मायानगरी -16

             
मायानगरी – 16

      
     निरमा के साथ कॉन्फ्रेंस रूम में बैठे मेडिकल के कॉलेज के प्रोफेसर्स लेक्चरर रीडर्स सभी चिंतित बैठे थे लेकिन निरमा के चेहरे पर चिंता के साथ ही नाराज़गी भी झलक रही थी।

“मैं जानती हूं, आपमें से किसी के पास अदिति के बारे में कोई भी ऐसी जानकारी नही होगी जिससे हम उसके घर वालों को किसी भी तरह की कोई तसल्ली दे सकें। लेकिन मैं एक मातापिता से उनकी बेटी के बारे में कुछ भी गलत नही कह सकूंगी। और उनसे मिलने पर यही कहूंगी की मैं उनकी बेटी को इंसाफ दिलवा कर रहूंगी।
   मैं जानती हूं इस केस पर मैं कुछ ज्यादा भावुक हो रही हूं पर क्या करूँ मेरी भी तो एक बेटी है। “

  निरमा ने एक नज़र सभी पर डाली और उसके बाद एक लाइन से हर किसी से सवाल पूछने लगी। फायनल ईयर वाले प्रोफेसर्स के अलावा बाकी के लोग जिहोंने भी अदिति को पढ़ाया था सब ने लगभग एक सी ही राय उसके बारे में दी । और उन सब के अनुसार अदिति पढ़ाई में बहुत होशियार और समय से अपने असाइनमेंट पूरे करने वाली ईमानदार लड़की थी। इन में से ज्यादातर लोगों ने उसके व्यक्तिगत स्वभाव के बारे में भी अच्छी जानकारी ही दी थी।
    तबियत सही न होने का आवेदन देकर पुरोहित मैडम इस मीटिंग में नही पहुंची थीं।
   इस बात का पूरा अनुमान निरमा को पहले ही हो चला था। उसने उनका आवेदन स्वीकार कर लिया था लेकिन थाने से अगर उन्हें बुलाया जाए तब बिना किसी आनाकानी के उन्हें वहां जाना होगा ये भी निर्देश दे दिया था।

   निरमा ने सभी की बताई बातों को सिलसिलेवार लिख भी लिया था, उसका काम लगभग समाप्त हो चला था कि उसके फोन पर प्रेम का फ़ोन आने लगा….
      फ़ोन उठाते ही प्रेम की चहकती हुई आवाज़ से ही उसे आभास हो चला था कि क्या बात है…. और तुरंत ही प्रेम ने इस बात की पुष्टि भी कर दी कि राजा भैया मुख्यमंत्री पद के दावेदार बन चुके हैं और उनकी पार्टी सत्ता की प्रमुख दावेदार बन कर उभर रही है।

  निरमा के चेहरे पर भी हल्की सी मुस्कान चली आयी। बाँसुरी को सामने से मिल कर ही बधाई देने के लिए वो वहाँ से उठ कर सीधे बाँसुरी से मिलने महल की तरफ ही बढ़ गयी।

   निरमा के वहाँ से निकलते ही सबके चेहरे पर राहत के भाव दिखने लगे।

******

   सुबह के आठ बजने वाले थे कि अभिमन्यु का फ़ोन बजने लगा …

“हाँ पापा , बोलिये!”

“क्या बोलें? तुम्हारी अम्मा की ट्रेन दस मिनट में प्लेटफार्म पर लग जायेगी। तुरंत स्टेशन के लिए दौड़िये छोटे पंडित !”

“वाह पापा! अब बता रहें हैं आप! आपको मालूम है ना मायानगरी से रेलवे स्टेशन बीस मिनट के रास्ते पर है। अभी जैसे हैं ऐसे भी भागे न तो भी समय पे न पहुंच पाएंगे। हद करतें हैं आप भी।”

“अरे हम सोचे कि तुमको याद दिला दें।”

“तो समय पे याद दिलाना था ना। और अगर मान लीजिये गाड़ी बिफ़ोर टाइम चली आयी तो?
   फिर अम्मा और कॉकरोच को स्टेशन पे कितना देर रुकना पड़ेगा , सोचा भी है आपने। चलिए अब रखिये फ़ोन ,ट्रेन सामने लग रही है स्टेशन पे, अब जाकर उतार लें दोनों को।”

“उल्लू बना रहे थे अपने बाप को। बाप हैं तुम्हारे, जानतें हैं कि हमारा नौनिहाल पंचरत्न पहुंच ही गया होगा। हम तो बस कन्फर्म कर रहे थे। “

   हँस के अभिमन्यु ने फ़ोन जेब के हवाले किया और आगे जाकर ट्रेन से उतरती अपनी अम्मा के पैर छू कर उनका बैग पकड़ लिया।

“क्यों बे , तुमको ये भी सिखाना पड़ेगा कि अपने बड़े भैया के पैर छूने चाहिए,चलो आओ “

  अभिमन्यु के ऐसा कहते ही विभु तुरंत हंसते हुए अभि के पैरों पर झुकने को हुआ कि अभिमन्यु ने मुस्कुरा कर उसे गले लगा लिया…

   सामान अपने कंधे पर टांगे अभिमन्यु आगे बढ़ गया…

“अम्मा इतना क्या समान ले आयी हो? कितने दिन रुकने का विचार है?”

“तुम्हारे लिए लड्डू चकली निमकी बना कर लाईं हैं। इसलिए बैग भारी हो गया है।”

“हम्म !! मतलब शाम की ट्रेन से वापसी है ना?”

  अभिमन्यु के सवाल पर अम्मा और विभु उसे घूरने लगे ….

“काहे अपनी अम्मा से सबको मिलवाते शरम लगती है क्या?”

“कैसी बात करती हो अम्मा? बॉयज़ होस्टल में रहतें हैं इसलिए पूछ रहे थे।”

  विभु ने एक भौंह चढ़ा रखी थी….

” जब कबीर सिंह में प्रीति सिक्का उसके होस्टल रूम में रह सकती है तो अम्मा काहे नही?”

“खींच के एक लगाएंगे कान के नीचे तो अभी समझ आ जायेगा सब। और ये फिल्मों पे कम और अपने बोर्ड पे ज्यादा ध्यान दो समझे। “

अभिमन्यु ने स्टेशन से निकलते ही सामने दिख रहे एक होटल की तरफ इशारा कर दिया…

” अच्छा अम्मा चलो पहले कुछ खा पी लो। फिर अस्पताल निकलें?”

“अरे नही अभि ! शुगर की जांच खाली पेट ही करवाना है तुम्हारे पापा बोले रहे। तो पहले अस्पताल ही चलतें हैं। “

  ” ठीक है अम्मा, जैसा तुम्हें सही लगे।”

  अभिमन्यु अम्मा और विभु को लेकर मायानगरी अस्पताल की ओर निकल गया।

   अस्पताल में सुबह की ओपीडी में दिखाने वाले मरीजों की भारी लाइन काउंटर के सामने लगी हुई थी जहां 5 रुपये की पर्ची काटी जाती थी।
   अभिमन्यु ने वहां पहुंचकर जब इतनी लंबी चौड़ी लाइन देखी तो उसका माथा तड़कने लगा। अगर वह यहां इतनी देर खड़ा रहेगा तो कॉलेज के लिए देर हो जाएगी। फिर कुछ सोचकर वह काउंटर पर पहुंच गया। उसने सोचा अगर वह अपना परिचय दे दें कि वह भी इसी यूनिवर्सिटी का छात्र है, तो शायद उसका नंबर जल्दी लग जाए लेकिन वहां की भीड़ भाड़ में किसी ने उसकी आवाज सुनने की जहमत नहीं उठाई। तभी किसी ने पीछे से उसके कंधे पर हाथ मारा…

” लाओ मुझे दो मैं तुम्हारा नंबर लगवा देती हूं। “

   अभिमन्यु ने पीछे मुड़ कर देखा, पीछे झनक खड़ी थी। उसने अभिमन्यु के हाथ में थाम रखी पर्ची जिसमें उसकी माँ का नाम और बाकी जानकारियां थी लेकर ग्लास काउंटर के पीछे बैठे लोगों को पास जाकर रसीद कटवाई और लाकर अभिमन्यु के हाथ पर रख दी।
 
    ” ऊपर सेकंड फ्लोर पर 10 नम्बर रूम में मेडिसिन ओपीडी है। आपका पांचवा नम्बर है, जल्दी ऊपर चले जाइये आंटी। “

   झनक ने मुस्कुरा कर अभिमन्यु की माँ से कहा और फिर अभिमन्यु की ओर मुड़ गई…

” तुम्हारी मॉम है?”

अभिमन्यु ने मुस्कुराकर हां में सिर हिला दिया….

” तबीयत में कुछ खराबी है क्या? यहां कैसे आई है दिखाने?”

” डायबिटीज हो गई है, तो पापा ने कहा कि एक बार यहां भी दिखाकर सेकंड एडवाइज ले लेनी चाहिए। वैसे ही पापा ने सब कुछ शुरू करवा दिया है ….मम्मी योगा भी करने लगी है, वॉक भी कर रही है। करेले का जूस पीती है जामुन की गुठली खाती है। मतलब जो जो करते हैं ना डायबिटीज वाले वो सब शुरू कर दिया है। मुझे समझ नहीं आ रहा कि हमारे घर में एक अम्मा ही है जो मीठा बिल्कुल नहीं खाती थी और उन्हीं को शुगर हो गयी। जबकि मैं, बिना मीठा खाए मेरा गुजारा नहीं है, पता नहीं मेरा क्या होगा?”

” कुछ नहीं होगा। अगर रेगुलर हेल्दी लाइफ़स्टाइल मेंटेन करोगे, तो तुम्हें कुछ नहीं होगा। और दूसरी बात मीठा खाने से डायबिटीज नहीं होती। वैसे  तुम ना शक्ल से लगते ही हो कि बस फालतू का ज्ञान पेले रहोगे असली चीज कुछ पता नहीं है।
     नीम करेला जामुन की गुठली इस सबसे डायबिटीज को नहीं कंट्रोल किया जा सकता। हां योगा करना, वॉक करना यह सब ठीक है, लेकिन इस सब के साथ उन्हें दवाइयां भी लेनी ही पड़ेगी। “

” अच्छा!! ऐसा है क्या, तो मतलब यह सब खिलाने का कड़वा जूस पिलाने का उन्हें कोई फायदा नहीं है। “

” नहीं बिल्कुल नहीं, हमारे शरीर में जाने वाला हर तरह का अन्न पचने के बाद ग्लूकोस ही बनता है। इसलिए उनके खाने-पीने का तुम्हें ऐसे ध्यान रखना है, कि वह एक ही समय पर बहुत सारी चीजें ना खाएं। वरना बहुत सारा ग्लूकोज उनके शरीर में इकट्ठा होगा और जो कि ब्लड में जाकर शुगर लेवल को बढ़ा देगा। “

” और मीठा खा सकते हैं कि नहीं?”

” वह तो तुम्हारी अम्मा को वैसे भी पसंद नहीं है , तो तुम क्यों यह जानकारी ले रहे हो? इसलिए कि कभी तुम्हें भविष्य में हुआ तो खा सकोगे कि नहीं?”

अभिमन्यु मुस्कुरा कर नीचे देखने लगा और शर्माते हुए अपने बालों पर हाथ फिराने लगा…

” वैसे तुम यहाँ क्या कर रही हो झनक, इस समय तो तुम लोगों की क्लास कॉलेज में लगती है ना।”

   झनक अभिमन्यु की यह बात सुनकर चौक गई और तुरंत इधर-उधर देखने लगी। अपने चेहरे पर आए भावों को छुपाकर उसने अभिमन्यु से धीरे से कहा…

” हाँ वो कुछ जरूरी काम था। “

“ठीक है फिर! ” झनक ने एक नजर अभिमन्यु को देखा और एक गलियारे की तरफ मुड़ गई उसे जाता देख अभिमन्यु ने पीछे से आवाज लगा दी…

” बाय द वे झनक थैंक यू।”

    झनक आगे जाकर उस कॉरिडोर में कहीं गुम सी हो गयी। हमेशा रंगोली को साथ लिए फिरने वाली झनक आज अपनी क्लास छोड़ यहाँ कहाँ भटक रही थी, वो भी फर्स्ट सेमेस्टर के एग्जाम शुरू होने के पांच दिन पहले।
   अभिमन्यु अपना माथा झटक कर अम्मा को साथ लिए डॉक्टर के पास चला गया।
   उसके बाद कुछ ज़रूरी जांच करवा कर वो अस्पताल से निकल ही रहा था कि तेज़ कदमों से निकलती झनक वापस उससे टकरा गई…

“अरे झनक सुनो। अम्मा तुमसे मिल कर तुम्हें थैंक यू कहना चाहती थीं। तुम्हारे कारण ये लंबी लाइन से बच गये हम लोग।”

अब तक अभिमन्यु की अम्मा ने अपने भानुमति के पिटारे से एक गोल स्टील का बड़ा सा डिब्बा निकाला और झनक के हाथ में पकड़ा दिया..

“अरे ये क्या है आंटी जी?”

“गाजर का हलुवा है बिटिया! काहे?  नहीं पसन्द है तुम्हें?”

” गाजर का हलवा किस गधे को नापसंद होगा आंटी!”

“हमें नहीं पसन्द।”  विभु की आवाज़ सुन वो अपनी जीभ काट कर रह गयी….

“सॉरी मेरा कहने का मतलब था गाजर का हलवा जनरली सभी को पसंद होता है। और मुझे तो बहुत पसंद है, थैंक यू सो मच आँटी। “

  झनक ने  झुक कर अभिमन्यु की मां के पैर छू लिये और अभिमन्यु की मां का चेहरा खिल उठा …

“वैसे पूरा नाम क्या है तुम्हारा बिटिया? ब्राम्हण हो?

अभिमन्यु को मां का यूँ पुछताछ करना कुछ जमा नही और इसलिए उसने बीच में ही बात काट दी…

“तुम तो लेट हो रही होंगी न झनक। तुम जाओ और ये डिब्बा बाद में मुझे वापस कर देना।”

  झनक ने एक नज़र हाथ में पकड़ रखे डब्बे को देखा और अभिमन्यु को देख वहाँ से निकल गयी।
   झनक के वहाँ से जाते ही अभिमन्यु ने विभु को बुलाया…

” विभु तू अम्मा को लेकर धीरे धीरे आगे बढ़ , मैं बस अभी आया।”
  और वो फुर्ती से उस कॉरिडोर की ओर मुड़ गया,जहाँ से कुछ देर पहले झनक बाहर आई थी।
   तेज़ी से आगे बढ़ने पर उसे एक कमरे के बाहर से कुछ हल्की सी आवाज़ें सुनाई दी। असल में इस कॉरिडोर में तीन चार कमरे एक सीधी पंक्ति में थे जो अलग अलग सामानों के स्टोर रूम थे। ऐसे ही एक स्टोर से आवाज़ आ रही थी।
    अभिमन्यु ने छिप कर झांकने की कोशिश की और उसे झलक मिल ही गयी।
   पुरोहित मैडम के साथ उनका पति भी था। लेकिन साथ ही वहाँ किसी और कि भी आवाज़ आ रही थी।
  अभिमन्यु ने दबे पांव सुनने की कोशिश की, लेकिन जब उन लोगों की बातों का ओर छोर समझ नही आया तब अभि वहाँ से दबे पांव निकल गया।
  वो असल मे जो पता करने आया था वो  तो उसे पता चल ही गया था।

वो वहाँ से निकल तेज़ कदमों से भागता सा विभु और अम्मा के पास पहुंच गया, और उन लोगों को साथ लेकर अपने हॉस्टल निकल गया।
   

*******

    कमरे का दरवाज़ा खोल कर झनक भीतर चली आयी, उसने देखा रंगोली अपनी किताब में खोई पढ़ाई कर रही थी।
   झनक ने उसके सामने जाकर डब्बा रख दिया…

“ये क्या है? और तू थी कहाँ? आज तो बस एक ही क्लास होनी थी सुबह वाली उसमें भी नही आई।”

“हां कुछ ज़रूरी काम था। तू ये चख के देख ना! “

” क्या है ये? ” कहते कहते रंगोली ने डिब्बा खोल लिया। सामने गाजर का हलुवा देख उसका चेहरा खिल गया… उसने तुरंत उठा कर मुहँ में रख लिया…

“ओहम्म , जन्नत है यार जन्नत !किसने बनाया ये, इतना टेस्टी हलुवा। एकदम मम्मी की याद आ गयी।”

“मम्मी ने ही बनाया है, तेरी सासु मम्मी ने।”

खाते खाते रंगोली के गले में कुछ अटक सा गया…

“कौन ? आई मीन किसने?”

“अबे यार ,कितनी झल्ली है तू, अभिमन्यु की मम्मी ने दिया है। आज हॉस्पिटल में सुबह मिल गयीं थीं बस वहीं दे दिया, और मैंने भी ले लिया। यार हॉस्टल का बोरिंग खाना खा खा कर जो ज़हर हम पेट में जमा करते हैं अगर उसको घर का खाना खा कर वैनिश करने का मौका मिले तो हम पीछे क्यों हटें भला।”

“हाँ यार !इतने दिन बाद घर का टेस्टी  खाना मिल रहा हो तो ये नही पूछना चाहिए कि किस घोंचू के पास से मिला है। बनाया तो आखिर एक माँ ने ही है ना।”और रंगोली वापस मुस्कुरा कर खाने लगी…
  
   खाते खाते अचानक रंगोली थम गई….

“पर तू सुबह सुबह क्लास छोड़ कर अस्पताल क्या करने गयी थी…..

   झनक ने रंगोली की तरफ देखा और अचानक से घबराहट में वो कुछ कह नही पायी…..

क्रमशः

…..

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