अपराजिता -33

“पंकज बाबू आज के बाद किसी लड़की की मर्ज़ी के बिना उसका फोटो खींचे या इधर उधर लगाए तो महादेव की कसम, तुम्हें परलोक भेजने के लिए भी पल भर नहीं सोचेंगे हम… याद रखना.. !”

पंकज के फ़ोन को चकनाचूर कर अखंड वहाँ से निकल गया…
अखंड उस कमरे से निकल रहा था कि सामने से आते एक लड़के से टकराते हुए बचा..
वो लड़का भी अखंड के कंधे से लग कर टकराते हुए घूम गया, उसने हाथ उठा कर माफ़ी मांगने वाले अंदाज़ में अखंड की तरफ देखा, लेकिन खुद में खोये अखंड ने उस लड़के को नहीं देखा और निकल गया..
लेकिन वो लड़का अखंड को वहाँ देखा अचरज में पड़ गया..

वो अंदर पहुंचा और पलंग पर लेटे हुए पंकज के पास पहुँच गया.. पंकज उसे देखते ही उसके सीने से लग गया…

“दीपक भैया.. !आप कब आये गाँव से.. आपको कैसे पता चला ?”
.
“साले तुमको इतना पीटेंगे ना कि सुधर जाओगे.. मेडिकल इसलिए भेजे हैं तुमको कि तुम यहां आकर गुंडागर्दी करो?  हम वहां गांव का खेती खार संभाले हुए अपने छोटे छोटे भाई को पढ़ाना लिखाना चाहते हैं। हम चाहते हैं साले तुम पढ़ लिखकर इंसान बन जाओ। लेकिन तुम रहोगे ढोर के ढोर।
यह क्या बदतमीजी किये हो जो यहां पलंग पर पड़े हुए हो ?
और ये अखंड सिंह परिहार यहां क्या कर रहा था? यह तो बहुत खतरनाक आदमी है !”

“काहे का खतरनाक भैया.. आजकल एक लौंडिया के पीछे पगलाए घूम रहा.. !”

दीपक ने प्यार से पंकज के गाल पर हल्की सी चपत लगा दी..-” तो तुम को क्या करना है बे?  हो जाए किसी के पीछे पगला। तुम अपना पढ़ाई लिखाई करो। हम गांव का जमीन खेत खार बेचकर तुमको यहां पढ़ने भेजे हैं। बढ़िया से डॉक्टर बन जाओ फिर खूब माल कमाना और लड़कियों के चक्कर से ना दूर ही रहो।
हम तो तुमको कभी मना नहीं किये, जो करना है लड़कियों के साथ करो लेकिन ये ज्यादा फोटो वोटो ना लगाया करो..।
सबकी नज़र में आने का क्या ज़रूरत है.. ?
यह प्यार मोहब्बत अच्छी चीज नहीं है बेटा, लड़कियों के साथ उतना ही दोस्ती रखो की तुम्हारा काम निकल जाये, उसके बाद उससे कोई मतलब रखने की ज़रूरत नहीं है.. ।
अरे सुंदर लड़कियों की कमी है क्या तुम्हारे लिए.. लाइन लगेगी हमारे भाई के लिए..
ये प्यार व्यार बहुते फालतू चीज़ है इस पर हमारा कोई विश्वास नहीं है..
अभी जब तक कॉलेज पढ़ रहें हो, फूल ऐश कर लो बचुवा, बाद में एक आध सीधी सादी लड़की देख तुम्हारा ब्याह करवा देंगे..
लेकिन ये फोटो बाजी के चक्करन से दूर रहो.. ! ज्यादा इमोसनल होने का ज़रूरत नहीं है ! समझे ?”

पंकज ने हाँ में सर हिला दिया..
दीपक ने अपने शर्ट के अंदर से नोटों की एक मोटी गड्डी  निकाल कर पंकज के हाथ में रखी और एक बार उसका माथा चूम कर बाहर चला गया..

अखंड भी अस्पताल से निकल रहा था कि सामने से आते फाइनल ईयर के विद्यार्थियों से आमना सामना हो गया..।
सामने से अथर्व और उसकी बेच के दो चार और विद्यार्थी साथ थे..
अथर्व और अखंड एक दूसरे के अगल बगल से होते हुए निकल गए..
अथर्व के एक दोस्त ने अखंड के लिए कुछ बोल दिया जो अथर्व सुन नहीं पाया और इसलिए उसने दुबारा पूछ लिया..

“क्या बोला भाई.. मैं सुन नहीं पाया.. !”

“अरे कुछ नहीं.. ये छुटभैये नेता लोगों का यहीं हाल है… अभी वो फर्स्ट ईयर का एक जूनियर एडमिट है ना हॉस्पिटल में !”

“क्यूँ एडमिट है ? क्या हुआ ?”

“फर्स्ट ईयर की किसी लड़की का चक्कर है.. सुना है लड़की बहुत खूबसूरत है… अब शायद उसका और उसके बैचमेट का अफेयर रहा होगा, उसी लड़की के पीछे एक दो नेता टाइप के लड़के भी है तो बस बेचारे मेडिकल वाले को ही पकड़ कर पीट दिया इन कमबख्तों ने !”

“ये फालतू की दादागिरी अब ख़त्म होनी चाहिए.. ये नेता लोगों का मेडिकल केम्पस में घुसना ही बैन होना चाहिए.. !” अथर्व ने कहा और उसके साथ के लड़के ने उसकी बात पर हामी भर दी…

“अच्छा अथर्व तेरी पैकिंग हो गयी.. आज रात की ट्रेन है, अब लास्ट मोमेंट पे ये मत कह देना की नहीं जा पाउँगा.. !”

“अरे नहीं यार.. कॉलेज का आखिरी साल है, जाना तो है ही.. पैकिंग भी सारी हो गयी है ! शाम सात बजे तुझे तेरे रूम से पिक कर लूंगा, फिर साथ ही स्टेशन के लिए निकलेंगे !”

अथर्व ज्यादा पंचायत में पड़ता नहीं था, और इसीलिए उसने पंकज और उस अनजान लड़की के बारे में कोई पूछताछ नहीं की…
और शायद ये अच्छा ही हुआ.. !
या फिर नहीं.. !

क्रमशः

aparna..

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