी। उसे ऐसा करते देख अधिराज का गुस्सा और भड़क उठा…

“हद दर्जे की बेवकूफ लड़की हो तुम। आज के बाद मैं इस शॉप पर कभी फटकूँगा भी नही। अच्छे खासे डॉक्टर बनने जा रहे लड़के को ड्रग पैडलर बना डाला। छि। “

अधिराज गुस्से में बड़बड़ाता गाड़ी भगाता जा रहा था और पीछे बैठी प्राची सूनी नज़रों से इधर उधर देखती सोच रही थी कि अब वो क्या करे।
   उसी वक्त एक जिप्सी में सवार कुछ गुंडे उनके बाजू से निकलते हुए उन दोनों को छेड़ने लगे।
  अधिराज ने उन्हें देख बाइक की स्पीड और बढ़ा दी। उसे ऐसा करते देख वो लड़के भी उससे रेस लड़ाने के मूड में आ गए। वो सब के सब कहीं से पार्टी कर के आ रहे थे, और अब भी उनके हाथों में शराब की बोतलें चमक रही थीं।
   प्राची ने एक उड़ती सी नज़र उन लोगों पर डाली और हिकारत से मुहँ फेर लिया। बस यही बात उन लोगों को खल गयी और वो तेज़ी से गाड़ी भागतें बाइक के सामने गाड़ी मोड़ कर बाइक को रुकने पर मजबूर कर खड़े हो गए।
  उनमें से दो चार लोग गाड़ी से कूद कर बाहर निकल आये और एक ने प्राची का हाथ पकड़ उसे बाहर खींच लिया।
  अधिराज ने गुस्से में बाइक को खड़ा किया ही था कि एक ज़ोर की आवाज़ के साथ किसी के गिरने से धमाका से हुआ। अधिराज को लगा ज़रूर प्राची को किसी ने धक्का दे दिया होगा, उसने जैसे ही मुड़ कर देखा उसके आश्चर्य का ठिकाना न था। प्राची तो अपनी कलाई को गोल गोल घुमा कर उसकी ताकत का अंदाज़ा लगा रही थी लेकिन उसका हाथ पकड़ने बढ़ा गुंडा ज़मीन पर चारो खाने चित गिरा था। अब तक में दो और गुंडे तेज़ी से प्राची कि ओर बढ़े । उन लोगों का हाथ जैसे ही प्राची के गले तक आया उसने अपने दोनों हाथों से एक आदमी के हाथ को पकड़ पीछे की ओर ऐसे घुमाया की उसके कंधे के पास का जोड़ तड़क गया और वो अपने कंधे को पकड़े चीखता हुआ एक ओर गिर पड़ा, उतनी ही देर में दूसरे गुंडे के घुटने के पिछले हिस्से के जोड़ पर अपनी एड़ी से तेज़ वार कर उसे नीचे गिरा कर उसकी गर्दन के किनारे पर अपनी हथेली से उसमें ऐसे मार लगाई की एक तरफ को गर्दन झुकाए कराहता हुआ वो भी गिर पड़ा।
  बाकी के बचे दो गुंडे जैसे ही आगे बढ़ने को हुए प्राची ने जोर से हुंकार लगा दी….

“सालों, मैं डॉक्टर हूँ। तुम्हारे शरीर के एक एक जोड़ और कलपुर्जे मुझे रटे हुए हैं। कहाँ कैसे मारने से सबसे ज्यादा तकलीफ होगी मैं तुमसे ज्यादा जानती हूं ,तो आ जाओ अपना कलेजा समेट कर अब मैं सीधे तुम दोनो की कैरोटिड पर ही वार करूँगी। अभी उस कल्लू की स्केपुला तोड़ी है ,वहाँ प्लास्टर भी नही बंधता, कम से कम सात महीने लगेंगे उसका कंधा जुड़ने में….
   और सुनो… ये इस वाले के पैटेलर जॉइंट पर वार किया है अब इसका घुटना गया काम से… और सुनो..”

  प्राची अभी आगे कुछ बोलती उसके पहले ही वो दोनो मुड़ कर अपनी गाड़ी की ओर बढ़ने लगे…

“अबे ओये रुको?”

प्राची के ऐसा कहते ही उन गुंडों के साथ अधिराज भी चौन्क कर उसे देखने लगा। प्राची भाग कर उनकी गाड़ी के पास पहुंची और पीछे पड़ी व्हिस्की की दो बोतल उसने वहां से उठा ली।

” अब जाओ!”

वो दोनो आश्चर्य से उस अजूबी लड़की को देखते अपनी गाड़ी में बैठने जा रहे थे कि तभी एक बड़ी सी सरकारी जीप आकर उनके पास रुक गयी..
   उसमें से एक शानदार व्यक्तित्व का आदमी बाहर निकला और उन लोगों की तरफ बढ़ आया। उसने गुंडों के चेहरे को देखते हुए प्राची की तरफ देखने लगा..

“एनी प्रॉब्लम यंग लेडी?”

  प्राची ने उस आदमी को देखते ही दोनो बोतलें फटाफट छिपा लीं…

“नो सर ! आई एम एब्सोल्यूटली फाइन। वैसे आप कौन?”

” जी मैं इस शहर का नया डी एम हूँ, शेखऱ ! शेखऱ मिश्रा। अगर ये लड़के आपको परेशान कर रहे तो बताइए मैं आपकी कुछ मदद कर सकूं।

” थैंक यू सर !”

     प्राची और अधिराज ने मुस्कुरा कर शेखऱ को धन्यवाद दिया और बाइक में बैठ कर आगे निकल गए…..

  शेखऱ ने उन लड़कों को ज़मीन पर इस तरह बिखरे देख बाकी के दोनों को सवालिया नज़रों से देखा..

” लड़का तो बड़ा दुबला सा था उसने अकेले ने तुम सब का ये हाल किया?”

  शेखऱ ने जाते हुए अधिराज की ओर इशारा कर सवाल किया और बचे हुए दोनो गुंडे बिलख पड़े…

” नही साहब लड़का तो बड़ा शरीफ था। ये तो उस रणचण्डी का किया धरा है साहब।”

  शेखऱ ने आश्चर्य से नज़रों से ओझल होती बाइक पर एक नज़र मारी और गाड़ी की तलाशी लेने आगे बढ़ गया…

क्रमशः

aparna….

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