
मायानगरी – 17
यूनिवर्सिटी में एक्साम की बहार थी। परिंदा भी चहकता नज़र नही आ रहा था। साल भर पढ़ने वाले बच्चे अब भी अपने कमरे में दुबके पढ़ रहे थे। कुछ दूसरी तो कुछ तीसरी बार रिवीजन मार रहे थे। और साल भर किताबों पे झाँक न लगाने वाले जुगत लगा रहे थे।
कि काश कहीं से पेपर लीक हो जाये, कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न मिल जाये तो अंतिम समय तक उन्ही का रट्टा मार लिया जाएगा और अगर नही रट पाए तो फुर्रा बना लिया जाएगा।
तो इसी सब सरंजाम में जुटे विद्यार्थियों को बेमकसद घूमने का कोई कारण नज़र नही आ रहा था और यूनिवर्सिटी की रंगीनियां अपने अपने होस्टल में दुबकी पड़ी थीं।
हवाइयां उड़ रहीं थी हर कहीं।
चाहे कोई फैकल्टी हो सब तरफ जग सूना सूना लग रहा था, और सारे प्रोफेसर्स राहत की सांसो से तरबतर काफी फ्रेश महसूस कर रहे थे।
” काय हो श्रीवास्तव बाबू, आज बड़े गुनगुनाते से चले आ रहें हैं सुबह सुबह।”
“हां भाई वर्मा जी। वानरों की सेना पी एल पर जो है। वरना जो कांव कांव मची रहती है कि क्या कहे। फ़ोन पे बतियाना मुश्किल कर देते हैं मरदूद। अच्छा हम सुनें हैं राजा अजातशत्रु मुख्यमंत्री बनने वाले हैं। क्या ये बात सच है?”
“हां फिर? कैसे न बनते? सुनने में आ रहा था विराज सर अपने कुछ बंधुओं को लेकर अलग खेमे को निकल लिए थे, अब राजा साहब की छुटकी सी तो टीम थी उस पर भी विराज बाबू गाज गिरा गए।”
“हाय फिर ?”
“फिर क्या , राजा साहब का मास्टरमाइंड है ना समर। उसने अंत में सब खेल पलट दिया, किसी को मालूम ही नही चलने दिया कि जिस पार्टी के खिलाफ वो राजा साहब को शुरू से दिखा रहा था उसी पार्टी से अंदर ही अंदर उसने हाथ मिला रखा था और उसके सारे विधायक उसने पहले ही खरीद रखे थे। जैसे ही विराज बाबू अपने चार लोगों को लेकर उस दूसरी पार्टी की तरफ गए उस दूसरी पार्टी के लगभग सभी विधायक राजा साहब के पीछे आकर खड़े हो गए। अब इस तरह वहां पार्लियामेंट में सबसे बड़ी और मजबूत टीम राजा साहब की बन गई।
फिलहाल राजा साहब को ही मुख्यमंत्री पद का दावेदार माना जा रहा है क्योंकि उनकी इतनी बड़ी टीम में उनके रहते हुए किसी और के कंधों पर यह बोझ रखने की हिम्मत किसी की नहीं है । और वैसे भी उनके मास्टरमाइंड समर ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाने के लिए इतनी चालें चली है तो जाहिर है मुख्यमंत्री तो हमारे राजा साहब ही बनेंगे।
” चलो भाई अब राजनीति शायद किसी ढंग के करवट बैठे। अब युवा और ईमानदार कंधों पर उसका बोझ आएगा।”
” बिल्कुल सही कह रहे हैं श्रीवास्तव जी। आइए चलिए कैंटीन की चाय पी लेते हैं , वरना जब वानर सेना रहती है तो हमको आपको यहां की चाय ही नसीब नहीं होती। “
दोनों आपस में बातें करते कैंटीन में पहुंच गए। पुरोहित मैडम वहीं बैठी किसी से फ़ोन पर बात कर रही थी।
उन दोनों को देख कर उन्होंने एक हल्की सी मुस्कान दी और बातें करती बाहर निकल गयी..
” यह, हमें देख ऐसे बाहर कैसे चली गई?”
” किसी से कुछ प्राइवेट बात कर रही होंगी, जाने दीजिए हमें क्या? वैसे भी यह मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर लेक्चरर कुछ अलग ही रंग में लगे रहते हैं। “
” यह प्रोफेसर या लेक्चरर नहीं लैब टेक्नीशियन है।”
” है तो मेडिकल वाली ही, यह मेडिकल वालों का एक अलग ही सुरूर रहता है।”
दोनों आपस में हंसते बतियाते एक एक कुर्सी पर कब्जा जमाए बैठ गए… और चाय समोसों का ऑर्डर दे दिया…
***
आखिर वह समय भी आ गया जिसका पढ़ने वाले बच्चे बेसब्री से इंतजार कर रहे थे और ना पढ़ने वाले बच्चे किसी तरह से इस तिथि के टलने का इंतजार कर रहे थे! और जो भी है परीक्षाओं को आना था और वह आ ही गई।
सभी की परीक्षाओं को इस तरह से मैनेज किया गया था कि किसी एक की परीक्षाओं का असर दूसरे विभाग वालों पर ना पड़े, इसलिए अमूमन एक ही दिनों पर इंजीनियरिंग मेडिकल वालों की परीक्षाएं रखी गई थी।
जिस दिन इनके गैप हुआ करते उस दिन साइंस ग्रेजुएट और आर्ट्स वालों की परीक्षाएं निर्धारित की गई थी।
एक एक कर सभी के पेपर हो गए और कुछ दिनों बाद ही परीक्षा परिणाम भी घोषित हो गया। मेडिकल वालों का फर्स्ट मिड टर्म था, इसके कुछ नम्बर फर्स्ट ईयर के फाइनल में जुड़ने थे।
आज से ही कॉपी दिखानी शुरू किया जाना था।
रंगोली की घबराहट का ठिकाना न था। वैसे तो वो रोज़ ही नहाने के बाद शिव जी की फोटो के सामने दिया जलाकर अगरबत्ती घुमाया करती थी, लेकिन आज सुबह से हर आधे घंटे में उसका पूजा पाठ चल रहा था। तीसरी बार जब वो भगवान की फोटो के सामने दिया जलाने गई तो परेशान हाल झनक ने उसे टोक ही दिया…
” अरे बस कर यार रंगोली इतना भी क्या डरना? तेरी पूजा पाठ से तो भगवान भी परेशान हो कर इस कमरे को छोड़कर भाग जाएंगे। दिन भर कितनी सारी अगरबत्ती जलाई रहती है, कि तेरे बैड तेरे टॉवेल यहाँ तक कि तेरे कपड़ों से भी गुग्गुल और भभूत की स्मेल आने लगी है। आजकल तो मुझे लग रहा है जैसे मैं किसी साध्वी सन्यासिनी देवी के साथ रह रही हूं। “
रंगोली ने मुंह लटका कर झनक को देखा और वापस तैयार होने लगी…..
” तू नहीं समझेगी यार यह मेरा पहला एग्जाम है कॉलेज का और इसके रिजल्ट के लिए मैं बहुत डरी हुई हूं। कॉपी तो ठीक लिखी थी लेकिन पता नहीं क्यों ऐसा लग रहा है यहां की टीचर जाने कैसे चेकिंग करेंगे। तू तो जानती है मेरी इंग्लिश भी थोड़ी कच्ची है मैं ना कुछ का कुछ ना लिखा आयीं हूं कहीं।
तुझे तो झनक सिर्फ आंसर याद करने पड़ते हैं मुझे तो आंसर के साथ ही यह सारी बड़ी-बड़ी स्पेलिंग भी रटनी पड़ती है।
– सबस्कैपुलरिस, टीरेस माइनर, सुप्रास्पिनैटस और इन्फ्रास्पिनैटस ट्रेपेज़ियस, सेराटस, लेवेटर स्कैपुलार रॉमबॉइड मांसपेशियां हे भगवान ऐसे अजूबे नाम कौन रखता है मसल्स के।
जिसने रखे उसे तक इनकी स्पेलिंग्स याद नही होती होंगी और ये लोग चाहते हैं हम सब रट घोंट के लिख दें ,बस।”
“अरे ओए मैडम !!! ये तो सिर्फ इतनी ही है, अभी तो इससे भी कठिन कठिन स्पेलिंग्स आनी है तब क्या करोगी। अरे ये सब कोई रट्टा थोड़े न मारता है , कागज़ पर लिखते समय खर्राटा मारतें हैं। यानी बस शुरु के दो अल्फाबेट समझ आये ऐसा लिखो और लास्ट के दो। बीच का तुम लाइन आड़ी टेढ़ी खींच के कुछ भी तीर कमान बना दो। कॉपी जांचने वाले को भी असली स्पेलिंग कौन सी पता होगी जो वो नम्बर काटेगा।
यही तो कारण है जो हम डॉक्टर्स की हैंडराइटिंग माशालल्लाह होती है।
वो तो हम खुद न पढ़ पाएं एक बार लिख लेने के बाद , भला हो इन दवा दुकानदारों की जाने कैसे वो हमारे लिखे मोनालिसा कोड को भी हैक कर लेते हैं।”
“मैंने राइटिंग तो बहुत अच्छी लिखी है बाई द वे। अगर राइटिंग पर कोई एक्स्ट्रा मार्क्स होते तो वो ज़रूर मिल जाते।”
“राइटिंग में एक्स्ट्रा मार्क्स बस अप्सरा पेंसिल वाले बांटते हैं और किसी जहान में राइटिंग पे मार्क्स नही मिलते सो डोंट फोकस ऑन हैंडराइटिंग, जस्ट इग्नोर इट। “
“ओके !! चल अब कॉलेज चलें।”
दोनों फटाफट तैयार होकर कॉलेज निकल गईं। परीक्षाओं का समाप्त होना इसलिए भी खास था क्योंकि इन्हीं परीक्षाओं के बाद जूनियर्स को वेल्कम पार्टी मिलती थी। और जूनियर्स हो या करंट सीनियर्स सभी के लिए ये दिन और इसके बाद पढ़ाई के आखिरी साल में आने वाला फेयरवेल दोनों ही अति महत्वपूर्ण दिन थे।
वो दोनो अपनी क्लासरूम के सामने पहुंची ही थी कि दूर से हाथ हिलाता अनस चला आया…
” हेलो गर्ल्स !! कैसी हो, हे झनक सुनने में आ रहा है तूने फिजियो में टॉप किया है।”
झनक के मन ही मन लड्डू फूटने लगे, खुश तो रंगोली भी बहुत हुई लेकिन उसका दिल दूर किसी सूने अंधियारे कुंए में जाकर डूब गया। उसे लगा उसके साथ रहने वाली उसकी रूममेट ने टॉप कर लिया और वो गधी पास भी नही हो पाई।
अचानक उसे लगने लगा कि वो पास भी नही हो पाई है और उसे ये सब सोचते सोचते ज़ोर की रुलाई फूटने लगी। उसे अपनी माँ की ,मेहंदी की पापा की सब की कस के याद आने लगी, वो बिलखने को थी कि उसने खुद को संभाल लिया….
झनक पूरी तरह से उत्साह में डूबी, आह्लादित झूमती सी कक्षा में दाखिल हो गयी। उसे मन ही मन लगा जब इसे छिछोरे को मालूम है तो जाहिर है पूरी क्लास जानती होगी कि उसने टॉप किया है।
झनक वैसे तो बहुत धैर्यवान, ईमानदार, संयत सुदृढ चरित्र लड़की थी पर अभी वो अपनी प्रसन्नता में ऐसी गुम थी कि उसका झूम झूम के भंगड़ा नाचने का मूड कर रहा था।
पर उसने भी खुद को और खुद के जज़्बातों को अपने दिल में बांन्ध लिया और चुपचाप अपनी बेंच पर जाकर अपनी बेवजह की मुस्कुराहट छिपाते हुए बैठ गयी।
फिजियो वाली टीचर ही उनकी क्लास टीचर थी, इसी से रिज़ल्ट डिक्लेयरेशन उन्हीं के कंधों पर था।
वो तेज़ कदमों से जैसे ही कमरे में दाखिल हुईं, अचानक मछली बाज़ार शांत हो गया..
उन्होंने मुस्कुरा कर क्लास को एक नज़र देखा और हाथ में पकड़ रखे कागज़ अपने सामने टेबल पर रख दिये…
“हेलो क्लास !! आप सभी जानतें ही हैं कि आज मैं रिज़ल्ट बताने वाली हूँ, सो आप सब सुपर एक्साइटेड होंगे। “
पीछे बैठे बैकबेंचर्स भी मुस्कुरा रहे थे क्योंकि मेडिकल की पढ़ाई ही ऐसी है कि यहाँ कोई बैकबेंचर्स भी पढ़ाई से बच नही सकता।
अनस रंगोली और झनक के ठीक पीछे बैठा करता था, और ये वही लड़का था जिसने पहले दिन रंगोली को पीछे से पेन चुभा कर उसे बताया था कि सीनियर्स उसे ही बुला रहें हैं और उसकी इसी बात को नोटिस कर सीनियर्स ने उसे भी बुला लिया था।
काफी समय बाद रंगोली को पता चला था और तब से अनस से उसकी और झनक की बातचीत हो जाया करती थी।
“क्या बात है अनस अली बड़ा मुस्कुरा रहे हो! कॉन्फिडेंट हो कि रिज़ल्ट अच्छा आया होगा?”
मैडम की बात सुन अनस अपनी जगह पर खड़ा हो गया…” यस मैडम !”
” गुड !!! बैठ जाओ। आप सभी ने अच्छे पेपर बनाएं हैं। डायग्राम भी काफी क्लियर हैं, ऑलमोस्ट सभी ने एक से पेपर बनाये हैं पर कुछ ट्रिकी क्वेश्चन में मोस्टली लोग फंसे और सही नही लिख पाए। बल्कि इस पूरी क्लास में शायद एक ही लड़की ने “एनाट” (एनाटोमी) का वो सवाल सही किया होगा। “
मैडम की बात सुन झनक ज़रा और कंधे चौड़े कर बैठ गयी। उसके मन की गर्व भावना वही समझ सकती थी…
तभी मैडम ने आगे अपनी बात जारी रखी…
“सबसे अच्छी बात है इस प्री टर्म में कोई बच्चा फेल नही हुआ है…
अब रंगोली के चेहरे पर राहत के भाव तैरने लगे…
“क्लास में फोर्थ पोज़िशन पर है स्मिता, थर्ड पोज़िशन पर है झनक सेकंड है अमित और….
ये सारे लोग अपना नाम सुन कर अपनी जगह खड़े होने लगे… पर अपना नाम थर्ड पोज़िशन में सुन कर झनक को झटका सा लगा… “,ये कैसे पॉसिबल है, की वो थर्ड आ गयी और अगर वो थर्ड है तो फर्स्ट कौन आया है…
“एंड फर्स्ट पोज़ीशन पर हैं, रंगोली तिवारी”
छन्न की आवाज़ के साथ अपने अंदर कुछ तड़कता हुआ झनक ने महसूस किया….
…. किसी महानुभाव ने कहा है ना कि अपना दोस्त फेल हो जाये तो दुख होता है पर अगर वही दोस्त फर्स्ट आ जाये तो कलेजे में सांप लोट जाते हैं।
वैसा ही कुछ झनक के साथ हुआ था। और रंगोली वो तो अपने होश में ही नही थी।
कहीं किसी अंधियारे कुंए में डूबा पड़ा उसका दिल कूद कर अपनी जगह वापस आ चुका था और अब फिलहाल झनक का दिल उसी कुंए मे डूबने की तैयारी में था।
झनक के लिए यूँ लग रहा था ज़िन्दगी थम सी गयी थी या स्लो मोशन में चल रही थी। रंगोली को अनस और बाकी लोगों ने पकड़ कर खड़ा कर दिया था और उसके आसपास भीड़ लगाते विद्यार्थी उसे छू छू कर बधाइयाँ दिए जा रहे थे और उन बधाइयों के बोझ तले दबती रंगोली उस भीड़ में से झनक को ढूंढने में व्यस्त थी।
पर अपने बोझिल कदम घसीटते हुए झनक अब तक कमरे से बाहर निकल चुकी थी….
क्रमशः
दिल से ….
कोरोना वापस फैल रहा है। नया वैरिएंट भी और पुराना भी।
ओमिक्रोन के लक्षण ज्यादा नही हैं और फेटल भी नही है । इसके लक्षणों में सामान्य सर्दी जुकाम के साथ बॉडीएक, जोड़ों में दर्द और सामान्य बुखार शामिल है। बहुत बार तो बुखार भी एक दिन में उतर जाता है।
अब लोग कोरोना से डर नही रहे बल्कि सर्दी जुकाम होने पर टेस्ट ही नही करवा रहे। प्लीज़ ऐसा न करें। लक्षण कितने भी मामूली हों टेस्ट होना इसलिये भी ज़रूरी है कि टेस्ट के बाद आइसोलेट किया जा सके वरना चेन टूटेगी नही और एक के बाद एक लोग बढ़ते जाएंगे।
और कब किसे वही लक्षण घातक असर दिखा दे हम नही जानते।
इसलिए एक बार फिर सतर्कता बरतिए,बिना ज़रूरत घर से बाहर मत निकालिए और बाकी बातें आप सब को पता ही हैं।
मुझे पढ़ने सराहने के लिये दिल से आभार शुक्रिया नवाज़िश!
aparna …..
