
दे किसी चीज को अस्तित्व प्रदान
रचना कार वही है श्रीमान।
रचता है वह अपने अन्तर्मन का द्वंद्व।
विधा कोई गीत गजल या रुबाई
सभी तो हैं कहाते रचनाकार भाई।
रचना कभी भावों की कभी विधानों की।
आत्म कथा,रेखा चित्र या संस्मरण के खजानों की
कहानी नाटक उपन्यास तो
भेंट वार्ता,पत्र साहित्य डायरी
यात्रा वृतांत,आलोचना सभी
अपनी बातें कहते नजर आते हैं
ये रचनाकार ही हैं जी वर्तमान
भूत और असली भविष्य बतलाते हैं।
इतिहास की परतें खोल सच सामने लाते हैं
कल्पना के घोड़े यह तेज बड़े दौड़ाते हैं।
मनोरंजन से आपका दिन सही बनाते हैं।
क्या,क्या बताएं रचना कार जहां
रवि भी न पहुँच पाते देखो
वहाँ अपनी उपस्थिति दर्ज कराते है।
उवस्थिति दर्ज कराते हैं।
रश्मि लता मिश्रा

सुबह सुबह बहुत सी अच्छी कविताएं पढ़ने को मिली है आंटी जी की, रचनाकार में तो खूबियां हैं कि कविता के माध्यम थोड़ी सी ख़ुद की झलकी भी मिली है, वाह 💐👌🙏