अपराजिता -126

अपराजिता by aparna

अपराजिता -126

फटाफट अपने मायके वालो से मिल कर कुसुम भी यज्ञ के साथ अस्पताल के लिए निकल गयी..

गाड़ी चलते हुए यज्ञ ने घर पर अपने बाबूजी के नंबर पर फोन लगा दिया..

“किसे फ़ोन कर रहे हैं ?”

“बाबूजी को !”

“उन्हेँ काहे बता कर परेशान कर रहे हैं.. ? अम्मा जी का तबियत भी ठीक नहीं हैं, ऐसे में पहले हम दोनों लोग अस्पताल पहुँच कर भाई साहब का हाल चाल देख लेते हैं, तब घर में बताएँगे !”

“हाँ हाँ इतना तो हम भी समझते हैं,बस बाबूजी को बता रहे कि थोड़ा समय लग जायेगा हम लोगो को लौटने में !”

यज्ञ कि बात सुन कुसुम भी मुस्कुरा उठी..

“हम भी अम्मा जी को बता देते हैं !”

कुसुम ने अपनी सास को फ़ोन घुमा दिया..

उसकी सास का फ़ोन वहीँ बैठ कर फल काटती काकी सास ने उठा लिया..

“ये कुसुम काहे फ़ोन कर रही हैं.. !” कहती काकी ने फ़ोन उठाया..

“हम्म बोलो कुसुम !”

“काकी जी .. हम दोनों जरा दूर्वागंज निकल गए थे, लौटने में ज़रा देर हो जाएगी… आप लोग इंतज़ार ना कीजियेगा, और काकी जी आप अम्मा जी को खाना खिला कर उन्हेँ दवा भी दे दीजियेगा.. उनके सरहाने रखे डिब्बे में से एक सफ़ेद वाली गोली और एक एकदम छोटी सी पीली गोली उन्हेँ देनी हैं !”

“हम्म.. जानते हैं.. दे देंगे !”

इतना कह कर काकी ने फ़ोन रख दिया..
काकी वैसे तो अच्छी ही थी, लेकिन जाने क्यों वो अब भी कुसुम से उतना जुड़ नहीं पायी थी..

“जिज्जी एक बात मन में आ रही हैं, कहें ?”

“कहो ना शकुन !” पलंग के सरहाने टेक लगा कर बैठी कुसुम की सास धीरे से सेब का टुकड़ा कुतरते हुए बोल पड़ी..

“ये कुसुम का चरण सही नहीं पड़ा हैं घर में !”

“ये क्या बोल रही हो शकुन ?”

“हाँ फिर और क्या ? वो आयी हैं, दिन नहीं बीता कि यज्ञ को गोली लग गया, जैसे तैसे ठीक हुआ कि आपका हार्ट अटैक हो गया…
अब बताइये, आपको इसके पहले तो कभी ये हार्ट ऊर्ट का बीमारी नहीं था, अचानक कहाँ से ये रोग प्रकट हुआ ? बुरा मत मानियेगा जिज्जी, लेकिन आपकी बहु का लच्छन ठीक नहीं हैं !”

शचीरूपा शांत बैठी थी, उसने अपनी धीर गंभीर दृष्टी उठा कर सामने बैठी देवरानी पर दृष्टिपात किया..

“तुम्हारा कहना वाकई सही हैं शकुन.. हमारी बहुरिया कि छाया गहरी बहुत हैं!!
अब देखो ना, अपने मायके से बिदा हुई हैं और उसका भाई छत से गिर गया।
इसका मतलब उस घर में जब तक वो थी, तब तक मुसीबतो को आने से रोक रखा था उसकी छाया ने.. और लड़की बिदा हुई कि अनर्थ घट गया।

“हाय जिज्जी ये का बोल रही ?”

“हाँ तो का गलत बोल रहे, अब यही तुम देख लो, यज्ञ को गोली छू कर निकल गयी, क्यूंकि उसके साथ कुसुम थी।  वरना क्या गोली लग कर बच जाना इत्ता आसान होता हैं.. ?
हमे ही ले लो, इत्ती ख़राब तबियत हुई, लेकिन भगवान की दया रही कि, हम बच गए। और ये सब नयी बहु के चरणों का पुण्य प्रताप ही हैं शकुन।
वरना अभी तुम घर की पुरखिनों के साथ हमारी तेरही की तैयारी करती हुई, हमारी बातें कर आंसू बहाती होती.. समझी !”

“छि जिज्जी, दिया बाती की बेला में कैसी अशुभ बातें लेकर बैठ गयी आप ?”

“हम बैठे की तुम ? देखो शकुन, ज्यादा पढ़े लिखे नहीं हैं हम, तुम सब की तरह।
कुल जमा चार जमात पढ़ने के बाद हमारे बाबूजी ने हमारा स्कूल छुड़ा दिया, और दो साल घर में बैठाने के बाद बियाह कर दिया। इसलिए तुम लोग जैसे किसका चरण अच्छा, किसका ख़राब, जैसा जोड़ घटाव हमको नहीं आता।
हम बस इतना जानते हैं कि कटोरी को अंदर से देखेंगे तो गहरी लगेगी, लेकिन बाहर से देखेंगे तो उथली नजर आएगी।
बस यही हम सब मनुष्यों की तकलीफ हैं।
बाहर बाहर देख कर हर वस्तु को उथला ही मान बैठते हैं.. !”

“जाने आप कैसे खुद को अनपढ़ बोल लेती हैं जिज्जी? अच्छे खासे पढ़े लिखे लोगो के कान काट दे आपकी बातें।
वैसे जिज्जी आप सही बोल रही हैं.. बस नजरिये का ही तो फर्क हैं..।
यज्ञ पे गोली चलना, आपका तबियत बिगड़ना सबको हमने कुसुम के ख़राब चरण से जोड़ लिया, वहीँ इन बातों में हुए कम नुकसान को आपने उसके सुलक्षणा होने से जोड़ दिया.. बस समझ का ही तो फेर हैं !”

यज्ञ की काकी मुस्कुरा उठी…
उसी वक्त घर के नौकर ने हांक लगायी..

” छोटी बीबी जी आयी हैं !”

यह सुनते ही शकुन भाग कर बाहर चली आयी..
उनकी सबसे छोटी बेटी अपने लड़के का हाथ थामे दरवाजे पर खड़ी थी।
शकुन ने भाग कर उसे गले से लगा लिया..

” ए चंदा, अरे आरती का थाल लाओ री.. सुराज आयी हैं!”

एकदम से घर में हलचल सी मच गयी.. घर की बेटी आयी थी आखिर.. ये वही छुटकी बिटिया थी, जो यज्ञ की शादी में नहीं आ पायी थी।
उसका बहुत समय से आने का मन था और बस इसीलिए वो आज धमक गयी..

सुराज अपने बड़े पिताजी से मिलने के बाद बडी माँ के कमरे में चली आयी..

उसे देखते ही उसकी बडी माँ ने बाहें फैला दी..
वो भाग कर उनकी बाँहों में सिमट गयी..

“कैसी हैं, बडी अम्मा ?”

“हम तो एकदम ठीक हैं, तुम बताओ कैसी हो ?”

“हम भी ठीक हैं, हम बाहर क्या चले गए, आप सब तो एकदमे भुला दिए हैं हमें!”

“कैसी बात करती हो.. घर की बेटियों को कोई भूलता हैं भला.. अच्छा बताओ, अकेले आयी हो ? जंवाई बाबू कहाँ हैं ?”

“उनके पास कहाँ फुरसत हैं बडी अम्मा ? वो तो हमने रोना मचा दिया कि अब नहीं जाने दिया तो सोच लीजियेगा, तब जाकर माने हैं महामहिम !”

सुराज हल्का सा मुस्कुरा कर रह गयी… शकुन अपने छोटे से नवासे के साथ खेलने में व्यस्त थी…
शाम की मनहूसियत उन माँ बेटे के आ जाने से धुल पुंछ गयी..

“नैकी दुल्हनिया कहाँ हैं अम्मा ?”

कुसुम के लिए सुराज ने पूछ लिया..

“मायके गयी हैं ! “

“हैं.. ऐसे कैसे ? कभी भी मुहं उठाये मायके चली जाती हैं क्या कुसुम कुमारी जी ?”

“नहीं सुराज, उसकी भतीजी का जन्मदिन था, हमारी वजह से जा नहीं पायी तो आज हम ही ने कह दिया जाओ घूम आओ !”

“वाह बडी मीठी सास मिली हैं हमारी भौजाई को.. हमारे जैसी मिलती ना जो रात दिन अपने तानों से कान का खून निकाल देती, तब पता चलता !”

“तुम्हारी भी तो ठीक ही हैं !”

“बस ठीक ही हैं अम्मा !”

“अच्छा बताओ का लेते आये तुम्हारे लिए ? का खाओगी?”

“अभी बैठो अम्मा, बस एक काम करो बाहर ड्राइवर होगा उसके लिए खाना पीना भेजवा दो..फिर उसे चलता करें, अब हम तो रुकेंगे कुछ दिन !”

“हाँ तो काहे ना रुकोगी ? हम अभी डिरैभर के लिए नाश्ता भिजवा देते हैं !”

शकुन बच्चे को गोद में लिए नीचे उतर गयी..
और सुराज वहीँ बैठी अपनी बडी अम्मा के साथ बातों में लग गयी..

****

अनिर्वान अस्पताल में डॉक्टर्स के पास खड़ा पूछताछ कर रहा था कि उसके साथ वहाँ पहुंची गीता अंदर की तरफ बढ़ गयी.. उसी के पीछे नेहा भी थी..

अखंड को अब आईसीयू वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया था..
गीता तेज़ी से अंदर गयी और अखंड के सामने पहुँच कर उसकी हालत देख स्तब्ध खड़ी रह गयी..
उसने अखंड का हाथ थाम लेने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया लेकिन फिर संकोच में पीछे कर लिया.. आखिर अब वो किसी की ब्याहता थी !

“कैसा सुंदर चेहरा था, लगता था इस चेहरे पर हमेशा एक मीठी सी धूप खिली हुई है, और आज.. “

उसके आंसू नहीं थम रहे थे..

“वैसे अब कैसी तबियत है इनकी ?” उसने पास खड़े  डॉक्टर से पूछा..

“अभी कुछ कहा नहीं जा सकता.. चोट तो बहुत आयी थी, लेकिन ये अच्छी बात हुई कि अंदरूनी कोई घाव नहीं है.. इसलिए लग रहा है कि जल्दी इम्प्रूव कर लेंगे !”

“शुक्र है भगवान का!!
इन्हे कुछ होना भी नहीं चाहिए.. अगर इस बार इन्हे कुछ हो जाता तो हमारा भगवान पर से भरोसा ही टूट जाता! वैसे इनकी शक्ल पे ज्यादा असर तो नहीं होगा ना ?”

गीता के ऐसा पूछते ही अथर्व ने उसे घूर कर देखा..

“इनकी शक्ल ज्यादा ज़रूरी है या इनका ज़िंदा रहना? हद करते हैं आप लोग भी.. मतलब इंसान यहाँ ज़िंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहा है, वहाँ आपको उसकी शक्ल बचाने की फ़िक्र हुई पड़ी है।
हम डॉक्टर्स को आप लोग स्पष्ट कर दिया करे कि हमें क्या करना है.. ज़िंदगी बचाना है या शक्ल सूरत.. !”

अथर्व तनाव में था, क्यूंकि सारे टेस्ट सही आने के बावजूद अखंड को अब तक होश नहीं आया था।
कुछ एक रिपोर्ट्स अब भी आनी बाक़ी थी, वो उन्ही के इंतज़ार में था.. इसलिए फ़िलहाल उसे भी ठीक से अखंड की हालत का अनुमान नहीं था..

दूसरी बात वो और रेशम उसे उठा तो लाये थे, लेकिन अब ये सब पुलिस केस भी था… और उसे पुलिस की पूछताछ सख्त नापसंद थी।
इसीलिए गीता की बात सुन कर वो झुंझला उठा था, उसी वक्त बाहर से एक नर्स ने आकर उसे पुलिस के आने की सूचना दे दी..

“सर आपको और रेशम मैडम को बाहर बुला रहे हैं ! पुलिस आयी है !”

हाँ में सर हिला कर वो बाहर निकल गया.. उसके साथ ही वहीँ एक तरफ चुपचाप खड़ी रेशम भी जाने लगी… रेशम का नाम सुन कर गीता का माथा ठनका.. उसने जाती हुई रेशम को देखा और उसे आवाज़ लगा दी..

“सुनिए मैडम !”

रेशम रुक गयी -“जी कहिये !”

“आपका नाम जान सकती हूँ ?”

“डॉक्टर रेशम अवस्थी !”

“अवस्थी… !” गीता कुछ सोच में पड़ गयी, उसने रेशम को कॉलेज के समय एक आध बार ही देखा था… अब इतने सालों में चेहरा थोड़ा बदला सा लग रहा था, फिर भी झलक तो वही आ रही थी..

“रेशु आओ.. !” अथर्व ने रेशम को आवाज़ लगा दी और वो दोनों वहाँ से निकल कर चले गए..

गीता को समझ में नहीं आ रहा था कि अखंड के खिलाफ केस करने वाली रेशम अगर यही है, तो ये अखंड की तीमारदारी क्यों कर रही थी..?

गीता ध्यान से अखंड को देखती खड़ी थी कि वहां मौजूद नर्स ने उसे टोक दिया।

“मैडम यहाँ ज्यादा देर रुकना मना है, डॉक्टर्स मुझे डांटेंगे, आप बाहर जाइये !”..

हाँ में गर्दन हिला कर गीता बाहर चली गयी..

अनिर्वान अथर्व और रेशम से पूछताछ कर रहा था… कहाँ किस जगह पर एक्सीडेंट हुआ आदि.. जितना अथर्व को समझ में आ रहा था, वो बताता जा रहा था..

“ठीक है.. वैसे कल एक बार बस आप दोनों को थाने आना पड़ेगा…!”

“सर उसकी क्या ज़रूरत है.. हम लोग डॉक्टर्स हैं, हम बस अपने घर का ज़रूरी सामान खरीद कर लौट रहे थे, और ये एक्सीडेंट हमारे सामने हुआ है।
इससे ज्यादा और कुछ नहीं जानते हम दोनों !”

“रिलेक्स डॉक्टर.. बस एक औपचारिकता है जिसके लिए लिए आपको वहाँ बुला रहा हूँ.. आप दोनों को परेशान नहीं किया जायेगा !”

अनिर्वान ने अपनी बात कही, लेकिन अथर्व को थाने जाना पसंद नहीं आ रहा था। लेकिन उसके पास और कोई चारा भी नहीं था।
    रेशम ने उसकी बांह थामी, और उसकी तरफ देखकर उसे वहां से हट जाने के लिए इशारा किया और उसे साथ लेकर दूसरी तरफ निकल गई।

    अनिर्वान ने अपना मोबाइल निकाला और किसी को कॉल करने लगा।
इस सब के बीच एक किनारे खड़ी गीता का पूरा ध्यान रेशम पर ही टिका हुआ था। उसे अथर्व का चेहरा भी बहुत देखा हुआ सा लग रहा था। असल में वह सारे ही लोग एक ही विश्वविद्यालय से पढ़े हुए थे। बस इसीलिए कहीं ना कहीं टक्कर हुई रही होगी जिसके कारण गीता को अथर्व भी पहचाना सा लग रहा था। वह काफी देर तक उसे जाते हुए देखते रही।

अनिर्वान ने गीता की तरफ देखा, और उसे भी घर जाने के लिए कह दिया।

” अब आप भी जाइए, क्योंकि आपका इस तरह ज्यादा देर के लिए घर से बाहर रहना आपके लिए ठीक नहीं है।”

” जी सर, आप सही कह रहे हैं। मैं अब तक काफी छुपी हुई सी थी, लेकिन अब मुझ में इतना आत्मविश्वास आ गया है कि मैं धीरेंद्र को उसके किए की सजा दिलवा पाऊंगी।”

” जी अच्छी बात है, लेकिन जब तक उसे सजा हो न जाए, तब तक आपका भी सुरक्षित रहना जरूरी है। और बल्कि उसके बाद भी।
इसलिए पहले अपनी हिफाजत पर ध्यान दीजिए। आप कहें तो स्टाफ आपके साथ भेज दूं?”

” नहीं आपका कोई आदमी मेरे साथ जाएगा, तो वह मेरे लिए ज्यादा कठिनाई पैदा कर देगा।”

” ठीक है, फिर कल एक बार हो सके तो थाने आ जाइएगा। आपको गवाह के तौर पर मुझे रजिस्टर करना पड़ेगा।”

” जी सर, मैं जरूर आ जाऊंगी।”

गीता ने अनिर्वान और नेहा से इजाजत ली और एक बार वापस अखंड को देखकर वहाँ से बाहर निकल गई। उसे अखंड को ऐसे अकेले छोड़ कर जाने का मन नहीं कर रहा था, लेकिन उसे जाना तो था ही, वरना धीरेन्द्र उसका जीना हराम कर देता।

मन मार कर गीता बाहर निकल ही रही थी कि सामने से आते यज्ञ और कुसुम पर उसकी नजर पड़ गयी..
अखंड से हूबहू मिलते जुलते चेहरे वाला ये लड़का कौन है, ये सोच कर जाती हुई गीता ने मुड़ कर एक नजर उन दोनों पर डाली और पल भर के लिए थम गयी..

वो दोनों तेज़ी से चलते हुए डॉक्टर के पास पहुंचे और अखंड के लिए पूछताछ करने लगे..

उन्हेँ अखंड के बारे में पूछते देख गीता को तसल्ली हो गयी कि उसके घर से कोई चला आया है। और वो राहत महसूस करते हुए वहाँ से अपने घर के लिए निकल गयी।

यज्ञ और कुसुम को डॉक्टर ने अखंड का वार्ड बता दिया..।
वो दोनों उस तरफ बढ़ गए..
अखंड अब भी बेहोश था, उसे यूँ बिस्तर पर पड़ा देख यज्ञ की आँखों में आंसू झिलमिला गए।
कुसुम की भी आंखे बहने लगी, जाने क्यों लेकिन वो अपने इस जेठ में बिलकुल बड़े भाई की छवि देखती थी।

उसे भी अल्पभाषी जेठ जी का यूँ चुप पड़ा रहना अच्छा नहीं लग रहा था।
उसने अपने आंसू पोंछ लिए..
और यज्ञ के कंधे पर हाथ रख कर उसे सांत्वना देने लगी..

डॉक्टर ने उन लोगो को बता दिया कि अखंड खतरे से बाहर तो है, लेकिन उसका होश में ना आना अब भी डॉक्टर्स को शंकित किये हैं !

यज्ञ ने डॉक्टर से सारी पूछताछ करने के बाद अपने पिता को फ़ोन लगा लिया और उन्हेँ सब कुछ बता दिया..

घर पर हम अभी आते हैं कह कर यज्ञ के बाबूजी घर के दो नौकरो को लेकर अस्पताल के लिए निकल गए..
उनमे से किसी ने अखंड की माँ को कुछ नहीं बताया !!

क्रमशः

****

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Savita Agarwal
Savita Agarwal
1 year ago

Very Imotional and critical n typical condition in this part

Manu verma
Manu verma
1 year ago

क्या बात 👌🏻👌🏻👏🏻👏🏻🫡🫡
बिखरे मोतियों की माला बनाना तो कोई आपसे सीखे राइटर साहिबा 😊बेहद खूबसूरती से हर कड़ी को जोड़ रही हो आप लाजवाब 👌🏻👌🏻👌🏻।

Last edited 1 year ago by Manu verma
Shweta
Shweta
1 year ago

Mast story.hmesha ki tarah.

Shilpa Naredi
Shilpa Naredi
1 year ago

Aparajita ka new part nhi dikh rha hai …..123 k baad

Suman Thakur
Suman Thakur
1 year ago

Wah kya baat he Kusum Kumari ki sasu maa Ji ki,,🙏🙏itni achchhi soch or har baat ko samjhne ka nazariya,,pade likhe logo se bahut upar…. Dhanya ho gayi kusum ki unhe itni achchhi sasural or itna nyara or pyara humara yagya babu mile…😍😍😍🙏🙏🙏baki aapki lekhni ke liye kya he likhe Dr.Sahiba hum to khud chamatkrit hai,, sachchi mai aap Dil se likhti hai ♥️❤️❤️🌹🌹🌹✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️💐💐

Meera Patel
Meera Patel
1 year ago

अखंड को अब भी रेशू ने नही पहचाना ? , क्या होश खोने से पहले अखंड ने रेशम को देखा होगा ? आज भी अगर गीता के संग आप अखंड को सोच रही है तो ये मेरे मन में तो नही बैठता , पर रेशम को मुझे अथर्व से भी दूर नही होने देना !! क्या सोचू बहोत कन्फ्यूज हूं।
कुसुम का अपने जेठ में बड़े भाई को देखना 🥰🙌
गीता का अखंड को प्यार से देखना मुझे नही भाया 🙈🙊🙊

Archana Singh
Archana Singh
1 year ago

Very nice part 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻

Soma
Soma
1 year ago

Sahi bt h waqt k sath chehra kafy badal jata h insan ka… Apne sath k sathi Or bt kiye log v pahchan ni aate… Ye sbke sath hota hoga sayad mere sath v ho chuka h… To geeta to bechari kitne tension me h…. Ye to lajimi h… Lekin dekhte h waqt ky dikhata h…. Pr fr v ye akhand ko clean chit milte dikhne ki ichha h

Rekhapradeepsrivastava
Rekhapradeepsrivastava
1 year ago

सारी गुत्थी अब सुलझने को है, अब सबसे जरूरी अखंड का होश में आना है।
बेहतरीन पार्ट 👌👌👌👌👌👌

Gurpreet Kaur
Gurpreet Kaur
1 year ago

😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊👍👍👍👍👍👍👍👍👍