मायानगरी-7

मायानगरी by aparna

   मायानगरी – 7

    अपने हॉस्टल कैंपस में भीड़भाड़ देखकर रंगोली और झनक घबरा गए, कैंपस में खड़ी पुलिस की गाड़ी उनकी घबराहट को और बढ़ा रही थी।
   ढेर सारे छात्र छात्राओं का हुजूम आपस में उस लड़की के बारे में ही चर्चा कर रहा था जिसने अपने कमरे में अपनी ही दुपट्टे से फांसी का फंदा बनाकर अपनी जान ले ली थी।
   यह सब सुनकर घबराहट में रंगोली के माथे पर पसीना छलकने लगा। झनक भी परेशान थी उसने रंगोली का हाथ थाम रखा था। उसने धीमे से रंगोली के कान में कुछ कहा…

” यार पता नहीं कौन होगी वह लड़की जिसने  सुसाइड कर लिया?”

” हां झनक मैं तो यह सोच रही हूं कि आखिर उसने सुसाइड किया क्यों?

” यार मुझे लगता है कहीं गौरी मैडम का काम तो नहीं है। वैसे भी मैंने उनके बारे में सुना है कि वह डिप्रेशन में थी। उनका ट्रीटमेंट चल रहा था हो सकता है कोई ऐसी बात हो गई हो कि वह सह नहीं पाए और उन्होंने…!”

” अरे नहीं नहीं ऐसा मत बोल।  चल ना किसी से पूछते हैं कि हुआ क्या है? “

  दोनों आगे बढ़ रहे थे कि आगे खड़ी लेडी पुलिस ने उन लोगों को भी हाथ दिखा कर रोक दिया।

” अभी फिलहाल डेढ़ दो घंटे के लिए हॉस्टल को सील कर दिया गया है। तो आप सब यही बाहर गार्डन में इंतजार कीजिए। डेड बॉडी को यहां से लेकर जाने के बाद जब सिर्फ उस रूम को सील कर दिया जाएगा, तब हॉस्टल आप लोगों के लिए वापस खुल जाएगा। “

उस पुलिस वाले की यह बात सुनकर सभी लोग वही इधर-उधर जगह ढूंढ ढूंढ कर बैठने लगे… कुछ लोग गार्डन में जमीन पर ही बैठ गए कुछ वहां की बेंच में बैठ गए। सभी की जबान पर वैसे ही चर्चा थी कि आखिर मरने वाली कौन थी और उसने ऐसा क्यों किया।

    कुछ इधर-उधर की बातें सुनकर कुछ झनक ने आसपास पूछताछ कर जितना पता किया उसमें उन लोगों को यह पता चला कि मरने वाली लड़की सेकंड ईयर की कोई छात्रा थी। जिसका नाम अदिति था।
  अजीब इत्तेफाक था कि अदिति फर्स्ट ईयर में टॉपर थी। इसके अलावा जब उसने मेडिकल में प्रवेश लिया था तब भी वह सबसे ज्यादा नंबर लाने के कारण  प्रथम वर्ष में अपनी कक्षा की रिप्रेजेंटेटिव भी रह चुकी थी।
   सबके लिए यही आश्चर्य की बात थी कि इतनी होशियार लड़की ने आखिर आत्महत्या का रास्ता क्यों चुना।
    जितने मुहँ उतनी बातें सुनने में आ रहीं थी। झनक का पूरा ध्यान आसपास की बाते सुनने में लगा था…

“अरे किसी से चक्कर था यूनिवर्सिटी के बाहर। , बाद में पता चला कि लड़का शादीशुदा है। तभी से परेशान थी… हो सकता है कुछ  झगड़ा फसाद हुआ हो। बस कर ली आत्महत्या।”

“अच्छा ! अफेयर था क्या? मैंने तो कुछ और ही सुना है? “

“क्या ?”

“,यार इस लड़कीं का किसी लड़के से कैसे अफेयर हो सकता है , मैंने तो सुना है इसकी रूममेट के साथ ही…”

“शट अप !! अब वो तो रही नही कि आकर अपने बारे में कुछ भी कह सके और तुम लोग यहाँ खड़े खड़े उसके कैरेक्टर का पोस्टमार्टम कर रहे हो।हद है।”

  गौरी की घुड़की सुनते ही वो दोनो लड़कियां जो अब तक चीख चीख कर अदिति के बारे में बात कर रहीं थी चुप हो गईं। आखिर गौरी उनकी सीनियर थी। गौरी को आया देख रंगोली के चेहरे पर राहत दिखने लगी।

   सभी बातों में मगन थे की लेडी पुलिस से घिरी अदिति की रूममेट प्राची को साथ लिए पुलिस आगे बढ़ गयी। उसे पुलिस की गाड़ी में बैठाने के बाद पुलिस की वो गाड़ी वहाँ से निकल गयी।

   धीरे धीरे पुलिस की बाकी गाड़ियां भी वहाँ से निकल गईं। अदिति के कमरे को सील कर दिया गया था। उसके आजू बाजू रहने वाली लड़कियों के कमरे भी वार्डन ने खाली करवा कर उन्हें बाकियों के कमरों में शिफ्ट करवा दिया था। उस फ्लोर में रहने वाली लड़कियां थोड़ा डरी भी थीं इसलिए वो सब अपने कमरे छोड़ अपनी सहेलियों के साथ उस रात के लिए शिफ्ट हो गईं।
   रंगोली और झनक भी अपने कमरे में आ गयी। आज मेस में खाना भी अब तक नही बना था, इसलिए  सब अपने कमरे में बैठे बातों में लगी थी।
   सब खाने का इंतज़ार करती उसकी मौत का कारण भी अपने तरीके से सोचने की कोशिश कर रही थी। कि तभी हॉस्टल वार्डन की बुलावे वाली घंटी बजने लगी।
   यह घंटी हर एक फ्लोर पर लगाई गई थी, जो हॉस्टल वार्डन के कमरे से ऑपरेट की जाती थी। वार्डन को जब भी सभी लड़कियों को किसी काम से एक साथ नीचे बुलाना हो तब वह इसे बजा दिया करती थी। घंटे का सायरन समझते ही सभी लड़कियां नीचे की तरफ चल पड़ी।
   रंगोली और झनक भी नीचे जाने लगे , सीढ़ियों पर ही उन्हें सुनाई पड़ा कि यूनिवर्सिटी की सीईओ आई हुई है । शायद इसीलिए सभी लड़कियों को तलब किया गया है।

“अब यह कौन आ गई यार, मुझे तो लगता था हमारे हॉस्टल में वार्डन ही सबसे बड़ी पोस्ट पर है।”

” हॉस्टल में तो हॉस्टल वार्डन ही सबसे बड़ी पोस्ट पर हैं। लेकिन इस पूरी यूनिवर्सिटी में अगर कुछ भी होता है तो उसे देखने के लिए यूनिवर्सिटी की सीईओ मौजूद है जिनका नाम है श्रीमति निरमा प्रेम सिंह चंदेल।
   वैसे तो इस यूनिवर्सिटी में इतने सारे कॉलेज हैं, और सभी के अलग-अलग प्रिंसिपल डीन और बाकी मेंबर हैं लेकिन उन सब के ऊपर यह सीईओ बैठी है। और अपने काम को लेकर इतनी सीरियस है कि किसी भी कॉलेज में कुछ भी हो वह बाकी लोगों के पहुंचने से पहले पहुंच जाती है।   
        मतलब पक्का खडूस बुड्ढी होगी,  जिसने शादी ब्याह कुछ किया नहीं होगा।  घर पर कोई काम नहीं है तो सारा टाइम यहीं यूनिवर्सिटी में पड़ी रहती होगी। “

” हां और क्या ऐसे ही कुछ होगा चल देखते हैं। “

  उनके नीचे पहुंचते में बाकी लड़कियां में पहुंच चुकी थी। सभी वॉर्डन मैडम के कमरे के बाहर के दालान से होते हुए बाहर बगीचे तक फैली हुई थी क्योंकि दालान में इतनी जगह नहीं थी।
  सबके वहां पहुंचते ही वार्डन के कमरे का दरवाजा खुला और निरमा बाहर चली आई। उसे देखते ही रंगोली, झनक की तरफ देखने लग गई।

” यह कहां से तुझे खडूस बुड्ढी लग रही है? मुझे तो 30 से 1 दिन उपर कि नहीं दिख रही। “

” अरे मुझे क्या पता था?  मैं कौन सा इससे पहले मिली हूं? मैंने तो बस जस्ट गैस किया था!”

  निरमा उन सबके सामने बीच में जाकर खड़ी हो गई..

” हेलो गर्ल्स मेरा नाम निरमा है। और जैसा कि आप सभी जानते हैं कि मैं मायानगरी यूनिवर्सिटी की देखरेख करती हूं। आप ये बिल्कुल भी ना सोचे कि मैं आप लोगों को डांटने आई हूं, या किसी भी तरह की कड़क पूछताछ करने आई हूं। देखिए आज से कुछ सालों पहले मैं भी आपकी ही उम्र की थी। मैं भी आपकी तरह ही कॉलेज में पढ़ाई किया करती थी। और इसलिए मैं अच्छी तरह से आप सब की समस्याओं से परिचित हूं। जब हम अपना शहर छोड़कर किसी नये शहर में पढ़ने जाते हैं, हॉस्टल में रहते हैं तो हमें ढेर सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। बहुत बार हमें कोई ना कोई मददगार मिल जाता है जो हमारी समस्याओं को चुटकियों में सुलझा देता है। लेकिन बहुत बार हम बिना किसी मदद के अपनी समस्याओं में खुद उलझे रह जाते हैं। ऐसे समय में हमारे पास दो ही रास्ते बचते हैं, या तो हम अपनी उस समस्या से जी जान से लड़े और उस समस्या पर जीत हासिल करें और या फिर दूसरे रास्ते पर चलते हुए हम अपनी परेशानी से भाग खड़े हो।
  अपनी मुश्किलों से भाग खड़े होना उस वक्त आसान जरूर लगता है लेकिन यह कोई स्थाई समाधान नहीं होता। अगर आप अपनी मुश्किलों को फेस करते हैं, और उनसे लड़ने का तरीका सोचते हैं, उपाय ढूंढते हैं और लड़ पडते हैं तो यकीन मानिए जीत आपकी ही होगी।
   लेकिन बहुत बार हम यह हिम्मत नहीं कर पाते और यहीं से शुरू होता है हमारी हार और थकान का दर्द भरा सफर।
   और बहुत बार यह सफर इस बुरी तरीके से खत्म होता है कि वह हमें भी खत्म कर जाता है। वह लड़की जिसने यहां सुसाइड किया मैं व्यक्तिगत रूप से उसे नहीं जानती। अभी वार्डन मैम ने ही मुझे बताया कि उस लड़की का नाम अदिति था आप लोगों के बीच ही घुली मिली वह इतने समय से रह रही थी।
   उसका रिकॉर्ड मैंने चेक किया है। वह पढ़ने में भी अच्छी थी, समय पर फीस जमा हो जाती थी। उसके नाम से लाइब्रेरी की कुछ बुक भी इशू है। इसका मतलब यह है कि वह अपने भविष्य को लेकर सोचती थी। फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि उसने इतना बड़ा कदम उठा लिया।
   आप सब मुझे यूनिवर्सिटी का पदाधिकारी ना समझ कर अपनी बीच का ही समझे। उम्र में तो जरूर आपसे बड़ी हूं लेकिन दोस्ती उम्र देखकर तो नहीं होती। आप सब मुझे अपना दोस्त समझ सकती हैं, बड़ी दीदी मान सकती हैं। और यही मानकर मुझे सच बता दीजिए। मैं जानती हूं आप में से बहुतों को अदिति के बारे में कुछ भी नहीं मालूम होगा , लेकिन कुछ एक दो लोग तो ऐसे होंगे जो शायद अदिति के बारे में बहुत कुछ जानते हो। मैं एक बार फिर आप सब से रिक्वेस्ट करती हूं, कि आप में से किसी का भी नाम मैं पुलिस में नहीं जाने दूंगी। मैं अपने लेवल पर सारी जांच करना चाहती हूं। आपमें से जो भी आकर मुझे अदिति के बारे में कुछ भी बताएगा, उस जानकारी के बदले मैं आपको यह वादा देती हूं कि आपका नाम कहीं पर भी उछाला नहीं जाएगा। इनफैक्ट अभी भी मैं यहां आप सभी को अपना मोबाइल नंबर दे रही हूं , आप लोग चाहे तो अपना नाम बिना बताए मुझे अदिती से जुड़ी जो भी बात आप जानते हैं, मैसेज कर दीजिएगा। इससे यह होगा कि मुझे भी आपके बारे में कुछ पता नहीं चलेगा तो आप भी निश्चिंत होकर सारी सच्चाई मुझे बता सकते हैं।
   क्योंकि मेरे लिए यह एक बहुत बहुत बड़ी बात है, कि हमारे हॉस्टल की एक लड़की ने इतना बड़ा आत्मघाती कदम उठाया है। अगर उसके इस कदम के पीछे की हकीकत मुझे मालूम चलेगी तो मेरी पूरी कोशिश यही रहेगी कि उसे जिस समस्या का सामना करना पड़ा वह आप में से किसी भी लड़की को ना करना पड़े। इसके अलावा हमारी यूनिवर्सिटी में और भी गर्ल्स हॉस्टल है। मैं उन हर हॉस्टल में यही कोशिश करूंगी कि ऐसी कोई समस्या ना आए, जिससे हमारे यहां की कोई भी एक लड़की ऐसा गलत कदम उठा सके। आप लोग खुद नहीं जानती कि आप सब कितने कीमती हैं। हमारे देश में प्रति 1000 पुरुषों के पीछे 940 महिलाएं हैं। और यह भी पुरानी जनगणना के आंकड़े हैं। हो सकता है अब लड़कियों की संख्या और भी कम हो गई हो। तो मेरा बस यही कहना है कि आप सब अपनी कीमत पहचानिए। आप सब का जीवन अनमोल है।
        यहां से कहीं दूर आपके घर में बैठे आपके अभिभावक चैन की नींद सो रहे हैं , क्योंकि उन्होंने आप सब को हमारे ज़िम्मे किया है। अब अगर यहां आपके साथ कोई भी गड़बड़ होती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी हमारी है।
     मैं अपना नंबर बताने जा रही हूं। आप सब नोट कर लीजिए और आपको जो भी मालूमात हो,अदिति के बारे में, मुझे सारी जानकारी भेज दीजिए धन्यवाद।

निरमा मुड़कर जाने को हुई कि एक लड़की ने उसे आवाज दे दी…-

” मैडम मैं आपसे अकेले में कुछ बात करना चाहती हूं।”

निरमा ने तुरंत उसे इशारे से अपने पास बुलाया और वार्डन  के कमरे में साथ लेकर चली गई…..
 
     इस सब के लगभग 2 घंटे पहले जब निरमा अपने ऑफिस में कुछ काम निपटा रही थी तभी बाहर बड़ी देर से इंतजार कर रहे हैं अभिमन्यु ने दूसरी बार चपरासी के हाथ से अपने नाम की पर्ची अंदर भेजी, और निरमा ने उसे तुरंत अंदर बुलवा लिया….

   अभिमन्यु के साथ ही उसकी चांडाल चौकड़ी भी अंदर दाखिल हो गई निरमा ने  सर उठा कर उन लोगों को देखा और उसके माथे पर बल पड़ गए..

” मेरे पास तो सिर्फ एक ही लड़के के नाम की पर्ची आई थी। आप तो लगभग 12-15 लोग नजर आ रहे हैं! आप में से अभिमन्यु कौन है? “

” जी मैडम मैं हूं अभिमन्यु मिश्रा। “

” बैठिये मिश्रा जी आप ही के बारे में बात करनी है।”

” जी सॉरी मैडम!! लेकिन मैंने बिना किसी वाजिब कारण के आपका बनाया कोई भी नियम नहीं तोड़ा है। मैं आपकी यूनिवर्सिटी के सारे नियम पूरी दक्षता और शुचिता से पालन करता हूं। आप को जिसने भी शिकायत की है वह एक नंबर का कमीन… सॉरी मैडम अब क्या बोलूं वह ऋषि खुराना है ही ऐसा बदतमीज कि उसका नाम लेते ही गालियां निकलने लगती है। लेकिन मैं दिल से बहुत शरीफ और सच्चा ईमानदार किस्म का लड़का हूं। मैं गाली गलौज में बिल्कुल यकीन नहीं करता मैडम, और मैं अपनी पढ़ाई के प्रति भी बहुत ईमानदार हूं। मैं बस आपसे यह कहने आया हूं मैडम कि मेरे अगले सेमेस्टर की एग्जाम की डेट आ गई है मैडम। और अगर आपने मुझे सस्पेंड कर दिया तो मैं कहीं का नहीं रह जाऊंगा। 15 दिन बाद ही मेरे एग्जाम हैं। और आपने कहीं महीने भर के लिए सस्पेंड कर दिया तो मैं त्रिशंकु सा अधर में लटका रह जाऊंगा मैडम…
… बहुत गरीब घर का लड़का हूं मैडम। मेरे रिजल्ट पर मेरे माता-पिता का जीवन यानी उनकी सांसे चलती है। तो अगर आपने सस्पेंड कर दिया तो मेरा पूरा 1 साल खराब हो जाएगा और मुझे दोबारा सेमेस्टर के लिए तैयारी करनी पड़ेगी मैडम। “

अभिमन्यु की बात को बीच में ही  एक आध बार निरमा ने  रोकने की कोशिश की, लेकिन जब वह लगातार बोलता चला गया तो निरमा ने नीचे रखे पेपर पर ध्यान देना शुरू कर दिया। उसे इस तरह दूसरी तरफ देखते पाकर अभिमन्यु को लगा कि निरमा शायद कुछ ज्यादा ही गुस्से में है। वह अपनी कुर्सी से उठकर निरमा की तरफ़ बढ़ कर  उसके पैरों के पास बैठने को ही था कि निरमा अचकचा कर खड़ी हो गई…

” अरे यह क्या कर रहे हैं मिश्रा जी?”

” आपसे माफी मांग रहे हैं मैडम?”

” पर आप माफी किस बात की मांग रहे हो? “

” जी!” अभिमन्यु आश्चर्य से पलट कर अपने दोस्तों को देखने लगा उसने वापस निरमा की तरफ देखा निरमा मुस्कुराकर कुर्सी पर बैठ गई।

”  मेडिकल की तरफ से तुम्हारी शिकायत नहीं बल्कि तुम्हारी तारीफ दर्ज हुई है। जिस लड़के को कल तुमने मेडिकल में एडमिट करवाया था वो असल में डायबिटीज का मरीज निकला। उस लड़के को भी अब तक इस बारे में कोई मालूमात नहीं थे। कल जब वह बेहोश होकर गिरा, उसके बाद उसे लेकर आप मेडिकल की तरफ भागे । जहां डॉक्टरों ने उसका चेक अप करने के बाद यह जाना कि लड़का डायबिटीज रोग से ग्रस्त है। जब डॉक्टरों ने उस लड़के से पूछताछ की तो उसे भी इस बारे में कोई भी जानकारी नहीं थी। लड़के के अभिभावकों को फोन किया गया और पूछा गया तब पता चला कि लड़के के अभिभावक भी इस बात से अनजान थे। यह जानते ही डॉक्टरों ने उस लड़के को बताया कि अगर उसे समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जाता तो वह डायबिटिक कोमा में भी जा सकता था। उसे अस्पताल पहुंचाने का पूरा श्रेय तुम्हें जाता है। उस लड़के को तुम्हारा नाम पता था। और उसने तुम्हारे नाम से एक चिट्ठी तैयार करके मेरे ऑफिस में भेजी। “

निरमा ने  वह चिट्ठी अभिमन्यु की तरफ बढ़ा दी..

” सो मिस्टर मिश्रा !! आपकी ना ही किसी ने शिकायत की है और ना ही आपको मैं रस्टिकेट करने जा रही हूं… बल्कि मैंने सिर्फ आपको अप्रिशिएट करने के लिए अपने ऑफिस में बुलाया था।  इसके साथ ही हमारे यूनिवर्सिटी के यूथ फेस्टिवल में आपको सारी यूनिवर्सिटी के सामने सम्मानित किया जाएगा तो आप खुश हैं मिश्रा जी?”

अभिमन्यु के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी। उसे समझ ही नहीं आया कि वह निरमा से क्या कहे। वह आगे बढ़ कर वापस निरमा के पैर छूने के लिए झुकने वाला था कि निरमा ने दूर से ही हाथ दिखाकर उसे खड़ा कर दिया। निरमा के उठे हुए उस हाथ को पकड़कर अभिमन्यु ने अपने दोनों हाथों में लिया और जोर से हिला दिया। निरमा भी उसके इस बचपने पर मुस्कुरा कर रह गई….

” खूबियां तो बहुत है तुम में अभिमन्यु लेकिन बस एक कमी है बड़बोले बहुत हो। “

शरमा कर अभिमन्यु अपने बालों पर हाथ फेरते नीचे देखने लगा। उसकी चांडाल चौकड़ी भी आपस में हंसने मुस्कुराने लगी जिनकी अब तक सांस थमी हुई थी।

निरमा अपनी कुर्सी पर बैठकर उन लोगों को जाने का इशारा करने वाली थी कि उसकी टेबल पर रखा फोन बजने लग गया।
    उसके फोन उठाते ही दूसरी तरफ से मेडिकल गर्ल्स हॉस्टल की वार्डन का तेज़ और घबराया हुआ स्वर गूंज उठा। वार्डन घबराई हुई सी थी और इसीलिए उनकी आवाज इतनी तेज थी कि सामने खड़े लड़कों को भी साफ-साफ सुनाई दे गया….

” मैडम!!! मैडम बहुत बड़ी गड़बड़ हो गई है… हमारे गर्ल्स हॉस्टल में एक लड़की ने सुसाइड कर लिया है!”

” क्या सुसाइड कर लिया है? कब कितनी देर हुई आपने कब देखा?

” बस मुझे अभी अभी पता चला है, मैडम क्या करूं समझ में नहीं आ रहा है?”

” तुरंत पुलिस को इनफॉर्म कीजिए?”

” लेकिन मैडम पुलिस यूनिवर्सिटी में आएगी तो यूनिवर्सिटी का नाम…

निरमा ने आधे में ही वार्डन की बात काट दी…

” वह सब बाद की बात है, लेकिन अभी लीगल एक्शन के अलावा हमारे पास कोई और चारा नहीं है। आप तुरंत पुलिस को कॉल कीजिए मैं जितनी जल्दी हो सकेगा हॉस्टल की तरफ निकलती हूं।”

   सामने खड़े लड़कों ने भी सारी बात सुन ली थी। और यह सब सुनते हुए अभिमन्यु की सांस अटक गई। उसे लगा कुछ देर पहले उसके सामने चीखती चिल्लाती रोती बिलखती रंगोली ने ही तो कहीं यह कदम नहीं उठा लिया। उसे वैसे भी वह हद दर्जे की कमजोर लड़की नजर आ रही थी।
  उसके सामने भी वो गुस्से में कैसे कांपने लगी थी, जैसे अगर उसे सम्भाला नही गया तो कहीं गिर न पड़े।
अभिमन्यु की आंखों में पानी आ गया। उसने कितना ज्यादा परेशान कर दिया था कि बेचारी उससे लड़ने भिड़ने चली आयी….
…. अब जब लड़ चुकी थी फिर उसे मरने की क्या ज़रूरत पड़ गयी।
वो अपने ख्यालों में गुम था कि निरमा की आवाज़ ने उसे अपने खयालों से बाहर निकाल दिया….

“एक्सक्यूज़ मी बॉयज़!! आई हैव टू गो!!”
 
   और निरमा ने अपने पास रखी पानी की बोतल से पानी की एक घूंट भरने के बाद अपना पर्स उठाया और बाहर निकल गयी।
  अभिमन्यु भी तेजी से उसके पीछे निकल गया। अभिमन्यु के साथ ही बाकी लोग भी बाहर निकल गए,  उनमें से सिर्फ अधीर उसके पीछे भागता चला गया।

    निरमा की गाड़ी के पीछे पैदल ही भागता दौड़ता अभिमन्यु भी मेडिकल पहुंच चुका था,लेकिन उसे बाहर से कुछ नज़र नही आ रहा था।
   आखिर अपने जी को कड़ा कर वो भी अंदर घुस ही गया। आसपास कुछ मेडिको लड़के भी खड़े थे उन्हीं के बीच जाकर वो दोनों भी खड़े हो गए। आजू बाजू खड़े लड़कों से उसने मरने वाली का नाम पता करने की कोशिश भी की लेकिन कुछ मालूम न कर सका।
  उसी समय सारी लड़कियां नीचें चली आयी । वो इतनी थी कि वो अचानक से उनमें रंगोली को ढूंढ नही पा रहा था कि निरमा सभी से कुछ कहने लगी।
   निरमा की बात खत्म होते ही उनमें से एक लड़की ने कुछ कहा जो पीछे जहाँ लड़के खड़े थे वहां तक सुनाई नही पड़ा और निरमा उससे बात करने उसे अपने साथ कमरे में ले गयी।
  अभिमन्यु जहाँ खड़ा था, वहाँ उसे कोई आवाज़ सुनाई तो दे नही रही थी जो वो कुछ समझ पाता। इसलिए उसकी नज़र वहाँ खड़ी लड़कियों में रंगोली को ढूंढती रहीं…

क्रमशः

aparna….



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